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गर्दन में Crepitus (आवाज़) - Worry की बात है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 27 May, 2026
  • category-iconUpdated on 09 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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कई लोगों को गर्दन घुमाते समय "टक-टक" , "कड़क" या हल्की घिसने जैसी आवाज़ महसूस होती है। शुरुआत में लोग इसे सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन जब इसके साथ दर्द, जकड़न या सिर भारी लगने जैसी परेशानी जुड़ने लगती है, तब चिंता बढ़ने लगती है।

आजकल लंबे समय तक मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर झुककर काम करना और ग़लत पोस्चर में बैठना बहुत आम हो गया है। इसकी वज़ह से गर्दन की मांसपेशियों और जोड़ों पर लगातार दबाव पड़ता है, जो धीरे-धीरे ऐसी आवाज़ों का कारण बन सकता है।

हर आवाज़ किसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन अगर यह बार-बार हो रही हो या इसके साथ दर्द और अकड़न भी महसूस हो रही हो, तो इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं माना जाता।

गर्दन में Crepitus क्या होता है? 

कभी आपने नोटिस किया है कि जब आप सुबह सोकर उठते हो या ऑफिस में काम करते-करते अचानक अपनी गर्दन घुमाते हो, तो अंदर से 'कड़क-कड़क' या 'कट-कट' की आवाज़ आती है? ऐसा लगता है जैसे गर्दन के अंदर कोई सूखी लकड़ियां चटका रहा हो। मेडिकल की भारी-भरकम भाषा में इसे Crepitus कहते हैं। कई बार तो यह आवाज़ बिना किसी दर्द के आती है और हम इसे नॉर्मल समझकर टाल देते हैं। लेकिन भाई, कभी-कभी इसके साथ जो गर्दन में भारीपन और जकड़न होती है ना, वो सच में पूरा दिन खराब कर देती है।

इसकी सबसे बड़ी जड़ जानते हैं क्या है? हमारा प्यारा स्मार्टफोन और लैपटॉप! घंटों गर्दन झुकाकर रील्स स्क्रॉल करना या गलत तरीके से सो जाना ये सब हमारी गर्दन की बैंड बजा देते हैं। वैसे तो हर बार ये आवाज़ कोई खतरे की घंटी नहीं होती, लेकिन अगर इस 'कट-कट' के साथ आपको चक्कर आ रहे हैं, हाथों में झनझनाहट हो रही है या गर्दन हिलाना मुश्किल हो रहा है, तो बॉस, इसे हल्के में लेने की गलती बिल्कुल मत करना।

जब गर्दन से आवाज़ आए, तो और क्या-क्या झेलना पड़ सकता है?

सिर्फ आवाज़ आए तो ठीक, पर अक्सर यह अपने साथ कुछ बिन बुलाए मेहमान भी लाती है। जैसे:

  • गर्दन का एकदम पत्थर जैसी जकड़ जाना
  • ऐसा लगना कि सिर पर किसी ने बोझ रख दिया हो (भारीपन)।
  • गर्दन घुमाते ही नसों में एक अजीब सा खिंचाव महसूस होना।
  • ऑफिस की कुर्सी पर थोड़ी देर क्या बैठे, दर्द का बढ़ जाना
  • कंधों और पीठ के ऊपरी हिस्से में हर वक्त एक अजीब सा तनाव रहना।

क्या गर्दन में आवाज़ आना हमेशा खतरनाक होता है? 

कभी-कभार अंगड़ाई लेते वक्त या स्ट्रेचिंग करते समय ऐसी आवाज़ आना बिल्कुल नॉर्मल है। 

लेकिन हां, कब आपको सावधान हो जाना चाहिए? अगर आवाज़ के साथ-साथ आपको गर्दन में तेज दर्द रहने लगा है, सिर अक्सर भारी रहता है, या फिर लैपटॉप पर काम करते ही आपकी हालत खराब होने लगती है, तो समझ जाइए कि आपकी गर्दन के जोड़, मांसपेशियां या नसें अब और दबाव झेलने के मूड में नहीं हैं।

गर्दन में Crepitus क्यों बढ़ रहा है? 

इसके पीछे हमारी आज की बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल का बहुत बड़ा हाथ है:

  • टेक्स्ट नेक: हम लोग पूरे दिन थोबड़ा नीचे करके मोबाइल में घुसे रहते हैं। इससे गर्दन के जोड़ों पर इतना प्रेशर पड़ता है कि वो सख्त हो जाते हैं।
  • लगातार बैठे रहना: बिना हिले-डुले घंटों कंप्यूटर के सामने जमे रहने से मांसपेशियां जाम हो जाती हैं। फिर जैसे ही गर्दन घुमाओ, 'कट' से आवाज़ आती है।
  • तकिए से दुश्मनी: कई लोगों को बहुत ऊंचा या कड़क तकिया लगाने की आदत होती है। यह आदत रातभर में आपकी गर्दन का पोस्चर बिगाड़ देती है।
  • उम्र का तकाजा: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हड्डियों और जोड़ों में थोड़ा-बहुत घिसाव (Wear and Tear) होना लाजमी है। इस वजह से भी लुब्रिकेशन कम होता है और आवाज़ें बढ़ने लगती हैं।

किन लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है? 

