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क्या तेज़ रोशनी या स्क्रीन देखते ही सिरदर्द बढ़ जाता है? Migraine के ट्रिगर आयुर्वेद की नज़र से जानें

Information By Dr. Adarsh Shrivastav

भारत में माइग्रेन या गंभीर सिरदर्द बहुत आम समस्या है और इसका असर सिर्फ दर्द तक सीमित नहीं रहता। शोध बताते हैं कि भारत में लगभग 25% यानी चार में से एक व्यक्ति को एक वर्ष के दौरान माइग्रेन जैसा सिरदर्द होता है, जो वैश्विक औसत 14.7% से कहीं अधिक है। इस आंकड़े के अनुसार भारत में माइग्रेन की समस्या काफी सामान्य है और इससे प्रभावित लोगों की संख्या बहुत बड़ी है।

जब आप तेज़ रोशनी या स्क्रीन जैसे मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन की तरफ देखते हैं, तो आपको लगता होगा कि सिर में दर्द तेज़ हो जाता है। यह सिर्फ एक सामान्य शिकायत नहीं है, बल्कि माइग्रेन का एक जाना-पहचाना ट्रिगर है। कई लोगों के लिए इतना हल्का सा प्रकाश भी दर्द को बढ़ा देता है और रोज़मर्रा के काम में दिक्कत पैदा कर देता है।

आप अगर काम करते समय, पढ़ते समय या आराम करते समय स्क्रीन की ओर देखते हैं और सिरदर्द में बढ़ोतरी महसूस करते हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। तेज़ रौशनी और स्क्रीन की चमक माइग्रेन के मामलों में खासकर परेशान करने वाले ट्रिगर साबित होते हैं। इस लेख में हम समझेंगे कि क्यों यह होता है, आयुर्वेद इसके बारे में क्या कहता है और आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इससे कैसे बच सकते हैं।

स्क्रीन देखते समय सिरदर्द क्यों बढ़ जाता है, क्या आपने कभी सोचा है?

आप जब लगातार मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखते रहते हैं, तो आपकी आँखें और दिमाग दोनों एक साथ ज़्यादा मेहनत करने लगते हैं। स्क्रीन से निकलने वाली तेज़ चमक, बार-बार बदलती तस्वीरें और लगातार ध्यान लगाए रखना, यह सब मिलकर दिमाग पर दबाव डालते हैं। यही दबाव धीरे-धीरे सिरदर्द को बढ़ा देता है

आजकल आपकी ज़िंदगी में स्क्रीन हर जगह है। सुबह अलार्म से लेकर रात को सोने से पहले तक, आप किसी न किसी स्क्रीन को देख रहे होते हैं। जब आप बिना रुके लंबे समय तक स्क्रीन देखते हैं, तो आपकी आँखें थकने लगती हैं। आँखों की यह थकान सीधा दिमाग तक पहुँचती है और माइग्रेन वाले सिरदर्द को और तेज़ कर देती है।

एक और अहम वजह है शरीर की स्थिरता। आप स्क्रीन देखते समय ज़्यादातर एक ही जगह बैठे रहते हैं। गर्दन झुकी रहती है, कंधों में जकड़न आ जाती है और शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार यह स्थिति वात दोष को बढ़ाती है, और जब वात बिगड़ता है तो तंत्रिका तंत्र ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है। यही संवेदनशीलता सिरदर्द को बढ़ाने का काम करती है।

आपने शायद यह भी महसूस किया होगा कि स्क्रीन देखते समय पलकें झपकाना कम हो जाता है। इससे आँखों में सूखापन आता है और आँखों पर तनाव बढ़ता है। यह तनाव धीरे-धीरे सिर के आधे हिस्से में दर्द के रूप में सामने आता है। अगर आपको पहले से माइग्रेन की समस्या है, तो स्क्रीन देखना आपके लिए एक बड़ा ट्रिगर बन सकता है।

माइग्रेन में रोशनी से परेशानी को आयुर्वेद कैसे समझता है?

