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Lemon, Coconut Water से Kidney Stone निकल जाता है? Truth

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल किडनी स्टोन (Kidney Stone) या पथरी की शिकायत बहुत आम हो गई है। लोग अक्सर इस बात को लेकर भयंकर उलझन में रहते हैं कि क्या सिर्फ नींबू पानी (Lemon Water) और नारियल पानी (Coconut Water) पीने से पथरी टूटकर बाहर निकल जाएगी? इस गलतफहमी में वे यूट्यूब देखकर सिर्फ पानी पीते रहते हैं, जिससे बड़ी पथरी मूत्र नली (Ureter) में फँसकर भयंकर दर्द पैदा कर देती है। एलोपैथी में इस दर्द को दबाने के लिए अक्सर भारी पेनकिलर्स (Painkillers) या सीधे लेज़र सर्जरी (Laser Surgery) की सलाह दे दी जाती है। ये चीज़ें कुछ समय के लिए पथरी निकाल ज़रूर देती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से शरीर अंदर से भयंकर रूप से कमज़ोर हो जाता है और पथरी बार-बार (Recurrent stones) बनने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या 'वात-कफ' दोष के भड़कने और मूत्रवह स्रोतस में 'अश्मरी' (Ashmari) बनने से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से आपकी पथरी के असली कारण को पकड़कर इस भयंकर खतरे को जड़ से मिटाता है ताकि आप बिना डरे अपनी ज़िंदगी जी सकें।

Lemon, Coconut Water का 'असली सच' क्या है?

पथरी निकालने के लिए लोग नींबू और नारियल पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसका असली सच क्या है, यही असली पहचान है:

  • नींबू पानी (Lemon Water): नींबू में सिट्रेट (Citrate) होता है, जो कैल्शियम ऑक्सलेट (Calcium Oxalate) पथरी को बनने से रोकता है। लेकिन यह पहले से बनी बड़ी और सख्त पथरी को तोड़ नहीं सकता।
  • नारियल पानी (Coconut Water): यह एक बेहतरीन प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic) है। यह पेशाब का दबाव बढ़ाता है, जिससे 3-4 mm की छोटी पथरी खिसक सकती है, लेकिन 8-10 mm की बड़ी पथरी इसके दबाव से मूत्र नली में फँसकर डैमेज कर सकती है।

सिर्फ पानी पीना एक बाहरी उपाय है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर दबे हुए वात-कफ और कमज़ोर जठराग्नि के भयंकर प्रकोप में चल रही होती है।

Kidney Stone (Ashmari) के प्रकार

पथरी के डैमेज और प्रकार को मुख्य रूप से इस तरह बाँटा जा सकता है:

  • कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन (Calcium Oxalate Stone): यह सबसे आम और भयंकर नुकीली (Spiky) पथरी होती है, जो अंदर से नसों को छील देती है और पेशाब में खून लाती है।
  • यूरिक एसिड स्टोन (Uric Acid Stone): शरीर में भयंकर पित्त और एसिडिटी बढ़ने से यह पथरी बनती है, जो एक्स-रे (X-ray) में भी आसानी से दिखाई नहीं देती।
  • स्टैगहॉर्न स्टोन (Staghorn Calculus): यह पूरी किडनी को घेर लेने वाली भयंकर बड़ी और सींग जैसी पथरी होती है, जो किडनी को अंदर से सड़ा देती है (Infection)।

Kidney के डैमेज होने के शारीरिक संकेत

शरीर द्वारा दिए जाने वाले डरावने लक्षण इस प्रकार हैं:

  • कमर से पेट तक दर्द: पीठ के निचले हिस्से से उठकर आगे पेट और जाँघों तक ऐसा भयंकर दर्द जाना जैसे कोई सुई या चाकू चुभो रहा हो।
  • पेशाब में खून और भयंकर जलन: पथरी के खिसकने से नसों का छिल जाना, जिससे पेशाब लाल (Blood in urine) हो जाना और भयंकर जलन होना।
  • उल्टी और भयंकर जी मिचलाना: दर्द इतना भयंकर होना कि पेट में गैस बन जाए और उल्टियाँ शुरू हो जाएँ।
  • बुखार और कंपकंपी: अगर पथरी फँस गई है, तो किडनी में इन्फेक्शन (Infection) फैल जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपना अल्ट्रासाउंड कराएँ।

