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Temporary relief लेना long-term नुकसान क्यों कर सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

सिरदर्द हुआ तो तुरंत पेनकिलर (Painkiller), एसिडिटी हुई तो गैस की गोली, और नींद नहीं आई तो स्लीपिंग पिल, आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में 'क्विक फिक्स' (Quick fix) या तुरंत आराम पाना हमारी सबसे बड़ी आदत बन चुकी है। हमें लगता है कि शरीर में उठने वाला दर्द या कोई भी तकलीफ एक रुकावट है, जिसे एक छोटी सी गोली खाकर तुरंत बंद कर देना चाहिए। जब गोली खाने के दस मिनट बाद दर्द गायब हो जाता है, तो हमें लगता है कि हम बिल्कुल स्वस्थ हो गए हैं। लेकिन क्या यह सच में स्वास्थ्य है?

बिल्कुल नहीं! कल्पना कीजिए कि आपके घर के किसी कमरे में आग लग गई है और फायर अलार्म ज़ोर-ज़ोर से बज रहा है। आप आग बुझाने के बजाय सिर्फ उस अलार्म का तार काट देते हैं ताकि शोर बंद हो जाए। क्या ऐसा करने से आग बुझ जाएगी? नहीं, वह आग खामोशी से पूरे घर को जलाकर राख कर देगी। ठीक यही काम आप अपने शरीर के साथ कर रहे हैं।  शरीर का दर्द, गैस या थकान एक 'अलार्म' है जो बता रहा है कि अंदर कोई ऑर्गन डैमेज हो रहा है। जब आप 'टेम्परेरी रिलीफ' (Temporary Relief) लेकर इस अलार्म को बंद कर देते हैं, तो आप बीमारी को अंदर ही अंदर एक भयंकर और क्रोनिक (Chronic) रूप लेने का पूरा मौका दे रहे होते हैं। 

'Temporary Relief' असल में क्या है और यह कैसे काम करता है?

जब हम किसी भी बीमारी के लक्षणों को महसूस करते हैं, तो आधुनिक दवाइयाँ उस लक्षण के सिग्नल को दिमाग तक पहुँचने से ब्लॉक कर देती हैं। इसे 'सिम्प्टमैटिक ट्रीटमेंट' (Symptomatic Treatment) कहा जाता है।

  • सिग्नल्स को काटना: जब आप पेनकिलर खाते हैं, तो वह आपके घुटने या कमर के डैमेज को नहीं जोड़ती; वह सिर्फ आपके दिमाग को सुन्न कर देती है ताकि उसे दर्द महसूस न हो। डैमेज अपनी जगह पर ज्यों का त्यों रहता है।
  • केमिकल्स को ज़बरदस्ती रोकना: जब आप एसिडिटी की गोली (Antacid) खाते हैं, तो वह आपके पेट के खराब पाचन को नहीं सुधारती, बल्कि एसिड बनाने वाले पंप को ही ज़बरदस्ती बंद कर देती है, जिससे खाना पचना ही रुक जाता है।
  • अस्थायी आराम का भ्रम: कुछ घंटों के लिए शरीर शांत हो जाता है, और आप अपनी उसी गलत लाइफस्टाइल (खराब पोस्चर, जंक फूड) में वापस लौट जाते हैं जिसने बीमारी पैदा की थी, जिससे बीमारी और ज़्यादा गहरी हो जाती है।

लक्षणों को दबाना भविष्य की बीमारियों का कारण कैसे बनता है?

लगातार टेम्परेरी रिलीफ लेना आपके शरीर के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है। इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम होते हैं जिन्हें समझना बहुत ज़रूरी है।

