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बुज़ुर्गों में Dehydration के संकेत अलग क्यों दिखते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि घर के बुजुर्ग अगर चुपचाप लेटे हैं या उन्हें कमज़ोरी लग रही है, तो यह बस ढलती उम्र का असर है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि वे दिनभर में मुश्किल से एक या दो गिलास पानी ही पीते हैं? दरअसल, बुढ़ापे में शरीर और दिमाग के बीच पानी माँगने का जो कनेक्शन होता है, वह कमज़ोर पड़ जाता है। सिर्फ प्यास लगने का इंतज़ार करने से यह समस्या हल नहीं होती। 

जब तक आप उन्हें खुद याद दिलाकर पानी नहीं पिलाते, उनका शरीर अंदर ही अंदर सूखता रहता है। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि बुज़ुर्गों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के लक्षण नौजवानों जैसे नहीं होते, बल्कि यह अक्सर भूलने की बीमारी या थकान का रूप ले लेता है जिस पर हम ध्यान ही नहीं देते।

ढलती उम्र के साथ प्यास का एहसास आखिर क्यों मर जाता है? 

विज्ञान की नज़र से हमारे दिमाग में एक 'प्यास का केंद्र' (Thirst Center) होता है, जो शरीर में पानी कम होते ही हमें संकेत देता है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र साठ या सत्तर के पार जाती है, दिमाग के इस हिस्से की काम करने की रफ़्तार एकदम धीमी हो जाती है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि बुज़ुर्गों का शरीर तो अंदर से पानी के लिए तरस रहा होता है, लेकिन उनका दिमाग उन्हें यह बता ही नहीं पाता कि उन्हें प्यास लगी है। इसके अलावा, बुढ़ापे में गुर्दे (Kidneys) भी पानी को शरीर में रोक कर रखने में उतने सक्षम नहीं रह जाते। पानी ज़्यादा तेज़ी से पेशाब के रास्ते बाहर निकलता है, और प्यास न लगने के कारण अंदर जा नहीं पाता, जिससे अंदरूनी सूखापन शुरू हो जाता है।

क्या पसीना न आना या गला सूखना ही पानी की कमी का इकलौता सबूत है?

जी नहीं, ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। जवानों में जब पानी कम होता है, तो उन्हें तुरंत पसीना आना बंद हो जाता है और गला सूखने लगता है। लेकिन बुज़ुर्गों के मामले में कहानी बिल्कुल अलग होती है। कई बार उनका गला नहीं सूखता, फिर भी उनकी त्वचा एकदम कागज़ जैसी पतली और सूखी हो जाती है। अगर आप उनके हाथ की चमड़ी को हल्का सा खींचकर छोड़ें, तो वह तुरंत अपनी जगह पर वापस नहीं जाती। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समस्या उनके गले में नहीं, बल्कि त्वचा के नीचे मौजूद नमी के खत्म होने में है। अक्सर हम इसे झुर्रियाँ मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि यह शरीर के अंदर सूख रहे पानी की चीख-पुकार होती है।

पानी कम पीने से बुज़ुर्गों के शरीर के अंदर क्या उथल-पुथल मचती है? 

जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो अंदरूनी अंगों की कार्यप्रणाली बुरी तरह लड़खड़ाने लगती है:

  • खून का गाढ़ा होना: पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे दिल को उसे पंप करने में दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है।
  • दिमागी उलझन: दिमाग का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी है। पानी कम होते ही बुज़ुर्गों को अचानक चीज़ें भूलने या मतिभ्रम की शिकायत होने लगती है।
  • जोड़ों में रगड़: हड्डियों के जोड़ों के बीच जो ग्रीस (Fluid) होता है, वह सूखने लगता है, जिससे घुटनों और कमर का दर्द अचानक बहुत बढ़ जाता है।
  • गुर्दों पर भारी दबाव: कम पानी की वजह से किडनी शरीर की गंदगी को बाहर नहीं फेंक पाती, जिससे यूरिक एसिड और टॉक्सिन्स अंदर ही जमा होने लगते हैं।

क्या हमेशा थकान या कमज़ोरी रहना किसी बड़े खतरे की घंटी है? 

