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Pregabalin/Gabapentin से नींद आती है पर दर्द कम नहीं - क्या आयुर्वेद बेहतर विकल्प है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 10 Jun, 2026
  • category-iconUpdated on 10 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5008

नसों का दर्द एक ऐसी परेशानी है जो इंसान को अंदर तक थका देती है। इस दर्द से राहत पाने के लिए अक्सर डॉक्टर प्रीगैबलिन Pregabalin या गैबापेंटिन Gabapentin जैसी दवाएं देते हैं शुरुआत में ये दवाएं कुछ आराम देती महसूस होती हैं, लेकिन धीरे-धीरे एक नई समस्या खड़ी हो जाती है। मरीज को पूरे दिन नींद आती रहती है, थकान छाई रहती है और सबसे बड़ी निराशा तब होती है जब इतना सब झेलने के बाद भी नसों का वो तीखा दर्द कम नहीं होता। इंसान दर्द और नींद के बीच फँसकर रह जाता है और एक स्थायी समाधान की तलाश करने लगता है।

दर्द और सुस्ती के इस चक्र से बाहर निकलने का मार्ग

जब आधुनिक दवाएं केवल लक्षणों को दबाने और सुस्ती बढ़ाने का काम करती हैं, तब कई लोग प्राकृतिक और समग्र चिकित्सा पद्धतियों की ओर रुख करते हैं। ऐसे में आयुर्वेद एक मज़बूत, सुरक्षित और स्वाभाविक विकल्प के रूप में उभरकर सामने आता है।

आयुर्वेद नसों के दर्द न्यूरोपैथी को कैसे देखता है?

आयुर्वेदिक नजरिए से, शरीर में वात दोष के असंतुलन के कारण नसों में दर्द, झनझनाहट, सुई चुभने जैसा अहसास या सुन्नपन जैसी समस्याएं पैदा होती हैं जब शरीर में वात बढ़ता है, तो नसों की कमज़ोरी और संवेदनशीलता बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य केवल दर्द को अस्थायी रूप से सुन्न करना नहीं है, बल्कि बढ़े हुए वात को शांत करके नसों को अंदर से ताकत देना और उन्हें दोबारा स्वस्थ बनाना है।

आयुर्वेद क्यों साबित हो सकता है एक बेहतर विकल्प?

  • मूल कारण पर सीधा प्रभाव- आयुर्वेद सिर्फ दर्द को एक भ्रम की तरह नहीं दबाता। यह वात दोष को संतुलित करके बीमारी की जड़ पर काम करता है ताकि दर्द वापस न लौटे
  • सुस्ती और नींद से पूरी तरह बचाव- गैबापेंटिन या प्रीगैबलिन जैसी दवाओं की तरह आयुर्वेदिक औषधियां आपके दिमाग को सुन्न नहीं करती हैं। इनके सेवन से पूरे दिन बेवजह की नींद, थकान या चक्कर आने जैसी समस्या नहीं होती।
  • नसों का पोषण और मरम्मत—आयुर्वेद में रसायन चिकित्सा का वर्णन है, जो नर्वस सिस्टम को ताकत देती है। यह क्षतिग्रस्त नसों को पोषण देकर उन्हें रिपेयर करने में मदद करती है।
  • पाचन और शरीर की शुद्धि- कई बार शरीर में जमा विषैले तत्व आम नसों में रुकावट पैदा करते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा सबसे पहले पाचन अग्नि को ठीक करती है ताकि शरीर से ये विषैले तत्व बाहर निकल सकें।
  • सुरक्षित और दीर्घकालिक परिणाम- सही जीवनशैली, संतुलित खान-पान और प्राकृतिक औषधियों के मेल से शरीर बिना किसी भारी साइड-इफेक्ट के प्राकृतिक रूप से ठीक होने लगता है।

