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Night Shift करने वालों की नींद कब और कैसे ठीक हो? आयुर्वेदिक तरीका

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

जब पूरी दुनिया सुबह की ताज़ी हवा के साथ अपने दिन की शुरुआत कर रही होती है, तब आप थकी हुई आँखों, भारी सिर और टूटे हुए शरीर के साथ अपने कमरे के पर्दे गिराकर सोने की जद्दोजहद कर रहे होते हैं। नाइट शिफ्ट (Night Shift) में काम करने वालों के लिए दिन के उजाले में सोना किसी युद्ध से कम नहीं होता। लाख कोशिशों के बाद भी वह 8 घंटे की नींद पूरी नहीं हो पाती, और अगर हो भी जाए, तो शरीर उठने के बाद फ्रेश महसूस करने के बजाय और ज़्यादा थका हुआ लगता है।

हम अक्सर सोचते हैं कि वीकेंड पर ज़्यादा सो लेने से या स्ट्रॉन्ग कॉफी पीने से हम इस थकावट को मिटा लेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाकर रात भर जागना शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm) को पूरी तरह तबाह कर देता है। यह केवल नींद की कमी नहीं है, बल्कि आपके नर्वस सिस्टम, मेटाबॉलिज़्म और हॉर्मोन्स का एक भयंकर क्रैश है, जिसे सही समय पर रिपेयर न किया जाए तो यह गंभीर बीमारियों का रूप ले लेता है।

नाइट शिफ्ट शरीर के अंदरूनी क्लॉक (Circadian Rhythm) को कैसे तबाह करती है?

हमारा शरीर सूरज की रोशनी के हिसाब से काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जब आप इस प्राकृतिक चक्र को उल्टा घुमाते हैं, तो शरीर के अंदरूनी सिस्टम्स में भारी गड़बड़ी पैदा हो जाती है:

  • मेलाटोनिन (Melatonin) का उत्पादन रुकना: अंधेरा होने पर दिमाग नींद का हॉर्मोन (मेलाटोनिन) बनाता है। लेकिन नाइट शिफ्ट में स्क्रीन की कृत्रिम रोशनी (Blue Light) के कारण दिमाग इसे दिन समझ लेता है, जिससे गहरी नींद का आना लगभग असंभव हो जाता है।
  • कॉर्टिसोल (Stress Hormone) का हाई होना: रात में जागने के लिए शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए होती है, जिसके लिए वह कॉर्टिसोल रिलीज़ करता है। यह स्ट्रेस हॉर्मोन आपको जगाए तो रखता है, लेकिन मानसिक तनाव और ब्लड प्रेशर को खतरनाक स्तर तक बढ़ा देता है।
  • पाचन तंत्र का शटडाउन (Shutdown): रात के समय आंतें आराम करने के मोड में होती हैं। उस समय खाया गया भारी स्नैक या खाना पचता नहीं है, बल्कि आम (Toxins) बनकर पाचन तंत्र को डैमेज करता है।
  • नसों का सूखना: लगातार जागने से शरीर की रिकवरी (Healing) नहीं हो पाती, जिससे नसों में भयंकर रूखापन आ जाता है और क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) हावी हो जाती है।

दोषों के अनुसार नाइट शिफ्ट की नींद और थकावट के प्रकार

नाइट शिफ्ट का असर हर व्यक्ति पर अलग होता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के बिगड़े हुए दोषों के आधार पर यह स्लीप डिप्राइवेशन (Sleep Deprivation) तीन रूपों में शरीर को तोड़ता है:

  • वात-प्रधान थकावट (Insomnia & Anxiety): रात को जागने से वात दोष सबसे ज़्यादा भड़कता है। इसमें इंसान शिफ्ट खत्म होने के बाद जब सोने जाता है, तो दिमाग में विचारों की आंधी चलती रहती है। आँखें जलती हैं, पैर फड़कते हैं (Restless Leg Syndrome) और वह भयंकर एंग्जायटी (Anxiety) का शिकार हो जाता है।
  • पित्त-प्रधान थकावट (Acidity & Burnout): रात को जागने और बार-बार कॉफी पीने से खून में गर्मी (पित्त) बढ़ जाती है। इसमें इंसान बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है, सीने में भयंकर जलन रहती है और आँखों में आग जैसी चुभन होती है।
  • कफ-प्रधान थकावट (Sluggishness & Weight Gain): दिन में सोने (दिवास्वप्न) से शरीर का कफ दोष बढ़ जाता है। इसमें मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है, जिससे वज़न बढ़ना तेज़ी से शुरू हो जाता है। इंसान 10 घंटे सोने के बाद भी खुद को भारी और सुस्त महसूस करता है।

