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एड़ी और टखने में बार-बार दर्द — क्या यह Gout है या Plantar Fasciitis?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 05 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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सुबह उठते ही एड़ी या टखने में भयंकर दर्द होना आज बहुत आम है। लोग इसे सामान्य थकावट मानकर दर्द की गोलियाँ (Painkillers) खाने लगते हैं, जो स्थिति को और खराब कर देता है। ज़्यादातर लोग समझ ही नहीं पाते कि यह बढ़ा हुआ यूरिक एसिड (Gout) है या एड़ी की नसों की सूजन (Plantar Fasciitis)। ये दोनों बीमारियाँ बिल्कुल अलग हैं, लेकिन इन्हें सिर्फ पेनकिलर से दबाया जाता है, जिससे हड्डियाँ और लिवर कमज़ोर होने लगते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या वात दोष के भड़कने और खून में टॉक्सिन्स ('आम') के जमा होने का परिणाम है। जीवा आयुर्वेद सही बीमारी की पहचान कर प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से इस दर्द को हमेशा के लिए खत्म करता है।

Gout और Plantar Fasciitis की ज़रूरत और इनका असली रूप क्या है?

आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि पैर के निचले हिस्से (एड़ी और टखने) में दर्द के ये दोनों प्रकार पूरी तरह से अलग हैं और इनका इलाज भी बिल्कुल अलग होता है।

  • गाउट (Gout): यह गठिया का एक प्रकार है जो खून में यूरिक एसिड (Uric Acid) के बढ़ने से होता है। जब किडनी इसे साफ नहीं कर पाती, तो इसके क्रिस्टल (सुई जैसे कण) टखने (Ankle) या पैर के अँगूठे में जमा हो जाते हैं। आयुर्वेद में इसे 'वातरक्त' कहा जाता है, जहाँ वात और दूषित रक्त मिलकर भयंकर दर्द पैदा करते हैं।
  • प्लांटर फैसीसाइटिस (Plantar Fasciitis): यह एड़ी के निचले हिस्से में मौजूद एक मोटी नस (Fascia) में खिंचाव या सूजन आने की बीमारी है। आयुर्वेद में इसे 'वातकंटक' कहते हैं, जहाँ लगातार खड़े रहने या ज़्यादा वज़न के कारण वात दोष एड़ी में चुभन (कंटक) पैदा करता है।
  • Symptoms से पहचानिए: एड़ी और टखने के दर्द में आपको Gout है या Plantar Fasciitis?
  • इन दोनों बीमारियों के लक्षण बिल्कुल अलग होते हैं। शरीर द्वारा दिए जाने वाले इन भयंकर लक्षणों से आप अपनी बीमारी को पहचान सकते हैं:

Plantar Fasciitis के लक्षण (एड़ी की नस में सूजन):

  • सुबह का पहला कदम: सुबह सोकर उठने के बाद जैसे ही पैर ज़मीन पर रखते हैं, एड़ी में काँटे चुभने जैसा भयंकर दर्द होता है।
  • चलने पर आराम: 15-20 कदम चलने के बाद माँसपेशियाँ थोड़ी गर्म होती हैं और दर्द अपने आप कम हो जाता है।
  • जगह: यह दर्द मुख्य रूप से सिर्फ एड़ी (Heel) के निचले हिस्से में होता है।
  • दिखावट: इसमें आमतौर पर पैर में बाहर से कोई भारी सूजन या लालिमा नहीं दिखती।

Gout के लक्षण (यूरिक एसिड का बढ़ना):

  • अचानक हमला: दर्द रात के समय अचानक शुरू होता है। पैर का अँगूठा या टखना बुरी तरह सूज जाता है।
  • छूने पर दर्द: सूजन वाली जगह पर अगर चादर भी छू जाए, तो ऐसा दर्द होता है जैसे किसी ने आग लगा दी हो।
  • जगह: यह एड़ी से ज़्यादा टखने (Ankle joint) और पैर के बड़े अँगूठे में होता है।
  • दिखावट: प्रभावित जोड़ भयंकर लाल, गर्म और सूजा हुआ दिखाई देता है।
  • एड़ी और टखने के कमज़ोर होने और दर्द भड़कने के असली कारण

