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Diabetes patients को dehydration से extra risk क्यों हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गर्मियों की चिलचिलाती धूप या उमस भरे दिन किसी को भी थका सकते हैं, लेकिन अगर आपको डायबिटीज़ (मधुमेह) है, तो यह मौसम आपके लिए एक अलग तरह की चुनौती लेकर आता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि प्यास लगना और पसीना आना एक आम बात है, जिसके लिए बस दो गिलास ठंडा पानी पीना ही काफी है। लेकिन क्या यह सही तरीका है? बिलकुल नहीं। एक आम इंसान के लिए डिहाइड्रेशन सिर्फ कमज़ोरी ला सकता है, लेकिन एक डायबिटीज़ के मरीज़़ के लिए यह शरीर के अंदर एक खतरनाक तूफान खड़ा कर सकता है। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि आपके ब्लड शुगर और शरीर के पानी के बीच क्या कनेक्शन है, तब तक आप खुद को सुरक्षित नहीं रख सकते। यह समझना बेहद ज़रूरी है कि डायबिटीज़ में बार-बार प्यास लगना सिर्फ मौसम का असर नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर का एक अलार्म है। आपके शरीर में पानी और शुगर का तालमेल कहीं न कहीं बिगड़ गया है, जिसे सही जानकारी, सही खानपान और प्राकृतिक तरीकों से वापस पाया जा सकता है।

डायबिटीज़ और डिहाइड्रेशन: आखिर क्या है ये खतरनाक कनेक्शन?

डायबिटीज़ के मरीज़ों में पानी की कमी (Dehydration) होने का रिस्क बाकी लोगों से कई गुना ज़्यादा होता है। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी किडनी (गुर्दे) का काम करने का तरीका है। जब आपके खून में शुगर (ग्लूकोज़) का लेवल बढ़ जाता है, तो आपकी किडनी उस अतिरिक्त शुगर को फिल्टर करने के लिए ओवरटाइम काम करने लगती है। किडनी इस एक्स्ट्रा शुगर को शरीर से बाहर निकालने के लिए यूरिन (पेशाब) का सहारा लेती है। इस प्रक्रिया में, शुगर अपने साथ शरीर का बहुत सारा पानी भी खींचकर बाहर ले जाती है। इसे मेडिकल भाषा में 'पॉलीयूरिया' (Polyuria) कहते हैं।

यही वजह है कि जब शुगर हाई होती है, तो मरीज़़ को बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता है। शरीर से लगातार पानी बाहर निकलने के कारण कोशिकाएं सूखने लगती हैं और दिमाग को सिग्नल मिलता है कि शरीर में पानी की भारी कमी हो गई है। असल में, शरीर उस पानी की भरपाई करना चाहता है जो शुगर को बाहर निकालने के चक्कर में बह गया है।

हाई ब्लड शुगर और डिहाइड्रेशन का खतरनाक चक्र

डायबिटीज़ और डिहाइड्रेशन एक ऐसे दुष्चक्र (Vicious Cycle) की तरह हैं, जो एक-दूसरे को लगातार बढ़ाते रहते हैं। ज़रा सोचिए, अगर आप एक गिलास पानी में दो चम्मच चीनी घोलते हैं, तो वह मीठा हो जाता है। अगर आप उस पानी को आधा कर दें, तो चीनी की मिठास और ज़्यादा गाढ़ी हो जाएगी।

ठीक ऐसा ही हमारे शरीर के साथ होता है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो खून गाढ़ा हो जाता है। खून में पानी कम होने से शुगर का कंसंट्रेशन (मात्रा) अपने आप बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ शुगर फिर से किडनी को ट्रिगर करता है कि और यूरिन बनाओ ताकि शुगर बाहर निकले। इस तरह मरीज़़ बार-बार यूरिन जाता है, शरीर से और पानी निकलता है, और शुगर का लेवल और ज़्यादा हाई हो जाता है। अगर इस चक्र को सही समय पर पानी पीकर तोड़ा न जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

क्या आपको पता हैं डिहाइड्रेशन के ये छिपे हुए संकेत?

