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Rice vs Roti: रात के खाने में कौन सा digestion और sugar के लिए बेहतर है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हर घर में रात के खाने के समय एक सवाल ज़रूर उठता है, "आज रात को क्या बनेगा, चावल या रोटी?" किसी को लगता है कि रात में चावल खाने से वज़न बढ़ जाएगा और पेट बाहर आ जाएगा, तो कोई कहता है कि रात में रोटी खाने से गैस बन जाती है और पेट भारी रहता है। आखिर सच क्या है?

सच तो यह है कि कोई भी एक चीज़ सबके लिए सही या गलत नहीं हो सकती। आपका शरीर कैसा है, आपका पाचन कैसा है और आप खाने को किस चीज़ के साथ खा रहे हैं, यह सब मिलकर तय करता है कि आपके लिए चावल सही है या रोटी। 

क्या रात का खाना सच में हमारे पाचन और शुगर पर असर डालता है?

बिल्कुल डालता है! दिन भर आप काम करते हैं, भागदौड़ करते हैं, तो शरीर की मशीन तेज़ चलती है। लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है और रात होती है, शरीर की यह मशीन सुस्त होने लगती है। शरीर को पता होता है कि अब सोने का समय आ रहा है, इसलिए वह आराम की तैयारी करने लगता है।

अगर आप इस समय बहुत भारी, तला-भुना या बहुत सारा खाना खा लेंगे, तो शरीर को उसे पचाने में बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। आपकी नींद खराब होगी, सुबह उठकर पेट भारी लगेगा और गैस बनेगी। इसके अलावा, रात में हम कोई मेहनत वाला काम नहीं करते, इसलिए अगर हम बहुत ज़्यादा ऐसा खाना खा लें जो शरीर में तुरंत शुगर बनाता है, तो वह शुगर पचने की बजाय शरीर में जमा होने लगती है। इसीलिए रात का खाना सबसे ज़्यादा ध्यान से चुनना चाहिए।

चावल और रोटी में असली फर्क क्या है?

चावल में क्या होता है? सफेद चावल में सबसे ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट (ताकत देने वाला हिस्सा) होता है। इसमें फैट (चिकनाई) और फाइबर (रेशा) बहुत कम होते हैं। फाइबर कम होने की वजह से चावल पेट में बहुत जल्दी घुल जाता है और पच जाता है। अगर आप ब्राउन राइस खाते हैं, तो उसमें थोड़ा फाइबर मिल जाता है, लेकिन सफेद चावल एकदम हल्का होता है।

रोटी में क्या होता है? गेहूं की रोटी में कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ अच्छा खासा फाइबर (रेशा) और थोड़ा प्रोटीन भी होता है। यह फाइबर एक स्पंज की तरह काम करता है। यह पेट में जाकर पचने में समय लेता है। इसीलिए जब आप रोटी खाते हैं, तो आपको बहुत देर तक भूख नहीं लगती और पेट भरा-भरा सा महसूस होता है।

पाचन के लिए क्या बेहतर है?

यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है, लेकिन इसका जवाब आपके पेट की ताकत पर निर्भर करता है।

किन्हें रात में चावल खाना चाहिए? अगर आपका पाचन बहुत कमज़ोर है, आपको अक्सर पेट फूलने या गैस की शिकायत रहती है, या आप किसी बीमारी से उठकर ठीक हुए हैं, तो चावल आपके लिए सबसे अच्छा दोस्त है। चावल पेट के लिए बहुत नरम और हल्का होता है। शरीर को इसे पचाने के लिए कोई खास मेहनत नहीं करनी पड़ती। यही वजह है कि जब हम बीमार होते हैं, तो डॉक्टर हमें रोटी की जगह खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं।

किन्हें रात में रोटी खानी चाहिए? अगर आपका पेट मज़बूत है, आपको खाना आसानी से पच जाता है और आप रात को देर तक जागकर काम करते हैं (जिससे आपको बीच रात में फिर से भूख लग जाती है), तो आपके लिए रोटी बेहतर है। रोटी पचने में थोड़ा समय लेती है, जिससे आपका पेट सुबह तक भरा रहता है और आपको रात में भूख की बेचैनी नहीं होती। लेकिन अगर आप रात को बहुत सूखी या बहुत ज़्यादा रोटियां खा लेते हैं, तो सुबह पेट में भारीपन लग सकता है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

रात में कमज़ोर पाचन या गैस की समस्या वालों के लिए चावल हल्का और सुपाच्य है। वहीं, डायबिटीज़ के मरीजों को फाइबरयुक्त रोटी चुननी चाहिए क्योंकि सफेद चावल अचानक ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। आप जो भी खाएं, मात्रा सीमित रखें, साथ में दाल (प्रोटीन) और हरी सब्जियां (फाइबर) ज़रूर लें, और पाचन ठीक रखने के लिए सोने से 2 घंटे पहले भोजन कर लें। 

ब्लड शुगर के हिसाब से क्या बेहतर है?

