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Period के समय Lower Back Pain — Normal है या Endometriosis का संकेत?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 14 May, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
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पीरियड्स के दिनों में कमर दर्द (लोअर बैक पेन) से जूझना लगभग हर दूसरी महिला की कहानी है। असल में होता क्या है कि इन दिनों गर्भाशय (यूट्रस) अपनी अंदरूनी पुरानी परत को शरीर से बाहर निकालने के लिए सिकुड़ता है। इसी सिकुड़न की वजह से हमारे पेल्विक एरिया (पेडू) और पेट के निचले हिस्से पर एक भारी दबाव पड़ता है, जो सीधा कमर में खिंचाव और दर्द के रूप में महसूस होता है।

थोड़ा बहुत दर्द होना तो एकदम नेचुरल है, जो एकाध दिन में बिना कुछ किए ही चला जाता है। आयुर्वेद कहता है कि यह वात के बिगड़ने और ब्लड फ्लो में होने वाले बदलावों का नतीजा है। लेकिन, अगर आपका दर्द बर्दाश्त के बाहर हो जाए, हर महीने बढ़ता ही रहे या लगातार बना रहे, तो इसे महज 'पीरियड पेन' कहकर इग्नोर करना बहुत भारी पड़ सकता है। अंदर ही अंदर यह किसी बड़ी परेशानी का अलार्म भी हो सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) क्या है और यह कैसे पनपता है?

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जहाँ गर्भाशय (यूट्रस) के अंदर बनने वाली परत (टिश्यू) अपनी जगह छोड़कर शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे ओवरीज या आंतों के आसपास पनपने और फैलने लगती है।

अब दिक्कत यहाँ से शुरू होती है। पीरियड्स आने पर, गर्भाशय के अंदर की परत तो टूटकर खून के रास्ते बाहर आ जाती है। लेकिन जो परत बाहर दूसरी जगहों पर बनी है, उसका खून शरीर से बाहर नहीं निकल पाता। वह अंदर ही अंदर इकट्ठा होने लगता है, जिससे वहां भारी सूजन, गांठें और जानलेवा दर्द शुरू हो जाती हैं। यह बीमारी रातों-रात नहीं बनती, बल्कि धीरे-धीरे शरीर में अपनी जड़ें जमाती है।

एंडोमेट्रियोसिस के संकेत और लक्षण

बात सिर्फ दर्द तक खत्म नहीं होती। हमारा शरीर कई और इशारे भी देता है, जिन्हें भागदौड़ के चक्कर में महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर बैठती हैं:

  • पीरियड्स में जानलेवा दर्द: यह कोई आम क्रैम्प नहीं होता। दर्द इतना तीखा होता है कि कई बार पेनकिलर भी बेअसर हो जाती हैं और उठना-बैठना भारी हो जाता है।
  • हर वक्त पेट में दर्द और भारीपन: पीरियड्स खत्म होने के बाद भी पेल्विक एरिया (पेट के निचले हिस्से) में एक अजीब सा दर्द और भारीपन हर वक्त बना रहता है।
  • बहुत ज्यादा ब्लीडिंग: पीरियड्स के दिनों में हद से ज्यादा खून जाना या फिर हफ्ते-हफ्ते भर तक ब्लीडिंग न रुकना।
  • बीच में ही स्पॉटिंग होना: दो पीरियड्स की तारीखों के बीच में भी अचानक से दाग लग जाना या ब्लीडिंग हो जाना।
  • फिजिकल रिलेशन (Sex) के दौरान तकलीफ: संबंध बनाते समय या उसके ठीक बाद पेल्विक एरिया में बहुत गहरा और चुभने वाला दर्द उठना।
  • पेशाब या मल त्यागते समय दर्द: पीरियड्स के दौरान टॉयलेट जाते समय अक्सर अजीब सी चुभन, दर्द या जलन महसूस होना।
  • प्रेगनेंसी में अड़चन (कंसीव करने में दिक्कत): जो महिलाएं मां बनना चाहती हैं, उन्हें इस बीमारी के चलते गर्भधारण करने में अक्सर बहुत रुकावटें आती हैं।

एंडोमेट्रियोसिस के कारण क्या होते हैं?