क्या आपका शरीर भी नींद की कमी के ये खतरनाक अलार्म बजा रहा है?

अगर आप नाइट शिफ्ट कर रहे हैं और आपके शरीर में ये संकेत रोज़ाना दिखाई दे रहे हैं, तो यह केवल सामान्य थकावट नहीं, बल्कि नर्वस सिस्टम के डैमेज होने का इशारा है:

  • भयंकर ब्रेन फॉग (Brain Fog): काम करते समय अचानक फोकस खो देना, सामान्य बातें भूल जाना और दिमाग पर हमेशा एक धुंध सी छाई रहना।
  • लगातार कब्ज़ और पेट फूलना: रात में खाने और दिन में सोने के कारण लगातार रहने वाली कब्ज़  का बन जाना, जो किसी चूर्ण से ठीक नहीं होती।
  • आँखों के नीचे गहरे काले घेरे और रूखापन: आँखों का हमेशा सूजा हुआ (Puffy) लगना, उनमें लालिमा रहना और भयंकर खुश्की महसूस होना।
  • अचानक दिल की धड़कन तेज़ होना (Palpitations): कैफीन और स्ट्रेस के कॉकटेल के कारण अचानक बैठे-बैठे दिल की धड़कन का तेज़ हो जाना और घबराहट होना।

नींद लाने के चक्कर में नाइट शिफ्ट वाले क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

दिन में सोने की जद्दोजहद में और रात को जागने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर के लिए धीमा ज़हर बन जाते हैं:

  • कैफीन (Caffeine) का ओवरडोज़: शिफ्ट के दौरान जागने के लिए 4-5 कप कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स पीना। यह नसों को पूरी तरह सुखा देता है और शिफ्ट खत्म होने के बाद भी दिमाग को अलर्ट मोड में रखता है।
  • स्लीपिंग पिल्स (Sleeping Pills) का सहारा: जब दिन में नींद नहीं आती, तो नींद की गोलियाँ खाना। ये गोलियाँ आपको सुलाती नहीं, बल्कि नसों को सुन्न कर देती हैं, जो ब्रेन डैमेज और डिप्रेशन का कारण बनती हैं।
  • शिफ्ट के तुरंत बाद भारी नाश्ता: सुबह घर लौटकर बहुत भारी और गरिष्ठ नाश्ता करके सो जाना। इससे जठराग्नि बुझ जाती है और पेट में भारी गैस व एसिडिटी बनती है।
  • वीकेंड पर रूटीन बदलना: छुट्टी के दिन अचानक से रात को सोने और दिन में जागने की कोशिश करना। यह शरीर के सुविधाजनक जीवनशैली के क्लॉक को और भी ज़्यादा कंफ्यूज़ कर देता है।

आयुर्वेद नाइट शिफ्ट और रात्रि जागरण के विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर (Shift Work Sleep Disorder) कहता है, आयुर्वेद उसे रात्रि जागरण और दिवास्वप्न के भयंकर दोष-प्रकोप के रूप में समझता है।

  • रात्रि जागरण (Night Waking) से वात प्रकोप: आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि रात्रि जागरण रूक्षं यानी रात को जागना शरीर में भयंकर रूखापन (वात) लाता है। यह वात नसों, जोड़ों और मज्जा धातु को सुखा देता है।
  • दिवास्वप्न (Day Sleep) से कफ और आम: दिन में सोना दिवास्वप्न स्निग्धं यानी कफ बढ़ाने वाला होता है। यह आंतों की गति को धीमा करता है और ज़हरीला आम (Toxins) बनाता है जो स्रोतस को ब्लॉक कर देता है।
  • ओजस (Ojas) का खत्म होना: प्राकृतिक नींद शरीर का पोषण (ओजस) करती है। उल्टे रूटीन से यह ओजस खत्म हो जाता है, जिससे इंसान की इम्युनिटी गिर जाती है और वह बार-बार बीमार पड़ता।