अक्सर हमें लगता है कि सिर्फ गला सूखना ही पानी की कमी है, लेकिन डायबिटीज़ में इसके संकेत कुछ अलग और गंभीर होते हैं। शरीर पानी की कमी होने पर कई तरह से मदद मांगता है:

  • लगातार मुंह और होंठ सूखना: पर्याप्त पानी पीने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे गले में कुछ अटका हुआ है और होंठों पर पपड़ी जम रही है।
  • अत्यधिक थकान और सुस्ती: शरीर में पानी कम होने से खून का संचार धीमा हो जाता है, जिससे मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और आप हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं।
  • आंखों के आगे धुंधलापन: डिहाइड्रेशन के कारण आंखों के लेंस का फ्लूइड सूखने लगता है, जिससे अचानक धुंधला दिखाई देने लगता है।
  • स्किन का रूखा होना: त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी खो देती है और खुरदरी या खुजलीदार हो जाती है।
  • चक्कर आना या सिरदर्द: दिमाग को सही मात्रा में ब्लड और ऑक्सीजन न मिलने से अचानक खड़े होने पर चक्कर आते हैं या सिर में भारीपन रहता है।

किडनी और हार्ट पर डिहाइड्रेशन का क्या असर पड़ता है?

डायबिटीज़ में सबसे ज़्यादा खतरा किडनी और दिल को होता है, और पानी की कमी इस खतरे को और बढ़ा देती है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो खून गाढ़ा हो जाता है। इस गाढ़े खून को पूरे शरीर में पंप करने के लिए आपके हार्ट (दिल) को बहुत ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर डगमगा जाता है।

दूसरी तरफ, आपकी किडनी पहले ही हाई शुगर को बाहर निकालने की मेहनत कर रही होती है। पानी की कमी होने पर किडनी के फिल्टर सूखने लगते हैं और उन पर भारी दबाव पड़ता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), किडनी में पथरी या गंभीर मामलों में 'डायबिटिक किडनी डिज़ीज़' का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह में प्यास (तृष्णा) क्यों बढ़ती है?

आयुर्वेद में डायबिटीज़ को 'प्रमेह' या 'मधुमेह' के रूप में जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस बीमारी में शरीर के अंदर वात और पित्त दोष का संतुलन बिगड़ जाता है। जब शरीर में वात (हवा और रूखापन) बढ़ता है, तो यह शरीर की प्राकृतिक नमी (कफ और ओज) को सुखाने लगता है। पित्त (गर्मी) के बढ़ने से शरीर के अंदर भयंकर दाह (जलन) पैदा होती है।आयुर्वेद मानता है कि मधुमेह में शरीर के टिश्यू (धातु) कमज़ोर हो जाते हैं। जब किडनी बार-बार शरीर का जल तत्व (क्लेद) बाहर निकालती है, तो शरीर अपनी जीवन ऊर्जा (ओज) भी खोने लगता है। यही कारण है कि मरीज़़ को बार-बार 'तृष्णा' (अत्यधिक प्यास) सताती है और वह हमेशा थका हुआ महसूस करता है।

डायबिटीज़ में पानी की कमी दूर करने वाली जादुई जड़ी-बूटियाँ 

आयुर्वेद में कुछ ऐसी शानदार जड़ी-बूटियाँ  मौजूद हैं जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ शुगर को भी कंट्रोल करती हैं। यहाँ सबसे असरदार जड़ी-बूटियाँ  दी गई हैं:

  • गिलोय : गिलोय को आयुर्वेद में 'अमृता' कहा जाता है। यह शरीर की अंदरूनी गर्मी को शांत करती है। इसके सेवन से शरीर का इम्यून सिस्टम तो मज़बूत होता ही है, साथ ही यह खून को साफ करके शरीर की कोशिकाओं में नमी बनाए रखती है, जिससे बार-बार प्यास लगने की समस्या कम होती है।
  • आंवला : विटामिन सी से भरपूर आंवला डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए वरदान है। यह शरीर में पानी के संतुलन को सुधारता है और 'ओज' को बढ़ाता है। आंवले का रस पीने से यूरिन इन्फेक्शन का खतरा कम होता है और किडनी को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है।
  • जामुन की गुठली : जामुन की गुठली का चूर्ण शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकता है। जब शुगर कंट्रोल में रहती है, तो किडनी को अतिरिक्त यूरिन बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे शरीर का पानी बेवजह बाहर नहीं निकलता और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है।
  • धनिया के बीज : धनिया प्रकति से बहुत शीतल होता है। रात भर पानी में भिगोए हुए धनिये का पानी सुबह पीने से पेट की गर्मी शांत होती है, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बनता है और तेज़ प्यास लगने की समस्या से तुरंत राहत मिलती है।

गर्मी और पसीना: डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए डबल खतरा क्यों?

