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Thyroid सिर्फ वज़न बढ़ाता है? 10 गंभीर लक्षण जो लोग अनदेखे करते है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

थायराइड (Thyroid) का नाम सुनते ही सबसे पहली तस्वीर जो दिमाग में आती है, वह है किसी व्यक्ति का अचानक बहुत मोटा हो जाना या सूखकर कांटा हो जाना। हम में से 90% लोग यही मानते हैं कि थायराइड केवल 'वज़न' से जुड़ी बीमारी है। जैसे ही किसी की रिपोर्ट में TSH का स्तर बढ़ा हुआ आता है, तो इंसान सबसे पहले जिम की सदस्यता लेता है, खाना कम कर देता है और सिर्फ अपना वज़न नापने की मशीन (Weighing Scale) पर फोकस करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वज़न तो शायद एक-दो किलो ही बढ़ा हो, लेकिन आपके बाल गुच्छों में क्यों गिर रहे हैं? सुबह उठने के बाद भी शरीर टूटा-टूटा क्यों रहता है? या बिना किसी बात के भयंकर चिड़चिड़ापन और रोने का मन क्यों करता है?

अगर आप इन संकेतों को 'ऑफिस का स्ट्रेस' या 'बढ़ती उम्र' मानकर इग्नोर कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। "थायराइड केवल वज़न बढ़ाता है," यह 21वीं सदी का एक बहुत बड़ा मेडिकल भ्रम है। गले में मौजूद यह छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि (Butterfly-shaped gland) आपके शरीर का 'मास्टर इंजन' है। जब यह इंजन खराब होता है, तो सिर्फ आपकी कमर का साइज़ नहीं बढ़ता, बल्कि आपका दिमाग, आपका दिल, आपकी नसें और आपका पूरा रिप्रोडक्टिव सिस्टम (प्रजनन तंत्र) 'शॉर्ट-सर्किट' होने लगता है।

थायराइड असल में क्या है और यह पूरे शरीर को कैसे चलाता है?

थायराइड ग्रंथि हमारे गले के सामने वाले हिस्से में होती है। इसका मुख्य काम दो हार्मोन बनाना है—T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine)। ये हार्मोन हमारे रक्त के माध्यम से शरीर की हर एक कोशिका (Cell) तक पहुँचते हैं और उन्हें बताते हैं कि ऊर्जा (Energy) का इस्तेमाल कैसे करना है।

  • हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism): जब ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज़्म (चयापचय) बिल्कुल धीमा पड़ जाता है। कोशिकाएं ऊर्जा नहीं बना पातीं, जिससे शरीर का हर अंग 'स्लो-मोशन' में काम करने लगता है।
  • हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism): जब ग्रंथि ज़रूरत से ज़्यादा हार्मोन बनाती है, तो शरीर की मशीनरी ओवर-स्पीड में चलने लगती है, जिससे इंसान सूखने लगता है और धड़कन हमेशा तेज़ रहती है।

10 गंभीर लक्षण जिन्हें आप 'नॉर्मल' मानकर इग्नोर कर रहे हैं

वज़न बढ़ने या घटने के अलावा, अगर आपको अपने शरीर में ये 10 लक्षण दिख रहे हैं, तो यह सीधा संकेत है कि आपका थायराइड अंदर ही अंदर आपके अंगों को नुकसान पहुँचा रहा है:

  1. क्रोनिक फटीग (भयंकर थकान): 8-9 घंटे की पूरी नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही ऐसा लगना जैसे शरीर की 'बैटरी' ज़ीरो है। दिन भर काम करने की हिम्मत न जुटना।
  2. ब्रेन फॉग और कमज़ोर याददाश्त (Brain Fog): दिमाग पर धुंध छाई रहना। छोटी-छोटी बातें भूल जाना, किसी काम पर फोकस न कर पाना और हमेशा कंफ्यूज़ रहना।
  3. बालों का गुच्छों में गिरना (Severe Hair Fall): तकिए पर, नहाते समय या कंघी करते समय बालों का तेज़ी से टूटना। बालों का रूखा और बेजान हो जाना और आइब्रो (Eyebrows) के बाहरी किनारों के बालों का उड़ जाना।
  4. भयंकर कब्ज़ (Chronic Constipation): मेटाबॉलिज़्म धीमा होने के कारण आंतों की गति (Bowel movement) भी धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज़ की पुरानी शिकायत रहने लगती है।
  5. मासिक धर्म की गड़बड़ी और इनफर्टिलिटी: महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना, बहुत ज़्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग होना। थायराइड ओव्यूलेशन (Ovulation) को बिगाड़ देता है, जिससे गर्भधारण (Pregnancy) में भारी दिक्कत आती है।
  6. त्वचा का रूखापन और कमज़ोर नाखून: कितनी भी अच्छी क्रीम लगा लें, लेकिन त्वचा हमेशा सूखी, फटी-फटी और खुरदरी रहती है। नाखून बहुत पतले हो जाते हैं और जल्दी टूट जाते हैं।
  7. मूड स्विंग्स, डिप्रेशन और एंग्जायटी: शरीर में ऊर्जा की कमी सीधे आपके 'फील-गुड' हार्मोन्स को गिरा देती है। बिना बात के रोने का मन करना, हर वक्त उदास रहना या बहुत जल्दी पैनिक कर जाना।
  8. मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द (Muscle & Joint Pain): बिना कोई भारी कसरत किए भी पिंडलियों (Calves), कंधों और जोड़ों में जकड़न और दर्द महसूस होना।
  9. ठंड या गर्मी बर्दाश्त न होना: हाइपोथायरायडिज्म में जब मेटाबॉलिज़्म धीमा होता है, तो शरीर अपनी गर्मी नहीं बना पाता। ऐसे लोगों को गर्मियों में भी हमेशा हाथ-पैर ठंडे महसूस होते हैं (Cold Intolerance)।
  10. चेहरे और आँखों के नीचे सूजन (Puffy Face): सुबह उठने पर चेहरे पर भारीपन महसूस होना और आँखों के नीचे परमानेंट 'बैग्स' या सूजन (Puffiness) का बन जाना।

अगर इसे 'नॉर्मल' मानकर इग्नोर किया, तो क्या होंगी जटिलताएं?

अगर आप इन लक्षणों को रोज़ाना की थकावट मानकर दर्द निवारक गोलियां खाते रहे और केवल थायराइड की रोज़ सुबह खाली पेट ली जाने वाली गोली (Thyroxine) के भरोसे बैठे रहे, तो भविष्य में ये भयंकर जटिलताएं जन्म ले सकती हैं:

  • हृदय रोग (Heart Disease): हाइपोथायरायडिज्म में 'बैड कोलेस्ट्रॉल' (LDL) का स्तर तेज़ी से बढ़ता है। लंबे समय तक ऐसा रहने से धमनियों (Arteries) में ब्लॉकेज आ सकती है और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।
  • गॉयटर (Goiter): थायराइड ग्रंथि जब हार्मोन बनाने के लिए ज़्यादा मेहनत करती है, तो वह आकार में बड़ी हो जाती है, जिससे गले में सूजन (घेंघा) आ जाती है, जो सांस लेने और खाना निगलने में दिक्कत करती है।
  • पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy): लंबे समय तक अनियंत्रित थायराइड नसों को डैमेज कर देता है, जिससे हाथ-पैरों में दर्द, सुन्नपन और झुनझुनी रहने लगती है।
  • मिक्सोडेमा कोमा (Myxedema Coma): यह हाइपोथायरायडिज्म की सबसे गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक गिर जाता है और इंसान बेहोश हो सकता है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है? (अग्नि, रस धातु और वात-कफ का खेल)

आधुनिक विज्ञान जिसे थायराइड डिसऑर्डर कहता है, आयुर्वेद उसे 'अग्नि' (पाचन तंत्र) की खराबी और 'रस धातु' (Plasma/Nutrition) के क्षय के रूप में देखता है।

  • अग्निमांद्य (Low Digestive Fire): आयुर्वेद के अनुसार, जब जठराग्नि (Digestive Fire) कमज़ोर होती है, तो भोजन पचने के बजाय सड़ने लगता है और 'आम' (टॉक्सिन्स) बनाता है। यह आम शरीर के सूक्ष्म रास्तों (Srotas) को ब्लॉक कर देता है, जिससे गले की ग्रंथि (अवटु ग्रंथि) तक सही पोषण नहीं पहुँचता और उसका काम धीमा हो जाता है।
  • कफ और वात का असंतुलन: हाइपोथायरायडिज्म मुख्य रूप से कफ दोष के बढ़ने और वात के बिगड़ने का परिणाम है। बढ़ा हुआ कफ शरीर में सुस्ती, भारीपन, सूजन और कब्ज़ पैदा करता है। वहीं, बिगड़ा हुआ वात बालों का झड़ना, रूखी त्वचा और जोड़ों में दर्द पैदा करता है।
  • उदान वात की रुकावट: गले के हिस्से में 'उदान वात' का निवास होता है। जब तनाव, गलत खानपान या टॉक्सिन्स के कारण यह उदान वात ब्लॉक हो जाता है, तो थायराइड ग्रंथि अपना काम ठीक से नहीं कर पाती।

