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क्या यूरिक एसिड को आयुर्वेदिक उपचार जड़ से ठीक कर सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

एलोप्यूरिनॉल (Allopurinol), फेबुक्सोस्टैट (Febuxostat) और भयंकर दर्द को दबाने वाले भारी पेनकिलर्स (NSAIDs) का इस्तेमाल यूरिक एसिड बढ़ने और गाउट (Gout/गठिया) जैसी बीमारियों में काफी आम है। ये दवाएं शरीर में यूरिक एसिड के उत्पादन को कुछ समय के लिए रोक देती हैं या किडनी के ज़रिए उसे पेशाब से बाहर धकेलने की गति बढ़ा देती हैं, जिससे मरीज़ की ब्लड रिपोर्ट सामान्य दिखने लगती है और जोड़ों का भयंकर दर्द कुछ हद तक शांत हो जाता है। ऐसा लगने लगता है कि बीमारी कंट्रोल में है। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी तब आती है जब मरीज़ इन दवाओं को खाना बंद करता है—कुछ ही हफ्तों के भीतर यूरिक एसिड का स्तर फिर से आसमान छूने लगता है, और पैर के अंगूठे या एड़ी में पहले से भी ज़्यादा भयंकर और चुभने वाला दर्द लौट आता है।

इसके पीछे का विज्ञान बहुत सीधा है बाहरी दवाएं आपके खून में तैर रहे यूरिक एसिड को तो कम कर सकती हैं, लेकिन वे आपके शरीर के उस कमज़ोर मेटाबॉलिज़्म और लिवर-किडनी की कार्यप्रणाली को ठीक नहीं कर सकतीं जो इस एसिड को बना रहे हैं या फिल्टर नहीं कर पा रहे हैं। दवाओं पर शरीर की यह निर्भरता, प्रोटीन पचाने की कमज़ोर क्षमता और आयुर्वेद के अनुसार शरीर में बढ़ा हुआ 'वात दोष' व दूषित 'रक्त' (Vatarakta) इसका सबसे बड़ा कारण हैं। इस बात को समझना बहुत ज़रूरी है, ताकि वक़्त रहते इस चक्र को तोड़ा जा सके और शरीर के पाचन व मेटाबॉलिज़्म को प्राकृतिक रूप से इतना मज़बूत बनाया जा सके कि वह यूरिक एसिड को खुद ही शरीर से बाहर निकाल दे।

यूरिक एसिड (Gout) क्या है?

यूरिक एसिड हमारे शरीर में 'प्यूरीन' (Purine) नामक प्रोटीन के टूटने से बनने वाला एक प्राकृतिक कचरा (Waste product) है।  सामान्य तौर पर, यह एसिड खून में घुल जाता है, किडनी तक पहुंचता है और पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन जब हम बहुत ज़्यादा प्यूरीन वाला खाना (जैसे दालें, रेड मीट, शराब) खाते हैं या हमारी किडनी इसे सही से फिल्टर नहीं कर पाती, तो खून में यूरिक एसिड की मात्रा बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है।

यह अतिरिक्त यूरिक एसिड छोटे-छोटे और बेहद नुकीले 'क्रिस्टल्स' (सुई जैसे कणों) में बदल जाता है और शरीर के जोड़ों (विशेषकर पैर के अंगूठे) में जाकर जमा होने लगता है। जब ये सुई जैसे क्रिस्टल्स जोड़ों की नसों और हड्डियों में चुभते हैं, तो वहां भयंकर लालिमा, सूजन और ऐसा दर्द होता है मानो किसी ने हड्डी तोड़ दी हो। इसे ही 'गाउट' (Gout) या यूरिक एसिड का गठिया कहते हैं।

यूरिक एसिड की बीमारियाँ मुख्य रूप से कितने प्रकार की होती हैं?