  • बीमारी का विकराल रूप लेना: जब दर्द महसूस नहीं होता, तो आप डैमेज हुए घुटने या कमर के साथ काम करते रहते हैं। जो समस्या आराम या हल्की स्ट्रेचिंग से ठीक हो सकती थी, वह लिगामेंट टियर या स्लिप डिस्क (Slip Disc) बन जाती है, जिसके लिए अंततः सर्जरी करवानी पड़ती है।
  • दवाइयों की लत (Tolerance and Dependency): शरीर बहुत जल्दी इन रासायनिक दवाओं का आदी हो जाता है। जो नींद या दर्द पहले एक गोली से ठीक होता था, उसके लिए शरीर ज़्यादा डोज़ मांगने लगता है। धीरे-धीरे आप इन दवाओं के जीवन भर के गुलाम बन जाते हैं।
  • लिवर और किडनी की तबाही: हर एक गोली जिसे आप 'तुरंत आराम' के लिए खाते हैं, उसे फिल्टर करने का काम आपके लिवर और किडनी को करना पड़ता है। सालों तक पेनकिलर्स और स्टेरॉयड्स खाने से लिवर में टॉक्सिन्स भर जाते हैं और किडनी फेल होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • साइड इफेक्ट्स का चक्रव्यूह: एक बीमारी को दबाने के लिए खाई गई दवा दूसरी बीमारी पैदा करती है। जैसे, दर्द की गोली खाने से पेट में अल्सर हो जाते हैं, फिर अल्सर के लिए गैस की गोली खानी पड़ती है, जिससे हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं। आप बीमारियों के एक अंतहीन चक्रव्यूह में फँस जाते हैं।

आयुर्वेद 'Temporary Relief' के इस तरीके को कैसे देखता है?

आयुर्वेद में बीमारियों के इलाज का सिद्धांत आधुनिक विज्ञान से बिल्कुल अलग है। आयुर्वेद कभी भी बीमारी के सिर्फ 'लक्षण' (Symptom) को सुन्न करने में विश्वास नहीं रखता।

  • निदान परिवर्जन (Removing the Cause): आयुर्वेद का पहला नियम है कि जिस कारण से बीमारी पैदा हो रही है, सबसे पहले उसे हटाओ। अगर गलत बैठने से दर्द है, तो पोस्चर सुधारो, न कि दिमाग को सुन्न करो।
  • दोषों का असंतुलन: शरीर में हर दर्द या बीमारी वात, पित्त और कफ के बिगड़ने का परिणाम है। जब आप सिर्फ दर्द दबाते हैं, तो बिगड़ा हुआ दोष शरीर के दूसरे अंगों पर हमला कर देता है। आयुर्वेद इस दोष को जड़ से संतुलित करता है।
  • अग्नि और आम की पहचान: आयुर्वेद मानता है कि पेट की कमज़ोर 'अग्नि' ही हर बीमारी की जड़ है। टेम्परेरी रिलीफ देने वाली दवाइयाँ इस अग्नि को पूरी तरह बुझा देती हैं, जिससे शरीर में 'आम' (ज़हर) बनता है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको पेनकिलर्स या एंटी-एलर्जिक दवाओं के गुलाम नहीं बनाते जो आपको जीवन भर खानी पड़ें। हमारा लक्ष्य आपकी बीमारी की जड़ (Root Cause) तक पहुँचना और शरीर की हीलिंग क्षमता को दोबारा जगाना है।

  • मूल कारण की खोज: अगर आपको लगातार सिरदर्द है, तो हम आपको तुरंत दर्द की गोली नहीं देते। हम यह खोजते हैं कि क्या यह कब्ज़ की गैस से है, पानी की कमी से है, या मानसिक तनाव से है, और फिर उसी जड़ का इलाज करते हैं।
  • डिटॉक्सिफिकेशन (Detox): शरीर में सालों से जमा टॉक्सिन्स (आम) और रासायनिक दवाओं के कचरे को प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और पंचकर्म से बाहर निकाला जाता है।
  • अंगों का पोषण: जिन अंगों को बीमारी ने या टेम्परेरी दवाओं के साइड इफेक्ट ने कमज़ोर कर दिया है, उन्हें रसायन औषधियों से दोबारा फौलादी ताक़त दी जाती है।

शरीर को जड़ से ठीक करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें दर्द और बीमारियों को बिना किसी साइड इफेक्ट के जड़ से खत्म करने के लिए बहुत ही जादुई जड़ी-बूटियाँ दी हैं।