गहरी नींद लाने और वात शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

जब आप प्रकृति के विरुद्ध काम कर रहे हैं, तो आपका भोजन ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। वात और पित्त को शांत रखने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - नसों को शांत और नींद लाने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - नींद उड़ाने और गैस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, अत्यधिक बिस्कुट।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (दिमाग और नसों के लिए अमृत), नारियल तेल। रिफाइंड ऑयल, डालडा, बाज़ार का बार-बार जला हुआ तेल।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, पालक (सोने से पहले हमेशा हल्का भोजन)। कच्चा सलाद (सोने से पहले), भारी बैंगन, कटहल, राजमा।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, मुनक्का, सेब, केला। खट्टे फल (सोने से पहले), बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ (Beverages) सोने से पहले जायफल (Nutmeg) या अश्वगंधा वाला गुनगुना दूध, ताज़ा मट्ठा (शिफ्ट से पहले)। बहुत ज़्यादा कॉफी (खासकर शिफ्ट के आखिरी घंटों में), कोल्ड ड्रिंक्स।

नसों को शांत करने और गहरी नींद लाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी नशे या लत के दिमाग के अलार्म सिस्टम को शांत करके प्राकृतिक रूप से नींद लाते हैं:

  • जटामांसी (Jatamansi): नाइट शिफ्ट के बाद जब दिमाग के विचार बंद नहीं होते, तो जटामांसी (Jatamansi) नर्वस सिस्टम को गहराई से शांत करती है और बिना किसी हैंगओवर के एक गहरी और आरामदायक नींद लाती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): शरीर की भयंकर थकावट दूर करने और स्ट्रेस के हॉर्मोन (कॉर्टिसोल) को गिराने के लिए अश्वगंधा (Ashwagandha) सबसे बेहतरीन एडाप्टोजेन है।
  • ब्राह्मी (Brahmi): लगातार स्क्रीन देखने से जब दिमाग की नसें सुन्न और भारी होने लगती हैं, तो ब्राह्मी (Brahmi) दिमाग को फौलादी शांति और ठंडक प्रदान करती है।
  • तगर (Tagara): यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक स्लीप इंड्यूसर (Sleep Inducer) है। यह मांसपेशियों को रिलैक्स करती है और नींद की क्वालिटी (Deep sleep phase) को बढ़ाती है।
  • त्रिफला (Triphala): शिफ्ट वर्कर्स में पेट की गर्मी और कब्ज़ को दूर करने के लिए रोज़ रात को (या शिफ्ट के बाद) त्रिफला (Triphala) का सेवन करना पेट और दिमाग दोनों को शांत करता है।

शरीर की थकावट मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात दोष बहुत अधिक बढ़ चुका हो और केवल गोलियों से नींद न आ रही हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे के मध्य पर औषधीय तेल या मट्ठे की लगातार धारा गिराने की यह जादुई शिरोधारा (Shirodhara) प्रक्रिया नर्वस सिस्टम के सारे ओवरलोड को तुरंत शांत कर देती है और गहरी नींद लाती है।
  • पादाभ्यंग (Padabhyanga): सोने से पहले पैरों के तलवों की गुनगुने तेल (खासकर गाय के घी या तिल के तेल) से मालिश करना वात को तुरंत नीचे की ओर खींच लेता है और नींद को ट्रिगर करता है।
  • अभ्यंग (Abhyanga): शुद्ध वात-शामक तेलों से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश (Abhyanga massage) शरीर की जकड़न को खत्म करती है और नसों का रूखापन मिटाती है।
  • नस्य (Nasya): नासा हि शिरसो द्वारम्। सोने से पहले नाक में गाय के घी की दो बूंदें डालना (नस्य) सीधे दिमाग को शांत करता है और भयंकर माइग्रेन से बचाता है।

शरीर के प्राकृतिक रूप से रीबूट होने और गहरी नींद आने में कितना समय लगता है?