सीधी बात है, जो लोग एक ही जगह पर घंटों बुत बनकर बैठे रहते हैं, उन्हें यह समस्या सबसे पहले घेरती है। आईटी प्रोफेशनल्स, दिनभर रील्स देखने वाले, गलत पोस्चर में सोने वाले और वो लोग जो पूरे दिन में थोड़ी-बहुत स्ट्रेचिंग या एक्सरसाइज करने से कतराते हैं ये बीमारी इन्हीं लोगों को ढूंढती है। 

आयुर्वेद गर्दन की इस समस्या को कैसे देखता है? 

आयुर्वेद इस मामले में थोड़ा अलग और गहरा नज़रिया रखता है। आयुर्वेद कहता है कि गर्दन की यह कड़कड़ाहट सिर्फ हड्डियों की दिक्कत नहीं है, बल्कि यह शरीर में 'वात दोष' के बिगड़ने का इशारा है।

जब हमारी लाइफ में स्ट्रेस बढ़ता है, हम गलत तरीके से बैठते हैं, रात-रात भर जागते हैं और शरीर को आराम नहीं देते, तो वात कुपित हो जाता है। इसी वजह से नसों में खिंचाव, सूखापन और चक्कर जैसी दिक्कतें आती हैं। इसलिए आयुर्वेद सिर्फ गर्दन पर बाम लगाने की सलाह नहीं देता, बल्कि यह कहता है कि अपनी पूरी लाइफस्टाइल, खान-पान और दिनचर्या को सुधारो, ताकि शरीर का खोया हुआ संतुलन वापस लौट सके।

उपचार में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक औषधियां

अब बात करते हैं इसके इलाज की। जब गर्दन की यह कड़कड़ाहट और जकड़न हद से बढ़ने लगे, तो आयुर्वेद की ये जादुई जड़ी-बूटियां वाकई किसी वरदान से कम नहीं लगतीं। ये केवल दर्द को नहीं दबातीं, बल्कि वात को शांत करके नसों को अंदर से मजबूत बनाती हैं।

  • अश्वगंधा: इसे आयुर्वेद का पावरहाउस समझ लीजिए। यह गर्दन की थकी-हारी मांसपेशियों को ताकत देती है और अकड़न को छू मंतर करने में बड़ी मददगार है।
  • दशमूल: जब दर्द और जकड़न बर्दाश्त से बाहर होने लगे, तब दशमूल का काढ़ा या दवा शरीर को भीतर से शांत करती है।
  • ब्राह्मी: आप सोचेंगे गर्दन के दर्द में ब्राह्मी का क्या काम? जनाब, जब दर्द की वजह से स्ट्रेस और बेचैनी बढ़ती है, तो ब्राह्मी दिमाग को रिलैक्स करके सुकून देती है।
  • गिलोय: इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ यह शरीर के अंदरूनी सिस्टम को बैलेंस करने का काम बखूबी करती है।
  • त्रिफला: पेट साफ तो हर बीमारी हाफ! त्रिफला आपके डाइजेशन को दुरुस्त रखता है ताकि शरीर में टॉक्सिंस न जमा हों, जो दर्द बढ़ाते हैं।

पंचकर्म और थेरेपी: जब हाथों का जादू काम आता है

सिर्फ दवाएं ही नहीं, आयुर्वेद की कुछ खास थेरेपीज़ आपकी जाम हो चुकी गर्दन को वापस पानी की तरह लचीला बना सकती हैं:

  • अभ्यंग: इसमें हल्के गुनगुने औषधीय तेल से गर्दन और कंधों की प्यार से मालिश की जाती है। सच मानिए, आधी जकड़न तो इस थेरेपी के तुरंत बाद ही गायब महसूस होने लगती है।
  • स्वेदन: मालिश के बाद जब गर्दन पर हर्बल भाप दी जाती है, तो नसें पूरी तरह खुल जाती हैं।
  • ग्रीवा बस्ती: यह बड़ी कमाल की तकनीक है। उड़द के आटे से गर्दन पर एक बाउंड्री बनाई जाती है और उसमें गुनगुना औषधीय तेल भरकर कुछ देर रखा जाता है। यह गर्दन के जोड़ों को अंदर तक तर कर देता है।
  • शिरोधारा: माथे पर जब गुनगुने तेल की बारीक धार गिरती है, तो सारा मानसिक तनाव और सिर का भारीपन जैसे कहीं हवा हो जाता है।
  • योग और प्राणायाम: गर्दन की हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग और गहरी सांस लेने का अभ्यास आपकी रीढ़ की हड्डी को हमेशा जवां रखता है।

सहायक आहार: क्या खाएं और क्या न खाएं

गर्दन की जकड़न और आवाज़ की परेशानी में खानपान का ध्यान रखना भी  ज़रूरी माना जाता है। सही भोजन शरीर को हल्का और आरामदायक महसूस कराने में मदद कर सकता है।

क्या खाएं?

