Diseases Search
Close Button
 
 

Jamun खाने से blood sugar पर क्या असर पड़ सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर जब किसी को डायबिटीज (Diabetes) या हाई ब्लड शुगर की शिकायत होती है, तो सबसे पहले उसके मीठा खाने पर पूरी तरह पाबंदी लग जाती है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जामुन (Black Plum) जैसी मीठी और कसैली चीज़ को शुगर के मरीज़ों के लिए किसी वरदान की तरह क्यों माना जाता है? दरअसल, प्रकृति ने कुछ फलों को ऐसे बनाया है जो सिर्फ स्वाद ही नहीं देते, बल्कि शरीर के अंदर जाकर एक बेहतरीन दवाई का काम करते हैं। जब शरीर में इंसुलिन (Insulin) ठीक से नहीं बन पाता या सही से काम नहीं करता, तो खून में शुगर बेलगाम होकर तैरने लगती है। ऐसे में सिर्फ कड़वी दवाइयाँ खा लेना ही इकलौता रास्ता नहीं है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि जामुन कोई आम फल नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के कमज़ोर पड़े मेटाबॉलिज़्म को एक सही दिशा देने का काम करता है।

जामुन खाने से शरीर का ग्लूकोज़ कैसे कम होता है? 

हमारे शरीर में पैंक्रियाज (Pancreas) नाम का एक अंग होता है जिसका मुख्य काम इंसुलिन बनाना है। जब आप जामुन खाते हैं, तो इसके अंदर मौजूद जम्बोलिन (Jamboline) और जम्बोसिन (Jambosine) नाम के खास प्राकृतिक कंपाउंड सीधे तौर पर आपके पाचन तंत्र पर असर डालते हैं। ये जादुई तत्व आपके द्वारा खाए गए भोजन के स्टार्च को तुरंत शुगर में बदलने से रोक देते हैं। आसान भाषा में कहें तो, जामुन आपके शरीर में शुगर के घुलने की स्पीड को एकदम धीमा कर देता है। जब शुगर खून में धीरे-धीरे मिलती है, तो अचानक से होने वाला शुगर स्पाइक रुक जाता है और आपके शरीर को उस ग्लूकोज़ को इस्तेमाल करने का पूरा समय मिल जाता है।

क्या फल होने की वजह से जामुन की मिठास नुकसान कर सकती है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई लोग यह सोचकर डर जाते हैं कि हर मीठी चीज़ शुगर बढ़ाती है, लेकिन जामुन के मामले में नियम थोड़ा अलग है। जामुन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) बहुत कम होता है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि इसे खाने के बाद खून में एकदम से शुगर का उछाल नहीं आता। इसमें फलों वाली नेचुरल मिठास (फ्रक्टोज़) तो होती है, लेकिन साथ ही इसमें इतना सारा फाइबर और पानी होता है जो उस मिठास को खून में तेज़ी से घुलने ही नहीं देता। अगर आप इसे सही मात्रा में खाते हैं, तो यह आपकी मीठा खाने की तलब भी बुझाता है और शरीर को ज़रा भी नुकसान नहीं पहुँचाता।

शरीर के अंदर जाने के बाद जामुन का क्या-क्या सकारात्मक असर दिखता है?

जब एक शुगर का मरीज़ नियमित रूप से जामुन खाता है, तो शरीर के अंदर कई फायदेमंद बदलाव एक साथ होने लगते हैं:

  • इंसुलिन का बेहतर होना: जामुन पैंक्रियाज की सुस्त पड़ी सेल्स को एक्टिव करता है, जिससे प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का उत्पादन सुधरता है।
  • बार-बार पेशाब आने में कमी: हाई ब्लड शुगर की वजह से लगने वाली अत्यधिक प्यास और बार-बार यूरिन आने की थका देने वाली समस्या को जामुन काफी हद तक कंट्रोल करता है।
  • एनर्जी लेवल बढ़ना: यह खून में मौजूद शुगर को एनर्जी (ऊर्जा) में बदलने का काम तेज़ कर देता है, जिससे दिनभर रहने वाली थकान और कमज़ोरी दूर होती है।
  • खून की सफाई: जामुन में मौजूद आयरन और विटामिन सी खून को साफ करते हैं और शरीर की रोगों से लड़ने वाली ताकत (इम्यूनिटी) बढ़ाते हैं।

क्या जामुन खाने का मतलब है कि डायबिटीज पूरी तरह खत्म हो गई?