आधुनिक चिकित्सा में यूरिक एसिड के बढ़ने और उसके प्रभावों को मुख्य रूप से इन अवस्थाओं में बांटा गया है:

  • एसिम्प्टोमैटिक हाइपरयूरिसीमिया: इस अवस्था में खून की रिपोर्ट में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ आता है, लेकिन मरीज़ को जोड़ों में कोई दर्द या सूजन महसूस नहीं होती।
  • एक्यूट गाउट : यह वह अवस्था है जब अचानक आधी रात को पैर के अंगूठे या टखने में भयंकर सूजन, लालिमा और असहनीय दर्द उठ खड़ा होता है।
  • इंटरवल गाउट: दो गाउट अटैक्स के बीच का वह समय जब मरीज़ को कोई दर्द नहीं होता और वह खुद को बिल्कुल स्वस्थ महसूस करता है।
  • क्रॉनिक टोफेशियस गाउट: जब यूरिक एसिड सालों तक बढ़ा रहता है, तो वह जोड़ों और त्वचा के नीचे बड़ी-बड़ी सख्त गांठें (Tophi) बना देता है, जिससे हड्डियां स्थायी रूप से टेढ़ी हो जाती हैं।

यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य लक्षण और संकेत

जब खून में यूरिक एसिड क्रिस्टल्स बनकर जोड़ों में जमने लगता है, तो शरीर ये खास चेतावनी संकेत देता है:

  • पैर के अंगूठे में अचानक भयंकर दर्द: अक्सर रात के समय पैर के बड़े अंगूठे में अचानक से ऐसा दर्द उठना जैसे कोई सुई चुभो रहा हो।
  • जोड़ों में लालिमा और गर्माहट: प्रभावित जोड़ (अंगूठा, टखना, या घुटना) का बिल्कुल लाल हो जाना और छूने पर गर्म महसूस होना।
  • भयंकर सूजन और संवेदनशीलता: जोड़ में इतनी सूजन आना कि उस पर चादर का कपड़ा छू जाने से भी मरीज़ दर्द से कराह उठता है।
  • जोड़ों की जकड़न: दर्द खत्म होने के बाद भी कई दिनों तक जोड़ों को मोड़ने या चलने-फिरने में भारी तकलीफ होना।
  • किडनी में पथरी के संकेत: पीठ के निचले हिस्से में भयंकर दर्द होना, जो यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स के किडनी में जमने (Kidney Stones) का संकेत है।

दवा बंद करते ही यूरिक एसिड क्यों बढ़ जाता है? – मुख्य कारण

  • मेटाबॉलिज़्म का जड़ से ठीक न होना: अंग्रेज़ी दवाएं (जैसे Allopurinol) सिर्फ यूरिक एसिड बनाने वाले एंजाइम को ब्लॉक करती हैं। वे आपके कमज़ोर लिवर और पाचन को नहीं सुधारतीं, जो 'प्यूरीन' को ठीक से पचा नहीं पा रहा है।
  • किडनी की कमज़ोर फिल्टरेशन क्षमता: जब तक किडनी की प्राकृतिक क्षमता नहीं सुधरेगी, दवा छोड़ते ही खून में फिर से कचरा (एसिड) जमा होने लगेगा।
  • जंक फूड और शराब की लत: दवा खाने के साथ-साथ अगर मरीज़ ज़्यादा प्रोटीन, शराब (विशेषकर बीयर) और खट्टी चीज़ें खाता रहता है, तो शरीर दवा छोड़ने के तुरंत बाद क्रिस्टल्स बना देता है।
  • शरीर में 'आम' (Toxins) का जमाव: जब तक आंतों और खून में जमा पुराना ज़हरीला 'आम' बाहर नहीं निकलेगा, यूरिक एसिड का स्तर कभी स्थायी रूप से कम नहीं होगा।

यूरिक एसिड बढ़ने के जोखिम और जटिलताएँ  क्या हैं?

