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PCOD और हार्मोनल असंतुलन: दवा नहीं, अपनी 'प्रकृति' (Prakriti) पहचान कर करें जड़ से इलाज।

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 15 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 17 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5063

आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में महिलाओं के स्वास्थ्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती PCOD और हार्मोनल असंतुलन बनकर उभरी है यह समस्या केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित करती है अक्सर इसे केवल पीरियड्स की अनियमितता समझकर छोड़ दिया जाता है लेकिन वास्तव में यह शरीर के भीतर छिपे एक बड़े मेटाबॉलिक विकार का संकेत है। समय पर इसका इलाज करना इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह आगे चलकर बांझपन डायबिटीज और हृदय रोगों का कारण बन सकता है। आयुर्वेद में इसका समाधान केवल लक्षणों को दबाना नहीं बल्कि महिला की प्रकृति को समझकर हार्मोन को जड़ से संतुलित करना है।

PCOD क्या होता है?

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो PCOD एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिला के अंडाशय अपरिपक्व या आधे पके हुए अंडे बहुत ज़्यादा मात्रा में पैदा करने लगते हैं। वक़्त के साथ ये अंडे छोटी-छोटी थैलियों यानी सिस्ट का रूप ले लेते हैं। इसके कारण अंडाशय का आकार बढ़ जाता है और शरीर में पुरुष हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है। सरल शब्दों में यह शरीर के भीतर हार्मोन्स का एक ऐसा ट्रैफ़िक जाम है जो प्रजनन तंत्र की स्वाभाविक गति को रोक देता है।

PCOD और हार्मोनल गड़बड़ी के प्रकार

PCOD और इससे जुड़ी समस्याओं को उनके मुख्य लक्षणों और कारणों के आधार पर इन पाँच श्रेणियों में समझा जा सकता है

इंसुलिन रेजिस्टेंस PCOD  यह सबसे आम प्रकार है जहाँ शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता जिससे शुगर लेवल और वज़न बढ़ने लगता है।

इन्फ्लेमेटरी PCOD  इसमें शरीर के भीतर पुरानी सूजन बनी रहती है जो हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देती है।

पिल-इंड्यूस्ड PCOD  गर्भनिरोधक गोलियों के लंबे वक़्त तक इस्तेमाल के बाद जब उन्हें छोड़ा जाता है तो शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा हो सकता है।

एड्रेनल PCOD  यह मुख्य रूप से बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव के कारण होता है जो एड्रेनल ग्रंथियों को प्रभावित करता है।

छिपा हुआ PCOD इसमें ऊपरी लक्षण कम दिखते हैं लेकिन थायराइड या विटामिन-डी की कमी के कारण हार्मोन बिगड़े रहते हैं।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

अनियमित पीरियड्स मासिक धर्म का समय पर न आना बहुत कम आना या कई महीनों तक गायब रहना।

चेहरे पर अनचाहे बाल शरीर और चेहरे पर पुरुषों की तरह सख़्त बालों का उगना ।

अचानक वज़न बढ़ना  विशेष रूप से पेट के निचले हिस्से के आसपास चर्बी का तेज़ी से जमा होना जिसे कम करना मुश्किल होता है।

गंभीर मुँहासे और झड़ते बाल  त्वचा का बहुत ज़्यादा तैलीय होना बार-बार दाने निकलना और सिर के बालों का पतला होना।

मूड में बदलाव बिना किसी बड़े कारण के चिड़चिड़ापन उदासी थकान और बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव महसूस होना।

PCOD होने के मुख्य कारण

खराब जीवनशैली देर रात तक जागना शारीरिक मेहनत की कमी और बैठने वाली नौकरी हार्मोनल चक्र को बाधित करती है।

असंतुलित खान-पान बहुत ज़्यादा मैदा चीनी और डिब्बाबंद भोजन का सेवन शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाता है।