अगर आप रोज़ाना जामुन खा रहे हैं और सोच रहे हैं कि अब शुगर की कोई टेंशन नहीं, तो इस गलतफहमी में बिल्कुल न रहें। यह आपके शरीर को सपोर्ट करने का एक बेहतरीन प्राकृतिक तरीका है, लेकिन यह किसी बड़ी लापरवाही का बहाना नहीं होना चाहिए:

  • लाइफस्टाइल की अहमियत: अगर आप बाहर का तला-भुना या जंक फूड खा रहे हैं, तो जामुन का असर भी पेट में जाकर शून्य हो जाएगा।
  • शुगर रिवर्सल का भ्रम: केवल जामुन खाने से बरसों पुरानी डायबिटीज रातों-रात गायब नहीं हो जाती, इसके लिए पूरा रूटीन सुधारना पड़ता है।
  • अंगों पर असर: लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर से किडनी और आँखों पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए सिर्फ एक फल के भरोसे इलाज छोड़ देना बहुत खतरनाक हो सकता है।

प्राचीन आयुर्वेद के अनुसार जामुन और मधुमेह का क्या रिश्ता है?

आयुर्वेद के अनुसार, डायबिटीज (जिसे प्राचीन ग्रंथों में 'प्रमेह' या 'मधुमेह' कहा गया है) मुख्य रूप से कफ और वात दोष के बिगड़ने की वजह से होती है। जब शरीर में कफ बढ़ता है, तो वह पाचन की आग को धीमा करके शरीर में चिपचिपाहट बढ़ा देता है। जामुन स्वाद में कसैला और प्रकृति में रूखा होता है। इसका यही कसैलापन शरीर में बढ़े हुए कफ को सोखने और बैलेंस करने का काम करता है। आयुर्वेद मानता है कि जामुन की तासीर ठंडी होती है, लेकिन यह शरीर के अंदर जाकर उन ब्लॉक्ड चैनलों को साफ करता है जहाँ शुगर और फैट जमा हो जाते हैं।

जामुन के अलावा वो कौन सी प्राकृतिक चीज़ें हैं जो शुगर में रामबाण हैं?

प्रकृति ने हमें जामुन के अलावा भी ऐसी कई बेहतरीन चीज़ें दी हैं जिन्हें डाइट में शामिल करने से शरीर को बहुत फायदा होता है:

  • मेथी दाना: यह कार्बोहाइड्रेट के पचने की गति को एकदम धीमा कर देता है। सुबह खाली पेट इसका भीगा हुआ पानी पीना शुगर के लिए बहुत असरदार है।
  • करेला: इसमें चरेंटिन (Charantin) नाम का तत्व होता है जो बिल्कुल हमारे प्राकृतिक इंसुलिन की तरह काम करके ब्लड शुगर को नीचे लाता है।
  • दालचीनी: यह शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाती है, जिससे शुगर खून में पड़े रहने की बजाय आसानी से एनर्जी में बदल जाती है।
  • नीम के पत्ते: ये कड़वे पत्ते खून को साफ करने और शरीर में शुगर के स्तर को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए सबसे पुरानी और भरोसेमंद जड़ी-बूटी माने जाते हैं।

क्या हद से ज़्यादा जामुन खाने से शरीर में कोई नई आफत आ सकती है?

बिलकुल! आप किसी भी फायदेमंद चीज़ को अगर ज़रूरत से ज़्यादा खाएँगे, तो शरीर नुकसान ही झेलेगा। ज़्यादा जामुन खाने पर इंसान का ब्लड शुगर लेवल अचानक से बहुत ज़्यादा नीचे (Hypoglycemia) जा सकता है, जो कि हाई शुगर से भी ज़्यादा खतरनाक और जानलेवा स्थिति है। इसके अलावा, जामुन में विटामिन सी और फाइबर बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है। अगर आप इसे बहुत अधिक मात्रा में खा लेते हैं, तो पेट में भारीपन, गैस, और गले में खराश की परेशानी शुरू हो जाती है। शरीर को जब ज़रूरत से ज़्यादा फाइबर मिलता है, तो उसे पचाने में आँतों को एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे पेट दर्द और कब्ज़ हो सकता है।

हमारी वो आम गलतियां जो जामुन खाने के फायदों पर पानी फेर देती हैं

हम अक्सर जाने-अनजाने में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो इस फल के अच्छे असर को बिल्कुल खत्म कर देता है:

  • जामुन के तुरंत बाद दूध पीना: इससे पेट में भयंकर गैस, एसिडिटी और टॉक्सिन्स बन सकते हैं क्योंकि दोनों की तासीर एक-दूसरे के एकदम उलट होती है।
  • खाली पेट बहुत सारा जामुन खाना: सुबह-सुबह बिल्कुल खाली पेट इसे खाने से कुछ लोगों को पेट में तेज़ मरोड़ या भारीपन की शिकायत हो सकती है।
  • नमक या चाट मसाला ज़्यादा छिड़कना: स्वाद के चक्कर में ज़्यादा नमक डालने से शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और जामुन का असली मेडिकल फायदा कम हो जाता है।
  • भरपेट खाने के तुरंत बाद खाना: खाने के तुरंत बाद इसे खाने से पाचन तंत्र कंफ्यूज़ हो जाता है और शुगर कंट्रोल होने की बजाय गैस की समस्या बढ़ जाती है।
  • बाज़ारू जामुन का जूस पीना: पैकेट वाले जूस में बहुत ज़्यादा प्रिजर्वेटिव्स और छिपी हुई चीनी होती है, जो शुगर के मरीज़ों के लिए सीधे तौर पर नुकसानदेह है।

जामुन खाने के बावजूद शुगर कम न होने की असली वजहें क्या हैं?

कई बार आप सब कुछ सही करते हैं, जामुन भी नियम से खाते हैं, फिर भी आपकी मशीन की रीडिंग कम नहीं होती। इसके पीछे कुछ दूसरी अंदरूनी परेशानियां हो सकती हैं:

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: शरीर में इंसुलिन तो बन रहा है, लेकिन आपकी कोशिकाएं उसका इस्तेमाल करने से मना कर रही हैं, जिससे खून में शुगर वैसे ही बनी रहती है।
  • बहुत ज़्यादा तनाव (Stress): जब आप हर वक्त टेंशन में रहते हैं, तो कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो किसी भी फल या दवा के असर को बेअसर करके शुगर बढ़ा देता है।
  • फैटी लिवर की समस्या: लिवर ग्लूकोज़ को स्टोर करने का काम करता है। अगर लिवर में ही सूजन या फैट जमा है, तो शुगर का मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह बिगड़ जाता है।
  • नींद पूरी न होना: जो लोग रात को ठीक से नहीं सोते, अगले दिन उनका शरीर स्ट्रेस में रहता है और शरीर खुद-ब-खुद ज़्यादा ग्लूकोज़ बनाने लगता है।

क्या घरेलू नुस्खों के चक्कर में अपनी रोज़ की दवाइयाँ छोड़ देना सही है?

जब भी जामुन या किसी आयुर्वेदिक चूर्ण से शुगर थोड़ी सी कंट्रोल होने लगती है, तो कई लोग जोश में आकर अपनी रोज़ की दवाइयाँ अचानक से बंद कर देते हैं। यह एक बहुत ही खतरनाक कदम हो सकता है। आपकी एलोपैथिक दवाइयाँ शरीर में एक सेट पैटर्न पर काम करती हैं। अगर आप रोज़ाना की दवा एकदम से छोड़ देंगे, तो शुगर का स्तर अचानक से इतना भड़क सकता है कि सीधे अस्पताल भागना पड़े। जामुन एक सहायक (Supplement) की तरह है, यह आपकी जीवन रक्षक दवा का रिप्लेसमेंट नहीं है। जब तक डॉक्टर आपकी ब्लड रिपोर्ट्स देखकर खुद दवा कम करने को न कहे, तब तक ऐसा करना शरीर के साथ सीधा खिलवाड़ है।

अपनी रोज़ की डाइट में जामुन को शामिल करने के सबसे स्मार्ट तरीके

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर जामुन का पूरा फायदा अपने शरीर को दे सकते हैं:

  • मिड-मॉर्निंग स्नैक के रूप में: नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच के समय में एक कटोरी ताज़े जामुन खाना सबसे अच्छा होता है, इससे दिनभर की शुगर लेवल मेंटेन रहती है।
  • जामुन की गुठली का पाउडर: जामुन का सीज़न खत्म होने पर इसकी गुठलियों को सुखाकर और पीसकर पाउडर बना लें। रोज़ सुबह गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच लेने से बहुत फायदा होता है।
  • जामुन का सिरका (Vinegar): खाने से पहले जामुन के सिरके को आधे गिलास पानी में मिलाकर पीने से खाना पचने के बाद होने वाला शुगर स्पाइक काफी हद तक रुक जाता है।
  • स्मूदी या छाछ के साथ: अगर आपको इसका कसैलापन सीधा पसंद नहीं है, तो आप इसका पल्प निकालकर इसे छाछ (बटरमिल्क) के साथ ब्लेंड करके भी पी सकते हैं।

ब्लड शुगर को जड़ से कंट्रोल करने के लिए रोज़ की ज़िंदगी में क्या बदलें?

