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अगर सुबह उठते ही ये 5 संकेत हैं तो शरीर ने चेतावनी देना शुरू कर दिया है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह की शुरुआत हमेशा ताज़गी और ऊर्जा से भरी होनी चाहिए। लेकिन अगर बिस्तर से उठते ही आपको अपना शरीर भारी लगता है, जोड़ों में मीठा दर्द होता है या बिना किसी ठोस वजह के गहरी थकान छाई रहती है, तो यह कोई सामान्य बात नहीं है जिसे आप थकावट मान लें।

असल में हमारा शरीर कोई भी बड़ी और गंभीर बीमारी आने से बहुत पहले ही हमें छोटे-छोटे अलार्म देने लगता है। जब हम शरीर की इन शुरुआती चेतावनियों को रोज़मर्रा की भागदौड़ मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, तो शरीर अंदर ही अंदर एक बड़ी और खतरनाक गड़बड़ी का शिकार होने लगता है।

सुबह की थकावट और शरीर के ये संकेत आखिर क्या कहते हैं?

रात की 8 घंटे की गहरी नींद के बाद शरीर के सभी अंगों की मरम्मत (Repair) हो जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा है और आप सुबह उठकर भी थका हुआ महसूस करते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि आपके शरीर का अंदरूनी सिस्टम फेल हो रहा है और कहीं न कहीं ज़हरीला कचरा जमा है।

  • धीमा मेटाबॉलिज़्म और आम का संचय: जब रात का खाया हुआ भोजन सही से नहीं पचता, तो वह आंतों में सड़कर 'आम' (Toxins) बनाता है। यह आम पाचन संबंधी समस्याओं (Digestive problems) को जन्म देता है और सुबह शरीर को भारी कर देता है।
  • हॉर्मोन्स का बिगड़ता खेल: सुबह उठते ही चिड़चिड़ापन और उदासी दरअसल आपके एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine system) में हो रही गड़बड़ी और कॉर्टिसोल (Stress hormone) के बढ़ने का स्पष्ट इशारा है।
  • कमज़ोर नर्वस सिस्टम: नसों तक सही पोषण न पहुँचने के कारण रात भर आराम करने के बाद भी नसें तनाव में रहती हैं, जो आगे चलकर नसों की कमज़ोरी (Nerve weakness) का एक बहुत बड़ा कारण बनता है।
  • दोषों का भड़कना: सुबह का समय आयुर्वेद के अनुसार कफ का होता है, लेकिन जब वात और पित्त अपने स्थान से भटक जाते हैं, तो सुबह उठते ही शरीर में जकड़न और सीने में जलन जैसी शिकायतें शुरू हो जाती हैं।

सुबह के समय दिखने वाले ये चेतावनी संकेत किन प्रकारों में बँटे हैं?

शरीर के ये छोटे-छोटे अलार्म हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। आपकी अपनी प्रकृति और शरीर में बिगड़े हुए दोषों के अनुसार, ये संकेत मुख्य रूप से तीन अलग-अलग श्रेणियों में देखे जा सकते हैं:

  • वात-प्रधान चेतावनी: इस स्थिति में व्यक्ति को सुबह उठते ही शरीर में भयंकर जकड़न, हड्डियों में 'कट-कट' की आवाज़ और अत्यधिक मानसिक बेचैनी महसूस होती है। यह रूखापन वात दोष कम करने (Reducing Vata dosha) के उपाय न करने पर और भड़क जाता है।
  • पित्त-प्रधान चेतावनी: ऐसे लोगों को सुबह उठते ही मुँह में बहुत कड़वापन, सीने में भारी जलन (Acidity) और हथेलियों व तलवों से आग निकलने जैसी गर्माहट महसूस होती है, जो लिवर की कमज़ोरी को दर्शाता है।
  • कफ-प्रधान चेतावनी: इस प्रकार में शरीर में इतना भारीपन होता है कि इंसान बिस्तर से उठ ही नहीं पाता। पूरा दिन आलस, सुस्ती, सिर में कफ जमा होना और वज़न बढ़ने (Weight gain) की लगातार शिकायत बनी रहती है।

सुबह उठते ही दिखने वाले वो 5 भयंकर संकेत क्या हैं?