  • गिलोय: बार-बार बुखार या एलर्जी की गोलियाँ खाने के बजाय, गिलोय शरीर की इम्युनिटी को प्राकृतिक रूप से इतना मज़बूत कर देती है कि बीमारी शरीर पर हावी ही नहीं हो पाती।
  • अश्वगंधा: नींद की गोलियों और स्ट्रेस की दवाओं का यह सबसे बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प है। यह नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करके जड़ से शांति देता है।
  • शल्लाकी और निर्गुंडी: ये जड़ी-बूटियाँ पेनकिलर्स की तरह दिमाग को सुन्न नहीं करतीं, बल्कि जोड़ों की सूजन और दर्द को प्राकृतिक रूप से खींचकर उन्हें अंदर से हील करती हैं।
  • मुलेठी: एंटासिड (गैस की गोली) खाने के बजाय, मुलेठी जली हुई भोजन नली और पेट के अल्सर पर प्राकृतिक परत बनाकर एसिडिटी को हमेशा के लिए शांत करती है।

पंचकर्म थेरेपी: 'क्विक फिक्स' के डैमेज को रिवर्स कैसे करें?

सालों तक 'टेम्परेरी रिलीफ' वाली दवाइयाँ खाने से शरीर में जो ज़हर भर जाता है, उसे बाहर निकालने के लिए पंचकर्म थेरेपी एक जादुई 'हार्ड रिसेट' की तरह काम करती है।

  • विरेचन: यह भारी दवाओं और खराब लाइफस्टाइल से लिवर और आंतों में जमा हुए टॉक्सिन्स को दस्त के रास्ते बाहर निकाल देता है, जिससे मेटाबॉलिज़्म बिल्कुल नया हो जाता है।
  • शिरोधारा: माथे पर औषधीय तेलों की धारा तनाव, डिप्रेशन और अनिद्रा को इस तरह जड़ से खत्म करती है कि आपको कभी भारी स्लीपिंग पिल्स की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • ग्रीवा और कटि बस्ती: कमर और गर्दन के दर्द को सुन्न करने के बजाय, यह थेरेपी गहराई में जाकर सूखी हुई नसों और डिस्क को भारी पोषण देती है।

बीमारियों से स्थायी आज़ादी के लिए वात-पित्त-कफ शामक लाइफस्टाइल

दवाइयों के इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में कुछ सख़्त लेकिन बेहद ज़रूरी बदलाव करने होंगे।

श्रेणी क्या अपनाएँ (अनुशंसित) किनसे परहेज़ करें (वर्जित)
शरीर की सुनें दर्द/थकान होने पर कारण समझें—डाइट, पोस्चर और दिनचर्या का मूल्यांकन करें तुरंत बिना सोचे-समझे पेनकिलर लेना
प्राकृतिक उपचार अपनाएं पर्याप्त पानी पिएं, गहरी सांसें लें, हल्की स्ट्रेचिंग करें हर छोटी परेशानी में तुरंत दवाइयों पर निर्भर होना
ताज़ा और सात्विक भोजन ताज़ा, सुपाच्य भोजन लें और डाइट में गाय का शुद्ध घी शामिल करें बासी, पैकेटबंद और रिफाइंड जंक फूड
पूरी नींद और व्यायाम रोज़ पर्याप्त गहरी नींद लें और शरीर के अनुसार नियमित मूवमेंट/व्यायाम करें नींद की कमी और पूरी तरह निष्क्रिय (Inactive) जीवनशैली

