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Metformin 10 साल से खा रहे हैं — क्या Side Effects हो रहे हैं अंदर?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर ऐसा होता है कि ब्लड रिपोर्ट नॉर्मल आती है और हम सोचते हैं कि चलो, बीमारी कंट्रोल में है। धीरे-धीरे रोज़ दवा खाना हमारी ज़िंदगी का एक आम हिस्सा बन जाता है। लेकिन इस बीच एक बहुत ज़रूरी सवाल पीछे छूट जाता है क्या हमारा शरीर सच में अंदर से पूरी तरह फिट है?

लंबे समय तक कोई भी दवा खाने का शरीर पर गहरा असर पड़ता है। शरीर हमें थकान, कमज़ोरी, पेट की खराबी या हाथ-पैरों में झनझनाहट के रूप में छोटे-छोटे इशारे देता है। लेकिन हम इन्हें बढ़ती उम्र या काम की टेंशन समझकर टाल देते हैं। सच्चाई यह है कि हर किसी का शरीर अलग तरह से रिएक्ट करता है। कुछ लोगों को सालों तक कोई दिक्कत नहीं होती, जबकि कुछ का शरीर अंदर से कमज़ोर पड़ने लगता है। इसलिए सिर्फ दवा के भरोसे बैठना काफी नहीं है, शरीर की अंदरूनी हालत को समझना भी उतना ही ज़रूरी है।

Metformin क्या है और इसे लंबे समय तक क्यों दिया जाता है? 

मेटफॉर्मिन (Metformin) वो दवा है जो टाइप-2 डायबिटीज़ वाले मरीजों को सबसे ज्यादा दी जाती है। इसका मेन काम शुगर को कंट्रोल में रखना और शरीर में इंसुलिन को सही तरीके से काम करने में मदद करना है।

कई लोग इस दवा को 5, 10 या उससे भी ज़्यादा सालों से लगातार खा रहे हैं। शुरू में इसके रिज़ल्ट बहुत अच्छे दिखते हैं और शुगर लेवल एकदम सेट रहता है। लेकिन जब आप सालों तक लगातार यह दवा खाते हैं, तो शरीर के अंदर कुछ बदलाव होने लगते हैं। शरीर हमें कुछ वॉर्निंग साइन देता है, जैसे:

अक्सर लोग सोचते हैं कि ये सब तो बुढ़ापे या आम थकावट की वजह से हो रहा है। लेकिन कई बार ये दिक्कतें सालों से चल रही हैं, इसी दवा का साइड इफेक्ट होता है। इसीलिए अपनी बॉडी के इशारों को पकड़ना और समय-समय पर जांच करवाना ज़रूरी है।

क्या लंबे समय तक Metformin लेना सुरक्षित है? 

हर इंसान की बॉडी अलग होती है। इसलिए एक ही दवा का असर सब पर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग सालों तक इसे खाते हैं और एकदम फिट रहते हैं, जबकि कुछ लोगों का शरीर धीरे-धीरे जवाब देने लगता है।

लंबे समय तक दवा खाने के बाद शरीर थकान, झुनझुनी और खराब पाचन जैसे अलार्म बजाने लगता है। इसलिए सिर्फ अपनी शुगर की रिपोर्ट देखकर खुश न हों, बल्कि यह भी देखें कि आपका शरीर अंदर से कैसा महसूस कर रहा है।

शरीर के अंदर धीरे-धीरे क्या बदलाव शुरू हो सकते हैं? 

जब आप बहुत लंबे समय तक दवा लेते हैं, तो शरीर अंदर से कुछ ऐसे इशारे देता है जिन्हें हम अक्सर आम कमज़ोरी समझ लेते हैं:

  • Vitamin B12 की कमी: सालों तक मेटफॉर्मिन खाने से शरीर में विटामिन B12 कम होने लगता है। इससे नसों और दिमाग पर सीधा असर पड़ता है और शरीर की एनर्जी डाउन हो जाती है।
  • हाथ-पैरों में झुनझुनी: अगर हाथों या पैरों में सूई चुभने जैसा लगे या चींटियां दौड़ती महसूस हों, तो समझ लें कि आपकी नसें कमज़ोर पड़ रही हैं।
  • पैरों में जलन: खासकर रात को सोते वक्त पैरों के तलवों में जलन और गर्माहट निकलना नसों की कमज़ोरी का बहुत बड़ा लक्षण है।
  • हर वक्त की थकान: रात भर अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठकर शरीर में जान महसूस न होना।
  • दिमागी सुस्ती और भूलना: छोटी-छोटी बातें भूल जाना या किसी काम में फोकस न कर पाना। दिमागी सुस्ती हमेशा बनी रहती है।
  • खराब पाचन: हर वक्त गैस बनना, पेट फूलना और पाचन खराब रहना।
  • भूख न लगना: खाने की इच्छा खत्म हो जाना, जिसका असर शरीर की ताक़त पर दिखने लगता है।
  • मसल्स की कमज़ोरी: शरीर में पहले जैसी जान न रहना और छोटे-मोटे काम करने में भी हांफ जाना।
  • अचानक वज़न गिरना: अगर बिना डाइटिंग किए वज़न कम हो रहा है और कमज़ोरी आ रही है, तो यह शरीर में पोषण की कमी का पक्का सबूत है।
  • किडनी और लिवर पर लोड: जिन लोगों की किडनी पहले से थोड़ी कमज़ोर है, उन पर दवा का लोड ज़्यादा पड़ सकता है। इसलिए रेगुलर चेकअप बहुत ज़रूरी है।

Diabetes कंट्रोल में होने के बाद भी शरीर क्यों बिगड़ सकता है? 

अक्सर लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि "मेरी शुगर तो नॉर्मल है, फिर भी शरीर गिरा-गिरा क्यों रहता है?" इसका सीधा सा जवाब है कि आपकी दिक्कत सिर्फ शुगर नहीं है। अगर आपकी बॉडी में ये बातें हो रही हैं, तो सिर्फ शुगर कंट्रोल होने से कुछ नहीं होगा:

  • पोषण की कमी: शरीर को अंदर से जो ज़रूरी तत्व चाहिए, वो नहीं मिल रहे हैं।
  • खराब पाचन: आप जो खा रहे हैं, वो पच ही नहीं रहा, तो शरीर को ताक़त कहाँ से मिलेगी?
  • नींद की कमी: अगर नींद अच्छी नहीं होगी, तो शरीर अपनी अंदरूनी रिपेयरिंग नहीं कर पाएगा।
  • टेंशन और स्ट्रेस: दिमागी टेंशन शरीर की सारी एनर्जी को चूस लेती है और पूरा सिस्टम बिगाड़ देती है।
  • फिजिकल एक्टिविटी न होना: दिन भर एक ही जगह पड़े रहने से शरीर का पूरा सिस्टम सुस्त हो जाता है।

कौन से संकेत बताते हैं कि शरीर अंदर से कमज़ोर हो रहा है? 

शरीर कभी भी अचानक से बीमार नहीं पड़ता, वो धीरे-धीरे अलार्म देता है। अगर आपके साथ ये सब हो रहा है, तो इग्नोर मत कीजिए:

  • पैरों में झुनझुनी: यह नसों के डैमेज होने का सबसे पहला इशारा है।
  • थकावट: आराम करने के बाद भी शरीर में बैटरी डाउन फील होना।
  • पेट हमेशा खराब रहना: पाचन ठीक न होना मतलब शरीर की मशीनरी का कमज़ोर पड़ना।
  • भूलने की आदत: फोकस न कर पाना और बातें भूल जाना।
  • मांसपेशियों का कमज़ोर पड़ना: बदन में पहले जैसी ताक़त न बचना।
  • बिना वजह वज़न घटना: बिना किसी कोशिश के शरीर का अचानक सूखने लगना।
  • चक्कर आना: एनर्जी लेवल एकदम ज़ीरो हो जाना।
  • हाथ-पैर ठंडे पड़ना: ब्लड सर्कुलेशन और एनर्जी खराब होने की वजह से हाथ-पैरों का ठंडा रहना।

रोजमर्रा की आदतें जो शरीर पर असर बढ़ा सकती हैं 

कई बार सारी गलती सिर्फ दवा की नहीं होती, हमारी खराब लाइफस्टाइल भी आग में घी का काम करती है:

  • रात-रात भर जागना: नींद पूरी न होने से शरीर खुद को हील (रिपेयर) नहीं कर पाता।
  • दिन भर बैठे रहना: कोई फिजिकल काम न करने से शरीर में खून का दौरा धीमा पड़ जाता है।
  • हर वक्त टेंशन लेना: स्ट्रेस से शरीर का पूरा बैलेंस बुरी तरह बिगड़ जाता है।
  • खाना टाइम पर न खाना: मील्स स्किप करने से शरीर कमज़ोर पड़ने लगता है और उसे सही पोषण नहीं मिल पाता।
  • बाहर का खाना: जंक फूड और पैकेट बंद चीजें पाचन का सत्यानाश कर देती हैं।

आयुर्वेद इस समस्या को कैसे समझता है? 

