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Office Worker को कमर दर्द — Chair, Posture या असली कारण कुछ और है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 15 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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सुबह 9 बजे ऑफिस की कुर्सी पर बैठना और शाम 6 बजे तक लगातार स्क्रीन के सामने जमे रहना। बीच-बीच में मीटिंग्स, डेडलाइन्स का प्रेशर और कॉफी के अनगिनत कप। इस कॉर्पोरेट भागदौड़ के बीच, जब अचानक कुर्सी से उठते समय कमर में एक तेज़ हूक सी उठती है या रीढ़ की हड्डी में भारी जकड़न महसूस होती है, तो हम अक्सर अपनी कुर्सी Chair को दोष देते हैं या इसे गलत पोश्चर का नतीजा मानकर इग्नोर कर देते हैं।

लेकिन क्या यह सिर्फ एक खराब कुर्सी का नतीजा है? बिल्कुल नहीं। यह साधारण थकावट या सिर्फ पोश्चर की समस्या नहीं है; यह आपके शरीर के उस मुख्य स्तंभ Spine की चीख है जो लगातार बैठे रहने, शारीरिक निष्क्रियता और मानसिक तनाव के भारी बोझ तले कुचला जा रहा है। जब यह कमर दर्द आपकी रोज़ की आदत बन जाए, तो समझ लीजिए कि समस्या सिर्फ आपकी कुर्सी में नहीं, बल्कि आपके शरीर के अंदरूनी सिस्टम में है, जिसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर आपको स्लिप डिस्क Slipped Disc या साइटिका Sciatica जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकता है।

लगातार होने वाला यह कमर दर्द शरीर में क्या संकेत देता है?

लगातार 8-9 घंटे एक ही जगह बैठे रहना हमारे शरीर की बनावट के खिलाफ है। मानव शरीर चलने-फिरने के लिए बना है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली ने इसे एक कुर्सी तक सीमित कर दिया है। यह निष्क्रियता कई गंभीर संकेत देती है:

  • लम्बर रीजन Lumbar Region पर भारी दबाव: जब हम घंटों बैठते हैं, तो शरीर का पूरा भार हमारी पीठ के निचले हिस्से L4-L5 vertebrae पर पड़ता है। यह लगातार दबाव रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क को कुचलने लगता है।
  • कोर मसल्स Core Muscles की कमज़ोरी: दिन भर बैठे रहने से पेट और पीठ की मांसपेशियाँ निष्क्रिय हो जाती हैं। कमज़ोर मांसपेशियाँ रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट नहीं दे पातीं, जिससे सीधा असर हड्डियों और नसों पर पड़ता है।
  • ब्लड सर्कुलेशन का रुकना: एक ही मुद्रा में लंबे समय तक बैठे रहने से कमर और पैरों की नसों में ब्लड सर्कुलेशन लगभग रुक जाता है। खून न पहुँचने से मांसपेशियाँ और नसें अंदर से सूखने और सिकुड़ने लगती हैं।
  • तनाव और कॉर्टिसोल: ऑफिस का मानसिक तनाव शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जिससे मांसपेशियाँ हमेशा एक 'फाइट या फ्लाइट' Fight or Flight मोड में रहकर कड़क और जकड़ी हुई रहती हैं।

कमर दर्द और नसों/मांसपेशियों का डैमेज किन प्रकारों में सामने आता है?

हर व्यक्ति का काम करने का तरीका और उसके शरीर की प्रकृति अलग होती है। डेस्क जॉब के कारण कमर पर पड़ने वाला यह दबाव शरीर के दोषों के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है:

  • वात-प्रधान कमर दर्द: इस स्थिति में कमर में भयंकर रूखापन और जकड़न आ जाती है। दर्द सुई चुभने जैसा तेज़ होता है और यह दर्द अक्सर कमर से होकर कूल्हों और पैरों तक Sciatica जाने लगता है। ठंडे एसी AC वाले ऑफिस में बैठे रहने से यह वात दोष Vata dosha और अधिक भड़क जाता है।
  • पित्त-प्रधान कमर दर्द: इसमें रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में दर्द के साथ-साथ जलन Burning sensation महसूस होती है। यह अक्सर इन्फ्लेमेशन Inflammation का संकेत है, जहाँ मांसपेशियों या नसों में भारी गर्मी और लालिमा आ जाती है।
  • कफ-प्रधान कमर दर्द: लगातार बैठे रहने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है। इसमें कमर में भारीपन और हल्का-हल्का मीठा दर्द Dull ache लगातार बना रहता है। सुबह उठने पर कमर में भारी जकड़न होती है जो थोड़ा चलने-फिरने के बाद ही कम होती है।

क्या आपके शरीर में भी कमर दर्द के ये शुरुआती लक्षण दिख रहे हैं?

स्पाइन का डैमेज रातों-रात नहीं होता। यह बहुत पहले से शरीर में अलार्म बजाता है, जिसे हम अक्सर काम की थकावट मानकर टाल देते हैं। अगर आपको रोज़ाना ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ:

  • कुर्सी से उठते समय परेशानी: घंटों बैठने के बाद जब आप खड़े होने की कोशिश करते हैं, तो कमर सीधी करने में तेज़ दर्द या जकड़न महसूस होना।
  • सुबह की भयंकर जकड़न Morning Stiffness: सुबह सोकर उठने पर कमर का पूरी तरह से अकड़ा हुआ होना और बिस्तर से उठने में तकलीफ होना।
  • पैरों में झुनझुनी या दर्द का उतरना: कमर का दर्द जब कूल्हों से होता हुआ जांघों और पैरों की पिंडलियों तक करंट की तरह दौड़ने लगे साइटिका के शुरुआती लक्षण।
  • लगातार भारीपन: कमर के निचले हिस्से में एक ऐसा मीठा-मीठा दर्द और भारीपन जो कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता।

इस दर्द को नज़रअंदाज़ करने में लोग क्या गलतियाँ करते हैं और उनकी जटिलताएँ?

ऑफिस का काम चालू रखने और दर्द से तुरंत राहत पाने की जल्दबाज़ी में, मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं जो समस्या को स्थायी बना देते हैं:

  • पेनकिलर्स और स्प्रे का रोज़ाना सेवन: दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना दर्द निवारक गोलियाँ खाना या पेन-रिलीफ स्प्रे लगाना सिर्फ दिमाग को दर्द के सिग्नल ब्लॉक करता है। इससे आपकी किडनी और लिवर डैमेज होते हैं, लेकिन दबी हुई नस या खिसकी हुई डिस्क वहीँ की वहीँ रहती है।
  • लंबोसेक्रल बेल्ट Lumbar Belt का गलत इस्तेमाल: बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार कमर में बेल्ट बाँधे रखना आपकी कमर की मांसपेशियों Core muscles को और भी ज़्यादा कमज़ोर कर देता है, क्योंकि वे खुद काम करना बंद कर देती हैं।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएँ: अगर इस दर्द को ठीक न किया जाए, तो यह समस्या स्लिप डिस्क Herniated Disc, स्पाइनल स्टेनोसिस Spinal Stenosis और साइटिका Sciatica का भयंकर रूप ले लेती है, जहाँ अंततः डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे देते हैं।

आयुर्वेद इस डेस्क-जॉब वाले कमर दर्द को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे लम्बर स्पोंडिलोसिस Lumbar Spondylosis या मस्कुलर स्पैज़्म कहता है, आयुर्वेद उसे 'कटी शूल' Kati Shula, 'कटी ग्रह' और वात दोष के गंभीर प्रकोप के विज्ञान से बहुत गहराई से समझता है।

