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Vitamin D, B12, Zinc — बिना Test के Supplement लेने वाले Indians अपनी Kidney खराब कर रहे हैं

Information By Dr. Keshav Chauhan

आपको थकान महसूस होती है, तो आप तुरंत एक मल्टीविटामिन (Multivitamin) की गोली खा लेते हैं। जोड़ों में दर्द होता है, तो केमिस्ट की दुकान से बिना किसी पर्चे के विटामिन D (60,000 IU) का पाउच ले आते हैं। बाल झड़ रहे हैं, तो ज़िंक (Zinc) और बायोटिन की रंग-बिरंगी गोलियाँ फांकना शुरू कर देते हैं। आजकल भारतीयों ने मेडिकल स्टोर्स को 'कैंडी शॉप' (Candy shop) समझ लिया है। सोशल मीडिया और विज्ञापनों ने हमें यह समझा दिया है कि हमारी हर कमज़ोरी का इलाज एक प्लास्टिक की डिब्बी में बंद सप्लीमेंट है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन गोलियों को आप 'सेहत का खज़ाना' समझकर मुट्ठी भर-भर कर खा रहे हैं, आपका शरीर उनके साथ क्या कर रहा है? सच्चाई यह है कि बिना ब्लड टेस्ट और बिना डॉक्टर की सलाह के खाए गए ये सिंथेटिक विटामिन्स आपके शरीर के लिए अमृत नहीं, बल्कि एक 'धीमा ज़हर' (Slow Poison) हैं। जो विटामिन D आप अपनी हड्डियाँ मज़बूत करने के लिए खा रहे हैं, उसका ओवरडोज़ आपकी किडनी में भयंकर पथरी (Stones) बना रहा है। 

सप्लीमेंट्स का ओवरडोज़: आपकी किडनी और लिवर कैसे तबाह हो रहे हैं?

हमारा शरीर एक बहुत ही स्मार्ट मशीन है, लेकिन जब आप इसमें ज़बरदस्ती सिंथेटिक केमिकल्स भरते हैं, तो इसके फिल्टर (लिवर और किडनी) चोक हो जाते हैं।

  • विटामिन D और किडनी स्टोन्स (Hypercalcemia): विटामिन D वसा में घुलनशील (Fat-soluble) होता है। इसका मतलब है कि शरीर अतिरिक्त विटामिन D को पेशाब के रास्ते बाहर नहीं निकाल सकता; वह इसे फैट और लिवर में स्टोर कर लेता है। जब आप हफ्तों तक विटामिन D का पाउच खाते हैं, तो खून में 'कैल्शियम' का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है (Hypercalcemia)। यही अतिरिक्त कैल्शियम सीधा आपकी किडनी में जाकर पथरी (Kidney Stones) में बदल जाता है।
  • ज़िंक (Zinc) का उल्टा असर: कोरोना के बाद से लोग ज़िंक को 'इम्युनिटी बूस्टर' मानकर रोज़ खा रहे हैं। विज्ञान कहता है कि ज़िंक का ओवरडोज़ शरीर से 'कॉपर' (Copper) नाम के ज़रूरी मिनरल को पूरी तरह खत्म कर देता है। कॉपर कम होते ही आपके वाइट ब्लड सेल्स (WBC) कमज़ोर पड़ जाते हैं, जिससे आपकी इम्युनिटी बढ़ने के बजाय और ज़्यादा गिर जाती है।
  • सिंथेटिक B12 का किडनी पर दबाव: बाज़ार में मिलने वाले 90% B12 सप्लीमेंट्स 'Cyanocobalamin' (सायनाकोबालामिन) फॉर्म में होते हैं, जो एक सिंथेटिक केमिकल है (जिसमें सायनाइड का एक मॉलिक्यूल जुड़ा होता है)। इसे प्रोसेस करके बाहर निकालने में किडनी को एक्स्ट्रा ओवरटाइम करना पड़ता है, जो उसे थका देता है।

सप्लीमेंट पॉइज़निंग के प्रकार: आप किस श्रेणी में गलती कर रहे हैं?