थायराइड फंक्शन को सुधारने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपकी ग्रंथि का सबसे बड़ा दोस्त या दुश्मन हो सकता है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - अग्नि वर्धक और कफ शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - गोइट्रोजेन्स और कफ वर्धक)
सुपरफूड्स और वसा सूखा नारियल (Coconut), ब्राज़ील नट्स (सेलेनियम से भरपूर), अलसी (Flaxseeds), गाय का शुद्ध घी। सोया प्रोडक्ट्स (सोयाबीन, टोफू, सोया मिल्क - ये थायराइड हार्मोन को रोकते हैं), रिफाइंड ऑयल।
पेय पदार्थ धनिया के बीजों का उबला हुआ पानी (थायराइड के लिए रामबाण), गर्म पानी, ताज़ा छाछ। अत्यधिक चाय/कॉफी, पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और ठंडे पेय पदार्थ।
सब्ज़ियाँ लौकी, तरोई, कद्दू, पालक (पका हुआ), गाजर, सहजन (Drumsticks)। कच्ची गोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, शलजम (ये Goitrogens हैं जो आयोडीन को सोखने से रोकते हैं। इन्हें हमेशा उबालकर खाएं)।
अनाज पुराना चावल, मूंग दाल, जौ (Barley), ओट्स। मैदा, सफेद ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, बहुत ज़्यादा ग्लूटेन (Gluten) वाला भोजन।
मसाले धनिया पाउडर, हल्दी, काली मिर्च (मेटाबॉलिज़्म बढ़ाती है), सोंठ, जीरा। बाज़ार के केमिकल युक्त मसाले, अत्यधिक सफेद नमक (सेंधा नमक का इस्तेमाल करें)।

थायराइड ग्रंथि को ताकत देने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • कांचनार गुग्गुलु (Kanchnar Guggulu): आयुर्वेद में गले की किसी भी ग्रंथि की सूजन या रुकावट को खोलने के लिए यह सबसे महान औषधि है। यह थायराइड के आकार और उसके कार्य (Function) को सामान्य करने में चमत्कारी है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) को कम करता है और थायराइड ग्रंथि को T4 और T3 हार्मोन के उत्पादन के लिए प्राकृतिक रूप से उत्तेजित करता है। यह थायराइड से होने वाली थकान को जड़ से मिटाता है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): हाइपोथायरायडिज्म में होने वाली चेहरे और शरीर की सूजन (Water retention) को कम करने के लिए यह सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है।
  • त्रिकटु चूर्ण (Trikatu Churna): सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली का यह मिश्रण सीधे 'अग्नि' पर काम करता है। यह शरीर के धीमे पड़े मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करता है और कफ दोष को पिघलाता है।

पंचकर्म थेरेपी: हॉर्मोनल बैलेंस का 'हार्ड रिसेट' (Deep Detox)

जब थायराइड के कारण शरीर का वज़न बहुत ज़्यादा बढ़ जाए, नसें दर्द करने लगें और औषधियाँ धीमा असर कर रही हों, तो पंचकर्म इस अटके हुए मेटाबॉलिज़्म को 'पुश' (Push) करता है।

  • उद्वर्तन (Udvartana): यह आयुर्वेदिक हर्बल पाउडर (रूखे चूर्ण) से की जाने वाली एक खास मालिश है। यह त्वचा के नीचे जमे हुए कफ और फैट को पिघलाती है, भारीपन दूर करती है और सेलुलर मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करती है।
  • नस्य (Nasya): गले और सिर के हिस्से (उर्ध्वजत्रुगत) की बीमारियों के लिए नस्य सबसे बेहतरीन है। नाक के रास्ते औषधीय तेल की बूंदें डाली जाती हैं, जो सीधे ब्रेन के 'पिट्यूटरी ग्लैंड' (Pituitary Gland) तक पहुँचकर थायराइड को सही सिग्नल देने में मदद करती हैं।
  • विरेचन (Virechana): आंतों की सफाई के लिए दी जाने वाली यह थेरेपी लिवर को डिटॉक्स करती है। शरीर का 80% T4 हार्मोन लिवर में ही एक्टिव T3 हार्मोन में बदलता है। इसलिए लिवर का साफ होना थायराइड के लिए बहुत ज़रूरी है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