अगर आपको रोज़ सुबह बिस्तर छोड़ते समय अपने शरीर में नीचे दिए गए ये 5 संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो अब आपको तुरंत सतर्क हो जाने की ज़रूरत है:

  • 1. कमर और पीठ में भयंकर जकड़न: बिस्तर से उठते समय कमर सीधी करने में दर्द होना और कुछ कदम चलने के बाद सुबह पीठ में जकड़न (Morning back stiffness) का हल्का होना, रीढ़ की हड्डी में लुब्रिकेशन खत्म होने का संकेत है।
  • 2. पेट का साफ न होना और भारीपन: सुबह उठते ही फ्रेश न हो पाना और घंटों टॉयलेट में बैठे रहना। यह पुरानी कब्ज़ (Constipation) आंतों में भयंकर वात पैदा करती है।
  • 3. बिना वजह की गहरी थकान (Chronic Fatigue): 8-9 घंटे सोने के बाद भी ऐसा लगना कि नींद पूरी नहीं हुई है और पूरे शरीर में टूटन रहना, यह क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) लिवर की सुस्ती का इशारा है।
  • 4. हाथ-पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी: सुबह उठने पर उंगलियों का मुड़ना मुश्किल होना या पैरों में झुनझुनी (Tingling sensation) महसूस होना, नसों में खराब ब्लड सर्कुलेशन को दर्शाता है।
  • 5. मुँह का स्वाद बिगड़ना और गैस: सुबह उठते ही डकारें आना, पेट फूलना और पेट में गैस (Gas and bloating) बने रहना जठराग्नि (Digestive fire) के पूरी तरह बुझ जाने का संकेत है।

इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करने पर होने वाली गलतियाँ और जटिलताएँ

इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर इन छोटे लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं और ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर के लिए धीमा ज़हर बन जाते हैं।

लोग अक्सर इनमें क्या बड़ी गलतियाँ करते हैं?

  • खाली पेट चाय या कॉफी पीना: सुबह उठते ही थकान मिटाने के लिए तेज़ कैफीन (Caffeine) लेना आंतों को सुखा देता है और शरीर में तनाव (Stress) के हॉर्मोन को और ज़्यादा बढ़ा देता है।
  • दर्द की गोलियों का सेवन: सुबह की जकड़न मिटाने के लिए रोज़ाना पेनकिलर खाना, जो धीरे-धीरे पाचन और मस्तिष्क (Digestion and brain) के कनेक्शन को पूरी तरह डैमेज कर देता है।

भविष्य में इससे क्या खतरनाक जटिलताएँ पैदा होती हैं?

  • इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance): अगर सुबह की इस थकान और सुस्ती को न रोका जाए, तो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) पैदा हो जाता है, जो आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का रूप ले लेता है।
  • सर्वाइकल और नसों का डैमेज: सुबह के समय गर्दन और पीठ की जकड़न को इग्नोर करने से यह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस (Cervical spondylosis) और स्थायी स्लिप डिस्क (Slip Disc) में बदल जाता है।

आयुर्वेद सुबह दिखने वाले इन लक्षणों और उनके मूल कारण को कैसे देखता है?

आधुनिक चिकित्सा जहाँ इन सभी लक्षणों को अलग-अलग विटामिन्स की कमी या बढ़ती उम्र का प्रभाव मानती है, वहीं आयुर्वेद इन्हें शरीर की 'अग्नि' और 'आम' के विज्ञान से गहराई से समझता है।

  • जठराग्नि की भयंकर मंदता: आयुर्वेद मानता है कि सारी बीमारियों की शुरुआत पेट से होती है। जब जठराग्नि कमज़ोर होती है, तो भोजन रस धातु में नहीं बदल पाता और शरीर सुबह बिल्कुल ऊर्जाविहीन (Energy-less) महसूस करता है।
  • स्रोतोरोध (Channels Blockage): हमारे शरीर में ऊर्जा पहुँचाने वाले अनगिनत चैनल (स्रोतस) होते हैं। जब गलत खानपान से चिपचिपा 'आम' इन स्रोतस को ब्लॉक कर देता है, तो रात भर शरीर की रिपेयरिंग नहीं हो पाती।
  • अपान वात का ऊपर उठना: पेट के निचले हिस्से में रहने वाला अपान वात जब कब्ज़ के कारण ब्लॉक होता है, तो वह ऊपर की ओर जाकर छाती और सिर में भारीपन पैदा करता है, जिससे एंग्जायटी और पैनिक (Anxiety and panic) जैसी स्थितियाँ सुबह के समय ट्रिगर हो जाती हैं।