यूरिक एसिड को अगर अनदेखा किया जाए या जीवन भर सिर्फ पेनकिलर्स के सहारे छोड़ दिया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • जोड़ों का स्थायी डैमेज (Joint Deformity): सख्त गांठें (Tophi) हड्डियों को अंदर से गला देती हैं, जिससे हाथ-पैर की उंगलियां हमेशा के लिए टेढ़ी हो जाती हैं और इंसान अपाहिज हो सकता है।
  • किडनी फेलियर (Kidney Failure): यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स किडनी की सूक्ष्म नलिकाओं को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे किडनी स्टोन बनते हैं और लंबे समय में किडनी काम करना बंद कर सकती है।
  • हृदय रोग का खतरा: खून में ज़्यादा यूरिक एसिड होने से धमनियों में सूजन आती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
  • दवाओं का साइड इफेक्ट: भयंकर दर्द को दबाने के लिए सालों तक भारी पेनकिलर्स (NSAIDs) खाने से पेट में अल्सर (Ulcers) और लिवर खराब होने का खतरा रहता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद में यूरिक एसिड के बढ़ने और उससे होने वाले गठिया को 'वातरक्त' या 'आढ्य वात' कहा जाता है। यह नाम ही बीमारी की जड़ को स्पष्ट करता है वात' और 'रक्त' का दूषित होना।

आयुर्वेद के अनुसार, जब हम लगातार ऐसा भोजन करते हैं जो पचने में भारी हो, बहुत ज़्यादा खट्टा, मसालेदार हो या बहुत ज़्यादा दालें विशेषकर उड़द और राजमा खाते हैं, तो जठराग्नि कमज़ोर हो जाती है। इससे खून रक्त धातु दूषित हो जाता है और उसमें 'आम'  घुल जाता है। दूसरी तरफ, खराब दिनचर्या और तनाव से शरीर का वात दोष भड़क जाता है।

जब यह बढ़ा हुआ 'वात' शरीर में घूमता है, तो भारी और दूषित 'रक्त' उसका रास्ता रोक लेता है। चूंकि खून का दौरा पैरों की तरफ गुरुत्वाकर्षण के कारण ज़्यादा होता है, इसलिए यह दूषित खून और वात पैर के अंगूठे या टखने के जोड़ों में जाकर फंस जाते हैं। वहां ये भयंकर जलन, सूजन और सुई चुभने जैसा दर्द पैदा करते हैं। आयुर्वेद का मकसद सिर्फ एसिड के स्तर को दबाना नहीं है, बल्कि रक्त को शुद्ध करना, वात को शांत करना और किडनी की सफाई करना है। 

यूरिक एसिड के लिए असरदार जड़ी-बूटियाँ  

  • गिलोय : गिलोय को आयुर्वेद में 'वातरक्त' यूरिक एसिड की सबसे श्रेष्ठ दवा माना गया है। यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाती है, दूषित रक्त को पूरी तरह शुद्ध करती है और जोड़ों की भयंकर सूजन को तुरंत सोख लेती है।
  • पुनर्नवा : इसका काम शरीर से अतिरिक्त पानी और कचरे को बाहर निकालना है। यह किडनी को ताक़त देती है और पेशाब के रास्ते यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को शरीर से बाहर धकेल देती है।
  • कैशोर गुग्गुलु : गिलोय, त्रिफला और गुग्गुलु से बनी यह शास्त्रीय औषधि खून में जमे यूरिक एसिड को पिघलाने और जोड़ों की लालिमा व सख्त गांठों को खत्म करने में चमत्कारिक असर दिखाती है।
  • मंजिष्ठा : यह एक शक्तिशाली 'रक्त शोधक' है। यह खून की एसिडिटी को शांत करती है और त्वचा व जोड़ों के लालपन को दूर करती है।

आयु आयुर्वेदिक पंचकर्म: शरीर की अंदरूनी सफाई

  • रक्तमोक्षण : जब पैर के अंगूठे में इतना भयंकर दर्द हो कि पेनकिलर भी काम न कर रही हो, तब प्रभावित जोड़ पर औषधीय जोंक लगाई जाती है। यह जोंक उस जगह से दूषित खून और यूरिक एसिड को चूस लेती है, जिससे मरीज़ को कुछ ही मिनटों में दर्द और सूजन से जादुई राहत मिलती है।
  • विरेचन : खून की अशुद्धि और लिवर की कमज़ोरी को दूर करने के लिए औषधीय दस्त के ज़रिए शरीर का सारा पित्त और ज़हरीला तत्व बाहर निकाला जाता है।
  • बस्ति : बढ़ा हुआ वात जोड़ों में रूखापन और दर्द पैदा करता है। औषधीय एनीमा के ज़रिए वात दोष को शांत किया जाता है, जिससे जोड़ों का दर्द हमेशा के लिए चला जाता है।

