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Vertigo और Cervical - चक्कर का असली कारण आपकी गर्दन हो सकती है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 21 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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अक्सर हम बार-बार आने वाले चक्कर को सिर्फ कमज़ोरी, लो बीपी या थकान मानकर टाल देते हैं। लेकिन इसका असली कनेक्शन आपकी गर्दन से भी हो सकता है। आजकल फोन या लैपटॉप पर घंटों सिर झुकाकर काम करने वालों में यह दिक्कत आम हो गई है।

जब गर्दन की नसों में खिंचाव आता है और जकड़न बढ़ती है, तो शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है। ऐसे में सिर भारी होना, आंखों के आगे अंधेरा छाना या ऐसा लगना कि सब गोल-गोल घूम रहा है ये सर्वाइकल के लक्षण हो सकते हैं। ज़रूरी नहीं कि हर चक्कर का कारण दिमाग या कान की बीमारी ही हो, इसलिए इसे हल्के में बिल्कुल न लें।

वर्टिगो आखिर क्या होता है?

वर्टिगो कोई आम चक्कर नहीं है। इसमें ऐसा लगता है मानो आपके आस-पास का पूरा कमरा तेज़ी से घूम रहा है, जबकि असल में सब अपनी जगह पर टिका होता है। यह सीधे तौर पर शरीर के बैलेंसिंग सिस्टम (संतुलन तंत्र) के बिगड़ने का इशारा है।

इसमें इंसान को सीधे खड़े होने, चलने या हल्का सा सिर घुमाने में भी डर लगता है। इसके साथ ही उल्टी जैसा मन होना (जी मिचलाना), सिर का भारीपन और डगमगाना इसके आम लक्षण हैं। वर्टिगो का अटैक एकदम अचानक भी आ सकता है।

साधारण चक्कर और वर्टिगो में क्या अंतर है?

लोग अक्सर इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन इनके बीच बड़ा फर्क है। सही इलाज के लिए यह अंतर समझना बहुत ज़रूरी है:

  • साधारण चक्कर (Dizziness): यह कमज़ोरी, खाली पेट रहना, कम पानी पीना या बीपी लो होने की वजह से आता है। इसमें शरीर में एकदम से कमज़ोरी लगती है या आंखों के आगे कुछ सेकंड के लिए अंधेरा छा जाता है। लेकिन इसमें आपको आस-पास की चीजें घूमती हुई नहीं दिखतीं।
  • वर्टिगो (Vertigo): इसमें आपको खुद के बजाय आस-पास की दुनिया घूमती हुई महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे पैर के नीचे से ज़मीन हिल रही है या आप किसी गोल झूले पर बैठे हैं। इसमें शरीर का बैलेंस पूरी तरह आउट हो जाता है।

वर्टिगो के दौरान दिखाई देने वाले सामान्य लक्षण

वर्टिगो केवल चक्कर आने तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ शरीर में कई दूसरी परेशानियां भी महसूस हो सकती हैं, जो रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगती हैं।

  • सिर भारी लगना: कई लोगों को सिर में भारीपन या दबाव जैसा महसूस हो सकता है।
  • आंखों के सामने धुंधलापन: चलते समय या अचानक उठने पर नज़र धुंधली लग सकती है।
  • चलने में असंतुलन: सीधा चलने में परेशानी या शरीर डगमगाने जैसा एहसास हो सकता है।
  • कानों में आवाज आना: कभी-कभी कानों में भनभनाहट या आवाज सुनाई दे सकती है।
  • गर्दन घुमाने पर लक्षण बढ़ना: कुछ लोगों में गर्दन घुमाते ही चक्कर या असंतुलन ज्यादा महसूस होने लगता है। यह गर्दन से जुड़ी समस्या की ओर संकेत कर सकता है।

वर्टिगो होने के क्या कारण हो सकते हैं?