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप सालों की 'क्विक फिक्स' दवाइयाँ खाकर परेशान हो जाते हैं और बीमारी भयंकर रूप ले लेती है, तब हम आपकी जासूसी बीमारी की जड़ तक करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि आपके अंदर 'वात-पित्त-कफ' का स्तर कितना बिगड़ चुका है और कौन सा अंग अंदर से डैमेज हो रहा है।
  • दवाइयों की हिस्ट्री: आपने पिछले कुछ सालों में दर्द, गैस या एलर्जी की कितनी गोलियाँ खाई हैं, इसका गहरा विश्लेषण किया जाता है, क्योंकि अक्सर मरीज़ की आधी तकलीफें इन्हीं दवाओं का साइड इफेक्ट होती हैं।
  • पाचन का विश्लेषण: डॉक्टर यह देखते हैं कि आपकी 'जठराग्नि' काम कर भी रही है या भारी दवाओं के कारण पूरी तरह बुझ चुकी है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपके दर्द और डर को समझते हैं। हम आपको एक ऐसा सुरक्षित, पारदर्शी और स्थायी इलाज का रास्ता देते हैं जहाँ आपको बार-बार गोलियों का सहारा नहीं लेना पड़ता।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बहुत प्यार और धैर्य से बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर दर्द के कारण बाहर जाना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें और अपनी सारी पुरानी रिपोर्ट्स दिखाएं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी प्रकृति के अनुसार खास जड़ी-बूटियाँ, शरीर को डिटॉक्स करने वाले रसायन और एक संतुलित डाइट का पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई 'क्विक फिक्स' या 10 मिनट में दर्द को सुन्न करने वाला जादू नहीं है। शरीर के अंदरूनी डैमेज को दोबारा रिपेयर होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से दर्द, गैस और जकड़न में धीरे-धीरे कमी आने लगेगी। आपको भारी पेनकिलर्स या एंटासिड की ज़रूरत कम पड़ने लगेगी।
  • 1 से 3 महीने तक: शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगेंगे। लिवर और किडनी का भार कम होगा और इम्युनिटी अपने आप बढ़ने लगेगी।
  • 3 से 6 महीने और उससे अधिक: आपकी बीमारी जड़ से खत्म हो जाएगी। शरीर की हीलिंग क्षमता इतनी मज़बूत हो जाएगी कि आपको छोटी-मोटी तकलीफों के लिए कभी दवा नहीं खानी पड़ेगी और आप पूरी तरह आज़ाद महसूस करेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएँ
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएँ

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको जीवन भर दवाइयों के गुलाम नहीं बनाते। हमारा लक्ष्य आपको इतनी प्राकृतिक ताक़त देना है कि आपका शरीर खुद अपना डॉक्टर बन जाए।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ 'फायर अलार्म' बंद करने वाली अस्थायी दवा नहीं देते। हम उस आग (बीमारी की जड़) को बुझाते हैं जो शरीर को अंदर से जला रही है।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का बहुत ही शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों ऐसे केस देखे हैं जहाँ मरीज़ भारी दवाओं के साइड इफेक्ट्स से टूट चुके थे, और हमने उन्हें सुरक्षित रूप से हील किया है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: हर इंसान का शरीर अलग है और बीमारी का कारण भी। इसलिए हमारी डाइट, योग और ट्रीटमेंट प्लान भी बिल्कुल अलग और व्यक्तिगत होते हैं।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी जड़ी-बूटियाँ पूरी तरह प्राकृतिक हैं, जो शरीर के बिगड़े हुए सिस्टम को बिना लिवर या किडनी को नुकसान पहुँचाए अंदर से रिपेयर करती हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

शरीर की तकलीफों को दूर करने के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना सबसे ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य ‘सिम्प्टम मैनेजमेंट’ के जरिए लक्षणों को दबाकर तुरंत राहत देना ‘रूट कॉज़’ को हटाकर बीमारी को जड़ से खत्म करना
शरीर को देखने का नज़रिया बीमारी को शरीर का दुश्मन मानकर केमिकल से दबाना बीमारी को शरीर की असंतुलित भाषा मानकर उसे प्राकृतिक रूप से संतुलित करना
डाइट और जीवनशैली की भूमिका क्विक फिक्स में डाइट की सीमित भूमिका; दवाइयों पर निर्भरता सही डाइट और दिनचर्या को ही असली उपचार का आधार मानना
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ते ही समस्या दोबारा और तेज़ी से लौटना जड़ी-बूटियों से इम्युनिटी मज़बूत कर शरीर को खुद बीमारियों से लड़ने योग्य बनाना

निष्कर्ष

"आज का टेम्परेरी रिलीफ, कल की परमानेंट बीमारी है।" जब भी आप अपने शरीर के किसी दर्द, एसिडिटी या थकान को एक केमिकल गोली के ज़रिए तुरंत बंद कर देते हैं, तो आप शरीर की मदद नहीं कर रहे होते, बल्कि आप उसके चेतावनी देने वाले सिस्टम (Warning System) को धोखा दे रहे होते हैं। आपका शरीर आपको बता रहा है कि आपकी लाइफस्टाइल, आपका पोस्चर या आपका खाना गलत है। उसे रसायनों से सुन्न करके आप उस डैमेज को अंदर ही अंदर बढ़ने का पूरा मौका देते हैं, जो आगे चलकर स्लिप डिस्क, लिवर फेलियर या भयंकर अल्सर के रूप में सामने आता है। 'क्विक फिक्स' के इस खतरनाक शॉर्टकट से बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है। आयुर्वेद आपको एक ऐसा सुरक्षित और गहरा रास्ता दिखाता है जहाँ बीमारी के लक्षणों को दबाया नहीं जाता, बल्कि समझा जाता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, शल्लाकी और अश्वगंधा जैसी प्राकृतिक औषधियों, पंचकर्म की डिटॉक्स थेरेपी और एक सात्विक जीवनशैली को अपनाकर आप अपने शरीर को जड़ से हील कर सकते हैं। अपने शरीर की आवाज़ को सुनें, दर्द को छुपने न दें, और जीवा आयुर्वेद के साथ एक ऐसा स्वास्थ्य पाएं जो सच्चा, सुरक्षित और हमेशा टिकने वाला हो।

