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Osteoarthritis vs Rheumatoid Arthritis — आपको कौन सा है? Symptoms से पहचानिए

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 05 May, 2026
  • category-iconUpdated on 05 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5006

सर्दियों या बढ़ती उम्र में जोड़ों का दर्द होना आम बात है, लेकिन ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि उन्हें Osteoarthritis (ऑस्टियोआर्थराइटिस) है या Rheumatoid Arthritis (रुमेटाइड आर्थराइटिस)। सही जानकारी के अभाव में लोग सालों तक ग़लत पेनकिलर और स्टेरॉयड की गोलियाँ खाते रहते हैं। ये दवाइयाँ कुछ समय के लिए दर्द को सुन्न ज़रूर कर देती हैं, लेकिन बीमारी की असली जड़ को ख़त्म नहीं करतीं। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता है और हड्डियाँ अंदर से कमज़ोर हो जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, ये दोनों बीमारियाँ बिल्कुल अलग हैं—एक घिसने (वात) की बीमारी है, तो दूसरी ख़राब पाचन और टॉक्सिन्स (आमवात) की। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बीमारी की जड़ को पहचानकर जोड़ों को साफ़ और मज़बूत बनाता है, ताकि आप बिना दर्द के चल सकें।

Osteoarthritis और Rheumatoid Arthritis की ज़रूरत और इनका असली रूप क्या है?

आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि जोड़ों के दर्द के ये दोनों प्रकार पूरी तरह से अलग हैं और इनका इलाज भी अलग होता है।

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis - OA): यह 'घिसने' (Wear and Tear) की बीमारी है। बढ़ती उम्र या भारी वज़न के कारण जोड़ों के बीच की गद्दी (Cartilage) घिस जाती है और हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं। आयुर्वेद में इसे 'संधिगत वात' कहा जाता है, जहाँ अत्यधिक वात दोष जोड़ों की चिकनाई को सुखा देता है।
  • रुमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis - RA): यह एक 'ऑटोइम्यून' (Autoimmune) बीमारी है। इसमें आपकी अपनी ही इम्युनिटी भ्रमित होकर जोड़ों की परत (Synovium) पर हमला कर देती है। आयुर्वेद में इसे 'आमवात' कहते हैं, जहाँ ख़राब पाचन से बना 'आम' (टॉक्सिन्स) वात के साथ मिलकर जोड़ों में सूजन और तेज़ दर्द पैदा करता है।
  • Symptoms से पहचानिए: आपको Osteoarthritis है या Rheumatoid Arthritis?

इन दोनों बीमारियों के लक्षण बिल्कुल अलग होते हैं। शरीर द्वारा दिए जाने वाले इन भयंकर लक्षणों से आप अपनी बीमारी को पहचान सकते हैं:

Osteoarthritis (OA) के लक्षण:

  • दर्द का समय: काम करने, चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर दर्द बढ़ता है, और आराम करने पर कम हो जाता है।
  • सुबह की जकड़न: सुबह उठने पर जोड़ों में जकड़न होती है, लेकिन 15 से 30 मिनट चलने-फिरने के बाद यह जकड़न खुल जाती है।
  • असममित (Asymmetrical): यह अक्सर शरीर के एक हिस्से से शुरू होता है (जैसे पहले सिर्फ़ दाएँ घुटने में दर्द होना)।
  • आवाज़ आना: उठते-बैठते समय जोड़ों से कड़कड़ या कट-कट (Crepitus) की आवाज़ आना।

Rheumatoid Arthritis (RA) के लक्षण:

  • दर्द का समय: इसमें आराम करने या लेटने से दर्द बढ़ता है, और थोड़ा काम करने या सिकाई करने से आराम मिलता है।
  • सुबह की जकड़न: सुबह उठने पर शरीर इतना जकड़ जाता है कि हाथ-पैर मोड़ने में 1 से 2 घंटे या उससे भी ज़्यादा का समय लगता है।
  • सममित (Symmetrical): यह दोनों हाथों की उँगलियाँ, दोनों कलाइयों या दोनों पैरों में एक साथ (Symmetrical) होता है।
  • सूजन और बुखार: जोड़ों में भयंकर सूजन, लालिमा, गर्मी (छूने पर गर्म लगना) और साथ में थकावट व हल्का बुखार रहना।

