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Uric Acid 7 के पार जाते ही शरीर में क्या होने लगता है? चरणबद्ध समझिए

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल यूरिक एसिड (Uric Acid) का बढ़ना एक आम समस्या बन गया है, लेकिन जब रिपोर्ट में यह आँकड़ा '7' के पार जाता है, तो लोग इसे सिर्फ मामूली दर्द मानकर पेनकिलर की गोलियाँ खाने लगते हैं। यह एक भयंकर भूल है। खून में यूरिक एसिड का 7 से ऊपर जाना एक खतरे की घंटी है कि आपकी किडनी अब इस ज़हर को बाहर निकालने में कमज़ोर पड़ गई है। आधुनिक विज्ञान इसे 'हाइपरयूरिसीमिया' (Hyperuricemia) कहता है, जबकि आयुर्वेद में यह 'वातरक्त' है, जहाँ दूषित खून और भड़का हुआ वात मिलकर हड्डियों को अंदर से गलाने लगते हैं। बिना इस मूल कारण पर काम किए, जोड़ों को बचाना नामुमकिन है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से यूरिक एसिड के इन क्रिस्टल्स को पिघलाकर शरीर को साफ और मज़बूत बनाता है, ताकि आप इस भयंकर दर्द से हमेशा के लिए मुक्त हो सकें।

यूरिक एसिड (Uric Acid) की ज़रूरत क्या है और यह ज़हर कैसे बनता है?

यूरिक एसिड कोई बाहरी बीमारी नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर प्राकृतिक रूप से बनने वाला एक 'कचरा' (Waste Product) है। जब हम प्यूरिन (Purine) से भरपूर चीज़ें (जैसे राजमा, मांस, शराब) खाते हैं, तो हमारा शरीर उसे तोड़कर यूरिक एसिड बनाता है। एक सामान्य इंसान के शरीर में किडनी इसे फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है, जिससे इसका स्तर हमेशा 6 mg/dL से नीचे रहता है। लेकिन जब हमारा पाचन खराब हो जाता है या किडनी कमज़ोर पड़ जाती है, तो यह यूरिक एसिड खून में इकट्ठा होने लगता है। जब यह आँकड़ा 7 के पार जाता है, तो यह तरल (Liquid) से ठोस (Solid) रूप लेने लगता है और भयंकर गाउट (Gout) का रूप ले लेता है।

यूरिक एसिड 7 के पार जाने पर शरीर में क्या होता है? (4 चरणबद्ध प्रक्रिया)

जब यूरिक एसिड बढ़ता है, तो शरीर एक रात में बीमार नहीं पड़ता। यह इन 4 खतरनाक चरणों (Stages) से होकर गुज़रता है:

  • पहला चरण (Asymptomatic Hyperuricemia): इस चरण में यूरिक एसिड 7 या 8 के पार चला जाता है, लेकिन शरीर में कोई दर्द या लक्षण नहीं होता। खून में यह ज़हर (टॉक्सिन्स) चुपचाप बह रहा होता है और किडनी पर दबाव डाल रहा होता है।
  • दूसरा चरण (Acute Gout Attack): जब खून में यूरिक एसिड बहुत ज़्यादा हो जाता है, तो वह जमने लगता है। इसके नुकीले सुई जैसे क्रिस्टल्स (Urate Crystals) बनकर पैर के अँगूठे या टखने के जोड़ों में फँस जाते हैं। इससे आधी रात को अचानक भयंकर दर्द, लालिमा और सूजन आती है।
  • तीसरा चरण (Intercritical Gout): पहले हमले के बाद दर्द कुछ दिनों में चला जाता है। मरीज़ को लगता है बीमारी खत्म हो गई। यह दो हमलों के बीच का समय है। लेकिन अंदर ही अंदर क्रिस्टल्स और ज़्यादा जोड़ों में फैल रहे होते हैं।
  • चौथा चरण (Chronic Tophaceous Gout): यह सबसे खतरनाक चरण है। क्रिस्टल्स जोड़ों के बाहर तक बड़ी-बड़ी गाँठें (Tophi) बना देते हैं। इससे हड्डियाँ हमेशा के लिए मुड़ जाती हैं और इंसान चलने-फिरने से मोहताज हो जाता है।

यूरिक एसिड 7 पार करने पर शरीर द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण

जब यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स आपके जोड़ों को डैमेज करने लगते हैं, तो शरीर ये भयंकर संकेत देता है:

  • पैर के अँगूठे में भयंकर दर्द: रात के समय अचानक पैर के बड़े अँगूठे में ऐसा दर्द होना जैसे किसी ने हथौड़ा मार दिया हो।
  • लालिमा और गर्मी: प्रभावित जोड़ इतना लाल और गर्म हो जाता है कि उस पर अगर एक कपड़े की चादर भी छू जाए तो चीख निकल जाती है।
  • जोड़ों में जकड़न: सुबह उठने पर हाथ-पैरों की उँगलियाँ और टखनों में भयंकर जकड़न महसूस होना।
  • पेशाब में परेशानी: किडनी में यूरिक एसिड जमा होने से पेशाब रुक-रुक कर आना या उसमें भयंकर जलन होना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत पेनकिलर बंद करें और चिकित्सक से परामर्श लें।

खून में यूरिक एसिड बढ़ने और किडनी कमज़ोर होने के असली कारण

रोज़ाना यूरिक एसिड 7 के पार क्यों रहने लगता है? इसके मुख्य अंदरूनी कारण इस प्रकार हैं:

  • पाचक अग्नि का मंद होना: आयुर्वेद मानता है कि जब पाचन कमज़ोर होता है, तो खाना पचने के बजाय सड़ता है और 'आम' (Toxins) बनता है। यह 'आम' खून को दूषित कर यूरिक एसिड को बढ़ा देता है।
  • किडनी का फिल्टर कमज़ोर पड़ना: लगातार कम पानी पीने और भारी गोलियाँ खाने से किडनी के नेफ्रॉन्स (Nephrons) यूरिक एसिड को शरीर से बाहर (Flush out) नहीं कर पाते।
  • प्यूरिन युक्त ग़लत आहार: बहुत ज़्यादा मात्रा में लाल मांस (Red meat), शराब, राजमा, और छोले खाने से शरीर में प्यूरिन की बाढ़ आ जाती है।
  • विरुद्ध आहार: दूध के साथ खट्टी चीज़ें या जंक फूड खाने से रक्त दूषित होता है और वात दोष भड़क जाता है।

बढ़े हुए यूरिक एसिड को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

अगर 7 से ऊपर के यूरिक एसिड को सिर्फ दवाइयों से दबाया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • किडनी की पथरी (Kidney Stones): यूरिक एसिड के क्रिस्टल किडनी में जाकर भयंकर पथरी बना देते हैं, जो पेशाब के रास्ते को ब्लॉक कर देती है।
  • हड्डियों का हमेशा के लिए टेढ़ा होना: टोफाई (Tophi) गाँठें हड्डियों को अंदर से गला देती हैं, जिससे उँगलियाँ और पैर टेढ़े (Deformity) हो जाते हैं।
  • हार्ट अटैक का खतरा: बढ़ा हुआ यूरिक एसिड हार्ट की नसों को सख्त कर देता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का जोखिम दोगुना हो जाता है।

यूरिक एसिड (वातरक्त) पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में बढ़े हुए यूरिक एसिड और गाउट को 'वातरक्त' (Vatarakta) कहा जाता है। इसमें दो चीज़ें मुख्य हैं— कुपित 'वात' (वायु) और दूषित 'रक्त' (खून)। आयुर्वेद के अनुसार, जब दूषित रक्त शरीर के स्रोतों (Channels) को ब्लॉक कर देता है, तो वात अपना रास्ता भूलकर जोड़ों में फँस जाता है और भयंकर पीड़ा पैदा करता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि बीमारी किस चरण में पहुँच चुकी है। आयुर्वेद में बस यूरिक एसिड को कुछ घंटों के लिए कम करने वाली गोलियाँ देना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, खून से क्रिस्टल्स साफ हों, 'आम' खत्म हो, और किडनी प्राकृतिक रूप से मज़बूत बने।

जीवा आयुर्वेद यूरिक एसिड के ज़हर को खत्म करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रहे दर्द की तीव्रता, जोड़ों की लालिमा और बुखार की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ द्वारा ली जा रही यूरिक एसिड कम करने वाली एलोपैथिक दवाइयों का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात-रक्त को पकड़ने के बाद ही रक्त को साफ करने और किडनी को डिटॉक्स करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को पिघलाने वाली अचूक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में रक्त को साफ करने, 'आम' को काटने और जोड़ों की सूजन कम करने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • गिलोय (Giloy): इसे आयुर्वेद में वातरक्त की सबसे बेहतरीन दवा ('वातरक्त हर') माना गया है। यह खून में घुले यूरिक एसिड को तेज़ी से बेअसर करती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): यह जड़ी-बूटी किडनी के फिल्टर को साफ करती है और यूरिक एसिड को पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर (Flush out) निकालती है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर है, जो दूषित रक्त को साफ कर जोड़ों की भयंकर लालिमा और जलन को खत्म करती है।
  • गुग्गुल (Guggul): यह शरीर में जमे हुए क्रिस्टल्स और गाँठों (Tophi) को पिघलाने का काम करता है।

जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, वात-रक्त दोष को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • रक्तमोक्षण (Raktamokshana - Leech Therapy): जब यूरिक एसिड जोड़ों में बहुत ज़्यादा भर जाता है, तो आयुर्वेद में जोंक (Leech) लगाकर दूषित खून को बाहर निकाला जाता है। इससे लालिमा और भयंकर दर्द में कुछ ही मिनटों में जादुई आराम मिलता है।
  • विरेचन (Virechana): आँतों और लिवर से 'आम' (Toxins) को बाहर निकालने के लिए औषधीय जड़ी-बूटियाँ देकर पेट साफ कराया जाता है, जिससे रक्त अपने आप शुद्ध होने लगता है।

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने वाला शुद्ध आहार: क्या खाएँ और क्या न खाएँ?

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आहार में बदलाव किए बिना यूरिक एसिड कभी कंट्रोल नहीं हो सकता:

क्या खाएँ?

  • लौकी और परवल: ये सब्ज़ियाँ पानी से भरपूर और अल्कलाइन (Alkaline) होती हैं, जो यूरिक एसिड के एसिड को बेअसर करती हैं।
  • पुरानी मूंग की दाल और पुराना चावल: यह पचने में बेहद हल्का होता है और शरीर में कोई 'आम' (गंदगी) नहीं बनाता।
  • पर्याप्त पानी: दिन भर में कम से कम 10-12 गिलास गुनगुना पानी पिएँ ताकि किडनी को यूरिक एसिड साफ करने में मदद मिले।

क्या न खाएँ?

  • राजमा, छोले और दालें: ये चीज़ें वात बढ़ाती हैं और पचने में बहुत भारी (Guru) होती हैं। इनका सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
  • शराब और रेड मीट: ये यूरिक एसिड के सबसे बड़े दुश्मन हैं। ये लिवर को डैमेज करते हैं और खून में यूरिक एसिड की बाढ़ ला देते हैं।
  • टमाटर और खट्टी चीज़ें: टमाटर के बीज और खट्टी चीज़ें पित्त को भड़काकर जोड़ों के दर्द को और ज़्यादा भयंकर बना देती हैं।

जीवा आयुर्वेद में वातरक्त के रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ ब्लड रिपोर्ट (Uric Acid Level) देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, रात के समय होने वाले दर्द और अँगूठे की लालिमा को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल की जा रही भारी गोलियों (Allopurinol / Painkillers) की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, शराब पीने की आदत और पेट साफ होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर 'आम' और दूषित 'रक्त' के स्तर का पता लगाया जाता है।

यूरिक एसिड के इलाज के लिए जीवा आयुर्वेद से कैसे जुड़ें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में यूरिक एसिड का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर यूरिक एसिड 7 या 8 तक है और दर्द की शुरुआत है, तो सही डाइट और गिलोय से 4 से 6 हफ्तों में ही सूजन कम होने लगती है और स्तर नॉर्मल आ जाता है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर जोड़ों में गाँठें (Tophi) बन चुकी हैं और यूरिक एसिड 10 के पार रहता है, तो रक्त को पूरी तरह साफ होने और गाँठों को पिघलने में 4 से 8 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और प्यूरिन-फ्री डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में एलोपैथिक गोलियों के बिना भी यूरिक एसिड नॉर्मल रहता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य Allopurinol जैसी दवाइयों से यूरिक एसिड कम करना और स्टेरॉयड से दर्द दबाना ‘अग्नि’ सुधारकर, ‘आम’ नष्ट कर यूरिक एसिड को प्राकृतिक रूप से संतुलित करना
नज़रिया समस्या को केवल यूरिक एसिड बढ़ने तक सीमित मानना पाचन, किडनी और रक्त शुद्धि के असंतुलन को मूल कारण मानना
उपचार तरीका केमिकल दवाइयों और स्टेरॉयड से अस्थायी राहत गिलोय, पुनर्नवा और जड़ी-बूटियों से शरीर का डिटॉक्स और हीलिंग
डाइट और लाइफस्टाइल दवाओं पर निर्भरता, डाइट पर सीमित सलाह अग्नि बढ़ाने वाला आहार, डिटॉक्स और संतुलित दिनचर्या पर ज़ोर
लंबा असर दवा छोड़ते ही यूरिक एसिड बढ़ना, किडनी पर असर का खतरा शरीर की प्राकृतिक सफाई से दीर्घकालिक और स्थायी नियंत्रण

