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Desk Job आपकी Body को धीरे-धीरे कैसे Damage कर रही है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

बाहर से देखने में डेस्क जॉब बड़ी आरामदायक लगती है। ऐसा लगता है जैसे कोई मेहनत ही नहीं है। लेकिन इस आराम के पीछे शरीर की जो परेशानी होती है, वो बहुत धीरे-धीरे पता चलती है। घंटों एक ही जगह कुर्सी पर चिपके रहने से हमारे शरीर की नेचुरल मूवमेंट एकदम खत्म हो जाती है और मांसपेशियां सुन्न पड़ने लगती हैं।

शुरुआत में तो बस हल्की सी थकान, गर्दन या कमर की जकड़न और आंखों में भारीपन महसूस होता है। लोग इसे अक्सर इग्नोर कर देते हैं। पर जैसे-जैसे समय बीतता है, शरीर अपनी लचक, ताकत और एनर्जी सब खोने लगता है। लगातार बैठे रहने और स्क्रीन घूरने की इस आदत से न सिर्फ शरीर का, बल्कि आपके दिमाग का भी पूरा सिस्टम हिल जाता है।

घंटों बैठे रहने की आदत: कैसे ये शरीर को अंदर से खोखला कर रही है?

एक ही जगह पर बैठे रहने से शरीर की हलचल लगभग खत्म हो जाती है। मांसपेशियां काम न करने की वजह से जकड़ने लगती हैं और पूरे शरीर में एक अजीब सा भारीपन और सुस्ती छा जाती है।

  • मांसपेशियों का अकड़ना (Stiffness): घंटों एक ही पोजिशन में बैठे रहने से मांसपेशियां एकदम सख्त हो जाती हैं। शरीर इतना कड़क हो जाता है कि ज़रा सा झुकने या मुड़ने पर भी नसों में खिंचाव और दर्द महसूस होने लगता है।
  • खून का फ्लो सुस्त पड़ना और थकान: बैठे-बैठे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन (खून का फ्लो) काफी धीमा हो जाता है। इसकी वजह से शरीर को पूरी एनर्जी नहीं मिल पाती और इंसान बिना कोई भारी काम किए ही हर वक्त थका-थका सा फील करता है।
  • कमर और गर्दन की परेशानी: गलत तरीके से या बहुत देर तक कुर्सी पर बैठे रहने से सबसे ज्यादा टॉर्चर हमारी रीढ़ की हड्डी को झेलना पड़ता है। इसी वजह से कमर का दर्द, गर्दन का जाम होना और बार-बार उठने-बैठने में दिक्कत होना आम बात हो जाती है।
  • शरीर में भारीपन और एनर्जी डाउन: जब शरीर हिलेगा-डुलेगा नहीं, तो जाहिर है वो भारी और सुस्त ही लगेगा। धीरे-धीरे एनर्जी इतनी कम हो जाती है कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे काम भी पहाड़ जैसे लगने लगते हैं।
  • रीढ़ की हड्डी (Spine) पर भयंकर प्रेशर: रीढ़ की हड्डी हमारी बॉडी का मेन पिलर है। लगातार बैठे रहने से इस पर बहुत गलत और बेतरतीब प्रेशर पड़ता है। यही प्रेशर आगे चलकर भयंकर दर्द का कारण बनता है।
  • कंधों और गर्दन का दर्द: लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करते वक्त हम अक्सर गर्दन आगे निकालकर स्क्रीन में घुसे रहते हैं। इस गलत पोस्चर से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर गजब का स्ट्रेस पड़ता है, जो धीरे-धीरे परमानेंट दर्द बन जाता है।

शरीर को न हिलाने-डुलाने का अंजाम

जब शरीर से मेहनत नहीं ली जाती और हलचल कम हो जाती है, तो इसका असर पूरे सिस्टम पर दिखने लगता है। कुर्सी पर जमे रहने से मांसपेशियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि शरीर में हर वक्त जकड़न रहती है। खून का फ्लो सुस्त होने से एनर्जी हमेशा डाउन रहता है। शरीर का लचीलापन खत्म हो जाता है, भारीपन बढ़ जाता है और एक टाइम ऐसा आता है जब इंसान अपनी नॉर्मल लाइफ के छोटे-छोटे कामों में भी हांफने लगता है।

आयुर्वेद क्या कहता है: शरीर के 'दोषों' का बिगड़ना

आयुर्वेद मानता है कि बहुत ज्यादा बैठे रहना और फिजिकल एक्टिविटी जीरो होना, शरीर के तीनों 'दोषों' (वात, पित्त, कफ) का बैलेंस बुरी तरह बिगाड़ कर रख देता है। इससे बॉडी का नेचुरल रिदम खराब होता है और बीमारियों की लाइन लग जाती है। इसमें सबसे तगड़ा असर 'वात' पर पड़ता है, जिससे शरीर में दर्द और जकड़न का खेल शुरू हो जाता है।

