Diseases Search
Close Button
 
 

Stressful Job का असर Body के Organs पर कैसे पड़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में "बिजी" रहना एक फैशन बन गया है, लेकिन यह बिजी लाइफस्टाइल आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। जब आप ऑफिस की डेडलाइन, बॉस की डांट और 9 से 5 की भीड़ में खुद को झोंक देते हैं, तो सिर्फ आपका दिमाग नहीं थकता, आपके शरीर के जरूरी अंग जैसे दिल (Heart), जिगर (Liver) और गुर्दे (Kidneys) धीरे-धीरे दम तोड़ने लगते हैं। 

ऑफिस का तनाव कोई मामूली बात नहीं है; यह एक ऐसी बीमारी है जो बिना बताए आपके शरीर को अंदर से बीमार कर देती है। अगर आपको लगता है कि सिर्फ संडे को सोने से यह तनाव निकल जाएगा, तो आप गलत हैं। यह तनाव आपके शरीर में जहर की तरह फैलता है। इससे पहले कि आपकी मेहनत की कमाई अस्पताल के बिलों में निकल जाए, यह समझना जरूरी है कि काम का बोझ आपके अंगों पर क्या बुरा असर डाल रहा है।

Stressful Job क्या होती है और इसका शरीर पर प्रभाव

आज की तेज रफ्तार वाली कामकाजी जिंदगी में stressful job एक आम स्थिति बन चुकी है, जहाँ लगातार deadlines, targets और performance का दबाव बना रहता है। यह दबाव सिर्फ काम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों पर असर डालने लगता है। शुरुआत में यह केवल मानसिक थकान या चिड़चिड़ापन जैसा महसूस होता है, जिसे लोग सामान्य मान लेते हैं।

लेकिन समय के साथ यही लगातार बना रहने वाला तनाव शरीर के अंदरूनी संतुलन को प्रभावित करने लगता है। नींद, पाचन और ऊर्जा स्तर पर इसका असर दिखने लगता है और धीरे-धीरे पूरा शरीर इस दबाव को महसूस करने लगता है।

Stress को शरीर कैसे महसूस करता है?

जब शरीर को stress होता है, तो वह इसे एक खतरे के रूप में पहचानता है, चाहे वह वास्तविक हो या सिर्फ मानसिक दबाव। इस स्थिति में शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली तुरंत सक्रिय हो जाती है ताकि व्यक्ति उस स्थिति का सामना कर सके या उससे बच सके। दिमाग तेजी से प्रतिक्रिया देता है और शरीर को “fight or flight” मोड में डाल देता है, जिससे शरीर अधिक alert और सक्रिय हो जाता है। इसी दौरान शरीर में हार्मोन तेजी से बदलते हैं, जिससे दिल की धड़कन बढ़ती है और ऊर्जा तुरंत उपयोग होने लगती है। यह पूरी प्रक्रिया शरीर को survival state में ले जाती है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर के सामान्य संतुलन पर असर डाल सकती है।

Stress का शरीर के विभिन्न अंगों पर गहरा प्रभाव

Stress सिर्फ मानसिक स्थिति नहीं है, यह पूरे शरीर के organ systems को प्रभावित करता है। धीरे-धीरे यह शरीर के natural balance को बिगाड़ देता है और कई तरह की समस्याओं की शुरुआत कर सकता है।

  • दिमाग और तंत्रिका तंत्र (nervous system): ज्यादा सोच, मानसिक थकान और आराम की कमी
  • दिल और रक्त संचार: धड़कन तेज, रक्त प्रवाह असंतुलित
  • पाचन तंत्र: कमजोर पाचन, गैस और भारीपन
  • जिगर (lungs): शरीर की सफाई धीमी, थकान बढ़ना
  • गुर्दे (kidney): पानी का संतुलन बिगड़ना
  • हार्मोन सिस्टम: शरीर की प्राकृतिक लय का बिगड़ना
  • त्वचा और बाल: चमक कम होना, बाल झड़ना
  • नींद: नींद अधूरी रहना और लगातार थकान

आयुर्वेद में Stress का मूल सिद्धांत और दोषों पर इसका प्रभाव

आयुर्वेद के अनुसार stress केवल मानसिक दबाव नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और ऊर्जा के संतुलन में आया हुआ गहरा असंतुलन है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो धीरे-धीरे शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होने लगती है और आगे चलकर यह रोगों का कारण बन सकता है। यह स्थिति मुख्य रूप से तीन दोषों वात, पित्त और कफ के असंतुलन से जुड़ी होती है।