अगर आपको शुगर की समस्या है, या आप शुगर से बचना चाहते हैं, तो यह हिस्सा आपके लिए बहुत ज़रूरी है।

खाना कितनी जल्दी शुगर में बदलता है? सफेद चावल में फाइबर नहीं होता, इसलिए जैसे ही यह पेट में जाता है, यह बहुत तेज़ी से पचकर खून में शुगर (ग्लूकोज) घोल देता है। अगर आप एक बड़ी प्लेट भरकर सिर्फ चावल खा लेंगे, तो आपका शुगर लेवल एकदम से ऊपर चला जाएगा। वहीं, रोटी में फाइबर होने की वजह से यह धीरे-धीरे पचती है और खून में शुगर भी बहुत आराम से, धीरे-धीरे छोड़ती है। इसलिए शुगर के मरीज़ो को अक्सर चावल कम खाने की सलाह दी जाती है।

खाने की मात्रा का कमाल: अगर आप एक कटोरी चावल खाते हैं, तो वह उतना नुकसान नहीं करेगा, जितना कि एक बार में 4-5 रोटियां खा लेना करेगा। बात सिर्फ चावल या रोटी की नहीं है, बात इस बात की है कि आप 'कितना' खा रहे हैं। ज़्यादा मात्रा में खाया गया कोई भी खाना शुगर बढ़ाएगा ही।

आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है?

आयुर्वेद हमारे शरीर को बहुत गहराई से समझता है। आयुर्वेद में एक बात कही गई है, 'पाचन अग्नि' (जठराग्नि)।

आयुर्वेद कहता है कि दिन के समय, जब सूरज सिर पर होता है, तब हमारे पेट की आग सबसे तेज़ होती है। उस समय आप कुछ भी भारी खा लें, वह पच जाएगा। लेकिन रात के समय यह आग बहुत धीमी पड़ जाती है। अगर आपके पाचन अग्नि कमज़ोर है, तो आपको रात में हल्का खाना यानी चावल (दाल या सब्जियों के साथ) खाना चाहिए। लेकिन अगर आपका शरीर मेहनत वाला है और अग्नि तेज़ है, तो आप रोटी भी आराम से पचा सकते हैं। आयुर्वेद यह भी कहता है कि रात का खाना हमेशा सोने से कम से कम दो या तीन घंटे पहले खा लेना चाहिए।

क्या सिर्फ चावल या रोटी से ही फर्क पड़ता है?

नहीं! यह समझना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप अपनी रोटी या चावल के साथ क्या खा रहे हैं।

मान लीजिए आपने चावल के साथ सिर्फ आलू की सूखी सब्जी खाई। इसमें सिर्फ कार्बोहाइड्रेट है, जो शुगर बढ़ाएगा और वज़न भी। लेकिन अगर आपने उसी एक कटोरी चावल के साथ एक बड़ी कटोरी दाल, खूब सारी हरी सब्जियां और थोड़ा सा सलाद खाया, तो अब यह एक बेहतरीन खाना बन गया। दाल से प्रोटीन मिल गया और सब्जियों से फाइबर मिल गया। अब यह चावल भी आपके शरीर में धीरे-धीरे पचेगा और शुगर नहीं बढ़ाएगा।

यही बात रोटी पर भी लागू होती है। अगर आप सूखी रोटी को अचार के साथ खा रहे हैं, तो वह उतना फायदा नहीं करेगी, जितना कि दाल और हरी सब्जी के साथ खाने पर करेगी। असली जादू आपकी पूरी थाली में छिपा है।

रात को ऐसा क्या खाएं जिससे पेट भी हल्का रहे और शुगर भी न बढ़े? 

