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Yoga से कमर दर्द बढ़ गया — कौन से Asanas Slip Disc वालों को नहीं करने चाहिए?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 09 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5052

कमर दर्द से परेशान होने पर जब हम टीवी या इंटरनेट पर योगासनों के फायदे देखते हैं, तो तुरंत मैट बिछाकर अभ्यास शुरू कर देते हैं। हर कोई यही मानता है कि योग हर दर्द का रामबाण इलाज है, लेकिन बिना अपनी रीढ़ की हड्डी की स्थिति जाने गलत योगासन करना आपके लिए एक भयंकर बुरा सपना साबित हो सकता है।

जब आपकी रीढ़ की हड्डी की डिस्क अपनी जगह से खिसक चुकी होती है, तो आगे झुकने वाले आसन उसे वापस अंदर धकेलने के बजाय, नसों पर भयंकर दबाव डाल देते हैं। यही कारण है कि योग शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद आपका दर्द कमर से निकलकर पैरों तक करंट की तरह दौड़ने लगता है और आप बिस्तर पकड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।

स्लिप डिस्क होने पर गलत योगासन आपकी कमर को कैसे डैमेज करते हैं?

योगासन शरीर को लचीला बनाने और नसों को खोलने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। लेकिन जब आपकी रीढ़ की हड्डी (Spine) के बीच की गद्दी (Disc) पहले से ही बाहर की तरफ खिसकी हुई हो, तो शरीर का गलत मूवमेंट एक बहुत बड़ी तबाही ला सकता है।

  • डिस्क का और बाहर निकलना: जब आप स्लिप डिस्क में आगे की तरफ झुकने वाले (Forward bending) आसन करते हैं, तो रीढ़ की हड्डियों के बीच का दबाव पीछे की तरफ बढ़ जाता है। इससे खिसकी हुई डिस्क और ज़्यादा बाहर निकलकर नसों को कुचलने लगती है, जिससे भयंकर कमर दर्द (Back pain) ट्रिगर हो जाता है।
  • साइटिका नर्व पर भारी दबाव: गलत आसन से बाहर निकली हुई डिस्क शरीर की सबसे लंबी नस (Sciatic nerve) को दबा देती है। इसके कारण कमर का दर्द कूल्हों से होता हुआ सीधे पैरों के तलवों तक साइटिका (Sciatica) के भयंकर करंट में बदल जाता है।
  • मांसपेशियों का ऐंठना (Muscle Spasm): जब शरीर किसी ऐसी स्ट्रेचिंग (Stretching) के लिए तैयार नहीं होता जो दर्द पैदा कर रही हो, तो शरीर सुरक्षा तंत्र के रूप में आस-पास की मांसपेशियों को सिकोड़ लेता है। इससे कमर में ऐसी भयंकर जकड़न आती है कि इंसान सीधा खड़ा भी नहीं हो पाता।
  • नसों का हमेशा के लिए डैमेज होना: अगर दर्द के बावजूद योग जारी रखा जाए, तो नसें लगातार दबने के कारण सूखने लगती हैं, जो आगे चलकर स्थायी नसों की कमज़ोरी का कारण बन जाती है।

स्लिप डिस्क और कमर दर्द मुख्य रूप से किन प्रकारों के हो सकते हैं?

रीढ़ की हड्डी का दर्द हर इंसान में एक ही कारण से नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के दोषों के बिगड़ने से डिस्क की यह समस्या मुख्य रूप से तीन प्रकारों में अपना असर दिखाती है:

  • वात-प्रधान स्लिप डिस्क: इसमें रीढ़ की हड्डी और कार्टिलेज के बीच बहुत ज़्यादा खुश्की (Dryness) आ जाती है। इंसान को पैर में भयंकर सुई चुभने जैसा दर्द और झुनझुनी (Tingling sensation) महसूस होती है। ठंडे मौसम में यह दर्द असहनीय हो जाता है। इसे शांत करने के लिए वात दोष कम करने के उपाय अनिवार्य हैं।
  • पित्त-प्रधान स्लिप डिस्क: जब खून में गर्मी या यूरिक एसिड बढ़ा हुआ होता है, तो डिस्क खिसकने वाली जगह पर भयंकर अंदरूनी सूजन (Inflammation) आ जाती है। कमर में आग लगने जैसी जलन महसूस होती है।
  • कफ-प्रधान स्लिप डिस्क: लगातार आराम करने और भारी वज़न के कारण रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। इसमें इंसान को कमर में दर्द से ज़्यादा भारीपन और जकड़न महसूस होती है, विशेषकर सुबह पीठ में जकड़न बहुत ज़्यादा रहती है।