गर्मियों का मौसम डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए एक 'डबल अटैक' की तरह होता है। एक तरफ तो मौसम की गर्मी के कारण पसीना ज़्यादा आता है, जिससे शरीर का पानी उड़ता है। दूसरी तरफ, हाई शुगर के कारण शरीर यूरिन के रास्ते भी पानी बाहर फेंक रहा होता है।

इसके अलावा, कई डायबिटीज़ के मरीज़ों को 'न्यूरोपैथी' की समस्या होती है। न्यूरोपैथी के कारण शरीर के पसीने वाली ग्रंथियां ठीक से काम करना बंद कर देती हैं। इसका मतलब है कि शरीर अपना तापमान खुद ठंडा नहीं कर पाता और मरीज़़ को 'हीट एग्जॉर्शन' या 'हीट स्ट्रोक' का खतरा आम इंसान के मुकाबले बहुत ज़्यादा हो जाता है।

मीठे ड्रिंक्स और कैफीन: प्यास बुझाने का सबसे गलत तरीका

जब प्यास लगती है, तो अक्सर लोग बाज़ार में मिलने वाले पैक्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स या चाय-कॉफी का सहारा लेते हैं। डायबिटीज़ में यह गलती जानलेवा साबित हो सकती है:

  • कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड जूस: इनमें भारी मात्रा में रिफाइंड शुगर होती है। इन्हें पीने से प्यास बुझने की बजाय ब्लड शुगर अचानक आसमान छूने लगता है, जिससे किडनी और ज़्यादा यूरिन बनाने लगती है।
  • चाय और कॉफी (कैफीन): कैफीन एक 'डाययूरेटिक' पदार्थ है। इसका मतलब है कि यह शरीर से पानी को बाहर निकालने का काम करता है। अगर आप प्यास लगने पर कॉफी पीते हैं, तो शरीर में पानी जाने की बजाय जो थोड़ा बहुत पानी बचा है, वह भी पेशाब के रास्ते बाहर आ जाएगा।
  • एनर्जी ड्रिंक्स: इनमें सिंथेटिक इलेक्ट्रोलाइट्स और शुगर होती है जो किडनी पर बुरा असर डालती है।

डायबिटीज़ की दवाइयाँ  भी बढ़ा सकती हैं पानी की कमी

कई बार आप पानी भी सही पी रहे होते हैं, लेकिन फिर भी डिहाइड्रेशन हो जाता है। इसका कारण आपकी दवाइयाँ  हो सकती हैं। आज के समय में डायबिटीज़ को कंट्रोल करने के लिए 'SGLT2 इनहिबिटर्स' जैसी दवाइयाँ  दी जाती हैं। ये दवाइयाँ  किडनी को निर्देश देती हैं कि वह फालतू शुगर को पेशाब के ज़रिए बाहर निकाल दे।जब शुगर यूरिन के रास्ते बाहर आती है, तो वह अपने साथ पानी भी लाती है। इसके अलावा, कई बार हाई ब्लड प्रेशर की दवाइयाँ   वाटर पिल्स भी शरीर से एक्स्ट्रा फ्लूइड बाहर निकालती हैं। इसलिए अगर आप ऐसी दवाइयाँ  ले रहे हैं, तो आपको आम इंसान से ज़्यादा पानी पीने की ज़रूरत होती है।

गंभीर खतरे: DKA और HHS क्या हैं?

अगर डायबिटीज़ में डिहाइड्रेशन को लंबे समय तक इग्नोर किया जाए, तो यह दो बहुत ही खतरनाक मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले सकता है:

  • Diabetic Ketoacidosis : यह ज़्यादातर टाइप 1 डायबिटीज़ में होता है। जब शरीर में इंसुलिन नहीं होता और पानी की कमी हो जाती है, तो शरीर ऊर्जा के लिए फैट को तोड़ने लगता है। इससे खून में 'कीटोन्स' नाम का एसिड बन जाता है, जो जानलेवा हो सकता है।
  • HHS : यह ज़्यादातर टाइप 2 डायबिटीज़ के बड़े-बुजुर्गों में होता है। इसमें ब्लड शुगर का लेवल बहुत ज़्यादा  600 mg/dL से ऊपर  हो जाता है और शरीर बुरी तरह सूख जाता है। खून एकदम गाढ़े सिरप जैसा हो जाता है, जिससे इंसान कोमा में भी जा सकता है।

बिना शुगर बढ़ाए शरीर को हाइड्रेटेड रखने के देसी तरीके

आप बिना किसी पैक्ड जूस या कोल्ड ड्रिंक के भी अपने शरीर को तरोताज़ा और हाइड्रेटेड रख सकते हैं:

  • नींबू पानी (बिना चीनी): एक गिलास पानी में आधा नींबू और थोड़ा सा सेंधा नमक या काला नमक डालकर पीएं। यह इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को तुरंत पूरा करता है।
  • छाछ (Buttermilk): दोपहर के समय भुने जीरे वाली ताज़ा छाछ पीएं। यह पेट को ठंडा रखती है और शुगर भी नहीं बढ़ाती।
  • नारियल पानी: सुबह के समय ताज़ा नारियल पानी पीना बहुत फायदेमंद है। इसमें प्राकृतिक पोटेशियम होता है जो कमज़ोरी दूर करता है ।
  • खीरा और ककड़ी: अपनी डाइट में ऐसी सब्ज़ियाँ शामिल करें जिनमें 90% से ज़्यादा पानी होता है, जैसे खीरा, टमाटर और लौकी।

रोज़मर्रा की कौन-सी आदतें अपनाकर पानी की कमी से बचें?

अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए अपनी डेली रूटीन में ये छोटे-छोटे बदलाव लाएं:

  • अलार्म लगाएं: प्यास लगने का इंतज़ार न करें। हर एक या डेढ़ घंटे में पानी पीने की आदत डालें।
  • बोतल साथ रखें: घर से बाहर निकलते समय हमेशा अपनी पानी की बोतल साथ रखें ताकि बाहर का कुछ अनहेल्दी न पीना पड़े।
  • यूरिन का रंग चेक करें: अपने यूरिन के रंग पर नज़र रखें। अगर यह साफ पानी जैसा या हल्का पीला है, तो सब ठीक है। अगर यह गाढ़ा पीला है, तो तुरंत पानी पीएं।
  • घूंट-घूंट कर पीएं: एक साथ गट-गट करके पानी पीने से वह तुरंत यूरिन के रास्ते निकल जाता है। हमेशा पानी बैठकर और घूंट-घूंट करके पीएं ताकि कोशिकाएं उसे सोख सकें।

आयुर्वेद डायबिटीज़ की इस समस्या को कैसे देखता है?

आयुर्वेद में डायबिटीज़ का इलाज सिर्फ शुगर के नंबर कम करना नहीं है, बल्कि शरीर के पूरे सिस्टम को सुधारना है। आयुर्वेद मानता है कि जब हमारा पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो शरीर में आम बनने लगता है। यह टॉक्सिन्स शरीर के चैनल्स को ब्लॉक कर देते हैं।

आयुर्वेद इलाज में वात, पित्त और कफ को बैलेंस करने पर ज़ोर देता है। सही खानपान, जड़ी-बूटियों जैसे मेथी, गिलोय, करेला  और पंचकर्म चिकित्सा के ज़रिए शरीर की प्राकृतिक ताकत को वापस लाया जाता है, जिससे किडनी पर दबाव कम होता है और शरीर अपनी नमी खुद बनाए रखना सीख जाता है।

डिहाइड्रेशन होने पर डॉक्टर से कब मिलना ज़रूरी है?

अगर आपको डिहाइड्रेशन के लक्षण दिख रहे हैं, तो इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर के पास भागना चाहिए:

  • लगातार उल्टी या दस्त: अगर पेट खराब है और जो भी पानी आप पी रहे हैं वह शरीर में नहीं रुक रहा है।
  • अत्यधिक कंफ्यूजन: अगर दिमाग सुन्न महसूस हो रहा है, बोलने में लड़खड़ाहट हो रही है या बेहोशी आ रही है।
  • यूरिन का बंद होना: अगर पिछले कई घंटों से यूरिन नहीं आया है या बहुत तेज़ जलन हो रही है।
  • शुगर लेवल का कंट्रोल से बाहर होना: अगर पानी पीने के बावजूद शुगर लेवल लगातार बढ़ता जा रहा है और कंट्रोल में नहीं आ रहा है।