हार्मोनल सिस्टम और मेटाबॉलिज़्म को दोबारा रिपेयर होने में अनुशासित समय लगता है। रातों-रात कोई जादू नहीं होता।

  • शुरुआती 2-3 हफ्ते: अग्नि तेज़ होने से आपके शरीर की थकावट और सुस्ती में भारी कमी आएगी। पेट साफ होने लगेगा (कब्ज़ दूर होगी) और आप सुबह उठकर फ्रेश महसूस करेंगे।
  • 1 से 2 महीने तक: बालों का गिरना काफी हद तक रुक जाएगा। त्वचा की नमी वापस आने लगेगी। आपके मूड स्विंग्स कम होंगे और शरीर का भारीपन और सूजन कम होने लगेगी।
  • 3 से 6 महीने तक: आपका मेटाबॉलिज़्म काफी हद तक पटरी पर आ जाएगा। नियमित आयुर्वेदिक दवा और डाइट के साथ, डॉक्टर की सलाह पर आप अपनी एलोपैथिक थायराइड की गोली के डोज़ (Dosage) को धीरे-धीरे कम करने की स्थिति में आ सकते हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Root Cause Analysis)
इलाज का मुख्य लक्ष्य बाहर से कृत्रिम हार्मोन (Thyroxine) की गोलियां जीवन भर खिलाना। ग्रंथि को फिर से अपना काम करने के लिए पोषण और ताकत देना।
शरीर को देखने का नज़रिया सिर्फ गले की ग्रंथि (Thyroid gland) को खराब मानकर उसी पर फोकस करना। इसे 'अग्नि' (पाचन) और लिवर से जुड़ी बीमारी मानना और पूरे शरीर का इलाज करना।
डाइट का महत्व डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं। कुछ भी खाने की आज़ादी। गोइट्रोजेनिक' फूड्स से बचाव और 'अग्नि' बढ़ाने वाले भोजन पर पूरा ज़ोर।
लंबा असर जीवन भर गोली खानी पड़ती है और समय के साथ डोज़ (mg) बढ़ता रहता है। मेटाबॉलिज़्म अंदर से मज़बूत होता है, जिससे शरीर बाहरी दवाओं पर निर्भरता कम कर सकता है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

अगर आप थायराइड के मरीज़ हैं और आपको नीचे दिए गए गंभीर संकेत दिख रहे हैं, तो इसे केवल 'रूटीन समस्या' मानकर घर पर न बैठें:

  • हार्टबीट का अचानक बहुत तेज़ या अनियमित होना: अगर बैठे-बैठे आपकी धड़कन बहुत तेज़ हो जाए (Palpitations) और घबराहट महसूस हो।
  • गले में बड़ी गांठ या सांस लेने में दिक्कत: अगर गले की सूजन (Goiter) इतनी बढ़ जाए कि खाना निगलने या सांस लेने में भारीपन महसूस हो।
  • अत्यधिक डिप्रेशन और सुसाइडल विचार: अगर हार्मोनल इम्बैलेंस के कारण आपका मानसिक स्वास्थ्य तेज़ी से गिर रहा हो।
  • शरीर का तापमान खतरनाक रूप से गिरना: अगर आपको इतनी ठंड लगे जो रज़ाई ओढ़ने पर भी कम न हो और बेहोशी छाने लगे।

निष्कर्ष

थायराइड को सिर्फ और सिर्फ 'मोटापा बढ़ाने वाली मशीन' समझना बंद करें। जब आप अपने गिरते हुए बालों, पुरानी कब्ज़, सुबह-सुबह की भयंकर थकावट और डिप्रेशन को 'नॉर्मल' मानकर इग्नोर करते हैं, तो आप असल में अपने शरीर के 'मास्टर इंजन' को खराब होने की छूट दे रहे होते हैं। रोज़ सुबह खाली पेट एक छोटी सी कृत्रिम हार्मोन की गोली खा लेना समस्या का इलाज नहीं है, वह सिर्फ आपके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट को सामान्य दिखाने का एक तरीका है। जब तक आप अपने शरीर की 'अग्नि' (मेटाबॉलिज़्म) को ठीक नहीं करेंगे, आपके अंदर के टॉक्सिन्स (आम) थायराइड ग्रंथि को ब्लॉक करते रहेंगे।

