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हील पर पहला कदम रखते ही दर्द? Plantar Fasciitis का आयुर्वेदिक इलाज

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 29 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 17 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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सुबह सोकर उठते ही जैसे ही आप अपना पहला कदम जमीन पर रखते हैं, एड़ी में होने वाली एक तेज़ चुभन आपको वहीं रुकने पर मजबूर कर देती है। शुरू में हम सब इसे मामूली थकान या नस का खिंचाव मानकर टाल देते हैं। लेकिन जब हर सुबह यही दर्द आपकी आदत बन जाए, तो समझ जाइए कि मामला इतना सीधा नहीं है।

यह एड़ी का दर्द सिर्फ किसी हड्डी या मांसपेशी की ऊपरी दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद मानता है कि यह शरीर के अंदरूनी सिस्टम में पनप रही किसी बड़ी गड़बड़ी (असंतुलन) का सीधा इशारा है, जिसे वक्त रहते समझना बहुत ज़रूरी है।

प्लांटर फैसीसाइटिस (Plantar Fasciitis) असल में क्या है?

हमारे पैर के तलवे में एड़ी से लेकर उंगलियों तक एक मोटी सी पट्टी होती है। जब इस पट्टी में सूजन आ जाती है, तो उसे मेडिकल भाषा में 'प्लांटर फैसीसाइटिस' कहा जाता है।

चलते-फिरते समय आपके पूरे शरीर का वज़न इसी पट्टी पर टिका होता है। जब इस पट्टी पर लगातार ज़ोर पड़ता है, तो इसके अंदर छोटे-छोटे कट्स (माइक्रो-टीयर्स) आने लगते हैं। बस इसी वजह से सुबह बिस्तर से उतरकर पहला कदम रखते ही पैर में चुभन होती है। दिन चढ़ने के साथ-साथ दर्द थोड़ा कम तो हो जाता है, लेकिन अगर आप ज़्यादा देर तक खड़े रह जाएं, तो यह दर्द फिर से वापस लौट आता है।

एड़ी की बनावट और इसमें 'फेशिया' (Fascia) का क्या काम है?

हम अक्सर सोचते हैं कि एड़ी सिर्फ एक हड्डी है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह नसों, मांसपेशियों और टिशूज़ का एक बहुत ही उलझा हुआ जाल है। इसी जाल के बीच में 'फेशिया' नाम की एक बेहद मज़बूत पट्टी होती है, जो एड़ी को पैर के आगे वाले हिस्से (पंजे) से जोड़कर रखती है।

  • पैर का 'स्प्रिंग': आप इस फेशिया को अपने पैर का शॉक-एब्जॉर्बर या स्प्रिंग समझ सकते हैं। चलते या दौड़ते समय शरीर का पूरा वज़न और झटके यही स्प्रिंग झेलता है और पैर को बैलेंस देता है।
  • दर्द कैसे शुरू होता है: जब किसी वजह से इस फेशिया में सूजन आ जाती है या यह ज़्यादा खिंच जाती है, तो यह अपना काम ठीक से नहीं कर पाती। नतीजा यह होता है कि शरीर का सारा प्रेशर सीधे एड़ी की हड्डी पर पड़ने लगता है, और यहीं से वो तेज़ दर्द शुरू हो जाता है।

क्यों होता है यह दर्द: Plantar Fasciitis होने के मुख्य कारण क्या हैं? 

प्लांटार फेशिआइटिस (Plantar Fasciitis), जिसे आम भाषा में एड़ी का दर्द भी कहा जाता है, तब होता है जब एड़ी की हड्डी को उंगलियों से जोड़ने वाले ऊतक (Plantar Fascia) में सूजन या खिंचाव आ जाता है।

  • लगातार दबाव और खिंचाव: लंबे समय तक खड़े रहने, दौड़ने या कूदने वाली गतिविधियों से पैरों के निचले ऊतकों पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है, जिससे उनमें सूक्ष्म दरारें (Small tears) आ जाती हैं।
  • उम्र का प्रभाव: यह समस्या आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में अधिक देखी जाती है, क्योंकि उम्र के साथ ऊतकों का लचीलापन कम होने लगता है।
  • गलत जूतों का चुनाव: बहुत पतले तलवे वाले जूते, ऊंची एड़ी (High heels) या खराब फिटिंग वाले जूते पहनने से पैरों पर दबाव का संतुलन बिगड़ जाता है।
  • मोटापा: शरीर का अधिक वज़न एड़ी के ऊतकों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे सूजन की संभावना बढ़ जाती है।
  • पैरों की बनावट: फ्लैट फीट (सपाट पैर) या बहुत ऊँचे आर्च (High Arches) वाले लोगों में चलने का तरीका असामान्य हो जाता है, जो प्लांटार फेशिया पर खिंचाव पैदा करता है।
  • अचानक शारीरिक सक्रियता: बिना वार्म-अप के अचानक भारी एक्सरसाइज या लंबी दूरी तक चलना शुरू करना

प्लांटर फैसीसाइटिस (Plantar Fasciitis) के लक्षण: कहीं आपको भी तो ये इशारे नहीं मिल रहे?

