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पीठ में अचानक तेज़ दर्द क्यों होता है? किडनी स्टोन के लक्षण जानें

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

पेनकिलर और तुरंत राहत देने वाली दवाओं का इस्तेमाल पीठ के निचले हिस्से में दर्द और किडनी स्टोन गुर्दे की पथरी जैसी बीमारियों में काफी आम है। ये दवाएँ और इंजेक्शन शरीर के अंदर दर्द के दर्दनाक संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचने से रोक देते हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गया है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीज़ को दवा छोड़ने के तुरंत बाद फिर से भयंकर दर्द होने लगता है और स्टोन की समस्या पहले से भी बड़े रूप में वापस आ जाती है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार दवाएँ खाने से गुर्दे की कार्यक्षमता का कमज़ोर होना, बीमारी कितनी गंभीर है, दवाओं पर शरीर की निर्भरता, या सबसे महत्वपूर्ण शरीर में मौजूद अशुद्धियाँ और अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और किडनी की सेहत बनी रहे।

किडनी स्टोन क्या है?

किडनी स्टोन एक ऐसी स्थिति है, जहाँ मूत्र में मौजूद खनिज और नमक एक साथ मिलकर ठोस टुकड़े का रूप ले लेते हैं और हमारी किडनी गुर्दे में जमा होने लगते हैं। आमतौर पर लोग इसका शिकार कम पानी पीने, गलत खानपान, बहुत ज़्यादा पसीना आने या यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होते हैं। जब यह पथरी किडनी से खिसक कर मूत्र नली में अपनी जगह बना लेती है, तो तेज़ दर्द, पेशाब में जलन, सूजन और रुकावट जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। पेनकिलर खाने पर कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ दर्द को दबाती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस अनुकूल माहौल को ठीक नहीं करतीं जिसमें स्टोन बार-बार पनपता है। दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार इस्तेमाल करना किडनी और लिवर पर बुरा असर डालता है।

किडनी स्टोन की बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

मूत्र रोग और किडनी की तकलीफ़ से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं

  • कैल्शियम स्टोन यह सबसे आम है। यह अक्सर कैल्शियम ऑक्सालेट के रूप में बनता है। कुछ खास तरह के फल और सब्ज़ियाँ खाने या विटामिन डी की अधिकता से यह बन सकता है।
  • यूरिक एसिड स्टोन यह उन लोगों में ज़्यादा होता है जो पानी कम पीते हैं या जो बहुत ज़्यादा प्रोटीन वाला आहार लेते हैं।
  • स्ट्रुवाइट स्टोन यह यूरिन इन्फेक्शन UTI के कारण तेज़ी से बनता है और काफी बड़ा हो सकता है।
  • सिस्टीन स्टोन यह एक दुर्लभ प्रकार है और उन लोगों में होता है जिन्हें आनुवंशिक विकार होता है, जिससे गुर्दे कुछ खास अमीनो एसिड ज़्यादा मात्रा में बाहर निकालते हैं।

किडनी स्टोन के लक्षण और संकेत

बार-बार पीठ में तेज़ दर्द होना या पेशाब में जलन कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं

  • तेज़ दर्द और ऐंठन विशेषकर पसलियों के नीचे, पीठ और पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द मचना जो लहरों में आता है।
  • पेशाब में दर्द पेशाब करते समय तेज़ जलन और तकलीफ महसूस होना।
  • पेशाब का रंग बदलना पेशाब का लाल, गुलाबी या भूरा हो जाना जो खून आने का संकेत है।
  • बार-बार पेशाब आना ऐसा लगना कि पेशाब आ रहा है, लेकिन बहुत कम मात्रा में आना।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी पेनकिलर बंद करते ही कुछ ही घंटों के भीतर दर्द का फिर से उभर आना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बार-बार किडनी स्टोन होने के मुख्य कारण क्या हैं?