FAQs

पेनकिलर्स में भारी केमिकल्स होते हैं। जब आप इन्हें रोज़ खाते हैं, तो किडनी और लिवर को इन रसायनों को शरीर से बाहर निकालने (फिल्टर करने) के लिए अपनी क्षमता से ज़्यादा काम करना पड़ता है, जिससे ये अंग डैमेज होने लगते हैं।

ये दवाइयाँ पेट में एसिड को ज़बरदस्ती बनने से रोक देती हैं। एसिड के बिना खाना पचता नहीं है और पेट में सड़ने लगता है। लंबे समय तक ऐसा करने से हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और पाचन तंत्र पूरी तरह बर्बाद हो जाता है।

रोज़ाना सिरदर्द का मतलब है कि आपके शरीर में पानी की कमी (Dehydration), भयंकर गैस या नसों में तनाव है। पेनकिलर खाने के बजाय भरपूर पानी पिएं, पेट साफ रखें और अपनी स्क्रीन टाइमिंग कम करें। जड़ का इलाज करें।

लगातार एक ही केमिकल दिमाग तक जाने से शरीर उसका आदी हो जाता है। धीरे-धीरे शरीर के रिसेप्टर्स उस डोज़ पर काम करना बंद कर देते हैं, जिससे उसी दर्द को कम करने के लिए आपको ज़्यादा और भारी दवाएं खानी पड़ती हैं।

आयुर्वेद मानता है कि शरीर में उठने वाला कोई भी दर्द वात दोष के भड़कने और पाचन अग्नि के कमज़ोर होने के कारण पैदा हुए आम (टॉक्सिन्स) का नतीजा है। यह आम नसों को ब्लॉक कर देता है।

आयुर्वेदिक औषधियाँ पेनकिलर्स की तरह दिमाग को तुरंत सुन्न नहीं करतीं, इसलिए इनमें 10 मिनट वाला जादू नहीं होता। लेकिन ये सुरक्षित तरीके से सूजन और वात को कम करती हैं और बीमारी को जड़ से खत्म करने का काम पहले दिन से शुरू कर देती हैं।

जब आपको दर्द महसूस नहीं होता, तो आप उस डैमेज हुए हिस्से (जैसे घुटने या कमर) पर लगातार दबाव डालते रहते हैं। बिना दर्द के आपको अपनी सीमा (Limit) पता नहीं चलती, जिससे हल्का सा खिंचाव एक भयंकर लिगामेंट टियर या स्लिप डिस्क बन जाता है।

बिल्कुल नहीं। स्लीपिंग पिल्स दिमाग को सुन्न करके कृत्रिम (Artificial) नींद लाती हैं, जो दिमाग को आराम नहीं देतीं। इससे आप डिप्रेशन और याद्दाश्त कमज़ोर होने (Memory loss) का शिकार हो सकते हैं।

सालों तक क्विक फिक्स दवाइयाँ खाने से शरीर में जो केमिकल टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं, पंचकर्म (जैसे विरेचन) उन्हें लिवर और खून की गहराई से निकालकर दस्त के रास्ते बाहर कर देता है, जिससे शरीर पूरी तरह डिटॉक्स हो जाता है।

अगर कोई दर्द अचानक बहुत तेज़ हो जाए, 3-4 दिन से ज़्यादा लगातार बना रहे, दर्द के साथ बुखार हो, या कोई दवा काम न कर रही हो, तो उसे घर पर पेनकिलर्स से दबाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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