जोड़ों के कमज़ोर होने और दर्द भड़कने के असली कारण

रोज़ाना जोड़ों में भयंकर दर्द होने के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • पाचक अग्नि का मंद होना (RA में): ख़राब खान-पान से जब खाना ठीक से नहीं पचता, तो वह 'आम' (Toxins) बन जाता है। यह आम ख़ून के ज़रिए जोड़ों में जाकर जम जाता है और भयंकर सूजन (आमवात) पैदा करता है।
  • वात दोष का भड़कना (OA में): अत्यधिक रूखा खाना खाने, ज़्यादा व्यायाम करने या बढ़ती उम्र के कारण शरीर में वात (वायु) तेज़ी से बढ़ता है, जो कार्टिलेज की चिकनाई को पूरी तरह सुखा देता है।
  • वज़न का ज़्यादा होना: शरीर का भारी वज़न घुटनों (Knees) और कूल्हों (Hips) पर भयंकर दबाव डालता है, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस का ख़तरा दोगुना हो जाता है।
  • विरुद्ध आहार: ठंडी और भारी चीज़ें एक साथ खाने से इम्युनिटी कमज़ोर होती है और रुमेटाइड आर्थराइटिस भड़क उठता है।

गठिया और कमज़ोर हड्डियों को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

अगर सही समय पर यह पहचान कर इलाज न किया जाए कि आपको कौन सा आर्थराइटिस है, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • अंगों का टेढ़ा होना (Joint Deformity): रुमेटाइड आर्थराइटिस (RA) में उँगलियाँ और हाथ-पैर मुड़कर हमेशा के लिए टेढ़े हो सकते हैं (Swan neck deformity)।
  • घुटना रिप्लेसमेंट (Knee Replacement): ऑस्टियोआर्थराइटिस (OA) में गद्दी पूरी तरह घिस जाने पर सर्जरी ही एकमात्र उपाय बचता है।
  • अंदरूनी अंगों का डैमेज: RA एक सिस्टमिक (Systemic) बीमारी है। अगर इसे न रोका गया, तो यह आँखों, फेफड़ों और हृदय को भी डैमेज कर सकती है।

Osteoarthritis और Rheumatoid Arthritis पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में इन दोनों बीमारियों के इलाज का सिद्धांत बिल्कुल विपरीत है।अगर आपको ऑस्टियोआर्थराइटिस (संधिगत वात) है, तो जोड़ों में रूखापन है। आयुर्वेद यहाँ 'बृहण' (पोषण) और 'स्नेहन' (तेल/चिकनाई) चिकित्सा करता है ताकि सूखी हुई गद्दी को दोबारा जीवन मिले।

लेकिन अगर आपको रुमेटाइड आर्थराइटिस (आमवात) है, तो जोड़ों में पहले से ही 'आम' (कच्चा रस/सूजन) भरा हुआ है। अगर यहाँ तेल की मालिश कर दी, तो दर्द भयंकर रूप से बढ़ जाएगा। इसलिए आयुर्वेद यहाँ 'लङ्घन' (उपवास), रूखी सिकाई (बालू की पोटली) और 'आम' को पचाने वाली (पाचन) चिकित्सा करता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि दर्द की असली वजह वात है या आमवात।

जीवा आयुर्वेद जोड़ों की ताक़त वापस लाने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: दर्द के समय, जकड़न की अवधि और जोड़ों की सूजन की बारीकी से जाँच की जाती है ताकि OA और RA में सटीक फ़र्क किया जा सके।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ द्वारा ली जा रही पेनकिलर गोलियाँ या स्टेरॉयड का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित दोषों को पकड़ने के बाद ही 'आम' को काटने या जोड़ों को पोषण देने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

जोड़ों को प्राकृतिक रूप से मज़बूत बनाने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में जोड़ों के दर्द को जड़ से मिटाने के लिए बीमारी के अनुसार जड़ी-बूटियाँ दी जाती हैं:

  • शल्लकी (Shallaki) - OA के लिए: यह घुटनों की घिसी हुई गद्दी (Cartilage) को पोषण देती है और हड्डियों की रगड़ व वात को शांत करती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha) - OA के लिए: यह माँसपेशियों को प्राकृतिक ताक़त देती है और नसों के दर्द को कम करती है।
  • सोंठ (Sunthi) - RA के लिए: यह बेहतरीन आम-पाचक है। यह शरीर में जमे हुए टॉक्सिन्स को पिघलाती है और भयंकर सूजन को ख़त्म करती है।
  • एरंड (Castor Oil) - RA के लिए: 'आमवात' के लिए एरंड तेल सबसे अचूक औषधि है। यह आँतों से गंदगी साफ़ कर दर्द को जड़ से निकालता है।

