हार्मोनल पिल्स, मुहाँसों की क्रीम और तुरंत पीरियड लाने वाली दवाओं का इस्तेमाल अनियमित मासिक धर्म, मुहाँसे (Acne), तेज़ी से बढ़ते वज़न और पीसीओएस (PCOS) जैसी बीमारियों में काफी आम है। ये दवाएँ और गोलियाँ शरीर में कृत्रिम रूप से हार्मोन डालकर लक्षणों को कुछ समय के लिए दबा देती हैं, जिससे ब्लीडिंग आ जाती है और चेहरे के दाने कुछ समय के लिए छिप जाते हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गई है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है।
लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीज़ को दवा छोड़ने के तुरंत बाद फिर से महीनों तक पीरियड्स नहीं आते, मुहाँसे पूरे चेहरे पर भयंकर रूप से निकल आते हैं, वज़न बेकाबू हो जाता है और बीमारी पहले से भी बड़े रूप में वापस आ जाती है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार हार्मोन की गोलियाँ (OCPs) खाने से प्रजनन तंत्र का कमज़ोर होना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, दवाओं पर शरीर की निर्भरता, या सबसे महत्वपूर्ण शरीर में मौजूद अशुद्धियाँ और अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और ओवरीज़ (अंडाशय) की सेहत प्राकृतिक रूप से बनी रहे।
अनियमित पीरियड्स, मुहाँसे और वज़न बढ़ना क्या है?
जब किसी महिला को समय पर पीरियड्स न आएँ, चेहरे (खासकर ठुड्डी और गालों) पर बड़े-बड़े मुहाँसे निकलने लगें और बिना ज़्यादा खाए वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे, तो यह पीसीओएस (PCOS - Polycystic Ovary Syndrome) या गंभीर हार्मोनल असंतुलन का सबसे बड़ा संकेत है। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ शरीर में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन/एण्ड्रोजन) की मात्रा बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है।
आमतौर पर लड़कियाँ और महिलाएँ इसका शिकार खराब खान-पान, भयंकर तनाव, शारीरिक गतिशीलता की कमी या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होती हैं। जब टेस्टोस्टेरोन बढ़ता है, तो अंडाशय में सिस्ट (गाँठें) बनने लगती हैं, ओव्यूलेशन रुक जाता है (जिससे पीरियड्स नहीं आते) और त्वचा की ग्रंथियाँ बहुत ज़्यादा तेल (Sebum) बनाने लगती हैं जिससे भयंकर मुहाँसे होते हैं। गोलियाँ खाने पर ब्लड रिपोर्ट और साइकिल कुछ समय के लिए नॉर्मल हो जाती है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ लक्षणों को ढकती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस अनुकूल माहौल को ठीक नहीं करतीं जिसमें हार्मोन बिगड़ रहे हैं। दवा को बिना सोचे-समझे लंबे समय तक इस्तेमाल करना लिवर और पाचन पर बुरा असर डालता है।
हार्मोन असंतुलन की बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?
स्त्री रोग और हार्मोन से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) यह सबसे आम है। इसमें एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) बढ़ता है, जिससे ओव्यूलेशन नहीं होता, चेहरे पर बाल आते हैं, मुहाँसे होते हैं और वज़न बढ़ता है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ता है और शरीर में ज़िद्दी फैट (विशेषकर पेट पर) जमा होने लगता है।
- हाइपोथायरायडिज्म थायरॉइड हार्मोन की कमी से मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ता है और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं।
- एड्रेनल हाइपरप्लासिया इसमें एड्रेनल ग्रंथि से बहुत ज़्यादा पुरुष हार्मोन निकलता है, जिससे त्वचा भयंकर रूप से तैलीय (Oily) हो जाती है और मुहाँसे निकलते हैं।
पीसीओएस (PCOS) और हार्मोन असंतुलन के लक्षण और संकेत
बार-बार साइकिल बिगड़ना या वज़न का बेतहाशा बढ़ना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं
- अनियमित या रुके हुए पीरियड्स पीरियड्स का महीनों तक न आना या आने पर बहुत कम धब्बे (Spotting) आना।
- भयंकर मुहाँसे (Cystic Acne) चेहरे की जॉलाइन, ठुड्डी, छाती और पीठ पर बड़े, दर्दनाक और मवाद वाले दाने निकलना जो जल्दी ठीक नहीं होते।
- वज़न का तेज़ी से बढ़ना खासकर पेट और कमर के आसपास तेज़ी से फैट जमा होना जिसे कसरत के बाद भी घटाना बहुत मुश्किल होता है।
- चेहरे पर अनचाहे बाल (Hirsutism) ऊपरी होंठ, ठुड्डी और पेट पर कड़े और काले बाल आना।
- बालों का झड़ना सिर के आगे के हिस्से से बाल पतले होकर पुरुषों की तरह गुच्छों में गिरना।
- ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
इन समस्याओं के क्रॉनिक कारण क्या हैं?
