Diseases Search
Close Button
 
 

Antibiotic course के बाद digestion क्यों बिगड़ जाता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी बीमारी को ठीक करने के लिए आपने एंटीबायोटिक दवाइयाँ खाई हों, बीमारी तो चली गई लेकिन आपका पेट बुरी तरह खराब हो गया? यह एक ऐसी परेशानी है जिसे ज़्यादातर लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में महसूस करते हैं। जब हम बुखार या इन्फेक्शन से उठते हैं, तो हमें लगता है कि शरीर अब बिल्कुल ठीक हो जाएगा। लेकिन पेट में गैस बनना, भारीपन और कब्ज़ जैसी समस्याएँ हमें अंदर तक परेशान कर देती हैं। इस ब्लॉग में हम इसी उलझन को सुलझाएँगे और जानेंगे कि दवाइयों के बाद डाइजेशन क्यों बिगड़ता है।

एक्सपर्ट्स की क्या राय है?

मेडिकल फील्ड के बड़े एक्सपर्ट्स और पेट के डॉक्टरों का यह स्पष्ट मानना है कि एंटीबायोटिक्स हमारे शरीर के लिए एक दोधारी तलवार की तरह काम करती हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हमारा पूरा पाचन तंत्र करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया पर निर्भर करता है, जो खाना पचाने में मदद करते हैं। डॉक्टरों की राय में, जब मरीज़ पेट खराब होने की शिकायत लेकर आते हैं, तो यह सीधे तौर पर इन अच्छे बैक्टीरिया के खत्म होने का नतीजा होता है। डॉक्टर इसे कोई नई बीमारी नहीं, बल्कि दवाइयों का एक बहुत ही आम साइड इफेक्ट मानते हैं जिसे सही डाइट से सुधारा जा सकता है।

एंटीबायोटिक खाने के बाद पेट खराब क्यों होता है?

यह एक बहुत ही सामान्य सवाल है और इसके पीछे एक सीधा सा विज्ञान है। एंटीबायोटिक दवाइयों का मुख्य काम शरीर में बीमारी फैलाने वाले बुरे बैक्टीरिया को मारना होता है। लेकिन इन दवाइयों में यह पहचानने की कोई क्षमता नहीं होती कि कौन सा बैक्टीरिया बुरा है और कौन सा अच्छा। इसलिए, ये दवाइयाँ पेट में मौजूद उन अच्छे बैक्टीरिया को भी पूरी तरह से खत्म कर देती हैं जो हमारे खाने को पचाते हैं। अच्छे बैक्टीरिया के मरते ही पेट का पूरा संतुलन बिगड़ जाता है और खाना पचने के बजाय पेट में ही सड़ने लगता है।

एंटीबायोटिक से पेट खराब होने के आँकड़े (Percentage)

यह जानना बहुत दिलचस्प है कि एंटीबायोटिक कोर्स के बाद कितने प्रतिशत लोगों का पाचन तंत्र पूरी तरह बिगड़ जाता है। हाल ही के स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि दवा खाने वाले लगभग 75%  लोग पेट खराब होने की भारी शिकायत करते हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत में बाँटें, तो लगभग पचास प्रतिशत मामलों में इसका सीधा कारण पेट के अच्छे बैक्टीरिया का मरना होता है। 30% मामलों में यह दवा के साथ सही डाइट न लेने का नतीजा है। वहीं बचे हुए 20% मामलों में कम पानी पीना और तनाव ज़िम्मेदार होता है।

डाइजेशन बिगड़ने पर पेट में बेचैनी क्यों होती है?

जब आपका डाइजेशन बिगड़ता है, तो पेट में बेचैनी होना एक बहुत ही स्वाभाविक बात है। खाना सही से न पचने के कारण पेट में बहुत ज़्यादा गैस और एसिड बनने लगता है। यही फालतू गैस जब ऊपर की तरफ चढ़ती है, तो आपको सीने में जलन और बेचैनी महसूस होती है। इसके अलावा, अच्छे बैक्टीरिया खत्म होने से आंतों की काम करने की गति बहुत धीमी पड़ जाती है। खाना आंतों में फँसा रहता है, जिससे आपको पेट में हमेशा एक अजीब सा भारीपन, अफारा और घबराहट महसूस होती है। यह सब शरीर के अंदर मचे असंतुलन का असर है।

पेट की किन समस्याओं को हल्के में बिल्कुल न लें?

यह बिल्कुल सही है कि एंटीबायोटिक खाने के बाद हल्का पेट खराब होना बहुत आम बात है और इससे घबराना नहीं चाहिए। लेकिन जब शरीर कुछ खास तरह के गंभीर इशारे दे, तो हमें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इन लक्षणों को कभी अनदेखा न करें:

  • लगातार दस्त होना: अगर आपको दिन में कई बार पानी जैसे पतले दस्त आ रहे हों और वे किसी तरह न रुकें।
  • मल में खून आना: शौच करते समय अगर आपको मल में खून की लाल बूँदें दिखाई दें।
  • पेट दर्द: अगर पेट में अचानक से मरोड़ उठने लगे और दर्द बर्दाश्त के बिल्कुल बाहर हो जाए।
  • लगातार उल्टी आना: खाना खाते ही अगर सब कुछ उल्टी के रास्ते तुरंत बाहर आ जाए।

क्या एंटीबायोटिक दवा ही गैस का मुख्य कारण है?

