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माइग्रेन सिर्फ तनाव से नहीं होता, ये कारण भी हो सकते हैं ज़िम्मेदार

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर जब भी किसी को सिर के आधे हिस्से में तेज़, धड़कने वाला और असहनीय दर्द होता है, तो सबसे पहले इसे "स्ट्रेस" या काम के भारी दबाव का नतीजा मान लिया जाता है। यह पूरी तरह से सच है कि तनाव माइग्रेन के सबसे बड़े और प्रमुख ट्रिगर्स में से एक है, लेकिन मेडिकल साइंस स्पष्ट करता है कि केवल तनाव ही इसका एकमात्र कारण नहीं है।

माइग्रेन वास्तव में एक अत्यंत जटिल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। यह कई अन्य शारीरिक, पर्यावरणीय, रासायनिक और आनुवंशिक कारकों से भी उत्पन्न हो सकता है। इसे केवल एक 'सामान्य सिरदर्द' समझकर इग्नोर करना बहुत बड़ी गलती है। आज हम आपको उन 8 प्रमुख कारणों की पूरी वैज्ञानिक जानकारी दे रहे हैं, जो तनाव के अलावा आपके माइग्रेन अटैक के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार  हो सकते हैं।

हॉर्मोनल बदलाव: महिलाओं के लिए बड़ा खतरा

चिकित्सीय आंकड़ों और रिसर्च के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में माइग्रेन की समस्या तीन गुना अधिक पाई जाती है। इसके पीछे सबसे बड़ा विज्ञान शरीर में होने वाले 'हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव' का है। एस्ट्रोजन हॉर्मोन के स्तर में अचानक होने वाली गिरावट सिरदर्द को ट्रिगर कर सकती है।

  • मेंस्ट्रुअल माइग्रेन कई महिलाओं को पीरियड्स शुरू होने से ठीक पहले या उन दिनों के दौरान तेज़ माइग्रेन का अटैक आता है। इसे मेडिकल भाषा में 'मेंस्ट्रुअल माइग्रेन' कहा जाता है।
  • गर्भावस्था और मेनोपॉज गर्भावस्था की पहली तिमाही और मेनोपॉज के दौरान जब हॉर्मोनल स्तर तेज़ी से और अप्रत्याशित रूप से बदलता है, तब भी माइग्रेन के अटैक की आवृत्ति काफी बढ़ जाती है।
  • दवाइयों का साइड इफेक्ट ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने वाली महिलाओं में भी हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ने के कारण दर्द ट्रिगर हो सकता है।

खानपान की गलतियों में छिपा है ट्रिगर

हमारा खानपान सीधे हमारे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। कई खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो माइग्रेन को तुरंत ट्रिगर करने के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं:

  • खमीर उठे और पुराने खाद्य पदार्थ ब्लू चीज़, परमेसन और स्विस चीज़ जैसे पुराने पनीर में टायरामाइन नामक यौगिक होता है, जो रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर माइग्रेन पैदा करता है।
  • फूड एडिटिव्स की मिलावट अधिकांश प्रोसेस्ड, डिब्बाबंद और चाइनीज फूड्स में मोनोसोडियम ग्लूटामेट तथा डाइट कोल्ड ड्रिंक्स में एस्पार्टेम का इस्तेमाल होता है, जो गंभीर सिरदर्द का कारण बन सकते हैं।
  • कैफीन और अल्कोहल का खेल बहुत अधिक शराब का सेवन और अत्यधिक कॉफी पीने या अचानक से कॉफी पीना छोड़ देने से नसों में खिंचाव आता है, जो माइग्रेन का दौरा ला सकता है।

मौसम की मार: धूप और हवा के दबाव से सिरदर्द

हमारा मस्तिष्क मौसम में होने वाले बदलावों के प्रति एक प्राकृतिक बैरोमीटर की तरह काम करता है। मौसम का अचानक करवट लेना माइग्रेन के मरीज़ों के लिए एक बहुत बड़ा अलर्ट है।

  • हवा का दबाव हवा के दबाव में अचानक होने वाला बदलाव जैसे बारिश या तूफान आने से ठीक पहले का समय, या पहाड़ों पर ऊंचाई पर सफर करना वायुमंडल में ऑक्सीजन के स्तर को बदल देता है। यह बदलाव मस्तिष्क की नसों में असंतुलन पैदा कर सिरदर्द शुरू कर देता है।
  • अत्यधिक गर्मी और डिहाइड्रेशन चिलचिलाती गर्मी, तेज़ धूप और अत्यधिक उमस के कारण शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकलता है। शरीर में पानी की कमी खून को गाढ़ा कर देती है, जो माइग्रेन के सबसे आम और तेज़ी से असर करने वाले ट्रिगर्स में से एक है।