आयुर्वेद में डायबिटीज़ सिर्फ खून में शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है। यह असल में शरीर के पूरे सिस्टम और मेटाबॉलिज़्म के बिगड़ने का नतीजा है। जब हम सालों तक गलत खाते-पीते हैं, बहुत ज्यादा टेंशन लेते हैं और दिनभर बैठे रहते हैं, तो इसका सीधा असर हमारे पाचन और शरीर की ताक़त पर पड़ता है।

आयुर्वेद के हिसाब से, शरीर में 'वात' (हवा) और 'कफ' बिगड़ने से नसें कमज़ोर हो जाती हैं और शरीर हमेशा थका-थका व भारी लगने लगता है।

लंबे समय तक दवा लेने से 'वात' क्यों भड़क जाता है? 

जब शरीर में वात बेकाबू हो जाता है, तो शरीर अंदर से सूखने लगता है और कमज़ोरी आ जाती है। इसके पीछे ये मुख्य कारण होते हैं:

  • गलत टाइम पर खाना: खाने का कोई फिक्स टाइम न होना और रूटीन पूरी तरह बिगड़ा रहना।
  • नींद पूरी न होना: नींद कम आने से शरीर खुद की रिपेयरिंग नहीं कर पाता, जिससे वात भड़क जाता है।
  • हर वक्त की टेंशन: बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेने से नसों पर भारी दबाव पड़ता है।
  • सालों तक दवाइयां खाना: लंबे समय तक हैवी दवाइयां खाने से कई बार शरीर का पानी सूखने लगता है और अंदरूनी कमज़ोरी आ जाती है।

आयुर्वेद कहता है कि वात बढ़ने पर हाथ-पैरों में झुनझुनी, जोड़ों में दर्द, कपकपी और थकावट होने लगती है। यही वजह है कि लंबी दवाओं के साइड इफेक्ट समय के साथ शरीर पर ज़्यादा हावी होने लगते हैं।

आयुर्वेद का इलाज करने का तरीका 

आयुर्वेद का मकसद सिर्फ आपकी शुगर रिपोर्ट को नॉर्मल करना नहीं है, बल्कि उस बिगड़े हुए पाचन और सुस्त पड़े सिस्टम को वापस ट्रैक पर लाना है:

  • असली वजह पर वार: इलाज सिर्फ शुगर घटाने के लिए नहीं, बल्कि उन खराब आदतों को सुधारने के लिए किया जाता है जिनकी वजह से बीमारी हुई (जैसे- टेंशन, नींद की कमी, खराब रूटीन)।
  • कफ को बैलेंस करना: कफ बढ़ने से शरीर में भारीपन और सुस्ती आती है। इसलिए शरीर को एकदम एक्टिव और हल्का बनाने पर काम किया जाता है।
  • पेट की आग (पाचन) तेज़ करना: कमज़ोर पाचन ही डायबिटीज़ की सबसे बड़ी जड़ है। इसलिए खाने को सही से पचाकर उसे एनर्जी में बदलने पर पूरा ज़ोर रहता है।
  • अंदरूनी ताक़त लौटाना: नसों और शरीर के अंदरूनी सिस्टम को इतनी ताक़त दी जाती है कि कमज़ोरी और थकान बिल्कुल गायब हो जाए।
  • लाइफस्टाइल सेट करना: देर रात तक जागने और गलत खान-पान की आदतों को बदलना इस इलाज का सबसे ज़रूरी हिस्सा है।

इलाज में काम आने वाली कमाल की देसी औषधियाँ 

ये औषधियाँ सिर्फ शुगर घटाने का रट्टा नहीं मारतीं। असल में ये आपके शरीर की अंदर से ऐसी 'सर्विसिंग' कर देती हैं कि मशीनरी फिर से दौड़ने लगे:

  • करेला: कड़वा ज़रूर है, लेकिन शुगर को नेचुरली बैलेंस करने और पाचन को एकदम चुस्त-दुरुस्त रखने में इसका कोई सानी नहीं।
  • मेथी: हमारी रसोई की ये मामूली सी चीज़ शरीर के इंसुलिन को सही से काम करने पर मजबूर कर देती है। शुगर वालों के लिए यह गज़ब का रिज़ल्ट देती है।
  • त्रिफला: पेट की पाई-पाई गंदगी को बाहर खींचने और पाचन का सिस्टम सेट करने के मामले में त्रिफला से बेहतर कुछ और हो ही नहीं सकता।
  • अश्वगंधा: बीमारी और हैवी दवाइयों ने शरीर को जो तोड़ दिया है, अश्वगंधा उस थकावट को सोखकर शरीर की बैटरी एकदम फुल कर देता है।
  • नीम: खून की गहरी सफाई करने और शरीर के बिगड़े हुए सिस्टम को दोबारा लाइन पर लाने में नीम का बहुत तगड़ा असर होता है।