बिना सोचे-समझे गोलियाँ खाने की इस बीमारी को विज्ञान तीन मुख्य श्रेणियों में बाँटता है:

  1. फैट-सॉल्युबल टॉक्सिसिटी (Fat-Soluble Toxicity): विटामिन A, D, E, और K शरीर में जमा होते हैं। इनका बिना टेस्ट के सेवन सीधे लिवर डैमेज और बोन लॉस (Bone loss) का कारण बनता है।
  2. मिनरल ओवरडोज़ (Mineral Overload): कैल्शियम, आयरन और ज़िंक का अत्यधिक सेवन। आयरन का ओवरडोज़ आंतों को जलाकर भयंकर कब्ज़ करता है, और कैल्शियम खून की नलियों (Arteries) को सख्त बनाकर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाता है।
  3. वाटर-सॉल्युबल फ्लश (Water-Soluble Flush): विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और विटामिन C। लोग सोचते हैं कि ये यूरिन से बाहर निकल जाते हैं, लेकिन इन्हें बाहर निकालने के चक्कर में किडनी के नेफ्रॉन्स (Nephrons) को भयंकर नुकसान पहुँचता है।

अगर इस 'सेल्फ-मेडिकेशन' को इग्नोर किया, तो क्या होंगी जटिलताएं?

"विटामिन ही तो है, क्या नुकसान करेगा?" यह सोच आपको आईसीयू (ICU) तक पहुँचा सकती है:

  • क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD): कैल्शियम और विटामिन D के ओवरडोज़ से किडनी में नेफ्रोकैल्सिनोसिस (Nephrocalcinosis) हो जाता है, जिससे किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है और अंततः डायलिसिस की नौबत आ जाती है।
  • हार्ट एरिथमिया (Heart Arrhythmia): इलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स के असंतुलन से दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है, जो कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है।
  • लिवर सिरोसिस और पीलिया: विटामिन A और आयरन का भारी सप्लीमेंटेशन सीधे लिवर के सेल्स को डैमेज करता है, जिससे भयंकर लिवर टॉक्सिसिटी होती है।
  • गंभीर न्यूरोपैथी (Nerve Damage): विटामिन B6 (Pyridoxine) का ओवरडोज़ नसों को परमानेंट डैमेज कर सकता है, जिससे हाथों और पैरों में जीवन भर के लिए सुन्नपन (Numbness) आ सकता है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है? (गरविष और अग्निमांद्य)

आयुर्वेद का सबसे बड़ा सिद्धांत है: "अति सर्वत्र वर्जयेत" (Excess of anything is poison)।

  • सिंथेटिक सप्लीमेंट्स 'गरविष' हैं: आयुर्वेद में 'गरविष' उस धीमे ज़हर को कहा जाता है जो शरीर में धीरे-धीरे जमा होकर अंगों को खराब करता है। लैब में बने ये सिंथेटिक विटामिन्स शरीर के लिए अस्वाभाविक (Unnatural) हैं। शरीर इन्हें पोषण नहीं, बल्कि एक केमिकल (विष) मानता है।
  • धात्वाग्नि का बुझना: अगर आपकी 'पाचन अग्नि' कमज़ोर है, तो आप दुनिया का सबसे महँगा सप्लीमेंट भी खा लें, वह शरीर में पचेगा नहीं। जो पचेगा नहीं, वह आंतों में 'आम' (Toxins) बनकर चिपकेगा और मल या पेशाब के ज़रिए किडनी को थकाते हुए बाहर निकल जाएगा।
  • स्रोतों का अवरोध (Channel Blockage): अतिरिक्त कैल्शियम और मिनरल्स शरीर के बारीक स्रोतों (Micro-channels) को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे शरीर में भयंकर वात और वातरक्त (Gout) जैसी बीमारियाँ जन्म लेती हैं।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको गोलियों का डब्बा नहीं थमाते; हम आपके शरीर की 'फैक्ट्री' को ठीक करते हैं ताकि वह अपने भोजन से खुद विटामिन निकाल सके।