रोज़ाना पैरों में भयंकर दर्द होने के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

यूरिक एसिड और 'आम' का संचय (Gout में): जब आप रोज़ाना भारी माँसाहार, शराब, या दालों (राजमा-छोले) का ज़्यादा सेवन करते हैं, तो खराब पाचन के कारण शरीर में 'आम' (Toxins) बनता है, जो यूरिक एसिड को बढ़ा देता है।

  • वात दोष और रूखापन (PF में): बहुत ज़्यादा नंगे पैर चलना, सख्त जूतों का इस्तेमाल, या भारी वज़न के कारण एड़ी पर भयंकर दबाव पड़ता है। इससे 'वात' भड़कता है और नसों की नमी खत्म हो जाती है।
  • किडनी की कमज़ोरी: जब किडनी यूरिक एसिड को यूरिन के रास्ते बाहर निकालने में कमज़ोर पड़ जाती है, तो वह खून में घूमने लगता है।
  • विरुद्ध आहार: दूध के साथ खट्टी चीज़ें या नमक खाने से रक्त दूषित होता है और वातरक्त (Gout) की समस्या तेज़ी से भड़कती है।

यूरिक एसिड और नसों की सूजन को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

अगर सही समय पर यह पहचान कर इलाज न किया जाए कि एड़ी-टखने का दर्द Gout है या PF, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • हड्डियों का टेढ़ा होना (Tophi): Gout में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में स्थायी गाँठें (Tophi) बना देते हैं, जिससे हड्डियाँ हमेशा के लिए टेढ़ी हो सकती हैं।
  • किडनी में पथरी: बढ़ा हुआ यूरिक एसिड किडनी में जाकर पथरियां (Kidney stones) बना सकता है, जो भयंकर दर्दनाक होती हैं।
  • एड़ी की हड्डी का बढ़ना (Heel Spur): प्लांटर फैसीसाइटिस को अनदेखा करने से एड़ी की हड्डी नीचे की तरफ नुकीली होकर बढ़ने लगती है, जिससे बिना सर्जरी के चलना नामुमकिन हो जाता है।

Gout और Plantar Fasciitis पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

अगर आपको Plantar Fasciitis (वातकंटक) है, तो वहाँ नस में वात का रूखापन है। आयुर्वेद यहाँ 'स्नेहन' (तेल की मालिश) और 'स्वेदन' (सिकाई) पर ज़ोर देता है।लेकिन अगर आपको Gout (वातरक्त) है, तो आपके खून में एसिड और पित्त की भयंकर गर्मी भरी हुई है। अगर आपने यहाँ गर्म तेल की मालिश कर दी या गर्म सिकाई कर दी, तो दर्द भयंकर रूप से भड़क जाएगा। इसलिए आयुर्वेद यहाँ रक्त को साफ करने, पित्त को शांत करने और 'रक्तमोक्षण' (खून साफ करने की प्रक्रिया) का सहारा लेता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि दर्द की असली वजह क्या है।

दर्द को प्राकृतिक रूप से खत्म करने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में एड़ी और टखने के दर्द को जड़ से मिटाने के लिए बीमारी के अनुसार जड़ी-बूटियाँ दी जाती हैं:

  • गिलोय (Giloy) - Gout के लिए: इसे आयुर्वेद में वातरक्त की सबसे बेहतरीन दवा माना गया है। यह शरीर से यूरिक एसिड को तेज़ी से साफ करती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava) - Gout के लिए: यह किडनी के फिल्टर को साफ करती है और टखने की भयंकर लालिमा व सूजन को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha) - PF के लिए: यह एड़ी की थकी हुई नसों (Fascia) और माँसपेशियों को प्राकृतिक ताकत देती है।
  • निर्गुण्डी (Nirgundi) - PF के लिए: यह जड़ी-बूटी वात के दर्द को शांत करने और एड़ी की जकड़न को खोलने में अचूक है।