प्लांटर फैसीसाइटिस असल में एड़ी के नीचे मौजूद उस मोटी पट्टी (टिशू) की सूजन है, जिसकी वजह से सुबह-सुबह ज़मीन पर पहला कदम रखते ही जानलेवा चुभन होती है। अगर आपने वक्त रहते इस दर्द को हल्के में लिया, तो आगे चलकर नॉर्मल तरीके से चलना-फिरना भी बहुत मुश्किल हो सकता है।

  • सुबह का पहला कदम भारी पड़ना: सुबह सोकर उठने के बाद जैसे ही आप ज़मीन पर पैर रखते हैं, तो एड़ी में ऐसी तेज़ चुभन होती है मानो किसी ने सुई चुभो दी हो।
  • आराम करने के बाद चलने में दर्द: बहुत देर तक कुर्सी पर बैठे रहने या लेटने के बाद जब आप अचानक उठकर चलते हैं, तो एड़ी के निचले हिस्से में तेज़ दर्द उठता है।
  • सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत: पंजों के बल खड़े होने या सीढ़ियां चढ़ते वक्त एड़ी में ज़बरदस्त खिंचाव और तकलीफ का महसूस होना।
  • छूने पर दर्द होना: एड़ी के नीचे वाले हिस्से को हल्का सा उंगली से दबाने या छूने पर भी दर्द होना, या वहां पर हल्की सूजन नज़र आना।
  • काम के बाद दर्द बढ़ना: ध्यान देने वाली बात ये है कि पैदल चलने या एक्सरसाइज़ करते वक्त शायद उतना दर्द न हो, लेकिन काम खत्म होने के बाद यह दर्द एकदम से बढ़ जाता है।

दर्द को बस दबाना या जड़ से खत्म करना

सिर्फ पेनकिलर खाकर दर्द को दबा देना कोई समझदारी नहीं है। असली आराम तो तब मिलता है जब हम बीमारी की जड़ तक पहुंचते हैं। दवाइयां कुछ देर के लिए दर्द को सुन्न ज़रूर कर सकती हैं, लेकिन पक्का इलाज तभी होता है जब शरीर के बिगड़े हुए सिस्टम को अंदर से ठीक किया जाए।

  • दर्द को सिर्फ दबाना (Masking the Pain): पेनकिलर गोलियां या दर्द वाले स्प्रे आपकी नसों को कुछ घंटों के लिए सुन्न कर देते हैं, जिससे आपको दर्द का अहसास होना बंद हो जाता है। लेकिन दर्द पैदा करने वाली असली वजह (जैसे अंदरूनी जकड़न या सूजन) शरीर में वैसे ही बैठी रहती है, जो आगे चलकर और भी बड़ी परेशानी बन जाती है।
  • बीमारी को जड़ से खत्म करना (Fixing the Root Cause): आयुर्वेद शरीर की उस गड़बड़ी (जैसे बढ़ा हुआ 'वात' या शरीर में जमा गंदगी) पर सीधा काम करता है, जिसने इस दर्द को पैदा किया। जब सही खान-पान और देसी थेरेपी के ज़रिए बीमारी की असली जड़ पर चोट की जाती है, तो शरीर खुद को अंदर से रिपेयर करने लगता है। इसके बाद दर्द के लौटकर आने का कोई चांस ही नहीं बचता।

रोज़मर्रा की आदतें जो समस्या बढ़ाती हैं?

कई छोटी-छोटी आदतें बिना पता चले एड़ी के दर्द को बदतर बनाती हैं। ये रोजमर्रा के कामों में छिपी हैं:

  • लंबे समय तक खड़े रहना: शिक्षक, दुकानदार या किचन में काम करने वाले सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
  • कठोर सतह पर चलना: टाइल्स, कंक्रीट जैसी सतहें फेशिया पर लगातार दबाव डालती हैं।
  • गलत जूते पहनना: फ्लैट चप्पलें, हाई हील या बिना कस्टम सपोर्ट वाले जूते नुकसान पहुंचाते हैं।
  • अचानक ज्यादा व्यायाम: रनिंग या जंपिंग बिना वार्मअप के फेशिया को चोट पहुंचाता है।
  • ज्यादा वज़न: हर कदम पर एड़ी पर अतिरिक्त 4 गुना दबाव पड़ता है।
  • रात को टाइट जूते - सोने से पहले स्ट्रेचिंग न करना फेशिया को जकड़ा रहने देता है

