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बार-बार fever लौटना किस बात का signal हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि एक-दो दिन बुखार रहा, आपने कोई दवा ली, आप ठीक हो गए और फिर कुछ ही दिनों बाद बुखार वापस आ गया? अक्सर हम इसे मौसम का बदलना या हल्की थकावट मानकर टाल देते हैं। लेकिन सच तो यह है कि हमारा शरीर बिना किसी ठोस वजह के अपना तापमान (Temperature) कभी नहीं बढ़ाता।

अगर बुखार बार-बार लौट रहा है, तो यह शरीर का एक अलार्म है जो बता रहा है कि अंदर कोई ऐसी गड़बड़ी चल रही है, जिसे आप सिर्फ एक बुखार की गोली से ठीक नहीं कर सकते। आइए समझते हैं कि बार-बार बुखार क्यों आता है, इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं और आयुर्वेद इस बारे में हमें क्या समझाता है।

अगर बुखार बार-बार लौट रहा है, तो यह शरीर में किसी अधूरे इन्फेक्शन, नए संक्रमण, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, टीबी, कमज़ोर इम्युनिटी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। यदि बुखार 2–3 दिन से अधिक रहे या बार-बार लौटे, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है। 

बार-बार बुखार लौटने का असल में क्या मतलब होता है?

बुखार कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के 'सिक्योरिटी गार्ड' की तरह है। जब भी शरीर में कोई बाहरी दुश्मन (वायरस या बैक्टीरिया) घुसता है, तो शरीर उसे मारने के लिए अपना तापमान बढ़ा लेता है।

अब बुखार दो तरह के होते हैं:

  1. लगातार रहने वाला बुखार: इसमें आपको कई दिनों तक लगातार बुखार रहता है और शरीर का तापमान नॉर्मल नहीं होता।
  2. बार-बार लौटने वाला बुखार: इसमें आप दवा खाते हैं, बुखार उतर जाता है, आप दो-तीन दिन एकदम नॉर्मल महसूस करते हैं और काम पर लौट जाते हैं। लेकिन फिर अचानक से शरीर टूटने लगता है और बुखार वापस आ जाता है।

अगर बुखार बार-बार लौट रहा है, तो इसका सीधा सा मतलब है कि जो दुश्मन (इन्फेक्शन) शरीर में घुसा था, वह अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। वह बस कुछ देर के लिए छुप गया था और मौका मिलते ही उसने दोबारा हमला कर दिया है।

किन कारणों से बुखार बार-बार वापस आ सकता है?

बुखार के लौट कर आने के पीछे कोई एक नहीं, बल्कि कई आम कारण हो सकते हैं। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं:

  1. अधूरा इलाज: यह सबसे बड़ा कारण है। कई बार डॉक्टर हमें 5 दिन की दवा देते हैं, लेकिन हम 2 दिन में खुद को ठीक मानकर दवा बीच में ही छोड़ देते हैं। इससे बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं होती। जो थोड़े बहुत कीटाणु बच जाते हैं, वे फिर से ताकतवर होकर बुखार ले आते हैं।
  2. सेकेंडरी इन्फेक्शन: जब आपको कोई नॉर्मल वायरल बुखार होता है, तो उसके बाद आपका शरीर अंदर से बहुत कमज़ोर हो जाता है। इस कमज़ोरी का फायदा उठाकर कई बार बैक्टीरिया शरीर पर हमला कर देते हैं। यानी पहला बुखार तो वायरल था, लेकिन दूसरा बुखार बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से आ जाता है।
  3. बैक्टीरियल इन्फेक्शन: कई बार हमारे गले (टॉन्सिल), फेफड़ों, पेशाब की नली या पेट में कोई इन्फेक्शन छुपकर बैठा होता है। जब तक आप सही एंटीबायोटिक या सही इलाज नहीं लेते, तब तक बुखार बार-बार आकर आपको इस छुपे हुए इन्फेक्शन की याद दिलाता रहता है।
  4. मच्छरों और मौसम वाली बीमारियां: खासकर बरसात या मौसम बदलने के समय डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया या टाइफाइड जैसी बीमारियां बहुत फैलती हैं। इन बीमारियों की खासियत ही यही होती है कि इनमें बुखार एक तय पैटर्न में उतरता और चढ़ता है। ऐसे में खून की जांच करवाना बहुत ज़रूरी हो जाता है।

क्या कमज़ोर इम्युनिटी भी इसकी वजह है?

