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Anxiety की दवा से नींद आती है पर सुबह सुस्ती —Trade-off का हल

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 09 May, 2026
  • category-iconUpdated on 09 Jun, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon5062

रात के 2 बज रहे हैं, दिमाग में विचारों का एक ऐसा तूफान चल रहा है जिसे शांत करना आपके बस में नहीं है। एंग्जायटी Anxiety ने आपकी रातों की नींद छीन ली है। थक हारकर आप वह एंटी-एंग्जायटी पिल या नींद की गोली Sedative लेते हैं। गोली अपना काम करती है और आपको एक भारी नींद के आगोश में धकेल देती है। लेकिन जब सुबह अलार्म बजता है, तो कहानी बदल जाती है। शरीर टूट रहा होता है, सिर भारी रहता है, आँखों में जलन होती है और दिमाग के आगे एक धुंध Brain Fog सी छाई रहती है।

यह है वह कड़वा Trade-off या समझौता रात की नींद के बदले दिन भर की ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता की बलि चढ़ाना। आप सिर्फ शारीरिक रूप से उठते हैं, लेकिन आपका दिमाग दोपहर तक सोया ही रहता है। इस हैंगओवर को रोज़ाना चाय या कॉफी के सहारे खींचना कोई इलाज नहीं है। जब एंग्जायटी की दवाएं आपको शांत करने के बजाय सुन्न और ज़ॉम्बी जैसा महसूस कराने लगें, तो समझ लीजिए कि आपके शरीर का नर्वस सिस्टम एक कृत्रिम दबाव Artificial suppression के बोझ तले दब रहा है।

एंग्जायटी की दवाओं के बाद यह सुबह की सुस्ती Morning Grogginess शरीर में क्या संकेत देती है?

एंग्जायटी कम करने वाली दवाइयां आपके दिमाग को रिलैक्स नहीं करतीं, बल्कि वे आपके सेंट्रल नर्वस सिस्टम CNS को डिप्रेस धीमा कर देती हैं। जब सुबह यह सुस्ती हावी होती है, तो शरीर ये अलार्म बजा रहा होता है:

  • केमिकल हैंगओवर Chemical Hangover: इन दवाओं के सिंथेटिक रसायन कई घंटों तक आपके खून और दिमाग में मौजूद रहते हैं। आपका लिवर यकृत रात भर इन भारी रसायनों को पचाने और बाहर निकालने में संघर्ष करता है, जिससे सुबह भारीपन महसूस होता है।
  • प्राकृतिक नींद के चक्र REM Sleep का टूटना: गोलियों से आने वाली नींद हीलिंग स्लीप नहीं होती। यह आपको बेहोशी जैसी स्थिति में डालती है, जिसमें दिमाग के रिपेयर होने वाला REM Rapid Eye Movement स्लीप साइकिल बाधित होता है। यही कारण है कि 8 घंटे सोने के बाद भी आप थके रहते हैं।
  • तमो गुण Tamas का हावी होना: आयुर्वेद के अनुसार, ये भारी दवाइयां शरीर में तम अंधकार, सुस्ती, और जड़ता को बहुत अधिक बढ़ा देती हैं। इससे प्राण ऊर्जा Vitality नीचे गिर जाती है।
  • नसों और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का धीमा होना: ये दवाएं दिमागी सिग्नल्स को धीमा करती हैं। सुबह उठने पर भी वह सिग्नल्स अपनी सामान्य गति Alertness में वापस नहीं आ पाते।

एंग्जायटी और दवा से होने वाली यह सुस्ती किन प्रकारों में सामने आती है?

हर व्यक्ति का शरीर इन दवाओं पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह केमिकल सुस्ती शरीर के दोषों के आधार पर तीन मुख्य प्रकारों में देखी जा सकती है:

  • वात-प्रधान सुस्ती: इस स्थिति में आप रात को दवा लेकर सो तो जाते हैं, लेकिन नींद बहुत उथली होती है। सुबह उठने पर शरीर में भयंकर रूखापन, घबराहट और एक अजीब सा डर Fear बना रहता है। ऐसा लगता है जैसे दिमाग हवा में तैर रहा हो और ज़मीन से जुड़ाव महसूस नहीं होता।
  • पित्त-प्रधान सुस्ती: दवा का भारीपन आपके लिवर में गर्मी Heat पैदा कर देता है। सुबह उठते ही आप तरोताज़ा होने के बजाय बहुत अधिक चिड़चिड़े Irritated और गुस्से में रहते हैं। आँखों में जलन रहती है और छोटी-छोटी बातों पर झल्लाहट होती है।
  • कफ-प्रधान सुस्ती: यह सबसे आम स्थिति है। भारी तमो गुण के कारण शरीर में कफ दोष हावी हो जाता है। सुबह बिस्तर छोड़ने का बिल्कुल मन नहीं करता, हाथ-पैरों में भारीपन रहता है और दोपहर तक दिमाग काम ही नहीं करता Brain Fog। इंसान हमेशा क्रोनिक फटीग Chronic fatigue से घिरा रहता है

क्या आपके शरीर में भी दवाओं के साइड इफेक्ट्स और नर्व डैमेज के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

यह सुस्ती रातों-रात आपकी ऊर्जा नहीं चूसती। यह केमिकल निर्भरता बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाती है। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • दिमागी धुंध Brain Fog: सुबह ऑफिस में काम करते समय फोकस न कर पाना, छोटी-छोटी बातें भूल जाना और फैसले लेने में दिमाग का सुन्न महसूस होना
  • इमोशनल ब्लंटिंग Emotional Blunting: ऐसा महसूस होना कि आप न तो बहुत खुश हो पा रहे हैं और न ही दुखी। आपकी भावनाएं सुन्न सी हो गई हैं और आप एक रोबोट की तरह दिन काट रहे हैं।
  • पाचन तंत्र का बिगड़ना: कब्ज़ रहना, एसिडिटी और बिना कुछ खाए भी पेट फूला हुआ Bloated महसूस होना, क्योंकि दवाइयों ने आंतों की गति को धीमा कर दिया है।
  • दिन भर जम्हाई आना और कमज़ोरी: रात में 8-9 घंटे सोने के बावजूद दिन भर आलस रहना और बार-बार बिस्तर पर लेटने की इच्छा होना।

इस सुस्ती को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

एंग्जायटी और सुस्ती के इस चक्रव्यूह से निकलने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो उनके नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से डैमेज कर देते हैं:

  • कॉफी Caffeine पर निर्भरता: सुबह की सुस्ती भगाने के लिए 3-4 कप स्ट्रॉन्ग कॉफी पीना। इससे सुस्ती तो थोड़ी देर के लिए भागती है, लेकिन कैफीन वात दोष को भड़का देता है, जिससे अगली रात की एंग्जायटी और भयानक हो जाती है।
  • दवा की डोज़ खुद बढ़ाना या छोड़ना: जब दवा काम करना कम कर देती है तो खुद से डोज़ बढ़ा लेना, या फिर साइड-इफेक्ट्स से डरकर अचानक दवा छोड़ देना Cold Turkey, जिससे गंभीर विड्रॉल Withdrawal लक्षण आते हैं।
  • दिन में लंबे समय तक सोना: रात की दवा की खुमारी उतारने के लिए दिन में घंटों सोना, जिससे बायोलॉजिकल क्लॉक Circadian Rhythm पूरी तरह तबाह हो जाती है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इसे ठीक न किया जाए, तो यह कृत्रिम नींद और सुस्ती आगे चलकर गंभीर मेमोरी लॉस Memory Loss, डिप्रेशन Depression और लिवर टॉक्सिसिटी का भयंकर रूप ले लेती है।

आयुर्वेद एंग्जायटी, नींद की गोलियों के असर और सुस्ती को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे एंग्जायटी डिसऑर्डर और सेडेटिव साइड-इफेक्ट्स Sedative side-effects कहता है, आयुर्वेद उसे मनोवह स्रोतस Mind channels में रुकावट और वात दोष के गंभीर प्रकोप के रूप में गहराई से समझता है।