जमे हुए दर्द और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, जोड़ों को साफ करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • इष्टिका स्वेद (Brick Fomentation) - PF के लिए: एड़ी के दर्द (वातकंटक) में एक ईंट को गर्म करके उस पर औषधीय तेल डालकर एड़ी की सिकाई की जाती है। यह नसों की सूजन को तुरंत खत्म करता है।
  • रक्तमोक्षण (Raktamokshana) - Gout के लिए: जब टखने में यूरिक एसिड भर जाता है, तो आयुर्वेद में जोंक (Leech Therapy) लगाकर दूषित खून को बाहर निकाला जाता है, जिससे लालिमा और दर्द 10 मिनट में गायब हो जाता है।
  • विरेचन (Virechana): आँतों और लिवर से भयंकर 'आम' (Toxins) और पित्त को बाहर निकालने के लिए औषधीय जड़ी-बूटियाँ देकर पेट साफ कराया जाता है।

हड्डियों और नसों को बचाने वाला शुद्ध आहार: क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि Gout और Plantar Fasciitis में आहार बिल्कुल अलग होता है:

Gout (यूरिक एसिड) में क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

  • क्या खाएँ: पुराना चावल, मूंग की दाल, परवल, और लौकी खाएँ। गिलोय का काढ़ा रोज़ाना पिएँ।
  • क्या न खाएँ: टमाटर, पालक, राजमा, चना, मांस, मछली और शराब का सेवन बिल्कुल बंद कर दें। ये यूरिक एसिड तेज़ी से बढ़ाते हैं।

Plantar Fasciitis (एड़ी के दर्द) में क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

  • क्या खाएँ: शुद्ध गाय का घी, दूध और गर्म सूप का सेवन करें। ये शरीर के वात (रूखेपन) को खत्म करते हैं।
  • क्या न खाएँ: रूखा और बासी खाना, कोल्ड ड्रिंक, और फ्रिज का ठंडा पानी बिल्कुल बंद कर दें।

दर्द के पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में आर्थराइटिस (Gout) और नसों के दर्द का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर दर्द की शुरुआत है, तो सही आहार और गिलोय/अश्वगंधा जैसी दवाइयों से 3 से 4 हफ्तों में ही सूजन और सुबह की जकड़न कम होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर यूरिक एसिड लगातार बढ़ा हुआ है या एड़ी की नस सख्त हो गई है, तो खून साफ होने और नसों में चिकनाई लौटने में 4 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और बीमारी के अनुसार परहेज़ का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में स्टेरॉयड और पेनकिलर के बिना भी वह दर्द-मुक्त जीवन जी सकता है।

आधुनिक (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य Gout में यूरिक एसिड कम करने की दवाइयाँ और PF में स्टेरॉयड इंजेक्शन से दर्द दबाना Gout में रक्त शुद्धि और PF में नसों को रिलैक्स कर जड़ से सुधार करना
नज़रिया Gout और Plantar Fasciitis (PF) को अलग-अलग समस्याओं के रूप में देखना शरीर में दोष असंतुलन और रक्त/वात विकृति को एक साथ समझना
उपचार तरीका दवाइयों व इंजेक्शन से अस्थायी राहत देना गिलोय, अश्वगंधा, सिकाई और जड़ी-बूटियों से प्राकृतिक हीलिंग करना
डाइट और लाइफस्टाइल दवाओं पर निर्भरता, डाइट पर सीमित सलाह वात-शामक आहार, डिटॉक्स और संतुलित दिनचर्या पर ज़ोर
लंबा असर असर खत्म होते ही दर्द वापस, किडनी पर असर का खतरा शरीर मज़बूत बनता है, दर्द का प्राकृतिक और दीर्घकालिक समाधान

डॉक्टर की सलाह कब लें?