अगर घर के बड़े-बुजुर्ग रोज़ाना सुस्त रहते हैं और उन्हें हल्का बुखार या कमज़ोरी बनी रहती है, तो इसे सिर्फ बुढ़ापा न समझें। यह डिहाइड्रेशन के कारण पनप रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है:

  • यूटीआई (UTI): पेशाब कम आने से नली में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जिससे भयंकर यूरिन इन्फेक्शन हो जाता है।
  • किडनी में पथरी: पानी की कमी से पेशाब में मौजूद मिनरल्स जमकर पत्थर बन जाते हैं, जो आगे चलकर असहनीय दर्द देते हैं।
  • लो ब्लड प्रेशर: नसों में पानी का वॉल्यूम कम होने से बीपी अचानक गिर जाता है, जिससे चक्कर खाकर गिरने का डर रहता है।
  • पुरानी कब्ज़: आंतों में नमी न होने से मल एकदम कड़क हो जाता है, जो पुरानी कब्ज़ और बवासीर को जन्म देता है।

आयुर्वेद के नज़रिया: ढलती उम्र में वात दोष और सूखेपन का क्या संबंध है?

आयुर्वेद के अनुसार, बुढ़ापे में शरीर के अंदर 'वात दोष' (हवा और आकाश का तत्व) सबसे ज़्यादा हावी रहता है। वात का मुख्य गुण ही रूखापन (Dryness) और हल्कापन है। जब शरीर में पहले से ही वात बढ़ा हुआ है और ऊपर से पानी कम पिया जाए, तो यह सूखापन नसों, मांसपेशियों और दिमाग तक पहुँच जाता है। इसी बेकाबू रूखेपन की वजह से ही बुज़ुर्गों की त्वचा फटती है, नींद उड़ जाती है और जोड़ों से कट-कट की आवाज़ आती है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप शरीर को अंदर से अच्छी तरह 'स्निग्ध' (नमी और चिकनाहट से भरपूर) नहीं रखेंगे, तब तक बुढ़ापे की यह तकलीफें कम नहीं होंगी।

शरीर में तुरंत नमी लौटाने वाले कुछ बेहतरीन और देसी पेय 

प्रकृति ने हमें ऐसे कई तरल पदार्थ दिए हैं जो सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों के शरीर के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स का भी काम करते हैं:

  • नारियल पानी: यह शरीर की अंदरूनी गर्मी को खींच लेता है और बिना पेट को भारी किए ज़रूरी मिनरल्स तुरंत नसों तक पहुँचा देता है।
  • पतली छाछ (मट्ठा): इसमें भुना जीरा और काला नमक मिलाकर देने से यह आंतों की खुश्की दूर करती है और वात को भी शांत रखती है।
  • जौ का पानी: यह किडनी की सफाई करने और शरीर की रूखी हो चुकी नलियों में नमी वापस लाने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है।
  • नींबू-पुदीना जल: यह स्वाद की ग्रंथियों को जगाता है, जिससे बुज़ुर्गों को कुछ पीने की इच्छा होती है और पेट की गैस भी निकल जाती है।

क्या चाय या कॉफी की लत से भी शरीर का सारा पानी सूखने लगता है?