  • प्राण वात और ओजस का क्षय: एंग्जायटी शरीर में प्राण वात के असंतुलन का परिणाम है। जब आप कृत्रिम दवाओं से इसे ज़बरदस्ती दबाते हैं, तो शरीर की असली जीवन ऊर्जा या ओजस Immunity and Vitality सूखने लगती है।
  • तमो गुण और मज्जा धातु: नींद की गोलियां आपके दिमाग मज्जा धातु पर तम अंधकार का लेप चढ़ा देती हैं। जब तक यह लेप हटता नहीं, तब तक मन में सत्व प्रकाश और स्पष्टता नहीं आ पाता, और यही कारण है कि आप सुबह सुस्त महसूस करते हैं।
  • जठराग्नि की अनदेखी: एंग्जायटी के मरीज़ों का पाचन अग्नि अक्सर खराब रहता है। दवाइयों की गर्मी से आम Toxins बनता है, जो रक्त के साथ मिलकर दिमागी धुंध Brain Fog को और भी ज़्यादा भड़का देता है।

दिमागी सुस्ती मिटाने और वात शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके दिमाग को थका भी सकता है और उसे दोबारा ऊर्जावान भी कर सकता है। एंग्जायटी की दवाओं से होने वाली सुस्ती से बचने और मन को शांत करने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - सत्व बढ़ाने वाले और वात शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - तम और एंग्जायटी बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, साबूदाना, दलिया। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, रूखे बिस्कुट, बासी खाना।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (दिमाग के लिए सर्वश्रेष्ठ), ऑलिव ऑयल, बादाम रोगन। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, जंक फूड का फैट।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, पेठा (Ash gourd), कद्दू, परवल (सभी अच्छी तरह पकी हुई)। कच्चा सलाद (वात बढ़ाता है), डिब्बाबंद सब्ज़ियां, भारी राजमा।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, मीठे सेब, पपीता, मुनक्का। बहुत खट्टे फल, बिना मौसम के फल, बाज़ार के प्रिजर्व्ड स्नैक्स।
पेय पदार्थ (Beverages) रात में अश्वगंधा और जायफल वाला गुनगुना दूध, नारियल पानी, सौंफ की चाय। बहुत ज़्यादा कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स, शराब (Alcohol), कोल्ड ड्रिंक्स।

दिमाग को प्राकृतिक शांति और ऊर्जा देने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी हैंगओवर या सुस्ती के एंग्जायटी को जड़ से खत्म करते हैं और दिमाग को दोबारा ज़िंदा कर देते हैं:

  • जटामांसी Jatamansi: यह जड़ी-बूटी नींद की गोलियों का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प है। यह दिमाग को बिना सुन्न किए गहरी और सुकून भरी नींद लाती है, और सुबह आपको एकदम फ्रेश महसूस कराती है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने और तनाव Cortisol को गिराने के लिए यह एक अद्भुत रसायन है। यह दिन में ऊर्जा देता है और रात में अच्छी नींद।
  • ब्राह्मी Brahmi: जब एंग्जायटी के कारण दिमाग हमेशा गर्म और ओवरथिंकिंग Overthinking का शिकार रहता है, तो ब्राह्मी नर्वस सिस्टम को जादुई शांति और फौलादी ठंडक प्रदान करती है।
  • शंखपुष्पी Shankhpushpi: दिमागी धुंध Brain Fog और मेमोरी लॉस को खत्म करने के लिए शंखपुष्पी बेहतरीन काम करती है। यह सुबह की मानसिक सुस्ती को तुरंत तोड़ती है।
  • तगर Tagar: यह वात दोष को तुरंत शांत करके नसों की अकड़न को खोलता है और शरीर को एक गहरी, प्राकृतिक विश्राम की अवस्था में ले जाता है।

नसों को खोलने और दिमागी सुस्ती मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब एंग्जायटी बहुत गहरी हो और शरीर दवाओं के ज़हर से भर चुका हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर और दिमाग को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • शिरोधारा Shirodhara: माथे Third Eye पर औषधीय तेल या काढ़े की लगातार धार गिराने वाली यह थेरेपी एंग्जायटी के लिए रामबाण है। यह ओवर-एक्टिव दिमाग को तुरंत शांत करती है और फील-गुड हार्मोन्स बढ़ाती है, वो भी बिना किसी सुस्ती के।
  • नस्य Nasya: नाक के ज़रिए औषधीय तेल जैसे अणु तेल या गाय का घी डालने की यह थेरेपी सीधे दिमाग के चैनल्स को खोलती है। यह सुबह उठते ही होने वाले सिर के भारीपन और दिमागी धुंध Brain Fog को खींच लेती है
  • पादभ्यंग Padabhyanga: सोने से पहले पैरों के तलवों की औषधीय तेल से की जाने वाली यह मालिश भड़के हुए वात को नीचे की ओर खींचती है, जिससे आपको गोलियों के बिना ही एक गहरी और मीठी नींद आती है।
  • शिरो अभ्यंग Shiro Abhyanga: सिर और गर्दन की विशेष आयुर्वेदिक मालिश जो तनाव के कारण सिकुड़ी हुई नसों को भारी चिकनाई देती है और रक्त संचार को बढ़ाती है।