मेडिकल साइंस अभी तक इसका कोई सटीक कारण नहीं खोज पाई है, लेकिन डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स इसके पीछे कुछ खास वजहें मानते हैं:

  • खून का उल्टा बहना (Retrograde Menstruation): कई बार पीरियड्स का खून सीधा बाहर आने की जगह, फैलोपियन ट्यूब से होकर पेट के अंदर उल्टी तरफ चला जाता है। वहां जाकर ये कोशिकाएं चिपक जाती हैं और बढ़ने लगती हैं।
  • हार्मोन का बैलेंस बिगड़ना: शरीर में एस्ट्रोजन नाम के हार्मोन का लेवल जब बेकाबू हो जाता है, तो ये टिश्यू बहुत तेजी से बाहर फैलने लगते हैं।
  • इम्यूनिटी का साथ छोड़ना: अगर शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत ही कमजोर हो जाए, तो वह गलत जगह पर पनप रहे इन टिश्यूज को पहचान कर खत्म नहीं कर पाती।
  • पारिवारिक इतिहास (Genetics): अगर आपकी मां या बहन को यह समस्या रही है, तो आपके जीन में भी इसके आने के चांस काफी बढ़ जाते हैं।
  • सर्जरी के साइड इफेक्ट: कई बार सिजेरियन डिलीवरी (C-section) या गर्भाशय के किसी ऑपरेशन के दौरान गलती से ये कोशिकाएं दूसरी जगह शिफ्ट हो जाती हैं।
  • शरीर में रहने वाली सूजन: जिन महिलाओं के शरीर में अक्सर अंदरूनी सूजन (Inflammation) बनी रहती है, उनका शरीर इस बीमारी की चपेट में जल्दी आता है।

एंडोमेट्रियोसिस से क्या जटिलताएँ हो सकती हैं?

अगर आप दर्द सहती रहीं और इसका सही इलाज नहीं करवाया, तो यह बीमारी आगे चलकर जिंदगी को सच में बहुत मुश्किल बना देती है:

  • मां बनने में अड़चन (Infertility): यह बीमारी अंदर ही अंदर फैलोपियन ट्यूब्स को ब्लॉक कर देती है, जिससे कंसीव कर पाना एक बड़ा चैलेंज बन जाता है।
  • हर वक्त का दर्द: दर्द सिर्फ पीरियड्स तक सीमित नहीं रहता। यह इतना जिद्दी हो जाता है कि महीने के तीसों दिन आपकी कमर और पेल्विक एरिया को जकड़े रहता है।
  • बुरी तरह बिगड़ चुके पीरियड्स: हैवी ब्लीडिंग और भयंकर दर्द के चलते शरीर का बहुत सारा खून बह जाता है, जिससे महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है।
  • आंतों और ब्लैडर पर असर: जब ये परतें आंतों या पेशाब की थैली (Bladder) तक पहुँच जाती हैं, तो रोजमर्रा के काम (टॉयलेट जाना) भी एक दर्दनाक सजा बन जाते हैं।
  • थकान जो कभी नहीं जाती: रोज-रोज के इस दर्द और खून की कमी से महिला इतनी कमजोर हो जाती है कि वह हर वक्त खुद को थका हुआ और सुस्त ही पाती है।
  • डिप्रेशन और स्ट्रेस: लगातार दर्द झेलने से मन इतना थक जाता है कि चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और मानसिक तनाव जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं।

आयुर्वेद में एंडोमेट्रियोसिस को कैसे समझा जाता है?

देखिए, आयुर्वेद के पुराने ग्रंथों में भले ही 'एंडोमेट्रियोसिस' नाम की कोई अंग्रेजी बीमारी न लिखी हो, लेकिन इसे महिलाओं की परेशानी "कष्टार्तव" (यानी दर्द के साथ आने वाले पीरियड्स) और "योनिव्यापद" के रूप में बहुत ही बारीकी से समझाया गया है।

आयुर्वेद बिल्कुल साफ कहता है कि यह सारी दिक्कत शरीर में 'वात दोष' के बुरी तरह भड़क जाने के कारण होती है। वात बढ़ने पर शरीर के अंदर भयंकर सूखापन, नसों में अकड़न, ऐंठन और ऐसा दर्द उठता है जिसे सहना मुश्किल हो जाए। यही वजह है कि पीरियड्स के दिनों में लगता है जैसे कमर टूट रही हो।