क्या आपका शरीर भी स्लिप डिस्क बिगड़ने के ये खतरनाक अलार्म बजा रहा है?

गलत योगासन करने के बाद अगर आपके शरीर में कुछ नए लक्षण दिखाई देने लगें, तो उन्हें योग का सामान्य दर्द (Soreness) समझने की गलती बिल्कुल न करें। ये अलार्म बताते हैं कि आपकी डिस्क नसों को डैमेज कर रही है:

  • पैरों में लगातार बढ़ता हुआ सुन्नपन: कमर से शुरू होकर दर्द का जांघों, पिंडलियों और फिर पैर के अंगूठे तक जाना और वहां लकवे (Paralysis) जैसी सुन्नता महसूस होना।
  • खांसते या छींकते समय कमर में करंट: अगर आपको अचानक खांसी या छींक आ जाए, तो पेट और रीढ़ पर पड़ने वाले झटके से कमर में एक तेज़ बिजली के झटके जैसा दर्द उठना।
  • खड़े होने या चलने में पैर का धोखा देना: जब आप थोड़ा सा चलते हैं और अचानक आपको लगे कि आपके पैर में ताक़त नहीं बची है और वह वज़न नहीं सह पा रहा है।
  • एक ही करवट लेटे रहने की मजबूरी: दर्द के कारण बिस्तर पर करवट बदलना नामुमकिन सा लगने लगना और रात भर भयंकर क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) और नींद की कमी से जूझना।

इस परेशानी में होने वाली गलतियाँ और कौन से योगासन स्लिप डिस्क में बिल्कुल नहीं करने चाहिए?

दर्द से जल्दी राहत पाने और खुद को फिट करने की धुन में मरीज़ अक्सर वो योगासन कर लेते हैं जो स्लिप डिस्क के लिए साक्षात ज़हर के समान हैं। आइए जानते हैं कि आपको किन योगासनों और गलतियों से पूरी तरह बचना है:

  • आगे झुकने वाले आसन (Forward Bending Asanas): पश्चिमोत्तानासन, पादहस्तासन और शशांकासन जैसे कोई भी आसन जिसमें आपको कमर से आगे की तरफ झुकना हो, स्लिप डिस्क के मरीज़ों के लिए बिल्कुल वर्जित (Banned) हैं। ये डिस्क को पीछे की ओर बाहर निकाल देते हैं।
  • तेज़ गति से किया जाने वाला सूर्य नमस्कार: सूर्य नमस्कार में आगे और पीछे झुकने का बहुत तेज़ चक्र होता है। कमर में समस्या होने पर यह गलत पोश्चर और झटके वाली मूवमेंट नसों को बुरी तरह कुचल सकती हैं।
  • झटके वाले या ट्विस्टिंग (Twisting) आसन: अर्धमत्स्येन्द्रासन या त्रिकोणासन जैसे आसन जिनमें रीढ़ की हड्डी को बहुत तेज़ी से मरोड़ना (Twist) पड़ता है, डिस्क की बाहरी परत (Annulus fibrosus) को फाड़ सकते हैं।
  • लगातार दर्द की अनदेखी करना: जब कोई योगासन करते हुए दर्द हो, तो यह सोचना कि 'दर्द के बाद ही आराम मिलेगा' और उस आसन को ज़बरदस्ती जारी रखना, रीढ़ की हड्डी को हमेशा के लिए अपाहिज बना सकता है।

