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बाल झड़ना बढ़ता ही जा रहा है? ट्रांसप्लांट से पहले जानिए आयुर्वेद और एलोपैथी का सच

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज के समय में बालों का झड़ना सिर्फ खूबसूरती छिनने का डर नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे शरीर और दिमाग की सेहत का पूरा हाल बता देता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, हवा में घुला जहर (प्रदूषण) और उल्टे-सीधे खान-पान की वजह से 20-25 साल के जवान लड़के-लड़कियां भी तेजी से गंजेपन का शिकार हो रहे हैं। जब बाल झड़ने लगते हैं, तो अक्सर हम दो ही रास्तों की तरफ भागते हैं: अंग्रेजी दवाइयां या फिर अपना देसी आयुर्वेद।

समय के साथ बाल क्यों झड़ने लगते हैं?

बालों का गिरना अब सिर्फ ढलती उम्र की निशानी नहीं रह गया है। यह हमारी खराब होती लाइफस्टाइल का एक बहुत बड़ा अलार्म है। आज के समय में 20 से 30 साल के युवा जिस स्पीड से गंजेपन की तरफ बढ़ रहे हैं, वह सच में डराने वाला है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है हर वक्त की टेंशन, रातों की नींद उड़ जाना और ऐसा खाना जिसमें शरीर के लिए कोई असली पोषण है ही नहीं।

जब दिमाग में हर वक्त टेंशन रहती है, तो बालों का उगना एकदम रुक जाता है। इसके अलावा, बाहर का धुआं, धूल, केमिकल वाले कड़क शैंपू और सिगरेट की लत बालों की जड़ों का दम घोंट देती है। जड़ों को न तो ठीक से ऑक्सीजन मिल पाती है और न ही असली पोषण, जिससे बाल वक्त से पहले ही कमजोर होकर टूटने लगते हैं।

बाल झड़ने के मुख्य कारण

बालों का बेतहाशा गिरना सिर्फ सिर के ऊपर की दिक्कत नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि शरीर के अंदर कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ चल रही है। इसके पीछे ये कुछ बड़े कारण होते हैं:

  • हार्मोन का बिगड़ना: शरीर में कुछ खास हार्मोन के बेकाबू होने या औरतों में PCOD जैसी दिक्कतें होने से बाल बहुत तेजी से पतले होकर झड़ने लगते हैं।
  • असली पोषण की कमी: बालों को मजबूत रखने के लिए शरीर को प्रोटीन, आयरन, विटामिन डी और बी-12 चाहिए होता है। जब हमारे खाने में ये चीजें नहीं होतीं, तो बालों की जड़ें भूखी रह जाती हैं और टूट जाती हैं।
  • थायरॉइड का चक्कर: थायरॉइड की बीमारी होने से शरीर का पूरा इंजन (मेटाबॉलिज्म) धीमा या बहुत तेज हो जाता है, जिससे बालों के उगने का पूरा सिस्टम ही हिल जाता है।
  • हद से ज्यादा टेंशन: दिमागी या शारीरिक टेंशन शरीर को एक तगड़ा 'झटका' देती है। इससे एक साथ बहुत सारे बाल उगना बंद हो जाता है और गुच्छों में गिरने लगते हैं।
  • खानदानी (पुश्तैनी) कारण: अगर आपके परिवार में माता-पिता या दादा-दादी को कम उम्र में गंजेपन की दिक्कत रही है, तो बहुत चांस है कि आपके बाल भी उसी राह पर चलें।

बाल झड़ने के शुरुआती संकेत

ज्यादातर लोग तब नींद से जागते हैं जब सिर आधा खाली हो चुका होता है। लेकिन अगर आप इन 4 इशारों को शुरुआत में ही पकड़ लें, तो गंजेपन को वक्त रहते रोका जा सकता है:

  • बालों का धीरे-धीरे पतला होना: अगर आपको लगने लगा है कि आपकी चोटी पहले जैसी मोटी नहीं रही या बालों में वो पुराना भारीपन खत्म हो गया है, तो समझ लीजिए कि बालों की जड़ें अंदर से सिकुड़ रही हैं।
  • कंघी या नहाते वक्त बालों के गुच्छे निकलना: तकिए पर, नहाते वक्त नाली में या कंघी करते समय अगर रोज गुच्छों में बाल टूट रहे हैं, तो इसे आम बात मानकर टालने की भूल न करें।
  • सिर की खाल का साफ दिखना: अगर बालों के बीच की मांग चौड़ी होने लगी है या सिर के बीचों-बीच से सिर की खाल साफ चमकने लगी है, तो यह बालों के कम होने का सबसे पक्का इशारा है।
  • बालों की चमक और रंग-रूप का बदलना: बालों का एकदम से बहुत ज्यादा रूखा, बेजान या हमेशा उलझा-उलझा रहना यह बताता है कि जड़ों तक असली पोषण पहुंच ही नहीं रही है।

हेयर ट्रांसप्लांट क्या है और यह कब जरूरी होता है?