वर्टिगो कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। यह केवल एक साधारण चक्कर नहीं, बल्कि शरीर के संतुलन तंत्र में गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है।

  • गर्दन की समस्या (सर्वाइकल): गर्दन की जकड़न या नसों पर दबाव बढ़ने से शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
  • कान के अंदरूनी हिस्से की समस्या: शरीर का संतुलन नियंत्रित करने वाला हिस्सा कान के अंदर मौजूद होता है। इसमें गड़बड़ी होने पर घूमने जैसा एहसास हो सकता है।
  • कम रक्तचाप: अचानक खड़े होने या कमजोरी की स्थिति में रक्तचाप कम होने से चक्कर महसूस हो सकते हैं।
  • नींद की कमी और थकान: शरीर को पर्याप्त आराम न मिलने पर भी संतुलन प्रभावित हो सकता है।
  • नसों या दिमाग से जुड़ी कुछ स्थितियां: कुछ मामलों में नसों से जुड़ी समस्याएं भी वर्टिगो का कारण बन सकती हैं।

सर्वाइकल क्या है और क्यों होता है?

सर्वाइकल गर्दन से जुड़ी समस्या है, जिसमें गर्दन की हड्डियों, नसों या मांसपेशियों पर दबाव बढ़ने लगता है। इससे गर्दन दर्द, जकड़न, सिर भारी लगना और कई बार चक्कर जैसी परेशानी महसूस हो सकती है।

यह समस्या कई कारणों से हो सकती है:

आजकल खराब जीवनशैली और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत के कारण यह समस्या काफी आम होती जा रही है।

गर्दन की दिक्कत से चक्कर क्यों आने लगते हैं?

असल में, जब गर्दन की नसें और मांसपेशियां बहुत ज्यादा अकड़ जाती हैं, तो दिमाग तक जाने वाले सिग्नल गड़बड़ा जाते हैं। इसका सीधा असर हमारे शरीर के बैलेंस पर पड़ता है। कई बार गर्दन के हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन (खून का बहाव) भी धीमा हो जाता है। इसी वजह से सिर भारी लगने लगता है, चलते हुए पैर लड़खड़ाते हैं या ऐसा महसूस होता है कि सब गोल-गोल घूम रहा है। कुछ लोगों को तो सिर्फ गर्दन मोड़ने पर ही अचानक तेज़ चक्कर आ जाता है।

क्या हर चक्कर सर्वाइकल की वजह से होता है?

बिल्कुल नहीं। अगर आपको चक्कर आ रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको सर्वाइकल ही है। चक्कर आने के और भी कई कारण हो सकते हैं। कान के अंदर कोई दिक्कत, बीपी लो होना, माइग्रेन, बहुत ज्यादा टेंशन लेना या नसों की कोई और बीमारी ये सब भी चक्कर ला सकते हैं।

इसलिए गूगल देखकर खुद से डॉक्टर न बनें। अगर आपको बार-बार चक्कर आ रहे हैं, चलने में बैलेंस बिगड़ रहा है या ऑफिस और घर के काम करने में परेशानी हो रही है, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से चेकअप करवाएं ताकि असली वजह पता चल सके।

किन लोगों में Cervical Vertigo (गर्दन वाले चक्कर) का खतरा ज्यादा होता है?

आजकल की हमारी खराब लाइफस्टाइल की वजह से कुछ लोगों में इसका रिस्क काफी ज्यादा होता है, खासकर वो लोग जिनकी गर्दन पर लगातार प्रेशर बना रहता है:

  • जो लोग घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप पर गर्दन झुकाकर काम करते हैं।
  • जिनकी नज़रें हमेशा मोबाइल स्क्रीन पर गड़ी रहती हैं।
  • जो बहुत ज्यादा सफर (ट्रैवलिंग) करते हैं।
  • सोते समय बहुत मोटा या गलत शेप वाला तकिया लगाने वाले लोग।
  • जिनका काम दिनभर बैठे रहने का है और जो कोई एक्सरसाइज नहीं करते।
  • हर वक्त टेंशन या स्ट्रेस लेने वाले लोग।
  • जिन्हें पहले कभी गर्दन में कोई पुरानी चोट लगी हो।
  • बढ़ती उम्र वाले या 40-50 पार कर चुके लोग।

आयुर्वेद सर्वाइकल और वर्टिगो को कैसे देखता है?