बिगड़ी स्लीप साइकिल: नींद की कमी बनी मुसीबत

मस्तिष्क के डिटॉक्सिफिकेशन और नसों को शांत रखने के लिए 7 से 8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद अनिवार्य है। जब आपके सोने के प्राकृतिक चक्र में गड़बड़ी होती है, तो यह माइग्रेन का रूप ले लेती है।

  • नींद की कमी या अति बहुत कम सोना या वीकेंड पर ज़रूरत  से ज्यादा देर तक सोना, दोनों ही स्थितियां मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर को कंफ्यूज कर देती हैं।
  • शिफ्ट वर्क और जेट लैग जिन लोगों की ड्यूटी की शिफ्ट बार-बार बदलती है या जो लंबी हवाई यात्रा करते हैं, उनकी शरीर की आंतरिक घड़ी बुरी तरह प्रभावित होती है, जो नर्वस सिस्टम पर भारी दबाव डालती है।
  • शारीरिक थकान अचानक बहुत भारी व्यायाम करना, जिम में क्षमता से अधिक वजन उठाना या शारीरिक रूप से बुरी तरह थक जाना भी माइग्रेन के केमिकल रिलीज कर सकता है।

तेज़ रोशनी और परफ्यूम: हाइपरसेंसिटिव नर्वस सिस्टम

माइग्रेन के मरीजों का तंत्रिका तंत्र आम लोगों की तुलना में बहुत अधिक संवेदनशील होता है। बाहरी संवेदी उत्तेजनाएं उनके लिए असहनीय दर्द का कारण बन सकती हैं।

  • चकाचौंध रोशनी सूरज की तेज़ चमक, कंप्यूटर या मोबाइल की नीली रोशनी, और टिमटिमाती ट्यूबलाइट सीधे ऑप्टिक नर्व को इरिटेट कर माइग्रेन का कारण बनती हैं।
  • शोरगुल और तेज़ आवाज़ शादी का डीजे, हैवी ट्रैफिक का लगातार बजता हॉर्न, कंस्ट्रक्शन का काम या मशीनों की तेज़ आवाज़ भी मस्तिष्क की नसों को उत्तेजित कर देती है।
  • तीखी गंध तेज़ स्मेल वाला परफ्यूम, ताजे पेंट की गंध, थिनर, पेट्रोल, अगरबत्ती या कुछ खास मसालों की तेज़ महक सूंघते ही कुछ लोगों का माइग्रेन तुरंत ट्रिगर हो जाता है।

जेनेटिक्स का रोल: डीएनए में छिपा है दर्द का राज

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि माइग्रेन केवल बाहरी लाइफस्टाइल से होता है। न्यूरोलॉजिकल रिसर्च बताती है कि यह बीमारी आपके डीएनए और पारिवारिक इतिहास में गहराई से छिपी हो सकती है।

  • आनुवंशिक जोखिम मेडिकल साइंस के आंकड़े बताते हैं कि यदि आपके माता-पिता में से किसी एक को माइग्रेन है, तो आपको यह बीमारी होने की 50% संभावना है। यदि माता और पिता दोनों इससे पीड़ित हैं, तो यह खतरा बढ़कर 75% तक हो जाता है।
  • केमिकल लोचा: जेनेटिक्स के कारण ही कुछ लोगों के मस्तिष्क में प्राकृतिक रूप से सेरोटोनिन जैसे महत्वपूर्ण रसायनों का स्तर ऊपर-नीचे होता रहता है। यह असंतुलन उनकी नसों को बाहरी वातावरण और दर्द के प्रति अतिसंवेदनशील बना देता है।

आयुर्वेद का नज़रिया: वात-पित्त का असंतुलन

आयुर्वेद के अनुसार, माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से शरीर में 'वात' और 'पित्त' दोष के गंभीर असंतुलन का सीधा परिणाम है। गलत खानपान और बिगड़ी जीवनशैली से नसों में विषाक्त तत्व जमा हो जाते हैं। यह अवरोध रक्त संचार को बाधित कर भयंकर दर्द पैदा करता है।

