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Glaucoma - Pressure कम तो आँख Safe? Truth Beyond Numbers

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आँखों में आई ड्रॉप्स डालना, डॉक्टर के पास जाकर मशीन पर आँखें चेक कराना और यह सुनकर राहत की सांस लेना कि "आई प्रेशर Eye Pressure अब नॉर्मल है।"ज़्यादातर ग्लोकोमा Glaucoma यानी काला मोतिया के मरीज़ इसी चक्र में जी रहे हैं। उन्हें लगता है कि अगर आँखों का दबाव IOP 21 mmHg से नीचे है, तो उनकी आँखें पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा है?

सच्चाई यह है कि ग्लोकोमा महज़ आँखों के बढ़े हुए दबाव की बीमारी नहीं है। यह एक 'साइलेंट थीफ ऑफ साइट' Silent Thief of Sight है जो आपकी आँखों की मुख्य नस ऑप्टिक नर्व Optic Nerve को धीरे-धीरे और बिना आवाज़ किए सुखा रहा है कई बार प्रेशर नॉर्मल होने के बावजूद दृष्टि कम होती जाती है, जिसे 'नॉर्मल टेंशन ग्लोकोमा' कहते हैं अगर आप केवल आई ड्रॉप्स के भरोसे बैठकर यह मान रहे हैं कि आपकी आँखें सुरक्षित हैं, तो आप एक बहुत बड़े धोखे में हैं। जब तक ऑप्टिक नर्व को अंदर से पोषण नहीं मिलेगा, यह बीमारी आपकी आँखों की रोशनी को हमेशा के लिए छीन सकती है।

आँखों का यह दबाव IOP और ऑप्टिक नर्व शरीर में क्या संकेत देते हैं?

हमारी आँखों के अंदर एक तरल पदार्थ Aqueous humor लगातार बनता है और बाहर निकलता रहता है। जब यह रास्ता ब्लॉक हो जाता है, तो आँखों में दबाव बढ़ने लगता है। यह दबाव सीधे आँखों की उस नस Optic Nerve पर पड़ता है, जो हमारी आँखों से देखे गए चित्र को दिमाग तक पहुँचाती है।

  • ऑप्टिक नर्व Optic Nerve का कुचलना: जैसे किसी पाइप पर भारी पत्थर रख दिया जाए और पानी का बहाव रुक जाए, वैसे ही आँखों के बढ़े हुए दबाव से ऑप्टिक नर्व दबने लगती है।
  • नसों का सूखना Nerve Atrophy: जब नसें दबती हैं, तो उन्हें खून और ऑक्सीजन मिलना कम हो जाता है। ड्रॉप्स से आप दबाव तो कम कर लेते हैं, लेकिन जो नसें सूखने लगी हैं, उन्हें कोई पोषण नहीं मिल पाता।
  • पेरिफेरल विज़न Peripheral Vision का जाना: यह बीमारी सबसे पहले आपके साइड के विज़न बगल की दृष्टि को खत्म करती है। आपको सामने का तो साफ दिखता है, लेकिन आस-पास का दिखना कम हो जाता है, जिसे मरीज़ अक्सर बहुत देर से समझ पाते हैं।
  • नॉर्मल टेंशन Normal Tension का भ्रम: जब शरीर में अंदरूनी कमज़ोरी, स्ट्रेस या ब्लड सर्कुलेशन की कमी होती है, तो प्रेशर नॉर्मल 12-21 mmHg होने के बावजूद ऑप्टिक नर्व डैमेज होने लगती है। यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि सिर्फ प्रेशर घटाना ही इलाज नहीं है।

Glaucoma और नसों का डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

आयुर्वेद के अनुसार, आँखों में होने वाला कोई भी रोग दोषों वात, पित्त, कफ के असंतुलन का परिणाम होता है। आयुर्वेद में ग्लोकोमा को 'अधिमंथ' Adhimantha कहा गया है। हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति के अनुसार इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं:

