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Anti-Acid दवा से Calcium और B12 कम होता है — Long Term असर

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल गैस और एसिडिटी होने पर लोग तुरंत एंटी-एसिड (Anti-Acid) गोलियाँ खा लेते हैं। ये दवाएँ पेट का एसिड सुखा देती हैं, जो कैल्शियम (Calcium) और विटामिन बी12 (B12) को सोखने के लिए ज़रूरी है। लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करने से हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और नसों में भयंकर दर्द (Neuropathy) रहने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार, पेट का एसिड 'पाचक अग्नि' का रूप है। इसे ज़बरदस्ती सुखाने से अग्नि बुझ जाती है, 'आम' (टॉक्सिन्स) बनता है और वात दोष भड़क कर शरीर को अंदर से खोखला कर देता है।

Anti-Acid से Calcium और B12 की कमी क्या है?

पेट का एसिड (Gastric Acid) भोजन को पचाने और उसमें से कैल्शियम, आयरन और विटामिन B12 को अलग करके शरीर में सोखने (Absorption) का काम करता है। जब कोई रोज़ाना खाली पेट एंटी-एसिड (PPIs या Antacids) खाता है, तो पेट का एसिड बनना बंद हो जाता है। एसिड न होने से शरीर खाने से कैल्शियम और B12 नहीं सोख पाता। इस कारण शरीर को इन ज़रूरी पोषक तत्त्वों की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। लोग दर्द और कमज़ोरी के लिए अलग से सप्लीमेंट्स खाने लगते हैं, लेकिन कमज़ोर अग्नि के कारण वे भी नहीं पचते। बिना डॉक्टर की सलाह के रोज़ाना गैस की गोली खाना हड्डियों और नर्वस सिस्टम को हमेशा के लिए कमज़ोर कर देता है।

Anti-Acid के Long Term असर से जुड़ी मुख्य बीमारियाँ कौन सी हैं?

लंबे समय तक गैस की गोलियाँ खाने से शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी के कारण मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं:

  • ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis): कैल्शियम न पचने के कारण हड्डियाँ भुरभुरी और कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
  • पर्निशियस एनीमिया (Pernicious Anemia): विटामिन B12 की भारी कमी से शरीर में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs) नहीं बन पातीं।
  • पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy): B12 की कमी से हाथों-पैरों की नसें डैमेज होने लगती हैं, जिससे सुन्नपन और झुनझुनी होती है।
  • डिमेंशिया और याददाश्त जाना: विटामिन B12 दिमाग के लिए ज़रूरी है, इसकी कमी से अल्ज़ाइमर और भूलने की बीमारी हो सकती है।

Calcium और B12 की कमी के लक्षण और संकेत

गैस की गोली से एसिडिटी में आराम मिलने के बाद इन कमज़ोरियों का उभरना कई आंतरिक समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • हाथों और पैरों में सुन्नपन: नसों की कमज़ोरी के कारण पैरों और उँगलियों में लगातार झुनझुनी और सुई चुभने जैसा दर्द रहना।
  • हड्डियों और जोड़ों में दर्द: कैल्शियम की कमी से कमर, घुटनों और माँसपेशियों में हमेशा भारी दर्द महसूस होना।
  • भयंकर थकान (Fatigue): 8 घंटे सोने के बाद भी शरीर का टूटा हुआ महसूस होना और सीढ़ियाँ चढ़ने पर साँस फूलना।
  • याददाश्त कमज़ोर होना: छोटी-छोटी बातें भूल जाना और दिमाग में हमेशा धुंधलापन (Brain Fog) रहना।
  • दवा का असर खत्म होते ही एसिडिटी: गैस की गोली छोड़ते ही पेट में पहले से भी ज़्यादा भयंकर एसिड बनना (Rebound Acidity)।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बार-बार पोषण की कमी लौटने के कारण (अग्निमांद्य और वात वृद्धि)

विटामिन की गोलियाँ खाने के बावजूद शरीर में बार-बार कमज़ोरी होने के पीछे सिर्फ बाहरी कारण नहीं, गहरे अंदरूनी कारण हो सकते हैं:

  • पाचक अग्नि का बुझना: रोज़ाना एंटी-एसिड खाने से पेट की अग्नि बिल्कुल शांत हो जाती है, जिससे खाना पचने के बजाय पेट में सड़ता है।
  • रस धातु का क्षय: जब खाना सही से पचता नहीं, तो शरीर की पहली धातु (रस) सूख जाती है, जिससे बाकी अंगों को पोषण नहीं मिलता।
  • वात दोष का भड़कना: कैल्शियम और B12 की कमी शरीर में भयंकर रूखापन लाती है, जिससे वात दोष भड़क कर नसों को डैमेज करता है।
  • आम (टॉक्सिन्स) का संचय: पेट में सड़ा हुआ खाना 'आम' बनाता है, जो आँतों की परत पर चिपक कर किसी भी विटामिन को सोखने से रोकता है।
  • खराब गट फ्लोरा: एंटी-एसिड पेट के अच्छे बैक्टीरिया को मार देते हैं, जो विटामिन B12 बनाने में मदद करते हैं।

Anti-Acid के लॉन्ग टर्म जोखिम और गंभीर जटिलताएँ

इस कमज़ोरी को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ विटामिन्स के सहारे छोड़ दिया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • हड्डियों का अचानक टूटना: कैल्शियम के अभाव में कूल्हे (Hip) या रीढ़ की हड्डी के अचानक फ्रैक्चर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • नसों का स्थायी नुकसान: B12 की भारी कमी से नर्व डैमेज स्थायी हो सकता है, जिससे लकवा (Paralysis) जैसी स्थिति बन सकती है।
  • हृदय रोग का खतरा: विटामिन B12 की कमी से खून में होमोसिस्टीन (Homocysteine) बढ़ता है, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
  • मानसिक अवसाद: दिमाग की नसों को पोषण न मिलने से इंसान डिप्रेशन और एंग्जायटी का शिकार हो जाता है।

समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

Anti-Acid से हुई कमज़ोरी पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से गैस की गोली से होने वाला यह नुकसान सिर्फ एक विटामिन की कमी नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'अग्निमांद्य' (कमज़ोर पाचन), 'धातु क्षय' और 'मज्जगत वात' (नसों का वात) की श्रेणी में रखा जाता है। जब पेट की पाचक अग्नि ही खत्म कर दी जाए, तो शरीर के लिए ज़रूरी पोषण ('सार' भाग) बन ही नहीं पाता। डॉक्टर नाड़ी देखकर ढूँढते हैं कि शरीर में 'आम' कहाँ जमा है और वात ने नसों को कितना नुकसान पहुँचाया है। आयुर्वेद में बस बाहर से कैल्शियम की गोली देना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि पाचक अग्नि वापस जले, आँतें अपना काम खुद करें और शरीर खाने से प्राकृतिक रूप से कैल्शियम और B12 निकाले।

पाचन सुधारने और कमज़ोरी दूर करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में पाचक अग्नि को तेज़ करने, वात शांत करने और हड्डियों को मज़बूत करने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह नर्वस सिस्टम को ताक़त देती है और B12 की कमी से होने वाले नसों के दर्द व झुनझुनी को खत्म करती है।
  • शंख भस्म (Shankh Bhasma): यह प्राकृतिक कैल्शियम का सबसे बेहतरीन और सुपाच्य स्रोत है, जो बिना एसिडिटी बढ़ाए हड्डियों को मज़बूत करता है।
  • गिलोय (Giloy): यह आँतों में जमे टॉक्सिन्स ('आम') को साफ करती है जिससे शरीर खाने में मौजूद विटामिन्स को सोख सके।
  • सौंफ और जीरा (Fennel & Cumin): यह पाचक अग्नि को बढ़ाते हैं और बिना एसिड को खत्म किए पेट की गैस और भारीपन दूर करते हैं।

नसों और हड्डियों को ताक़त देने के लिए पंचकर्म: दोष शोधन और स्नेहन

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, डैमेज नसों को नया जीवन देने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • अभ्यंग और बस्ती: जब कमज़ोरी सालों पुरानी हो और गैस की गोली के बिना इंसान रह न पाता हो, तो पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय: यह 7 से 21 दिनों तक चलने वाली वात नाड़ियों की गहरी चिकित्सा की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • नसों को पोषण (अभ्यंग): औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है, जो वात को शांत कर नसों के सुन्नपन और दर्द को खींच लेती है।
  • गट हीलिंग के लिए निरूह बस्ती: आँतों में जमा पुराना 'आम' निकालने और उनकी सोखने की ताक़त बढ़ाने के लिए औषधीय काढ़े से बस्ती दी जाती है।