नसों के दर्द में कारगर कुछ प्रमुख प्राकृतिक औषधियां

प्रकृति ने हमें कई ऐसी जड़ी-बूटियां दी हैं जो नसों की सूजन और दर्द को कम करने में बेहद असरदार मानी जाती हैं

  • अश्वगंधा: यह एक बेहतरीन रसायन है जो नसों को मज़बूती देने, मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है।
  • निर्गुंडी: आयुर्वेद में इसे दर्द निवारक के रूप में जाना जाता है। यह प्राकृतिक रूप से सूजन और दर्द को खींचने का काम करती है।
  • शल्लकी और गुग्गुल: ये दोनों औषधियां वात को कम करने और जोड़ों व नसों के तेज दर्द से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
  • आयुर्वेदिक तैल मालिश अभ्यंग: महानारायण तेल, क्षीरबला तेल या धन्वंतरम तेल से की गई हल्की मालिश बाहरी तौर पर वात को शांत करने और नसों में रक्त संचार Blood Circulation बढ़ाने में बहुत फायदेमंद होती है।

सही दृष्टिकोण अपनाना है ज़रूरी

यह समझना बेहद ज़रूरी है कि हर इंसान का शरीर और उसकी प्रकृति वात, पित्त, कफ अलग-अलग होती है। जो जड़ी-बूटी एक व्यक्ति के लिए जादुई असर दिखाती है, वह दूसरे के लिए शायद उतनी कारगर न हो। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले एक योग्य और प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सक से अपनी नाड़ी और दोषों की जांच करवाना सबसे सुरक्षित कदम होता है। आयुर्वेद कोई त्वरित चमत्कार नहीं बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली है, जो थोड़ा धैर्य मांगती है लेकिन इसके परिणाम हमेशा स्थायी और आपके शरीर के अनुकूल होते हैं।

नसों के स्वास्थ्य के लिए एक दिवसीय डाइट चार्ट क्या खाएं

नसों के दर्द और कमज़ोरी से जूझते समय हमारा खान-पान बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। गलत आहार शरीर में रूखापन और गैस बढ़ाता है, जिससे नसों का दर्द और तीव्र हो जाता है। इसके विपरीत, सही और पौष्टिक आहार नसों को अंदर से पोषण देता है और उन्हें जल्दी ठीक होने में मदद करता है।

इस दौरान आपको अपनी डाइट में क्या शामिल करना चाहिए और किन चीज़ों से दूरी बनानी चाहिए, उसकी पूरी सूची नीचे दी गई है

समय आहार (विकल्प 1 या विकल्प 2) मुख्य लाभ
सुबह उठते ही

(6:00 AM - 6:30 AM)
गुनगुना पानी पीने के बाद, रातभर पानी में भीगे हुए 4-5 बादाम और 2 अखरोट चबाकर खाएं। यह नसों को प्राकृतिक और स्वस्थ वसा (Healthy Fats) प्रदान करता है।
नाश्ता

(8:30 AM - 9:00 AM)
विकल्प 1: गाय के घी में बना गरमा-गरम सूजी का उपमा या पोहा (अदरक और कड़ी पत्ता डालकर)।


विकल्प 2: घी और सोंठ (सूखा अदरक) डालकर बनाई गई पतली दलिया या ओट्स।
सुबह के समय पेट को हल्का रखता है और गैस बनने से रोकता है।
दोपहर का भोजन

(1:00 PM - 2:00 PM)
विकल्प 1: ताजी लौकी या तोरई की सब्जी + मूंग की धुली दाल + 1 या 2 चपाती (घी लगी हुई)।


विकल्प 2: कद्दू (सीताफल) की सब्जी + मसूर की दाल + थोड़े से जीरा राइस।
यह संतुलित भोजन शरीर को बिना भारीपन दिए भरपूर ऊर्जा प्रदान करता है।
शाम का नाश्ता

(4:30 PM - 5:00 PM)
विकल्प 1: गाय के घी में हल्के भुने हुए मखाने + एक कप अदरक-तुलसी की हर्बल चाय।