आयुर्वेद में माइग्रेन को अर्धवाभेदक कहा गया है, यानी ऐसा सिरदर्द जो सिर के एक हिस्से में भेदन या फूटने जैसा दर्द पैदा करता है। आयुर्वेद के अनुसार यह समस्या केवल सिर या आँखों तक सीमित नहीं होती, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन से जुड़ी होती है।

रोशनी से परेशानी को आयुर्वेद मुख्य रूप से वात और पित्त दोष के असंतुलन से जोड़कर देखता है। पित्त दोष शरीर में गर्मी, तेज़ी और संवेदनशीलता से जुड़ा होता है। जब पित्त बढ़ जाता है, तो तेज़ रोशनी आँखों और दिमाग को और ज़्यादा परेशान करने लगती है। इसी वजह से धूप, तेज़ बल्ब या चमकदार स्क्रीन माइग्रेन के दर्द को बढ़ा देती है।

वहीं वात दोष तंत्रिका तंत्र से जुड़ा होता है। जब आप ज़्यादा सोचते हैं, देर तक जागते हैं या लगातार स्क्रीन देखते हैं, तो वात असंतुलित हो जाता है। असंतुलित वात दिमाग को ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय और चंचल बना देता है। ऐसे में रोशनी जैसी बाहरी उत्तेजनाएँ सीधे सिरदर्द को बढ़ाने लगती हैं।

आयुर्वेद यह भी मानता है कि खराब पाचन और आम का निर्माण इस परेशानी को और गंभीर बना देता है। जब शरीर में आम जमा होता है, तो मनोवही स्रोत ठीक से काम नहीं कर पाते। इसका असर मन, आँखों और दिमाग पर पड़ता है। नतीजा यह होता है कि हल्की रोशनी भी आपको चुभने लगती है और सिरदर्द बढ़ जाता है।

माइग्रेन के मरीज़ों में फोटोफोबिया क्यों होता है?

माइग्रेन के दौरान रोशनी से परेशानी होना कोई असामान्य बात नहीं है। इसे आम भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि आपकी आँखें और दिमाग उस समय रोशनी को सहन नहीं कर पाते। आप जब सामान्य दिन में जिस रोशनी को आराम से झेल लेते हैं, वही रोशनी माइग्रेन के दौरान असहनीय लगने लगती है।

मान लीजिए आपको तेज़ सिरदर्द हो रहा है और कोई अचानक पर्दा हटा देता है या बल्ब जला देता है। उस समय दर्द अचानक और तेज़ हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि माइग्रेन के दौरान दिमाग पहले से ही संवेदनशील अवस्था में होता है। रोशनी पड़ते ही दिमाग को एक और झटका लगता है, जिससे दर्द बढ़ जाता है।

इसी वजह से आप स्वाभाविक रूप से अंधेरे और शांत कमरे की ओर जाना चाहते हैं। अंधेरे में आँखों को आराम मिलता है, दिमाग को कम संकेत मिलते हैं और तंत्रिका तंत्र को थोड़ा सुकून मिलता है। यह कोई आदत नहीं, बल्कि शरीर की अपनी सुरक्षा प्रतिक्रिया होती है।

आयुर्वेद के अनुसार, जब पित्त और वात दोनों असंतुलित होते हैं, तब इंद्रियाँ बहुत जल्दी उत्तेजित हो जाती हैं। आँखें रोशनी के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाती हैं और मन शांति नहीं पकड़ पाता। ऐसे में अंधेरा, शांति और आराम शरीर को संतुलन की ओर लौटने में मदद करते हैं।

अगर आपको माइग्रेन में बार-बार अंधेरे कमरे की ज़रूरत महसूस होती है, तो यह संकेत है कि आपका शरीर आपको बता रहा है कि उसे विश्राम चाहिए, कम उत्तेजना चाहिए और संतुलन की ज़रूरत है। इसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय समझना और सही तरीके से संभालना बहुत ज़रूरी है।

कौन-सी रोशनियाँ माइग्रेन को सबसे ज़्यादा ट्रिगर करती हैं?

अगर आपको माइग्रेन की समस्या है, तो आपने यह ज़रूर महसूस किया होगा कि हर तरह की रोशनी आपको एक जैसी नहीं लगती। कुछ रोशनियाँ ऐसी होती हैं जो देखते ही सिरदर्द को बढ़ा देती हैं। यह केवल आपकी कल्पना नहीं है, बल्कि शरीर की एक साफ़ प्रतिक्रिया है।

  • तेज़ धूप: आप जब कड़ी धूप में निकलते हैं, खासकर दोपहर के समय, तो सिर में धड़कन तेज़ हो सकती है। धूप की तेज़ चमक आँखों के ज़रिए दिमाग तक पहुँचती है और माइग्रेन में पहले से संवेदनशील दिमाग को और परेशान कर देती है।
  • बहुत तेज़ कृत्रिम रोशनी: घरों, दफ़्तरों और दुकानों में इस्तेमाल होने वाली बेहद चमकदार सफेद रोशनी आँखों और दिमाग को थका देती है। ऐसी रोशनी में देर तक रहने से आँखों में जलन और सिर में दबाव बनने लगता है।
  • झिलमिलाती स्क्रीन की तस्वीरें: मोबाइल या दूरदर्शन पर तेज़ी से बदलती और चमक कम–ज़्यादा होती तस्वीरें दिमाग पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं। यही कारण है कि स्क्रीन देखते समय माइग्रेन का सिरदर्द अचानक बढ़ सकता है।

क्या लगातार स्क्रीन देखने से वात और पित्त बिगड़ सकते हैं?