शरीर को चेतावनी संकेतों से उबारने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने शरीर को सुबह की इस भयंकर जकड़न और थकावट से बाहर निकालने के लिए आपको अपने भोजन को ही अपनी सबसे बड़ी दवा बनाना होगा। एक बेहतरीन आयुर्वेदिक डाइट (Ayurvedic diet) दोषों को तुरंत संतुलित करती है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - ऊर्जा देने वाले और स्रोतस खोलने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - शरीर को सुखाने और सुस्त करने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ, रागी, ओट्स, ज्वार, मूंग दाल की खिचड़ी (देसी घी के साथ)। अत्यधिक मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, और भारी राजमा या छोले।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, पालक, परवल, मेथी (हल्के मसालों के साथ पकी हुई)। कच्चा सलाद (रात के समय), डिब्बाबंद सब्ज़ियाँ, भारी गोभी और कटहल।
फल (Fruits) पपीता, सेब, अनार, अमरूद, और ताज़े मौसमी फल (दोपहर के समय)। कोल्ड स्टोरेज के फल, बिना मौसम के फल और पैकेटबंद फलों के जूस।
वसा और बीज (Fats & Seeds) देसी गाय का शुद्ध घी, तिल का तेल, भीगे हुए बादाम, अलसी के बीज। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, या बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ (Beverages) सुबह उठकर जीरे और धनिया का गर्म पानी, ताज़ा मट्ठा, हल्दी वाला दूध। सुबह खाली पेट चाय/कॉफी, बर्फ का ठंडा पानी, और कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स।

नसों और अंगों को दोबारा रिपेयर करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई अद्भुत रसायन दिए हैं, जो कमज़ोर हो चुके अंगों को वापस फौलादी ताकत देते हैं और शरीर की अंदरूनी मशीनरी को पूरी तरह से रीबूट (Reboot) कर देते हैं।

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): रात को नींद न आना और सुबह थके हुए उठने की समस्या में अश्वगंधा (Ashwagandha) नर्वस सिस्टम को ताकत देता है और कॉर्टिसोल (स्ट्रेस) को चमत्कारिक रूप से कम करता है।
  • त्रिफला (Triphala): पेट को साफ रखने और आंतों से भयंकर वात को निकालने के लिए रोज़ रात को हल्के गर्म पानी के साथ त्रिफला (Triphala) का सेवन करना सबसे सुरक्षित और असरदार उपाय है।
  • गिलोय (Giloy): शरीर में कहीं भी पुरानी सूजन (Inflammation) हो या हल्का-हल्का बुखार महसूस होता हो, तो गिलोय (Giloy) रक्त को गहराई से शुद्ध करके नई ऊर्जा भर देती है।
  • ब्राह्मी (Brahmi): सुबह उठते ही अगर सिर में भारीपन और ब्रेन फॉग (Brain fog) रहता है, तो ब्राह्मी (Brahmi) दिमाग की नसों को ठंडक और अद्भुत शांति प्रदान करती है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): पित्त के भड़कने से होने वाली सुबह की गर्माहट और त्वचा के रोगों को शांत करने के लिए मंजिष्ठा (Manjistha) एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है।

शरीर को डिटॉक्स करने और वात-पित्त शांत करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब शरीर में वात और आम (कचरा) बहुत गहराई तक नसों में जम चुका हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत नया जीवन देती हैं।

  • अभ्यंग मालिश (Abhyanga): शुद्ध वात-शामक औषधीय तेलों (जैसे तिल या महानारायण तेल) से की जाने वाली यह संपूर्ण अभ्यंग मालिश (Abhyanga massage) शरीर की जकड़न को तुरंत खोल देती है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है।
  • विरेचन थेरेपी (Virechana): यह लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग प्रक्रिया है। विरेचन (Virechana) के ज़रिए शरीर से अत्यधिक पित्त और ज़हरीले टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है।
  • शिरोधारा (Shirodhara): माथे के मध्य में औषधीय तेल या मट्ठे की लगातार धारा गिराने की यह शिरोधारा (Shirodhara) प्रक्रिया भयंकर मानसिक तनाव और एंग्जायटी को जादुई रूप से शांत करती है।
  • कटि बस्ती (Kati Basti): अगर आपको रोज़ सुबह उठते ही कमर में भयंकर जकड़न और दर्द महसूस होता है, तो कमर पर तेल रोककर की जाने वाली कटि बस्ती (Kati Basti) से आपको तुरंत और स्थायी आराम मिलता है।