उम्रदराज़ लोगों को अक्सर बार-बार चाय या कॉफी पीने की आदत होती है। लेकिन चाय-कॉफी में कैफीन होता है, जो 'मूत्रवर्धक' (Diuretic) का काम करता है। इसका मतलब है कि आप जितनी चाय पिएँगे, आपका शरीर उससे कहीं ज़्यादा पानी पेशाब के ज़रिए बाहर फेंक देगा। जब शरीर में पहले ही पानी कम है और जो थोड़ा बहुत है वो भी कैफीन की वजह से बाहर निकल जाए, तो खून गाढ़ा होने लगता है। इसी वजह से कई बार ज़्यादा चाय पीने वाले बुज़ुर्गों को कब्ज़, घबराहट और सीने में जलन की शिकायत लगातार बनी रहती है।

अनजाने में होने वाली वो गलतियां जो बुज़ुर्गों में डिहाइड्रेशन को दोगुना कर देती हैं 

हम अक्सर देखभाल में कुछ ऐसी चूक कर देते हैं जो समस्या को और बढ़ा देती हैं:

  • प्यास का इंतज़ार करना: जब तक बुजुर्ग खुद पानी न मांगें, तब तक उन्हें पानी न देना सबसे बड़ी गलती है, क्योंकि उनकी प्यास लगने की क्षमता कम हो चुकी है।
  • एक साथ ढेर सारा पानी पिलाना: एक ही बार में गिलास भर पानी पिलाने से उनका पेट फूल जाता है और उबकाई आ सकती है, उन्हें हमेशा घूँट-घूँट कर पानी देना चाहिए।
  • ठंडे मौसम में पानी कम देना: सर्दियों में पसीना नहीं आता, यह सोचकर पानी कम कर देना बहुत खतरनाक है, क्योंकि शरीर के अंदर की मशीनरी को सर्दियों में भी पानी चाहिए।
  • रात को पानी बिल्कुल बंद कर देना: पेशाब के डर से रात को पानी न देना उनके खून को गाढ़ा कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा रहता है।
  • सिर्फ सादा पानी ही देते रहना: रोज़ एक जैसा फीका पानी पीने से वे ऊब जाते हैं, पानी में थोड़ा स्वाद (जैसे तुलसी या नींबू) न मिलाने से वे पानी से कतराने लगते हैं।
  • फलों और सब्जियों का रस न देना: पानी की कमी सिर्फ गिलास वाले पानी से नहीं, बल्कि खीरा, तरबूज जैसे फलों की कमी से भी बढ़ती है।

वो कौन सी दूसरी बीमारियाँ हैं जो शरीर से चुपचाप पानी निचोड़ लेती हैं? 

कई बार बुजुर्ग पानी भी सही मात्रा में पीते हैं, फिर भी कुछ बीमारियों की वजह से डिहाइड्रेशन उन्हें जकड़ लेता है:

  • डायबिटीज़ (मधुमेह): जब शुगर लेवल बढ़ता है, तो किडनी उस एक्स्ट्रा शुगर को निकालने के लिए बार-बार पेशाब बनाती है, जिससे सारा पानी निकल जाता है।
  • लूज़ मोशन (दस्त): बुढ़ापे में पेट जल्दी खराब होता है। दस्त लगने पर शरीर का सारा पानी और ज़रूरी लवण (Sodium/Potassium) कुछ ही घंटों में बाहर बह जाता है।
  • पार्किंसंस या डिमेंशिया: इन मानसिक बीमारियों में बुजुर्ग भूल ही जाते हैं कि पानी कैसे पीना है या पानी का गिलास कहाँ रखा है।
  • निगलने की समस्या: गले की मांसपेशियां कमज़ोर होने के कारण उन्हें पानी निगलने में डर लगता है कि कहीं फंदा न लग जाए।

क्या रोज़मर्रा की दवाइयाँ भी शरीर में पानी की कमी का कारण बन सकती हैं? 

