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अचानक weight gain से Sciatica का risk कैसे बढ़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 27 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 15 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5063

अक्सर लोग अचानक बढ़ते वज़न को सिर्फ दिखने से जोड़कर देखते हैं लेकिन इसके पीछे छिपे असर कहीं ज़्यादा गहरे होते हैं। जब बिना किसी स्पष्ट वजह के शरीर का भार तेजी से बढ़ने लगता है तो यह केवल ऊर्जा असंतुलन का संकेत नहीं होता बल्कि शरीर के अंदर चल रहे कई बदलावों की ओर इशारा करता है इन्हीं बदलावों का सबसे ज़्यादा असर कमर और नसों पर पड़ता है जहां से कई गंभीर समस्याएं शुरू होती हैं।

कई बार लोग हल्के कमर दर्द या पैरों में झनझनाहट को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़  कर देते हैं लेकिन यही छोटे संकेत आगे चलकर साइटिका जैसी तकलीफ का रूप ले सकते हैं खास बात यह है कि बढ़ता वज़न इस समस्या को और तेजी से बढ़ा सकता है जिससे रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लगने लगते हैं ऐसे में जरूरी है कि हम समय रहते इन संकेतों को समझें और शरीर में हो रहे बदलावों को नज़रअंदाज़  न करें।

साइटिका वास्तव में क्या है? 

साइटिका कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है जो तब उत्पन्न होता है जब हमारे शरीर की सबसे लंबी नस जिसे साइटिक नर्व कहते हैंदब जाती है या उसमें सूजन आ जाती है यह नस रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से से शुरू होकर दोनों पैरों के नीचे तक जाती है आयुर्वेद में इसे गृध्रसी कहा जाता है जहाँ दर्द के कारण व्यक्ति की चाल गिद्ध जैसी हो जाती है।

अचानक वज़न बढ़ने से साइटिका का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

अचानक वज़न बढ़ना सिर्फ दिखने तक सीमित समस्या नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर आपकी रीढ़ की हड्डी और नसों पर असर डालता है। जब शरीर का वज़न तेजी से बढ़ता हैतो कमर के निचले हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है यही दबाव साइटिक नर्व  पर असर डालता है जिससे दर्द झनझनाहट और सुन्नपन जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं खासकर Belly Fat बढ़ने पर शरीर का संतुलन बिगड़ता है और स्पाइन  पर लोड  असमान रूप से पड़ता है जिससे नस दबने की संभावना और बढ़ जाती है।

इसके अलावा बढ़ा हुआ वज़न मांसपेशियों को कमज़ोर  करता है जिससे वे रीढ़ को सही सपोर्ट नहीं दे पातीं। यही कारण है कि अचानक weight gain वाले लोगों में Sciatica का risk ज़्यादा देखा जाता है अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए तो यह दर्द धीरे-धीरे chronic बन सकता है और चलने-फिरने तक में दिक्कत दे सकता है।

साइटिका के शुरुआती लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़  करना भारी पड़ सकता है

कमर के निचले हिस्से में लगातार हल्का या तेज दर्द रहना

  • एक पैर में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना
  • बैठने या खड़े होने पर दर्द का बढ़ जाना
  • पैर तक फैलने वाला जलन जैसा दर्द
  • लंबे समय तक चलने या झुकने में परेशानी होना

शरीर में बढ़ा हुआ वज़न नसों पर कैसे दबाव डालता है?

जब शरीर का वज़न बढ़ता है तो उसका सीधा असर आपकी रीढ़ की संरचना पर पड़ता है। रीढ़ की हड्डी हमारे पूरे शरीर का आधार होती है और इसके बीच से कई महत्वपूर्ण नसें गुजरती हैं बढ़ते वज़न के कारण रीढ़ की डिस्क पर अतिरिक्त भार पड़ता है जिससे वे दबने लगती हैं इस दबाव के कारण सायटिक नस प्रभावित होती है जिससे दर्द सुन्नपन और कमज़ोरी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं खासकर पेट के आगे की ओर वज़न बढ़ने से शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है 

जिससे कमर आगे की ओर झुकने लगती है। यह स्थिति नसों पर लगातार दबाव बनाए रखती है इसके अलावा वज़न बढ़ने से मांसपेशियां कमज़ोर  होने लगती हैं जिससे रीढ़ को पर्याप्त सहारा नहीं मिल पाता। यही कारण है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में साइटिका का खतरा अधिक देखा जाता है सही समय पर वज़न को नियंत्रित करना और शरीर को सक्रिय रखना इस समस्या से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय है।

कमर और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त वज़न का असर

जब शरीर पर जरूरत से ज़्यादा वज़न आ जाता है तो कमर और रीढ़ की हड्डी पर इसका सीधा दबाव पड़ता है रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा इस भार को सबसे ज़्यादा सहन करता है जिससे वहां की डिस्क धीरे-धीरे कमज़ोर  होने लगती हैं अतिरिक्त वज़न के कारण रीढ़ की प्राकृतिक बनावट भी बिगड़ सकती है जिससे दर्द और जकड़न बढ़ती है समय के साथ यह दबाव नसों को प्रभावित करता है और साइटिका जैसी समस्या पैदा कर सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर और आयुर्वेद दोनों ही वज़न को संतुलित रखने पर ज़ोर  देते हैं।

 वज़न के कारण नसों में सूजन और दर्द क्यों बढ़ता है?