  • अग्नि दीपन (Metabolic Reset): सबसे पहले आपकी 'धात्वाग्नि' (Tissue metabolism) को सुधारा जाता है, ताकि आप जो प्राकृतिक भोजन खाएं, शरीर उसमें से 100% न्यूट्रिशन को एब्जॉर्ब (Absorb) कर सके।
  • स्रोतोशोधन (Detox from Chemicals): लिवर और किडनी में सप्लीमेंट्स के कारण जो ज़हरीला कचरा (आम) जमा हो गया है, उसे जड़ी-बूटियों और पंचकर्म से फ्लश आउट किया जाता है।
  • प्राकृतिक रसायन (Bio-available Nutrition): सिंथेटिक केमिकल्स की जगह, आपको जड़ी-बूटियों (Herb-based) से पोषण दिया जाता है, जिसे शरीर 100% पहचानता और सोखता है।

सप्लीमेंट्स का ज़हर निकालने और प्राकृतिक पोषण देने वाली डाइट

अपनी किडनी को बचाने के लिए डब्बों में बंद गोलियाँ छोड़ें और अपनी रसोई को अपनी फार्मेसी बनाएं।

पोषक तत्व प्राकृतिक और सुरक्षित आयुर्वेदिक स्रोत (क्या खाएं) खतरनाक सिंथेटिक स्रोत (क्या न खाएं)
विटामिन D सुबह की धूप (असली स्रोत), देसी गाय का घी, मशरूम, तिल का तेल। बिना ब्लड टेस्ट के 60K IU वाले पाउच या गोलियाँ हफ्तों तक खाना।
विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से फर्मेंटेड (Fermented) भोजन—जैसे घर का ताज़ा मट्ठा (छाछ), कांजी, पुराना चावल। बाज़ार की Cyanocobalamin वाली रंग-बिरंगी गोलियाँ या कैप्सूल्स।
ज़िंक और आयरन कद्दू के बीज (Pumpkin seeds), तिल, मोरिंगा (सहजन), मुनक्का, गुड़। सिंथेटिक ज़िंक सल्फेट या भारी आयरन की गोलियाँ जो कब्ज़ करती हैं।
विटामिन C आंवला (Amla - विटामिन C का सबसे बड़ा और सुरक्षित स्रोत), नींबू, संतरा। एस्कॉर्बिक एसिड (Ascorbic Acid) की चबाने वाली च्युएबल (Chewable) गोलियाँ।
कैल्शियम रागी, तिल के बीज, सहजन, दूध (हल्दी के साथ)। कैल्शियम कार्बोनेट की सफेद गोलियाँ (जो सीधे पथरी बनाती हैं)।

शरीर की कमियों (Deficiencies) को प्राकृतिक रूप से पूरा करने वाली औषधियाँ

  • आमलकी रसायन (Amla): यह सिंथेटिक विटामिन C की गोलियों का सबसे ताकतवर बाप है। यह शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स देता है और सप्लीमेंट्स की गर्मी से खराब हो रहे लिवर को प्राकृतिक ठंडक व सुरक्षा (Detox) देता है।
  • मोरिंगा (Moringa / सहजन): इसे 'नेचर का मल्टीविटामिन' कहा जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन A और ज़िंक प्रचुर मात्रा में होता है, जो शरीर में 100% एब्जॉर्ब (Absorb) होता है और किडनी को नुकसान नहीं पहुँचाता।
  • शिलाजीत (Shilajit): यह 84 से अधिक खनिजों (Minerals) का प्राकृतिक स्रोत है। शरीर में आई भयंकर कमज़ोरी और 'ओजो क्षय' को दूर करने के लिए यह केमिकल सप्लीमेंट्स से हज़ार गुना बेहतर है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): कैल्शियम और विटामिन्स के ओवरडोज़ के कारण किडनी पर जो भारी दबाव और सूजन आ गई है, पुनर्नवा उसे फ्लश आउट (Detox) करके किडनी को नया जीवन देती है।

पंचकर्म थेरेपी: सिंथेटिक ज़हर (गरविष) की डीप 'ओवरहॉलिंग'

जब सप्लीमेंट्स के ओवरडोज़ से लिवर और किडनी चोक (Choke) हो जाएं, तो पंचकर्म इस ज़हर को शरीर से खींचकर बाहर निकालता है।