 Stone को बुलाने वाले असली और छिपे हुए कारण

इस भयंकर खतरे के पीछे गहरे अंदरूनी कारण ये होते हैं:

  • गलत खानपान और भयंकर वात: बहुत ज़्यादा सूखा खाना खाने और पानी कम पीने से शरीर में वात (हवा) भड़क जाती है, जो कफ और पित्त को सुखाकर पत्थर (Ashmari) बना देती है।
  • एनिमल प्रोटीन की अधिकता: बहुत ज़्यादा माँस (Meat) और सप्लीमेंट्स खाने से शरीर में भयंकर यूरिक एसिड बनता है।
  • ज़्यादा नमक (Sodium): नमक शरीर से कैल्शियम को पेशाब के रास्ते बाहर फेंकता है, जो किडनी में जमा होकर पथरी बन जाता है।
  • जठराग्नि की कमज़ोरी (आम): पाचन खराब होने से शरीर में भयंकर 'आम' (गंदगी) बनता है, जो किडनी के फिल्टर में जाकर जम जाता है।

इन 'Hidden Risks' को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस स्थिति को अगर सिर्फ 'सामान्य दर्द' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • हाइड्रोनेफ्रोसिस (Hydronephrosis): पथरी नली में फँसने से पेशाब वापस किडनी में भर जाता है, जिससे किडनी भयंकर रूप से सूज जाती है और डैमेज हो जाती है।
  • किडनी फेलियर (Kidney Failure): लंबे समय तक रुकावट रहने से किडनी हमेशा के लिए काम करना बंद कर सकती है।
  • बार-बार पथरी बनना (Recurrence): सर्जरी के बाद भी अगर जठराग्नि ठीक न हो, तो शरीर हर 6 महीने में नई पथरी बनाने लगता है।

Kidney Stone पर आयुर्वेद का क्या चमत्कारी नज़रिया है?

आयुर्वेद में पथरी को 'अश्मरी' (Ashmari) कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष के भयंकर प्रकोप से मूत्रवह स्रोतस (Urinary tract) में कफ और पित्त सूखकर कड़क पत्थर बन जाते हैं। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि पथरी वात के सूखेपन से बनी है या पित्त की भयंकर गर्मी से। आयुर्वेद में बस लेज़र से पथरी को तोड़ना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि जड़ी-बूटियों से पथरी पिघले, मूत्र मार्ग की सूजन खत्म हो और वात-कफ हमेशा के लिए शांत हों ताकि शरीर भविष्य में कभी पथरी न बनाए।

जीवा आयुर्वेद  Stone को जड़ से खत्म करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को होने वाले दर्द की जगह, पेशाब की जलन और पथरी के साइज़ की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ की अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) रिपोर्ट और बार-बार होने वाली लेज़र सर्जरी का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात-कफ दोष को पकड़ने के बाद ही पथरी को तोड़ने (भेदन) और बाहर निकालने (मूत्रल) का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

 Stone को प्राकृतिक रूप से पिघलाने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में पथरी को तोड़ने, सूजन कम करने और वात को शांत करने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • पाषाणभेद (Pashanbheda): जैसा कि नाम से ही साफ है, यह आयुर्वेद का सबसे बड़ा चमत्कारी 'पत्थर तोड़ने वाला' (Stone breaker) पौधा है। यह भयंकर सख्त पथरी को भी रेत बनाकर बाहर निकाल देता है।
  • गोक्षुर (Gokshura): यह किडनी के फिल्टर को साफ करता है, नसों की सूजन को सोखता है और पेशाब के रास्ते को चौड़ा करता है ताकि पथरी आसानी से निकल जाए।
  • वरुण (Varuna): यह मूत्र नली की भयंकर ऐंठन को खोलता है और यूरिक एसिड को शरीर से बाहर फेंकता है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): यह किडनी की कमज़ोर हो चुकी कोशिकाओं को फौलाद जैसी ताकत देता है और सूजन खत्म करता है।