जमे हुए दर्द और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, जोड़ों को साफ़ करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • जानु बस्ती (Janu Basti) - OA के लिए: घुटनों के दर्द के लिए यह एक अचूक चिकित्सा है। घुटने के ऊपर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें हल्का गर्म औषधीय तेल भरा जाता है, जो वात को शांत कर गद्दी में चिकनाई भरता है।
  • वालुका स्वेद (Valuka Sweda) - RA के लिए: रुमेटाइड आर्थराइटिस में तेल की मालिश मना होती है। इसमें गर्म रेत (बालू) की पोटली से जोड़ों की सिकाई की जाती है, जो 'आम' (सूजन) को तुरंत सोख लेती है।
  • विरेचन (Virechana): आँतों और लिवर से 'आम' को बाहर निकालने के लिए औषधीय जड़ी-बूटियाँ देकर पेट साफ़ कराया जाता है।

हड्डियों को बचाने वाला शुद्ध आहार: क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि OA और RA में आहार बिल्कुल अलग होता है:

Osteoarthritis (OA) में क्या खाएँ?

  • चिकनाई और पोषण: शुद्ध गाय का घी, दूध, बादाम और अखरोट का सेवन करें। ये शरीर के वात (रूखेपन) को ख़त्म करते हैं।
  • क्या न खाएँ: रूखा और बासी खाना, कोल्ड ड्रिंक, चना और राजमा बिल्कुल बंद कर दें।

Rheumatoid Arthritis (RA) में क्या खाएँ?

  • हल्का और सुपाच्य भोजन: पुरानी मूंग की दाल, लौकी और पेठा खाएँ। लहसुन और अदरक का प्रयोग रोज़ाना करें। 'लङ्घन' (हल्का उपवास) करें ताकि 'आम' पच सके।
  • क्या न खाएँ: दही, दूध, पनीर, और ठंडी चीज़ें बिल्कुल न खाएँ। ये 'आम' और सूजन को भयंकर रूप से बढ़ाती हैं।

जीवा आयुर्वेद में आर्थराइटिस के रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ़ ऊपर-ऊपर से दर्द पूछकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, सुबह की जकड़न और दर्द बढ़ने के समय को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल की जा रही भारी गोलियों (Painkillers/Steroids) की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, तनाव और पेट साफ़ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर यह तय किया जाता है कि दर्द 'वात' का है या 'आमवात' का।

जोड़ों के इलाज के लिए जीवा आयुर्वेद से कैसे जुड़ें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में आर्थराइटिस का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर दर्द की शुरुआत है, तो सही आहार और दवाइयों से 4 से 6 हफ्तों में ही सूजन और जकड़न कम होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर RA में उँगलियाँ मुड़ने लगी हैं या OA में गद्दी घिस चुकी है, तो इम्युनिटी को 'रीसेट' होने और जोड़ों में चिकनाई लौटने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और बीमारी के अनुसार परहेज़ का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में स्टेरॉयड और पेनकिलर के बिना भी वह सामान्य जीवन जी सकता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य पेनकिलर्स (NSAIDs) और स्टेरॉयड से दर्द व सूजन को दबाना OA में जोड़ों की चिकनाई बढ़ाना और RA में ‘आम’ नष्ट कर जड़ से सुधार करना
नज़रिया समस्या को केवल जोड़ों की बीमारी (OA/RA) मानना रोग के कारण (वात, आम, अग्नि) को समझकर संपूर्ण दृष्टिकोण से देखना
उपचार तरीका दवाओं से दर्द के सिग्नल को रोकना और सूजन कम करना जड़ी-बूटियों से लुब्रिकेशन बढ़ाना, अग्नि सुधारना और डिटॉक्स करना
डाइट और लाइफस्टाइल दवाइयों पर निर्भरता, जीवनशैली पर सीमित ध्यान वात-शामक डाइट, सही दिनचर्या और प्राकृतिक उपचार पर ज़ोर
लंबा असर दवा बंद होते ही दर्द वापस, किडनी व लिवर पर असर का खतरा शरीर मज़बूत बनता है, प्राकृतिक राहत और दीर्घकालिक सुधार

लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

जोड़ों के दर्द के संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • सुबह उठने पर जोड़ों में 1 घंटे से ज़्यादा भयंकर जकड़न महसूस हो।
  • जोड़ों में दर्द के साथ तेज़ गर्मी, लालिमा और सूजन दिखे।
  • थोड़ा सा चलने पर भी घुटनों से कट-कट की आवाज़ आए और दर्द बर्दाश्त के बाहर हो जाए।
  • आराम करने या लेटने के बावजूद दर्द कम न हो रहा हो और हल्का बुखार बना रहे।

निष्कर्ष:

 आयुर्वेद के हिसाब से जोड़ों का दर्द सिर्फ़ एक बीमारी नहीं है। यह या तो वात के भड़कने से गद्दी घिसने (Osteoarthritis) की समस्या है या फिर शरीर में बने 'आम' (टॉक्सिन्स) के कारण इम्युनिटी के भ्रमित (Rheumatoid Arthritis) होने का परिणाम है। बिना बीमारी को पहचाने सिर्फ़ बाहर से गोलियाँ खाने या ग़लत तरीके से मालिश करने से दर्द कुछ देर के लिए दब जाता है लेकिन शरीर अंदर से कमज़ोर होता जाता है। इलाज में बीमारी की सही पहचान, शरीर की शुद्धि, शल्लकी व सोंठ जैसी जड़ी-बूटियाँ और सही आहार सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, जिससे आपके जोड़ों की ताक़त बिना किसी पेनकिलर के जीवन भर बनी रहे।

FAQs

बिल्कुल नहीं! RA (आमवात) में जोड़ों में पहले से ही सूजन और 'आम' भरा होता है। ऐसे में तेल की मालिश करने से सूजन और दर्द भयंकर रूप से बढ़ जाता है। इसमें सूखी सिकाई (वालुका स्वेद) करनी चाहिए।

अगर कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुका है तो उसे दोबारा 100% वापस लाना मुश्किल है, लेकिन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (शल्लकी) और जानु बस्ती से दर्द को ख़त्म कर सर्जरी (Knee Replacement) को टाला जा सकता है और आप आराम से चल-फिर सकते हैं।

इसमें जेनेटिक्स की भूमिका हो सकती है, लेकिन सिर्फ़ जीन होने से बीमारी नहीं होती। आपका ख़राब खान-पान (विरुद्ध आहार) और कमज़ोर पाचक अग्नि इस जीन को 'ट्रिगर' करने का मुख्य कारण है।

यह ऑस्टियोआर्थराइटिस का मुख्य लक्षण है (Crepitus)। जब जोड़ों के बीच की चिकनाई (Synovial fluid) सूख जाती है, तो वात बढ़ने के कारण हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं और कट-कट की आवाज़ आती है।

बिल्कुल नहीं। दही, पनीर और भारी डेयरी उत्पाद शरीर में भयंकर रूप से 'आम' (Toxins) और सूजन बढ़ाते हैं। RA के मरीज़ों को इनसे सख़्त परहेज़ करना चाहिए।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों का मौसम 'शीत' (ठंडा) और 'रुक्ष' (रूखा) होता है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से वात दोष को भड़काता है, जिससे OA और RA दोनों के दर्द में तेज़ी आ जाती है।

लगातार पेनकिलर खाने से शरीर की प्राकृतिक दर्द सहने की क्षमता ख़त्म हो जाती है और यह पेट में एसिडिटी बनाकर कैल्शियम के अवशोषण (Absorption) को रोकता है, जिससे हड्डियाँ कमज़ोर होती हैं।

OA (घिसने वाली बीमारी) में काम करने या चलने से दर्द बढ़ता है और आराम करने से कम होता है। जबकि RA (आमवात) में आराम करने या रात में लेटने पर दर्द बढ़ता है और चलने-फिरने से जकड़न खुलती है।

हाँ, आयुर्वेद में RA के शुरुआती इलाज में 'लङ्घन' (हल्का उपवास) को सबसे अच्छी चिकित्सा माना गया है। यह शरीर की पाचक अग्नि को तेज़ कर जमे हुए 'आम' को पचाने में मदद करता है।

एकदम से एलोपैथिक दवाइयाँ (ख़ासकर स्टेरॉयड) कभी बंद नहीं करनी चाहिए। आयुर्वेदिक इलाज के साथ डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे एलोपैथिक डोज़ को कम (Taper) किया जाता है जब तक शरीर ख़ुद मज़बूत न हो जाए।

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