विकल्प 2: एक छोटा कटोरा पका हुआ पपीता या बिना छिलके वाले भुने चने।
शाम के समय शरीर में वात (वायु) के प्रभाव को बढ़ने नहीं देता।
रात का भोजन

(7:30 PM - 8:30 PM)
विकल्प 1: मूंग दाल और चावल की पतली खिचड़ी (ऊपर से आधा चम्मच गाय का घी और हींग-जीरे का तड़का)।


विकल्प 2: लहसुन और काली मिर्च डालकर बनाया गया मिक्स वेजिटेबल सूप + 1 पतली रोटी।
रात का भोजन पूरी तरह सुपाच्य होता है, जिससे सोते समय नसों पर दबाव नहीं पड़ता।
सोने से पहले

(9:30 PM - 10:00 PM)
एक गिलास हल्का गर्म दूध, जिसमें चुटकी भर हल्दी या सोंठ का पाउडर मिला हो। यह एक प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करता है और रात को गहरी नींद लाने में मदद करता है।

क्या न खाएं इन चीज़ों से पूरी तरह परहेज़ करें

  • ठंडी और सूखी चीजें: फ्रिज में रखा ठंडा खाना, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, पैक किए हुए सूखे स्नैक्स जैसे चिप्स, नमकीन, बिस्कुट खाने से बचें। ये शरीर में वात वायु को बढ़ाते हैं जिससे दर्द तेज होता है।
  • वायु या गैस बनाने वाली सब्जियां: फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली, अरबी, भिंडी और कच्चे अंकुरित अनाज Raw Sprouts का सेवन न करें। ये पेट में गैस पैदा करते हैं, जो नसों के दर्द को और ज़्यादा भड़का सकती हैं।
  • मैदा और जंक फूड: पिज्जा, बर्गर, समोसे, छोले-भटूरे और बेकरी प्रोडक्ट्स जैसी मैदे से बनी चीज़ों से दूर रहें। ये कब्ज पैदा करती हैं और जब पेट साफ नहीं होता, तो दर्द खुद बढ़ जाता है।
  • ज़्यादा खट्टा और तीखा खाना: अत्यधिक मिर्च-मसाले, अचारी चीजें, सिरका और बहुत ज़्यादा खट्टे फलों का सेवन इस दौरान बंद कर देना चाहिए।
  • चाय और कॉफी की अधिकता: दिनभर में कई बार चाय या कॉफी पीने से नसों में उत्तेजना बढ़ती है, जिससे बेचैनी और दर्द दोनों में इजाफा हो सकता है।

आधुनिक दवाओं से आयुर्वेद की तरफ कैसे बढ़ें?

यदि कोई मरीज लंबे समय से प्रीगैबलिन या गैबापेंटिन जैसी दवाएं ले रहा है, तो उन्हें एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद को अपनाने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप अपनी अंग्रेजी दवाएं आज से ही अचानक बंद कर दें।

  • धीरे-धीरे बदलाव लाएं: इन एलोपैथिक दवाओं को अचानक बंद करने से शरीर में 'विड्रॉल सिम्प्टम्स' जैसे घबराहट, अचानक दर्द बढ़ना या अनिद्रा हो सकते हैं।
  • चिकित्सक की देखरेख: सबसे सही तरीका यह है कि आप एक योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श लें। वे आपकी स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे आधुनिक दवाओं की खुराक Dose को कम करेंगे और साथ में आयुर्वेदिक औषधियों को शुरू करेंगे। इससे आपके शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा और आप सुरक्षित रूप से पूर्ण स्वास्थ्य की ओर बढ़ सकेंगे।

निष्कर्ष

अंत में, यह समझना बहुत ज़रूरी है कि नसों का दर्द Neuropathy कोई ऐसी सजा नहीं है जिसके साथ आपको जीवन भर समझौता करना पड़े। जब हम प्रीगैबलिन या गैबापेंटिन जैसी एलोपैथिक दवाओं पर पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं, तो हम अनजाने में दर्द के साथ-साथ सुस्ती, थकान और एक धुंधले दिमाग को भी अपनी जिंदगी का स्थायी हिस्सा बना लेते हैं। क्या केवल दर्द को महसूस न करने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा और ताजगी खो देना सही है?