  • वात-प्रधान ग्लोकोमा Vataja Adhimantha: इसमें आँखों में भारी रूखापन और चुभन होती है। ऐसा लगता है जैसे आँख के अंदर कोई सुई चुभो रहा हो। आँखों के साथ-साथ सिर के पिछले हिस्से और कनपटी Temples में तेज़ दर्द रहता है। ऑप्टिक नर्व के सूखने Atrophy की गति इसमें सबसे तेज़ होती है।
  • पित्त-प्रधान ग्लोकोमा Pittaja Adhimantha: इसमें आँखों में आग लगने जैसी जलन और लाली Redness रहती है। धूप या तेज़ रोशनी को बर्दाश्त करना Photophobia बहुत मुश्किल हो जाता है। आँखों से गर्म पानी निकलता है और देखने पर चीज़ें पीली या धुंधली नज़र आती हैं।
  • कफ-प्रधान ग्लोकोमा Kaphaja Adhimantha: इसमें दर्द कम होता है लेकिन आँखों में बहुत भारीपन महसूस होता है। आँखों के आगे हमेशा एक सफेद जाला सा महसूस होता है। तरल पदार्थ के गाढ़ेपन के कारण नसों की ब्लॉकेज Srotas Avarodha सबसे ज़्यादा इसी स्थिति में होती है।

क्या आपकी आँखों में भी ग्लोकोमा के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

ऑप्टिक नर्व का डैमेज रातों-रात नहीं होता। ग्लोकोमा आपकी दृष्टि चुराने से पहले कई संकेत देता है, जिन्हें लोग अक्सर चश्मे का नंबर बदलने या बुढ़ापे का असर मानकर टाल देते हैं। तुरंत सतर्क हो जाएँ अगर:

  • रोशनी के चारों ओर रंगीन घेरे Halos: रात के समय ट्यूबलाइट या बल्ब की तरफ देखने पर उसके चारों ओर इंद्रधनुष जैसे रंगीन घेरे दिखाई देना।
  • अचानक दृष्टि का धुंधला होना: कुछ समय के लिए आँखों के आगे धुंध छा जाना और फिर अपने आप ठीक हो जाना।
  • आँखों और सिर में तेज़ भारीपन: कोई भी बारीक काम करने, पढ़ने या स्क्रीन देखने के तुरंत बाद आँखों के पीछे और सिर में तेज़ भारीपन महसूस होना।
  • साइड विज़न Side Vision कम होना: गाड़ी चलाते समय या चलते समय साइड से आने वाली चीज़ें या लोग अचानक सामने आ जाना, क्योंकि साइड की दृष्टि कमज़ोर होने लगी है।

इस बीमारी में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

नंबर्स प्रेशर रीडिंग के मायाजाल में फँसकर मरीज़ अक्सर ऐसी गलतियाँ करते हैं जो अंततः अंधेपन Blindness का कारण बनती हैं:

  • सिर्फ ड्रॉप्स पर निर्भरता: मरीज़ सोचते हैं कि ड्रॉप्स डालना ही इलाज है। ड्रॉप्स तरल को कम करते हैं, लेकिन डैमेज हो रही ऑप्टिक नर्व को ताक़त नहीं देते।
  • डाइट और लाइफस्टाइल की अनदेखी: कब्ज़, अत्यधिक तनाव और गलत खान-पान से शरीर में बढ़ा हुआ 'आम' Toxins आँखों की सूक्ष्म नसों को ब्लॉक करता रहता है, जिसे कोई मशीन नहीं पकड़ पाती।
  • नियमित जाँच न कराना: प्रेशर नॉर्मल होने पर मरीज़ विज़ुअल फील्ड टेस्ट Perimetry या OCT ऑप्टिक नर्व का स्कैन कराना छोड़ देते हैं, जबकि नस अंदर ही अंदर डैमेज हो रही होती है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: यदि केवल प्रेशर पर ध्यान दिया गया और नस के पोषण को नज़रअंदाज़ किया गया, तो यह ट्यूबलर विज़न Tubular Vision और अंततः पूर्ण दृष्टिहीनता Total Blindness में बदल जाता है, जिसे रिवर्स करना असंभव हो जाता है

आयुर्वेद ग्लोकोमा और ऑप्टिक नर्व के डैमेज को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे ग्लोकोमा या ऑप्टिक न्यूरोपैथी कहता है, आयुर्वेद उसे 'अधिमंथ' और 'दृष्टि नाड़ी क्षय' Optic Nerve Atrophy के रूप में बहुत गहराई से समझता है।

