Diseases Search
Close Button
 
 

Uric Acid Control हो रहा है, पर क्या बीमारी भी ठीक हो रही है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 11 May, 2026
  • category-iconUpdated on 17 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5076

आजकल हर दूसरे व्यक्ति की ब्लड रिपोर्ट में यूरिक एसिड (Uric Acid) बढ़ा हुआ आ रहा है। जब जोड़ों में दर्द होता है और रिपोर्ट में यूरिक एसिड हाई निकलता है, तो डॉक्टर तुरंत एक यूरिक एसिड कम करने वाली गोली (जैसे Allopurinol) लिख देते हैं। कुछ महीने गोली खाने के बाद आप दोबारा टेस्ट करवाते हैं, रिपोर्ट में यूरिक एसिड का लेवल 8 से गिरकर 5 पर आ जाता है। आप बहुत खुश होते हैं कि चलिए, "यूरिक एसिड कंट्रोल हो गया, अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ।" आप दवाइयाँ कम कर देते हैं या पुरानी लाइफस्टाइल पर वापस लौट आते हैं। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद रात को सोते समय अचानक आपके पैर के अंगूठे में आग जैसा भयंकर दर्द उठता है, गाउट (Gout) का अटैक!

आप हैरान रह जाते हैं कि जब ब्लड रिपोर्ट में यूरिक एसिड बिल्कुल नॉर्मल था, तो यह गठिया का दर्द कैसे आ गया? यहीं पर हम सबसे बड़ी गलती करते हैं। हम सिर्फ रिपोर्ट के नंबरों (Symptoms) को कंट्रोल कर रहे हैं, लेकिन अंदर पनप रही उस असली बीमारी को बिल्कुल नज़रअंदाज़ कर रहे हैं जिसने यूरिक एसिड को बढ़ाया था। सिर्फ खून में यूरिक एसिड का लेवल कम हो जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी बीमारी जड़ से ठीक हो गई है।

यूरिक एसिड (Uric Acid) और गठिया (Gout) का असली संबंध क्या है?

यूरिक एसिड हमारे शरीर का एक प्राकृतिक वेस्ट प्रोडक्ट (कचरा) है। जब यह शरीर में हद से ज़्यादा बढ़ने लगता है, तो यह कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। इसे समझना सही इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है।

  • प्यूरीन का टूटना: जब हम अपनी डाइट में 'प्यूरीन' (Purine) से भरपूर खाना खाते हैं, तो हमारा शरीर उसे पचाते समय यूरिक एसिड बनाता है।
  • किडनी का फिल्टरेशन: एक स्वस्थ शरीर में, यह यूरिक एसिड खून के ज़रिए किडनी तक पहुँचता है, और किडनी इसे फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है।
  • क्रिस्टल्स (Crystals) का निर्माण: जब यूरिक एसिड खून में बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो यह खून में घुलना बंद कर देता है और शीशे जैसे नुकीले क्रिस्टल्स में बदलकर जोड़ों के अंदर जमा होने लगता है, जिससे गाउट (Gout) या गठिया का भयंकर दर्द पैदा होता है।

रिपोर्ट नॉर्मल, फिर भी दर्द क्यों?

बहुत से मरीज़ों के साथ ऐसा होता है कि उनकी ब्लड रिपोर्ट में यूरिक एसिड का लेवल 5 या 6 mg/dL (बिल्कुल नॉर्मल) आता है, लेकिन फिर भी उनके पैरों के अंगूठों या घुटनों में अचानक दर्द उठ जाता है। यह एक बहुत बड़ा भ्रम है जिसे तोड़ना ज़रूरी है।

  • खून बनाम जोड़ (Blood vs Joints): जो गोलियाँ आप खाते हैं, वे सिर्फ आपके खून (Blood) में से यूरिक एसिड को कम करती हैं। लेकिन जो नुकीले क्रिस्टल्स आपके जोड़ों (Joints) की गहराई में पहले से जमा हो चुके हैं, वे वहीं पड़े रहते हैं।
  • क्रिस्टल्स का फटना: जब आप कोई ट्रिगर फूड (जैसे शराब या भारी दाल) खाते हैं, तो शरीर की इम्युनिटी उन जमे हुए क्रिस्टल्स पर हमला कर देती है, जिससे रिपोर्ट नॉर्मल होने के बावजूद भयंकर दर्द होता है।
  • दवाइयों का छलावा: खून का यूरिक एसिड कम होना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपकी किडनी की फिल्टर करने की क्षमता ठीक हो गई है; यह सिर्फ दवा का रासायनिक असर है।

क्या गोलियों से यूरिक एसिड कम होना असली इलाज है?