इस भ्रम के जाल से बाहर निकलें। आयुर्वेद आपको एक संपूर्ण और स्थायी समाधान देता है। अपनी डाइट से सोया और कच्ची गोभी जैसे 'गोइट्रोजेन्स' को बाहर निकालें। धनिया का पानी, गाय का घी और नारियल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। कांचनार गुग्गुलु और अश्वगंधा जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और जीवा आयुर्वेद के पंचकर्म डिटॉक्स (उद्वर्तन और नस्य) के साथ अपने मेटाबॉलिज़्म को फिर से जीवित करें। आपकी सेहत का कंट्रोल किसी एक छोटी सी गोली में नहीं, बल्कि आपकी जीवनशैली और आयुर्वेद की शक्ति में छिपा है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, बिल्कुल! धनिया आयुर्वेद में एक बेहतरीन औषधि है। यह त्रिदोष शामक है और शरीर के चैनल्स (Srotas) को डिटॉक्स करता है। रोज़ाना रात को एक चम्मच धनिया बीज पानी में भिगोकर, सुबह उसे उबालकर और छानकर पीने से थायराइड फंक्शन में बहुत सुधार आता है।

कच्ची गोभी, पत्ता गोभी, शलजम और ब्रोकली को गोइट्रोजेन्स कहा जाता है। ये सब्ज़ियाँ थायराइड ग्रंथि को आयोडीन सोखने से रोकती हैं। अगर आपको इन्हें खाना ही है, तो हमेशा अच्छी तरह से उबालकर या पकाकर खाएं, कभी कच्चा या सलाद के रूप में न लें।

हाँ। थायराइड हार्मोन बालों की जड़ों (Follicles) के विकास को कंट्रोल करते हैं। जब शरीर में थायराइड हार्मोन कम हो जाता है, तो बालों का विकास रुक जाता है और वे कमज़ोर होकर गुच्छों में टूटने लगते हैं।

नहीं। सोया उत्पादों में आइसोफ्लेवोन्स (Isoflavones) होते हैं, जो सीधे तौर पर थायराइड हार्मोन के उत्पादन में बाधा डालते हैं। हाइपोथायरायडिज्म के मरीज़ों को सोया प्रोडक्ट्स से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

थायराइड के कारण आपका मेटाबॉलिज़्म (ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया) बहुत धीमा हो जाता है। आपकी कोशिकाएं पर्याप्त ऊर्जा नहीं बना पातीं, जिससे शरीर हमेशा थकान और सुस्ती (Chronic Fatigue) महसूस करता है। आयुर्वेद में अश्वगंधा इस थकान को जड़ से मिटाता है।

यह आपकी बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है। आयुर्वेदिक इलाज से जब आपकी ग्रंथि खुद हार्मोन बनाना शुरू कर देती है, तो डॉक्टर की देखरेख में धीरे-धीरे एलोपैथिक गोली का डोज़ (जैसे 100mcg से 50mcg, फिर 25mcg) कम किया जा सकता है। दवा अचानक खुद से कभी बंद न करें।

बिल्कुल। थायराइड ओव्यूलेशन (अंडे के बनने की प्रक्रिया) को अनियमित कर देता है। इसके कारण न सिर्फ गर्भधारण करने में दिक्कत आती है, बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान मिसकैरेज (Miscarriage) का खतरा भी बढ़ जाता है।

नस्य थेरेपी में नाक के ज़रिए औषधीय तेल की बूंदें डाली जाती हैं। नाक को दिमाग का दरवाज़ा माना जाता है। ये औषधियाँ सीधे मस्तिष्क में जाकर पिट्यूटरी ग्लैंड (जो थायराइड को कंट्रोल करती है) को उत्तेजित करती हैं और हार्मोनल बैलेंस बनाती हैं।

हाँ! वर्जिन कोकोनट ऑयल में मीडियम-चेन फैटी एसिड (MCFAs) होते हैं, जो सीधे लिवर में जाकर तुरंत ऊर्जा में बदल जाते हैं। यह मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करता है और शरीर की थकावट दूर करने में बहुत मदद करता है।

हाँ, बहुत गहरा संबंध है। थायराइड हार्मोन आंतों की मांसपेशियों की गति (Peristalsis) को कंट्रोल करते हैं। हार्मोन कम होने से आंतें सुस्त हो जाती हैं, जिससे मल (Stool) आगे नहीं खिसकता और भयंकर कब्ज़ रहने लगती है। आयुर्वेद में अग्नि को तेज़ करके इसका इलाज किया जाता है।

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