एड़ी और टखने के दर्द के संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • सुबह उठने पर एड़ी का दर्द इतना भयंकर हो कि आप लंगड़ा कर चलने पर मजबूर हो जाएँ।
  • पैर के अँगूठे या टखने में अचानक तेज़ सूजन, गर्मी और लालिमा आ जाए।
  • दर्द के कारण रात की नींद खराब हो रही हो और हल्का बुखार महसूस हो।
  • लगातार पेनकिलर खाने के बावजूद दर्द कम न हो रहा हो।

निष्कर्ष: 

आयुर्वेद के हिसाब से एड़ी और टखने का दर्द सिर्फ एक थकान नहीं है। यह या तो वात के भड़कने से नसों के सूखने (Plantar Fasciitis) की समस्या है या फिर खून में बने 'आम' (टॉक्सिन्स) के कारण यूरिक एसिड (Gout) का परिणाम है। बिना बीमारी को पहचाने सिर्फ बाहर से गोलियाँ खाने से दर्द कुछ देर के लिए दब जाता है लेकिन शरीर अंदर से कमज़ोर होता जाता है। इलाज में बीमारी की सही पहचान, शरीर की शुद्धि, गिलोय व अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ और सही आहार सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, जिससे आपके पैरों की ताकत बिना किसी पेनकिलर के जीवन भर बनी रहे।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं! Gout (वातरक्त) में जोड़ों में पहले से ही एसिड और पित्त की गर्मी भरी होती है। ऐसे में गर्म सिकाई करने से सूजन और दर्द भयंकर रूप से बढ़ जाता है। इसमें ठंडी सिकाई या चंदन का लेप फायदेमंद है।

रात को सोते समय पैर आराम की स्थिति में होता है और नसें सिकुड़ जाती हैं। सुबह जब आप अचानक अपना पूरा वज़न पैर पर डालते हैं, तो सूखी और सिकुड़ी हुई नसों (वात) में भयंकर खिंचाव आता है, जिससे चुभन होती है।

हाँ, टमाटर के बीजों में ऑक्सालेट होता है। Gout के मरीज़ों को टमाटर का अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए, यह यूरिक एसिड के क्रिस्टल को बढ़ा सकता है।

आधुनिक विज्ञान बर्फ की सलाह देता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार बर्फ (ठंडक) वात दोष को और सिकोड़ देती है। इसलिए आयुर्वेद में इष्टिका स्वेद (गर्म ईंट की सिकाई) को वात शांत करने के लिए बेहतर माना गया है।

सब दालें खराब नहीं होतीं। मूंग की दाल पचने में बहुत हल्की होती है और इसे खाया जा सकता है। लेकिन राजमा, छोले, चना और उड़द की दाल को बिल्कुल बंद कर देना चाहिए क्योंकि ये वात और 'आम' बढ़ाते हैं।

बिल्कुल! आपके शरीर का पूरा वज़न आपकी एड़ियों पर ही पड़ता है। अगर आप ओवरवेट हैं, तो एड़ी की नसों पर भयंकर दबाव पड़ेगा और कोई भी दवा तब तक असर नहीं करेगी जब तक वज़न कम न हो।

नहीं, यह सबसे पहले पैर के अँगूठे से शुरू होता है, लेकिन अगर इसे कंट्रोल न किया जाए, तो यह टखने (Ankle), घुटनों, उँगलियों और कलाइयों तक तेज़ी से फैल सकता है।

नहीं, प्लांटर फैसीसाइटिस में नंगे पैर सख्त ज़मीन (जैसे टाइल्स) पर चलने से नसों पर सीधा आघात होता है और वात बढ़ता है। हमेशा घर के अंदर भी मुलायम चप्पल (Cushioned footwear) पहनें।

शराब और खासकर बियर Gout के लिए सबसे बड़ा ज़हर है। बियर शरीर में यूरिक एसिड का उत्पादन बढ़ाती है और किडनी को उसे बाहर निकालने से रोकती है, जिससे दर्द तुरंत भड़क जाता है।

हाँ, जीवा आयुर्वेद में सही जड़ी-बूटियों (पुनर्नवा, निर्गुण्डी), पंचकर्म और आहार के नियमों का पालन करके वात और पित्त दोष को जड़ से संतुलित किया जा सकता है और दर्द पूरी तरह खत्म हो सकता है।

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