बिगड़ी हुई बायोलॉजिकल क्लॉक और नर्वस सिस्टम को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। सीने की जलन कम होगी और शिफ्ट के बाद बिस्तर पर लेटते ही विचारों की आंधी शांत होने लगेगी।
  • 3-4 महीने: मेध्य रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होगा। नींद टूटने की समस्या कम होगी और आप 6-7 घंटे की क्वालिटी (Quality) स्लीप ले पाएंगे।
  • 5-6 महीने: आपका ओजस (Ojas) पूरी तरह पोषित हो जाएगा और नर्वस सिस्टम नाइट शिफ्ट के अनुकूल हो जाएगा। आप बिना किसी भारी थकावट या ब्रेन फॉग के अपनी शिफ्ट आसानी से निकाल सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

स्लीप डिप्राइवेशन और नाइट शिफ्ट के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दिमाग को कृत्रिम रूप से सुलाने के लिए स्लीपिंग पिल्स या मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स देना। प्राण वात को शांत करना, जठराग्नि को बढ़ाना और ओजस (प्राकृतिक ऊर्जा) का निर्माण करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल दिमाग के सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) और हॉर्मोन्स की खराबी मानना। इसे वात प्रकोप (रात्रि जागरण), कफ संचय (दिवास्वप्न) और धातुओं के सूखने का संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल केवल कैफीन कम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन पेट साफ होने पर कोई खास ज़ोर नहीं। वात-शामक डाइट, सही स्लीप रूटीन (जैसे ब्लैकआउट कमरे), पादाभ्यंग और नस्य को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर गोलियाँ छोड़ने पर इंसोम्निया (Insomnia) तुरंत दोगुनी ताकत से वापस आ जाता है। नर्वस सिस्टम अंदर से इतना मज़बूत होता है कि शरीर खुद शिफ्ट के अनुसार प्राकृतिक रूप से आराम करना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस थकावट और नींद की समस्या को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • अचानक दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना: अगर बैठे-बैठे सीने में भारीपन हो, पसीना आए और धड़कन बहुत तेज़ या अनियमित महसूस हो (यह हार्ट की समस्या हो सकती है)।
  • सुसाइडल थॉट्स या गंभीर डिप्रेशन: अगर थकावट और नींद की कमी के कारण जीवन के प्रति भारी निराशा, भयंकर एंग्जायटी और खुद को नुकसान पहुँचाने के खतरनाक विचार आने लगें।
  • लगातार चक्कर आना और बेहोशी: नसों की अत्यधिक कमज़ोरी के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ना या खड़े होने पर आँखों के आगे अचानक अंधेरा छा जाना।
  • कई-कई दिनों तक बिल्कुल नींद न आना (Severe Insomnia): अगर 3-4 दिन लगातार बिस्तर पर लेटने के बावजूद एक सेकंड के लिए भी आँख न लगे और दिमाग सुन्न पड़ने लगे।

निष्कर्ष

नाइट शिफ्ट की ड्यूटी आज के समय की एक बहुत बड़ी ज़रूरत बन चुकी है, लेकिन पैसे और करियर के चक्कर में अपनी नींद और नर्वस सिस्टम की बली चढ़ाना कोई समझदारी नहीं है। शिफ्ट के बाद सूरज की रोशनी में घर लौटकर जब आपको नींद नहीं आती, तो यह आपके शरीर का वह अलार्म है जो बता रहा है कि आपका वात दोष भड़क चुका है और मज्जा धातु सूख रही है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना 5 कप कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स और सुबह आकर स्लीपिंग पिल्स से दबाने की कोशिश करते हैं, तो आप अपने शरीर के प्राकृतिक हीलिंग सिस्टम को हमेशा के लिए अपाहिज कर रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। कमरे में भारी अंधेरा (Blackout curtains) रखें, शिफ्ट से लौटकर बहुत भारी खाना न खाएं और पैरों के तलवों में तिल के तेल की मालिश करें। जटामांसी, ब्राह्मी और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और शिरोधारा व पादाभ्यंग थेरेपी से अपने थके हुए दिमाग को गहरी शांति दें। नाइट शिफ्ट को अपनी कमज़ोरी न बनने दें, और अपने शरीर व नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