शरीर को सुकून देने वाली खास आयुर्वेदिक थेरेपी 

इन पुराने और परखे हुए देसी तरीकों का बस एक ही मकसद है शरीर की सुस्ती को निचोड़ना और खोई हुई ताक़त वापस खींच लाना:

  • अभ्यंग (तेल की मालिश): जड़ी-बूटियों वाले हल्के गर्म तेल से जब शरीर की चंपी (मालिश) होती है, तो सारी जकड़न और स्ट्रेस गायब हो जाता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन एकदम फास्ट हो जाता है।
  • स्वेदन (भाप से सिकाई): हल्की गर्माहट वाली भाप लेने से शरीर का भारीपन और सालों पुरानी जकड़न मानो मोम की तरह पिघल जाती है। आप खुद को बहुत हल्का फील करते हैं।
  • बस्ती: शरीर के अंदर जो वात (हवा) बेकाबू होकर परेशानी पैदा कर रहा है, उसे शांत करने का यह सबसे बेहतरीन और पक्का आयुर्वेदिक इलाज है।
  • विरेचन: यह अंदर जमे सारे ज़हरीले तत्वों (Toxins) को जड़ से बाहर का रास्ता दिखा देती है।
  • शिरोधारा: माथे के बीचों-बीच जब लगातार औषधीय तेल की धार गिरती है, तो दिमाग की सारी टेंशन और की उलझनें पानी के साथ बह जाती हैं। इसके बाद जो सुकून की नींद आती है, उसका सच में कोई जवाब नहीं।

डाइट में क्या-क्या बदलाव करें? 

डायबिटीज़ में सही खाना सिर्फ दवा नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से ठीक करने का सबसे बड़ा हथियार है:

  • ताज़ा और गर्म खाना खाएं: हमेशा ताज़ा खाना ही खाएं, यह जल्दी पचता है और पेट को हल्का रखता है।
  • हरी सब्ज़ियां और सलाद: अपनी थाली में हरी सब्ज़ियां बढ़ाएं, इनसे शरीर को फाइबर और असली ताक़त मिलती है।
  • मूंग दाल और हल्का खाना: पेट पर ज्यादा बोझ न डालें। मूंग दाल जैसी हल्की चीज़ें खाएं।
  • मीठा और पैकेट बंद खाना बंद करें: ये चीज़ें शुगर को तेज़ी से बढ़ाती हैं और शरीर का पूरा बैलेंस बिगाड़ देती हैं।
  • गुनगुना पानी पिएं: दिनभर हल्का गुनगुना पानी पीने से पेट साफ रहता है और पाचन सुधरता है।
  • रात को हल्का खाएं: देर रात भारी खाना खाने से पाचन ठप पड़ जाता है।
  • भूखे न रहें: लंबे समय तक खाली पेट रहने से एनर्जी लेवल गिर जाता है, इसलिए टाइम पर खाएं।
  • तली-भुनी चीज़ें कम करें: ज्यादा तेल और चिकनाई शरीर में सिर्फ सुस्ती और चर्बी बढ़ाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम रेनू लुंबा है और मेरी उम्र 60 वर्ष है। पिछले 25 वर्षों से मुझे डायबिटीज की समस्या थी, जो बॉर्डरलाइन पर रहती थी। लेकिन हाल ही में जब मैंने टेस्ट करवाए, तो मेरा शुगर लेवल काफी ज्यादा बढ़ा हुआ पाया गया। मैं एलोपैथिक दवाइयाँ लेना नहीं चाहती थी, क्योंकि यह लंबे समय तक चलती हैं। तब मेरे पति ने मुझे डॉ. प्रताप चौहान के बारे में बताया। उनसे बात करने के बाद मुझे जीवा आयुर्वेद के डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में जानकारी मिली। हम जीवा क्लिनिक गए और वहाँ से मेरा उपचार शुरू हुआ। नियमित मॉनिटरिंग, डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ मैंने डॉक्टरों की सलाह को फॉलो किया। धीरे-धीरे मेरे HbA1c लेवल में सुधार हुआ और यह 8.2 से घटकर 6.4 के स्वस्थ स्तर पर आ गया। आज मैं खुद को पहले से बेहतर और संतुलित महसूस करती हूँ। जीवा आयुर्वेद का मैं दिल से धन्यवाद करती हूँ। 

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? 