  • ताजा और हल्का भोजन
  • हरी सब्जियां और मौसमी फल
  • गुनगुना पानी
  • मूंग दाल और हल्का खाना
  • सीमित मात्रा में घी
  • भीगे हुए मेवे

क्या न खाएं?

  • बहुत तला-भुना खाना
  • ज्यादा ठंडी चीजें
  • बहुत ज्यादा चाय और कॉफी
  • पैकेट वाला खाना
  • देर रात तक जागना
  • लंबे समय तक खाली पेट रहना

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम बी. एन. त्रिपाठी है और मैं ग्वालियर का रहने वाला हूँ। मेरी पत्नी रेखा त्रिपाठी पिछले 5 सालों से सर्वाइकल की समस्या से परेशान थीं। उन्हें गर्दन, कंधों और हाथों में लगातार दर्द रहता था। हमने कई एलोपैथिक डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन दवा बंद करते ही दर्द फिर शुरू हो जाता था।

फिर हमने अक्टूबर 2019 में जीवा आयुर्वेद में इलाज शुरू किया। करीब 2 महीने के अंदर ही गर्दन, हाथों और कंधों के दर्द में काफी राहत मिलने लगी। आज उनकी सर्वाइकल की समस्या में बहुत अच्छा सुधार है और उन्हें पहले जैसा दर्द नहीं होता। इसके लिए हम जीवा आयुर्वेद का धन्यवाद करते हैं।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

हर बार गर्दन की आवाज़ नॉर्मल नहीं होती। अगर आपको 'कट-कट' के साथ नीचे लिखी कोई भी बात महसूस हो, तो घर पर बैठने के बजाय तुरंत अच्छे डॉक्टर को दिखाएं:

निष्कर्ष

गर्दन से आवाज़ आना कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे आप डर जाएं। अक्सर यह हमारे गलत तरीके से बैठने, घंटों मोबाइल में आंखें गड़ाए रखने या फिजिकल एक्टिविटी न करने की वजह से हमारी मांसपेशियों का एक अलर्ट सिग्नल होता है। लेकिन हां, अगर इसके साथ दर्द, चक्कर या झनझनाहट का कॉम्बिनेशन मिल जाए, तो अलर्ट हो जाइए। अपनी लाइफस्टाइल बदलिए, सही पोस्चर अपनाइए और आयुर्वेद की मदद से शरीर का बैलेंस बनाए रखिए आपकी गर्दन हमेशा आपका साथ देगी!

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

कई लोगों को गर्दन घुमाने पर हल्की “टक-टक” या “क्रैक” जैसी आवाज महसूस हो सकती है। अगर इसके साथ दर्द, जकड़न या चक्कर नहीं हैं, तो हर बार चिंता की बात नहीं मानी जाती। लेकिन अगर आवाज बार-बार आए और परेशानी भी हो, तो उसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

यह कई कारणों से हो सकता है, जैसे गर्दन की जकड़न, लंबे समय तक झुककर बैठना, मांसपेशियों में खिंचाव या गर्दन के जोड़ों पर दबाव बढ़ना। लगातार मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल भी इसका एक कारण हो सकता है।

अगर आवाज के साथ दर्द, अकड़न, हाथों में झनझनाहट या सिर भारी लगना भी महसूस हो रहा है, तो यह गर्दन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सही जांच  ज़रूरी मानी जाती है।

कुछ लोगों में गर्दन की जकड़न और नसों पर दबाव बढ़ने की वजह से सिर भारी लगना या हल्के चक्कर जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। खासकर गर्दन घुमाने पर परेशानी बढ़ सकती है।

हाँ, लंबे समय तक झुककर बैठना, गलत तकिया इस्तेमाल करना और लगातार एक ही स्थिति में काम करना गर्दन पर दबाव बढ़ा सकता है, जिससे आवाज और जकड़न दोनों बढ़ सकते हैं।

नहीं। हर आवाज का मतलब सर्वाइकल समस्या नहीं होता। कई बार सामान्य जॉइंट मूवमेंट की वजह से भी आवाज महसूस हो सकती है। लेकिन अगर साथ में दर्द या अकड़न हो, तो ध्यान देना  ज़रूरी है।

आयुर्वेद में गर्दन की जकड़न, अकड़न और आवाज को शरीर में बढ़े हुए वात असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है। उपचार में शरीर के संतुलन, मांसपेशियों को आराम और जीवनशैली सुधारने पर ध्यान दिया जाता है।

मोबाइल कम झुककर इस्तेमाल करें, सही मुद्रा में बैठें, बीच-बीच में गर्दन को आराम दें और लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें। हल्की स्ट्रेचिंग भी मदद कर सकती है।

हाँ, लगातार तनाव और मानसिक दबाव की वजह से गर्दन की मांसपेशियां कड़ी हो सकती हैं। इससे गर्दन भारी लगना, अकड़न और आवाज जैसी परेशानी बढ़ सकती है।

अगर गर्दन की आवाज के साथ तेज दर्द, हाथों में कमजोरी, झनझनाहट, चक्कर या रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने लगे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना  ज़रूरी माना जाता है।

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