पक्का इलाज: 'माइग्रेन डायरी' से करें बचाव

माइग्रेन के कारण हर मरीज़  के लिए बिल्कुल अलग-अलग हो सकते हैं। तनाव इसका हिस्सा है, लेकिन हॉर्मोन, डाइट, मौसम, नींद और जेनेटिक्स का रोल भी कम नहीं है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार इसे नियंत्रित करने का सबसे असरदार तरीका एक माइग्रेन डायरी मेंटेन करना है। जब भी दर्द हो, उसमें नोट करें कि आपने क्या खाया था, मौसम कैसा था, नींद कितनी ली थी और आपके आसपास कैसा माहौल था। अपने सटीक ट्रिगर्स की पहचान करके और लाइफस्टाइल में छोटे लेकिन ठोस बदलाव लाकर आप माइग्रेन के अटैक्स को 90% तक रोक सकते हैं। लगातार दर्द बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय एक न्यूरोलॉजिस्ट से उचित इलाज करवाएं।

References

https://translate.google.com/translate?u=https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/headache-disorders&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp

https://www.ninds.nih.gov/health-information/disorders/migraine

https://www.healthline.com/health/migraine

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

अटैक से कुछ समय पहले आंखों के सामने चमकती हुई रोशनी या टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें दिखना (Aura), गर्दन में तेज़ अकड़न, बेवजह बहुत ज्यादा जम्हाई आना, बोलने में लड़खड़ाहट और चिड़चिड़ापन इसके शुरुआती और प्रमुख वॉर्निंग साइन हैं।

मेडिकल साइंस में अभी तक माइग्रेन को जड़ से खत्म करने का कोई पूर्ण स्थायी (Permanent) इलाज नहीं है। हालांकि, सही डाइट, ट्रिगर्स से दूरी और न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा दी गई दवाओं से इस दर्द को सफलतापूर्वक नियंत्रित ज़रूर  किया जा सकता है।

कैफीन एक दोधारी तलवार है। जब दर्द शुरू हो रहा हो, तो थोड़ी सी कॉफी नसों को सिकोड़कर दर्द निवारक का काम करती है। लेकिन रोज बहुत ज्यादा कॉफी पीने या अचानक इसे छोड़ देने से यही माइग्रेन का सबसे बड़ा ट्रिगर बन जाती है।

साइनस का दर्द मुख्य रूप से चेहरे (नाक के आसपास, माथे और गाल) पर भारीपन और दबाव के साथ होता है, जिसमें बलगम की शिकायत होती है। जबकि माइग्रेन में सिर के आधे हिस्से में धड़कने वाला (Throbbing) दर्द होता है और इसमें रोशनी/आवाज़ से दिक्कत होती है।

हाँ, यह वैज्ञानिक रूप से सच है। जब आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं, तो रक्त में शर्करा (Blood Sugar) का स्तर तेज़ी से गिरता है। इससे मस्तिष्क को ऊर्जा मिलनी बंद हो जाती है और वह स्ट्रेस में आकर माइग्रेन रिलीज कर देता है।

बिल्कुल! यदि आप हफ्ते में दो-तीन दिन से ज्यादा दर्द निवारक (Painkillers) खाते हैं, तो शरीर इनका आदी हो जाता है। इसे 'मेडिकेशन ओवरयूज हेडेक' (MOH) कहते हैं, जिसमें दवा का असर खत्म होते ही दर्द दोगुने वेग से वापस लौटता है।

हाँ, डिजिटल स्क्रीन्स से निकलने वाली खतरनाक नीली रोशनी (Blue Light) और स्क्रीन की तेज़ चकाचौंध आंखों की रेटिना और मस्तिष्क की नसों पर भारी तनाव पैदा करती है। डिजिटल आई स्ट्रेन आज के युवाओं में माइग्रेन का सबसे बड़ा कारण है।

माइग्रेन अटैक के दौरान मस्तिष्क और पाचन तंत्र को जोड़ने वाला गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) काम करना धीमा कर देता है। इससे पाचन क्रिया बीच में ही रुक जाती है, जिससे मरीज़  को बहुत ज्यादा जी मिचलाने या उल्टी होने की शिकायत होती है।

हाँ, यह सच है। कुछ मरीज़ों में चॉकलेट (विशेषकर कोको) में पाए जाने वाले फेनिलइथाइलमाइन (Phenylethylamine) नामक रसायन और उसमें मौजूद कैफीन के कारण नसों में खिंचाव आता है, जो सीधे माइग्रेन को ट्रिगर करता है।

माइग्रेन से बचने के लिए डाइट में मैग्नीशियम भरपूर चीजें (जैसे पालक, बादाम, काजू), ओमेगा-3 फैटी एसिड (अखरोट, चिया सीड्स), ताजे फल और दिनभर में कम से कम 3 लीटर पानी शामिल करना चाहिए। पैकेटबंद और जंक फूड से सख्त परहेज ज़रूरी है।

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