शरीर में एक साथ इतने सारे बदलावों के पीछे सिर्फ बाहरी कारण नहीं, बल्कि कई अंदरूनी क्रॉनिक कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं
- इंसुलिन रेजिस्टेंस जब शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, तो पैंक्रियाज ज़्यादा इंसुलिन बनाता है। यह अतिरिक्त इंसुलिन ओवरीज़ को ज़्यादा पुरुष हार्मोन बनाने के लिए उकसाता है।
- गलत खान-पान ज़्यादा जंक फूड, मैदा, चीनी और पैकेटबंद भोजन खाने से शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनते हैं और इंसुलिन का स्तर तेज़ी से बिगड़ता है।
- मानसिक तनाव और एंग्जायटी ज़्यादा तनाव से कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो पूरे हार्मोनल और प्रजनन तंत्र को ब्लॉक कर देता है।
- दोषों का असंतुलन आयुर्वेद के अनुसार शरीर में कफ दोष बढ़ने से वज़न बढ़ता है और सिस्ट बनती हैं, वात बिगड़ने से पीरियड्स रुकते हैं, और पित्त बिगड़ने से चेहरे पर भयंकर मुहाँसे निकलते हैं।
- गतिहीन जीवनशैली दिन भर बैठे रहने और व्यायाम न करने से मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और फैट जमने लगता है।
इसके जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?
इस समस्या को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ बाहरी गोली और क्रीम पर निर्भर रहा जाए, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं
- बाँझपन (Infertility) अंडे सही समय पर न बनने (Anovulation) के कारण माँ बनने में भयंकर परेशानी आती है।
- टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा इंसुलिन रेजिस्टेंस अगर लंबे समय तक रहे, तो कम उम्र में ही शुगर की बीमारी हो जाती है।
- एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा लंबे समय तक पीरियड्स न आने से गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है, जो भविष्य में कैंसर का रूप ले सकती है।
- मानसिक डिप्रेशन और चिंता चेहरे पर मुहाँसे, अनचाहे बाल और बढ़ते वज़न के कारण महिलाएँ आत्मविश्वास खो देती हैं और डिप्रेशन में चली जाती हैं।
- हृदय रोग और हाई कोलेस्ट्रॉल हार्मोन बिगड़ने से खून में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है।
- समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?
आयुर्वेद के हिसाब से अनियमित पीरियड्स, मुहाँसे और बढ़ता वज़न तीन अलग-अलग बीमारियाँ नहीं हैं, बल्कि ये सभी शरीर में एक ही अंदरूनी खराबी के संकेत हैं। आयुर्वेद में इसे 'आर्तव क्षय', 'रस धातु' का दूषित होना और तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) का बिगड़ना माना जाता है। कफ दोष बढ़ने से वज़न बढ़ता है और ओवरी में रुकावट आती है, वात के बिगड़ने से मासिक धर्म का चक्र टूट जाता है, और पित्त के दूषित होने से खून में गर्मी बढ़ती है जो मुहाँसों के रूप में बाहर फूटती है। डॉक्टर नाड़ी और जीभ देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं शरीर में कमज़ोर पाचन अग्नि के कारण टॉक्सिन्स (आम) तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने गर्भाशय तक पहुँचने वाले पोषण मार्गों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। जब तक यह दूषित 'आम' शरीर में रहेगा, कोई भी क्रीम या गोली स्थायी आराम नहीं देगी। आयुर्वेद में बस ब्लड रिपोर्ट को ठीक करना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, इंसुलिन रेजिस्टेंस खत्म हो और शरीर प्राकृतिक रूप से संतुलित बने।