Vata दोष, जो शरीर की गति और तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है, stress की स्थिति में अत्यधिक सक्रिय हो जाता है। इससे विचार तेजी से दौड़ने लगते हैं, बेचैनी बढ़ती है और anxiety जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

Pitta दोष, जो शरीर की गर्मी और तीव्रता से जुड़ा है, तनावपूर्ण वातावरण में बढ़ जाता है। इससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, अंदरूनी गर्मी और पाचन से जुड़ी समस्याएँ जैसे acidity बढ़ सकती हैं।

वहीं Kapha दोष का असंतुलन लंबे समय तक बने रहने वाले stress में देखा जाता है, जिससे शरीर में सुस्ती, ऊर्जा की कमी और भावनात्मक भारीपन महसूस होने लगता है। व्यक्ति धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक रूप से थका हुआ महसूस करने लगता है।

इस प्रकार आयुर्वेद stress को केवल मानसिक समस्या नहीं मानता, बल्कि इसे शरीर के भीतर गहरे असंतुलन के रूप में देखता है, जो समय रहते न समझा जाए तो स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

तनाव दूर करने के लिए जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण (Stress Management)

जीवा आयुर्वेद में stress को केवल मानसिक समस्या नहीं माना जाता, बल्कि इसे शरीर और मन के गहरे असंतुलन के रूप में समझा जाता है। इसलिए यहां इलाज का उद्देश्य सिर्फ लक्षणों को कम करना नहीं, बल्कि शरीर के मूल कारण तक जाकर संतुलन को वापस लाना होता है।

  • व्यक्ति के अनुसार समझ: हर व्यक्ति की प्रकृति और stress का कारण अलग होता है, इसलिए इलाज भी व्यक्तिगत रूप से तय किया जाता है।
  • दोषों का संतुलन: वात, पित्त और कफ के असंतुलन को समझकर उन्हें प्राकृतिक तरीके से संतुलित करने पर ध्यान दिया जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: दिनचर्या, काम का दबाव और आदतों को समझकर stress के मूल कारण को पहचाना जाता है।
  • प्राकृतिक उपायों का उपयोग: जड़ी-बूटियों, संतुलित आहार और योग जैसी प्राकृतिक विधियों से शरीर को धीरे-धीरे संतुलन में लाया जाता है।
  • मन और शरीर दोनों की देखभाल: उपचार में केवल शरीर नहीं, बल्कि मानसिक शांति और भावनात्मक स्थिरता पर भी ध्यान दिया जाता है।

तनाव दूर करने के लिए खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां 

आयुर्वेद में ऐसी कई चमत्कारिक जड़ी-बूटियां हैं जो तनाव के असर को अंगों तक पहुँचने से रोकती हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह जड़ी-बूटी शरीर को ताकत देती है और तनाव वाले हार्मोन (Cortisol) को कम करती है। यह अंगों को थकने नहीं देती।
  • ब्राह्मी (Brahmi): यह दिमाग को शांति देती है और याददाश्त बढ़ाती है। ऑफिस की टेंशन में यह दिमाग की नसों को आराम पहुँचाती है।
  • शंखपुष्पी (Shankhpushpi): अगर तनाव की वजह से नींद नहीं आती, तो शंखपुष्पी बहुत फायदेमंद है। यह मन को शांत करती है।
  • गिलोय (Giloy): तनाव की वजह से कमजोर हुई इम्यूनिटी को गिलोय वापस मजबूत बनाता है और शरीर को बीमारियों से बचाता है।

तनाव दूर करने के लिए आयुर्वेदिक थेरेपी 

सिर्फ दवाइयां ही नहीं, बल्कि शरीर की बाहरी मालिश और सफाई भी तनाव कम करने के लिए जरूरी है:

  • शिरोधारा (Shirodhara): इसमें माथे पर धीरे-धीरे गुनगुना तेल गिराया जाता है। यह तनाव दूर करने की सबसे अच्छी थेरेपी है, जो सीधा नर्वस सिस्टम को आराम देती है।
  • अभ्यंग (Abhyangam): पूरे शरीर की आयुर्वेदिक तेल से मालिश करने को अभ्यंग कहते हैं। इससे खून का बहाव बढ़ता है और अंगों की जकड़न खत्म होती है।
  • नस्य (Nasya): नाक में औषधीय तेल डालना। यह दिमाग के भारीपन को कम करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है।

