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Dengue recovery में कमजोरी को कैसे समझें?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

डेंगू का बुखार उतरने के बाद ज़्यादातर लोगों को लगता है कि चलो, अब तो बीमारी जड़ से खत्म हो गई। लेकिन असलियत कुछ और ही होती है। बुखार जाने के कई दिनों या हफ्तों बाद तक मरीज़ का शरीर एकदम टूटा-टूटा रहता है, कमजोरी लगती है और ऐसा लगता है जैसे शरीर में जान ही नहीं बची। चार सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूल जाना या दिन भर सुस्त पड़े रहना ये सब डेंगू से उठने के बाद की आम बातें हैं।

यह कमज़ोरी सिर्फ शरीर की नहीं होती, इंसान दिमागी तौर पर भी एकदम थका हुआ महसूस करता है। सुबह उठो तो शरीर भारी लगता है और छोटे-मोटे काम करने में भी पसीने छूट जाते हैं। इसलिए, यह समझना बहुत ज़रूरी है कि बुखार उतरने का मतलब पूरी तरह ठीक होना नहीं है, शरीर को अपनी पुरानी ताकत वापस पाने में थोड़ा वक्त लगता है।

डेंगू रिकवरी के बाद इतनी कमज़ोरी क्यों होती है?

डेंगू एक तेज़ वायरल संक्रमण (Viral Infection) है, जो हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को पूरी तरह झकझोर देता है। जब वायरस शरीर पर हमला करता है, तो उससे लड़ने में हमारी बहुत ज़्यादा ऊर्जा खर्च हो जाती है।

बुखार खत्म होने के बाद भी कमज़ोरी बने रहने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • ऊर्जा की भारी कमी: वायरस से लड़ते-लड़ते शरीर के आंतरिक संसाधन पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।
  • मांसपेशियों का टूटना (Muscle Breakdown): संक्रमण के दौरान शरीर की मांसपेशियों के ऊतकों को नुकसान पहुँचता है, जिससे बदन दर्द और ढीलापन बना रहता है।
  • पाचन का धीमा होना: डेंगू के दिनों में भूख न लगना और सही पोषण न मिल पाने के कारण शरीर भीतर से कमज़ोर हो जाता है।
  • पानी की कमी (Dehydration): तेज़ बुखार और पसीने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की भारी कमी हो जाती है, जो थकान को और बढ़ा देती है।

शरीर के भीतर क्या बदलाव होते हैं जो थकान बढ़ाते हैं?

संक्रमण के दौरान और उसके ठीक बाद शरीर के अंदर कई जैविक परिवर्तन होते हैं, जो सीधे तौर पर हमारी ऊर्जा को प्रभावित करते हैं:

  • प्लेटलेट्स (Platelets) का घटना: डेंगू में प्लेटलेट्स का स्तर तेज़ी से गिरता है। भले ही रिकवरी के समय ये बढ़ने लगते हैं, लेकिन शरीर को अपनी पुरानी स्थिति में लौटने में समय लगता है।
  • सूजन और रसायनों का प्रभाव: वायरस से लड़ते समय शरीर में कुछ विशेष रसायनों (Cytokines) का स्राव होता है, जो शरीर में लंबे समय तक दर्द और भारीपन बनाए रखते हैं।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली की सुस्ती: संक्रमण से जीतने के बाद हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कुछ समय के लिए थकी हुई और शांत हो जाती है, जिससे शरीर बहुत सुस्त महसूस करता है।

क्या हर मरीज़ को इतनी कमज़ोरी होना आम बात है?