हार्मोन संतुलित करने और मुहाँसे मिटाने के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ
आयुर्वेद में हार्मोन को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने, खून साफ करने और कफ को गलाने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं
- कांचनार यह शरीर में किसी भी प्रकार की गाँठ (सिस्ट) को गलाने और पीसीओएस (PCOS) को खत्म करने की सबसे बेहतरीन औषधि है।
- मंजिष्ठा और नीम ये दोनों खून की अशुद्धियों और पित्त को शांत करते हैं, जिससे भयंकर और ज़िद्दी मुहाँसे जड़ से खत्म हो जाते हैं।
- शतावरी और अशोक ये प्रजनन अंगों को ताकत देते हैं, टेस्टोस्टेरोन को कम करते हैं और पीरियड्स को नियमित करते हैं।
- गुग्गुलु यह शरीर के मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करता है, कफ को गलाता है और बढ़े हुए ज़िद्दी वज़न को कम करता है।
आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई
प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित दोषों को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया
- गहरी सफाई और शरीर शोधन जब पीसीओएस (PCOS) की समस्या सालों पुरानी हो और दवा से वज़न या मुहाँसे कम न हो रहे हों, तो जीवा आयुर्वेद में शरीर के दोषों को संतुलित करने के लिए विशेष पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
- उद्वर्तन यह जड़ी-बूटियों के सूखे चूर्ण से की जाने वाली एक खास मालिश है, जिससे त्वचा के रोम छिद्र खुलते हैं, सेल्युलाईट खत्म होता है और ज़िद्दी फैट पिघलता है।
- बस्ती और विरेचन अपान वात को शांत कर पीरियड्स लाने के लिए 'बस्ती' (औषधीय एनीमा) दी जाती है, और खून की गर्मी (पित्त) निकालकर मुहाँसे मिटाने के लिए विरेचन (औषधीय दस्त) कराया जाता है।
- स्थायी राहत के लिए औषधियाँ अंदरूनी सफाई के साथ रक्त शोधक और हार्मोन संतुलित करने वाली जड़ी-बूटियों का सेवन कराया जाता है।
रोगी के लिए शुद्ध आहार
जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, पीसीओएस (PCOS) को रिवर्स करने के लिए सुपाच्य, फैट-फ्री और शरीर के शुगर लेवल को संतुलित करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है
क्या खाएँ?
- दालचीनी और मेथी सुबह खाली पेट मेथी का पानी या दालचीनी की चाय पिएँ, यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम कर हार्मोन और वज़न संतुलित करती है।
- फाइबर वाली ताज़ी सब्ज़ियाँ लौकी, करेला, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ खाएँ, ये पाचन को साफ रखती हैं और मुहाँसे कम करती हैं।
- पपीता और तिल कच्चा पपीता और तिल पीरियड्स को प्राकृतिक रूप से लाने में बहुत मददगार हैं।
क्या न खाएँ?
- चीनी और मैदा मिठाइयाँ, कोल्ड ड्रिंक्स, पिज्जा, बर्गर और मैदे से बनी चीज़ें बिल्कुल बंद कर दें, ये इंसुलिन बढ़ाते हैं जिससे वज़न और मुहाँसे तेज़ी से भड़कते हैं।
- ज़्यादा डेयरी उत्पाद भारी दूध, चीज़ और पनीर खाना कम करें, क्योंकि डेयरी उत्पाद शरीर में कफ और पुरुष हार्मोन को बढ़ाते हैं।
- तली-भुनी चीज़ें ज़्यादा तेल और जंक फूड खून को दूषित करते हैं, जो सीधे तौर पर मुहाँसों का कारण बनता है।
ठीक होने में कितना समय लगता है?