आयुर्वेद स्लिप डिस्क और कमर दर्द की जड़ को कैसे देखता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc) या लम्बर स्पोंडिलोसिस कहता है, आयुर्वेद उसे 'गृध्रसी' (Gridhrasi) और वात दोष के भयंकर प्रकोप के गहरे विज्ञान से समझता है।

  • मज्जा और अस्थि धातु का सूखना: लंबे समय तक बैठे रहने और आज की सुविधाजनक जीवनशैली के कारण हमारी रीढ़ की हड्डी को पोषण नहीं मिलता। इससे अस्थि धातु कमज़ोर हो जाती है और डिस्क के अंदर का जेल (Jelly) सूख जाता है।
  • अपान वात की विकृति: कमर और श्रोणि (Pelvis) अपान वात का मुख्य स्थान है। जब मल-मूत्र का वेग रोका जाता है या पेट खराब रहता है, तो यह वात भड़ककर रीढ़ की नसों को जकड़ लेता है।
  • श्लेषक कफ का कम होना: रीढ़ की हड्डियों के बीच की चिकनाई को श्लेषक कफ कहते हैं। जब यह चिकनाई सूख जाती है, तो हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं और डिस्क बाहर की तरफ स्लिप हो जाती है।

कमर की नसों को ताकत देने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका भोजन ही आपकी रीढ़ की हड्डी को सुखा सकता है और उसे दोबारा लचीला बना सकता है। नसों को पोषण देने और सूजन को काटने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - नसों को चिकनाई देने वाले और वात शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रूखापन और गैस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, रागी, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, बासी रोटियां, पिज़्ज़ा।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (कमर के लिए अमृत), तिल का तेल, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, बहुत अधिक मक्खन, डालडा।
सब्ज़ियां (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद (सभी अच्छी तरह पकी हुई)। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, भारी कटहल, बैंगन, राजमा।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, अंजीर, पपीता, सेब। डिब्बाबंद और बिना मौसम के फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ (Beverages) हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध (रात में), ताज़ा मट्ठा, जीरा पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन (कॉफी नसों को सुखाती है), बर्फ का ठंडा पानी।

दर्द खींचने और डिस्क को रिपेयर करने वाली जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के कमर दर्द को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी डिस्क को दोबारा हील कर देते हैं:

  • अश्वगंधा: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने और सूखी हुई नसों को फौलादी ताकत देने के लिए अश्वगंधा एक अद्भुत रसायन है। यह मांसपेशियों की जकड़न को जड़ से खत्म करता है।
  • त्रिफला: आयुर्वेद के अनुसार कब्ज़ कमर दर्द का सबसे बड़ा कारण है। पुरानी कब्ज़ को तोड़ने और वात को शांत करने के लिए रोज़ रात को त्रिफला का सेवन करना एक बेहद ज़रूरी उपाय है।
  • गिलोय: शरीर के अंदरूनी 'आम' और डिस्क के आस-पास की भारी सूजन को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय एक बेहतरीन औषधि का काम करती है।
  • शल्लकी: यह जड़ी-बूटी आयुर्वेद में सूजन को तेज़ी से घटाने और डैमेज कार्टिलेज को सुरक्षित रखने के लिए अचूक मानी जाती है।
  • योगराज गुग्गुलु: जोड़ों और रीढ़ की हड्डी के बीच फँसे हुए ज़िद्दी वात को निकालने और जकड़न को तुरंत खोलने के लिए यह एक सबसे क्लासिकल आयुर्वेदिक मिश्रण है।

रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और जकड़न बहुत गहराई तक स्लिप डिस्क में जम चुकी हो और केवल मौखिक दवाइयाँ काफी न हों, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ नसों को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • कटि बस्ती: कमर के दर्द वाली जगह पर उड़द दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल भरा जाता है। यह कटि बस्ती सीधे सूखी हुई डिस्क को भारी चिकनाई देती है, जिससे साइटिका का दर्द तुरंत शांत होता है।
  • अभ्यंग मालिश: गुनगुने वात-शामक तेलों (जैसे महानारायण तेल) से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है और नसों में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • स्वेदन थेरेपी: तेल की मालिश के बाद हर्बल जड़ी-बूटियों की भाप दी जाती है। यह स्वेदन थेरेपी पसीने के ज़रिए नसों में जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और मांसपेशियों को आराम देती है।
  • मात्रा बस्ती: आंतों से वात को पूरी तरह खत्म करने के लिए मेडिकेटेड ऑयल की मात्रा बस्ती दी जाती है, जो स्लिप डिस्क को प्राकृतिक रूप से अंदर से रिपेयर करने का जादुई काम करती है।