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे लेकिन पक्के बदलाव करके आप जामुन के फायदों को कई गुना बढ़ा सकते हैं:

  • खाने का पोर्शन कंट्रोल करें: एक बार में बहुत सारा ठूँस-ठूँस कर खाने की बजाय, दिन में 4-5 बार थोड़ा-थोड़ा खाएँ ताकि शरीर को उसे पचाने और शुगर को खपाने में आसानी हो।
  • खाने के बाद पैदल चलें: लंच या डिनर के बाद 15-20 मिनट की वॉक ज़रूर करें। इससे आपकी मांसपेशियों को तुरंत एक्स्ट्रा शुगर इस्तेमाल करने का मौका मिल जाता है।
  • पर्याप्त पानी पिएँ: शरीर में पानी की कमी होने से खून गाढ़ा हो जाता है और शुगर की कंसंट्रेशन ज़्यादा दिखने लगती है, इसलिए दिन भर घूँट-घूँट कर पानी पीते रहें।
  • हल्का व्यायाम: रोज़ाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या योग करने से आपका पैंक्रियाज एक्टिव रहता है और शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट भी गलता है।

प्राचीन उपचार पद्धतियों में जामुन का पूरा पेड़ कैसे इस्तेमाल होता है?

आयुर्वेद सिर्फ बीमारी के बाहरी लक्षणों को नहीं दबाता, बल्कि उसके पैदा होने की जड़ तक जाता है। आयुर्वेद यह मानता है कि आपका बढ़ा हुआ शुगर आपके गलत लाइफस्टाइल और कमज़ोर हो चुके पाचन का ही नतीजा है। इसमें जामुन के सिर्फ फल को ही नहीं, बल्कि इसकी गुठली, छाल और पत्तों को भी एक अचूक दवा माना गया है। जामुन की गुठलियों का चूर्ण शरीर की कमज़ोर कोशिकाओं को रिपेयर करता है। डॉक्टर आपकी नाड़ी और दोष (वात, पित्त, कफ) देखकर तय करते हैं कि आपको जामुन किस रूप में, कितनी मात्रा में और किस समय लेना है, जिससे शरीर खुद को प्राकृतिक रूप से हील करना सीख जाए।

शुगर की बीमारी में वो कौन से खतरे के निशान हैं जब सीधे अस्पताल जाना चाहिए?

जामुन खाने या घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी अगर समस्या वैसी ही बनी रहे, या अचानक से कुछ डरावने लक्षण दिखें, तो आपको बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • जब आपका ब्लड शुगर लेवल लगातार 300 mg/dL से ऊपर रहने लगे और कोई भी दवा या परहेज़ असर न कर रहा हो।
  • पैरों में सुन्नपन या लगातार झनझनाहट होने लगे, या फिर पैरों में कोई छोटा सा घाव हो जो हफ्तों से भर ही न रहा हो।
  • आँखों के सामने अचानक से धुंधलापन आ जाए और चीज़ों को फोकस करके देखने में भारी परेशानी महसूस होने लगे।
  • शरीर से एकदम से ठंडा पसीना आए, दिल की धड़कनें बहुत तेज़ हो जाएँ और चक्कर खाकर बेहोशी छाने लगे (यह शुगर लेवल बहुत ज़्यादा गिरने का क्रिटिकल संकेत है)।

आधुनिक मेडिकल साइंस और आयुर्वेद के इलाज में क्या फर्क है?

पहलू बचाव (Prevention) अस्पताल में उपचार (Treatment)
मुख्य फोकस शरीर को गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाना और समस्या को होने से रोकना। गंभीर स्थिति में मरीज को स्थिर करना और जान बचाना।
तरीके पर्याप्त पानी पीना, छाँव में रहना, हल्के कपड़े पहनना और नियमित आराम करना। आवश्यकतानुसार IV फ्लूइड्स, कूलिंग उपाय और अन्य चिकित्सकीय उपचार दिए जाते हैं।
असर का समय नियमित रूप से अपनाने पर हीट एग्जॉशन और डिहाइड्रेशन का जोखिम कम हो सकता है। आपातकालीन स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है।
उपयोग का समय गर्मी में काम करने वाले लोगों के लिए रोज़मर्रा की सावधानी। हीटस्ट्रोक या गंभीर लक्षण दिखाई देने पर।
मुख्य उद्देश्य बीमारी या आपात स्थिति को होने से रोकना। गंभीर स्थिति का उपचार कर स्वास्थ्य को स्थिर करना।