जीवा आयुर्वेद में रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है
- बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे आपका वज़न कितना ज़्यादा है, और हार्मोनल असंतुलन कितना पुराना है।
- हल्की समस्या में सुधार अगर मुहाँसे और पीरियड्स अभी बिगड़ना शुरू हुए हैं, तो आमतौर पर 2 से 3 महीने में ही साइकिल सुधरने लगती है और मुहाँसे सूखने लगते हैं।
- पुरानी बीमारी का समय अगर पीसीओएस (PCOS) सालों पुराना है और वज़न बहुत ज़्यादा है, तो शरीर को पूरी तरह शुद्ध होने और हार्मोन प्राकृतिक रूप से संतुलित होने में 6 महीने से 1 साल तक का समय भी लग सकता है।
- उपचार का तरीका इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से रक्त शोधक जड़ी-बूटियाँ, सही खानपान और रोज़ाना व्यायाम शामिल होता है।
- स्थायी परिणाम मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो दोष संतुलित हो जाते हैं और भविष्य में गोलियों पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।
मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव
मेरा नाम श्वेता है और मैं नोएडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मुझे साल 2006 से पीसीओडी (PCOD) की शिकायत थी, जिसके लिए मैंने काफी सालों तक एलोपैथिक ट्रीटमेंट किया, लेकिन मुझे कोई रिजल्ट नहीं मिला। फिर मैंने होम्योपैथिक ट्रीटमेंट भी लिया, पर उससे भी कोई आराम नहीं मिला।
तभी मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेदा का प्रोग्राम देखा। उसके बाद मैं जीवा के नोएडा ब्रांच में गई, जहाँ मेरी मुलाकात डॉक्टर अभिलाषा तिवारी से हुई। उन्होंने मेरी प्रॉब्लम को बहुत अच्छे से समझा और मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया।मैंने साल 2017 से यह ट्रीटमेंट शुरू किया था। डेढ़ साल तक इलाज लेने के बाद मुझे पीसीओडी में बहुत अच्छा सुधार और रिजल्ट मिला। पीसीओडी का ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद मैंने इनफर्टिलिटी के लिए ट्रीटमेंट शुरू किया। जीवा के इलाज की मदद से आज मेरा एक छोटा सा बेटा है। मैं इस सबके लिए डॉक्टर अभिलाषा तिवारी और पूरे जीवा परिवार को धन्यवाद करना चाहती हूँ।
आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर
हार्मोन असंतुलन की बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है
| तुलना का आधार | आधुनिक चिकित्सा | आयुर्वेदिक चिकित्सा |
| उपचार का दृष्टिकोण | हार्मोन और दवाओं से लक्षणों को नियंत्रित करना | बीमारी की जड़ पर काम करना |
| कार्य करने का तरीका | OCPs से पीरियड्स लाना, स्टेरॉयड/एंटीबायोटिक्स से मुहाँसे कम करना | शरीर को अंदर से संतुलित कर हार्मोन को प्राकृतिक रूप से ठीक करना |
| मूल कारण पर प्रभाव | PCOS के मूल कारणों को ठीक नहीं करता | कफ-पित्त-वात, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टॉक्सिन्स को संतुलित करता है |
| उपचार विधियाँ | हार्मोनल दवाइयाँ, एंटीबायोटिक्स | जड़ी-बूटियाँ और संतुलित आहार |
| दुष्प्रभाव | दवा छोड़ते ही मुहाँसे और वज़न बढ़ना, लिवर पर असर | सामान्यतः सुरक्षित, प्राकृतिक सुधार |
| परिणाम | अस्थायी राहत | हार्मोन संतुलन, वज़न और त्वचा में सुधार |
| समय | जल्दी असर | थोड़ा समय लगता है, लेकिन दीर्घकालिक लाभ |
डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?
पीसीओएस और हार्मोन असंतुलन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि
- लगातार 3 महीने या उससे अधिक समय तक पीरियड्स बिल्कुल न आएँ।
- चेहरे पर ऐसे मुहाँसे हों जो दर्दनाक हों, मवाद से भरे हों और दवा से ठीक न हो रहे हों।
- वज़न इतनी तेज़ी से बढ़े कि डाइट करने पर भी कोई फर्क न पड़े।
- चेहरे और पेट पर पुरुषों की तरह मोटे और काले बाल आने लगें।
- बाल बहुत तेज़ी से झड़ने लगें और सिर की त्वचा दिखने लगे।
समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और बाँझपन व डायबिटीज़ जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
आयुर्वेद के हिसाब से अनियमित पीरियड्स, भयंकर मुहाँसे और तेज़ी से बढ़ता वज़न (PCOS) मुख्य रूप से कफ, पित्त व वात दोष के बिगड़ने तथा शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) के जमा होने से जुड़ा होता है। जंक फूड खाने, मीठा खाने, व्यायाम न करने और तनाव लेने से इंसुलिन का संतुलन बिगड़ता है, जिससे खून में गर्मी (मुहाँसे) और कफ (मोटापा) बढ़ता है। सिर्फ रोज़ाना हार्मोन की गोली खाने से महीने में ब्लीडिंग तो हो जाती है, लेकिन बीमारी जड़ से खत्म नहीं होती। इलाज में शरीर की अंदरूनी शुद्धि, खून साफ करना और दोषों को संतुलित करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। इसमें मंजिष्ठा-कांचनार जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना, दालचीनी-मेथी का पानी पीना और रोज़ाना व्यायाम करना शामिल है जिससे शरीर प्राकृतिक रूप से काम करे और बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।
