  • वात दोष और बैठे रहने का कनेक्शन: आयुर्वेद में 'वात' का सीधा मतलब है मूवमेंट या गति। जब आप शरीर को हिलाना ही बंद कर देते हैं, तो वात बेकाबू हो जाता है। बढ़ा हुआ वात ही शरीर में रूखापन, नसों में भयंकर जकड़न और जोड़ों में दर्द पैदा करता है।
  • पित्त का भड़कना और दिमागी टेंशन: दिन भर स्क्रीन घूरना, काम का स्ट्रेस और वर्कलोड ये सब मिलकर शरीर की गर्मी (पित्त) को बढ़ा देते हैं। इसी वजह से बात-बात पर चिड़चिड़ापन, बेचैनी और दिमाग का हर वक्त गर्म रहना शुरू हो जाता है।
  • कफ का बढ़ना और शरीर का भारी होना: शरीर अगर लंबे समय तक एक्टिव न रहे, तो कफ बढ़ने लगता है। बढ़ा हुआ कफ ही हमें आलसी बनाता है। यही वजह है कि सारा दिन डेस्क जॉब करने वाले लोगों को हमेशा सुस्ती और शरीर में अजीब सा भारीपन महसूस होता रहता है।

आयुर्वेद का पूरा इलाज: सिर्फ ऊपरी नहीं, अंदरूनी सफाई

आयुर्वेद में किसी भी बीमारी को सिर्फ एक 'लक्षण' मानकर कोई दर्द की गोली नहीं दी जाती। इसका असली तरीका है शरीर के पूरे सिस्टम को समझना और उसकी कुदरती ताकत को वापस जगाना।

  • शरीर के बिगड़े हुए वात, पित्त और कफ (दोषों) का बैलेंस वापस सेट किया जाता है।
  • पाचन की मशीनरी और शरीर की एनर्जी को एकदम मजबूत बनाया जाता है।
  • दिन भर कुर्सी पर बैठे रहने और स्क्रीन घूरने से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाती है।
  • मांसपेशियों की जकड़न, शरीर का टूटना और भारीपन दूर किया जाता है।
  • शरीर में जो सड़ा हुआ 'आम' जमा हो गया है, उसे साफ करके बाहर निकाला जाता है।
  • आपके शरीर की जरूरत के हिसाब से आपकी डाइट और डेली रूटीन सेट किया जाता है।
  • शरीर की रिकवरी स्पीड और अंदरूनी ताकत बढ़ाई जाती है।

जब इलाज इस तरह जड़ से होता है, तो शरीर धीरे-धीरे अपनी पुरानी फॉर्म में लौट आता है और मोबाइल-लैपटॉप (टेक्नोलॉजी) से होने वाले नुकसान खुद-ब-खुद कम होने लगते हैं।

आयुर्वेदिक रूटीन: दिन भर की सही आदतें

अगर शरीर की खोई हुई ताकत और बैलेंस वापस पाना है, तो अपना रूटीन सुधारना ही पड़ेगा। आयुर्वेद कहता है कि सुबह से रात तक की छोटी-छोटी आदतों को बदलकर आप अपने शरीर और दिमाग, दोनों को एकदम फ्रेश रख सकते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठना: सुबह सूरज निकलने से पहले उठने से शरीर को जो साफ और कुदरती एनर्जी मिलती है, उससे पूरा दिन एकदम हल्का और ताजगी से भरा रहता है।
  • नेचर (प्रकृति) के साथ थोड़ा वक्त: सुबह कुछ देर शांत और खुली हवा में टहलने से दिमाग की दौड़-भाग शांत होती है और टेंशन गायब हो जाती है।
  • नस्य का कमाल: नाक में हल्का सा गाय का घी या तेल डालने से थकी हुई आंखों और भारी दिमाग को गजब का आराम मिलता है। दिनभर स्क्रीन देखने से जो सिरदर्द होता है, उसमें ये बहुत काम आता है।
  • टाइमटेबल फिक्स करना: सही टाइम पर सोना, जागना और खाना सिर्फ इतना करने भर से शरीर की बिगड़ी हुई घड़ी वापस सेट हो जाती है।

डेस्क जॉब की थकान उतारने वाली असरदार आयुर्वेदिक थेरेपी

घंटों ऑफिस की कुर्सी पर चिपकने से जो कमर दर्द, जकड़न और थकान होती है, उसके लिए आयुर्वेद में कुछ गजब की थेरेपी हैं। ये शरीर को तुरंत रिलैक्स करती हैं और पुराना बैलेंस वापस लाती हैं:

  • अभ्यंग (औषधीय तेल मालिश): जब जड़ी-बूटियों वाले तेल से मालिश होती है, तो बैठे-बैठे सुन्न पड़ चुकी मांसपेशियों की जकड़न खुल जाती है। इससे खून का दौरा तेज होता है और कमर या गर्दन के दर्द में तगड़ा आराम मिलता है।
  • स्वेदन (हर्बल भाप लेना): मालिश के बाद हल्की भाप लेने से शरीर की सारी अकड़न पिघल जाती है। यह पूरे शरीर को इतना रिलैक्स कर देती है कि दिन भर कुर्सी पर बैठने वाली थकान छूमंतर हो जाती है।
  • पिंड स्वेदन (गर्म पोटली की सिकाई): जड़ी-बूटियों की गर्म पोटली से जब सिकाई होती है, तो यह दर्द और सूजन को अंदर से खींच लेती है। यह मांसपेशियों को बहुत गहराई से आराम देती है और भारीपन एकदम खत्म कर देती है।
  • शिरोधारा: माथे पर लगातार गिरती तेल की धार दिमाग को इतना गहरा सुकून देती है कि काम का सारा स्ट्रेस और दिमागी थकान पल भर में धुल जाती है।