  • स्रोतोरोध Channels की ब्लॉकेज: आँखों में तरल का बहाव सूक्ष्म चैनल्स सिराओं के माध्यम से होता है जब पाचन कमज़ोर होता है और जठराग्नि बिगड़ती है, तो शरीर का कचरा आम और दूषित कफ इन चैनल्स को ब्लॉक कर देता है, जिससे आँखों का प्रेशर IOP बढ़ता है।
  • वात का प्रकोप और नसों का सूखना: प्रेशर से ज़्यादा खतरनाक वात दोष है। आयुर्वेद मानता है कि बढ़ा हुआ वात सीधे मज्जा धातु Nerve tissue को सुखाता है। ऑप्टिक नर्व का डैमेज असल में वात के कारण उसका रूखा होकर सिकुड़ना है।
  • रक्त और पित्त की दृष्टि: अत्यधिक स्क्रीन टाइम, तनाव, और तीखे-गर्म भोजन से पित्त और रक्त दूषित होकर आँखों की नाज़ुक नसों को जला देते हैं Oxidative stress।

नसों की खुश्की मिटाने और दृष्टि बचाने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका भोजन आपकी आँखों का सबसे बड़ा दुश्मन या सबसे अच्छी दवा हो सकता है। ग्लोकोमा के प्रभाव को रोकने और ऑप्टिक नर्व को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट का पालन करें:

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - चक्षुष्य और वात-पित्त शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन और दबाव बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, जौ। वाइट ब्रेड, मैदा, भारी पिज़्ज़ा, पैकेटबंद नूडल्स।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी आँखों की नसों का सबसे बड़ा अमृत। रिफाइंड तेल, डालडा, अत्यधिक ट्रांस फैट्स।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, पालक, गाजर, शकरकंद, परवल। अत्यधिक मिर्च-मसाले वाली सब्ज़ियाँ, कच्चा और भारी सलाद।
फल और मेवे Fruits आंवला, रात भर भीगे हुए बादाम, मुनक्का, पपीता, मीठे सेब। डिब्बाबंद फल, बहुत अधिक खट्टे फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ Beverages आंवला जूस, ताज़ा मट्ठा, धनिया-सौंफ का पानी, त्रिफला का पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन कॉफी आँखों का दबाव बढ़ाती है, शराब, कोल्ड ड्रिंक्स।

ऑप्टिक नर्व को फौलादी ताक़त देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य 'चक्षुष्य' आँखों के लिए लाभकारी रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के डैमेज हो चुकी नसों को पोषण देते हैं और दृष्टि को सुरक्षित करते हैं:

  • आंवला Amla: यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का सबसे बड़ा स्रोत है। आंवला ऑप्टिक नर्व को डैमेज होने से बचाता है और आँखों की रोशनी को स्थिर रखता है।
  • त्रिफला Triphala: ग्लोकोमा के मरीज़ों के लिए त्रिफला किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह पेट को साफ रखकर आँखों का प्रेशर बढ़ने से रोकता है और आँखों की नसों को ताक़त देता है।
  • पुनर्नवा Punarnava: इसके नाम का ही अर्थ है "फिर से नया करने वाला"। यह शरीर से अतिरिक्त तरल Fluid को बाहर निकालकर आँखों के भारी दबाव IOP को प्राकृतिक रूप से कम करता है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: दिमाग और आँखों की नसों को मानसिक तनाव Stress और डिजिटल स्ट्रेस से बचाने के लिए यह बेहतरीन एडाप्टोजेन है। यह सूखी हुई मज्जा धातु में जान डालता है।
  • सप्तामृत लौह Saptamrit Lauh: यह आयुर्वेद का एक जादुई योग है जो विशेष रूप से आँखों की कमज़ोर नसों और दृष्टि दोषों को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

आँखों की नसों को खोलने और डैमेज रोकने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और ब्लॉकेज बहुत गहराई तक आँखों की नसों में जम चुकी हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ आँखों को तुरंत रीबूट कर देती हैं और आई प्रेशर को तेज़ी से सामान्य करती हैं:

  • नेत्र तर्पण Netra Tarpana: आँखों के चारों ओर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें औषधीय गुनगुना गाय का घी भरा जाता है। यह घी सीधे आँखों के टिशूज़ में सोख लिया जाता है, जो सूखी हुई ऑप्टिक नर्व को तुरंत चिकनाई Lubrication देता है और वात को शांत करता है।
  • शिरोधारा Shirodhara: माथे तीसरे नेत्र पर लगातार गुनगुने औषधीय तेल या काढ़े की धार गिराई जाती है। यह दिमाग की नसों को अद्भुत शांति देती है, तनाव कम करती है और आँखों के बढ़े हुए प्रेशर को गिराने में जादुई असर दिखाती है।
  • नस्य Nasya: नाक के ज़रिए औषधीय तेल जैसे अणु तेल या पंचगव्य घृत डालने की यह थेरेपी सीधे दिमाग और आँखों की ब्लॉक हुई नसों Srotas को खोलती है। "नासा हि शिरसो द्वारं" - नाक ही सिर और आँखों का दरवाज़ा है।
  • विरेचन Virechana: औषधियों द्वारा पेट साफ करने की यह प्रक्रिया शरीर में जमे हुए दूषित पित्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है, जिससे आँखों में होने वाली जलन और दबाव जड़ से खत्म होता है।

आँखों की नसों के रिपेयर होने और विज़न सुरक्षित होने में कितना समय लगता है?

ऑप्टिक नर्व की सूखी हुई नसों को दोबारा पोषण देने और बीमारी को बढ़ने से रोकने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आँखों का भारीपन, लाली और सिरदर्द में काफी कमी आएगी। आँखों का प्रेशर स्थिर Stabilize होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म जैसे नेत्र तर्पण और रसायनों के प्रभाव से ऑप्टिक नर्व का रूखापन खत्म होने लगेगा। विज़न में जो धुंधलापन या भारीपन था, वह काफी हद तक साफ होने लगेगा और बीमारी की प्रोग्रेस रुक जाएगी।
  • 5-6 महीने: आँखों का ड्रेनेज सिस्टम और नर्वस सिस्टम प्राकृतिक रूप से मज़बूत हो जाएगा। आप मॉडर्न मेडिसिन की अत्यधिक निर्भरता और भविष्य में अंधेपन के डर से बाहर निकलकर एक सुरक्षित जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

ग्लोकोमा के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य आई ड्रॉप्स या लेज़र सर्जरी द्वारा केवल आँखों का प्रेशर IOP कम करना। दोषों को संतुलित करना, चैनल्स स्रोतोरोध खोलना और ऑप्टिक नर्व को पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल आँख के ड्रेनेज सिस्टम और फ्लूइड Aqueous humor की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और दृष्टि नाड़ी के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल ड्रॉप्स के साथ सर्जरी की सलाह, लेकिन जठराग्नि या मन की शांति पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, कब्ज़ दूर करना और पंचकर्म थेरेपी को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर कई बार प्रेशर नॉर्मल रहने पर भी नस सूखती रहती है और सर्जरी के बाद भी विज़न लॉस का रिस्क रहता है। आँखें अंदर से मज़बूत होती हैं, नसें रिपेयर होती हैं और विज़न डैमेज हमेशा के लिए रुक जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

अगर आपको अपनी आँखों में ये गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की ज़रूरत होती है विशेषकर एक्यूट एंगल-क्लोज़र ग्लोकोमा में:

  • अचानक आँखों में असहनीय दर्द: अगर आँखों और सिर में अचानक इतना तेज़ दर्द हो कि बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाए।
  • दृष्टि का तेज़ी से जाना: अगर आँखों के आगे अचानक पूरी तरह से अंधेरा छा जाए या विज़न एकदम से गिर जाए।
  • उल्टी और जी मिचलाना: आँखों के तेज़ दर्द के साथ-साथ अचानक भयंकर उल्टी Vomiting महसूस होना।
  • आँख का एकदम लाल हो जाना: आँख के सफेद हिस्से का अचानक खून जैसा लाल हो जाना और छूने पर पत्थर जैसा कड़क महसूस होना।