डायबिटीज़ के लिए आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य रक्त शर्करा (Blood Sugar) को सुरक्षित सीमा में रखना और मधुमेह की जटिलताओं को रोकना। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार शरीर के संतुलन, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करना।
नज़रिया मधुमेह को इंसुलिन की कमी, इंसुलिन प्रतिरोध और चयापचय (Metabolism) संबंधी विकार के रूप में देखा जाता है। आयुर्वेद में मधुमेह को ‘प्रमेह’ जैसे सिद्धांतों से जोड़कर देखा जाता है और जीवनशैली पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
उपचार तरीका आहार, व्यायाम, वजन नियंत्रण, मौखिक दवाएँ और आवश्यकता पड़ने पर इंसुलिन का उपयोग किया जाता है। जड़ी-बूटियाँ, आहार परिवर्तन, योग, दिनचर्या और अन्य पारंपरिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।
ब्लड शुगर नियंत्रण वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचारों के माध्यम से शुगर लेवल नियंत्रित किया जाता है, जिससे किडनी, आँखों, नसों और हृदय की जटिलताओं का जोखिम कम होता है। कुछ आयुर्वेदिक उपाय जीवनशैली सुधार और समग्र स्वास्थ्य में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें चिकित्सकीय निगरानी में अपनाना चाहिए।
डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) कुछ दवाओं में पेशाब बढ़ने के कारण निर्जलीकरण का जोखिम हो सकता है, लेकिन यह सभी दवाओं के साथ नहीं होता और इसकी निगरानी की जाती है। पर्याप्त जल सेवन, संतुलित आहार और जीवनशैली पर बल दिया जाता है।
अंगों का स्वास्थ्य किडनी, लीवर, हृदय और अन्य अंगों की नियमित जाँच और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। समग्र स्वास्थ्य और शरीर की कार्यक्षमता को समर्थन देने का प्रयास किया जाता है।
वैज्ञानिक प्रमाण आधुनिक मधुमेह उपचारों की प्रभावशीलता और सुरक्षा के लिए व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। कुछ आयुर्वेदिक औषधियों पर शोध उपलब्ध है, लेकिन अधिकांश दावों के लिए और अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले अध्ययनों की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

डायबिटीज़ के साथ जीना एक सतर्कता का खेल है। शरीर में पानी की कमी होना कोई मामूली बात नहीं है, यह आपके पूरे सिस्टम को हिला सकती है। जब आप अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखते हैं और सही मात्रा में प्राकृतिक रूप से पानी पीते हैं, तो शरीर खुद-ब-खुद सुरक्षित रहता है। मीठे ड्रिंक्स या गलत आदतों पर निर्भर होना किसी भी तरह से सही समाधान नहीं है। अपनी दिनचर्या में सुधार, सही देसी ड्रिंक्स, जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर इस जोखिम को जड़ से खत्म किया जा सकता है। याद रखें, आपका शरीर एक मशीन की तरह है जिसे सुचारू रूप से चलने के लिए सही मात्रा में पानी और प्राकृतिक देखभाल की ज़रूरत होती है। अपने शरीर के संकेतों को सुनें और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

References:

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/diabetes

https://www.who.int/health-topics/diabetes

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK551501/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हर व्यक्ति की ज़रूरत अलग होती है, लेकिन आमतौर पर डायबिटीज़ के मरीज़़ को दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास (2.5 से 3 लीटर) पानी ज़रूर पीना चाहिए।

बिलकुल नहीं। पैक्ड जूस में फाइबर नहीं होता और बहुत ज़्यादा रिफाइंड शुगर होती है, जो आपका शुगर लेवल तुरंत बढ़ा देगी और डिहाइड्रेशन को और खराब कर देगी।

हाँ, गिलोय का पानी शुगर को कंट्रोल करने और शरीर को डिटॉक्स करने के लिए बहुत अच्छा है। इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे ज़्यादा फायदेमंद होता है।

रात को सोने से 2 घंटे पहले पानी या लिक्विड का सेवन कम कर दें। अगर शुगर कंट्रोल में रहेगी, तो रात में बार-बार यूरिन आने की समस्या अपने आप कम हो जाएगी।

पर्याप्त पानी पीने से खून में मौजूद एक्स्ट्रा शुगर को किडनी के ज़रिए बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिससे शुगर लेवल को मैनेज करना आसान हो जाता है।

नहीं, चाय और कॉफी में कैफीन होता है जो शरीर से पानी को बाहर निकालता है। इसलिए इन्हें पीने से शरीर हाइड्रेट होने की बजाय और ज़्यादा डिहाइड्रेट होता है।

नींबू पानी में चीनी की जगह सेंधा नमक, भुना हुआ जीरा या पुदीने की पत्तियां मिला सकते हैं। यह बिना शुगर बढ़ाए इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करता है।

हाँ, एसी की हवा शरीर और त्वचा की प्राकृतिक नमी को सोख लेती है। इसलिए एसी में बैठे रहने पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहना चाहिए।

हाँ, कुछ डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर की दवाइयाँ  ऐसी होती हैं जो यूरिन के ज़रिए एक्स्ट्रा पानी बाहर निकालती हैं, जिससे मुँह सूखने की समस्या हो सकती है। अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें।

जब शरीर में पानी और ज़रूरी मिनरल्स (जैसे सोडियम और पोटेशियम) की कमी हो जाती है, तो मांसपेशियों में अचानक तेज़ खिंचाव और दर्द होने लगता है, जिसे ऐंठन कहते हैं।

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