Stone को ताकत देने वाली पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, किडनी को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • बस्ती (Basti): यह बढ़े हुए वात दोष को जड़ से खत्म करने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। औषधीय काढ़े का एनीमा देने से किडनी और मूत्र मार्ग का भयंकर सूखापन मिटता है।
  • विरेचन (Virechana): पेट साफ कराकर शरीर से पुराने ज़हर और पित्त को निकालने की यह अचूक चिकित्सा है, जिससे किडनी पर दबाव कम होता है।

Stone को रोकने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस भयंकर बीमारी में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • कुलथी की दाल (Horse Gram): यह पथरी के लिए प्रकृति का सबसे बड़ा चमत्कारी आहार है। इसका पानी रोज़ाना पीने से पथरी पिघलने लगती है।
  • गाय का शुद्ध घी: रोज़ाना अपने खाने में गाय का शुद्ध घी पिएँ। यह वात को शांत कर मूत्र नली को चिकनाहट (Lubrication) देता है जिससे पथरी खिसकने में आसानी होती है।
  • तरबूज़ और जौ का पानी: ये शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं और पेशाब की जलन को भयंकर रूप से शांत करते हैं।

क्या न खाएँ?

  • बीज वाली सब्ज़ियाँ: टमाटर, बैंगन और पालक में भयंकर ऑक्सालेट होता है, जो तुरंत नई पथरी बना देता है, इन्हें तुरंत बंद कर दें।
  • ज़्यादा नमक और जंक फूड: ये शरीर में भयंकर 'आम' बनाते हैं जिससे जड़ी-बूटियाँ काम नहीं कर पातीं।
  • ठंडी और बासी चीज़ें: फ्रिज का ठंडा पानी और बासी खाना वात भड़काते हैं।

जीवा आयुर्वेद में रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर की समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, दर्द की रफ्तार और जलन को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा अनुभव किए गए दर्द के बढ़ने के समय और पेशाब की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, पानी पीने की आदत और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर जमे 'आम' और वात-कफ दोष के भयंकर स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

Kidney Stone को पूरी तरह पिघलने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में पथरी का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर पथरी 4-5 mm की है, तो पाषाणभेद और कुलथी के पानी से 3 से 4 हफ्तों में ही भयंकर दर्द खत्म हो जाता है और पथरी पेशाब के रास्ते निकल जाती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर पथरी बड़ी है या बार-बार बन रही है, तो जड़ी-बूटियों से शरीर के मेटाबॉलिज़्म को 'रीसेट' होने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और शुद्ध आहार का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में यह भयंकर दर्द कभी लौटकर नहीं आता और नई पथरी नहीं बनती।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या बड़ा अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द कम करना, पथरी को निकालना और किडनी को सुरक्षित रखना शरीर के संतुलन, मूत्र मार्ग के स्वास्थ्य और समग्र सुधार पर ध्यान देना
नज़रिया समस्या को मिनरल्स/कैल्शियम के जमाव और मूत्र संबंधी स्थिति के रूप में देखना इसे ‘अश्मरी’, वात-कफ असंतुलन और पाचन कमजोरी से जोड़कर देखना
उपचार तरीक़ा दवाएँ, पानी बढ़ाना, लेज़र, ESWL या आवश्यकता अनुसार सर्जरी पाषाणभेद, गोक्षुर, आयुर्वेदिक सपोर्ट, पंचकर्म और जीवनशैली सुधार
डाइट और लाइफ़स्टाइल पर्याप्त पानी, नमक नियंत्रण और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई डाइट पर ज़ोर वात-शामक आहार, कुलथी, संतुलित भोजन और नियमित दिनचर्या पर ध्यान
लंबा असर कुछ लोगों में दोबारा पथरी बनने से बचने के लिए नियमित निगरानी की आवश्यकता हो सकती है मेटाबॉलिज़्म और जीवनशैली संतुलन के माध्यम से दीर्घकालिक स्वास्थ्य सपोर्ट पर ध्यान

डॉक्टर की सलाह कब लें?