निष्कर्ष

डॉक्टर के क्लीनिक में मशीन पर आई प्रेशर IOP का नॉर्मल आना ही आपकी आँखों की सुरक्षा की गारंटी नहीं है। ग्लोकोमा एक नंबर गेम नहीं है; यह आपकी ऑप्टिक नर्व की वह खामोश लड़ाई है, जो वह शरीर के बढ़े हुए वात और रूखेपन से लड़ रही है। केवल आई ड्रॉप्स के भरोसे बैठकर आप अपनी आँखों की जड़ों नसों को सूखने के लिए छोड़ रहे हैं। इस अधूरे इलाज के चक्र से बाहर निकलें। अपनी डाइट में गाय का घी, आंवला और हरी सब्ज़ियाँ शामिल करें। कब्ज़ और तनाव से बचें। पुनर्नवा, त्रिफला और अश्वगंधा जैसी दिव्य जड़ी-बूटियों को अपनाएं और नेत्र तर्पण जैसी आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपीज़ से अपनी सूखी हुई दृष्टि नाड़ी को नया जीवन दें। अपनी आँखों की रोशनी को महज़ कुछ नंबर्स के भरोसे मत छोड़िए। अपने विज़न को जड़ से सुरक्षित और ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, इसे नॉर्मल टेंशन ग्लोकोमा (Normal Tension Glaucoma) कहते हैं। इसमें प्रेशर (12-21 mmHg) रहने के बावजूद कमज़ोर ब्लड सर्कुलेशन और नसों के कुपोषण के कारण ऑप्टिक नर्व डैमेज होने लगती है।

ऑप्टिक नर्व के जो फाइबर्स पूरी तरह से डेड (Dead) हो चुके हैं, उन्हें वापस लाना मुश्किल होता है। लेकिन आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य उन नसों को पोषण देकर बचाना है जो कमज़ोर हो गई हैं (Dormant) ताकि विज़न लॉस वहीं रुक जाए और बचा हुआ विज़न साफ और सुरक्षित हो सके।

नहीं। अगर आप लंबे समय से एलोपैथिक ड्रॉप्स ले रहे हैं, तो उन्हें अचानक कभी बंद नहीं करना चाहिए। आयुर्वेदिक दवाइयाँ साथ में शुरू की जाती हैं, और जैसे-जैसे आँखों का प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम सुधरता है, डॉक्टर की सलाह पर धीरे-धीरे ड्रॉप्स कम की जाती हैं।

नेत्र तर्पण आयुर्वेद की सबसे बेहतरीन चक्षुष्य (आँखों के लिए) थेरेपी है। शुद्ध औषधीय घी ऑप्टिक नर्व को भारी पोषण देता है और वात को शांत करता है। हालांकि, यह हमेशा एक आयुर्वेदिक विशेषज्ञ (Vaidya) की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।

बिल्कुल। आयुर्वेद के अनुसार कब्ज़ शरीर में अपान वात को ऊपर की ओर धकेलता है। मल साफ न होने से शरीर का कचरा (आम) खून में मिलकर आँखों के नाज़ुक चैनल्स को ब्लॉक कर देता है, जिससे आँखों का प्रेशर तेज़ी से बढ़ता है।

हाँ, हल्का योग फायदेमंद है। लेकिन शीर्षासन, सर्वांगासन या भारी वज़न उठाने वाले ऐसे कोई भी व्यायाम नहीं करने चाहिए जिनमें सिर को नीचे झुकाना पड़े, क्योंकि इससे आँखों की नसों में अचानक ब्लड और तरल का दबाव बढ़ सकता है।

त्रिफला को आयुर्वेद में आँखों का परम मित्र माना गया है। रात को त्रिफला खाने से या सुबह त्रिफला के पानी से आँखें धोने से आँखों के माइक्रो-चैनल्स (Srotas) खुलते हैं और नसें मज़बूत होती हैं।

एक साथ बहुत ज़्यादा पानी (Water loading) पीने से आँखों का तरल (Aqueous humor) अचानक बढ़ सकता है, जिससे प्रेशर में उछाल आ सकता है। इसलिए पानी हमेशा घूंट-घूंट कर और दिनभर में बांटकर पीना चाहिए।

हाँ। स्ट्रेस और चिंता शरीर में वात और पित्त को भड़काते हैं। तनाव से खून की नसें सिकुड़ (Vasoconstriction) जाती हैं, जिससे ऑप्टिक नर्व तक खून का प्रवाह कम हो जाता है और नर्व डैमेज की गति बढ़ जाती है।

हाँ, इसे कंजेनिटल ग्लोकोमा (Congenital Glaucoma) कहते हैं, जो जन्म से या शुरुआती कुछ सालों में होता है। इसमें बच्चों की आँखें सामान्य से बड़ी दिखना, बहुत ज़्यादा पानी आना और रोशनी सहन न कर पाना जैसे लक्षण दिखते हैं।

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