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Work From Home Lifestyle Health के लिए कितना Risky है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

सुबह उठना, बिना नहाए पजामा में ही लैपटॉप खोल लेना, बिस्तर पर लेटे-लेटे काम करना और दिन भर में केवल फ्रिज तक चलकर जाना... कुछ सालों पहले 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home) एक सपने जैसा लगता था। जब यह सच हुआ, तो हमें लगा कि हमने ट्रैफिक के तनाव और रोज़ाना तैयार होने की झंझट से हमेशा के लिए आज़ादी पा ली है। लेकिन इस 'सुविधा' ने खामोशी से हमारे शरीर और दिमाग को एक ऐसी जेल में कैद कर दिया है जहाँ से कई क्रोनिक बीमारियाँ जन्म ले रही हैं।

चाहे आप घर बैठे लगातार कंटेंट राइटिंग (Content writing) कर रहे हों, सिस्टम पर भारी वीडियो रेंडरिंग (Video rendering) के पूरा होने का इंतज़ार कर रहे हों, या फिर किसी प्रतियोगी परीक्षा की लंबी तैयारी में जुटे हों, घंटों स्क्रीन के सामने एक ही पोज़िशन में जमे रहना आपके शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है। आज WFH के कारण हमारी शारीरिक गतिविधि (Physical activity) लगभग शून्य हो चुकी है। घर और ऑफिस के बीच की लकीर मिटने से काम के घंटे बढ़ गए हैं, नींद की साइकिल बर्बाद हो गई है और शरीर एक ही जगह बैठे-बैठे जंग खा रहा है। इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि 'वर्क फ्रॉम होम' हमारी सेहत के लिए कितना रिस्की है, यह हमारे शरीर के 'नेचुरल बैलेंस' को कैसे हैक कर रहा है, और आयुर्वेद की मदद से आप घर बैठे ही खुद को इन गंभीर बीमारियों से कैसे बचा सकते हैं।

बिस्तर और सोफे का जाल: पोस्चर (Posture) की तबाही

ऑफिस में कम से कम एक एर्गोनोमिक (Ergonomic) कुर्सी और डेस्क होती थी, लेकिन घर पर हमारा वर्कस्टेशन हमारा बिस्तर या सोफा बन गया है। यह हमारी रीढ़ की हड्डी के लिए सबसे बड़ा ज़हर है।

  • रीढ़ का आकार बिगड़ना: बिस्तर पर झुककर काम करने से रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक 'S' आकार (Curve) पूरी तरह बिगड़ जाता है। इससे कमर के निचले हिस्से (L4-L5 डिस्क) पर भारी दबाव पड़ता है, जो स्लिप डिस्क (Slip Disc) का कारण बनता है।
  • टेक्स्ट नेक (Text Neck): लैपटॉप को गोद में रखकर लगातार नीचे देखने से गर्दन की हड्डियों पर सिर का वज़न कई गुना बढ़ जाता है। इसी से सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस और कंधों की भयंकर जकड़न शुरू होती हैं।
  • नसों का दबना: गलत पोस्चर में घंटों बैठे रहने से पैरों और कूल्हों की नसें दब जाती हैं, जिससे पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन (Sciatica) रहने लगता है।

'ज़ीरो' मूवमेंट और मेटाबॉलिज़्म का क्रैश होना

ऑफिस जाने के बहाने हम थोड़ा पैदल चलते थे, सीढ़ियाँ चढ़ते थे या मेट्रो/कैब तक जाते थे। WFH ने इस प्राकृतिक हलचल (NEAT) को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