जी हाँ, ज़्यादातर मामलों में यही तेज़ एंटीबायोटिक दवाइयाँ ही गैस और कब्ज़ का मुख्य कारण होती हैं। ये दवाइयाँ पेट की अंदरूनी परत को बहुत ज़्यादा नुकसान पहुँचाती हैं। जब आंतों की परत कमज़ोर हो जाती है, तो खाना वहाँ चिपकने लगता है और भारी गैस बनाता है। इसके साथ ही, कई एंटीबायोटिक दवाइयाँ अपनी तासीर में बहुत ज़्यादा गर्म होती हैं। ये शरीर की गर्मी को तेज़ी से बढ़ा देती हैं, जिससे पेट में छाले पड़ने और एसिडिटी होने की शिकायत शुरू हो जाती है। इसलिए दवा का असर खत्म होने तक यह समस्या लगातार बनी रहती है।

पेट खराब होने पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ इन तीन महत्वपूर्ण दोषों पर चलता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाइयाँ खाने से शरीर में 'पित्त' दोष भयंकर रूप से भड़क जाता है। यह बढ़ा हुआ पित्त पेट की जठराग्नि यानी पाचन की आग को बिल्कुल जलाकर राख कर देता है, जिससे खाना पचना पूरी तरह से रुक जाता है। आयुर्वेद कहता है कि बीमारी को और ज़्यादा दवाइयों से दबाने के बजाय, शरीर के अंदर से बढ़े हुए पित्त दोष को शांत करना और पेट को प्राकृतिक ठंडक पहुँचाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

खराब डाइजेशन से राहत पाने के असरदार उपाय

जब एंटीबायोटिक के कारण आपका पेट बुरी तरह खराब हो जाए, तो घबराने के बजाय कुछ प्राकृतिक और घरेलू तरीके आजमाने चाहिए। ये तरीके बहुत ज़्यादा सुरक्षित हैं और आपके पेट को बिना नुकसान पहुँचाए तुरंत आराम पहुँचाते हैं:

  • दही और छाछ पिएँ: रोज़ाना खाने में ताज़ा दही और छाछ शामिल करें, यह अच्छे बैक्टीरिया वापस लाता है।
  • पर्याप्त पानी पिएँ: शरीर की गर्मी और दवा की गर्मी को बाहर निकालने के लिए खूब सारा साफ पानी पिएँ।
  • सौंफ का पानी: पेट की गैस और एसिडिटी को तुरंत शांत करने के लिए हल्का गुनगुना सौंफ का पानी पिएँ।
  • हल्का भोजन: कुछ दिनों तक सिर्फ मूंग दाल की खिचड़ी और दलिया ही खाएँ, जो आसानी से पच जाए।

क्या मानसिक तनाव भी पेट खराब होने की वजह है?

आजकल की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव एक ऐसी भयानक बीमारी है जो आपके डाइजेशन को सबसे ज़्यादा बिगाड़ती है। जब आप अपनी बीमारी को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित रहते हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन काफी तेज़ी से बढ़ने लगते हैं। हमारा पेट और दिमाग एक खास नस से जुड़े होते हैं। जब दिमाग तनाव में होता है, तो आंतों की काम करने की गति अपने आप बिल्कुल धीमी पड़ जाती है। यह तनाव आपके पाचन तंत्र को सुन्न कर देता है, जिससे एंटीबायोटिक का साइड इफेक्ट कई गुना ज़्यादा भयंकर हो जाता है।

एंटीबायोटिक के दौरान पेट को बचाने के मुख्य उपाय

अगर आप चाहते हैं कि दवाइयों का कोर्स खत्म होने के बाद आपको पेट की इन भयंकर परेशानियों का सामना न करना पड़े, तो कुछ खास बदलाव करने होंगे। एक अनुशासित जीवनशैली अपनाकर आप इस दर्द से बच सकते हैं:

  • प्रीबायोटिक्स लें: दवा खाने के साथ ही अपनी डाइट में केला, सेब और ओट्स जैसी चीज़ें शामिल करें।
  • खाली पेट दवा न खाएँ: हमेशा कुछ हल्का खाने के बाद ही एंटीबायोटिक लें, ताकि पेट की परत बिल्कुल न जले।
  • मसालेदार खाने से बचें: जब तक दवाइयाँ चल रही हैं, तीखा और बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना पूरी तरह बंद कर दें।
  • नींद पूरी करें: पेट की नसों को आराम देने के लिए रोज़ रात को सात घंटे की गहरी नींद लें।

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का नज़रिया पेट खराब होने के कारण (जैसे संक्रमण, फूड पॉइज़निंग या अन्य कारण) की पहचान कर उसके अनुसार उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, पाचन, आहार-विहार और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दवाइयाँ, ओआरएस, तरल पदार्थ और अन्य चिकित्सकीय उपचार दिए जाते हैं। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और आवश्यकता के अनुसार उनकी निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
डाइट का महत्व हल्का भोजन, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आहार अपनाने की सलाह दी जाती है। पाचन के अनुकूल आहार, नियमित दिनचर्या और संतुलित भोजन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य कारण का उपचार, शरीर में पानी की कमी रोकना और दोबारा समस्या होने का जोखिम कम करना। स्वस्थ पाचन, संतुलित जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल दिया जाता है।

पेट की समस्या में तुरंत डॉक्टर से कब मिलें?