बिल्कुल, डेंगू के बुखार के बाद शरीर का इस तरह टूटना एकदम आम बात है। लगभग हर इंसान को कमज़ोरी और सुस्ती के इस दौर से गुज़रना ही पड़ता है। हालांकि, यह कमज़ोरी किसे कितनी होगी, यह हर इंसान पर अलग-अलग निर्भर करता है। कुछ लोग तो हफ्ते भर में ही एकदम चंगे हो जाते हैं, तो कुछ लोगों को वापस अपनी पुरानी रूटीन पर आने में कई हफ्ते लग जाते हैं। यह सीधा इस बात पर तय होता है कि मरीज़ की उम्र क्या है, उसके शरीर की अंदरूनी ढाल (इम्युनिटी) कैसी है और बीमारी ने उस पर कितना हमला किया था।

यह कमज़ोरी कितने दिनों तक टिकती है?

आम तौर पर देखा जाए तो यह थकावट और कमज़ोरी एक से तीन हफ्ते तक शरीर में बैठी रहती है। लेकिन, जिन मरीज़ो की हालत ज़्यादा खराब हो गई थी या जिन्हें अस्पताल में जाकर भर्ती होना पड़ा था, उन्हें पूरी तरह अपनी पुरानी ताकत वापस पाने में 4 से 6 हफ्ते का लंबा समय भी लग सकता है। और हाँ, अगर आपने इस दौरान आराम करने और अच्छी खुराक लेने में लापरवाही या कंजूसी की, तो यह सुस्ती और भी लंबे समय तक आपका पीछा नहीं छोड़ेगी।

कमज़ोरी के साथ दिखने वाले कुछ और बड़े लक्षण

बीमारी से उठने के इस दौर में मरीज़ को सिर्फ कमज़ोरी ही नहीं, बल्कि शरीर में कुछ और दिक्कतें भी महसूस होती हैं, जिन्हें बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए:

  • ज़रा-सा काम करते ही या थोड़ा चलते ही सांस फूलना और बुरी तरह थक जाना।
  • रात भर की अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह शरीर भारी-भारी लगना और दिन भर आलस छाए रहना।
  • मांसपेशियों और जोड़ों में अंदर ही अंदर एक मीठा-मीठा दर्द और टूटन बने रहना।
  • भूख एकदम मर जाना और सामने अच्छा खाना रखा हो, तब भी खाने का बिल्कुल मन न करना।
  • बैठकर या लेटकर अचानक खड़े होने पर आंखों के आगे अंधेरा छाना या चक्कर आना।
  • दिमाग का एकदम सुन्न सा रहना और किसी भी काम में या बातों में ध्यान न लगना।

रिकवरी के दौरान शरीर को किन पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है?

शरीर को दोबारा मज़बूती देने और ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए इन खास पोषक तत्वों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है:

  • प्रोटीन: यह हमारी कमज़ोर हो चुकी मांसपेशियों की मरम्मत करने और नए ऊतकों के निर्माण के लिए सबसे ज़रूरी है।
  • विटामिन C और जिंक: ये दोनों तत्व हमारी थकी हुई प्रतिरक्षा प्रणाली को दोबारा सक्रिय करते हैं और शरीर को संक्रमणों से बचाते हैं।
  • आयरन: डेंगू के बाद शरीर में खून की कमी या कमज़ोरी को दूर करने के लिए आयरन युक्त चीज़ें बहुत मददगार होती हैं।
  • प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स: शरीर में पानी और नमक के संतुलन को बनाए रखने के लिए तरल पदार्थों का सेवन बहुत आवश्यक है।

आयुर्वेद के अनुसार डेंगू के बाद की कमज़ोरी

आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में लंबे समय तक तेज़ ज्वर (बुखार) रहता है, तो वह हमारी पाचन अग्नि को बहुत मंद कर देता है। जब पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो हम जो भी खाते हैं, उसका सही पोषण शरीर के अंगों तक नहीं पहुँच पाता।

इसके साथ ही, शरीर से 'ओज' (प्राकृतिक ऊर्जा और बल) का क्षय होता है। इसीलिए आयुर्वेद रिकवरी के दौरान जबरदस्ती भारी भोजन खाने की सलाह नहीं देता। इस समय मुख्य ध्यान पाचन को दोबारा सुचारू करने और शरीर को गहरी विश्राम की स्थिति में रखने पर होना चाहिए, ताकि ओज की पुनः प्राप्ति हो सके।

डेंगू के बाद क्या खाएं और किन चीज़ों से बचें?