मानसिक तनाव आज की ज़िंदगी का तनाव कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है जो प्रजनन हार्मोन्स का संतुलन बिगाड़ देता है।

पर्यावरणीय विषाक्त तत्व प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल और प्रदूषण शरीर के भीतर एंडोक्राइन सिस्टम को नुकसान पहुँचाते हैं।

आनुवंशिकता यदि परिवार में माँ या बहन को यह समस्या रही है तो अगली पीढ़ी में इसका ख़तरा अधिक होता है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और जटिलताएं

जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

मोटापा शरीर में जमा अतिरिक्त वसा हार्मोन्स के उत्पादन को अनियंत्रित कर देती है।

व्यायाम की कमी शारीरिक सक्रियता न होने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है।

नींद की कमी रात में पर्याप्त नींद न लेना हार्मोनल हीलिंग की प्रक्रिया को रोक देता है।

प्रसंस्कृत भोजन पैकेट बंद चिप्स कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फूड का ज़्यादा सेवन।

विटामिन की कमी विशेष रूप से विटामिन-डी और बी-12 की कमी PCOD के जोखिम को बढ़ाती है।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

बांझपन (Infertility) अंडे समय पर रिलीज़ न होने के कारण गर्भधारण करने में बहुत ज़्यादा परेशानी आती है।

टाइप-2 डायबिटीज  इंसुलिन के बिगड़े संतुलन के कारण भविष्य में शुगर होने का ख़तरा रहता है।

हृदय रोग  PCOD के कारण कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जो दिल के लिए नुकसानदेह है।

गर्भाशय का कैंसर लंबे वक़्त तक पीरियड्स न आने से गर्भाशय की परत मोटी हो सकती है जो जोखिम बढ़ाती है।

गहरा अवसाद हार्मोनल उतार-चढ़ाव महिला को मानसिक रूप से बहुत ज़्यादा कमज़ोर और उदास बना सकते हैं।

बीमारी की जाँच कैसे की जाती है?

पेल्विक अल्ट्रासाउंड  अंडाशय के आकार और उसमें मौजूद सिस्ट की संख्या की जाँच करने के लिए।

ब्लड टेस्ट (Hormone Profile) शरीर में टेस्टोस्टेरोन एण्ड्रोजन और इंसुलिन के स्तर को मापने के लिए।

थायराइड टेस्ट यह सुनिश्चित करने के लिए कि हार्मोन की गड़बड़ी थायराइड ग्रंथि के कारण तो नहीं है।

ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट यह देखने के लिए कि शरीर चीनी को कैसे पचा रहा है।

शारीरिक परीक्षणडॉक्टर वज़न बीपी और त्वचा पर अनचाहे बालों की जाँच करते हैं।

आयुर्वेद में PCOD दोषों का असंतुलन

आयुर्वेद PCOD को आर्तव वह स्रोत (प्रजनन तंत्र) के विकार के रूप में देखता है। इसमें मुख्य रूप से कफ और वात दोष बिगड़ जाते हैं

 कफ और आम बहुत ज़्यादा कफ बनने से शरीर में आम (टॉक्सिन्स) जमा होते हैं जो अंडाशय के मार्ग को अवरुद्ध कर देते हैं और सिस्ट बनाते हैं।

वात और गति वात दोष पीरियड्स की गति को नियंत्रित करता है। जब वात बिगड़ता है तो पीरियड्स अनियमित या दर्दनाक हो जाते हैं।

अग्नि मांद्य  आयुर्वेद मानता है कि जब पाचन अग्नि कमज़ोर होती है तो शरीर हार्मोन्स का सही निर्माण नहीं कर पाता। जड़ से इलाज के लिए इस अग्नि को प्रज्वलित करना बेहद ज़रूरी है।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम श्वेता है और मैं नोएडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मुझे साल 2006 से पीसीओडी की शिकायत थी जिसके लिए मैंने काफी सालों तक एलोपैथिक ट्रीटमेंट किया लेकिन मुझे कोई रिजल्ट नहीं मिला। फिर मैंने होम्योपैथिक ट्रीटमेंट भी लिया पर उससे भी कोई आराम नहीं मिला। 