  • मोटापा और सुस्त मेटाबॉलिज़्म: दिन भर कुर्सी या बिस्तर पर बैठे रहने से शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता बहुत धीमी पड़ जाती है। घर का बना खाना भी ऊर्जा में बदलने के बजाय सीधे चर्बी (Fat) में बदलकर पेट के आस-पास जमा होने लगता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: शरीर का मूवमेंट न होने से कोशिकाएं ग्लूकोज़ को सोखना बंद कर देती हैं, जिससे ब्लड शुगर हमेशा बढ़ा रहता है। यह भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज़ (Type-2 Diabetes) का सबसे बड़ा रिस्क है।
  • पाचन की बर्बादी: शारीरिक हलचल न होने से आंतों की गति रुक जाती है। खाना पचने के बजाय पेट में सड़ता है, जिससे भयंकर गैस, ब्लोटिंग और कब्ज़ की क्रोनिक समस्या पैदा होती है।

स्क्रीन टाइम और मानसिक स्वास्थ्य

वर्क फ्रॉम होम ने घर और ऑफिस की बाउंड्री को खत्म कर दिया है। काम कभी खत्म ही नहीं होता, जो दिमाग को बुरी तरह थका देता है।

  • डिजिटल थकान (Screen Fatigue): लगातार 10-12 घंटे लैपटॉप और फोन की ब्लू लाइट देखने से आँखों का पानी सूख जाता है (Dry eyes) और भयंकर सिरदर्द या माइग्रेन ट्रिगर होता है।
  • नींद की बर्बादी (Insomnia): काम का कोई फिक्स समय न होने से रात-रात भर स्क्रीन देखने की आदत पड़ जाती है। इससे स्लीप हार्मोन (Melatonin) का बनना रुक जाता है और रातों की नींद उड़ जाती है।
  • आइसोलेशन और डिप्रेशन: सहकर्मियों से आमने-सामने बात न होना, अकेले कमरे में बंद रहना और बाहर की धूप न देखना इंसान को धीरे-धीरे अकेलेपन (Isolation), एंग्जायटी और डिप्रेशन में धकेल देता है।

आयुर्वेद इस WFH लाइफस्टाइल को कैसे समझता है?

आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर प्रकृति की लय (Circadian Rhythm) के साथ चलने के लिए बना है। WFH इस पूरी लय को तोड़ देता है।

  • वात और कफ का भयंकर प्रकोप: बहुत ज़्यादा स्क्रीन टाइम, तनाव और अनियमित रूटीन शरीर में 'वात दोष' (रूखापन और चंचलता) को भड़काता है, जिससे दर्द और नींद न आने की समस्या होती है। वहीं, लगातार बैठे रहने (अव्यायाम) से 'कफ दोष' (सुस्ती और भारीपन) बढ़ता है, जो मोटापा लाता है।
  • अग्निमांद्य (कमज़ोर पाचन): मेहनत न करने से पेट की 'पाचन अग्नि' बुझ जाती है। जब अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर में 'आम' (ज़हरीले टॉक्सिन्स) भर जाते हैं, जो नसों को ब्लॉक कर देते हैं और शरीर को हर समय थका हुआ महसूस कराते हैं।
  • ओजस (Ojas) का गिरना: ताज़ी हवा न मिलना, सूरज की धूप न देखना और लगातार मानसिक तनाव लेना शरीर की इम्युनिटी (ओजस) को अंदर से सुखा देता है।

जीवा आयुर्वेद की सम्पूर्ण देखभाल प्रणाली

हम WFH की आपकी मजबूरी को समझते हैं। हम आपको नौकरी छोड़ने को नहीं कहते, बल्कि आपके शरीर को इस लाइफस्टाइल के डैमेज से बचाने के लिए अंदरूनी ताक़त देते हैं।

  • अग्नि दीपन और आम पाचन: सबसे पहले आपके सुस्त मेटाबॉलिज़्म (अग्नि) को जड़ी-बूटियों से तेज़ किया जाता है ताकि पेट में जमा गंदगी और अतिरिक्त चर्बी पिघल सके।
  • दोषों का संतुलन: बढ़े हुए वात (जोड़ों के दर्द और स्ट्रेस) और कफ (मोटापा) को संतुलित करने के लिए विशेष औषधियाँ और दिनचर्या सुझाई जाती है।
  • नर्वस सिस्टम का पोषण: स्क्रीन की थकान और मानसिक तनाव से कमज़ोर हो चुके दिमाग और आँखों को रसायन औषधियों से भारी पोषण दिया जाता है।