यूरिक एसिड के रोगी के लिए शुद्ध आहार

किडनी को स्वस्थ रखने और यूरिक एसिड को दोबारा बनने से रोकने के लिए हमेशा हल्का, क्षारीय और जठराग्नि को बढ़ाने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

श्रेणी क्या लें / क्या न लें विवरण
क्या खाएं लौकी और धनिया रोज़ सुबह ताज़ी लौकी का रस पिएं (ध्यान रखें कि कड़वी न हो)। लौकी और हरे धनिये का अर्क यूरिक एसिड को बेअसर करने और किडनी साफ करने में मदद करता है।
क्या खाएं पुराना चावल, परवल, मूंग दाल पचने में हल्का भोजन करें। दालों में केवल छिलके वाली हरी मूंग दाल का सेवन करें।
क्या खाएं पर्याप्त पानी दिनभर में कम से कम 3–4 लीटर गुनगुना पानी पिएं, ताकि किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर करके बाहर निकाल सके।
क्या न खाएं उड़द, राजमा, छोले, चना इन दालों में अधिक प्रोटीन (प्यूरीन) होता है, जो यूरिक एसिड बढ़ाता है—इन्हें पूरी तरह बंद करें।
क्या न खाएं रेड मीट, सीफूड, शराब मांसाहार और शराब (खासकर बीयर) यूरिक एसिड बढ़ाते हैं और लिवर पर असर डालते हैं।
क्या न खाएं खट्टी व फर्मेंटेड चीज़ें रात में दही, छाछ, टमाटर, इमली, अचार, इडली-डोसा जैसी चीज़ें न खाएं—ये वातरक्त बढ़ा सकती हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में यूरिक एसिड का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ की स्थिति के हिसाब से किया जाता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक़्त इस बात पर निर्भर करता है कि यूरिक एसिड का स्तर कितना ज़्यादा है, क्या जोड़ों में सख्त गांठें बन चुकी हैं, और आप कितने समय से पेनकिलर्स खा रहे हैं।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर समस्या नई है, तो आमतौर पर 2 से 4 हफ्तों में ही जोड़ों की लालिमा और भयंकर दर्द खत्म हो जाता है और यूरिक एसिड का स्तर गिरने लगता है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर आपको 5-10 साल से गाउट की बीमारी है, जोड़ों में गांठें हैं और किडनी पर असर आ रहा है, तो रक्त को पूरी तरह साफ होने और मेटाबॉलिज़्म सुधरने में 4 से 6 महीने या उससे ज़्यादा समय भी लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो शरीर का फिल्टरेशन सिस्टम ताक़तवर हो जाता है और जीवन भर यूरिक एसिड की गोलियों पर निर्भर रहने की ज़रूरत खत्म हो जाती है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

  • आधुनिक चिकित्सा: यह एंजाइम्स को ब्लॉक करके यूरिक एसिड के उत्पादन को दबाने और दर्द को सुन्न करने पर काम करती है। यह रिपोर्ट को नॉर्मल दिखाती है। लेकिन यह बीमारी की जड़ यानी 'कमज़ोर पाचन' और दूषित खून को साफ नहीं करती। दवा छोड़ते ही एसिड फिर से बनने लगता है और भारी पेनकिलर्स किडनी को खराब करते हैं।
  • आयुर्वेदिक चिकित्सा: आयुर्वेद बीमारी की असली वजह यानी दूषित रक्त, बिगड़े हुए वात दोष और कमज़ोर जठराग्नि पर काम करता है। इसमें गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों के ज़रिए खून को साफ किया जाता है और पुनर्नवा से किडनी की सफाई की जाती है। इसमें थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन शरीर प्राकृतिक रूप से यूरिक एसिड को बाहर निकालना सीख जाता है और बीमारी जड़ से खत्म होती है।