पेट में गैस और एसिडिटी होने पर क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

अगर पेट का सिस्टम सही रखना है और शरीर में अंदर से जान चाहिए, तो सीधा है ऐसा हल्का-फुल्का खाना खाओ जो चुटकियों में पच जाए और पेट में गैस का नामो-निशान न छोड़े: 

खाने में ये चीज़ें ज़रूर लें:

  • मखाना और सफ़ेद तिल: रोज़ थोड़े मखाने और सफ़ेद तिल खूब चबा-चबाकर खाएँ। इनसे हड्डियों को भरपूर कैल्शियम मिलता है और वे मज़बूत होती हैं।
  • ताज़ा छाछ (मट्ठा): दोपहर के खाने के बाद छाछ में भुना हुआ जीरा डालकर ज़रूर पिएँ। इससे पेट एकदम सही रहता है और शरीर को अंदर से ज़रूरी ताक़त मिलती है।
  • गाय का देसी घी: रोज़ के खाने में एक चम्मच गाय का शुद्ध देसी घी ज़रूर लें। इससे हाज़मा बहुत अच्छा होता है और नसों का सूखापन ख़त्म होता है।

इन चीज़ों से बिल्कुल दूर रहें:

  • ख़ाली पेट चाय या कॉफ़ी: सुबह उठते ही ख़ाली पेट चाय पीने की आदत बिल्कुल छोड़ दें। यह पेट में तेज़ाब (एसिड) बनाती है और हाज़मे को पूरी तरह ख़राब कर देती है।
  • मैदा और बाहर का खाना: ब्रेड, बिस्किट और बाहर का भारी खाना खाना बंद कर दें। ये चीज़ें आँतों में गोंद की तरह चिपक जाती हैं और खाने का पूरा फ़ायदा शरीर को नहीं मिलने देतीं।
  • ठंडी और बादी चीज़ें: फ़्रिज का ठंडा पानी, बर्फ़, राजमा और छोले भूलकर भी न खाएँ। ये चीज़ें पेट में भयंकर गैस बनाती हैं जिससे दर्द बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।

Calcium और B12 की कमी को पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

समस्या का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त इस बात पर निर्भर है कि गैस की गोलियों पर निर्भरता कितनी पुरानी है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर झुनझुनी की शुरुआत है, तो आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों में ही नसों में ताक़त महसूस होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर नर्व डैमेज ज़्यादा है और हड्डियाँ बहुत कमज़ोर हैं, तो अग्नि सुधरने और धातुओं के बनने में 6 महीने से 1 साल भी लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम: डाइट का कड़ाई से पालन करने पर शरीर खुद विटामिन सोखने लगता है और बाहरी सप्लीमेंट की ज़रूरत खत्म हो जाती है।

पोषण की कमी में आधुनिक उपचार और दोष-आधारित आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य PPIs और सप्लीमेंट्स से गैस व कमी को दबाना पाचक अग्नि सुधारकर पोषण को प्राकृतिक रूप से अवशोषित करवाना
नज़रिया गैस और विटामिन कमी को अलग-अलग समस्या मानना कमजोर पाचन और खराब Absorption को मूल कारण मानना
उपचार तरीका एसिड रोकने वाली गोलियाँ और सिंथेटिक सप्लीमेंट्स देना सौंफ, शंख भस्म, गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों से अग्नि और आँतों को मज़बूत करना
डाइट और लाइफस्टाइल दवाओं और सप्लीमेंट्स पर अधिक निर्भरता सुपाच्य आहार, नियमित भोजन और अग्नि-वर्धक दिनचर्या पर ज़ोर
लंबा असर लंबे समय में भारीपन, कमजोर पाचन और पोषण की कमी बढ़ना शरीर का प्राकृतिक पाचन सुधरना और कैल्शियम व B12 का सही अवशोषण होना