बिल्कुल! इम्युनिटी हमारे शरीर की फौज है। अगर आपकी फौज मज़बूत है, तो कोई भी बीमारी जल्दी अंदर नहीं आ सकती।

लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में कम नींद लेना, बहुत ज़्यादा टेंशन (स्ट्रेस) लेना, बाहर का जंक फूड खाना और शरीर को आराम न देना, इन सब आदतों से हमारी इम्युनिटी एकदम कमज़ोर हो गई है। जब इम्युनिटी कमज़ोर होती है, तो छोटे से छोटा मौसम का बदलाव भी आपको बीमार कर देता है और शरीर को ठीक होने में बहुत लंबा समय लग जाता है।

आयुर्वेद बार-बार आने वाले बुखार को कैसे देखता है?

आयुर्वेद का नज़रिया बिल्कुल अलग और बहुत ही गहराई वाला है। आयुर्वेद में बुखार को सिर्फ 'टेम्परेचर बढ़ना' नहीं माना जाता, बल्कि इसे 'ज्वर' कहा जाता है। आयुर्वेद मानता है कि बुखार शरीर और मन, दोनों की गड़बड़ी का नतीजा है।

पेट की अग्नि और आम: आयुर्वेद के बहुत ही आसान नियम हैं। हमारे पेट में खाना पचाने वाली एक आग होती है, जिसे 'जठराग्नि' कहते हैं। जब हम गलत टाइम पर खाते हैं या बहुत भारी खाना खाते हैं, तो पेट की यह आग सुस्त पड़ जाती है। इससे खाना पचता नहीं, बल्कि पेट में सड़ने लगता है। यह सड़ा हुआ खाना शरीर में एक तरह का ज़हरीला तत्त्व बना देता है, जिसे आयुर्वेद में 'आम' (Ama) कहते हैं।

यही खून के रास्ते शरीर की नसों में जाकर उन्हें ब्लॉक कर देता है। इस को शरीर से बाहर निकालने के लिए ही शरीर अपना तापमान बढ़ाता है, जिसे हम बुखार कहते हैं। इसलिए आयुर्वेद कहता है कि सिर्फ बुखार की गोली खाकर शरीर को ठंडा मत करो, बल्कि पेट की आग को ठीक करो और उस कचरे को बाहर निकालो।

किन लक्षणों (इशारों) को बिल्कुल इग्नोर नहीं करना चाहिए?

अगर बुखार बार-बार आ रहा है और उसके साथ नीचे लिखी कोई भी दिक्कत हो रही है, तो घर पर इलाज न करें, सीधे डॉक्टर के पास जाएं:

  • सांस लेने में दिक्कत होना या छाती में भारीपन लगना।
  • सिर में ऐसा तेज़ दर्द होना जो बर्दाश्त न हो रहा हो।
  • शरीर में इतनी कमज़ोरी आना कि बिस्तर से उठने का मन न करे।
  • बहुत तेज़ कंपकंपी या ठंड लगना।
  • बिना डाइटिंग के अचानक वज़न कम होने लगना।
  • खांसी का लगातार बने रहना।
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द होना।

ये इशारे बताते हैं कि शरीर में कोई बड़ी गड़बड़ी चल रही है।

रिकवरी के दौरान क्या खाएं और क्या न खाएं?

जब आपको बुखार होता है, तो आपका हाज़मा (पाचन) सबसे ज़्यादा कमज़ोर होता है। इसलिए इस समय डाइट का बहुत ध्यान रखना चाहिए।

क्या खाएं:

  • मूंग दाल की पतली खिचड़ी सबसे बेहतरीन खाना है।
  • नारियल पानी, ताज़े फलों का रस, और नींबू पानी पिएं।
  • सब्ज़ियों का हल्का सूप और उबला हुआ पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें।

क्या न खाएं:

  • बाहर का तला-भुना, समोसे, कचौड़ी या भारी खाना बिल्कुल न खाएं।
  • बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाले वाली चीज़ें हाज़मे को और बिगाड़ देंगी।
  • चाय-कॉफी का इस्तेमाल कम से कम करें।

बार-बार बीमार पड़ने से कैसे बचें? (कुछ आसान आदतें)

कुछ बहुत ही छोटी और आसान आदतें आपको बार-बार बीमार होने से बचा सकती हैं:

  • बाहर से आने के बाद और खाना खाने से पहले हाथ ज़रूर धोएं।
  • रात को कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। नींद में शरीर खुद को रिपेयर करता है।
  • खूब पानी पिएं। पानी शरीर की अंदरूनी सफाई करता है।
  • डॉक्टर ने जितने दिन की दवा दी है, वह पूरा कोर्स करें। बीच में दवा न छोड़ें।

किन परिस्थितियों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?