इसके लिए आपको किसी भारी-भरकम डाइट प्लान की नहीं, बस अपनी रूटीन में कुछ बहुत ही आसान और छोटे बदलाव करने की ज़रूरत है।

  • थाली का सही हिसाब-किताब: जब भी खाना खाने बैठें, अपनी थाली को आधा तो सिर्फ सलाद और ताज़ी हरी सब्ज़ियों से ही भर लें। अब जो आधी जगह बची है, उसके एक हिस्से में दाल, पनीर या सोयाबीन जैसी कोई चीज़ रख लें। और बचे हुए बिल्कुल छोटे से हिस्से में अपनी रोटी या थोड़े से चावल रखें।
  • खाने को 'पीने' की आदत: हम अक्सर जल्दबाज़ी में खाना बस निगल लेते हैं। कोशिश करें कि हर निवाले को आराम से इतना चबाएं कि वह मुंह में ही बिल्कुल पानी जैसा हो जाए। यकीन मानिए, ऐसा करने से आपके पेट की आधी मेहनत बच जाएगी और खाना झट से पच जाएगा।
  • समय का पक्का होना: डिनर जितना जल्दी हो, उतना अच्छा। कोशिश करें कि रात 7 से 8 बजे के बीच आपका खाना हर हाल में हो जाए। शरीर को सोने से पहले खाना पचाने के लिए थोड़ा वक्त देना बहुत ज़रूरी होता है।
  • खाते ही लेटने की गलती न करें: खाना खत्म करते ही सीधे बिस्तर पर जाकर लेट जाना या सोफे पर पसर जाना सबसे बड़ी गलती है। खाने के बाद बस 15-20 मिनट के लिए अपनी बालकनी, छत या कमरे में ही हल्का-फुल्का टहल लें। इससे खाना आसानी से नीचे बैठ जाता है और अगली सुबह गैस या पेट भारी लगने की कोई शिकायत नहीं होती। 

निष्कर्ष

तो आखिर में फैसला क्या हुआ? फैसला यह है कि चावल और रोटी दोनों ही हमारे शरीर के लिए अच्छे हैं।

अगर आपको रात में पेट एकदम हल्का रखना है, आपको गैस जल्दी बनती है और आप जल्दी सोना चाहते हैं, तो थोड़ी मात्रा में अच्छे से पका हुआ चावल, दाल और सब्ज़ियों के साथ खाइए। अगर आप चाहते हैं कि सुबह तक आपको बिल्कुल भूख न लगे, आपका पेट अच्छे से साफ हो और आपका पाचन एकदम मज़बूत है, तो आप दाल-सब्जी के साथ रोटी चुन सकते हैं।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप जो भी खाएं, खुशी से खाएं, लिमिट में खाएं और खाने के बाद थोड़ी सैर ज़रूर करें। सही खाना वही है जो आपके शरीर को आराम दे, न कि तकलीफ।

References

Uncontrolled high blood pressure puts over a billion people at risk

Comparison between the world health organization (WHO) and international society of hypertension (ISH) guidelines for hypertension - PMC

About High Blood Pressure

High Blood Pressure–Understanding the Silent Killer | FDA

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 बिल्कुल नहीं। अगर आप इसे थोड़ी मात्रा में दाल और सब्जियों के साथ खा रहे हैं, तो यह पेट के लिए बहुत हल्का और अच्छा रहता है।

शुगर के मरीजों के लिए रोटी (खासकर चने या सोयाबीन मिले हुए आटे की) थोड़ा बेहतर विकल्प है। अगर चावल खाना ही है, तो बहुत कम मात्रा में खूब सारी सब्जियों के साथ खाएं।

हां, क्योंकि ब्राउन राइस में छिलका होता है जो फाइबर देता है। इससे वह धीरे पचता है और शुगर एकदम से नहीं बढ़ाता। लेकिन यह पचने में सफेद चावल से थोड़ा भारी होता है।

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कितनी भूख है और आपका वज़न कितना है। आमतौर पर रात में 2 रोटियां या एक छोटी कटोरी चावल पर्याप्त माना जाता है।

जी हां, कई लोगों को चावल खाने के बाद शरीर हल्का लगता है और दिमाग शांत होता है, जिससे उन्हें नींद अच्छी और जल्दी आ जाती है।

कुछ लोगों को गेहूं से हल्की एलर्जी होती है या उनका पाचन फाइबर को जल्दी नहीं पचा पाता। ऐसे लोगों को रात में रोटी खाने से गैस या भारीपन लग सकता है।

खा सकते हैं, लेकिन इससे आप ज़रूरत से ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट खा लेंगे। बेहतर यही है कि एक समय पर या तो सिर्फ चावल खाएं या सिर्फ रोटी।

सबसे आसान तरीका है, खाना हमेशा समय पर खाएं, भूख से थोड़ा कम खाएं, और खाने के बाद तुरंत सोएं नहीं, बल्कि 15 मिनट टहलें।

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