आयुर्वेद में इसे कैसे समझा जाता है 

आयुर्वेद साफ मानता है कि एड़ी का दर्द सिर्फ आपके पैर की कोई मामूली दिक्कत नहीं है। असल में यह शरीर के अंदरूनी सिस्टम में फैली किसी बड़ी गड़बड़ी का नतीजा है। इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें काम करती हैं:

  • बढ़ा हुआ वात और सूखापन: जब शरीर में 'वात' (गैस या हवा) हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह आपकी मांसपेशियों और पैर के तलवों की पट्टी (Fascia) में सूखापन और अकड़न पैदा कर देता है। इसी सूखेपन की वजह से तलवों की नैचुरल लचक खत्म हो जाती है, और ज़मीन पर पैर रखते ही एड़ी में तेज़ चुभन महसूस होती है।
  • गंदगी ('आम') का जमना और सूजन: जब आपका पाचन सुस्त होता है, तो खाया हुआ खाना पचने के बजाय सड़ने लगता है और शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बनाता है। यह टॉक्सिन्स खून के रास्ते बहकर पैर की बारीक नसों और एड़ी के हिस्सों में जाकर जम जाता है और वहां सूजन पैदा कर देता है। यही वजह है कि सुबह उठते ही एड़ी भारी लगती है और बर्दाश्त के बाहर दर्द होता है।

प्लांटर फैसीसाइटिस (Plantar Fasciitis) का आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेद में इस दर्द का इलाज सिर्फ कुछ घंटों के लिए सुन्न करना नहीं है, बल्कि इसे जड़ से उखाड़ फेंकना है। इस इलाज के तीन मेन पिलर (स्तंभ) होते हैं:

  • वात को शांत करना: क्योंकि इस दर्द की सबसे बड़ी वजह बढ़ी हुई हवा (वात) और नसों का सूखापन है, इसलिए इलाज में ऐसे खास औषधीय तेलों और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता है जो अंदर तक पोषण दें। इससे पैर के तलवों का सूखापन मिटता है और उनकी खोई हुई लचक वापस आ जाती है।
  • शरीर के टॉक्सिन्स की डीप-क्लीनिंग: शरीर में जमा ये ज़हरीले टॉक्सिन्स सूजन को बढ़ाते हैं। आयुर्वेदिक दवाइयां सीधे तौर पर आपके पाचन को दुरुस्त करती हैं और इस सारी गंदगी को शरीर से बाहर निकाल फेंकती हैं। जैसे ही अंदर से सफाई होती है, एड़ी की सूजन और सुबह वाली जकड़न बड़ी तेज़ी से गायब होने लगती है।
  • नसों की रिपेयरिंग और अंदरूनी मज़बूती: इलाज का आखिरी और सबसे ज़रूरी स्टेप है पैरों की कमज़ोर पड़ चुकी मांसपेशियों और लिगामेंट्स को दोबारा मज़बूत बनाना। इसके लिए अश्वगंधा और गुग्गुलु जैसी ताक़तवर औषधियाँ दी जाती हैं, ताकि आपकी एड़ी इतनी मज़बूत हो जाए कि भविष्य में यह दर्द लौटकर दोबारा कभी न आए।

एड़ी के दर्द के लिए आयुर्वेदिक दवाएं

हम ऐसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं जो शरीर को अंदर से रिपेयर करती हैं:

  • गुग्गुलु: यह सूजन कम करने के लिए काफी जानी जाती है। एड़ी में जो सूजन आ जाती है, यह उसे कम करती है और जोड़ों में जमा गंदगी को साफ करके दर्द से राहत दिलाती है।
  • अश्वगंधा: यह मांसपेशियों और टिशूज़ की टूट-फूट को ठीक करती है और नसों में ताकत भरती है। यह शरीर के 'वात' को कंट्रोल में रखती है जिससे दर्द झेलना आसान हो जाता है।
  • शल्लकी: जोड़ों और लिगामेंट्स के दर्द के लिए यह बहुत काम की चीज़ है। यह एड़ी की अकड़न खोलकर उसे लचीला बनाती है, जिससे चलते-फिरते समय वो चुभन महसूस नहीं होती।
  • दशमूल: दस जड़ी-बूटियों का यह मिश्रण शरीर की ज़बरदस्त जकड़न को दूर करता है। यह पूरे शरीर में वात दोष को बैलेंस रखने में मदद करता है।

दर्द मिटाने के लिए असरदार तरीके (थेरेपी)

दवाओं के साथ-साथ कुछ बाहरी तरीके भी हैं, जो मांसपेशियों को तुरंत रिलैक्स कर देते हैं:

  • अग्निकर्म: एड़ी के दर्द के लिए इसे काफी असरदार माना जाता है। इसमें एक खास धातु के यंत्र से दर्द वाले पॉइंट पर हल्का और कंट्रोल किया हुआ ताप (गर्मी) दिया जाता है, जो पुराने से पुराने दर्द को खींच लेता है।
  • पत्र पिंड स्वेदन: इसमें औषधीय पत्तों और जड़ी-बूटियों की एक पोटली तैयार की जाती है। इस पोटली को गर्म तेल में डुबोकर एड़ी की सिकाई की जाती है, जिससे दर्द और जकड़न में तुरंत आराम मिलता है।
  • अभ्यंग और स्वेदन: वात-नाशक तेलों (जैसे महानारायण तेल) से एड़ी की अच्छे से मालिश की जाती है और फिर उस पर हर्बल भाप दी जाती है। इससे खून का बहाव तेज़ होता है और मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं।
  • बस्ती (आयुर्वेदिक एनिमा): चूंकि एड़ी का दर्द 'वात' बिगड़ने से होता है, इसलिए पेट की सफाई के लिए खास औषधीय काढ़े या तेल की बस्ती दी जाती है। यह आंतों को साफ करके शरीर के पूरे सिस्टम को रिपेयर करती है, जिससे दर्द में बहुत राहत मिलती है।

दर्द से राहत के लिए डाइट

श्रेणी क्या खाएं (शामिल करें) क्या न खाएं (परहेज करें)
अनाज और दालें पुराने चावल, मूंग दाल, दलिया, ओट्स और रागी। मैदा, सफेद ब्रेड, नूडल्स और भारी उड़द की दाल।
सब्जियां लौकी, तोरई, कद्दू, परवल और मौसमी हरी सब्जियां। कच्ची सब्जियां (ज्यादा सलाद), फूलगोभी और भारी तली सब्जियां।
डेयरी और वसा शुद्ध A2 गाय का घी, गुनगुना दूध (हल्दी के साथ) और ताजा छाछ। ठंडा दूध, पनीर (रात में), और रिफाइंड तेल।
मसाले अदरक, हल्दी, जीरा, धनिया, सोंठ और अजवाइन। बहुत ज्यादा लाल मिर्च, गरम मसाला और अत्यधिक नमक।
पेय पदार्थ गुनगुना पानी, हर्बल टी और ताजे फलों का जूस (बिना चीनी)। कोल्ड ड्रिंक्स, ज्यादा चाय/कॉफी और शराब।
मीठा और स्नैक्स गुड़, खजूर, शहद और भुने हुए मखाने। सफेद चीनी, पेस्ट्री, चॉकलेट और डिब्बाबंद स्नैक्स।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम उर्मिला राय है, मेरी उम्र 55 वर्ष है और मैं नोएडा सेक्टर 50 से हूँ। मुझे पैरों और हाथों में दर्द, घुटनों की समस्या और गैस्ट्रिक परेशानी थी। मुझे किसी ने जीवा आयुर्वेद के बारे में बताया, जिसके बाद मैंने यहाँ उपचार शुरू किया। यहाँ का ट्रीटमेंट, डाइट और लाइफस्टाइल गाइडेंस बहुत अच्छा है। थेरेपी और योग से भी मुझे काफी लाभ मिला। जीवाग्राम रहने के लिए भी बहुत अच्छी जगह है और यहाँ का वातावरण बहुत सकारात्मक है। अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करती हूँ।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

अगर एड़ी का दर्द कुछ दिनों में ठीक होने के बजाय लंबे समय तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। समय पर जांच और सही सलाह लेने से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

  • एड़ी का दर्द 2 हफ्तों से अधिक समय तक बना रहना
  • घरेलू उपायों के बावजूद राहत न मिलना
  • दर्द के कारण चलने का तरीका (gait) बदल जाना
  • पैर में सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होना
  • एड़ी के आसपास लाली या तेज गर्माहट महसूस होना
  • चलने-फिरने में दिक्कत या दर्द का बढ़ते जाना

निष्कर्ष

प्लांटार फेशिआइटिस केवल पैर के तलवे की सूजन नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के बढ़ते 'वात' और असंतुलन का इशारा है। जहाँ मॉडर्न अप्रोच दर्द को कम करने के लिए प्रभावी है, वहीं आयुर्वेद आपके ऊतकों के सूखेपन को दूर कर उन्हें अंदर से 'रिपेयर' करता है। सही आयुर्वेदिक उपचार और जूतों के सही चुनाव से आप एड़ी की इस चुभन से हमेशा के लिए आजादी पा सकते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

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