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2 IVF Fail हुए - आयुर्वेद से Body को Ready कैसे करें?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 19 May, 2026
  • category-iconUpdated on 19 May, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5006

आजकल लगातार 2 आईवीएफ (IVF) साइकिलें फेल (Fail) होने की शिकायत बहुत आम हो गई है। लोग अक्सर इस बात को लेकर भयंकर उलझन में रहते हैं कि उनके एग्स (Eggs) खराब (Kh) हैं या गर्भाशय (Uterus) की परत तैयार नहीं है। इस ग़लतफहमी में वे खराब क्वालिटी के बावजूद बार-बार प्रक्रिया दोहराते रहते हैं और यूट्यूब देखकर ग़लत (Wrong) सप्लीमेंट्स खाते हैं, जिससे हार्मोन्स और भड़क जाते हैं। एलोपैथी में इस नाकामी को दबाने के लिए अक्सर स्टेरॉयड के इंजेक्शन्स या सीधे डोनर एग (Donor egg) की सलाह दे दी जाती है। ये चीज़ें कुछ समय के लिए उम्मीद ज़रूर जगा देती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से शरीर अंदर से भयंकर रूप से कमज़ोर हो जाता है और गर्भाशय सूखने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या 'वात-पित्त' दोष के भड़कने और गर्भाशय (क्षेत्र) के दूषित होने से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से आपकी असफलता के असली कारण को पकड़कर इस भयंकर खतरे को जड़ से मिटाता है ताकि आप बिना डरे एक स्वस्थ गर्भधारण कर सकें।

2 IVF Fail होने और Body Ready न होने की 'असली पहचान' क्या है?

गर्भधारण के लिए शरीर को तैयार करना मुख्य रूप से चार चीज़ों—ऋतु, क्षेत्र (गर्भाशय), अम्बु (पोषण) और बीज (अंडा) पर निर्भर करता है। लेकिन असफलता कहाँ हो रही है, यही असली पहचान है:

  • इम्प्लांटेशन फेलियर (Implantation Failure): यह गर्भाशय (Uterus) की बीमारी है। जब गर्भाशय की परत (Endometrium) बहुत पतली होती है या उसमें रक्त का संचार सही नहीं होता, तो भ्रूण (Embryo) दीवार से नहीं चिपक पाता और आईवीएफ फेल हो जाता है। दर्द और असफलता सीधे गर्भाशय की कमज़ोरी से जुड़ी होती है।
  • पुअर एग क्वालिटी (Poor Egg Quality): यह अंडाशय (Ovary) की बीमारी है। हमारे शरीर में वात-पित्त भड़कने से अंडे की गुणवत्ता भयंकर रूप से सिकुड़ या खराब हो जाती है। इसमें परेशानी गर्भाशय में नहीं, बल्कि सीधे ओवरी से शुरू होकर भ्रूण के निर्माण तक जाती है। इसे 'बीज दृष्टि' भी कहते हैं।

कृत्रिम हार्मोन्स का इस्तेमाल सिर्फ बाहरी इलाज है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर दबे हुए वात-पित्त और कमज़ोर जठराग्नि के भयंकर प्रकोप में चल रही होती है।

IVF फेल होने के भयंकर प्रकार

आईवीएफ फेलियर और इससे जुड़े दर्द को मुख्य रूप से इस तरह बाँटा जा सकता है:

  • अर्ली इम्प्लांटेशन फेलियर (Early Implantation Failure): अचानक भारी स्ट्रेस या गर्भाशय के भयंकर रूप से रूखे होने पर भ्रूण का ट्रांसफर के कुछ ही दिनों बाद गिर जाना, जिससे रिज़ल्ट नेगेटिव आता है।
  • क्रोनिक वात-पित्त प्रकोप (Chronic Imbalance): सालों तक शरीर में 'आम' (Toxins) और वात बढ़ने से गर्भाशय का सूख जाना, जिससे हर बार आईवीएफ करने पर शरीर भ्रूण को एक बाहरी तत्व मानकर रिजेक्ट कर देता है।
  • केमिकल प्रेगनेंसी (Chemical Pregnancy): शुरुआत में प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आता है, लेकिन गर्भाशय की भयंकर कमज़ोरी के कारण भ्रूण सुरक्षित नहीं रह पाता और ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।

गर्भाशय के डैमेज होने के भयंकर शारीरिक संकेत

शरीर द्वारा दिए जाने वाले डरावने लक्षण इस प्रकार हैं:

  • पीरियड्स का भयंकर रूप से बिगड़ना: आईवीएफ फेल होने के बाद पीरियड्स में भयंकर दर्द होना, काले और गाढ़े थक्के (Clots) आना या ब्लीडिंग का बहुत कम हो जाना।
  • पेल्विक एरिया में भारीपन: पेट के निचले हिस्से और ओवरीज़ में हर समय भयंकर भारीपन और ऐंठन महसूस होना।
  • शरीर का भयंकर रूप से फूलना: हार्मोनल इंजेक्शन्स के कारण वज़न का अचानक बढ़ जाना और शरीर में सूजन आ जाना।
  • भयंकर कमज़ोरी और तनाव: धीरे-धीरे मानसिक ताकत खत्म होना और हर समय रोने का मन करना या पैनिक अटैक आना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अगला आईवीएफ रोकें और अपनी जाँच कराएँ।

2 IVF Fail होने को बुलाने वाले असली और छिपे हुए कारण

इस भयंकर नाकामी के पीछे गहरे अंदरूनी कारण ये होते हैं:

  • ग़लत पॉश्चर और भयंकर वात: घंटों तक तनाव में रहने और वात-पित्त बढ़ाने वाला भोजन खाने से गर्भाशय और ओवरीज़ सूखकर कड़क हो जाती हैं।
  • मानसिक तनाव (Stress) की आदत: असफलता के डर से दिमाग़ में तनाव रहता है, जो कॉर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन को बढ़ाता है और गर्भाशय की नसों को सिकोड़ देता है।
  • बिना डिटॉक्स (Detox) किए प्रयास: अचानक झटके से बिना शरीर की शुद्धि किए बार-बार आईवीएफ कराने से शरीर भ्रूण पर भयंकर दबाव डाल देता है।
  • जठराग्नि की कमज़ोरी (आम): पाचन खराब होने से शरीर में भयंकर 'आम' (गंदगी) बनता है, जो प्रजनन तंत्र की नलियों में जाकर सूजन पैदा करता है।

इन 'Hidden Risks' को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस स्थिति को अगर सिर्फ 'सामान्य असफलता' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • परमानेंट इनफर्टिलिटी (Permanent Infertility): ओवरीज़ के पूरी तरह डैमेज होने से अंडे बनना हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं।
  • ओवेरियन सिस्ट और फाइब्रॉइड्स (Cysts & Fibroids): भयंकर हार्मोनल असंतुलन के कारण गर्भाशय में गाँठें बन सकती हैं।
  • मानसिक अवसाद (Severe Depression): बार-बार की असफलता से इंसान गहरे डिप्रेशन में चला जाता है, जो एक भयंकर मेडिकल इमरजेंसी है।

गर्भाशय की कमज़ोरी पर आयुर्वेद का क्या चमत्कारी नज़रिया है?

आयुर्वेद में बांझपन या असफलता को 'वन्ध्यत्व' और दोषों के भयंकर प्रकोप से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष के भयंकर प्रकोप से गर्भाशय और ओवरीज़ में भयंकर जकड़न और रूखापन आ जाता है। जब दूषित वात गर्भाशय में जाता है, तो वह पूरे क्षेत्र को सुखा देता है। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि असफलता एग क्वालिटी से आ रही है या गर्भाशय की कमज़ोरी से। आयुर्वेद में बस कृत्रिम हार्मोन्स डालना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि गर्भाशय को अंदरूनी चिकनाहट मिले, सूजन खत्म हो और वात-पित्त हमेशा के लिए शांत हो।

जीवा आयुर्वेद Body को Ready करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर महिला का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को होने वाले दर्द की जगह, ब्लीडिंग की मात्रा और तनाव की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ की पुरानी आईवीएफ (IVF) रिपोर्ट और ली जा रही भारी दवाइयों का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात-पित्त दोष को पकड़ने के बाद ही गर्भाशय की अंदरूनी सूजन कम करने और उसे उपजाऊ बनाने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

गर्भाशय को प्राकृतिक रूप से हील करने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में गर्भाशय को ताकत देने, सूजन कम करने और वात को शांत करने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • शतावरी (Shatavari): यह महिलाओं के प्रजनन तंत्र के लिए आयुर्वेद का सबसे बड़ा प्राकृतिक टॉनिक है। यह भयंकर रूखेपन को सोख लेती है और एंडोमेट्रियम को तुरंत मोटा और स्पंजी करती है।
  • अशोका (Ashoka): यह बढ़ा हुआ पित्त शांत करने की सबसे अचूक दवा है। यह सूखी हुई ओवरीज़ में दोबारा जान डालती है।
  • फल घृत (Phala Ghrita): यह गर्भाशय और ओवरीज़ के लिए चमत्कारी है। यह आईवीएफ की सूजन को कम कर गर्भाशय को भ्रूण के लिए तैयार करता है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह मानसिक तनाव की भयंकर ऐंठन को खोलता है और कमज़ोर हो चुकी नसों को फौलाद जैसी ताकत देता है।