अगर इस भड़के हुए वात के साथ 'पित्त दोष' भी मिल जाए, तो कहानी और बिगड़ जाती है। पित्त मिलने से शरीर में आग जैसी जलन और सूजन शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को तेज दर्द के साथ-साथ भयंकर ब्लीडिंग और जलन भी झेलनी पड़ती है।

सीधे शब्दों में कहूं तो आयुर्वेद इसे शरीर की अंदरूनी आग (डाइजेस्टिव फायर) के बुझने और वात-पित्त के बैलेंस के बुरी तरह क्रैश होने का नतीजा मानता है।

आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

आयुर्वेद में हमारा काम आपको कोई 'पेनकिलर' थमाकर दर्द सुन्न करना नहीं है। हम इसे सिर्फ एक दिन या एक हफ्ते का दर्द नहीं मानते, बल्कि हम देखते हैं कि आपके शरीर का पूरा सिस्टम अंदर से कैसे टूट गया है। हमारा इलाज बिल्कुल बेस से शुरू होता है:

  • वात और पित्त को शांत करना: जब दर्द और सूजन के असली मुजरिम (वात और पित्त) ही बैलेंस हो जाएंगे, तो दर्द खुद ब खुद गायब होने लगेगा।
  • प्रजनन तंत्र (Reproductive System) को ताकत देना: गर्भाशय को अंदर से ऐसी जड़ी-बूटियों से मजबूत किया जाता है कि वह अपनी रिपेयरिंग खुद कर सके और आगे चलकर प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत न खड़ी हो।
  • दर्द और सूजन पर सीधा वार: अंदर की वो भयंकर सूजन और पीरियड्स में जो जानलेवा ऐंठन उठती है, उसे शांत करने के लिए खास आयुर्वेदिक दवाइयां दी जाती हैं।
  • पीरियड्स की साइकिल को सेट करना: दवाइयों और सही डाइट के कॉम्बो से आपके बिगड़े हुए पीरियड्स को वापस रूटीन पर लाया जाता है और एक्स्ट्रा ब्लीडिंग पर लगाम लगाई जाती है।
  • लाइफस्टाइल में बदलाव: आप क्या खा रही हैं, नींद कितनी ले रही हैं और टेंशन कितनी है इन सबको ट्रैक करके ठीक किया जाता है, ताकि बीमारी लौटकर न आए।
  • लंबे समय का आराम: हमें चंद घंटों के आराम पर यकीन नहीं है। हमारी कोशिश यही रहती है कि आपका शरीर अंदर से इतना फौलादी और बैलेंस हो जाए कि आप बिना किसी खौफ के, एक नॉर्मल और दर्द-मुक्त जिंदगी जी सकें।

एंडोमेट्रियोसिस के उपचार में उपयोग होने वाली असरदार आयुर्वेदिक औषधियां

आयुर्वेद एकदम साफ मानता है कि एंडोमेट्रियोसिस शरीर में वात और पित्त दोष के बुरी तरह बिगड़ने का ही नतीजा है। इसीलिए, हमारा फोकस ऐसी जड़ी-बूटियों पर रहता है जो सिर्फ दर्द को सुन्न न करें, बल्कि अंदरूनी सूजन को खत्म करके पूरे सिस्टम का बैलेंस वापस लौटाएं:

  • नीम: नीम के फायदों के बारे में तो आप जानते ही हैं। यह खून की गहराई से सफाई करता है और शरीर के अंदर भड़की हुई सूजन व फालतू गर्मी को शांत करने का एक अचूक नेचुरल उपाय है।
  • मंजिष्ठा: यह जड़ी-बूटी शरीर में खून को प्यूरीफाई (साफ) करने के साथ-साथ गलत जगह बढ़ रही कोशिकाओं (टिश्यूज) को शांत करती है, जिससे अंदरूनी बैलेंस वापस लौटने लगता है।
  • अश्वगंधा: इस बीमारी के दर्द और स्ट्रेस से शरीर अंदर से टूट जाता है। अश्वगंधा उसी कमजोरी को दूर कर शरीर को फौलादी बनाता है और बिगड़े हुए हार्मोन्स को सेट करने में मदद करता है।
  • शतावरी: महिलाओं की सेहत के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। यह पूरे प्रजनन तंत्र (Reproductive System) को अंदर से ताकत देती है और हार्मोन्स का बैलेंस बनाए रखती है।
  • त्रिफला: पेट साफ तो आधी बीमारी ऐसे ही खत्म! त्रिफला आपके पाचन को दुरुस्त करके शरीर में जमे सारे टॉक्सिन्स (गंदगी) को बिना किसी तकलीफ के बाहर निकाल फेंकता है।
  • गिलोय: यह आपकी इम्युनिटी (रोगों से लड़ने की ताकत) को इतना तगड़ा कर देती है कि शरीर खुद-ब-खुद अंदर की सूजन और बीमारी से मजबूती से लड़ने लगता है।