तभी मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेदा का प्रोग्राम देखा। उसके बाद मैं जीवा के नोएडा ब्रांच में गई जहाँ मेरी मुलाकात डॉक्टर अभिलाषा तिवारी से हुई। उन्होंने मेरी प्रॉब्लम को बहुत अच्छे से समझा और मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया।

मैंने साल 2017 से यह ट्रीटमेंट शुरू किया था। डेढ़ साल तक इलाज लेने के बाद मुझे पीसीओडी में बहुत अच्छा सुधार और रिजल्ट मिला। पीसीओडी का ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद मैंने इनफर्टिलिटी के लिए ट्रीटमेंट शुरू किया। 

जीवा के इलाज की मदद से आज मेरा एक छोटा सा बेटा है। मैं इस सबके लिए डॉक्टर अभिलाषा तिवारी और पूरे जीवा परिवार को धन्यवाद करना चाहती हूँ।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

विशेषता आधुनिक इलाज आयुर्वेदिक इलाज 
दृष्टिकोण मुख्य रूप से गर्भनिरोधक गोलियों से पीरियड्स लाने पर ध्यान दिया जाता है। यह शरीर की प्रकृति को समझकर जड़ से हार्मोन संतुलित करने पर काम करता है।
दुष्प्रभाव हार्मोनल गोलियों से वज़न बढ़ना और मूड स्विंग्स जैसे नुकसान हो सकते हैं। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर आधारित अपेक्षाकृत सुरक्षित और संतुलित उपचार।
नतीजे दवा बंद करते ही समस्या अक्सर दोबारा लौट आती है। जीवनशैली में बदलाव के साथ इसके नतीजे स्थायी और अधिक प्रभावी होते हैं।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  • यदि 3 महीने से ज़्यादा वक़्त बीत गया हो और पीरियड्स न आए हों।
  • यदि अचानक चेहरे पर बहुत सख़्त बाल उगने लगें।
  • यदि शादी के लंबे वक़्त बाद भी गर्भधारण करने में समस्या आ रही हो।
  • यदि पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द या बहुत ज़्यादा रक्तस्राव हो।

निष्कर्ष

PCOD कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे ठीक न किया जा सके। यह आपके शरीर का एक संकेत है कि उसे अनुशासन और सही पोषण की ज़रूरत है। अपनी प्रकृति को पहचानें और केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं। आयुर्वेद का होलिस्टिक हीलिंग नज़रिया आपको न केवल PCOD से मुक्ति दिलाएगा बल्कि आपकी पूरी ज़िंदगी को नई ऊर्जा और स्वास्थ्य से भर देगा।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, केवल 5-10% वज़न कम करने से भी हार्मोन्स में ज़्यादा सुधार दिखता है।

बिल्कुल, सही आयुर्वेदिक उपचार से ओव्यूलेशन ठीक हो जाता है और गर्भधारण संभव है।

हाँ, यह इंसुलिन के स्तर को सामान्य रखने में बहुत मदद करती है।

हाँ, कपालभाति और सूर्य नमस्कार हार्मोनल संतुलन के लिए बहुत बेहतर हैं।

PCOS, PCOD का थोड़ा ज़्यादा गंभीर और मेटाबॉलिक रूप है, लेकिन दोनों का आधार हार्मोनल ही है।

हाँ, बढ़ा हुआ एंड्रोजन हार्मोन त्वचा को तैलीय बनाकर मुँहासे पैदा करता है।

हाँ, रात का भोजन जल्दी करने से पाचन अग्नि मज़बूत होती है।

बेहतर नतीजों के लिए प्रसंस्कृत भोजन से बचना बेहद ज़रूरी है।

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