गर्भाशय और शरीर को ताकत देने वाली पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, हार्मोन्स को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • उत्तर बस्ती (Uttara Basti): यह आईवीएफ फेलियर के लिए सबसे चमत्कारी थेरेपी है। गर्भाशय के अंदर औषधीय तेल या घी डाला जाता है। यह सीधे गर्भाशय की परत तक जाकर भयंकर सूखेपन को मिटाता है और उसे उपजाऊ बनाता है।
  • विरेचन (Virechana): पेट साफ कराकर शरीर से पुराने इंजेक्शन्स के ज़हर और भयंकर पित्त को निकालने का यह सबसे शक्तिशाली तरीका है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे पर औषधीय तेल की धार गिराने से भयंकर एंग्ज़ायटी तुरंत खत्म होती है और पीयूष ग्रंथि संतुलित होती है।

वात-पित्त को शांत करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस भयंकर नाकामी के बाद आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • गाय का शुद्ध घी: रोज़ाना अपने खाने में और रात को गर्म दूध में डालकर गाय का शुद्ध घी पिएँ। यह वात को शांत कर गर्भाशय को चिकनाहट (Lubrication) देता है।
  • गर्म और सुपाच्य भोजन: मूंग दाल, दलिया और ताज़ा बना गर्म भोजन लें, जो पचने में हल्का हो।
  • भिगोए हुए मेवे: बादाम और अखरोट खाने से एग क्वालिटी शानदार होती है और भयंकर वात दर्द तुरंत शांत होता है।

क्या न खाएँ?

  • वात-पित्त बढ़ाने वाली चीज़ें: पपीता, अनानास, राजमा, छोले और बैंगन शरीर में भयंकर गैस और गर्मी बनाते हैं, जो सीधे गर्भाशय को जकड़ लेती है।
  • ठंडी और बासी चीज़ें: फ्रिज का ठंडा पानी, दही, आइसक्रीम और बासी खाना वात भड़काते हैं, इन्हें तुरंत बंद कर दें।
  • जंक फूड: यह शरीर में 'आम' बनाता है जिससे जड़ी-बूटियाँ काम नहीं कर पातीं।

जीवा आयुर्वेद में रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ पुरानी रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर की समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, निराशा और तनाव को बहुत ही आराम से सुना जाता है।
  • आपके एग की क्वालिटी, स्पर्म की स्थिति और एंडोमेट्रियम के साइज़ की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, पीरियड्स के रक्त का रंग और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर जमे 'आम' और वात-पित्त दोष के भयंकर स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

Body को पूरी तरह Ready होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में गर्भाशय को तैयार करने का इलाज पूरी तरह से हर महिला के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: आयुर्वेदिक डाइट और शतावरी से 3 से 4 हफ्तों में ही आपके पीरियड्स का फ्लो नॉर्मल हो जाता है और शरीर की गर्मी शांत होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय (बीज शुद्धि): आयुर्वेद दृढ़ता से सलाह देता है कि आईवीएफ फेल होने के बाद शरीर को पूरी तरह 'रीसेट' करने और गर्भाशय को मज़बूत बनाने में 3 से 6 महीने का समय लगता है।
  • स्थायी परिणाम: 3-6 महीने की इस चमत्कारी आयुर्वेदिक तैयारी के बाद जब आप दोबारा आईवीएफ (या प्राकृतिक प्रयास) करते हैं, तो सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या बड़ा अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य प्रजनन क्षमता बढ़ाकर गर्भधारण की संभावना को बेहतर बनाना शरीर, गर्भाशय और समग्र स्वास्थ्य को संतुलित कर प्राकृतिक प्रजनन क्षमता को सपोर्ट करना
नज़रिया समस्या को हार्मोन, अंडाणु, शुक्राणु या प्रजनन तंत्र की चिकित्सा स्थिति के रूप में देखना इसे वात संतुलन, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की समग्र तैयारी से जोड़कर देखना
उपचार तरीक़ा दवाएँ, हार्मोनल थेरेपी, IUI/IVF जैसी तकनीकों का उपयोग पंचकर्म, उत्तर बस्ती, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ, योग और जीवनशैली सुधार पर ज़ोर
डाइट और लाइफ़स्टाइल संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और तनाव कम करने की सलाह वात-शामक आहार, पर्याप्त आराम, मानसिक शांति और नियमित दिनचर्या को महत्वपूर्ण मानना
लंबा असर कुछ मामलों में कई उपचार चक्रों की आवश्यकता हो सकती है शरीर की समग्र मजबूती और दीर्घकालिक प्रजनन स्वास्थ्य को सपोर्ट करने पर ध्यान

डॉक्टर की सलाह कब लें?