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • पैरों और हाथों का सुन्नपन इतना बढ़ जाए कि चलने में संतुलन बिगड़ने लगे।
  • हड्डियों में भयंकर दर्द हो और ज़रा सा मुड़ने पर भी टूटने का डर लगे।
  • गैस की गोली खाने के बाद भी सीने में जलन और खाना ऊपर आने की शिकायत रहे।
  • याददाश्त इतनी कमज़ोर हो जाए कि रोज़मर्रा के काम करने में भारी दिक्कत हो।

समय पर सलाह लेने से शरीर को बड़ी जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार, रोज़ाना एंटी-एसिड (Anti-Acid) दवाएँ खाने से पेट की पाचक अग्नि बुझ जाती है। बिना पर्याप्त एसिड के हमारा शरीर खाने से कैल्शियम और विटामिन B12 नहीं निकाल पाता। इसकी कमी से हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और वात दोष भड़ककर नसों को सुन्न कर देता है। बाहरी विटामिन की गोलियाँ भी कमज़ोर अग्नि में नहीं पचतीं। आयुर्वेद में गैस की असली वजह (आम और पित्त) को जड़ी-बूटियों (सौंफ, शंख भस्म) और सही आहार से ठीक किया जाता है, जिससे पाचक अग्नि फिर से अपना काम प्राकृतिक रूप से करने लगती है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, गैस की गोलियाँ पेट का एसिड सुखा देती हैं, जिसके बिना शरीर खाने से कैल्शियम नहीं सोख पाता। लंबे समय तक ऐसा होने से हड्डियाँ अंदर से खोखली और कमज़ोर हो जाती हैं।

खाने में मौजूद विटामिन B12 को प्रोटीन से अलग करने के लिए पेट के तेज़ एसिड की ज़रूरत होती है। एसिड न होने पर B12 अलग नहीं हो पाता और बिना पचे ही मल से बाहर निकल जाता है।

बिल्कुल, आयुर्वेद के अनुसार 'मज्जगत वात' बिगड़ने और B12 की कमी से नसों की प्राकृतिक चिकनाई सूख जाती है, जिससे पैरों और हाथों में भयंकर सुन्नपन और झुनझुनी होने लगती है।

हाँ, ताज़ा छाछ एक बेहतरीन प्राकृतिक प्रोबायोटिक है। यह आँतों में अच्छे बैक्टीरिया की कॉलोनी बनाता है, जो प्राकृतिक रूप से विटामिन B12 का निर्माण करने में मदद करते हैं।

अगर आपकी पाचक अग्नि कमज़ोर है और पेट में एसिड नहीं है, तो बाहर से खायी गई कैल्शियम की भारी गोलियाँ भी नहीं पचेंगी, बल्कि पथरी (Kidney stone) का कारण बन सकती हैं।

हाँ, खाली पेट चाय या कॉफी पीने से पेट की अंदरूनी परत डैमेज होती है और पाचक अग्नि कमज़ोर पड़ जाती है, जो गैस और एसिडिटी को भयंकर रूप से बढ़ा देती है।

आयुर्वेद में शंख भस्म, सफेद तिल और मखाने जैसे सुपाच्य कैल्शियम के प्राकृतिक स्रोतों का उपयोग किया जाता है, जो बिना एसिडिटी बढ़ाए हड्डियों को सीधा पोषण देते हैं।

नहीं, गैस की गोली एकदम छोड़ने से 'रिबाउंड एसिडिटी' (Rebound Acidity) होती है। आयुर्वेदिक औषधियों (जैसे सौंफ, मुलेठी) से पाचक अग्नि को सुधारते हुए इसे धीरे-धीरे छोड़ना चाहिए।

हाँ, अश्वगंधा एक शक्तिशाली 'रसायन' है जो कमज़ोर नर्वस सिस्टम को गहरा पोषण देता है और B12 की कमी से डैमेज हुई नसों की रिकवरी में बहुत मदद करता है।

जब पाचक अग्नि (एसिड) कमज़ोर होती है, तो खाना ठीक से पचता नहीं है। वह पेट में ही पड़ा-पड़ा सड़ने लगता है और एक चिपचिपा ज़हर बनाता है जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं।

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