बार-बार चक्कर आना, शरीर का डगमगाना या गर्दन का जकड़ जाना कोई आम शारीरिक थकावट या दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद इसे सीधे तौर पर शरीर में भड़के हुए वात दोष और ऊर्जा के बिगड़े हुए तालमेल से जोड़ता है। दरअसल, हमारे शरीर की मूवमेंट, नसों के कामकाज और पूरे बैलेंस को वात ही कंट्रोल करता है। जैसे ही इस वात का संतुलन बिगड़ता है, शरीर में दर्द, कंपकंपी, जकड़न, सूखापन और अस्थिरता शुरू हो जाती है। गर्दन में जो लगातार खिंचाव बना रहता है, वह भी इसी बढ़े हुए वात की सबसे पक्की निशानी है।

जब गर्दन के हिस्से में रूखापन और अकड़न बढ़ने लगती है, तो वहां की नसों और मांसपेशियों का काम बुरी तरह प्रभावित होता है। इसी रुकावट की वजह से सिर हमेशा भारी लगने लगता है, अचानक चक्कर आते हैं और कई बार चलते-चलते शरीर का बैलेंस बिगड़ने जैसी परेशानियां सामने आने लगती हैं।

सर्वाइकल और वर्टिगो का आयुर्वेदिक नजरिया

आयुर्वेद में इस सर्वाइकल या वर्टिगो को कोई मामूली गर्दन का दर्द मानकर टालना भारी पड़ सकता है। असल में ये आपकी उल्टी-सीधी दिनचर्या, दिन भर की दिमागी टेंशन और भड़के हुए वात का ही नतीजा है। हम सिर्फ एक दर्द की गोली देकर बात नहीं टालते, बल्कि इस बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने पर काम करते हैं ताकि शरीर अंदर से मज़बूत बने।

  • वात का संतुलन: शरीर में वात ज़रा भी उखड़े, तो गर्दन पूरी तरह अकड़ जाती है और बैलेंस बिगड़ जाता है। इस हवा को शांत करना सबसे ज़रूरी है। 
  • गर्दन की जकड़न: घंटों तक फोन पर आंखें गड़ाए रखने से नसें पत्थर की तरह सख्त हो जाती हैं। देसी तरीकों से इन नसों को वापस ढीला किया जाता है। 
  • स्ट्रेस कंट्रोल: फ़िक्र और टेंशन सीधे आपके बैलेंस को हिलाकर रख देते हैं। दिमाग को एकदम शांत रखना ही इसका सबसे पक्का इलाज है। 
  • पाचन मज़बूत करना: अगर आपका पाचन ही बैठ गया है और पेट में गैस बन रही है, तो सिर तो भारी होगा ही। पेट को एकदम हल्का रखना पहली सीढ़ी है। 
  • सही पोस्चर: फोन या लैपटॉप पर ऐसे झुककर बैठना ही तो सर्वाइकल की असल जड़ है। रोज़ सही तरीके से बैठना और चलते-फिरते रहना ही इसका पक्का इलाज है, जिसे लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर बैठते हैं।

चक्कर और दर्द के लिए आयुर्वेदिक दवाएं

ये रही कुछ ऐसी गज़ब की देसी औषधियाँ, जो नसों में नई जान फूंकती हैं और शरीर का हिलता हुआ बैलेंस वापस ले आती हैं।

  • अश्वगंधा: थकान और टेंशन को जड़ से मिटाने के लिए इससे बढ़िया कुछ नहीं। यह कमज़ोर नसों को अंदर से गज़ब की ताकत देती है। 
  • ब्राह्मी: दिमागी बेचैनी के लिए यह एकदम रामबाण है। अचानक से जो तेज़ चक्कर आते हैं, ये उन्हें बहुत बढ़िया तरीके से रोक लेती है। 
  • गिलोय: यह शरीर की अंदरूनी सूजन और गंदगी को बाहर निकालकर आपको अंदर से तगड़ा बना देती है। 
  • त्रिफला: पेट को एकदम साफ़ रखने का ये सबसे पुराना नुस्खा है। गैस नहीं बनेगी तो सिर का भारीपन भी अपने आप खत्म हो जाएगा। 
  • दशमूल: यह जड़ी-बूटियों का वो कमाल का मेल है, जो गर्दन की पुरानी से पुरानी जकड़न को जड़ से खोल देता है और वात को बिल्कुल शांत कर देता है।

आराम दिलाने वाली खास थेरेपी

इन पुराने देसी तरीकों से गर्दन और रीढ़ की हड्डी का सारा तनाव खिंचकर बाहर आ जाता है और चक्करों में तो बस पल भर में सुकून मिल जाता है।