  • अस्थि और मज्जा धातु का सूखना: लगातार बैठे रहने, गलत खानपान और तनाव से शरीर का अपान वात Apana Vata बिगड़ जाता है। यह बढ़ा हुआ वात कमर की हड्डियों अस्थि और उनके बीच की गद्दीनुमा डिस्क/नसों मज्जा धातु की प्राकृतिक नमी को सुखा देता है।
  • स्रोतस में रुकावट: घंटों एक ही मुद्रा में रहने से कमर के हिस्से में वात रूखापन बढ़ जाता है और ऊर्जा के चैनल Srotas ब्लॉक हो जाते हैं, जिससे जकड़न और भयंकर दर्द पैदा होता है।
  • जठराग्नि की अनदेखी और 'आम' का निर्माण: जब आप बैठे-बैठे अनहेल्दी खाना खाते हैं, तो कमज़ोर पाचन के कारण शरीर में 'आम' Toxins बनता है। यह विषैला 'आम' कमर के निचले हिस्से कटी प्रदेश में जाकर जमा हो जाता है और वात के साथ मिलकर दर्द और सूजन Inflammation को कई गुना बढ़ा देता है।

कमर की हड्डियों और मांसपेशियों को ताक़त देने वाली वात-शामक आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपकी कमर को कमज़ोर भी कर सकता है और उसे दोबारा ताक़तवर भी बना सकता है। वात को शांत करने और कमर दर्द से बचने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं फायदेमंद - नसों को चिकनाई देने वाले और वात शामक क्या न खाएं ट्रिगर फूड्स - रूखापन और गैस बढ़ाने वाले
अनाज Grains पुराना चावल, दलिया, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, रागी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, पिज़्ज़ा, रूखे बिस्कुट।
वसा Fats देसी गाय का शुद्ध घी हड्डियों के लिए अमृत, तिल का तेल, ऑलिव ऑयल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, बहुत अधिक मक्खन, डालडा।
सब्ज़ियाँ Vegetables लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद सभी अच्छी तरह पकी हुई। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, भारी कटहल, बैंगन, मटर गैस बनाने वाली।
फल और मेवे Fruits & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, पपीता, सेब, अंजीर। डिब्बाबंद और बिना मौसम के फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ Beverages हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध रात में, ताज़ा मट्ठा, अजवाइन का पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन कॉफी हड्डियों को सुखाती है, ठंडे कोल्ड ड्रिंक्स।

कमर दर्द को जड़ से खत्म करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के कमर के दर्द को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी डिस्क व मांसपेशियों को दोबारा ताक़त देते हैं:

  • अश्वगंधा Ashwagandha: कमर की कमज़ोर मांसपेशियों में दोबारा जान फूंकने और स्ट्रेस को कम करने के लिए यह एक अद्भुत रसायन है।
  • निर्गुण्डी Nirgundi: यह जड़ी-बूटी आयुर्वेद में वात रोगों और मांसपेशियों के भयंकर दर्द Muscle spasms को तेज़ी से खत्म करने के लिए सबसे अचूक मानी जाती है।
  • शल्लकी Shallaki: रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में आई सूजन Inflammation और जकड़न को कम करने में शल्लकी किसी जादुई औषधि से कम नहीं है।
  • रास्ना Rasna: शरीर में बढ़े हुए वात दोष को शांत करने और जोड़ों/कमर के दर्द को जड़ से मिटाने के लिए रास्ना का उपयोग सदियों से होता आ रहा है।
  • योगराज गुग्गुल Yograj Guggulu: यह शरीर में जमे हुए 'आम' को पचाकर बाहर निकालता है और कमर की गहराई में बैठे पुराने दर्द से स्थायी राहत देता है।

रीढ़ की हड्डी को खोलने और दर्द मिटाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और जकड़न बहुत गहराई तक आपकी कमर की डिस्क और नसों में जम चुकी हो, तो केवल मौखिक दवाइयाँ काफी नहीं होतीं। पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ शरीर को तुरंत हील करती हैं:

  • कटी बस्ती Kati Basti: कमर के निचले हिस्से Lumbosacral region पर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल जैसे सहचरादि या महानारायण तेल रोककर रखा जाता है। यह सूखी हुई डिस्क को भारी चिकनाई देता है और दबी हुई नसों को खोलता है।
  • अभ्यंग Abhyanga: गुनगुने वात-शामक तेलों से की जाने वाली संपूर्ण शारीरिक मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है और ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • पत्र पोटली स्वेद Patra Pinda Sweda: दर्द निवारक औषधीय पत्तों की पोटली बनाकर गर्म तेल के साथ सिकाई की जाती है, जो मांसपेशियों की ऐंठन और सूजन को जादुई तरीके से खींच लेती है।
  • स्वेदन Swedana: तेल की मालिश के बाद हर्बल जड़ी-बूटियों की भाप दी जाती है। यह स्वेदन थेरेपी पसीने के ज़रिए जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और जकड़न में तुरंत आराम देती है।

कमर के पूरी तरह रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

लगातार गलत पोश्चर और सिटिंग जॉब के कारण कमज़ोर हुई रीढ़ की हड्डी को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। कमर की भारी जकड़न व दर्द में भारी कमी आएगी। सुबह उठने पर होने वाली अकड़न कम होगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से हड्डियों और डिस्क का रूखापन खत्म होने लगेगा। पैरों तक जाने वाला दर्द अगर है लगभग खत्म हो जाएगा और कमर की मांसपेशियां वापस मज़बूत होने लगेगी।
  • 5-6 महीने: अस्थि और मज्जा धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी और आपका मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम रीबूट हो जाएगा। आप बिना किसी बेल्ट या पेनकिलर के एक सामान्य, ऊर्जावान जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

डेस्क जॉब से होने वाले कमर दर्द के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा Symptomatic care आयुर्वेद Holistic care
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए पेनकिलर्स, स्टेरॉयड इंजेक्शन या मसल रिलैक्सेंट देना। वात को शांत करना, 'आम' को पचाना और रीढ़ की हड्डी/मांसपेशियों को प्राकृतिक रूप से पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल स्पाइन या डिस्क की एक स्थानीय Local मैकेनिकल समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए अपान वात और अस्थि/मज्जा धातु के सूखने का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल पेनकिलर के साथ फिजियोथेरेपी की सलाह, लेकिन जठराग्नि या पेट साफ रहने पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता। वात-शामक डाइट, सही पोश्चर, कब्ज़ दूर करना क्योंकि कब्ज़ कमर दर्द बढ़ाती है और कटी बस्ती को बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर दर्द तुरंत वापस आ जाता है और भविष्य में सर्जरी Surgery का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम खुद को हील कर लेता है, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद स्पाइन की इस कमज़ोरी को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • मल-मूत्र पर नियंत्रण खोना Bowel/Bladder Incontinence: अगर आपको यूरिन पास करने में दिक्कत हो रही है या उस पर नियंत्रण नहीं रहा है यह कॉडा इक्विना सिंड्रोम हो सकता है।
  • पैरों में भयंकर सुन्नपन या लकवा: अगर आपके पैर अचानक बिल्कुल सुन्न पड़ जाएं या चलने में लड़खड़ाहट होने लगे।
  • गिरने के बाद अचानक तेज़ दर्द: अगर कमर दर्द किसी चोट या एक्सीडेंट के तुरंत बाद हुआ हो।
  • बुखार के साथ कमर दर्द: अगर कमर दर्द के साथ आपको लगातार तेज़ बुखार आ रहा हो या वज़न तेज़ी से घट रहा हो।

निष्कर्ष

कुर्सी पर बैठकर काम करना आज हमारे प्रोफेशन की मांग है, लेकिन उठते-बैठते समय कमर से निकलने वाली वह चीख आपकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा नहीं है। यह आपके शरीर का अलार्म है जो बता रहा है कि आपका वात दोष भड़क चुका है, स्पाइन की डिस्क सूख रही है और आपकी मांसपेशियां भारी दबाव में दम तोड़ रही हैं। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स और मलहम लगाकर दबाते हैं, तो आप अपनी कमर को हील करने के बजाय उसे स्थायी रूप से कमज़ोर कर रहे होते हैं। इस सिटिंग-जॉब के खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। हर एक घंटे में अपनी कुर्सी से उठकर स्ट्रेच करें, अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी और पोषण शामिल करें। अश्वगंधा, रास्ना और शल्लकी जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और कटी बस्ती व अभ्यंग मालिश से अपनी सूखी हुई स्पाइन को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। गलत कुर्सी को दोष देने से ज़्यादा अपने शरीर के पोश्चर और सिस्टम को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने पर ध्यान दें और आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