  • विरेचन (Virechana): लिवर में जमे हुए फैट-सॉल्युबल विटामिन्स (A, D, E, K) की टॉक्सिसिटी को साफ करने के लिए औषधीय दस्त कराए जाते हैं। यह लिवर को तुरंत हल्का और डिटॉक्स कर देता है।
  • बस्ती (Basti): आंतों की 'एब्जॉर्प्शन पावर' (पोषण सोखने की क्षमता) को बढ़ाने के लिए औषधीय एनिमा दिया जाता है। जब आंतें साफ होती हैं, तो शरीर खाने से खुद B12 और अन्य विटामिन्स बनाने लगता है।
  • उद्वर्तन (Udvartana): सप्लीमेंट्स के 'आम' के कारण शरीर में जो जकड़न और भारीपन आ गया है, उसे हर्बल पाउडर की सूखी मालिश से त्वचा के रोम-छिद्रों के ज़रिए बाहर निकाला जाता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम केवल आपकी 'Deficiency' रिपोर्ट देखकर गोलियाँ नहीं लिखते; हम यह ढूँढ़ते हैं कि शरीर खाना पचा क्यों नहीं रहा है।

  • नाड़ी परीक्षा: पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर 'धात्वाग्नि' कितनी कमज़ोर है और क्या 'गरविष' (सप्लीमेंट्स के टॉक्सिन्स) ने लिवर-किडनी को चोक कर दिया है।
  • पाचन ऑडिट: आप क्या खाते हैं और क्या आपका शरीर उसे सोख (Absorb) पा रहा है? अगर आपको कब्ज़ है, तो कोई भी सप्लीमेंट काम नहीं करेगा।
  • टॉक्सिन इवैल्यूएशन: जीभ और आँखों को देखकर पता लगाना कि शरीर में अतिरिक्त कैल्शियम या मिनरल्स कहाँ जमा हो रहे हैं।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको फार्मेसी का गुलाम नहीं बनाते; हम आपके शरीर को प्राकृतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर शरीर में बहुत कमज़ोरी है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें और अपनी पुरानी ब्लड रिपोर्ट्स दिखाएं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी 'प्रकृति' के अनुसार खास अग्नि-दीपक जड़ी-बूटियाँ, मोरिंगा/आंवला जैसे प्राकृतिक सप्लीमेंट्स और एक पूरा न्यूट्रिशनल डाइट प्लान तैयार किया जाता है।

शरीर को रिसेट होने में लगने वाला समय कितना है?

सिंथेटिक ज़हर को बाहर निकलने और शरीर को प्राकृतिक पोषण सोखने में अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती 1-2 हफ्ते: सप्लीमेंट्स बंद करने और जड़ी-बूटियाँ लेने से पेट की ब्लोटिंग (Bloating), एसिडिटी और मुँह का कड़वापन खत्म होगा।
  • 1 से 3 महीने तक: लिवर और किडनी डिटॉक्स होंगे। बिना किसी गोली के भी आपकी प्राकृतिक ऊर्जा (Energy) लौटने लगेगी और बालों का झड़ना कम होगा।
  • 3 से 6 महीने तक: आपकी 'धात्वाग्नि' पूरी तरह रिसेट हो जाएगी। आपका शरीर प्राकृतिक भोजन से ही पर्याप्त विटामिन D, B12 और आयरन बनाने व सोखने लगेगा। ब्लड रिपोर्ट्स में प्राकृतिक सुधार दिखेगा।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको सिंथेटिक गोलियों का 'शॉर्टकट' (Shortcut) नहीं बेचते; हम आपके ऑर्गन्स (Organs) की रक्षा करते हैं।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ कमी (Deficiency) को बाहर से नहीं भरते; हम आपकी आंतों को ताकत देते हैं ताकि वे खुद विटामिन्स को खाने से निचोड़ लें।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों लोगों को सप्लीमेंट्स के जानलेवा साइड-इफेक्ट्स (लिवर और किडनी डैमेज) से बचाया है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: हर इंसान की 'अग्नि' अलग है। हमारा प्राकृतिक आहार और औषधियों का प्लान बिल्कुल आपकी नाड़ी और आपकी 'प्रकृति' के आधार पर होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: बाज़ार के सिंथेटिक केमिकल्स सीधे किडनी पर चोट करते हैं, जबकि आंवला, मोरिंगा और शिलाजीत जैसे आयुर्वेदिक रसायन शरीर के हर ऑर्गन को ताकत और सुरक्षा देते हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक सप्लीमेंट इंडस्ट्री (Self-Medication) आयुर्वेद (Holistic Nutrition)
कमी (Deficiency) का इलाज लैब में बने सिंथेटिक विटामिन्स (Chemicals) की भारी डोज़ बाहर से डालना। धात्वाग्नि' (मेटाबॉलिज़्म) को सुधारकर प्राकृतिक भोजन से पोषण सोखने की क्षमता बढ़ाना।
विटामिन D और B12 भारी मात्रा में D3 पाउच और Cyanocobalamin की रोज़ाना गोलियाँ खाना। धूप का सेवन (Sun exposure), गाय का घी, और फर्मेंटेड फूड (छाछ/कांजी) को आधार मानना।
किडनी और लिवर पर असर सिंथेटिक मिनरल्स को फिल्टर करने में किडनी थक जाती है और पथरी बनती है। जड़ी-बूटियाँ पूरी तरह बायो-अवेलेबल (Bio-available) होती हैं, जो लिवर-किडनी को डिटॉक्स करती हैं।
लंबा असर शरीर सप्लीमेंट्स का आदी हो जाता है और पेट (Gut) अपना काम करना भूल जाता है। शरीर अंदर से मज़बूत और आत्मनिर्भर बनता है, जिससे किसी गोली की ज़रूरत नहीं पड़ती।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आप लंबे समय से कोई मल्टीविटामिन या सप्लीमेंट खा रहे हैं और आपको ये संकेत दिखें, तो तुरंत गोली रोकें और डॉक्टर के पास जाएं:

  • पीठ के निचले हिस्से या साइड में भयंकर दर्द: अगर पसली के नीचे और पीठ की तरफ तेज़ चुभने वाला दर्द उठे (यह किडनी स्टोन का खतरनाक अलार्म है)।
  • मुँह में लगातार मेटैलिक स्वाद (Metallic Taste): अगर हर समय मुँह में लोहे या सिक्के जैसा स्वाद आए (यह ज़िंक या आयरन टॉक्सिसिटी का लक्षण है)।
  • हड्डियों में भयंकर दर्द और उल्टी: अगर विटामिन D या कैल्शियम खाने के बाद हड्डियों में दर्द कम होने के बजाय बढ़ जाए और लगातार मतली (Nausea) रहे (यह Hypercalcemia की निशानी है)।
  • हाथ-पैरों में भयंकर सुन्नपन: अगर विटामिन B सप्लीमेंट खाने के बाद आपकी उंगलियों में करंट जैसा लगे या सुन्न पड़ जाएं (Nerve Toxicity)।

निष्कर्ष

"आपका शरीर रसायनों (Chemicals) का डस्टबिन नहीं है।" जब आप बिना ब्लड टेस्ट कराए, इंटरनेट की सलाह पर विटामिन D, B12 और ज़िंक की रंग-बिरंगी गोलियाँ फांकना शुरू कर देते हैं, तो आप अपनी सेहत नहीं बना रहे होते हैं; आप असल में अपनी किडनी और लिवर के लिए एक 'टाइम बम' तैयार कर रहे होते हैं। विटामिन D का ओवरडोज़ आपकी किडनी में सीधे पथरी (Stones) बनाता है, और सिंथेटिक B12 आपके फिल्टर करने वाले अंगों को बुरी तरह थका देता है। आयुर्वेद का स्पष्ट नियम है कि अगर आपकी 'पाचन अग्नि' कमज़ोर है, तो ये सप्लीमेंट्स पचेंगे नहीं, बल्कि 'गरविष' (Slow poison) बनकर आपकी नसों को ब्लॉक कर देंगे। इस 'पिल-पॉपिंग' (Pill-popping) कल्चर से बाहर निकलिए। अपनी थाली को ही अपनी फार्मेसी बनाइए। धूप में बैठिए, गाय का घी खाइए, छाछ और मोरिंगा का उपयोग कीजिए। अगर कमी है, तो आंवला और शिलाजीत जैसे प्राकृतिक और बायो-अवेलेबल (Bio-available) आयुर्वेदिक रसायनों का इस्तेमाल करें। अपनी किडनी को सप्लीमेंट्स के ज़हर से बचाएं, और जीवा आयुर्वेद के ठोस, वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण के साथ अपने शरीर को अंदर से आत्मनिर्भर और मज़बूत बनाएं।