WFH के साइड इफेक्ट्स को कम करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें शरीर की सुस्ती तोड़ने और दिमाग को रिलैक्स करने के लिए कई जादुई औषधियाँ दी हैं।

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह WFH के तनाव, डिप्रेशन और कमज़ोर नसों के लिए एक जादुई रसायन है। यह कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) को कम करता है और गहरी नींद लाने में मदद करता है।
  • ब्राह्मी (Brahmi): लगातार स्क्रीन देखने से होने वाले ब्रेन फॉग (Brain fog) और फोकस की कमी को दूर करने के लिए यह दिमाग की नसों को ताक़त देती है और उन्हें शांत करती है।
  • शल्लाकी (Shallaki): गलत पोस्चर के कारण गर्दन (सर्वाइकल) और कमर में आई भयंकर जकड़न व सूजन को यह जड़ से खत्म करने का काम करती है।
  • त्रिफला (Triphala): लगातार बैठे रहने के कारण होने वाली पुरानी कब्ज़ और पेट की गैस को साफ करने के लिए यह सबसे सुरक्षित प्राकृतिक डिटॉक्स है।

WFH में फिट रहने के लिए आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल टिप्स

वर्क फ्रॉम होम को अपने शरीर की सज़ा न बनने दें। अपनी दिनचर्या में कुछ सख़्त बाउंड्रीज़ (Boundaries) तय करें।

पहलू क्या करें कैसे करें (व्यावहारिक तरीका)
फिक्स वर्कस्टेशन सही बैठने की व्यवस्था बनाएं बिस्तर पर काम न करें; कुर्सी-टेबल का उपयोग करें; स्क्रीन को आँखों के बिल्कुल सामने (Eye-level) रखें
सही एर्गोनॉमिक्स शरीर की पोजिशन संतुलित रखें कुर्सी पर सीधे बैठें, पैर ज़मीन पर टिके हों; कीबोर्ड ऐसी ऊँचाई पर रखें कि कंधे रिलैक्स रहें
स्टॉपवॉच मेथड लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें हर 45–50 मिनट का टाइमर सेट करें; अलार्म बजते ही 2–3 मिनट के लिए उठें, स्ट्रेचिंग करें या पानी पी लें
माइक्रो ब्रेक्स दिनभर एक्टिव रहें हर ब्रेक में हल्का वॉक या बॉडी स्ट्रेच शामिल करें
20-20-20 नियम आँखों की सुरक्षा करें हर 20 मिनट में स्क्रीन से नज़र हटाकर 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें
डिजिटल डिटॉक्स स्क्रीन टाइम सीमित करें काम का एक फिक्स समय तय करें; लॉगआउट के बाद फोन/लैपटॉप से दूरी बनाएं
सुबह की धूप नैचुरल एनर्जी लें रोज़ सुबह 10–15 मिनट ताज़ी धूप में समय बिताएं

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप वज़न बढ़ने, गर्दन दर्द या क्रोनिक थकान की शिकायत लेकर आते हैं, तो हम केवल एक लक्षण नहीं, आपके पूरे रूटीन को समझते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि 'अग्नि' का स्तर कितना सुस्त पड़ चुका है और वात-कफ ने शरीर को कितना जकड़ लिया है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: डॉक्टर आपके बैठने के तरीके, आँखों के रूखेपन, वज़न और गर्दन के दर्द को बहुत बारीकी से चेक करते हैं।
  • लाइफस्टाइल चेक: आपका काम कितने घंटे का है, आप रात को कितने बजे सोते हैं, और आपकी स्क्रीन टाइमिंग क्या है—इसका पूरा विश्लेषण किया जाता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम WFH की आपकी व्यस्त दिनचर्या को समझते हैं। हम आपको एक ऐसा सुरक्षित और प्रैक्टिकल इलाज का रास्ता देते हैं जिसे आप घर से काम करते हुए आसानी से अपना सकें।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बहुत प्यार और धैर्य से बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: WFH के दौरान अगर बाहर जाना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें और अपनी समस्या का समाधान पाएं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी प्रकृति के अनुसार खास वात-कफ शामक जड़ी-बूटियाँ, मेटाबॉलिज़्म तेज़ करने वाले रसायन और एक संतुलित दिनचर्या तैयार की जाती है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