कुर्सी पर बैठते समय आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए और कमर के निचले हिस्से (Lumbar region) को कुर्सी का सपोर्ट मिलना चाहिए। आपके पैर ज़मीन पर पूरी तरह टिके होने चाहिए और घुटने कूल्हों के स्तर पर या उससे थोड़े नीचे होने चाहिए।

हाँ। बहुत ज़्यादा मुलायम गद्दे पर सोने से रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट नहीं मिलता और वह असामान्य मुद्रा में मुड़ जाती है, जिससे वात भड़कता है और सुबह उठने पर भारी जकड़न महसूस होती है। हमेशा एक फर्म (Firm) और आरामदायक गद्दे का इस्तेमाल करें।

बिल्कुल। आयुर्वेद के अनुसार, कमर का निचला हिस्सा अपान वात का स्थान है। जब कब्ज़ होती है, तो आंतों में गैस और रूखापन (वात) बढ़ जाता है, जो सीधे कमर की नसों और मांसपेशियों पर दबाव डालता है, जिससे कमर दर्द भयंकर रूप ले लेता है।

तेज़ दर्द या एक्यूट स्पाज़्म के समय भारी वजन उठाना या ज़्यादा झुकना बंद कर देना चाहिए। लेकिन पूरी तरह बेड रेस्ट करना मांसपेशियों को और कमज़ोर कर देता है। दर्द कम होने पर हल्के योगासन (जैसे मकरासन, भुजंगासन) करना फायदेमंद होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, कमर का दर्द और जकड़न मुख्य रूप से वात (रूखेपन और ठंडक) के कारण होता है। इसलिए वात-शामक गर्म औषधीय तेल से मालिश करने के बाद हल्की गर्म सिकाई (Steam/Heat) करना ही नसों को खोलने और दर्द मिटाने का सबसे सही तरीका है।

नहीं। लगातार बेल्ट पहनने से आपकी कमर की असली मांसपेशियां (Core muscles) काम करना बंद कर देती हैं और वे कमज़ोर (Atrophy) हो जाती हैं। बेल्ट का इस्तेमाल सिर्फ ट्रैवलिंग या भारी काम करते समय ही सीमित समय के लिए करना चाहिए।

लगातार बैठने से रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क सूख जाती है (मज्जा क्षय)। कटी बस्ती में कमर पर गर्म औषधीय तेल रोका जाता है, जो त्वचा के ज़रिए गहराई तक जाकर सूखी हुई डिस्क को चिकनाई (Lubrication) देता है और दबी हुई नसों को तुरंत आराम पहुँचाता है।

कुर्सी एक बाहरी कारण (Trigger) हो सकती है, लेकिन असली कारण आपके शरीर के अंदर का वात प्रकोप, कमज़ोर मांसपेशियां और खराब जठराग्नि है। अगर आपका शरीर अंदर से मज़बूत (धातु पोषण) है, तो एक साधारण कुर्सी भी आपको इतना नुकसान नहीं पहुंचा सकती।

कमर की खुश्की और दर्द के लिए हमेशा वात-शामक तेल (जैसे महानारायण तेल, धन्वंतरम तेल या शुद्ध तिल का तेल) का ही इस्तेमाल करना चाहिए। नारियल तेल की तासीर ठंडी होती है, जो वात को और बढ़ा सकती है। तिल के तेल पर आधारित औषधियां सबसे असरदार होती हैं।

साधारण कमर दर्द अक्सर केवल कमर या पीठ तक सीमित रहता है और आराम करने या सिकाई से ठीक हो जाता है। लेकिन स्लिप डिस्क में दबी हुई नस का दर्द कमर से शुरू होकर हिप्स और पैरों की उँगलियों तक (Sciatica) बिजली के झटके की तरह दौड़ता है और पैर में सुन्नपन भी आ सकता है।

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