एंडोमेट्रियोसिस में आराम देने वाली खास आयुर्वेदिक थेरेपी

आयुर्वेदिक पंचकर्म या थेरेपी का मकसद सिर्फ ऊपर से पेनकिलर वाला काम करना नहीं है। ये थेरेपी शरीर की गहराई में जाकर वात को शांत करती हैं और गर्भाशय को अंदर से रिलैक्स करती हैं:

  • अभ्यंग (हर्बल तेल की मालिश): जड़ी-बूटियों से पके हल्के गर्म तेल की मालिश भड़के हुए वात को एकदम शांत कर देती है। इससे पीरियड्स की उस भयानक ऐंठन और दर्द में तुरंत सुकून मिलता है।
  • स्वेदन (हल्की भाप): औषधियों वाली भाप लेने से शरीर की सारी जकड़न टूट जाती है। इससे पेल्विक एरिया का ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और दर्द में जादुई राहत मिलती है।
  • बस्ती चिकित्सा: आयुर्वेद में इसे वात दोष को जड़ से उखाड़ने का 'ब्रह्मास्त्र' माना जाता है। इसके जरिए पीरियड्स का भयंकर दर्द और पेट की सारी दिक्कतें काफी हद तक दूर हो जाती हैं।
  • उत्तर बस्ती: कुछ खास और गंभीर मामलों में, गर्भाशय और प्रजनन तंत्र को सीधा अंदर से रिपेयर और बैलेंस करने के लिए इस बेहद असरदार प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।
  • शिरोधारा: लगातार दर्द सहने से जो दिमागी स्ट्रेस और टेंशन होती है (जिससे हार्मोन्स और बिगड़ते हैं), शिरोधारा उसे एकदम शांत कर शरीर को रिलैक्स कर देती है।

एंडोमेट्रियोसिस में कैसा हो आपका खानपान? (सहायक आहार)

इस बीमारी में आपकी डाइट ही आपकी सबसे बड़ी दवा है। आप जो खाते हैं, उसका सीधा असर आपके हार्मोन्स और दर्द पर पड़ता है।

क्या खाएं?

  • बिल्कुल ताजा और घर का बना हल्का खाना खाएं।
  • डाइट में ढेर सारी हरी सब्जियां और मौसम के ताजे फल शामिल करें।
  • खिचड़ी और मूंग दाल जैसी चीजें खाएं जो पेट पर बिल्कुल भारी न पड़ें।
  • दिनभर खूब सारा गुनगुना पानी और हल्के हर्बल ड्रिंक्स लेते रहें।
  • खाने में शुद्ध देसी घी का सीमित इस्तेमाल करें (यह रूखापन दूर कर वात को शांत करता है)।
  • ऐसा सादा खाना चुनें जो आसानी से पच जाए।

क्या न खाएं?

  • हद से ज्यादा तीखा और मिर्च-मसाले वाला खाना।
  • डीप फ्राई और पचने में भारी (जंक) फूड।
  • पैकेटबंद, डिब्बाबंद और महीनों पुराने प्रिजर्वेटिव्स वाले खाने की चीजें।
  • फ्रिज का एकदम चिल्ड पानी या बर्फ वाली ठंडी चीजें।
  • बार-बार बाहर का खाना खाने की आदत।
  • आर्टिफिशियल कलर और स्वाद वाली (बनावटी) चीजें।

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी है?

