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Shoulder pain लंबे समय तक रहे तो क्या कारण हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 06 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 06 Jul, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5006

अक्सर हम सोचते हैं कि कंधे में दर्द बस गलत तरीके से सोने या थोड़ा भारी सामान उठा लेने का नतीजा है। हम बाम लगाते हैं, एक-दो पेनकिलर खाते हैं और उम्मीद करते हैं कि अगली सुबह सब ठीक हो जाएगा। लेकिन कई लोगों के साथ ऐसा होता है  कि हफ्तों या महीनों बीत जाने के बाद भी यह दर्द जाने का नाम क्यों नहीं लेता? कपड़े पहनने, बाल कंघी करने या रात को करवट लेने में भी जब कंधे में टीस उठने लगे, तो यह किसी सामान्य थकावट का संकेत नहीं है।

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, घंटों लैपटॉप पर काम करने की आदत, और गलत पोश्चर ने इस समस्या को हर दूसरे व्यक्ति की कहानी बना दिया है।केवल दर्द निवारक दवाओं से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन इससे समस्या का मूल कारण दूर नहीं होता।  बल्कि शरीर के अंदर असली मरम्मत का काम तो तब शुरू होता है जब हम 'शोल्डर पेन' की जड़ को समझते हैं। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह लगातार बना रहने वाला दर्द कोई आम ऐंठन नहीं है, बल्कि आपके शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों की ओर से ध्यान देने की पुकार है।

लगातार कंधे में दर्द के दौरान शरीर और नसों में क्या होता है?

जब आपके कंधे में हफ्तों तक दर्द रहता है, तो इसका मतलब है कि समस्या सिर्फ बाहरी मांसपेशियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंदरूनी संरचना में गहराई तक पहुँच चुकी है। हमारा कंधा शरीर के सबसे जटिल और मूवेबल जोड़ों में से एक है। जब हम लगातार गलत पोश्चर में बैठते हैं, तो रोटेटर कफ, मांसपेशियों का वह समूह है जो कंधे को घुमाने में मदद करता है, उस पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। 

इस लगातार खिंचाव से मांसपेशियों में छोटे-छोटे टियर्स आने लगते हैं। अगर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो जोड़ों के बीच मौजूद चिकनाई कम होने लगती है और हड्डियाँ एक-दूसरे से रगड़ खाने लगती हैं। कई बार यह 'फ्रोज़न शोल्डर' (Adhesive Capsulitis) का रूप ले लेता है, जिसमें कंधे के जोड़ को घेरने वाले कैप्सूल में सूजन आ जाती है और वह सिकुड़ कर सख्त हो जाता है। जिस तरह किसी मशीन के पुर्जों में तेल न डालने पर वे जाम हो जाते हैं और आवाज़ करने लगते हैं, ठीक उसी तरह आपका कंधा अपनी प्राकृतिक मोबिलिटी खो देता है।

क्या सिर्फ पेनकिलर या बाम लगाने का मतलब दर्द मिटना है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार लोग महीनों तक खुद को पेनकिलर के सहारे चलाते हैं और सोचते हैं कि दर्द का एहसास न होना ही रिकवरी है। पेनकिलर खाने का मतलब सिर्फ इतना है कि आपने अपने दिमाग तक दर्द का सिग्नल ले जाने वाले रास्ते को थोड़ी देर के लिए ब्लॉक कर दिया है।

लेकिन उस जोड़ के अंदर जो घर्षण, जकड़न और सूजन है, उसकी भरपाई सिर्फ दवाइयों से नहीं होती। अगर आप इस क्रॉनिक पेन (लगातार बनी रहने वाली पीड़ा) में यह सोचकर काम कर रहे हैं कि 'बाम लगाने से सब ठीक हो जाएगा, तो फायदे की जगह आप अपने कंधे को स्थायी नुकसान की तरफ धकेल रहे हैं। समस्या आपके काम में नहीं, बल्कि हमारी इस आधी-अधूरी दिनचर्या और दर्द को दबाने की गलत आदत में है।