डिस्क के रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से सूखे हुए कार्टिलेज और डैमेज हो चुकी नसों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित और लगातार समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। कमर की भारी जकड़न व दर्द में भारी कमी आएगी। करंट जैसा साइटिका का दर्द शांत होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होने लगेगा। पैरों की झुनझुनी और लकवे जैसा सुन्नपन लगभग खत्म हो जाएगा और आपकी मूवमेंट बिल्कुल फ्री हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: अस्थि और मज्जा धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी। खिसकी हुई डिस्क वापस अपनी जगह सेट होने लगेगी और आप बिना किसी पेनकिलर या सर्जरी के एक सामान्य, ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

स्लिप डिस्क और कमर दर्द के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए पेनकिलर्स, स्टेरॉयड इंजेक्शन और अंत में सर्जरी (Surgery) करना। वात को शांत करना, 'आम' को पचाना और नसों को प्राकृतिक रूप से पोषण देकर डिस्क को रिपेयर करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल रीढ़ की हड्डी की एक स्थानीय (Local) डिस्क के डैमेज की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और मज्जा/अस्थि धातु के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल पेनकिलर के साथ फिजियोथेरेपी की सलाह, लेकिन जठराग्नि या पेट साफ होने पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, कब्ज़ दूर करना और औषधीय तेलों की मालिश को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर सुन्नपन और दर्द तुरंत वापस आ जाता है और नसों के डैमेज का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और नर्वस सिस्टम खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद नसों की इस खुश्की और स्लिप डिस्क को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • मल या मूत्र पर नियंत्रण खो देना: यह रीढ़ की हड्डी की नसों के भयंकर रूप से दबने का संकेत हो सकता है, जो एक तुरंत सर्जरी मांगने वाली मेडिकल इमरजेंसी है।
  • पैरों में लकवे जैसी स्थिति: अगर पैरों की उँगलियों या पंजों का कोई हिस्सा बिल्कुल ही काम करना बंद कर दे (Foot drop) और महसूस होना पूरी तरह बंद हो जाए।
  • रात के समय असहनीय तेज़ दर्द और बुखार: अगर आराम करते समय या रात को सोते समय कमर में भयंकर चुभने वाला दर्द हो और साथ में तेज़ बुखार आ जाए।
  • कमर से पैरों तक अचानक बिजली जैसा करंट दौड़ना: अगर दर्द का स्तर इतना बढ़ जाए कि ज़मीन पर एक कदम रखना भी असंभव हो जाए और आप गिर पड़ें।

निष्कर्ष

कमर दर्द को दूर करने के लिए बिना सोचे-समझे आगे झुकने वाले योगासन करना आग में घी डालने जैसा है। स्लिप डिस्क कोई ऐसी साधारण जकड़न नहीं है जो कुछ झटके वाले आसनों से ठीक हो जाएगी; यह आपकी रीढ़ की हड्डी की उस कमज़ोर जठराग्नि और भड़के हुए वात दोष का चीखता हुआ अलार्म है जो नसों को कुचल रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स और नसों को सुन्न करने वाली कृत्रिम गोलियों से दबाते हैं, तो आप अपनी रीढ़ की हड्डी को हील करने के बजाय उसे स्थायी रूप से अपाहिज कर रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपने योगासनों को किसी विशेषज्ञ की देखरेख में सुधारें, आगे झुकना तुरंत बंद करें और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी और अखरोट शामिल करें। अश्वगंधा, शल्लकी और त्रिफला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और कटि बस्ती व विरेचन थेरेपी से अपनी सूखी हुई नसों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। स्लिप डिस्क के कारण खुद को बिस्तर पर सीमित न पड़ने दें, और अपने शरीर व नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