भयंकर लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

यूरिक एसिड के दौरान अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • जोड़ों में दर्द इतना भयंकर हो कि आप ज़मीन पर पैर रखने से भी चीख पड़ें।
  • लालिमा और सूजन के साथ शरीर में हल्का बुखार बना रहे।
  • यूरिन (पेशाब) करते समय भयंकर जलन या दर्द हो (जो पथरी का संकेत हो सकता है)।
  • जोड़ों के आस-पास सख्त गाँठें (Tophi) बननी शुरू हो जाएँ।

निष्कर्ष:

आयुर्वेद के हिसाब से यूरिक एसिड 7 के पार जाना मुख्य रूप से वात और रक्त दोष के बिगड़ने, पाचक अग्नि के मंद होने और आँतों में 'आम' (टॉक्सिन्स) के जमा होने से जुड़ी समस्या है। अप्राकृतिक और प्यूरिनयुक्त भोजन से शरीर में ज़हर बढ़ता है जो क्रिस्टल बनकर हड्डियों को गलाता है। सिर्फ बाहर से पेनकिलर खा लेने से हड्डियाँ मज़बूत नहीं होतीं। इलाज में शरीर की वात-रक्त शुद्धि, गिलोय व पुनर्नवा जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ और सही आहार (लौकी/मूंग दाल) सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे आपका यूरिक एसिड बिना किसी सप्लीमेंट के जीवन भर कंट्रोल में रहे।

FAQs

बिल्कुल। पुरुषों में यूरिक एसिड 7 mg/dL और महिलाओं में 6 mg/dL से ऊपर जाना खतरे की घंटी है। इसके बाद यह क्रिस्टल (ठोस) का रूप लेने लगता है और जोड़ों में जमकर गाउट (Gout) बन जाता है।

सब दालें खराब नहीं होतीं। सिर्फ मूंग की दाल पचने में बहुत हल्की होती है और इसे खाया जा सकता है। लेकिन राजमा, छोले, चना और उड़द की दाल को बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।

यूरिक एसिड (वातरक्त) में जोड़ों में पहले से ही एसिड और पित्त की गर्मी होती है। ऐसे में गर्म सिकाई करने से सूजन भड़क जाती है। इसमें हमेशा ठंडी सिकाई (बर्फ) या चंदन का लेप करना चाहिए।

हाँ, टमाटर के बीजों में ऑक्सालेट होता है जो यूरिक एसिड के मरीजों के लिए नुकसानदायक है। इसके अलावा टमाटर खट्टा होने के कारण वातरक्त को तेज़ी से भड़काता है।

शराब और खासकर बियर यूरिक एसिड के लिए सबसे बड़ा ज़हर है। बियर में प्यूरिन की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है, जो लिवर को डैमेज करती है और यूरिक एसिड के दर्द को तुरंत ट्रिगर करती है।

आयुर्वेद में 'गिलोय' (Giloy) को वातरक्त (यूरिक एसिड) की सबसे बेहतरीन दवा माना गया है। गिलोय का काढ़ा रोज़ाना पीने से खून साफ होता है और सूजन कम होती है।

हाँ, नींबू में विटामिन सी होता है जो शरीर के pH लेवल को अल्कलाइन (Alkaline) बनाता है। यह यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को पिघलाने में बहुत फायदेमंद है।

सभी प्रोटीन खराब नहीं होते। लाल मांस (Red meat) और सी-फूड (Seafood) में प्यूरिन ज़्यादा होता है, जिससे यूरिक एसिड बढ़ता है। लेकिन दूध या मट्ठा (Low-fat dairy) का सेवन सुरक्षित है।

अगर आपको 'Acute Attack' (भयंकर दर्द) हो रहा है, तो उस समय बिल्कुल न चलें और जोड़ को आराम दें। जब दर्द न हो, तब हल्का व्यायाम करना चाहिए ताकि वज़न कम हो सके।

हाँ, जीवा आयुर्वेद में सही जड़ी-बूटियों (पुनर्नवा, गिलोय) और प्यूरिन-फ्री आहार के नियमों का पालन करके खून और पाचन को ठीक किया जा सकता है, जिससे यूरिक एसिड हमेशा के लिए कंट्रोल में रहता है।

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