नर्वस सिस्टम के पूरी तरह रिपेयर होने और सुस्ती खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से केमिकल निर्भरता और भड़के हुए वात के कारण डैमेज हुए नर्वस सिस्टम को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। शरीर से रसायनों का असर कम होने लगेगा। आपको अपनी सुबह में थोड़ा हल्कापन महसूस होगा और प्राकृतिक नींद का अहसास शुरू होगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और मेध्य रसायनों के प्रभाव से तमो गुण कम होने लगेगा। डॉक्टरों की सलाह से आपकी भारी दवाओं की डोज़ सुरक्षित रूप से कम होने लगेगी। दिमागी धुंध Brain Fog लगभग खत्म हो जाएगा।
  • 5-6 महीने: आपका ओजस Ojas पूरी तरह पोषित हो जाएगा और नर्वस सिस्टम रीबूट हो जाएगा। आप बिना किसी गोली और हैंगओवर के एक सामान्य, ऊर्जावान और एंग्जायटी-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

एंग्जायटी और नींद की समस्या के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को तुरंत दबाने के लिए दिमाग को सुन्न करने वाली दवाइयां (Benzodiazepines/SSRIs) देना। वात को शांत करना, 'आम' को पचाना और दिमाग (मज्जा धातु) को प्राकृतिक रूप से पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल मस्तिष्क में केमिकल इम्बैलेंस (Chemical imbalance) मानना। इसे दोषों का असंतुलन, कमज़ोर पाचन और ओजस के क्षय का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल दवाओं पर निर्भरता रहती है, डाइट या मन की शांति पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। सात्विक डाइट, योग (प्राणायाम), सही पोश्चर, और औषधीय तेलों (शिरोधारा) को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर (Long term impact) दवाइयां सुस्ती लाती हैं, आदत (Addiction) डालती हैं और छोड़ने पर लक्षण पहले से भयंकर होकर लौटते हैं। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और नर्वस सिस्टम खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से शांत और ऊर्जावान रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस मानसिक अशांति को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • गंभीर विड्रॉल लक्षण Withdrawal Symptoms: अगर किसी दिन एंग्जायटी की दवा छूट जाने पर आपको पसीने आएं, हाथ कांपने लगें या झटके Seizures आएं।
  • नकारात्मक विचारों का हावी होना: अगर सुबह की सुस्ती के साथ-साथ आपके मन में जीवन खत्म करने Suicidal ideation जैसे गंभीर विचार आने लगें।
  • मेमोरी का पूरी तरह ब्लैंक होना: अगर सुस्ती के कारण आप अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरी बातें, रास्ते या लोगों के नाम पूरी तरह भूलने लगें।
  • अनकंट्रोलेबल पैनिक अटैक: दवाओं के बावजूद अगर आपकी दिल की धड़कन अचानक इतनी बढ़ जाए कि साँस लेना मुश्किल हो जाए।

निष्कर्ष

एंग्जायटी की वजह से रात भर जागना एक भयानक स्थिति है, लेकिन इसका समाधान आपके दिमाग को कृत्रिम रसायनों से सुन्न कर देना नहीं हो सकता। नींद की गोलियां आपके शरीर से एक बहुत बड़ा Trade-off करती हैं वे आपको बेहोश करके रात तो गुज़ार देती हैं, लेकिन आपकी अगली सुबह, आपकी ऊर्जा और आपकी मानसिक स्पष्टता छीन लेती हैं। यह सुबह की सुस्ती कोई मामूली साइड इफेक्ट नहीं है; यह आपके लिवर और नर्वस सिस्टम की चीख है जो इन भारी रसायनों को अब और नहीं सह पा रहे हैं।