  • अभ्यंग (तेल मालिश): गुनगुने आयुर्वेदिक तेल से जब गर्दन और कंधों की बढ़िया मालिश होती है, तो नसों का खिंचाव तुरंत गायब हो जाता है और दर्द में बहुत ज़्यादा आराम मिलता है। 
  • स्वेदन (भाप): मालिश के बाद जब जड़ी-बूटियों की भाप लगती है, तो एकदम पत्थर हो चुकी नसें भी पिघलकर ढीली हो जाती हैं। 
  • शिरोधारा: माथे पर लगातार तेल की धार गिराने से नसों की गर्मी और टेंशन तुरंत शांत हो जाती है। घबराहट और चक्कर भगाने में यह किसी जादू से कम नहीं है। 
  • योग और प्राणायाम: गर्दन की हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग और गहरी सांसें लेने से दिमाग तक भरपूर हवा पहुँचती है, जिससे चक्कर आने एकदम बंद हो जाते हैं।

सहायक आहार: क्या खाएं और क्या न खाएं

संतुलित भोजन शरीर और नसों को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।

क्या खाएं?

  • ताजा और हल्का भोजन
  • हरी सब्जियां और मौसमी फल
  • गुनगुना पानी
  • मूंग दाल और सुपाच्य भोजन
  • सीमित मात्रा में घी
  • सूखे मेवे और पौष्टिक आहार

क्या न खाएं?

  • बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन
  • अत्यधिक ठंडी चीजें
  • बहुत ज्यादा चाय और कॉफी
  • पैकेट बंद और कृत्रिम खाद्य पदार्थ
  • देर रात तक जागना
  • लंबे समय तक खाली पेट रहना

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम रेखा है और मैं ग्वालियर से हूँ। पिछले लगभग 5 सालों से मैं सर्वाइकल और थायरॉइड की समस्या से बहुत परेशान थी। मैं एलोपैथिक इलाज ले रही थी, दवाइयाँ लेने तक थोड़ी राहत मिलती थी, लेकिन जैसे ही दवा बंद होती, समस्या फिर से शुरू हो जाती थी। मेरे गर्दन, पीठ और कंधे में लगातार दर्द रहता था और हाथों में सुन्नपन भी महसूस होता था। इस वजह से मेरी दिनचर्या काफी प्रभावित हो गई थी और मैं बहुत परेशान रहने लगी थी। इसी दौरान मुझे एक जैन डॉक्टर के माध्यम से जीवा आयुर्वेद के बारे में पता चला और उनकी सलाह पर मैं वहाँ गई। डॉक्टरों ने मेरी पूरी स्थिति को समझकर उपचार शुरू किया। मुझे दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी सही सलाह दी गई। धीरे-धीरे मुझे आराम मिलने लगा और मेरी तकलीफों में काफी सुधार आया। अब मैं पहले से बेहतर महसूस करती हूँ।

कब डॉक्टर से सलाह लें?

गर्दन दर्द और चक्कर को केवल थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर जब यह रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे।

  • बार-बार घूमने जैसा एहसास होना
  • चलते समय संतुलन बिगड़ना
  • गर्दन में लगातार दर्द और जकड़न रहना
  • सिर भारी लगना या धुंधलापन महसूस होना
  • गर्दन घुमाने पर चक्कर बढ़ जाना
  • मितली या उल्टी जैसा महसूस होना
  • लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल इस्तेमाल करने पर परेशानी बढ़ना
  • कई हफ्तों तक लक्षण लगातार बने रहना

निष्कर्ष

सर्वाइकल और वर्टिगो को केवल सामान्य गर्दन दर्द या साधारण चक्कर मानना सही नहीं माना जाता। यह शरीर के संतुलन, नसों, मानसिक तनाव और जीवनशैली से जुड़ी स्थिति हो सकती है। आधुनिक चिकित्सा इसे गर्दन की हड्डियों, नसों या संतुलन तंत्र की गड़बड़ी से जोड़कर देखती है, जबकि आयुर्वेद इसे मुख्य रूप से बढ़े हुए वात दोष, गर्दन की जकड़न और असंतुलित दिनचर्या से जुड़ी समस्या मानता है।