शरीर को पूरी तरह डिटॉक्स और रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

सालों से जमा हुए कचरे (Toxins) को बाहर निकालने और अंगों को दोबारा रिपेयर होने में थोड़ा अनुशासित और लगातार समय चाहिए होता है।

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपके पेट का भारीपन दूर होगा और कब्ज़ टूटेगी। आपको सुबह उठते ही शरीर में एक नया हल्कापन और ऊर्जा महसूस होनी शुरू हो जाएगी।
  • 3-4 महीने: नसों और हड्डियों में जमा हुआ वात शांत होगा। सुबह की जकड़न खत्म हो जाएगी, जोड़ों की 'कट-कट' बंद हो जाएगी और आपकी नींद की क्वालिटी में भारी सुधार आएगा।
  • 5-6 महीने: आपका मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह से रीबूट हो जाएगा। आपका शरीर प्राकृतिक रूप से खुद को रात भर में हील (Heal) करना सीख जाएगा और आप पूरी ताज़गी के साथ एक स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

शरीर की इन शुरुआती चेतावनियों को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है। आइए इसे गहराई से समझते हैं:

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य लक्षणों को दबाने के लिए पेनकिलर्स, कृत्रिम विटामिन्स और नींद की गोलियाँ देना। शरीर की जठराग्नि को बढ़ाना, 'आम' को बाहर निकालना और स्रोतस (Channels) को खोलना।
शरीर को देखने का नज़रिया हर दर्द और थकावट को अलग-अलग अंगों (जैसे हड्डी या दिमाग) की अलग बीमारी मानना। पूरे शरीर को एक सिस्टम मानना जहाँ पेट (Gut) की गड़बड़ी से पूरी नसों और हड्डियों पर असर पड़ता है।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर बहुत अधिक ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल सप्लीमेंट्स खाने पर ध्यान होता है। व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार दोष-शामक आहार और स्वस्थ दिनचर्या को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर थकावट और जकड़न तुरंत वापस आ जाती है। शरीर अंदर से इतना फौलादी हो जाता है कि वह प्राकृतिक रूप से खुद की मरम्मत (Repair) करना सीख जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद से इन सभी शुरुआती चेतावनियों को पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और खतरनाक संकेत दिखें, तो आपको तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • सुबह उठते ही सीने में भयंकर जकड़न या दर्द: अगर सुबह उठते ही बायीं तरफ सीने में भारीपन हो और दर्द बांह तक जा रहा हो, तो यह दिल की समस्या का गंभीर इशारा हो सकता है।
  • बिना किसी डाइट के अचानक बहुत ज़्यादा वज़न गिरना: अगर आप सामान्य खा रहे हैं, फिर भी एक ही महीने में आपका वज़न बहुत तेज़ी से कम हो रहा है, तो यह गंभीर मेटाबॉलिक विकार का संकेत है।
  • हाथ-पैरों में लकवे (Paralysis) जैसी सुन्नता: अगर झुनझुनी इतनी बढ़ जाए कि आपको अपना हाथ या पैर महसूस ही न हो और चलने में संतुलन बिगड़ने लगे।
  • मल में खून आना या भयंकर डायरिया: अगर कब्ज़ और डायरिया (Constipation and diarrhea) लगातार बना रहे हैं और मल के साथ खून आने लगे, तो इसे केवल एसिडिटी मानकर घर पर इलाज न करें।