एंडोमेट्रियोसिस को किसी आम 'पीरियड पेन' की तरह सहने की भूल बिल्कुल न करें। अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो रहा है, तो बिना देरी किए किसी अच्छे विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाएं:

  • जब पीरियड्स का दर्द इतना जानलेवा हो जाए कि उठना-बैठना मुश्किल लगे।
  • जब पीरियड्स खत्म होने के बाद भी पेट के निचले हिस्से (पेल्विक एरिया) में लगातार दर्द बना रहे।
  • जब पीरियड्स हफ्तों तक खिंच जाएं या हद से ज्यादा ब्लीडिंग हो।
  • जब फिजिकल रिलेशन (Sex) के दौरान बहुत तेज और चुभने वाला दर्द हो।
  • जब बच्चा कंसीव करने (गर्भधारण) में बार-बार नाकामयाबी और दिक्कत आ रही हो।
  • जब टॉयलेट (पेशाब या मल त्याग) जाते समय भी अजीब सा दर्द और तकलीफ होने लगे।
  • जब सारे घरेलू नुस्खे आजमाने के बाद भी आपको कोई राहत न मिल रही हो।
  • जब शरीर अंदर से इतना थक जाए कि हर वक्त भयंकर कमजोरी लगने लगे।

निष्कर्ष

एंडोमेट्रियोसिस कोई साधारण 'पीरियड का दर्द' नहीं है। यह शरीर के अंदर हार्मोन्स और टिश्यूज के बुरी तरह से क्रैश होने का नतीजा है। जहां एलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा) इसे सिर्फ गलत जगह बढ़ रही कोशिकाओं और हार्मोन्स की गड़बड़ी मानती है, वहीं आयुर्वेद इसे और भी गहराई से देखता है यानी वात-पित्त के भड़कने और कमजोर पाचन के रूप में।

सालों तक गलत खाना-पीना, हद से ज्यादा स्ट्रेस लेना और खराब लाइफस्टाइल इस बीमारी को और भी खतरनाक बना देते हैं। इसीलिए, समझदारी इसी में है कि सिर्फ दर्द मिटाने वाली गोलियां फांकने के बजाय, अपने पूरे शरीर के सिस्टम, डाइट और लाइफस्टाइल को अंदर से सुधारने पर मेहनत की जाए।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

एंडोमेट्रियोसिस में मासिक धर्म के समय शरीर में सूजन और ऊतक सक्रिय हो जाते हैं। इसी कारण हर महीने दर्द अधिक महसूस हो सकता है। कुछ महिलाओं में यह दर्द धीरे धीरे समय के साथ बढ़ भी सकता है। यह स्थिति हार्मोन बदलाव के साथ जुड़ी होती है।

हर महिला में इसका प्रभाव अलग होता है। कुछ मामलों में गर्भधारण पर असर पड़ सकता है जबकि कुछ महिलाएं सामान्य रूप से गर्भधारण कर सकती हैं। यह समस्या की गंभीरता और शरीर की स्थिति पर निर्भर करता है।

इसका दर्द केवल पेट तक सीमित नहीं रहता। यह कमर, जांघों और कभी-कभी पीठ के निचले हिस्से तक फैल सकता है। दर्द की तीव्रता मासिक धर्म के समय अधिक होती है।

हाँ, कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के अलावा भी हल्का या लगातार दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द शरीर के अंदर चल रही सूजन और असंतुलन के कारण होता है। यह समय समय पर बढ़ या घट सकता है।

लगातार दर्द और मासिक धर्म की परेशानी के कारण शरीर में थकान बढ़ सकती है। यह थकान केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी हो सकती है। लंबे समय तक यह स्थिति ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है।

कुछ मामलों में समय के साथ लक्षण अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। यदि शरीर का असंतुलन बना रहे तो समस्या बढ़ सकती है। हालांकि सही देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

हाँ लगातार दर्द और असहजता मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। इससे चिड़चिड़ापन और तनाव महसूस हो सकता है। हार्मोन बदलाव भी मूड को प्रभावित करते हैं।

यह मुख्य रूप से प्रजनन उम्र की महिलाओं में पाई जाती है। मासिक धर्म से जुड़े हार्मोन इस स्थिति को प्रभावित करते हैं। इसलिए यह समस्या इस अवस्था में अधिक देखी जाती है।

 हाँ, कुछ महिलाओं को पेट में भारीपन और सूजन महसूस हो सकती है। यह मासिक धर्म के समय अधिक बढ़ सकता है। यह शरीर में होने वाली आंतरिक सूजन का हिस्सा होता है।

 यह स्थिति व्यक्ति दर व्यक्ति अलग होती है। कुछ मामलों में लक्षण लंबे समय तक नियंत्रित रहते हैं। इसका प्रबंधन जीवनशैली और शरीर के संतुलन पर निर्भर करता है।

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