इस टॉक्सिक चक्रव्यूह से बाहर निकलें। आपको अपनी रातों की नींद के लिए अपने दिन की ज़िंदगी कुर्बान करने की ज़रूरत नहीं है। अपनी डाइट को सात्विक बनाएं, रात को सोने से पहले कैफीन और स्क्रीन को बंद करें और अपनी नाभि व पैरों के तलवों पर गाय के घी की मालिश करें। जटामांसी, अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी दिव्य जड़ी-बूटियों का हाथ थामें और शिरोधारा थेरेपी से अपने सुलगते हुए दिमाग को प्राकृतिक शांति दें। अपने शरीर को केमिकल्स का गुलाम न बनने दें। एक गहरी, मीठी नींद और ऊर्जा से भरी सुबह पाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

एंग्जायटी की दवाइयां (Sedatives) आपके सेंट्रल नर्वस सिस्टम को धीमा कर देती हैं। इन रसायनों का असर शरीर में कई घंटों तक रहता है। जब आप सुबह उठते हैं, तब भी आपका दिमाग स्लीप मोड में ही होता है, जिससे भयंकर सुस्ती और भारीपन महसूस होता है

नहीं। कॉफी (कैफीन) तुरंत तो आपको जगा देगी, लेकिन यह नर्वस सिस्टम को ट्रिगर करके वात दोष बढ़ाती है। इससे आपकी घबराहट बढ़ेगी और रात में आपको दोबारा एंग्जायटी अटैक आ सकता है। यह एक दुष्चक्र (Vicious cycle) बना देता है।

नींद की गोलियां दिमाग को ज़बरदस्ती सुन्न करके बेहोशी लाती हैं। वहीं, जटामांसी एक प्राकृतिक मेध्य रसायन है जो वात को शांत करके नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करती है। इससे प्राकृतिक हीलिंग स्लीप आती है और सुबह कोई हैंगओवर या सुस्ती नहीं होती।

बिल्कुल नहीं। लंबे समय से चल रही एलोपैथिक दवाओं को अचानक छोड़ने से गंभीर विड्रॉल (Withdrawal) लक्षण आ सकते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर के मार्गदर्शन में हर्बल सपोर्ट के साथ एलोपैथिक दवा की डोज़ को धीरे-धीरे (Tapering) कम किया जाता है।

शिरोधारा में माथे पर औषधीय तेल की लगातार धार गिराई जाती है। यह सीधे मस्तिष्क के केंद्रों (Pineal and Pituitary glands) पर काम करती है, तनाव वाले हार्मोन्स (Cortisol) को गिराती है और बिना कोई दवा खाए दिमाग को गहरी शांति देती है।

हाँ। आयुर्वेद के अनुसार, अपान वात (पेट की गैस) जब ऊपर की ओर चढ़ती है तो वह दिमाग में घबराहट और भारीपन पैदा करती है। अगर पेट साफ नहीं है, तो आम (Toxins) बनता है जो दिमागी सुस्ती (Brain fog) का सबसे बड़ा कारण है।

आधुनिक विज्ञान इसे दिमाग से जोड़ता है, लेकिन आयुर्वेद इसे पूरे शरीर के सिस्टम (पाचन, दोष असंतुलन, और धातु क्षय) की समस्या मानता है। जठराग्नि के कमज़ोर होने और वात के बिगड़ने से ही एंग्जायटी जन्म लेती है।

सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल या टीवी बंद कर दें। गुनगुने दूध में एक चुटकी जायफल या अश्वगंधा मिलाकर पिएं। अपने पैरों के तलवों पर गुनगुने सरसों या तिल के तेल से हल्की मालिश (पादभ्यंग) करें, इससे वात तुरंत शांत होता है

ब्राह्मी नींद की गोली नहीं है, यह एक नर्व टॉनिक है। यह दिमाग की गर्मी और ओवरथिंकिंग को कम करके उसे शांत (Cool) करती है। जब दिमाग शांत होता है, तो नींद अपने आप स्वाभाविक रूप से आने लगती है।

देसी गाय का शुद्ध घी सबसे बेहतरीन है। घी पित्त और वात दोनों को शांत करता है और दिमाग की रूखी हो चुकी नसों को अंदर से चिकनाई (Lubrication) देता है, जिससे एंग्जायटी कम होती है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

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