ओजस (ताकत) बढ़ाने वाला असली खाना

दिन भर मोबाइल या लैपटॉप में घुसे रहने से दिमागी थकान बहुत ज्यादा होती है। ऐसे में शरीर की असली बैटरी यानी 'ओजस' को फुल रखना बहुत जरूरी है। ओजस ही हमारी इम्युनिटी, ताकत और सहनशक्ति का बेस है। इसके लिए आपको एकदम ताजा और सही खाना खाना होगा:

  • ताजे फल: ये शरीर को तुरंत कुदरती एनर्जी देते हैं और दिनभर की सुस्ती भगाते हैं।
  • बादाम और सूखे मेवे: ये आपके थके हुए दिमाग और शरीर, दोनों को फौलाद जैसी ताकत देते हैं।
  • देसी घी: यह शरीर में रूखापन नहीं आने देता और अंदर से पोषण देकर पूरा बैलेंस बनाए रखता है।
  • ताजी हरी सब्जियां: ये हाजमे को एकदम हल्का रखती हैं और शरीर की बैटरी फुल रखती हैं।
  • घर का सादा खाना: दाल-रोटी और घर का बना खाना ही पेट के लिए सबसे सही होता है, जो पचने में भी आसान है।
  • पैकेटबंद खाने से दूरी: डिब्बे वाला और प्रोसेस्ड जंक फूड शरीर में सिर्फ कचरा और बीमारियां बढ़ाता है, इसलिए इससे जितना हो सके दूर ही रहें।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

अगर डेस्क जॉब के कारण शरीर में दर्द लगातार बढ़ रहा हो, खासकर कमर, गर्दन या कंधों में, और आराम करने के बाद भी राहत न मिले तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से अगर आंखों में तनाव, सिरदर्द या धुंधलापन रहने लगे, तो यह भी एक संकेत हो सकता है।

यदि रोज थकान महसूस हो, शरीर में भारीपन बना रहे या नींद का पैटर्न बिगड़ जाए, तो शरीर संतुलन खोने लगता है। इसके अलावा बार-बार चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई या काम के दौरान जल्दी थक जाना भी चेतावनी के संकेत हैं। ऐसी स्थिति में समय पर सलाह लेना जरूरी है ताकि समस्या आगे न बढ़े।

निष्कर्ष

डेस्क जॉब आज की जरूरत बन चुकी है, लेकिन इसका लगातार और गलत तरीके से किया गया उपयोग शरीर पर धीरे-धीरे असर डालता है। लंबे समय तक बैठना, कम शारीरिक गतिविधि और गलत मुद्रा शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। जहां आधुनिक दृष्टिकोण लक्षणों को कम करने पर ध्यान देता है, वहीं आयुर्वेद शरीर के मूल कारण को समझकर संतुलन वापस लाने पर काम करता है। सही दिनचर्या, नियमित ब्रेक और शरीर के संकेतों को समझकर इन प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने से शरीर में लगातार दर्द बन सकता है। समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या लंबे समय तक रह सकती है।

हाँ, छोटे-छोटे ब्रेक लेने से शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर रहता है। इससे जकड़न और थकान कम होने में मदद मिलती है।

हाँ, कम शारीरिक गतिविधि और लंबे समय तक बैठे रहने से वजन बढ़ने की संभावना रहती है। यह धीरे-धीरे शरीर की ऊर्जा को भी प्रभावित करता है।

हाँ, सही मुद्रा में बैठने से रीढ़ पर दबाव कम होता है। इससे लंबे समय तक दर्द और जकड़न की समस्या से बचाव हो सकता है।

हाँ, लगातार स्क्रीन और काम के दबाव से मानसिक थकान बढ़ सकती है। इससे ध्यान और काम करने की क्षमता प्रभावित होती है।

हाँ, शरीर में पानी की कमी से थकान और सिरदर्द बढ़ सकता है। इससे काम के दौरान असहजता महसूस होती है।

 हाँ, हल्की स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों की जकड़न कम होती है। इससे शरीर अधिक सक्रिय और हल्का महसूस करता है।

 हाँ, कम गतिविधि से पाचन धीमा हो सकता है। इससे भारीपन और असहजता महसूस हो सकती है।

 हाँ, गलत सपोर्ट वाली कुर्सी से रीढ़ पर दबाव बढ़ सकता है। इससे कमर और गर्दन में दर्द होने लगता है।

 हाँ, नियमित समय पर उठना, चलना और सही आदतें अपनाने से शरीर में सुधार दिखता है। इससे ऊर्जा और आराम दोनों बढ़ते हैं।

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