लोग अक्सर हेयर ट्रांसप्लांट को बालों की हर बीमारी का आखिरी इलाज मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे की असली सच्चाई जानना बहुत जरूरी है।

हेयर ट्रांसप्लांट एक तरह की सर्जरी है जिसमें डॉक्टर आपके सिर के पीछे या दाढ़ी से (जहाँ बाल घने होते हैं) बालों की जड़ें निकालते हैं। फिर इन जड़ों को उस खाली जगह पर लगा दिया जाता है जहाँ से बाल पूरी तरह उड़ चुके हैं।

यह कब जरूरी होता है?

  • जब कुदरती तौर पर बालों का उगना पूरी तरह से बंद हो चुका हो।
  • जब बालों की जड़ें एकदम सूखकर मर चुकी हों और दुनिया का कोई भी तेल या दवा उन्हें वापस जिंदा न कर सके।
  • जब गंजापन सिर पर अपनी पक्की जगह बना चुका हो।

ट्रांसप्लांट की कुछ कड़वी सच्चाइयां 

ट्रांसप्लांट कराने से पहले इसके असली 'सच' को जान लेना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में आपको पछताना न पड़े:

  • यह पक्का 'इलाज' नहीं, सिर्फ एक कवर-अप है: ट्रांसप्लांट सिर्फ सिर की खाली जगह को भरने का एक तरीका है। यह आपके शरीर की उस अंदरूनी बीमारी को खत्म नहीं करता जिसकी वजह से आपके बाल झड़ रहे थे।
  • पुराने बालों का झड़ना चालू रह सकता है: अगर आपके शरीर में हार्मोन की गड़बड़ी या पोषण की कमी बनी रहती है, तो जो बाल आपके खुद के बचे हुए हैं, वो गिरते रहेंगे। कुछ वक्त बाद ऐसा हो सकता है कि ट्रांसप्लांट वाले बाल तो खड़े रहें, लेकिन उनके आस-पास की जगह खाली हो जाए, जो दिखने में बड़ा अजीब लगता है।
  • पीछे के बाल: आपके सिर के पिछले हिस्से में बालों की गिनती फिक्स होती है। अगर भविष्य में आपके और बाल उड़ते हैं, तो शायद दोबारा ट्रांसप्लांट करने के लिए पीछे बाल ही न बचें।
  • लंबी मेंटेनेंस: ट्रांसप्लांट करवा लेने का मतलब यह नहीं कि हमेशा के लिए छुट्टी हो गई। इसके बाद भी बचे हुए बालों को गिरने से बचाने के लिए अक्सर सालों-साल दवाइयां खानी पड़ती हैं।

आयुर्वेद में बाल झड़ने की समझ

आयुर्वेद में बालों को सिर्फ सिर की सजावट नहीं माना जाता। हमारे पुराने वैद्यों के हिसाब से, बाल हमारी हड्डियों का ही एक बचा हुआ हिस्सा या अंश होते हैं। जब आपके शरीर की हड्डियों और अंदरूनी हिस्सों को मिलेगी, तभी आपके बाल मजबूत और चमकदार रहेंगे।

  1. वात-पित्त-कफ का बिगड़ना: हमारे शरीर को चलाने वाले तीन मेन पिलर हैं वात, पित्त और कफ। जब इनका बैलेंस हिलता है, तो बालों की शामत आ जाती है:
  • पित्त (गर्मी) का भड़कना: बालों के झड़ने का सबसे बड़ा विलेन यही है। जब शरीर में गर्मी बढ़ती है, तो बालों की जड़ों में मानो आग सी लग जाती है। इसी भड़की हुई गर्मी की वजह से बाल उम्र से पहले ही पकने, पतले होने और झड़ने लगते हैं।
  • वात (हवा/रूखापन) का बिगड़ना: जब वात बिगड़ता है, तो सिर की खाल एकदम सूख जाती है। बालों का सारा पानी और चिकनाई खत्म हो जाती है। बाल एकदम झाड़ू जैसे बेजान हो जाते हैं और बीच से ही टूटने लगते हैं।
  • कफ का भारी होना: कफ बढ़ने से सिर की खाल बहुत ज्यादा चिपचिपी और ऑयली हो जाती है। यह चिपचिपाहट बालों की जड़ों को पूरी तरह ब्लॉक कर देती है, जिससे नए बालों का उगना ही रुक जाता है।
  1. पाचन अग्नि, आम और बालों की पोषण का सीधा कनेक्शन आपके बालों की जड़ों तक असली पोषण पहुंचेगी या नहीं, यह पूरा का पूरा आपके पाचन अग्नि पर टिका है:
  • सुस्त पड़ा पाचन: जब पेट की आग ठंडी पड़ जाती है, तो आप कितना भी अच्छा बादाम-अखरोट खा लें, वो पचता नहीं। वो बस पेट में सड़कर एक जहरीला आम बना देता है।
  • रास्तों का ब्लॉक होना: यह शरीर की उन पतली-पतली नसों और रास्तों को पूरी तरह जाम कर देता है, जिनसे बालों को उनकी असली पोषण मिलनी होती है।
  • नतीजा: जब जड़ों को खाना-पानी ही नहीं मिलेगा, तो बाल 'कुपोषित' होकर अपनी पकड़ छोड़ देते हैं और झड़ने लगते हैं।