कुछ लक्षण सीधे तौर पर मेडिकल इमरजेंसी (खतरे) का इशारा होते हैं। अगर मरीज़ में नीचे दी गई कोई भी परेशानी दिखे, तो घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद किए बिना तुरंत अस्पताल भागें:

  • 104°F से अधिक बुखार: जब बुखार बहुत तेज़ हो जाए और दवा देने पर भी नीचे न उतरे।
  • बेहोशी: मरीज़ का अचानक बेहोश हो जाना या बुलाने पर कोई जवाब न देना।
  • दौरे पड़ना: शरीर में अचानक तेज़ झटके आना या ऐंठन होना।
  • सांस लेने में कठिनाई: सांस उखड़ना, सांस लेने में बहुत ज़ोर लगना या घुटन महसूस होना।
  • लगातार उल्टी: पानी की एक घूंट तक ना पचना और लगातार उल्टियां होना।
  • गर्दन में अकड़न: गर्दन पूरी तरह अकड़ जाना और मोड़ने में दर्द होना।
  • पानी की भारी कमी: मुंह पूरी तरह सूख जाना, पेशाब बंद होना या बहुत गहरी कमज़ोरी आना।
  • बच्चों और बुजुर्गों का बुखार: छोटे बच्चों या घर के बड़े-बुजुर्गों का बुखार कई दिनों तक लगातार बने रहना।

निष्कर्ष

बुखार का बार-बार आना कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप बस एक गोली खाकर टालते रहें। यह आपके शरीर का तरीका है आपसे बात करने का, यह बताने का कि "अंदर कुछ गड़बड़ है, प्लीज ध्यान दो!"

आयुर्वेद और आज की मेडिकल साइंस दोनों यही कहते हैं कि बीमारी के सिर्फ बाहरी लक्षणों (बुखार) को मत दबाओ, बल्कि उसकी जड़ तक जाओ। सही समय पर सही डॉक्टर को दिखाना, अपने खान-पान को हल्का रखना और शरीर को पूरा आराम देना, यही वो आसान तरीके हैं जिनसे आप बार-बार लौटने वाले बुखार को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं।

यदि बुखार बार-बार लौट रहा है, तो केवल तापमान कम करने वाली दवा लेने के बजाय उसके कारण का पता लगाना अधिक महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और सही इलाज से अधिकांश मामलों में गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। 

Reference’s

Physiology, Fever - StatPearls - NCBI Bookshelf

Defining Fever - PMC

Fever: MedlinePlus

Yellow fever

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हर बार ऐसा नहीं होता। ज़्यादातर मामलों में यह इन्फेक्शन का पूरी तरह ठीक न होना या इम्युनिटी कमज़ोर होना होता है। लेकिन फिर भी, तसल्ली के लिए डॉक्टर से चेकअप करवाना बहुत ज़रूरी है।

पहले बुखार के बाद आपका शरीर बहुत कमज़ोर हो जाता है। इस कमज़ोरी के कारण आस-पास मौजूद दूसरे बैक्टीरिया शरीर पर आसानी से हमला कर देते हैं। इसे सेकेंडरी इन्फेक्शन कहते हैं।

बिल्कुल नहीं। बुखार की गोली सिर्फ कुछ घंटों के लिए आपका टेम्परेचर कम करती है, वह बीमारी को नहीं मारती। असली बीमारी को खत्म करने के लिए डॉक्टर की सलाह बहुत ज़रूरी है।

हाँ, बिल्कुल। जिनकी इम्युनिटी कमज़ोर होती है, वे मौसम के ज़रा से बदलाव या किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से ही तुरंत बीमार पड़ जाते हैं।

आयुर्वेद पेट की आग (पाचन) को ठीक करने और शरीर से गंदगी (आम) निकालने पर ज़ोर देता है। इसके लिए गिलोय, तुलसी, और सुपाच्य (हल्का) भोजन की सलाह दी जाती है।

हाँ। मच्छरों से होने वाली इन बीमारियों का नेचर ही ऐसा होता है कि इनमें बुखार अचानक से बहुत तेज़ आता है, फिर पसीना आकर उतर जाता है और अगले दिन फिर आ जाता है।

सबसे ज़रूरी है आराम करना और शरीर में पानी की कमी न होने देना (Hydration)। शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए सारी एनर्जी की ज़रूरत होती है।

कभी नहीं। हर बुखार बैक्टीरिया से नहीं होता। कई वायरल बुखार होते हैं, जिन पर एंटीबायोटिक काम ही नहीं करती। बिना पूछे एंटीबायोटिक खाने से शरीर को नुकसान होता है।

अगर बुखार 3 दिन से ज़्यादा खिंच जाए या बार-बार लौट कर आए, तो डॉक्टर की सलाह लेकर तुरंत बेसिक ब्लड टेस्ट (जैसे CBC) करवा लेने चाहिए।

अगर आपको बहुत तेज़ ठंड या कंपकंपी नहीं लग रही है, तो आप हल्के गुनगुने पानी से नहा सकते हैं या शरीर को गीले तौलिए से पोंछ (Sponge) सकते हैं। इससे शरीर का तापमान कम होने में मदद मिलती है।

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