कमज़ोर शरीर को दोबारा ऊर्जावान बनाने में हमारे भोजन की सबसे बड़ी भूमिका होती है।

क्या खाएं?

  • मूंग दाल की खिचड़ी या दलिया: यह पचने में बहुत आसान होता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।
  • नारियल पानी और सूप: यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और ज़रूरी मिनरल्स देता है।
  • ताज़े और हल्के फल: अनार, पपीता, कीवी और सेब जैसे फल रिकवरी को तेज़ करते हैं।
  • उबली हुई मौसमी सब्जियाँ: लौकी, तोरई और कद्दू जैसी सब्जियाँ पाचन तंत्र पर बोझ नहीं डालतीं।

किन चीज़ों से बचें?

  • तला-भुना और जंक फूड: समोसे, चिप्स या पिज्जा जैसी चीज़ें सुस्त पड़ चुके पाचन को और बिगाड़ देती हैं।
  • अत्यधिक मसालेदार खाना: यह पेट में जलन और एसिडिटी पैदा कर सकता है।
  • पैकेट बंद और मीठे पेय: डिब्बाबंद जूस या कोल्ड ड्रिंक्स में बहुत ज़्यादा शक्कर होती है, जो शरीर को फायदा पहुँचाने की जगह नुकसान करती है।

जल्दी रिकवरी के लिए आसान लाइफस्टाइल टिप्स 

अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप बहुत जल्दी अपनी पुरानी ताकत वापस पा सकते हैं:

  • तसल्ली से आराम करें: देखिए, इस वक्त आपके शरीर को अंदर से ठीक होने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरत आराम की ही है। इसलिए बिना किसी टेंशन के रात को 7-8 घंटे की गहरी नींद ज़रूर लें।
  • किसी बात की जल्दबाजी न करें: अगर आपको लग रहा है कि अब बुखार नहीं है और आप ठीक हैं, तो भी जोश में आकर तुरंत कोई भारी काम, भागदौड़ या जिम-कसरत शुरू न कर दें। शरीर को हौले-हौले अपनी पुरानी रूटीन पर आने दें।
  • हल्का गुनगुना पानी पिएं: फ्रिज के ठंडे पानी से बिल्कुल तौबा कर लें और दिन भर थोड़ा-थोड़ा करके गुनगुना पानी ही पिएं। इससे आपका सुस्त पड़ा हुआ पाचन भी सही रहेगा और शरीर के अंदर की सारी गंदगी आसानी से बाहर निकल जाएगी।
  • हल्की-फुल्की सैर: सारा दिन बिस्तर पर भी न पड़े रहें। सुबह या शाम के वक्त घर के आंगन में या पास के पार्क में बस 5-10 मिनट के लिए एकदम आराम-आराम से टहलें। इससे शरीर की नसों में खून दौड़ेगा और जकड़न खुलेगी।

कब यह कमज़ोरी सामान्य नहीं मानी जाती?

यद्यपि कमज़ोरी होना सामान्य है, लेकिन यदि नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य रिकवरी मानकर बैठने की भूल न करें। यह किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है:

  • यदि कमज़ोरी समय के साथ कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही हो।
  • थोड़ी देर बैठने या चलने पर भी सांस लेने में बहुत ज़्यादा तकलीफ होना।
  • बार-बार चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना या बेहोशी महसूस होना।
  • दिल की धड़कन का अचानक बहुत तेज़ हो जाना।
  • बुखार का दोबारा लौट आना।
  • लगातार उल्टी होना या पेट में असहनीय दर्द होना।
  • शरीर के किसी भी हिस्से से खून आना (जैसे मसूड़ों या नाक से)।