बाल झड़ने को रोकने का आयुर्वेदिक तरीका

आयुर्वेद में हम झड़ते बालों को रोकने के लिए सिर्फ कोई महंगा तेल या शैंपू नहीं थमाते। हमारा फोकस बीमारी की असली जड़ को काटने पर होता है। इसे आप इन 4 बातों से आसानी से समझ सकते हैं:

  • वात-पित्त को शांत करना: जैसा कि मैंने बताया, बालों का गिरना भड़की हुई गर्मी और रूखेपन का नतीजा है। हम ऐसी खास देसी दवाइयां देते हैं जो शरीर की इस आग को शांत करती हैं और जड़ों का सूखापन खत्म करती हैं।
  • पाचन सुधारना: जब तक पेट में सड़ा हुआ 'आम' रहेगा, बालों को पोषण नहीं मिलेगा। हमारे इलाज का मेन टारगेट पेट की आग को तेज करना और इस सारे जहर को शरीर से बाहर फेंकना है, ताकि बालों को उनका असली खाना मिल सके।
  • स्पेशल आयुर्वेदिक थेरेपी (पंचकर्म): बालों की जड़ों में नई जान फूंकने के लिए सिर की मालिश, नस्य और शिरोधारा जैसी खास पंचकर्म थेरेपी बहुत काम आती हैं। ये सिर की नसों को अंदर से ताकत देती हैं और दिमाग की सारी टेंशन को खींच लेती हैं।
  • दिमाग की शांति और सही रूटीन: हर वक्त की टेंशन, अधूरी नींद और उल्टा-सीधा रूटीन बालों का सबसे बड़ा दुश्मन है। हम आपको सही खान-पान, हल्के योग और प्राणायाम के ऐसे तरीके बताते हैं जिससे शरीर और दिमाग दोनों एकदम रिलैक्स रहें।

झड़ते बालों को रोकने वाली रामबाण देसी औषधियाँ

आयुर्वेद में बालों का इलाज सिर्फ ऊपर से लेप लगाना नहीं है, बल्कि अंदर से शरीर की मशीनरी को ताकत देना है:

  • भृंगराज: पुराने वैद्यों ने इसे 'बालों का राजा' कहा है। यह बालों की सूखी हुई जड़ों में कुदरती पोषण देता है और नए बाल उगाने में इसका कोई जवाब नहीं है।
  • आंवला: यह शरीर की भड़की हुई गर्मी को एकदम शांत कर देता है। आंवला बालों को अंदर से लोहे जैसी मजबूती और कुदरती चमक देता है।
  • ब्राह्मी: आजकल बालों के झड़ने की सबसे बड़ी वजह टेंशन है। ब्राह्मी दिमाग की सारी गर्मी और टेंशन को एकदम ठंडा कर देती है, जिससे स्ट्रेस की वजह से बाल गिरना तुरंत रुक जाते हैं।
  • नारियल और तिल का तेल: इन देसी तेलों से जब सिर की तसल्ली से मालिश की जाती है, तो बालों की जड़ों को सीधा खाना मिलता है और सिर को गजब की ठंडक पहुंचती है।

बालों की जड़ों मज़बूत करने वाली असरदार आयुर्वेदिक थेरेपी

सिर्फ खाने वाली दवाइयों से ही नहीं, बालों को बाहर से ताकत देने के लिए आयुर्वेद में कुछ खास बाहरी तरीके भी अपनाए जाते हैं जो बहुत गहराई में काम करते हैं:

  • हल्के तेल की मालिश (अभ्यंग): जब खास देसी जड़ी-बूटियों वाले गुनगुने तेल से तसल्ली से सिर की मालिश की जाती है, तो खून का बहाव तेज होता है। इससे भूखी जड़ों को सीधा और पक्का पोषण मिलता है।
  • नाक में देसी तेल डालना (नस्य): हमारे आयुर्वेद में नाक को सीधे दिमाग का दरवाजा माना गया है। जब नाक में खास औषधीय तेल या घी डाला जाता है, तो वो सीधे दिमाग की नसों को पोषण देता है, जिससे बालों की जड़ें  मज़बूत हो जाती हैं।
  • शिरोधारा: माथे के एकदम बीचों-बीच गुनगुने तेल की एक पतली सी धार लगातार गिराई जाती है। यकीन मानिए, ये तरीका दिमाग की सारी टेंशन, बेचैनी और घबराहट को ठीक कर देती है। दिमाग शांत होगा, तो बाल गिरना अपने आप बंद हो जाएगा।
  • शिरोलेप: सिर पर खास ठंडी जड़ी-बूटियों का लेप लगाया जाता है। यह सिर की भड़की हुई आग और गर्मी को पूरी तरह शांत कर देता है।

बाल झड़ने के लिए डाइट गाइड: क्या खाएं और किन चीज़ों से बचें

सही आहार बालों की सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्या खाएं (Dos)

  • ताजे फल: आंवला, सेब, अनार, पपीता
  • सब्जियां: हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, लौकी
  • अनाज: जौ, दलिया, ब्राउन राइस
  • प्रोटीन: दालें, पनीर, दूध
  • मेवे: बादाम, अखरोट (भीगे हुए)
  • देसी घी और तिल का तेल
  • पर्याप्त पानी और नारियल पानी

क्या न खाएं (Don'ts)

  • जंक फूड, मैदा और पैकेज्ड फूड
  • अत्यधिक मसालेदार और तला-भुना भोजन
  • कैफीन (चाय/कॉफी अधिक मात्रा में)
  • बहुत ज्यादा चीनी और मीठा
  • बासी और प्रोसेस्ड खाना
  • अत्यधिक शराब या स्मोकिंग

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

  • बाल झड़ना अचानक और अत्यधिक मात्रा में शुरू हो जाए
  • स्कैल्प में खुजली, जलन, या संक्रमण के लक्षण दिखाई दें
  • बाल झड़ने के साथ पैचेस (गंजे हिस्से) बनने लगें
  • दवा या घरेलू उपायों से सुधार न दिखे
  • परिवार में जेनेटिक हेयर लॉस का इतिहास हो और तेजी से बाल कम हो रहे हों
  • हार्मोनल समस्याएं (थायरॉइड, पीसीओएस आदि) के संकेत हों
  • पोषण की कमी या कमजोरी के साथ बाल झड़ना बढ़ रहा हो

निष्कर्ष

बाल झड़ना केवल कॉस्मेटिक समस्या नहीं, बल्कि शरीर के भीतर चल रहे असंतुलन का संकेत है। आधुनिक चिकित्सा जहां त्वरित समाधान और टेक्निकल इंटरवेंशन पर जोर देती है, वहीं आयुर्वेद शरीर की जड़ों को संतुलित करके दीर्घकालिक सुधार प्रदान करता है। संतुलित आहार, सही दिनचर्या और उचित उपचार के साथ बालों की सेहत को प्रभावी रूप से बेहतर बनाया जा सकता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सही उपचार और जीवनशैली से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

हाँ, मानसिक तनाव हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे बालों की जड़ों पर नकारात्मक असर पड़ता है और बाल झड़ने लगते हैं।

 बिल्कुल, पोषक तत्वों की कमी (जैसे आयरन, प्रोटीन, विटामिन) बालों की जड़ों को कमजोर करती है और हेयर फॉल बढ़ा देती है।

 हाँ, आयुर्वेद जड़ कारण पर काम करता है, इसलिए परिणाम धीरे-धीरे आते हैं, लेकिन अधिक स्थायी होते हैं।

 नियमित तेल मालिश स्कैल्प को पोषण देती है और रक्त संचार बढ़ाती है, जिससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं।

 हाँ, थायरॉइड, पीसीओएस या अन्य हार्मोनल असंतुलन बाल झड़ने का प्रमुख कारण हो सकता है।

 नहीं, आयुर्वेद में हर व्यक्ति की प्रकृति और असंतुलन के अनुसार अलग-अलग उपचार दिया जाता है।

उम्र बढ़ने के साथ बालों की ग्रोथ धीमी हो सकती है, लेकिन समय से पहले बाल झड़ना असंतुलन का संकेत होता है।

 केवल शैम्पू बदलना पर्याप्त नहीं होता, असली कारण अंदरूनी असंतुलन में होता है।

 कई मामलों में डॉक्टर की सलाह से दोनों को संतुलित तरीके से साथ में लिया जा सकता है ताकि बेहतर परिणाम मिलें।

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