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

यूरिक एसिड की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • किसी भी जोड़ विशेषकर पैर के अंगूठे या घुटने में अचानक ऐसा भयंकर दर्द हो जो बर्दाश्त से बाहर हो जाए।
  • प्रभावित जोड़ के आसपास तेज़ बुखार और भयंकर लालिमा महसूस हो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • पीठ के निचले हिस्से किडनी की जगह में तेज़ दर्द उठे और पेशाब में खून दिखाई दे।
  • जोड़ों के आसपास त्वचा के नीचे सख्त और सफेद रंग की गांठें बननी शुरू हो जाएं।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से यूरिक एसिड का बार-बार बढ़ना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि शरीर का पाचन तंत्र प्रोटीन को सही से पचा नहीं पा रहा है, खून दूषित हो चुका है और वात दोष बढ़ा हुआ है। भारी दालें, रेड मीट खाने, शराब पीने और व्यायाम न करने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म बिगड़ जाता है और 'आम' बनने लगता है। सालों तक सिर्फ यूरिक एसिड कम करने की अंग्रेज़ी गोलियां खाने या पेनकिलर्स लेने से किडनी कमज़ोर हो जाती है और शरीर खुद एसिड निकालना भूल जाता है। इलाज में जठराग्नि को बढ़ाना, खून को साफ करना और वात को शांत करना सबसे ज़्यादा आवश्यक है। इसमें तनाव मुक्त रहना, लौकी का रस पीना, गिलोय व कैशोर गुग्गुलु जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करना और सही डाइट अपनाना शामिल है, जिससे यूरिक एसिड की बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हां, बिल्कुल। जब आयुर्वेदिक इलाज से आपका मेटाबॉलिज़्म सुधर जाता है और किडनी एसिड को खुद फिल्टर करने लगती है, तो डॉक्टर की देखरेख में धीरे-धीरे सभी अंग्रेज़ी दवाएं बंद की जा सकती हैं।

लौकी की तासीर ठंडी और क्षारीय (Alkaline) होती है। यह खून की एसिडिटी को तुरंत बेअसर (Neutralize) करती है और किडनी की सफाई कर यूरिक एसिड को बाहर निकालती है।

सादा दूध पीना सुरक्षित है क्योंकि इसमें प्यूरीन नहीं होता। लेकिन रात के समय दूध पीने से कफ बढ़ता है, इसलिए दूध में हमेशा थोड़ी हल्दी उबालकर सुबह या दिन में ही पिएं।

टमाटर और उसके बीज शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकते हैं और खून में 'अम्लता' (एसिडिटी) पैदा करते हैं, जो जोड़ों के दर्द को भड़का देता है।

गिलोय 'वातरक्त' (यूरिक एसिड) के लिए आयुर्वेद की सबसे उत्तम जड़ी-बूटी है। यह खून से ज़हरीले तत्वों को साफ करती है और जोड़ों की भयंकर सूजन को जड़ से मिटाती है।

यूरिक एसिड में सिर्फ छिलके वाली हरी मूंग की दाल ही सुरक्षित है। राजमा, छोले, उड़द, अरहर और सोयाबीन जैसी भारी दालें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए।

हां, नींबू स्वाद में खट्टा होता है लेकिन शरीर के अंदर जाकर वह क्षारीय (Alkaline) प्रभाव देता है। गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने से यूरिक एसिड क्रिस्टल्स को पिघलने में मदद मिलती है।

बिल्कुल। नींद की कमी और तनाव से शरीर का 'वात दोष' भड़कता है और लिवर का मेटाबॉलिज़्म धीमा पड़ जाता है, जिससे एसिड का स्तर बढ़ जाता है।

पैर का अंगूठा शरीर के सबसे निचले हिस्से में होता है। गुरुत्वाकर्षण और शरीर के उस हिस्से में खून का तापमान थोड़ा कम होने के कारण यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स सबसे पहले वहीं जाकर जमते हैं।

नहीं। पेनकिलर सिर्फ़ दिमाग़ को दर्द महसूस होने से रोकती है। यह यूरिक एसिड को कम नहीं करती, बल्कि इसके लंबे इस्तेमाल से किडनी डैमेज (Kidney failure) होने का ख़तरा बहुत बढ़ जाता है।

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