वैसे तो एंटीबायोटिक के बाद होने वाली पेट की खराबी सही डाइट लेने से खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। लेकिन हमें मालूम होना चाहिए कि कब स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और तुरंत अपने नज़दीकी डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • डिहाइड्रेशन: अगर दस्त की वजह से शरीर का सारा पानी निकल जाए और होंठ बिल्कुल सूखने लगें।
  • तेज़ बुखार लौटना: पेट खराब होने के साथ ही अगर आपको दोबारा से बहुत तेज़ बुखार आ जाए।
  • चक्कर खाकर गिरना: शरीर में इतनी भारी कमज़ोरी आ जाए कि आँखों के आगे बिल्कुल अंधेरा छाने लगे।
  • पेट में सूजन: अगर पेट अचानक से गुब्बारे की तरह बहुत ज़्यादा फूल जाए और छूने पर तेज़ दर्द हो।

निष्कर्ष

एंटीबायोटिक कोर्स के बाद डाइजेशन का बिगड़ना कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि यह अच्छे बैक्टीरिया के खत्म होने का एक साफ इशारा है। यह दवाइयाँ हमें गंभीर बीमारियों से बचाती हैं, लेकिन साथ ही हमारे पेट को भी अंदर से कमज़ोर कर देती हैं। इस परेशानी को ज़बरदस्ती भारी खाना खाकर बिल्कुल ठीक नहीं किया जा सकता है। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें और उसे रिकवर होने का पूरा समय दें। हल्का खानपान, प्राकृतिक उपाय और तनाव-मुक्त जीवन ही आपका सच्चा साथी है। अगर परेशानी ज़्यादा तंग करे, तो हमेशा डॉक्टर से सही सलाह लें।

References

https://academic.oup.com/ismecommun/advance-article/doi/10.1093/ismeco/ycag145/8697378

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/32646458/

https://www.healthline.com/nutrition/what-to-eat-antibiotics

https://www.healthline.com/health/how-do-antibiotics-work

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आमतौर पर दवा खत्म होने के एक से दो हफ्ते के अंदर पेट के अच्छे बैक्टीरिया वापस बनने लगते हैं और डाइजेशन पूरी तरह नॉर्मल हो जाता है।

नहीं, कई एंटीबायोटिक दवाइयों के साथ दूध पीने से दवा का असर कम हो जाता है और पेट में भारी गैस बनती है। दवा हमेशा सादे पानी से ही खाएँ।

अच्छे बैक्टीरिया को तेज़ी से बढ़ाने के लिए ताज़ा दही, छाछ, खमीर उठा हुआ खाना (जैसे इडली) और फाइबर से भरपूर ताज़े फल सबसे ज़्यादा फायदेमंद होते हैं।

बिल्कुल नहीं। दवा खाने के तुरंत बाद लेटने से दवा फूड पाइप में वापस आ सकती है, जिससे सीने में तेज़ जलन और एसिडिटी की भारी समस्या शुरू हो जाती है।

नारियल पानी बहुत ज़्यादा फायदेमंद होता है। यह पेट की गर्मी को शांत करता है और दस्त के कारण शरीर में कम हुए ज़रूरी मिनरल्स को तुरंत वापस लाता है।

जी हाँ, आंतों के अच्छे बैक्टीरिया खत्म होने से मल सूख जाता है और आंतों की गति धीमी हो जाती है। इसी वजह से कई लोगों को भयंकर कब्ज़ की शिकायत रहने लगती है।

हाँ, अगर गैस या मरोड़ के कारण पेट में तेज़ दर्द हो रहा है, तो गर्म पानी की थैली से हल्की सिकाई करने पर पेट की नसों को तुरंत आराम मिलता है।

ज़्यादातर एंटीबायोटिक दवाइयाँ खाली पेट बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। इससे पेट की परत जल जाती है और भयंकर एसिडिटी या पेट में अल्सर होने का खतरा बढ़ जाता है।

यह बहुत बड़ी गलती होगी। बाहर का मसालेदार और ऑयली खाना आपके कमज़ोर पेट को और ज़्यादा खराब कर देगा। जब तक पेट पूरी तरह ठीक न हो, सिर्फ घर का हल्का खाना खाएँ।

अगर दही और छाछ से आराम नहीं मिल रहा है, तो डॉक्टर की सलाह पर आप प्रोबायोटिक कैप्सूल ले सकते हैं। ये सीधे तौर पर पेट में अच्छे बैक्टीरिया पहुँचाकर डाइजेशन को तेज़ी से ठीक करते हैं।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us