कंधे के इस लगातार दर्द से आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जब हम बिना सोचे-समझे इस शारीरिक संकेत को नज़रअंदाज़ करके शरीर से ज़बरदस्ती मशीन की तरह काम लेते हैं, तो अंदर अजीबोगरीब और खतरनाक बदलाव होते हैं:

  • नींद का चक्र टूटना (Sleep Deprivation): कंधे का दर्द रात में अक्सर बढ़ जाता है। करवट लेते ही दर्द की टीस से नींद टूट जाती है, जिससे शरीर को डीप स्लीप नहीं मिल पाती और आप अगले दिन थका हुआ महसूस करते हैं।
  • सर्वाइकल और गर्दन तक दर्द का फैलना (Radiating Pain): कंधे की मांसपेशियां गर्दन से जुड़ी होती हैं। कंधे के दर्द को एडजस्ट करने के चक्कर में हमारा पोश्चर बिगड़ता है, जिससे यह दर्द गर्दन और सिर के पिछले हिस्से तक पहुँच जाता है।
  • मांसपेशियों का कमज़ोर होना (Muscle Atrophy): दर्द के डर से जब हम कंधे का इस्तेमाल कम कर देते हैं, तो वहां की मांसपेशियां सिकुड़ने और कमज़ोर होने लगती हैं, जिससे भविष्य में थोड़ा सा भार उठाने पर भी चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन: रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम (जैसे पीछे से बेल्ट बांधना, शेल्फ से कुछ उतारना या ड्राइविंग करना) न कर पाने से आत्मविश्वास गिरता है, बेवजह गुस्सा आता है और काम पर फोकस करना नामुमकिन सा लगने लगता है।

प्राचीन आयुर्वेद कंधे के इस जिद्दी दर्द को किस नज़रिए से देखता है?

आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में मानसिक तनाव और शारीरिक गलतियों के कारण 'वात दोष' (Vata Dosha) कुपित होकर जोड़ों में बैठ जाता है, तो इस तरह की दर्दनाक स्थितियां पैदा होती हैं। वात का गुण है सूखापन, रूखापन और अस्थिरता।आयुर्वेद में कंधे की कुछ दर्दयुक्त स्थितियों को 'अपबाहुक' (Apabahuka) के अंतर्गत वर्णित किया गया है। यह बढ़ा हुआ वात आपके कंधे के जोड़ में मौजूद 'श्लेषक कफ' जो जोड़ों को चिकनाई देता है) को सुखा देता है।

आयुर्वेद यह भी मानता है कि बैठे रहने से और गलत खानपान के कारण हमारी 'जठराग्नि' (पाचन अग्नि) मंद पड़ जाती है। जब जठराग्नि कमज़ोर होती है, तो आप जो भी खाते हैं वह पूरी तरह पचने के बजाय 'आम' (टॉक्सिन्स/ज़हरीले तत्व) में बदल जाता है। यह 'आम' रक्त के ज़रिए यात्रा करता है और कमज़ोर जोड़ों (जैसे कंधे) में जाकर जमा हो जाता है, जिससे नसों में ब्लॉकेज और भयंकर दर्द होता है। आयुर्वेद सिर्फ दर्द को सुन्न करने की सलाह नहीं देता, बल्कि 'वात' को शांत करने, जठराग्नि को वापस तेज़ करने और जोड़ों की चिकनाई बढ़ाने वाली आदतों पर ज़ोर देता है।

आधुनिक दृष्टिकोण बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण 

लंबे समय तक रहने वाले दर्द को समझने और उसके इलाज को लेकर आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद में क्या अंतर है, इसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:

पैरामीटर (Parameter) आधुनिक विज्ञान (Modern Medicine) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण (Ayurvedic Perspective)
मूल कारण (Root Cause) रोटेटर कफ इंजरी, इन्फ्लेमेशन या जोड़ों का घिसना (Wear and Tear)। कुपित 'वात' दोष और श्लेषक कफ का सूखना (अपबाहुक)।
दर्द का कारण (Trigger) ओवरयूज़, गलत पोश्चर या कोई शारीरिक चोट। जठराग्नि (पाचन) का कमज़ोर होना और 'आम' (Toxins) का नसों में जमना।
इलाज का तरीका (Treatment Focus) पेनकिलर्स (NSAIDs), स्टेरॉयड के इंजेक्शन, या बर्फ की सिकाई। वात-शामक जड़ी-बूटियाँ, गर्म तेल की मालिश (स्नेहन) और जठराग्नि बढ़ाना।
मुख्य लक्ष्य (Ultimate Goal) तुरंत दर्द कम करना और सूजन को अस्थायी रूप से दबाना। शरीर के प्राकृतिक ओजस (Ojas) को बढ़ाकर जड़ से समस्या को खत्म करना।

खोई हुई मोबिलिटी वापस लाने वाले और दर्द मिटाने के बेहतरीन तरीके

प्रकृति और सही दिनचर्या में कुछ ऐसी बेहतरीन आदतें छिपी हैं, जो कंधे के इस क्रॉनिक दर्द को तेज़ी से खत्म कर मांसपेशियों में नई जान फूँक देती हैं:

  • गर्म तेल की मालिश (स्नेहन): महानारायण तेल, तिल का तेल, या धन्वंतरम तेल को हल्का गर्म करके कंधे और गर्दन के आसपास हल्के हाथों से मालिश करें। यह सूखे हुए 'श्लेषक कफ' को वापस लाता है और जमे हुए वात को शांत करता है।
  • हर्बल सिकाई (स्वेदन): मालिश के बाद गर्म पानी की थैली या सूती कपड़े की पोटली (जिसमें अजवाइन और सेंधा नमक हो) से सिकाई करें। यह जमे हुए 'आम' (टॉक्सिन्स) को पिघलाकर नसों को खोलता है और रक्त संचार तेज़ करता है।
  • पेंडुलम एक्सरसाइज और माइक्रो-मूवमेंट्स: दर्द के बावजूद कंधे को पूरी तरह स्थिर न रखें। थोड़ा झुककर हाथ को पेंडुलम की तरह आगे-पीछे और गोल-गोल घुमाएं। दीवार के सहारे उंगलियों को ऊपर ले जाने (Wall Crawl) का अभ्यास करें। यह जोड़ों की जकड़न को तोड़ता है।
  • वात-शामक और सात्विक आहार: बहुत ज़्यादा ठंडा पानी, फ्रिज का रखा बासी खाना, राजमा, और मैदे से बनी चीज़ें पूरी तरह छोड़ दें, क्योंकि ये वात बढ़ाते हैं। इसके बजाय, गाय का घी, अदरक, लहसुन और हल्दी का सेवन बढ़ाएं। यह शरीर के अंदर की सूजन (Inflammation) को प्राकृतिक रूप से कम करते हैं।

वो आम गलतियाँ जो कंधे के दर्द को और बढ़ा देती हैं

हम अक्सर दर्द के साथ सर्वाइव (Survive) करने के लिए जाने-अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो परेशानी बढ़ा देता है:

  • कंधे को पूरी तरह आराम देना (Sling में रखना): कई लोग दर्द होने पर हाथ को बिल्कुल नहीं हिलाते। इससे कंधे का कैप्सूल और ज़्यादा सिकुड़ जाता है, जो आगे चलकर क्रोनिक फ्रोज़न शोल्डर का रूप ले लेता है।
  • गलत तरीके से सोना: दर्द वाले कंधे की तरफ करवट लेकर सोना या बहुत ऊंचे तकिए का इस्तेमाल करना नसों पर भारी दबाव डालता है। हमेशा सीधे (पीठ के बल) सोएं या दर्द रहित कंधे की तरफ करवट लें।
  • भारी वज़न उठाना या अचानक झटके वाले मूवमेंट: जिम में बिना वॉर्म-अप के भारी डंबल उठाना या घर में कोई भारी सामान अचानक खींच लेना पहले से कमज़ोर रोटेटर कफ को फाड़ (Tear) सकता है।
  • सिर्फ बाहरी इलाज पर निर्भर रहना: बिना अपनी डाइट (जठराग्नि) और पोश्चर को सुधारे, सिर्फ मलम लगाने से कभी भी स्थायी आराम नहीं मिल सकता।

दर्द के दौरान डॉक्टर के पास भागने की नौबत कब आ सकती है?