जब आप यूरिक एसिड कम करने वाली दवाइयाँ खाते हैं, तो ये सिर्फ एक 'बैंड-एड' की तरह काम करती हैं। ये आपकी बीमारी की जड़ को ठीक नहीं करतीं, बल्कि शरीर को सिर्फ एक रासायनिक भ्रम में रखती हैं।

  • दवा का काम करने का तरीका: ये दवाइयाँ मुख्य रूप से लिवर में यूरिक एसिड के बनने की प्रक्रिया (Enzymes) को ज़बरदस्ती ब्लॉक कर देती हैं।
  • मेटाबॉलिज़्म पर कोई असर नहीं: ये गोलियाँ आपके कमज़ोर हो चुके मेटाबॉलिज़्म या किडनी की कमज़ोर हो चुकी फिल्टरिंग क्षमता को बिल्कुल भी सुधारने का काम नहीं करती हैं।
  • रिबाउंड इफेक्ट (Rebound): जैसे ही आप ये गोलियाँ खाना बंद करते हैं, आपके शरीर में यूरिक एसिड पहले से भी दोगुनी तेज़ी से वापस बढ़ने लगता है क्योंकि असली मशीनरी तो अभी भी खराब है।

मेटाबॉलिज़्म की कमज़ोरी: यूरिक एसिड की असली जड़

यूरिक एसिड का बढ़ना कोई बाहरी बीमारी नहीं है; यह आपके शरीर की अंदरूनी मशीनरी यानी मेटाबॉलिज़्म के फेल होने का सीधा संकेत है। जब तक आप इस मशीनरी को ठीक नहीं करेंगे, कोई भी इलाज स्थायी नहीं हो सकता।

  • कमज़ोर लिवर: हमारा लिवर प्यूरीन को पचाने का मुख्य केंद्र है। जब लिवर सुस्त पड़ जाता है (जैसे फैटी लिवर होने पर), तो वह खाने को सही से पचाने के बजाय ज़्यादा यूरिक एसिड बनाने लगता है।
  • किडनी की कमज़ोरी: अगर आपकी किडनी स्वस्थ है, तो वह कितना भी यूरिक एसिड बने, उसे बाहर फेंक देगी। यूरिक एसिड का बढ़ना साफ बताता है कि आपकी किडनी की फिल्टर करने की ताकत कमज़ोर पड़ चुकी है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (मोटापा): शरीर का अत्यधिक फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है। यह किडनी को यूरिक एसिड बाहर निकालने से रोकता है। वज़न कम किए बिना यूरिक एसिड को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता।

गलत खान-पान का चुनाव: जो दवा के असर को भी काट देता है

हम सोचते हैं कि रोज़ एक गोली खाने से हम कुछ भी खाने के लिए आज़ाद हो गए हैं। लेकिन हमारी रोज़मर्रा की डाइट हमारी नसों और किडनी में तेज़ाब भर रही है, जो हर गोली के असर को बेअसर कर देती है।

  • रेड मीट और भारी प्रोटीन: लाल मांस (Red meat), राजमा, छोले और साबुत दालों में प्यूरीन बहुत ज़्यादा होता है, जो सीधा यूरिक एसिड को आसमान पर पहुँचा देता है।
  • रिफाइंड चीनी (Fructose): पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और मिठाइयों में हाई-फ्रुक्टोज़ होता है। फ्रुक्टोज़ शरीर में जाकर प्यूरीन के टूटने की प्रक्रिया को बहुत तेज़ कर देता है।
  • शराब (Alcohol) का सेवन: खासकर बीयर (Beer) यूरिक एसिड के मरीज़ों के लिए सीधा ज़हर है। शराब किडनी को इतना व्यस्त कर देती है कि वह यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालना रोक देती है।
  • पानी की भारी कमी: जो लोग दिन भर में बहुत कम पानी पीते हैं, उनकी किडनी यूरिक एसिड को खून से धोकर (Flush out) बाहर नहीं निकाल पाती।

आयुर्वेद यूरिक एसिड और गठिया को कैसे समझता है? (वातरक्त)

आधुनिक विज्ञान जिसे हाई यूरिक एसिड या गाउट (Gout) कहता है, आयुर्वेद ने उसे हज़ारों साल पहले 'वातरक्त' (Vatarakta) के नाम से बहुत ही गहराई से समझा था। यह वात और रक्त के बिगड़ने की गहरी बीमारी है।