घर आकर सोने से पहले आपको पचने में बहुत हल्का और वात-शामक भोजन करना चाहिए। मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया या ओट्स बेहतरीन हैं। पराठे, भारी राजमा या तला हुआ जंक फूड खाकर सोने से जठराग्नि बुझ जाएगी और भयंकर गैस बनेगी जो नींद तोड़ देगी।

बिल्कुल। कैफीन शरीर में 6 से 8 घंटे तक रहता है। अगर आप शिफ्ट के आखिरी 3-4 घंटों में कॉफी या चाय पीते हैं, तो वह आपके नर्वस सिस्टम को ब्लॉक कर देगी और जब आप घर जाकर सोना चाहेंगे, तो दिमाग अलर्ट मोड में ही रहेगा।

दिन में सोने के लिए कमरे को रात जैसा बनाना होगा। मोटे ब्लैकआउट पर्दे (Blackout curtains) लगाएँ ताकि एक भी किरण अंदर न आए। कमरे का तापमान हल्का ठंडा रखें (बहुत ज़्यादा ठंडा नहीं) और अगर बाहर का शोर आता है, तो इयरप्लग्स (Earplugs) का इस्तेमाल करें।

वीकेंड पर अचानक से रात में सोना और दिन में जागना आपके शरीर को भयंकर सोशल जेटलैग (Social Jetlag) में डाल देता है। अगर संभव हो, तो अपने शिफ्ट वाले रूटीन (Anchor sleep) को ही बनाए रखें या सोने के समय में केवल 2-3 घंटे का ही बदलाव करें, पूरी तरह उल्टा न करें।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार पैर वात दोष से जुड़े होते हैं। सोने से 15 मिनट पहले पैरों के तलवों (Soles) में गुनगुने गाय के घी या तिल के तेल की मालिश करने से दिमाग की सारी एक्स्ट्रा ऊर्जा नीचे की ओर आ जाती है और गहरी नींद बहुत जल्दी आती है।

हाँ, क्योंकि वे ज़्यादातर दिन में सोते हैं और सूरज की रोशनी नहीं ले पाते। विटामिन डी की कमी से हड्डियाँ कमज़ोर होती हैं और डिप्रेशन बढ़ता है। इसलिए उठने के बाद रोज़ाना कम से कम 20-30 मिनट धूप में बिताना बेहद ज़रूरी है।

मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हॉर्मोन है, लेकिन कृत्रिम गोलियों का रोज़ाना इस्तेमाल शरीर के अपने मेलाटोनिन बनाने की क्षमता को कमज़ोर कर देता है। इसके बजाय, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ (जैसे तगर और जटामांसी) लेना ज़्यादा सुरक्षित है जो शरीर को खुद रिलैक्स करना सिखाती हैं।

एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है, लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है। सोने से ठीक पहले भारी वर्कआउट करने से शरीर का तापमान और कॉर्टिसोल बढ़ जाएगा, जिससे नींद नहीं आएगी। उठने के बाद (शाम को) या शिफ्ट पर जाने से पहले वर्कआउट करना सबसे सही रहता है।

हाँ, लेकिन खाली दूध नहीं। सोने से पहले आधा कप गुनगुने दूध में एक चुटकी जायफल (Nutmeg) और थोड़ी सी हल्दी या अश्वगंधा मिलाकर पीने से यह एक जादुई स्लीप पोर्शन (Sleep Potion) बन जाता है, जो नसों को शांत करता है।

रात को जागना (रात्रि जागरण) और गलत समय पर खाना पित्त और वात दोनों को भड़काता है। आंतों का प्राकृतिक एसिडिटी साइकिल बिगड़ जाता है। इसे रोकने के लिए शिफ्ट के दौरान भारी खाने की जगह फल, मट्ठा और पानी ज़्यादा पिएं और त्रिफला का सेवन करें।

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