घरेलू उपाय, आराम और लाइफस्टाइल सुधारने के बाद भी अगर शरीर में ये लक्षण दिखें, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • जब दर्द आपके बाएं कंधे से शुरू होकर सीधे सीने (Chest), जबड़े या पीठ की तरफ जा रहा हो, और साथ में पसीना या साँस फूल रही हो (यह हार्ट अटैक या एंजाइना का संकेत हो सकता है)।
  • कंधे में अचानक ऐसा भयंकर दर्द हो कि आप अपने हाथ को एक इंच भी ऊपर न उठा पाएं या बांह पूरी तरह सुन्न (Numb) हो जाए।
  • कंधे के जोड़ में गर्माहट, बहुत ज़्यादा लालिमा (Redness) और तेज़ बुखार आ जाए (यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है)।
  • अगर आपको पहले कोई गंभीर बीमारी रह चुकी है और बिना किसी चोट के अचानक कंधे में भयंकर दर्द शुरू हो जाए।

निष्कर्ष

कंधे में लंबे समय तक रहने वाला दर्द केवल थकान या सामान्य खिंचाव का परिणाम नहीं होता। कई बार इसके पीछे रोटेटर कफ की समस्या, फ्रोज़न शोल्डर, गलत पोश्चर या अन्य मस्कुलोस्केलेटल कारण हो सकते हैं। यदि दर्द लगातार बना रहे, हाथ उठाने में कठिनाई हो या दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित होने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

संतुलित जीवनशैली, सही पोश्चर, नियमित स्ट्रेचिंग, पर्याप्त आराम और समय पर विशेषज्ञ की सलाह कंधे की कार्यक्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में भी जीवनशैली और शरीर के संतुलन पर विशेष जोर दिया गया है। सही देखभाल और उचित मार्गदर्शन के साथ अधिकांश लोग इस समस्या से राहत पा सकते हैं।

References

Overview: Shoulder pain - InformedHealth.org - NCBI Bookshelf

Best Shoulder Pain Treatments and Tips - Harvard Health

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC11427854/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह रोटेटर कफ की समस्या, फ्रोज़न शोल्डर, गलत पोश्चर या बार-बार होने वाले तनाव के कारण हो सकता है।

हाँ, लंबे समय तक झुककर बैठने या लैपटॉप पर काम करने से कंधे और गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

यह ऐसी स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ की मूवमेंट सीमित हो जाती है और दर्द के साथ जकड़न महसूस होती है।

नहीं, पेनकिलर केवल अस्थायी राहत देते हैं। मूल कारण का उपचार जरूरी होता है।

करवट बदलने या हाथ हिलाने पर दर्द बढ़ सकता है, जिससे नींद बार-बार टूटती है।

हाँ, कई मामलों में दर्द गर्दन और ऊपरी पीठ तक महसूस हो सकता है।

पेंडुलम एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग जैसे हल्के व्यायाम गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

आयुर्वेद में इसे वात असंतुलन और "अपबाहुक" जैसी अवस्थाओं से जोड़ा जाता है।

यदि दर्द कई सप्ताह तक रहे, हाथ उठाने में कठिनाई हो या सुन्नपन महसूस हो, तो चिकित्सकीय सलाह लें।

सही पोश्चर, नियमित स्ट्रेचिंग, पर्याप्त आराम और संतुलित जीवनशैली अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है।

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