निष्कर्ष:

हमेशा याद रखें कि आपका शरीर एक बहुत ही समझदार और कॉम्प्लेक्स मशीन है। आप जो भी खाते या पीते हैं, वह सीधा आपके खून और सेल्स तक पहुँचता है। इसलिए जामुन को कोई जादू की छड़ी मानकर सिर्फ उसी पर निर्भर रहने की गलती बिल्कुल न करें। शुगर को कंट्रोल करना एक टीम वर्क की तरह है। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद के स्वास्थ्य के लिए थोड़ा सा समय निकालें। अपने खानपान को सुधारें, रोज़ थोड़ा व्यायाम करें और अपने डॉक्टर की सलाह को कभी अनदेखा न करें। जब आपकी जीवनशैली सही होगी और आप जामुन जैसी प्राकृतिक चीज़ों का समझदारी से इस्तेमाल करेंगे, तो यकीनन आपका ब्लड शुगर हमेशा कंट्रोल में रहेगा और आप एक स्वस्थ और खुशहाल ज़िंदगी जी पाएँगे।

References:

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/diabetes

https://www.who.int/health-topics/diabetes

https://cdn.who.int/media/docs/default-source/searo/ncd/ncd-flip-charts/1.-diabetes-24-04-19.pdf

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

गर्भवती महिलाओं के लिए सीमित मात्रा में जामुन खाना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन किसी भी प्राकृतिक चीज़ को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हर प्रेगनेंसी अलग होती है।

हाँ, टाइप 1 में शरीर बिल्कुल इंसुलिन नहीं बनाता इसलिए बाहर से इंसुलिन लेना ज़रूरी है, वहाँ जामुन सिर्फ पाचन में मदद कर सकता है। लेकिन टाइप 2 में जहाँ इंसुलिन का इस्तेमाल ठीक से नहीं हो पा रहा है, वहाँ जामुन ज़्यादा असरदार साबित होता है।

छोटे और देसी जामुन (जिनमें गुठली बड़ी और गूदा कम होता है) औषधीय गुणों में ज़्यादा ताकतवर माने जाते हैं। उनका कसैलापन हाइब्रिड जामुन के मुकाबले शुगर कंट्रोल करने में ज़्यादा कारगर होता है।

बिल्कुल, जामुन के कोमल पत्तों में भी जम्बोलिन पाया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार सुबह खाली पेट इसके 2-3 ताज़े और साफ पत्ते चबाने से फास्टिंग शुगर को कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है।

फ्रोज़न जामुन में फाइबर तो बरकरार रहता है, लेकिन बहुत लंबे समय तक स्टोर करने से इसके कुछ विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स कम हो जाते हैं। इसलिए हमेशा ताज़े और सीज़नल फल को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

हाँ, जामुन में एंथोसायनिन (Anthocyanin) नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है जो न सिर्फ शुगर को नियंत्रित करता है, बल्कि खून की नसों में जमने वाले खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मदद करता है, जिससे दिल सुरक्षित रहता है।

बच्चों का पाचन तंत्र बहुत नाज़ुक होता है। गुठली का पाउडर बच्चों को देने से कब्ज़ या पेट दर्द हो सकता है। बच्चों के मामले में कोई भी आयुर्वेदिक चूर्ण देने से पहले पीडियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) से बात करना अनिवार्य है।

ताज़े जामुन को फ्रिज में 2 से 3 दिन तक ही रखना चाहिए। अगर आप इसे बहुत ज़्यादा दिनों तक फ्रिज में छोड़ देते हैं, तो यह अंदर से गलने लगता है और इसके फायदेमंद एंजाइम्स खत्म होने लगते हैं।

कुछ हद तक हाँ, जामुन के पत्तों को उबालकर बनाई गई चाय रात के समय मेटाबॉलिज़्म को धीमा होने से रोकती है, जिससे अगली सुबह की फास्टिंग शुगर की रीडिंग बेहतर आ सकती है।

हाँ, जामुन की तासीर ठंडी और कसैली होती है। जिन लोगों को अक्सर छाती में कफ जमता है या अस्थमा है, उन्हें शाम के वक्त या बहुत अधिक मात्रा में जामुन खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे खाँसी या गला खराब होने का रिस्क रहता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us