  • वात दोष का भड़कना: आयुर्वेद के अनुसार, जब खराब जीवनशैली के कारण शरीर का 'वात दोष' (Vata Dosha) भड़क जाता है, तो शरीर में रुखापन और गति का असंतुलन आ जाता है।
  • रक्त का अशुद्ध होना: गलत खान-पान के कारण खून (रक्त धातु) अशुद्ध हो जाता है और उसमें तेज़ाब (एसिड) भर जाता है।
  • स्रोतो अवरोध (Blockage): यह अशुद्ध रक्त और बढ़ा हुआ वात मिलकर जोड़ों के रास्तों को ब्लॉक कर देते हैं। इसी ब्लॉकेज के कारण जोड़ों में सुई चुभने जैसा भयंकर दर्द और जलन (गठिया) शुरू हो जाती है।

यूरिक एसिड के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें खून को साफ करने और जोड़ों में जमे क्रिस्टल्स को पिघलाने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं, जो आपकी किडनी को नुकसान पहुँचाए बिना काम करती हैं।

  • गिलोय आयुर्वेद में गिलोय को वातरक्त की सबसे सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। यह शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड को चूसकर बाहर निकालती है और इम्युनिटी को शांत करती है।
  • पुनर्नवा यह किडनी की कार्यक्षमता को बहुत ज़्यादा बढ़ा देती है, जिससे किडनी तेज़ी से यूरिक एसिड को पेशाब के ज़रिए बाहर फेंकने लगती है।
  • मंजिष्ठा यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरिफायर है। यह खून की एसिडिटी को कम करती है और जोड़ों में जमे लालिमा और सूजन वाले दर्द को खींच लेती है।
  • गोक्षुर यह किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट को साफ रखता है और यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को पथरी बनने से रोकता है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म थेरेपी वातरक्त (Gout) में कैसे काम करती है?

जब खून में यूरिक एसिड बहुत ज़्यादा भर चुका हो और जोड़ों में भयंकर सूजन व आग जैसी जलन हो, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी शरीर को तुरंत डिटॉक्स करके आराम देती है।

  • विरेचन (Virechana): यह यूरिक एसिड और वातरक्त का सबसे अचूक इलाज है। इसमें औषधीय जड़ी-बूटियों से दस्त (Loose motions) लगाकर लिवर और आंतों में जमा हुए भयंकर एसिड को शरीर से बाहर निकाल फेंक दिया जाता है।
  • रक्तमोक्षण: जब पैर का अंगूठा गाउट के अटैक से लाल और सूजकर गुब्बारा बन जाए, तो वहां मेडिकल जोंक (Leech) लगाई जाती है। यह जोंक सिर्फ जमे हुए गंदे खून को चूसकर निकाल देती है, जिससे दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
  • बस्ती (Basti): वात को जड़ से खत्म करने के लिए औषधीय काढ़े का एनिमा दिया जाता है, जो जोड़ों की जकड़न को खोलकर उन्हें प्राकृतिक नमी देता है।

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने वाला वात-पित्त शामक डाइट प्लान

आप जो खाते हैं, वही आपके खून में यूरिक एसिड बनाता है या उसे बाहर निकालता है। इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सही डाइट का पालन करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - यूरिक एसिड को फ्लश करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रक्त-पित्त और यूरिक एसिड बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ (Barley सबसे श्रेष्ठ मूत्रल है), ओट्स, ज्वार, पुराना चावल। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, नया चावल।
प्रोटीन (Proteins) मूंग दाल, मसूर दाल (दिन के समय और घी/जीरे के छौंक के साथ)। रात के समय राजमा, छोले, भारी उड़द दाल, मशरूम, मटर।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी (अमृत है), परवल, पेठा (Ash gourd), कद्दू, करेला। बीज वाले टमाटर, कच्चा पालक (ऑक्सालेट्स होते हैं), बैंगन।
फल (Fruits) आंवला, पपीता, चेरी (Cherries), ताज़ा सेब (सीमित मात्रा में)। पैकेटबंद फ्रूट जूस (Heavy Fructose), चीकू, अत्यधिक मीठे फल।
पेय पदार्थ (Beverages) जौ का पानी, धनिए का पानी, गिलोय का काढ़ा, ताज़ा मट्ठा। कोल्ड ड्रिंक्स, पैक की हुई मीठी लस्सी, शराब, अत्यधिक डार्क कॉफी।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसी रासायनिक गोली नहीं है जो एक रात में खून से यूरिक एसिड गायब कर दे। शरीर के मेटाबॉलिज़्म को रीसेट होने और किडनी की क्षमता बढ़ने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपका पेट साफ होगा; लिवर की कार्यक्षमता बढ़ेगी और शरीर में हल्कापन महसूस होने लगेगा। अगर जोड़ों में जकड़न थी, तो वह कम हो जाएगी।
  • 1 से 3 महीने तक: खून से अतिरिक्त यूरिक एसिड साफ होना शुरू हो जाएगा। जोड़ों में जमे क्रिस्टल्स धीरे-धीरे पिघलने लगेंगे, जिससे गठिया के दर्द में भारी आराम मिलेगा।
  • 3 से 6 महीने तक: आपका पूरा मेटाबॉलिज़्म सुधर जाएगा। खून की एसिडिटी खत्म हो जाएगी। सख़्त परहेज़ और जड़ी-बूटियों से भविष्य में गठिया के अटैक आने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी और आप गोलियों से आज़ाद हो जाएंगे।