ऐसी किसी भी स्थिति में बिना देर किए तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है।

निष्कर्ष

डेंगू से उबरना एक धीमी और धैर्य से भरी यात्रा है। इस बीमारी के बाद महसूस होने वाली कमज़ोरी आपके शरीर का एक तरीका है जो आपको संकेत देता है कि उसे अभी और आराम तथा सही पोषण की ज़रूरत है। जब आप अपनी पाचन अग्नि का ध्यान रखते हैं, सही समय पर सुपाच्य भोजन लेते हैं और पर्याप्त विश्राम करते हैं, तो शरीर बहुत ही सुरक्षित तरीके से अपनी पुरानी ताकत वापस पा लेता है।

अगर आपकी या आपके किसी परिचित की कमज़ोरी लंबे समय से बनी हुई है, पेट साफ नहीं रहता या थकान कम नहीं हो रही है, तो केवल सप्लीमेंट्स के भरोसे न रहें। सही आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और प्राकृतिक उपचार के लिए आप हमारे प्रमाणित जीवा डॉक्टरों से व्यक्तिगत परामर्श ले सकते हैं। आज ही कॉल करें: +919266714040

References

Dengue and severe dengue

Dengue Fever - StatPearls - NCBI Bookshelf

Comprehensive Guideline for Prevention and Control of Dengue and Dengue Haemorrhagic Fever. Revised and expanded edition

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, डेंगू के वायरस का असर शरीर पर बहुत गहरा होता है, इसलिए बुखार ठीक होने के बाद भी 2 से 3 सप्ताह तक थकान और कमज़ोरी रहना पूरी तरह सामान्य है।

प्लेटलेट्स केवल खून का एक हिस्सा हैं। कमज़ोरी का कारण मांसपेशियों का टूटना, शरीर में पानी की कमी और पाचन क्रिया का सुस्त होना होता है, जिसे ठीक होने में समय लगता है।

बिल्कुल नहीं। डेंगू के तुरंत बाद भारी कसरत करने से मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है। कम से कम एक महीने तक भारी शारीरिक व्यायाम से बचें।

अनार और पपीता इस समय सबसे अच्छे माने जाते हैं। अनार खून की कमी दूर करता है और पपीता आपके पाचन को दुरुस्त रखने में मदद करता है।

हाँ, शारीरिक सक्रियता कम होने, पानी की कमी और पाचन अग्नि के मंद होने के कारण बहुत से मरीज़ों को रिकवरी के दौरान कब्ज़ की शिकायत हो जाती है।

यदि आपका पेट ठीक है, तो आप हल्दी वाला गुनगुना दूध ले सकते हैं। लेकिन अगर पाचन बहुत कमज़ोर है या पेट में भारीपन रहता है, तो शुरुआत में दूध के बजाय मूंग दाल का पानी या सूप लेना ज़्यादा बेहतर है।

यह शरीर में पानी की कमी (Dehydration) या अचानक ब्लड प्रेशर कम होने के कारण हो सकता है। सुबह उठते समय बिस्तर से अचानक न उठें, पहले थोड़ी देर बैठें और फिर धीरे से खड़े हों।

हाँ, बहुत से मरीज़ों में रिकवरी के कुछ हफ़्तों बाद बाल झड़ने की समस्या देखी जाती है। यह शरीर में अचानक आए शारीरिक तनाव और पोषण की कमी के कारण होता है, जो समय के साथ ठीक हो जाता है।

जी हाँ, ओआरएस या नारियल पानी शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को तुरंत सुधारते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन दूर होता है और कमज़ोरी में जल्दी आराम मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार सबसे ज़रूरी चीज़ है 'धीरज और सुपाच्य आहार'। जब तक भूख खुलकर न लगे, तब तक केवल हल्का भोजन ही लें ताकि आपकी पाचन अग्नि दोबारा मज़बूती पा सके।

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