पथरी के दर्द में अगर ये भयंकर संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • पेशाब पूरी तरह से रुक जाए या उसमें बहुत भयंकर गाढ़ा खून आने लगे।
  • कमर से लेकर पेट तक ऐसा दर्द उठे कि उल्टियाँ होने लगें और चक्कर आ जाएँ।
  • बुखार के साथ ठंड लगने लगे (किडनी में इन्फेक्शन का संकेत)।
  • पेट फूल जाए और छुआ न जाए

निष्कर्ष

किडनी स्टोन के लिए सिर्फ नींबू पानी या नारियल पानी पीकर खुद को तसल्ली देना आपकी किडनी को हमेशा के लिए खतरे में डाल सकता है। यह शरीर में वात-कफ दोष के भड़कने और 'आम' जमा होने का डरावना परिणाम है। सिर्फ पेनकिलर खाकर दर्द को सुन्न करना या सीधा सर्जरी करवा लेना आपकी किडनी को हमेशा के लिए कमज़ोर कर सकता है। असली पहचान करके शरीर को अंदर से पोषण देना, पाषाणभेद-गोक्षुर जैसी अचूक जड़ी-बूटियाँ अपनाना और कुलथी की दाल व गाय के घी का शुद्ध वात-नाशक आहार ही इसका सबसे सुरक्षित इलाज है। जीवा आयुर्वेद आपकी किडनी को प्राकृतिक रूप से इतना ताकतवर बना देता है कि आप बिना किसी दर्द और सर्जरी के अपनी ज़िंदगी मज़े से जी सकें।

FAQs

नींबू पानी में सिट्रेट होता है, जो नई पथरी बनने से रोकता है, लेकिन यह पहले से बनी बड़ी कैल्शियम ऑक्सलेट पथरी को गलाकर बाहर नहीं निकाल सकता। इसके लिए आयुर्वेदिक औषधियों की ज़रूरत होती है।

नारियल पानी पेशाब का दबाव बढ़ाता है। छोटी पथरी (3-4 mm) में यह फायदेमंद है, लेकिन बड़ी पथरी में यह दबाव पथरी को मूत्र नली (Ureter) में फँसाकर भयंकर दर्द कर सकता है।

कुलथी की दाल आयुर्वेद का एक चमत्कारी 'अश्मरी-भेदन' (पत्थर तोड़ने वाला) आहार है। इसका पानी रोज़ाना पीने से पथरी भयंकर रूप से टूटकर पेशाब के रास्ते बाहर आ जाती है।

बिल्कुल नहीं! यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। बियर शरीर में भयंकर यूरिक एसिड बनाती है और डिहाइड्रेशन (सूखापन) पैदा करती है, जिससे नई पथरी बहुत तेज़ी से बनती है।

जी हाँ। टमाटर के बीज और पालक में भयंकर ऑक्सालेट (Oxalate) होता है। ये शरीर में कैल्शियम के साथ मिलकर पथरी के आकार को बहुत तेज़ी से बढ़ा देते हैं।

पाषाणभेद का मतलब ही 'पत्थर तोड़ने वाला' होता है। यह जड़ी-बूटी सख्त से सख्त पथरी को अंदर से खोखला करके रेत बना देती है, जिससे वह बिना दर्द के निकल जाती है।

हाँ। कृत्रिम कैल्शियम सप्लीमेंट्स शरीर में पूरी तरह पच नहीं पाते और वे किडनी के फिल्टर में जाकर जमने लगते हैं, जिससे भयंकर पथरी बन जाती है।

नहीं। आयुर्वेद के अनुसार बर्फ़ से वात दोष और जकड़न भयंकर रूप से बढ़ जाती है। पथरी के दर्द में हमेशा गर्म पानी की बोतल (Hot water bag) से सिकाई करनी चाहिए।

बिल्कुल। गोक्षुर किडनी के फिल्टर को ताकत देता है, पेशाब की भयंकर जलन खत्म करता है और मूत्र नली की सूजन को शांत कर पथरी निकलने का रास्ता साफ करता है।

जी हाँ। अगर समय रहते आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (पाषाणभेद, गोक्षुर) और कुलथी की दाल की डाइट को अपना लिया जाए, तो 90% से ज़्यादा मामलों में बिना सर्जरी के पथरी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

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