मरीज़ों के अनुभव

मेरे हाथों के जोड़ों में दर्द और सूजन के कारण मुझे काम करने में कठिनाई होती थी। मैंने कई डॉक्टरों से परामर्श लिया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। फिर मैंने आयुर्वेदिक उपचार लेने का निर्णय लिया और जीवा आयुर्वेद के क्लिनिक का दौरा किया।

डॉक्टर ने मेरी पूरी जाँच और विस्तृत परामर्श किया, समस्या की जड़ समझाई और उपचार दिया, जिससे मुझे राहत मिली। धन्यवाद जीवा!

निवास शर्मा
फरीदाबाद

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

यूरिक एसिड जैसी क्रोनिक बीमारी के इलाज के लिए सही चिकित्सा पद्धति का चुनाव करना ज़रूरी है। आइए समझते हैं कि दोनों दृष्टिकोण कैसे अलग हैं।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड का बनना ब्लॉक करने के लिए 'Allopurinol' जैसी गोलियाँ और दर्द के लिए पेनकिलर्स देना। जठराग्नि को बढ़ाना, रक्त को शुद्ध करना (रक्त-शोधन) और गिलोय/गोक्षुर से एसिड को प्राकृतिक रूप से फ्लश करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल प्यूरीन (Purine) मेटाबॉलिज़्म की गड़बड़ी और क्रिस्टल्स का जमना मानना। इसे कमज़ोर पाचन, 'आम' का संचय, अशुद्ध रक्त और वात दोष (वातरक्त) के भयंकर टकराव का सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर हर तरह का प्रोटीन (दालें) पूरी तरह बंद करा दिया जाता है, जिससे शरीर कमज़ोर हो जाता है। मूंग दाल की अनुमति दी जाती है। पैकेटबंद चीनी (Fructose) रोकने और लौकी/जौ का पानी पीने पर ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ उम्र भर खानी पड़ती हैं। दवा छोड़ते ही यूरिक एसिड तुरंत वापस बढ़ जाता है। किडनी और लिवर अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे खुद यूरिक एसिड को फिल्टर करना सीख जाते हैं।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

भले ही आप दवाइयाँ ले रहे हों, लेकिन गठिया के इन गंभीर संकेतों को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर शरीर में ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

  • अंगूठे या जोड़ों में अचानक भयंकर दर्द: अगर आधी रात को पैर के अंगूठे, घुटने या टखने में अचानक बर्दाश्त से बाहर दर्द उठे और वह हिस्सा सुर्ख लाल होकर आग की तरह गर्म हो जाए।
  • पेशाब में रुकावट या दर्द: अगर पेशाब करते समय बहुत भयंकर दर्द या जलन हो, या पेशाब का रंग लाल (खून आना) हो जाए (यह यूरिक एसिड की पथरी का बहुत बड़ा संकेत है)।
  • जोड़ों का टेढ़ा होना: अगर बार-बार दर्द के कारण उँगलियों या पैर के जोड़ों के पास सख़्त गांठे (Tophi) बन जाएं और जोड़ टेढ़े होने लगें।
  • असहनीय कमर दर्द: अगर कमर के निचले हिस्से में भयंकर दर्द उठे जो पेट के निचले हिस्से या जांघों की तरफ जाए (यह किडनी स्टोन के खिसकने का संकेत है)।
  • लगातार तेज़ बुखार: अगर गठिया के दर्द के साथ आपको अचानक तेज़ ठंड लगकर बुखार आने लगे (यह जॉइंट में इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है)।