Stress Management में आहार (Aahar) की भूमिका

आयुर्वेद में आहार को केवल भोजन नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित रखने का आधार माना गया है। गलत खानपान stress को और बढ़ा सकता है, जबकि सही आहार शरीर को शांत, मजबूत और स्थिर बनाने में मदद करता है।

  • हल्का और ताजा भोजन: ताजा बना हुआ, सरल और आसानी से पचने वाला भोजन शरीर पर बोझ नहीं डालता और मन को शांत रखता है।
  • नियमित भोजन की आदत: समय पर भोजन करने से शरीर की प्राकृतिक लय बनी रहती है और तनाव का असर कम होता है।
  • सात्विक आहार का महत्व फल, सब्जियाँ और पौष्टिक अनाज शरीर और मन दोनों को संतुलन में रखने में मदद करते हैं।
  • तेल और मसाले का संतुलन: बहुत ज्यादा तला-भुना या तीखा भोजन शरीर में गर्मी और असंतुलन बढ़ा सकता है, जिससे stress बढ़ता है।
  • पर्याप्त पानी और हाइड्रेशन: सही मात्रा में पानी शरीर के detox को सपोर्ट करता है और थकान कम करने में मदद करता है।

जीवा आयुर्वेद में मरीजों की जांच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में हम सिर्फ आपकी बीमारी की रिपोर्ट नहीं देखते, बल्कि आपको एक इंसान के तौर पर पूरी तरह समझते हैं। हमारी जांच प्रक्रिया बहुत गहरी और वैज्ञानिक है:

  • नाड़ी परीक्षा (Pulse Diagnosis): हमारे अनुभवी डॉक्टर आपकी नब्ज (Pulse) देखकर यह पता लगाते हैं कि आपके शरीर के अंदर कौन सा दोष (वात, पित्त, कफ) बिगड़ा हुआ है और इसका आपके अंगों पर क्या असर पड़ा है।
  • प्रकृति विश्लेषण (Prakriti Analysis): हर इंसान का शरीर अलग होता है। हम यह पहचानते हैं कि आपके शरीर की बनावट और स्वभाव कैसा है, ताकि इलाज आपके हिसाब से बनाया जा सके।
  • आहार और विहार की जांच: डॉक्टर आपसे आपके काम करने के तरीके, आपके सोने के समय और आपके खाने की आदतों के बारे में विस्तार से बात करते हैं।
  • मानसिक स्थिति की जांच: चूंकि तनाव दिमाग से शुरू होता है, इसलिए हम आपकी मानसिक स्थिति को भी समझते हैं ताकि तनाव की जड़ को काटा जा सके।

Stress में सुधार में कितना समय लगता है? (Ayurveda)

पहले कुछ सप्ताह (0–3 सप्ताह): इस दौरान शरीर और मन में हल्का बदलाव शुरू होता है। तनाव की तीव्रता थोड़ी कम महसूस होने लगती है, नींद में सुधार आता है और शरीर थोड़ा हल्का लगने लगता है। पाचन और energy level में भी धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं।

अगले 1–2 महीने: इस चरण में मानसिक स्थिरता बढ़ने लगती है। overthinking और irritability में कमी महसूस हो सकती है। शरीर की ऊर्जा बेहतर होती है और daily routine में संतुलन आने लगता है

3–6 महीने: इस समय तक शरीर और मन में गहरा संतुलन बनने लगता है। stress के लक्षण काफी हद तक कम हो जाते हैं और व्यक्ति अधिक शांत, स्थिर और ऊर्जावान महसूस करता है। शरीर की प्राकृतिक recovery क्षमता मजबूत होने लगती है।

उपचार से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?

Stress सिर्फ मानसिक समस्या नहीं है, बल्कि शरीर और मन के असंतुलन का संकेत है। आयुर्वेद में इसका उद्देश्य शरीर को अंदर से संतुलित करके लंबे समय तक स्थिरता लाना होता है।