अगर आप लंबे समय से मेटफॉर्मिन (Metformin) खा रहे हैं, तो शरीर के इन इशारों को बिल्कुल इग्नोर न करें। तुरंत डॉक्टर के पास जाएं अगर:

  • हर वक्त थकावट और कमज़ोरी रहने लगी।
  • हाथ-पैरों में झुनझुनी, चींटियां चलने या सुन्नपन का अहसास हो।
  • पेट और पाचन हमेशा खराब रहने लगे।
  • अचानक से चक्कर आए या दिमाग सुन्न (फोकस न होना) सा लगे।
  • बिना डाइटिंग किए वज़न तेज़ी से गिरने लगे।
  • भूख एकदम मर जाए और शरीर में जान ही न लगे।
  • शुगर कंट्रोल होने के बाद भी आप खुद को फिट फील न करें।

निष्कर्ष 

मेटफॉर्मिन सिर्फ शुगर कम करने की गोली नहीं है, इसका असर आपके पूरे सिस्टम पर होता है। मॉडर्न साइंस इसे लंबे समय तक खाने के लिए सुरक्षित मानती है, लेकिन रेगुलर चेकअप करवाना बहुत ज़रूरी है।

आयुर्वेद साफ कहता है कि सालों तक हैवी दवाइयां खाने और खराब लाइफस्टाइल से पाचन और शरीर की अंदरूनी ताक़त खत्म होने लगती है। इसलिए सिर्फ मशीन पर शुगर का नॉर्मल नंबर देखकर खुश न हों, अपने पूरे शरीर की भी सुनें। सही डाइट, अच्छी नींद और टेंशन-फ्री लाइफ से ही आप असल में फिट रह सकते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हर बार कमज़ोरी का कारण दवा नहीं होती। कई बार नींद की कमी, तनाव, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है। लेकिन यदि लंबे समय तक यह लक्षण बने रहें तो शरीर की जांच करवाना ज़रूरी हो जाता है ताकि सही कारण समझा जा सके।

कुछ लोगों में Metformin के कारण भूख कम या अस्थिर हो सकती है। इससे भोजन का पैटर्न बदल सकता है और शरीर की ऊर्जा पर असर पड़ सकता है। यदि यह बदलाव लंबे समय तक रहे तो संतुलित आहार पर ध्यान देना ज़रूरी होता है।

 व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर करता है। नियमित चलना या हल्की गतिविधि शरीर के ऊर्जा संतुलन को सुधारने में मदद कर सकती है। बिना गतिविधि के केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाता।

सीधे तौर पर सभी लोगों में ऐसा नहीं होता, लेकिन कुछ मरीजों में थकान और शरीर की ऊर्जा असंतुलन के कारण नींद प्रभावित हो सकती है। यदि नींद लगातार खराब हो रही हो तो जीवनशैली और पोषण दोनों पर ध्यान देना ज़रूरी होता है।

हर व्यक्ति में वज़न कम होना ज़रूरी नहीं है। कुछ लोगों में वज़न स्थिर रहता है या कम भी हो सकता है, जबकि कुछ में कोई बदलाव नहीं होता। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, आहार और जीवनशैली पर निर्भर करता है।

 कुछ मामलों में लंबे समय तक उपयोग से शरीर में कुछ पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय-समय पर जांच और संतुलित आहार लेना महत्वपूर्ण माना जाता है ताकि शरीर कमज़ोर न पड़े।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद करना सुरक्षित नहीं माना जाता। शुगर कंट्रोल में होने का मतलब यह नहीं कि शरीर पूरी तरह संतुलित हो गया है। किसी भी बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी होती है।

नहीं, हर व्यक्ति में साइड इफेक्ट नहीं होते। कुछ लोग इसे लंबे समय तक बिना किसी समस्या के लेते हैं। लेकिन कुछ लोगों में शरीर की संवेदनशीलता के कारण हल्के या धीरे-धीरे लक्षण दिख सकते हैं।

हाँ, संतुलित और हल्का भोजन शरीर की ऊर्जा और पाचन को बेहतर बना सकता है। सही आहार से दवा के प्रभाव को सपोर्ट मिलता है और शरीर ज्यादा संतुलित महसूस कर सकता है।

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