किडनी में बार-बार पथरी बनने के पीछे सिर्फ बाहरी कारण नहीं, बल्कि कई अंदरूनी कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं

  • पानी की कमी शरीर में पानी की कमी होने से मूत्र गाढ़ा हो जाता है और इसमें मौजूद खनिज आसानी से पथरी का रूप ले लेते हैं।
  • गलत खान-पान ज़्यादा नमक, चीनी और बहुत अधिक प्रोटीन वाला भोजन खाने से शरीर में टॉक्सिन्स बनते हैं, जो पथरी को पनपने के लिए अनुकूल माहौल देते हैं।
  • मोटापा और कमज़ोर पाचन बढ़ा हुआ वजन और ख़राब पाचन तंत्र शरीर की कार्यप्रणाली को धीमा कर देते हैं।
  • बढ़ा हुआ यूरिक एसिड खून में ज़्यादा यूरिक एसिड पथरी के लिए सबसे अच्छी खुराक होती है।
  • पारिवारिक इतिहास और खराब जीवनशैली अगर परिवार में पहले किसी को पथरी रही हो और आप साफ-सफाई या सही रूटीन का ध्यान न रखें।

किडनी स्टोन के जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

किडनी स्टोन को अगर अनदेखा किया जाए या सही समय पर इलाज न मिले, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

  • किडनी को स्थायी नुकसान अगर पथरी मूत्र नली में फँस जाए, तो यह गुर्दे को हमेशा के लिए खराब कर सकती है।
  • भयंकर इन्फेक्शन का खतरा पेशाब रुकने से किडनी में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जिससे मवाद भर सकता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है।
  • लिवर और गुर्दे पर दबाव लंबे समय तक भारी पेनकिलर गोलियाँ खाने से शरीर के मुख्य फिल्टर यानी लिवर और किडनी को नुकसान पहुँचता है।
  • मानसिक तनाव और चिंता लगातार दर्द के डर से डिप्रेशन, घबराहट और नींद की समस्या हो सकती है।
  • सर्जरी की नौबत समय पर इलाज न होने से ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प बचता है।
  • समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से बार-बार होने वाला किडनी स्टोन सिर्फ एक अंग की दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'अश्मरी' Mutrashmari कहा जाता है और यह माना जाता है कि जब शरीर में वात और कफ दोष बिगड़ जाते हैं, तब ऐसी परेशानी आती है। डॉक्टर नाड़ी और जीभ देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं शरीर में टॉक्सिन्स आम तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने मूत्र प्रणाली को पूरी तरह दूषित कर दिया है। जब तक यह दूषित वात और कफ शरीर में रहेगा, पथरी को पनपने की जगह हमेशा मिलती रहेगी। आयुर्वेद में बस लक्षण मिटाना और दर्द की गोली देना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, शरीर की अंदरूनी शुद्धि हो और किडनी प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बने।

किडनी स्टोन के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में मूत्र रोगों को दूर करने और किडनी को स्वस्थ रखने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं

  • गोखरू यह प्रकृति का सबसे बेहतरीन मूत्रल Diuretic है। यह पेशाब के प्रवाह को बढ़ाता है और पथरी को बाहर निकालने में मदद करता है।
  • वरुण आयुर्वेद में इसे अश्मरी पथरी तोड़ने के लिए बहुत शक्तिशाली माना गया है। यह दर्द कम करता है और स्टोन को टुकड़ों में तोड़ता है।
  • पुनर्नवा किडनी की बीमारियों के लिए पुनर्नवा बहुत ताकतवर है। यह गुर्दे की सूजन को कम करता है और पुरानी अशुद्धियों को साफ करता है।
  • पाषाणभेद नाम से ही साफ है, यह जड़ी-बूटी पत्थर पथरी को भेदने यानी तोड़ने का काम करती है और बार-बार लौटने की प्रवृत्ति को खत्म करती है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित दोषों को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य और स्वस्थ किडनी पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया

  • गहरी सफाई और शरीर शोधन जब किडनी स्टोन बार-बार बन रहा हो और किसी दवा से स्थायी आराम न मिल रहा हो, तो जीवा आयुर्वेद में शरीर के दोषों को संतुलित करने के लिए विशेष पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय यह 7 से 15 दिनों तक चलने वाली शरीर के अंदरूनी अंगों की गहरी सफाई की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • टॉक्सिन्स बाहर निकालना पंचकर्म प्रक्रिया में मरीज़ को विशेष औषधियों के माध्यम से शरीर का शोधन कराया जाता है जैसे बस्ती कर्म। इससे शरीर में जमा पुरानी गंदगी और टॉक्सिन्स मल-मूत्र के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं।
  • स्थायी राहत के लिए औषधियाँ अंदरूनी सफाई के साथ पथरी नाशक जड़ी-बूटियों का सेवन कराया जाता है। इससे सालों पुरानी भयंकर तकलीफ में राहत मिलती है और पथरी जड़ से खत्म होने लगती है।

किडनी स्टोन के रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, किडनी स्टोन को दूर करने के लिए तरल पदार्थों से भरपूर, पचने में आसान और शरीर के दोषों को संतुलित करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है

क्या खाएँ?

  • पानी वाली और हल्की सब्ज़ियाँ लौकी, तोरई, परवल और कद्दू खाएँ, यह पेट को साफ रखते हैं।
  • कुलथी की दाल और जौ कुलथी की दाल Horse gram पथरी को तोड़ने के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है और जौ का पानी किडनी को साफ करता है।
  • नींबू और नारियल पानी दिन में पर्याप्त मात्रा में नींबू पानी और नारियल पानी पिएँ, यह प्राकृतिक रूप से गुर्दे की सफाई करते हैं।

क्या न खाएँ?

  • ऑक्सालेट वाली चीज़ें टमाटर बीज वाले, पालक और बैंगन खाना बिल्कुल बंद कर दें, ये पथरी को तेज़ी से बढ़ाते हैं।
  • ज्यादा नमक और प्रोटीन खाने में नमक कम करें और भारी मांसाहार रेड मीट कभी न खाएँ, यह किडनी को सबसे ज़्यादा दूषित करता है।
  • चीनी और जंक फूड मिठाइयाँ, कोल्ड ड्रिंक्स और मैदे से बनी चीज़ों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि यह शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाते हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है

  • बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे पथरी का आकार क्या है, कितनी पथरियां पथरियां/पथरियाँ हैं, और मरीज़ का पाचन कितना खराब है।
  • हल्की समस्या में सुधार अगर स्टोन छोटा है 5mm से कम, तो आमतौर पर 3 से 6 हफ्तों में ही यह पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है और दर्द मिट जाता है।
  • पुरानी बीमारी का समय अगर स्टोन बड़ा है या बार-बार बनने की प्रवृत्ति है, तो शरीर को पूरी तरह शुद्ध होने में 2 से 6 महीने भी लग सकते हैं।
  • उपचार का तरीका इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से पथरी नाशक जड़ी-बूटियाँ, सही खानपान और पानी पीने का ध्यान रखना शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो दोष संतुलित हो जाते हैं और भविष्य में स्टोन के दोबारा पनपने की संभावना खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरे गुर्दे में पथरी के लिए सर्जरी हुई थी, लेकिन एक साल बाद यह फिर से हो गई। यह पहले से छोटी थी, लेकिन मुझे पक्का नहीं था कि सर्जरी करवाना सही रहेगा या नहीं। मैं जीवा आयुर्वेद गया और वहाँ जड़ी-बूटियों वाली दवाओं की मदद से पथरी निकल गई। मूत्र संबंधी विकारों में आयुर्वेद बहुत अच्छा काम करता है, खासकर तब, जब आप समस्या के गंभीर होने का इंतज़ार किए बिना शुरुआत में ही इलाज के लिए आ जाते हैं।

अनुभव (अलवर )