आप जब देर तक एक ही जगह बैठे रहते हैं और लगातार मोबाइल या किसी डिजिटल पर्दे को देखते रहते हैं, तो इसका असर सिर्फ आँखों तक सीमित नहीं रहता। यह पूरे शरीर के संतुलन को प्रभावित करता है।

लगातार बैठे रहने से शरीर की गति कम हो जाती है। गर्दन झुकी रहती है, पीठ अकड़ जाती है और कंधों में तनाव भर जाता है। आयुर्वेद के अनुसार ऐसी स्थिति वात दोष को बढ़ाती है। वात का असंतुलन तंत्रिका तंत्र को अस्थिर कर देता है, जिससे सिरदर्द की संभावना बढ़ जाती है।

साथ ही, आँखों और दिमाग पर लगातार दबाव पड़ता है। आप जब देर तक किसी चमकती तस्वीर को देखते रहते हैं, तो दिमाग को लगातार संकेत मिलते रहते हैं। यह स्थिति पित्त दोष को भी बढ़ा देती है। बढ़ा हुआ पित्त गर्मी, चिड़चिड़ापन और संवेदनशीलता पैदा करता है। नतीजा यह होता है कि थोड़ी सी रोशनी भी आपको चुभने लगती है।

सरल शब्दों में कहें तो:

  • देर तक बैठे रहना → वात असंतुलन

  • आँखों और दिमाग पर दबाव → पित्त असंतुलन

जब वात और पित्त दोनों बिगड़ते हैं, तो माइग्रेन का दर्द आसानी से ट्रिगर हो जाता है।

माइग्रेन में नींद, स्क्रीन और सिरदर्द का क्या रिश्ता है?

नींद और माइग्रेन का रिश्ता बहुत गहरा है, और इसमें मोबाइल की बड़ी भूमिका है। आप अगर रात को देर तक मोबाइल देखते रहते हैं, तो आपकी नींद की प्राकृतिक लय बिगड़ जाती है।

देर रात मोबाइल देखने से आप अनजाने में रात्रि जागरण कर लेते हैं। आयुर्वेद में रात्रि जागरण को दोषों के असंतुलन का बड़ा कारण माना गया है। जब आप समय पर नहीं सोते, तो शरीर को ठीक से आराम नहीं मिल पाता। इससे वात और पित्त दोनों प्रभावित होते हैं।

नींद खराब होने का असर पाचन पर भी पड़ता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो पाचन अग्नि कमज़ोर हो जाती है और आम बनने लगता है। यह आम शरीर के स्रोतों में रुकावट पैदा करता है, जिसका असर सिर और दिमाग पर दिखाई देता है।

आपने शायद गौर किया होगा कि जिन दिनों आप देर से सोते हैं या रात को ज़्यादा मोबाइल देखते हैं, अगली सुबह सिर भारी रहता है या माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाता है। यह कोई संयोग नहीं है। नींद, पाचन और दिमाग—तीनों आपस में जुड़े हुए हैं।

अगर आप माइग्रेन को संभालना चाहते हैं, तो सिर्फ दर्द की दवा पर निर्भर रहना काफ़ी नहीं है। आपको अपनी नींद, मोबाइल के इस्तेमाल और रोज़मर्रा की आदतों पर भी ध्यान देना होगा। शरीर आपको संकेत देता है, बस ज़रूरत है उन्हें समझने की।

माइग्रेन के कौन-से प्रकारों में रोशनी ज़्यादा परेशानी देती है?