शरीर की इस सुस्ती और जकड़न को तोड़ने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से पाचन सुधरेगा, पेट की ब्लोटिंग खत्म होगी और नींद की क्वालिटी में भारी सुधार आएगा।
  • कुछ महीनों तक: शरीर का मेटाबॉलिज़्म तेज़ होगा। गर्दन और कमर की जकड़न दूर होने लगेगी। आपका एनर्जी लेवल बढ़ेगा और काम करने में फोकस वापस आएगा।
  • लंबे समय के लिए: आपकी लाइफस्टाइल में शामिल हुए छोटे-छोटे एक्टिव बदलावों से आप मोटापे, सर्वाइकल और डायबिटीज़ जैसी क्रोनिक बीमारियों के रिस्क से हमेशा के लिए आज़ाद हो जाएंगे।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

वर्क फ्रॉम होम में होने वाली हल्की थकान नॉर्मल है, लेकिन शरीर के इन गंभीर संकेतों को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए:

  • हाथों या पैरों का सुन्न पड़ जाना: अगर गर्दन या कमर दर्द के साथ आपके हाथों की उंगलियों में करंट दौड़े, झुनझुनी आए या चीज़ें हाथों से छूटने लगें (यह सीवियर नर्व कम्प्रेशन है)।
  • लगातार सिरदर्द और धुंधला दिखना: स्क्रीन देखने के कारण अगर आपकी आँखों के आगे अंधेरा छाए, दो-दो चीज़ें दिखें या ऐसा सिरदर्द हो जो किसी पेनकिलर से न जाए।
  • सीने में भारीपन: बैठे-बैठे अचानक सीने में जकड़न होना, पसीना आना और सांस का फूलना (यह हार्ट ब्लॉकेज या डीवीटी का अलार्म हो सकता है)।
  • गंभीर अवसाद (Severe Depression): अगर आपको अकेलेपन के कारण लगातार नकारात्मक विचार आ रहे हैं, पैनिक अटैक आ रहे हैं और आप खुद को कमरे में बिल्कुल बंद महसूस कर रहे हैं।

निष्कर्ष

'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) ने हमें ट्रैफिक और भागदौड़ से तो बचा लिया, लेकिन बदले में इसने हमारे शरीर को एक आरामदायक कैदखाने में डाल दिया है। बिस्तर पर लेटकर काम करना, 24 घंटे स्क्रीन से चिपके रहना और शारीरिक मेहनत का पूरी तरह खत्म हो जाना—यह आपके शरीर के खिलाफ किया गया एक बहुत बड़ा अपराध है। इस लाइफस्टाइल ने कम उम्र के युवाओं को सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापे और भयंकर डिप्रेशन का शिकार बना दिया है। जब हम अपनी इन गलतियों को पेनकिलर्स और स्लीपिंग पिल्स से छिपाने की कोशिश करते हैं, तो हम शरीर की अंदरूनी तबाही को और तेज़ कर देते हैं। इस खतरनाक जाल से बाहर निकलना नामुमकिन नहीं है। आयुर्वेद आपको इस आरामदायक बीमारी से बचने का सबसे सीधा और प्राकृतिक रास्ता दिखाता है। अपनी दिनचर्या में 'बाउंड्रीज़' बनाएं। सही आयुर्वेदिक उपचार, अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी नर्व-रिलैक्सिंग जड़ी-बूटियों और खुद को एक्टिव रखने की आदत अपनाकर आप अपने शरीर को दोबारा ऊर्जावान और मज़बूत बना सकते हैं। घर से काम करें, लेकिन अपनी सेहत को दांव पर लगाकर नहीं; जीवा आयुर्वेद के साथ अपने शरीर और दिमाग दोनों को हमेशा के लिए स्वस्थ रखें।