FAQs

विटामिन D फैट-सॉल्युबल है, यह यूरिन से बाहर नहीं निकलता। भारी डोज़ लेने से खून में कैल्शियम बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है (Hypercalcemia)। यह अतिरिक्त कैल्शियम सीधे किडनी में जाकर जमता है और खतरनाक पथरी (Kidney Stones) या नेफ्रोकैल्सिनोसिस बना देता है।

बाज़ार के ज़्यादातर सस्ते सप्लीमेंट्स Cyanocobalamin होते हैं, जो एक सिंथेटिक फॉर्म है (इसमें सायनाइड मॉलिक्यूल होता है)। शरीर को पहले इसे मिथाइलकोबालामिन (Methylcobalamin) में बदलना पड़ता है। इस प्रोसेस में आपके लिवर और किडनी पर भयंकर टॉक्सिक दबाव पड़ता है।

बिल्कुल! अगर आप रोज़ाना हाई डोज़ ज़िंक खाते हैं, तो यह आपके शरीर में कॉपर (Copper) के अवशोषण (Absorption) को पूरी तरह रोक देता है। कॉपर की कमी से वाइट ब्लड सेल्स (WBCs) कमज़ोर हो जाते हैं और आप बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं।

सबसे अच्छा तरीका सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच 20-30 मिनट धूप सेंकना (Sunbath) है। इसके साथ ही, शुद्ध गाय का घी, तिल का तेल और मशरूम का सेवन करें। आयुर्वेद मानता है कि धूप शरीर के अंदरूनी तेल (वसा) के साथ मिलकर प्राकृतिक विटामिन D बनाती है।

विटामिन B12 आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बनाते हैं। इसके लिए फर्मेंटेड फूड्स (Fermented foods) जैसे—घर की ताज़ी छाछ (मट्ठा), कांजी (गाजर-चुकंदर का फर्मेंटेड पानी), और पुराना चावल सबसे बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत हैं।

जी हाँ। मोरिंगा (सहजन) प्रकृति का सबसे बड़ा सुपरफूड है। इसमें दूध से 4 गुना ज़्यादा कैल्शियम, गाजर से ज़्यादा विटामिन A और भरपूर आयरन व ज़िंक होता है। यह 100% प्राकृतिक है और किडनी पर कोई टॉक्सिक लोड नहीं डालता।

गरविष का मतलब है वह ज़हर जो तुरंत नहीं मारता, बल्कि शरीर में जमा होकर धीरे-धीरे अंगों को खराब करता है। लैब में बने केमिकल्स शरीर के लिए अप्राकृतिक हैं। लिवर इन्हें पहचान नहीं पाता और ये शरीर में जमा होकर अंगों को चोक (Choke) कर देते हैं।

विरेचन में औषधीय जड़ी-बूटियों से पेट साफ (दस्त) कराया जाता है। यह लिवर और पित्ताशय (Gallbladder) में जमे हुए फैट-सॉल्युबल विटामिन्स (D, A, E) की टॉक्सिसिटी और भयंकर गर्मी को शरीर से एक ही बार में फ्लश आउट कर देता है।

जी हाँ, मेडिकल साइंस के कई शोध (Research) बताते हैं कि अगर आप बिना विटामिन K2 और कमज़ोर पाचन के भारी सिंथेटिक कैल्शियम खाते हैं, तो वह हड्डियों की बजाय खून की नलियों (Arteries) में जमने लगता है, जिससे धमनियाँ सख्त हो जाती हैं और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।

आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि असली कारण विटामिन्स न खाना नहीं, बल्कि अग्निमांद्य (कमज़ोर पाचन) है। अगर आपका गट (आंतें) खराब है, तो आप दुनिया के सारे सप्लीमेंट खा लें, शरीर उन्हें सोख (Absorb) ही नहीं पाएगा और वे मल-मूत्र के रास्ते बाहर बह जाएंगे।

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