निष्कर्ष

यूरिक एसिड (Uric Acid) का खून की रिपोर्ट में नॉर्मल आ जाना इस बात की गारंटी बिल्कुल नहीं है कि आपकी बीमारी ठीक हो गई है। जब हम सिर्फ रासायनिक गोलियाँ खाकर यूरिक एसिड के निर्माण को ज़बरदस्ती रोक देते हैं, तो हमारा शरीर सिर्फ एक भ्रम में जीता है। असल बीमारी, यानी कमज़ोर मेटाबॉलिज़्म, सुस्त लिवर और किडनी की कमज़ोर फिल्टरिंग क्षमता, वहीं की वहीं रहती है। यही कारण है कि रिपोर्ट नॉर्मल होने के बावजूद जोड़ों में जमे हुए नुकीले क्रिस्टल्स आपको गठिया (Gout) का भयंकर दर्द देते रहते हैं। इस दर्द और बीमारी के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है, शरीर की अंदरूनी मशीनरी को ठीक करना। आयुर्वेद आपको इस छलावे से बाहर निकालकर एक स्थायी और प्राकृतिक समाधान देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, गिलोय और पुनर्नवा जैसी जड़ी-बूटियों, पंचकर्म की डिटॉक्स थेरेपी और सही वात-पित्त शामक जीवनशैली को अपनाकर आप अपने खून को साफ कर सकते हैं, क्रिस्टल्स को पिघला सकते हैं और अपने मेटाबॉलिज़्म को दोबारा ज़िंदा कर सकते हैं। ब्लड रिपोर्ट के नंबरों के पीछे न भागें, बीमारी की जड़ को मिटाएं, और जीवा आयुर्वेद के साथ अपने शरीर को हमेशा के लिए स्वस्थ और दर्द-मुक्त बनाएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

क्योंकि यूरिक एसिड की गोलियाँ सिर्फ आपके खून (Blood) में से यूरिक एसिड को कम करती हैं। जो नुकीले क्रिस्टल्स आपके जोड़ों (Joints) की गहराई में पहले से जमा हो चुके हैं, वे वहीं पड़े रहते हैं और दर्द पैदा करते हैं।

बिल्कुल नहीं। ये गोलियाँ सिर्फ लिवर में यूरिक एसिड के बनने को ज़बरदस्ती रोकती हैं। ये आपके कमज़ोर मेटाबॉलिज़्म या किडनी की कमज़ोर फिल्टरिंग क्षमता को ठीक नहीं करतीं, इसलिए दवा छोड़ते ही बीमारी वापस आ जाती है।

सालों तक इन रासायनिक गोलियों को खाने से किडनी और लिवर पर बहुत भारी दबाव पड़ता है। इसके अलावा, शरीर इन दवाइयों का आदी हो जाता है और प्राकृतिक रूप से एसिड को बाहर निकालने की क्षमता खो देता है।

टमाटर और पालक में कुछ ऐसे तत्व (जैसे ऑक्सालेट) होते हैं जो यूरिक एसिड और पथरी की समस्या को भड़का सकते हैं। इसलिए अगर यूरिक एसिड बढ़ा है, तो इनका सेवन बहुत सीमित या बंद कर देना चाहिए।

शराब, और विशेष रूप से बीयर, यूरिक एसिड का सबसे बड़ा दुश्मन है। बीयर में प्यूरीन बहुत ज़्यादा होता है और यह किडनी को इतना व्यस्त कर देती है कि वह यूरिक एसिड को पेशाब के रास्ते बाहर निकालना रोक देती है।

बिल्कुल। भरपूर मात्रा में पानी (दिन में 3-4 लीटर) पीना यूरिक एसिड को कंट्रोल करने का सबसे आसान और प्राकृतिक तरीका है। यह किडनी को फ्लश करता है और अतिरिक्त एसिड को शरीर से बाहर निकाल देता है।

जी हाँ! आयुर्वेद में गिलोय (Guduchi) और मंजिष्ठा जैसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो खून की एसिडिटी को कम करती हैं और जोड़ों में जमे क्रिस्टल्स व सूजन को प्राकृतिक रूप से पिघलाकर बाहर निकालती हैं।

अगर गठिया का भयंकर अटैक आए, तो उस अंगूठे पर बिल्कुल भी वज़न न डालें। उस पर गर्म सिकाई बिल्कुल न करें (इससे जलन बढ़ेगी)। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, आयुर्वेद में ऐसे समय रक्तमोक्षण थेरेपी बहुत काम आती है।

शरीर का अत्यधिक फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है। यह कंडीशन किडनी को यूरिक एसिड बाहर निकालने से रोकती है। साथ ही, भारी वज़न कमज़ोर जोड़ों पर दबाव डालता है जिससे गठिया का दर्द भड़कता है।

सही आयुर्वेदिक डाइट और जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से 1 से 3 महीने के अंदर जोड़ों का दर्द शांत होने लगता है। लिवर और किडनी के मेटाबॉलिज़्म को पूरी तरह रिसेट होने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us