लगातार मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग, गलत बैठने की आदत, तनाव और शरीर को पर्याप्त आराम न देना इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल चक्कर रोकने के बजाय शरीर, गर्दन और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाए रखना लंबे समय तक राहत के लिए जरूरी माना जाता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हां, लगातार नीचे झुककर मोबाइल देखने से गर्दन पर दबाव बढ़ सकता है। इससे गर्दन की मांसपेशियां कड़ी होने लगती हैं और शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है। कुछ लोगों में इससे सिर भारी लगना और चक्कर जैसी परेशानी बढ़ सकती है। लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना समस्या को और बढ़ा सकता है। इसलिए बीच-बीच में गर्दन को आराम देना जरूरी माना जाता है।

कुछ लोगों में सुबह उठते समय गर्दन की जकड़न ज्यादा महसूस होती है। यदि गर्दन पर दबाव बना हुआ हो, तो अचानक उठने पर असंतुलन या घूमने जैसा एहसास हो सकता है। हालांकि हर बार ऐसा होना केवल सर्वाइकल की वजह से नहीं माना जाता। शरीर की दूसरी स्थितियाँ भी इसका कारण हो सकती हैं। लगातार परेशानी होने पर सही जांच जरूरी मानी जाती है।

लगातार मानसिक तनाव शरीर और नसों दोनों को प्रभावित कर सकता है। तनाव की वजह से गर्दन और कंधों की मांसपेशियां कड़ी होने लगती हैं। इससे सिर भारी लगना, बेचैनी और अस्थिरता जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। कई लोगों में तनाव चक्कर की तीव्रता बढ़ा सकता है। इसलिए मानसिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

नहीं, आजकल यह समस्या कम उम्र के लोगों में भी तेजी से देखी जा रही है। लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करना, मोबाइल का अधिक उपयोग और गलत बैठने की आदत इसके बड़े कारण माने जाते हैं। कई युवा लोगों में भी गर्दन दर्द और चक्कर जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। खराब जीवनशैली इस समस्या को जल्दी बढ़ा सकती है।

बहुत ऊंचा या बहुत कठोर तकिया गर्दन की स्थिति बिगाड़ सकता है। इससे सोते समय गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। कई लोगों को सुबह उठने पर गर्दन जकड़ी हुई और सिर भारी महसूस हो सकता है। लगातार ऐसा होने पर चक्कर जैसी परेशानी भी बढ़ सकती है। इसलिए आरामदायक और संतुलित तकिया का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।

लगातार कई घंटों तक एक ही स्थिति में बैठकर गाड़ी चलाने से गर्दन पर दबाव बढ़ सकता है। सड़क के झटके और गलत बैठने की मुद्रा भी मांसपेशियों में तनाव पैदा कर सकती है। इससे गर्दन दर्द, अकड़न और सिर भारी लगने की परेशानी बढ़ सकती है। कुछ लोगों में इसके कारण असंतुलन भी महसूस हो सकता है।

शरीर और दिमाग को संतुलित रखने के लिए पर्याप्त नींद जरूरी मानी जाती है। लगातार कम नींद लेने से शरीर में थकान और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इससे सिर भारी लगना और चक्कर जैसी समस्याएँ अधिक महसूस हो सकती हैं। अच्छी नींद शरीर को स्थिर रखने में मदद करती है।

यदि गर्दन पहले से जकड़ी हुई हो या उसमें दबाव बना हुआ हो, तो अचानक गर्दन घुमाने पर चक्कर महसूस हो सकते हैं। कुछ लोगों को ऐसा लग सकता है जैसे शरीर का संतुलन बिगड़ गया हो। यह स्थिति गर्दन की मांसपेशियों और नसों पर असर पड़ने से जुड़ी हो सकती है। इसलिए गर्दन को धीरे-धीरे घुमाना और झटके से बचना जरूरी माना जाता है।

हां, लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियां कमजोर और कड़ी हो सकती हैं। इससे शरीर का संतुलन और गर्दन की लचक प्रभावित हो सकती है। कई लोगों में इससे दर्द और चक्कर दोनों बढ़ सकते हैं। बीच-बीच में शरीर को हिलाना और हल्की गतिविधि करना लाभकारी माना जाता है।

कुछ लोगों को ठंड या मौसम में बदलाव के दौरान गर्दन की जकड़न ज्यादा महसूस हो सकती है। इससे सिर भारी लगना और अस्थिरता जैसी परेशानी बढ़ सकती है। ठंडी हवा और शरीर में अकड़न कई बार चक्कर की समस्या को बढ़ा सकती हैं। ऐसे समय पर शरीर को गर्म और आरामदायक रखना उपयोगी माना जाता है।

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