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दवाइयों का डिब्बा भी बड़ा हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर या पैरों की सूजन कम करने के लिए अक्सर डॉक्टर 'वाटर पिल्स' (Diuretics) देते हैं। ये दवाइयां शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को ज़बरदस्ती पेशाब के रास्ते बाहर निकालती हैं। अगर कोई बुजुर्ग ये दवाइयां खा रहा है और ऊपर से पानी भी कम पी रहा है, तो उसका शरीर एकदम से सूख जाएगा। इसके अलावा, डिप्रेशन या एलर्जी की दवाइयां भी मुंह को बहुत ज़्यादा सुखा देती हैं। ऐसे में बिना डॉक्टर से पूछे दवा बंद तो नहीं कर सकते, लेकिन पानी पीने का तरीका ज़रूर बदलना पड़ता है।

पानी पीने की आदत डलवाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके 

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू उपाय अपनाकर घर के बड़ों को बिना ज़ोर-ज़बरदस्ती के हाइड्रेटेड रख सकते हैं:

  • हर घंटे में उन्हें एक छोटी सी सिप (घूँट) वाली बोतल या कप दें, जिससे उन्हें एक साथ बहुत सारा पानी पीने का मानसिक दबाव महसूस न हो।
  • सादे पानी की जगह उन्हें पानी वाले फल जैसे पपीता, खरबूजा, या संतरे की फांकें दें, इससे शरीर को पानी भी मिलेगा और फाइबर भी।
  • उनकी पसंद के किसी गिलास या कप का इस्तेमाल करें। कई बार बुज़ुर्गों को अपने पुराने या किसी खास बर्तन से लगाव होता है, जिससे वे खुशी से पी लेते हैं।
  • खाने में दाल का सूप, सब्जियों का शोरबा या पतली खिचड़ी ज़्यादा दें, ताकि भोजन के ज़रिए ही उनके पेट में अच्छा-खासा पानी चला जाए।

शरीर में हमेशा नमी बनाए रखने के लिए रोज़मर्रा के नियम क्या होने चाहिए? 

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे नियम बनाकर आप बुज़ुर्गों को डिहाइड्रेशन जैसी बड़ी आफत से बचा सकते हैं:

  • सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी से: उठते ही उन्हें बिना कुल्ला किए आधा गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालें, इससे आंतों की सफाई हो जाती है।
  • यूरिन के रंग पर नज़र रखें: उन्हें समझाएं कि अगर पेशाब का रंग गहरे पीले रंग का आ रहा है, तो यह खतरे की निशानी है और तुरंत पानी पीने की ज़रूरत है।
  • दवाइयों के साथ पूरा पानी: अक्सर बुजुर्ग सिर्फ एक घूँट पानी से दवा निगल लेते हैं। कोशिश करें कि वे दवा के साथ कम से कम आधा गिलास पानी ज़रूर पिएं।
  • कमरे का तापमान सही रखें: अगर वे ज़्यादा देर हीटर या बहुत तेज़ एसी (AC) में बैठते हैं, तो हवा उनके शरीर की नमी खींच लेती है, इसलिए तापमान सामान्य रखें।

आयुर्वेद इस सूखेपन को जड़ से कैसे खत्म करता है? 

आयुर्वेद सिर्फ पानी पीने की सलाह नहीं देता, बल्कि शरीर की अंदरूनी रूक्षता (सूखेपन) को खत्म करने पर काम करता है। इसमें 'अभ्यंग' (तेल मालिश) को बहुत ज़रूरी माना गया है। तिल या सरसों के तेल से बुढ़ापे में मालिश करने से त्वचा की नमी अंदर लॉक हो जाती है और वात दोष शांत होता है। इसके अलावा, खाने में गाय का शुद्ध देसी घी शामिल करने की सलाह दी जाती है। घी आंतों में चिकनाहट लाता है, जिससे खाया हुआ खाना आसानी से पचता है और शरीर में पानी टिकने की क्षमता वापस लौट आती है।

हालात बिगड़ने पर बुज़ुर्गों को तुरंत डॉक्टर के पास कब ले जाना चाहिए? 