  • मानसिक शांति में सुधार: मन अधिक शांत और स्थिर महसूस करता है।
  • नींद और पाचन में सुधार: शरीर की natural rhythm बेहतर होती है।
  • ऊर्जा में वृद्धि: थकान कम होती है और शरीर हल्का महसूस होता है।
  • जीवनशैली में संतुलन: दिनचर्या और habits अधिक व्यवस्थित होने लगती हैं।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम शीतल भावसार है। जनवरी 2018 में मुझे एंग्जायटी की समस्या शुरू हुई, जिससे मेरा मन बहुत परेशान रहने लगा। इसके साथ ही मुझे अपच और नींद न आने जैसी समस्याएँ भी होने लगीं। मैं एलोपैथिक इलाज नहीं लेना चाहती थी, क्योंकि उसके साइड इफेक्ट्स को लेकर मुझे चिंता थी। तब मेरी मम्मी ने मुझे जीवा आयुर्वेद के बारे में बताया, उन्होंने वहाँ से अपने पैर के दर्द का इलाज कराया था। इसके बाद मैंने जीवा में उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने मुझे मेडिटेशन, डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव के बारे में समझाया। इन सबका पालन करने से मुझे काफी राहत मिली और मेरी एंग्जायटी भी धीरे-धीरे कम होने लगी। आज मैं पहले से बेहतर महसूस करती हूँ और मैंने अपने परिवार को भी इसके बारे में बताया, उन्होंने भी उपचार लिया और उन्हें भी लाभ हुआ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

अपने इलाज पर कितना खर्च आएगा, यह जानना हर मरीज़ के लिए ज़रूरी होता है। जीवा आयुर्वेद में हम खर्च की जानकारी साफ और आसान तरीके से देते हैं, ताकि आप बिना किसी उलझन के सही फैसला ले सकें।

इलाज का सामान्य खर्च:

जो लोग अपनी बीमारी के लिए नियमित (regular) इलाज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए दवाइयों और डॉक्टर की सलाह का महीने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है। यह एक औसत अंदाज़ा है। असल खर्च आपकी बीमारी कितनी पुरानी है और उसकी स्थिति कैसी है, इस पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल (स्पेशल पैकेज):

अगर आप अपनी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए थोड़ा ज़्यादा गहराई और विस्तार से इलाज करना चाहते हैं, तो हमारे 'विशेष पैकेज' आपके लिए सबसे अच्छे हैं। इसमें हम सिर्फ बीमारी को नहीं दबाते, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल को सुधारने पर काम करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • खास दवाइयाँ (Customized Medicines)
  • सीनियर डॉक्टर से कंसल्टेशन
  • मन को शांत रखने के सेशन्स (Stress Management)
  • योग और एक्सरसाइज़ की ट्रेनिंग
  • पर्सनल डाइट प्लान (जो सिर्फ आपके लिए बना हो)

इन पैकेजेस का खर्च आमतौर पर ₹15,000 से ₹40,000 के बीच होता है, जो आपके 3 से 4 महीने के पूरे इलाज को कवर करता है।

जीवाग्राम (24x7 देखभाल वाला इलाज):

जिन लोगों को बीमारी से लड़ने के लिए ज़्यादा ध्यान, शांति और आराम के साथ इलाज (पंचकर्म व शोधन) चाहिए, उनके लिए हमारा जीवाग्राम सेंटर सबसे बेहतरीन विकल्प है। यह प्रकृति के करीब बना एक ऐसा सेंटर है जहाँ आपको घर जैसा सुकून और अस्पताल जैसी केयर मिलती है। यहाँ आपको मिलता है:

  • पंचकर्म थेरेपी (उत्तर बस्ती, विरेचन और अंदरूनी सफाई)
  • सादा और पौष्टिक 'सात्विक' खाना
  • इलाज की आधुनिक और बेहतर सुविधाएँ
  • आरामदायक रहने की व्यवस्था

यहाँ 7 दिन का प्रोग्राम लगभग ₹1 लाख का होता है। इसमें आपको हर समय विशेषज्ञों की देखभाल मिलती है, ताकि आपका शरीर और मन दोनों पूरी तरह से तरोताज़ा (rejuvenated) होकर स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए तैयार हो सकें।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता कम: 88% मरीजों ने धीरे-धीरे एलोपैथिक दवाओं और हार्मोनल सपोर्ट पर निर्भरता कम की है।