वज़न बढ़ने के साथ शरीर में सूजन की प्रवृत्ति भी बढ़ने लगती है। जब शरीर में अधिक चर्बी जमा होती है तो यह केवल बाहरी बदलाव नहीं करती बल्कि अंदरूनी स्तर पर भी कई परिवर्तन लाती है यह चर्बी सूजन बढ़ाने वाले तत्वों को सक्रिय करती है जिससे नसों के आसपास जलन और सूजन होने लगती है जब सायटिक नस के आसपास सूजन बढ़ती है तो उस पर दबाव और अधिक बढ़ जाता है जिससे दर्द तेज हो जाता है यही कारण है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में साइटिका का दर्द ज़्यादा तीव्र और लंबे समय तक रहने वाला होता है। इसके अलावा वज़न बढ़ने से रक्त संचार भी प्रभावित होता है जिससे नसों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। इससे नसें और कमज़ोर  हो जाती हैं और दर्द की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए सूजन को कम करना और वज़न को नियंत्रित रखना साइटिका के प्रबंधन में बेहद जरूरी होता है।

लाइफस्टाइल और डाइट साइटिका को जड़ से खत्म करने का तरीका

आयुर्वेद के अनुसार साइटिका को हराने के लिए वात को शांत करना जरूरी है। अपनी दिनचर्या में ये 5 बदलाव करें

  • गरम और ताजा भोजन बासी और ठंडे भोजन से बचें हमेशा ताज़ा और सुपाच्य खाना खाएं।
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट खाने में अदरक लहसुन और हल्दी का उपयोग बढ़ाएँ जो सूजन कम करते हैं।
  • नियमित योग कटि-चक्रासन और भुजंगासन को अपनी मॉर्निंग रूटीन का हिस्सा बनाएं।
  • सही नींद हमेशा सख्त गद्दे Firm Mattress पर सोएं और सोते समय घुटनों के नीचे तकिया लगाएं।
  • ठंड से बचाव एसी AC की सीधी हवा कमर पर न पड़ना दें क्योंकि ठंडक से दर्द बढ़ता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण वज़न बढ़ने और साइटिका के बीच क्या संबंध है?

आयुर्वेद के अनुसार साइटिका को कटिशूल या ग्रिध्रसी कहा जाता है जिसका मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन होता है। जब शरीर में वज़न बढ़ता है तो कफ दोष भी बढ़ने लगता है जो शरीर में भारीपन और जड़ता पैदा करता है। यह बढ़ा हुआ कफ वात के मार्ग को अवरुद्ध Block कर देता है जिससे नसों में दर्द और सूजन उत्पन्न होती है। आयुर्वेद मानता है कि जब वात और कफ दोनों दोष असंतुलित होते हैं तो साइटिका की समस्या और गंभीर हो जाती है। इसके अलावा गलत आहार और अनियमित दिनचर्या इस असंतुलन को और बढ़ा देती है। इसलिए आयुर्वेद में साइटिका के इलाज के लिए केवल दर्द को नहीं बल्कि शरीर के दोषों को संतुलित करने पर ज़ोर  दिया जाता है। यही कारण है कि आयुर्वेदिक उपचार लंबे समय तक राहत देने में सहायक होता है।

पंचकर्म और आयुर्वेदिक थेरेपी से साइटिका में कैसे मिलती है राहत?

  • अभ्यंग से नसों को पोषण मिलता है और दर्द कम होता है
  • बस्ती थेरेपी से वात दोष संतुलित होता है
  • स्वेदन से जकड़न और सूजन में राहत मिलती है
  • कटी बस्ती से कमर के दर्द में सीधी राहत मिलती है
  • विरेचन से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं

इलाज से क्या फायदा मिल सकता है? 

  • पुरानी रफ़्तार आप बिना किसी डर के दोबारा लंबी सैर और सीढ़ियाँ चढ़ना शुरू कर सकते हैं।
  • सर्जरी से छुटकारा 90% से ज़्यादा मामलों में जहाँ डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं वहां सही आयुर्वेदिक पंचकर्म जैसे कटि बस्ती से मरीज़  पूरी तरह ठीक हो सकता है।
  • नसों का पुनरुद्धार आयुर्वेदिक तेल और औषधियाँ दबी हुई नसों को गहराई से पोषण देती हैं जिससे पैरों की कमज़ोरी दूर होती है।
  • शून्य दुष्प्रभाव Zero Side Effects लंबे समय तक पेनकिलर्स खाने से होने वाले किडनी और लिवर के नुकसान से आप पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।
  • बेहतर लाइफस्टाइल चूँकि आयुर्वेद आपकी अग्नि पाचन पर भी काम करता है इसलिए आपका पेट साफ़ रहेगा और आप ऊर्जावान महसूस करेंगे।