FAQs

WFH में शरीर की रोज़मर्रा की हलचल (NEAT) लगभग खत्म हो जाती है। शारीरिक मेहनत न होने से मेटाबॉलिज़्म बहुत सुस्त पड़ जाता है और जो भी आप खाते हैं, वह ऊर्जा में बदलने के बजाय सीधे चर्बी (Fat) में बदल जाता है।

जब आप स्क्रीन देखने के लिए गर्दन को आगे झुकाते हैं (Text Neck), तो गर्दन की हड्डियों पर सिर का वज़न कई गुना बढ़ जाता है। लगातार घंटों ऐसा करने से सर्वाइकल स्पाइन की डिस्क घिसने लगती है और नसें दब जाती हैं, जिससे भयंकर दर्द और जकड़न होती है।

लगातार स्क्रीन देखने से फोन और लैपटॉप की ब्लू लाइट दिमाग को यह सिग्नल देती है कि अभी दिन है। इससे नींद लाने वाला हार्मोन मेलाटोनिन बनना बंद हो जाता है। साथ ही काम का स्ट्रेस दिमाग को रिलैक्स नहीं होने देता, जिससे नींद उड़ जाती है।

आयुर्वेद में आँखों को रिलैक्स करने के लिए आँखों पर गुलाब जल के पैड्स रखना और दिमाग को शांत करने के लिए ब्राह्मी और शंखपुष्पी जैसी मेध्य (ब्रेन टॉनिक) जड़ी-बूटियों का सेवन बहुत फायदेमंद बताया गया है।

बहुत ज़्यादा! बिस्तर मुलायम होता है, जिससे रीढ़ की हड्डी को कोई सपोर्ट नहीं मिलता। इससे रीढ़ का प्राकृतिक आकार बिगड़ जाता है और सारा वज़न कमर के निचले हिस्से पर आ जाता है, जो स्लिप डिस्क का सबसे बड़ा कारण है। हमेशा कुर्सी-टेबल का इस्तेमाल करें।

लगातार बैठे रहने से आंतों की सिकुड़ने की गति धीमी पड़ जाती है। इसके कारण खाना पेट में आगे नहीं बढ़ता और वहीं सड़ने लगता है। इससे भयंकर गैस, एसिडिटी और कब्ज़ की समस्या पैदा होती है।

जी हाँ! आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और पंचकर्म की ग्रीवा बस्ती थेरेपी सर्वाइकल के लिए रामबाण है। इसमें गर्दन पर औषधीय गर्म तेल को रोका जाता है, जो सूखी हुई डिस्क को हाइड्रेट करता है और दबी हुई नस को तुरंत आज़ाद कर देता है।

20-20-20 का नियम अपनाएं। हर 20 मिनट के काम के बाद, स्क्रीन से नज़र हटाकर 20 फीट दूर किसी चीज़ को 20 सेकंड के लिए देखें। साथ ही पलकों को बार-बार झपकाएं ताकि आँखों का पानी न सूखे।

बिल्कुल। घर में बंद रहने से ताज़ी हवा और सूरज की धूप (Vitamin D) नहीं मिल पाती, जो इम्युनिटी के लिए सबसे ज़रूरी हैं। बाहर का वातावरण न मिलने से शरीर का ओजस सूखने लगता है और इंसान जल्दी बीमार पड़ने लगता है।

स्टॉपवॉच मेथड का इस्तेमाल करें। हर 45 मिनट का अलार्म लगाएं। अलार्म बजते ही अपनी कुर्सी से उठें, 2 मिनट के लिए पूरे शरीर को स्ट्रेच करें, पानी पिएं और घर में ही कुछ कदम टहलें। फ़ोन पर बात करते समय हमेशा पैदल चलने की आदत डालें।

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