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

किडनी स्टोन की बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का दृष्टिकोण लक्षणों को दबाने पर केंद्रित बीमारी की जड़ पर काम करना
कार्य करने का तरीका पेनकिलर से दर्द को तुरंत रोकना शरीर को अंदर से संतुलित कर पथरी को गलाना
मूल कारण पर प्रभाव पथरी बनने के कारणों को पूरी तरह खत्म नहीं करता वात-कफ असंतुलन और टॉक्सिन्स को दूर करता है
उपचार विधियाँ दवाइयाँ और सर्जरी जड़ी-बूटियाँ और संतुलित आहार
दुष्प्रभाव दवा बंद करते ही दर्द लौट सकता है, सर्जरी के बाद भी दोबारा स्टोन बन सकता है सामान्यतः सुरक्षित, शरीर के अनुसार सुधार
परिणाम अस्थायी राहत पथरी बनने की प्रवृत्ति कम होती है
समय जल्दी राहत थोड़ा समय लगता है, लेकिन स्थायी लाभ

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

किडनी स्टोन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि

  • दर्द इतना असहनीय हो जाए कि आप बैठ भी न सकें।
  • पेशाब में खून आने लगे या पेशाब का रंग लाल हो जाए।
  • दर्द के साथ तेज़ बुखार और ठंड लगने लगे।
  • उल्टी और मतली की शिकायत लगातार बनी रहे।
  • पेशाब करने में बहुत ज़्यादा दिक्कत हो या पेशाब पूरी तरह रुक जाए।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और किडनी को स्थायी रूप से खराब होने से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से बार-बार होने वाला किडनी स्टोन मुख्य रूप से वात और कफ दोष के बिगड़ने तथा शरीर में टॉक्सिन्स के जमा होने से जुड़ा होता है। कम पानी पीने, गलत खान-पान और कमज़ोर पाचन से शरीर में अशुद्धियाँ बनती हैं। यही अशुद्धियाँ मूत्र मार्ग तक पहुँचकर पथरी का रूप ले लेती हैं। सिर्फ पेनकिलर खाने से दर्द छिप जाता है लेकिन बीमारी जड़ से खत्म नहीं होती। इलाज में शरीर की अंदरूनी शुद्धि सबसे ज़्यादा आवश्यक है। इसमें दोषों को संतुलित करना, सही मात्रा में पानी पीना, गोखरू-वरुण जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना शामिल है जिससे बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, अगर शरीर की शुद्धि के लिए सही आयुर्वेदिक औषधियाँ खाई जाएँ और डाइट का पालन किया जाए, तो इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।

नहीं, पेनकिलर सिर्फ दर्द के एहसास को रोकती है। अंदरूनी तौर पर दोषों को संतुलित किए बिना यह बीमारी बार-बार लौटती है।

हाँ, पानी कम पीने से मूत्र गाढ़ा हो जाता है और उसमें मौजूद खनिज तेज़ी से पथरी का रूप ले लेते हैं।

हाँ, गोखरू सबसे अच्छा प्राकृतिक मूत्रल है जो गुर्दे को साफ कर पथरी को बाहर निकालने में मदद करता है।

हाँ, खाने में ज़्यादा नमक लेने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है जो स्टोन बनने का बड़ा कारण है।

हाँ, अगर आपको ऑक्सालेट वाली पथरी है, तो इन चीज़ों को खाने से स्टोन तेज़ी से बड़ा होता है।

नहीं, यह एक गलत धारणा है। बीयर या शराब से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होती है जो पथरी की समस्या को और बिगाड़ सकती है।

हाँ, आयुर्वेद में कुलथी की दाल को पथरी भेदक माना गया है, जो स्टोन को तोड़ने में बहुत कारगर है।

हाँ, अगर पथरी के कारण मूत्र मार्ग में कोई इन्फेक्शन हो जाए, तो तेज़ बुखार और ठंड लग सकती है।

हाँ, कब्ज़ और खराब पाचन से शरीर में टॉक्सिन्स जमा होते हैं जो अंदरूनी कार्यप्रणाली को बिगाड़ कर पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं।

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