मरीज़ों का अनुभव

मुझे काम की वज़ह से 14-16 घंटे लगातार बैठना पड़ता था जिससे मेरे स्पाइन spine में प्रॉब्लम हो गई। मेरी हालत ऐसी थी कि मैं बिना सहारे के उठ भी नहीं सकता था। फिर मुझे जीवा ग्राम Jiva Gram के बारे में पता लगा।

यहाँ डॉक्टर्स की टीम ने मेरी पूरी दिनचर्या समझी और मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया। सबसे बड़ी बात यह है कि बिना किसी पेनकिलर के सिर्फ शुद्ध थैरेपी के बेस पर मैं 10 दिनों में वापस चलने-फिरने के काबिल हो गया। 

जब मैं यहाँ आया था तब खड़ा नहीं हो पा रहा था लेकिन आज मैं खुद 40 किलोमीटर कार ड्राइव करके घर जा रहा हूँ। यहाँ का सात्विक खाना और वातावरण बहुत ही जबरदस्त हैं। मुझे नया जीवन देने के लिए मैं जीवा ग्राम Jiva Gram का बहुत आभारी हूँ।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

मरीज़ के मन में अक्सर यह उलझन होती है कि वह कौन सा रास्ता चुने। यहाँ दोनों का अंतर आसान भाषा में समझाया गया है

आधुनिक Allopathy इलाज आयुर्वेदिक Ayurveda इलाज
नज़रिया मुख्य रूप से दर्द के लक्षणों Pain को दबाने पर ज़ोर देता है नज़रिया दर्द की जड़ वात दोष और अग्नि को संतुलित करने पर काम करता है
दवाइयाँ पेनकिलर्स स्टेरॉयड इंजेक्शन या मसल रिलैक्सेंट्स दवाइयाँ जड़ी-बूटियाँ जैसे शल्लकी अश्वगंधा जो नसों को पोषण देती हैं
प्रक्रिया गंभीर मामलों में सीधे सर्जरी Discectomy की सलाह दी जाती है प्रक्रिया पंचकर्म कटि बस्ती स्नेहन के ज़रिए बिना सर्जरी सुधार का प्रयास
दुष्प्रभाव लंबे समय तक पेनकिलर्स लेने से किडनी और पेट पर असर पड़ सकता है दुष्प्रभाव सामान्यतः प्राकृतिक उपचार जो पूरे शरीर के संतुलन पर काम करते हैं
नतीजा तुरंत राहत मिल सकती है लेकिन समस्या दोबारा होने का खतरा रहता है नतीजा सुधार में समय लगता है पर लंबे समय तक राहत मिल सकती है

कब आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

यदि कमर का दर्द लगातार बना रहता है और धीरे-धीरे पैरों तक फैलने लगता है तो इसे नज़रअंदाज़  करना सही नहीं है। जब दर्द के साथ सुन्नपन कमज़ोरी या चलने में दिक्कत महसूस होने लगे तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि वज़न तेजी से बढ़ रहा हो और उसके साथ कमर में दर्द भी शुरू हो जाए तो यह साइटिका का संकेत हो सकता है। समय पर इलाज न लेने से समस्या और गंभीर हो सकती है और दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को समझकर सही समय पर कदम उठाना ही सबसे बेहतर उपाय माना जाता है।

निष्कर्ष

अचानक बढ़ता वजन सिर्फ बाहरी बदलाव नहीं लाता बल्कि यह शरीर के अंदर ऐसी स्थितियां पैदा करता है जो साइटिका जैसी समस्या को जन्म दे सकती हैं। कमर और रीढ़ पर बढ़ता दबाव नसों में सूजन और बिगड़ी हुई जीवनशैली मिलकर इस दर्द को और गंभीर बना देते हैं। अगर समय रहते इसके संकेतों को समझ लिया जाए और सही कदम उठाए जाएं तो इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर के दोषों को संतुलित करके और सही आहार-विहार अपनाकर साइटिका और वजन दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय पर सही उपचार अपनाएं ताकि एक स्वस्थ और दर्दमुक्त जीवन जी सकें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, अचानक वजन बढ़ने से कमर और नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे साइटिका का खतरा बढ़ सकता है।

यह दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों, जांघों और पैरों तक फैल सकता है।

हल्के मामलों में आराम मिल सकता है, लेकिन लंबे समय तक दर्द रहने पर इलाज जरूरी होता है।

हाँ, अधिक वजन नसों पर दबाव बढ़ाता है और दर्द को और गंभीर बना सकता है।

हल्के स्ट्रेचिंग और योगासन जैसे भुजंगासन और पवनमुक्तासन फायदेमंद हो सकते हैं।

आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों, पंचकर्म और जीवनशैली सुधार के जरिए साइटिका में राहत मिल सकती है।

लंबे समय तक बैठना, भारी वजन उठाना और गलत पोस्चर से बचना चाहिए।

हाँ, पेट की चर्बी बढ़ने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है और कमर पर दबाव बढ़ता है।

कमर दर्द, पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और चलने में दिक्कत इसके सामान्य लक्षण हैं।

जब दर्द लगातार बढ़ रहा हो, पैरों में कमज़ोरी आए या चलने में परेशानी हो, तब तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

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