माइग्रेन हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार इसके अलग-अलग प्रकार होते हैं, और हर प्रकार में रोशनी का असर भी थोड़ा अलग होता है। अगर आप समझ लें कि आपके सिरदर्द का स्वभाव कैसा है, तो आप रोशनी से जुड़ी परेशानी को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।

वातज माइग्रेन

वातज माइग्रेन में दर्द अक्सर अचानक शुरू होता है और चुभने या फूटने जैसा महसूस होता है। ऐसे लोगों में दिमाग और तंत्रिका तंत्र बहुत जल्दी उत्तेजित हो जाते हैं। जब आप तेज़ रोशनी में आते हैं, तो यह उत्तेजना और बढ़ जाती है। इसलिए आपको लगता है कि रोशनी देखते ही दर्द तेज़ हो गया। ठंडी हवा और तेज़ चमक दोनों ही वातज माइग्रेन में परेशानी बढ़ा सकते हैं।

पित्तज माइग्रेन 

पित्तज माइग्रेन में रोशनी से परेशानी सबसे ज़्यादा होती है। इसमें सिरदर्द के साथ आँखों में जलन, चिड़चिड़ापन और गर्मी का अहसास होता है। तेज़ धूप, बहुत उजली रोशनी या चमकदार स्क्रीन पित्त को और बढ़ा देती है। ऐसे में हल्की रोशनी भी आपको असहनीय लग सकती है। पित्तज माइग्रेन में लोग अक्सर अंधेरे कमरे में जाने पर कुछ राहत महसूस करते हैं।

कफज माइग्रेन 

कफज माइग्रेन में सिर भारी लगता है और दर्द उतना तेज़ नहीं होता, लेकिन लगातार बना रहता है। रोशनी यहाँ सीधा दर्द नहीं बढ़ाती, लेकिन भारीपन और सुस्ती को बढ़ा सकती है। बहुत उजली रोशनी में रहने से सिर और आँखों में दबाव महसूस हो सकता है।

सरल शब्दों में कहें तो:

  • वातज में रोशनी दर्द को चुभन भरा बना देती है

  • पित्तज में रोशनी सबसे ज़्यादा असहनीय लगती है

  • कफज में रोशनी से भारीपन बढ़ता है

निष्कर्ष

तेज़ रोशनी या स्क्रीन देखते ही अगर आपका सिरदर्द बढ़ जाता है, तो यह शरीर की एक साफ़ चेतावनी है। माइग्रेन कोई साधारण सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह बताता है कि आपके दिमाग, आँखों, पाचन और दिनचर्या के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। जब आप इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो दर्द बार-बार लौटकर आता है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को मुश्किल बना देता है।

आयुर्वेद आपको यह समझने में मदद करता है कि माइग्रेन केवल दर्द नहीं, बल्कि वात और पित्त के असंतुलन का परिणाम है। आप अपनी नींद, स्क्रीन के इस्तेमाल, रोशनी और खान-पान में छोटे बदलाव करके इस परेशानी को काफी हद तक संभाल सकते हैं। जब आप अपने शरीर की बात सुनते हैं, तो राहत की राह अपने आप बनने लगती है।

अगर आप माइग्रेन या इससे जुड़ी किसी भी परेशानी से जूझ रहे हैं, तो हमारे प्रमाणित जीवा डॉक्टरों से आज ही व्यक्तिगत परामर्श के लिए संपर्क करें। डायल करें: 0129-4264323

FAQs

  1. क्या खाली पेट रहने से माइग्रेन का दर्द बढ़ सकता है?

हाँ, लंबे समय तक खाली पेट रहने से शरीर की ऊर्जा गिरती है और वात बढ़ता है, जिससे माइग्रेन का सिरदर्द शुरू या तेज़ हो सकता है।

  1. क्या यात्रा करने से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है?

लगातार यात्रा, नींद में गड़बड़ी, भोजन का समय बिगड़ना और मौसम बदलाव माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं, खासकर अगर आप पहले से संवेदनशील हैं।

  1. क्या माइग्रेन बच्चों और किशोरों में भी हो सकता है?

हाँ, बच्चों और किशोरों में भी माइग्रेन हो सकता है। पढ़ाई का दबाव, स्क्रीन ज़्यादा देखना और नींद की कमी इसके आम कारण होते हैं।

  1. क्या माइग्रेन में व्यायाम करना सही है या नुकसानदेह?

हल्का और नियमित व्यायाम फायदेमंद होता है, लेकिन बहुत ज़्यादा थकाने वाला व्यायाम माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकता है।

  1. क्या मौसम बदलने से माइग्रेन का दौरा आ सकता है?

हाँ, मौसम में अचानक बदलाव, उमस, तेज़ गर्मी या ठंड माइग्रेन के मरीज़ों में सिरदर्द को ट्रिगर कर सकते हैं।

  1. क्या माइग्रेन में सुबह सिरदर्द के साथ उठना सामान्य है?

हाँ, अगर आपकी नींद पूरी नहीं हुई या रात को देर से खाना खाया है, तो सुबह उठते ही सिरदर्द होना माइग्रेन का संकेत हो सकता है।

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