ऐसा नहीं है। स्लिप डिस्क के मरीज़ योग कर सकते हैं, लेकिन उन्हें आगे झुकने वाले (Forward bending) और झटके वाले आसन बिल्कुल नहीं करने चाहिए। मकरासन, भुजंगासन (हल्का) और शवासन जैसे पीछे की ओर झुकने या रीढ़ को सीधा रखने वाले आसन बहुत फायदेमंद होते हैं।

भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को पीछे की तरफ (Backward) स्ट्रेच करता है। जब आप पीछे की ओर झुकते हैं, तो रीढ़ की हड्डियों के बीच का आगे का हिस्सा खुलता है, जो बाहर निकली हुई डिस्क को वापस अपनी प्राकृतिक जगह (अंदर) खींचने में बहुत मदद करता है।

बिल्कुल। जब आपकी डिस्क खिसकी हुई होती है, तो भारी वज़न (जैसे पानी की बाल्टी या जिम के डंबल) उठाने से रीढ़ की हड्डी पर भयंकर वर्टिकल (Vertical) दबाव पड़ता है। यह दबाव डिस्क को और भी ज़्यादा बाहर निकालकर नसों को तुरंत डैमेज कर सकता है।

हाँ। साइकिल चलाते समय इंसान अक्सर आगे की तरफ झुककर बैठता है। स्लिप डिस्क में आगे झुकना खतरनाक है। इसके अलावा, सड़क के गड्ढों से लगने वाले झटके (Jerks) सीधे कमज़ोर डिस्क पर प्रहार करते हैं, जिससे दर्द और साइटिका बढ़ जाता है।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार आंतों में अपान वात रहता है। जब पुरानी कब्ज़ होती है, तो यह रुकी हुई गैस (वात) उल्टी दिशा में ऊपर की ओर चढ़ती है और कमर की सूखी हुई नसों में जाकर भयंकर चुभन और दर्द पैदा करती है।

अगर बीमारी बहुत ज़्यादा एडवांस स्टेज (जैसे Cauda Equina) में नहीं पहुँची है, तो कटि बस्ती बहुत असरदार है। इसमें इस्तेमाल होने वाला गर्म औषधीय तेल सूखी हुई डिस्क को चिकनाई देता है, वात को शांत करता है और सूजन को हटाकर प्राकृतिक रूप से डिस्क को रिपेयर करता है।

लम्बर बेल्ट कमर को सहारा (Support) देने के लिए होती है, खासकर सफर करते समय। लेकिन बेल्ट बांधकर योगासन करना या हर समय बेल्ट पहने रहना आपकी कमर की प्राकृतिक मांसपेशियों (Core muscles) को कमज़ोर और आलसी बना देता है।

स्लिप डिस्क और साइटिका का दर्द वात (रूखेपन और ठंडक) के कारण होता है। ऐसे में बर्फ लगाने से नसें और ज़्यादा सिकुड़ जाएंगी और दर्द बढ़ जाएगा। हमेशा गर्म औषधीय तेल की मालिश करने के बाद हल्की गर्म सिकाई (Steam/Heat) ही करनी चाहिए।

सरसों का तेल गर्म होता है, लेकिन नसों की गहराई तक जाकर पोषण देने के लिए तिल का तेल (Sesame oil) या उस पर आधारित आयुर्वेदिक तेल (जैसे महानारायण तेल) सबसे श्रेष्ठ होते हैं। मालिश हमेशा बहुत हल्के हाथों से करनी चाहिए, ज़ोर से रगड़ना नहीं चाहिए।

पेट के बल (On stomach) कभी नहीं सोना चाहिए। सबसे अच्छा तरीका पीठ के बल (On back) सोना है, और अपने घुटनों के नीचे एक हल्का तकिया (Pillow) रख लेना चाहिए। यह रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (Lower back) से दबाव को तुरंत हटा देता है। अगर करवट लेकर सोएं, तो दोनों घुटनों के बीच तकिया रखें।

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