आईवीएफ फेल होने के बाद अगर ये भयंकर संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • लगातार कई महीनों तक पीरियड्स का न आना या भयंकर रक्तस्राव (Heavy bleeding) होना।
  • ओवरीज़ में सूजन (OHSS) के कारण पेट में तेज़ दर्द और भारीपन रहना।
  • डिप्रेशन इतना भयंकर हो जाए कि नींद आने पर पूरी तरह बंद हो जाए और पैनिक अटैक आएँ।
  • दवाइयों के साइड इफेक्ट से शरीर का वज़न भयंकर रूप से बढ़ जाए और कमज़ोरी महसूस हो।

निष्कर्ष

लगातार 2 आईवीएफ फेल होना आपके शरीर का यह संकेत है कि उसकी 'ज़मीन' (गर्भाशय) अभी उस नन्हें बीज को सँभालने के लिए तैयार नहीं है। बिना शरीर की भयंकर गंदगी (Toxins) को निकाले तुरंत तीसरे आईवीएफ की तरफ भागना आपके शरीर और पैसे दोनों की बर्बादी है। असली पहचान करके शरीर को अंदर से पोषण देना, उत्तर बस्ती जैसी चमत्कारी थेरेपी लेना, शतावरी-अशोक जैसी अचूक जड़ी-बूटियाँ अपनाना और गाय के घी का शुद्ध वात-नाशक आहार ही इसका सबसे सुरक्षित इलाज है। जीवा आयुर्वेद आपके गर्भाशय और शरीर को प्राकृतिक रूप से इतना ताकतवर बना देता है कि आपका अगला प्रयास एक सफल और स्वस्थ मातृत्व में बदल सके।

FAQs

आयुर्वेद दृढ़ता से सलाह देता है कि लगातार हार्मोनल इंजेक्शन्स से शरीर में भयंकर गर्मी (पित्त) और कमज़ोरी आ जाती है। इसलिए कम से कम 3 से 6 महीने रुककर पहले शरीर को आयुर्वेदिक डिटॉक्स (Detox) से तैयार करना चाहिए।

शतावरी और फल घृत (Phala Ghrita) का सेवन गर्भाशय की परत को बहुत तेज़ी से प्राकृतिक रूप से मोटा और स्पंजी बनाता है, जिससे भ्रूण आसानी से चिपक सके।

बिल्कुल। उत्तर बस्ती आयुर्वेद की सबसे चमत्कारी थेरेपी है। गर्भाशय में औषधीय तेल डालने से सारा सूखापन, जाले और गंदगी बाहर निकल जाती है, जिससे गर्भाशय एकदम नया और उपजाऊ बन जाता है।

हाँ, सबसे ज़्यादा पड़ता है! डिप्रेशन और स्ट्रेस के कारण कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो नसों को सिकोड़ कर भ्रूण को टिकने नहीं देता। अश्वगंधा और ब्राह्मी इस स्ट्रेस को जड़ से खत्म करते हैं।

एग क्वालिटी शरीर में बढ़े हुए 'आम' (गंदगी) और कमज़ोर जठराग्नि के कारण गिरती है। विरेचन पंचकर्म से शरीर की सफाई कर अशोका जैसी जड़ी-बूटियाँ देने से ओवरीज़ में बेहतरीन और स्वस्थ अंडे बनने लगते हैं।

हार्मोन्स का निर्माण मुख्य रूप से 'गुड फैट' (Good Fat) से होता है। शुद्ध गाय का घी वात को शांत करता है, गर्भाशय को चिकनाहट देता है और फर्टिलिटी हार्मोन्स को तेज़ी से बढ़ाता है।

जी हाँ! कई मामलों में, 3 से 6 महीने शरीर की पूरी शुद्धि और गर्भाशय को ताकत मिलने के बाद महिलाओं ने बिना किसी तीसरे आईवीएफ के प्राकृतिक रूप से भी गर्भधारण किया है।

नहीं। आयुर्वेद के अनुसार पपीता, अनानास और तिल की तासीर भयंकर गर्म (पित्त वर्धक) होती है। गर्भाशय को शांत और ठंडा रखने के लिए ठंडी और सुपाच्य चीज़ें खानी चाहिए।

बिल्कुल। स्वस्थ 'बीज' के लिए स्पर्म की क्वालिटी भी शानदार होनी चाहिए। पुरुषों को भी 3 महीने तक अश्वगंधा, कौंच बीज और शिलाजीत का सेवन करना चाहिए ताकि भ्रूण फौलादी बन सके।

बिल्कुल नहीं। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ शरीर को कोई कृत्रिम हार्मोन नहीं देतीं, बल्कि शरीर को अंदर से इतना ताकतवर बनाती हैं कि वह अपने हार्मोन्स खुद सही मात्रा में बना सके। यह 100% सुरक्षित और प्राकृतिक है।

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