शायद नहीं। यहीं पर आयुर्वेद एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आता है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि शरीर को बाहर से सुन्न करने के बजाय, उसे भीतर से ठीक करना चाहिए। यह वात दोष को संतुलित करके, नसों को उनके मूल रूप में वापस लाने और शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता (Self-healing power) को जगाने का काम करता है।

यह सच है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा कोई रातोंरात असर दिखाने वाला चमत्कार या शॉर्टकट नहीं है। इसमें सही खान-पान, अनुशासन और थोड़ा धैर्य चाहिए होता है। लेकिन इसके परिणाम स्थायी होते हैं और ये आपको किसी नई बीमारी या साइड-इफेक्ट का शिकार नहीं बनाते।

References

https://en.wikipedia.org/wiki/Neuropathic_pain

https://journals.physiology.org/doi/full/10.1152/physrev.00045.2019

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC1513412/

https://www.nice.org.uk/guidance/cg173

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

ये दवाएं दर्द का एहसास कम करने के लिए आपके नर्वस सिस्टम दिमाग को धीमा कर देती हैं। दिमाग सुन्न होने की वजह से ही आपको पूरे दिन थकान और नींद महसूस होती है।

बिल्कुल नहीं! इन्हें अचानक बंद करने से दर्द बढ़ सकता है या घबराहट हो सकती है। डॉक्टर की सलाह से अंग्रेजी दवा धीरे-धीरे कम करें और साथ में आयुर्वेद शुरू करें।

आयुर्वेद सिर्फ लक्षणों को नहीं दबाता, बल्कि बीमारी की जड़ पर काम करता है। इसलिए आपकी स्थिति के अनुसार सही असर दिखने में कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों का समय लग सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में 'वात दोष' वायु बढ़ने से नसों में रूखापन आता है और वे कमज़ोर हो जाती हैं। इसी वजह से नसों में सुई चुभने जैसा अहसास और तेज दर्द होता है।

 जी हाँ, बहुत ज़रूरी है। ठंडी, बासी और गैस बनाने वाली चीजें जैसे मैदा, गोभी दर्द बढ़ाती हैं। इसलिए हल्का, ताजा, गर्म और आसानी से पचने वाला भोजन ही खाना चाहिए।

अश्वगंधा, निर्गुंडी, शल्लकी और गुग्गुल नसों के लिए बेहतरीन मानी जाती हैं। ये प्राकृतिक रूप से सूजन कम करती हैं और कमज़ोर नसों की मरम्मत करती हैं।

बिल्कुल! महानारायण या तिल के तेल से हल्की मालिश करने से नसों का रूखापन खत्म होता है, वहां ब्लड सर्कुलेशन रक्त संचार बढ़ता है और दर्द में बहुत राहत मिलती है।

 जी हाँ। ज़्यादा टेंशन लेने से शरीर का वात दोष और ज़्यादा भड़क जाता है, जिससे दर्द अचानक तेज हो जाता है। इसलिए दर्द कम करने के लिए मन को शांत रखना बहुत ज़रूरी है।

पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई की एक आयुर्वेदिक विधि है। अगर दर्द बहुत पुराना और जिद्दी है, तो पंचकर्म तेल मालिश, भाप और बस्ती सिकुड़ी हुई नसों को खोलने में चमत्कारिक असर दिखाता है।

जी हाँ। आधुनिक दवाएं सिर्फ दर्द सुन्न करती हैं, जबकि आयुर्वेद नसों को जड़ से मज़बूत करता है। सही आयुर्वेदिक दवा, परहेज़ और योग अपनाने से आप इस दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं।

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