निष्कर्ष

हमारा शरीर एक बेहद समझदार मशीन है जो अचानक रातों-रात खराब नहीं होती। सुबह उठते ही शरीर में होने वाली जकड़न, भयंकर थकावट, पैरों की झुनझुनी और मुँह का कड़वापन दरअसल शरीर की वो चीखें हैं जिन्हें हम कॉफी के घूँट और दर्द की गोलियों से दबा देते हैं। जब आप इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो आप शरीर में जमा हो रहे 'आम' (Toxins) को नसों और जोड़ों में घर बनाने का पूरा मौका देते हैं, जो आगे चलकर थायरॉयड, डायबिटीज और सर्वाइकल जैसी बड़ी बीमारियों का रूप ले लेता है। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें और अपने शरीर की आवाज़ सुनें। अपनी जठराग्नि को सुधारें, जंक फूड को कूड़ेदान में डालें और शुद्ध आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाएं। अश्वगंधा, त्रिफला और गिलोय जैसी दिव्य जड़ी-बूटियों को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं और पंचकर्म से अपने शरीर के रोम-रोम को शुद्ध करें। अपने शरीर को फिर से ऊर्जा से भरने और भविष्य की बड़ी बीमारियों से हमेशा के लिए सुरक्षित रहने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

सुबह का सिरदर्द अक्सर रात में अपच (Indigestion) और पेट में बनने वाली गैस के कारण होता है। जब आंतों में अपान वायु ब्लॉक हो जाती है, तो वह ऊपर की ओर चढ़ती है और सिर की नसों में भारी तनाव व दर्द पैदा करती है।

बिल्कुल। आयुर्वेद के अनुसार, दिन में बहुत देर तक सोने से शरीर में कफ दोष और आम (Toxins) बहुत तेज़ी से बढ़ता है। यही बढ़ा हुआ कफ शरीर के स्रोतस (Channels) को ब्लॉक कर देता है, जिससे इंसान ज़्यादा सोने के बाद भी सुस्त और थका हुआ उठता है।

यह वात बढ़ने और शरीर में यूरिक एसिड या अन्य ज़हरीले तत्वों के जमा होने का साफ संकेत है। रात भर पैर आराम की स्थिति में रहते हैं, और सुबह ज़मीन पर पैर रखते ही वह सारा जमा हुआ वात और कचरा एड़ी की नसों में चुभने लगता है।

नहीं। सुबह उठते ही फ्रिज का ठंडा पानी पीने से जठराग्नि (Digestive fire) पूरी तरह बुझ जाती है और शरीर में वात और कफ भड़क जाता है। सुबह हमेशा हल्का गुनगुना पानी (हो सके तो जीरा या धनिया उबालकर) ही पीना चाहिए।

इसे आयुर्वेद में संधिगत वात या गठिया की शुरुआत माना जाता है। जब रात भर जोड़ों में प्राकृतिक चिकनाई (Lubrication) नहीं पहुँच पाती है, तो हड्डियाँ सूखी रह जाती हैं और सुबह उठने पर भयंकर अकड़न महसूस होती है।

हाँ, अगर आप देसी गाय के हल्के गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध घी डालकर रात को सोते समय पीते हैं, तो यह आंतों की खुश्की (Dryness) को खत्म करता है और सुबह पेट बिल्कुल साफ और हल्का हो जाता है।

मुँह का लगातार कड़वा रहना लिवर (Liver) पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव और शरीर में पित्त (गर्मी) के बहुत अधिक बढ़ जाने का संकेत है। यह अक्सर देर रात तक भारी खाना खाने या बाहर का मसालेदार भोजन करने से होता है।

गद्दा एक कारण हो सकता है, लेकिन अगर गद्दा बदलने के बाद भी थकावट और कमर की जकड़न नहीं जा रही है, तो असली कारण आपकी रीढ़ की हड्डी में बढ़ा हुआ वात दोष और अस्थि धातु की अंदरूनी कमज़ोरी है।

आयुर्वेद के अनुसार, लंबे समय तक तेज़ खट्टी और अम्लीय चीज़ें (जैसे सिरका) खाली पेट लेने से शरीर में पित्त बहुत भड़क जाता है और आंतों की परत कमज़ोर हो सकती है। इसकी जगह आंवला या एलोवेरा जूस ज़्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है।

सुबह उठते ही सबसे पहले अपनी हथेलियों को रगड़कर आँखों पर रखें, फिर एक गिलास हल्का गर्म पानी पिएं। इसके बाद कम से कम 15-20 मिनट योग या हल्की स्ट्रेचिंग करें ताकि पूरे शरीर में ब्लॉक हुआ ब्लड सर्कुलेशन और प्राण वायु तुरंत एक्टिव हो जाए।

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