आयुर्वेदिक और मॉडर्न उपचार में अंतर

बिंदु आयुर्वेदिक दृष्टिकोण मॉडर्न दृष्टिकोण
सोच का तरीका Stress को शरीर, मन और दोषों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन के रूप में देखा जाता है Stress को मुख्य रूप से मानसिक और न्यूरोलॉजिकल समस्या माना जाता है
मुख्य कारण गलत जीवनशैली, खराब पाचन, मानसिक असंतुलन और दोषों की गड़बड़ी काम का दबाव, मानसिक तनाव, brain chemistry में बदलाव
लक्षणों की समझ थकान, बेचैनी, पाचन समस्या, नींद में गड़बड़ी को अंदरूनी असंतुलन से जोड़ता है anxiety, depression, insomnia, fatigue को मुख्य लक्षण मानता है
उपचार का तरीका आहार सुधार, योग, प्राणायाम, जड़ी-बूटियाँ और जीवनशैली संतुलन दवाइयाँ, antidepressants, counseling और therapy
मुख्य फोकस शरीर और मन को संतुलित करके मूल कारण को ठीक करना लक्षणों को नियंत्रित करना और मानसिक राहत देना
रिजल्ट धीरे-धीरे लेकिन स्थायी सुधार और शरीर में संतुलन जल्दी राहत मिल सकती है, लेकिन stress वापस आने की संभावना रहती है

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी है?

तनाव को कभी हल्का न समझें। अगर आपको नीचे दिए गए संकेतों में से कुछ भी महसूस हो रहा है, तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए:

  • अगर आपको छाती में भारीपन या दर्द महसूस होता है।
  • अगर तनाव की वजह से आपको लगातार कई दिनों तक नींद नहीं आती।
  • अगर आपका ब्लड प्रेशर (BP) अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
  • अगर आपको हर समय घबराहट (Panic attack) होती रहती है।
  • अगर ऑफिस जाने के नाम पर ही आपको पसीना आने लगे या डर महसूस हो।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने देखा कि कैसे एक Stressful Job हमारे शरीर के अंगों को अंदर ही अंदर बीमार कर रही है। चाहे वो पाचन की समस्या हो, दिल की धड़कन का तेज होना हो या लिवर की कमजोरीइन सबकी जड़ कहीं न कहीं आपके काम का तनाव है।

आयुर्वेद हमें सिखाता है कि काम और सेहत के बीच संतुलन कैसे बनाना है। सही समय पर डॉक्टर की सलाह, जड़ी-बूटियों का सहारा और खान-पान में थोड़े से बदलाव आपको एक लंबी और सुखी जिंदगी दे सकते हैं। याद रखिए, आपकी मेहनत तभी सफल है जब आप उस सफलता का आनंद लेने के लिए स्वस्थ हों।

FAQs

 हाँ, लगातार तनाव शरीर के कई सिस्टम पर असर डालता है जैसे पाचन, नींद और हार्मोन बैलेंस। शुरुआत में यह हल्की थकान जैसा लगता है लेकिन समय के साथ यह गहरा असर डाल सकता है। शरीर धीरे-धीरे कमजोर महसूस करने लगता है।

नहीं, तनाव केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता। यह शरीर के दिल, पाचन और ऊर्जा स्तर को भी प्रभावित करता है। आयुर्वेद में इसे शरीर और मन के असंतुलन के रूप में देखा जाता है।

हाँ, लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। यह दिल, पाचन और इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है। इसलिए समय रहते ध्यान देना जरूरी होता है।

दोनों ही स्थितियों में संबंध होता है। तनाव नींद को खराब करता है और खराब नींद तनाव को बढ़ाती है। यह एक सर्कल बन जाता है जिसे तोड़ना जरूरी है।

हाँ, तनाव पाचन अग्नि को कमजोर कर देता है। इससे गैस, भारीपन और एसिडिटी जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति शरीर को कमजोर कर देती है।

 हाँ, शरीर छोटे संकेत देता है जैसे थकान, चिड़चिड़ापन और नींद में बदलाव। लेकिन लोग इन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यही शुरुआती चेतावनी होती है।

हाँ, तनाव हार्मोन बैलेंस को प्रभावित करता है। इससे खासकर पेट के आसपास वजन बढ़ सकता है। यह मेटाबॉलिज्म के धीमे होने का संकेत भी हो सकता है।

हाँ, लंबे समय तक तनाव रहने से बाल झड़ना और त्वचा dull होना आम है। शरीर की अंदरूनी स्थिति बाहर दिखाई देने लगती है। यह असंतुलन का स्पष्ट संकेत होता है।

थोड़ा आराम मदद करता है लेकिन हमेशा पर्याप्त नहीं होता। अगर तनाव का कारण बना रहे तो समस्या वापस आ सकती है। इसलिए कारण को समझना जरूरी होता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us