घरेलू उपाय अपनी जगह हैं, लेकिन अगर डिहाइड्रेशन बहुत बढ़ जाए तो घर पर इंतज़ार करना जानलेवा हो सकता है। इन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल भागें:

  • जब बुजुर्ग अचानक से बहकी-बहकी बातें करने लगें, लोगों को पहचानना बंद कर दें या पूरी तरह कन्फ्यूज़ हो जाएँ (इसे डेलिरियम कहते हैं)।
  • आठ-दस घंटे बीत जाएँ और उन्हें बिल्कुल भी पेशाब न आए, या पेशाब के साथ बहुत तेज़ जलन और खून आने लगे।
  • जब वे अचानक से चक्कर खाकर गिर पड़ें या उनका ब्लड प्रेशर मशीन में बहुत ज़्यादा लो (Low) दिखाने लगे।
  • उनकी आँखें एकदम अंदर की तरफ धंस जाएँ, होंठ बुरी तरह सूख कर फटने लगें और साँसें बहुत तेज़-तेज़ चलने लगें।

डिहाइड्रेशन के इलाज में (आधुनिक इलाज) और आयुर्वेद में क्या अंतर है?

इस बीमारी को लेकर दोनों चिकित्सा पद्धतियों का अपना-अपना नज़रिया है, जिसे समझना ज़रूरी है:

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य सोच शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को तुरंत पूरा करने पर ध्यान। शरीर के संतुलन और प्राकृतिक नमी बनाए रखने पर ज़ोर।
उपचार का तरीका ORS, IV फ्लूइड्स (ड्रिप) और अन्य चिकित्सकीय उपचार। औषधीय पेय, स्नेहन (तेल मालिश), आहार-विहार और पारंपरिक उपाय।
इलाज की गति आपातकालीन स्थिति में तेज़ और प्रभावी उपचार। धीरे-धीरे सुधार और रिकवरी पर केंद्रित।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण उपचार के साथ दोबारा डिहाइड्रेशन से बचाव के उपाय बताए जाते हैं। संतुलित आहार और दिनचर्या के माध्यम से स्वास्थ्य बनाए रखने पर ज़ोर।
उपयोग गंभीर डिहाइड्रेशन और इमरजेंसी में आवश्यक। सामान्य देखभाल, रिकवरी और जीवनशैली सुधार के लिए उपयोगी।

निष्कर्ष:

 हमेशा याद रखें कि ढलती उम्र में बुज़ुर्गों का शरीर एक नाज़ुक पौधे की तरह हो जाता है। जिस तरह पौधे को ज़िंदा रहने के लिए रोज़ सही मात्रा में पानी की ज़रूरत होती है, वैसे ही उन्हें भी अंदरूनी नमी की दरकार होती है। डिहाइड्रेशन को महज़ एक छोटी सी लापरवाही मानकर टालने की भूल न करें, क्योंकि यह उनके दिमाग और गुर्दों को हमेशा के लिए कमज़ोर कर सकता है। अपनी भागदौड़ भरी ज़िंदगी में थोड़ा सा वक़्त निकालकर उनके पास बैठें, उन्हें प्यार से पानी या जूस पीने को दें। जब वे अंदर से हाइड्रेटेड रहेंगे, तो उनका मिज़ाज भी चिड़चिड़ा नहीं होगा और उनका बचा हुआ जीवन बहुत ही तंदुरुस्त और खुशहाल गुज़रेगा।

References:

https://www.healthline.com/health/dehydration

https://www.healthline.com/health/how-to-tell-if-youre-dehydrated

https://www.who.int/tools/elena/interventions/dehydration-sam

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK436022/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी हाँ, हमारे शरीर का एक बड़ा हिस्सा पानी से बना है। जब शरीर से लगातार पानी कम होने लगता है, तो बुज़ुर्गों का वजन बिना किसी कारण के अचानक से 2-3 किलो तक गिर सकता है, जो कि फैट नहीं बल्कि सिर्फ पानी (Water weight) का कम होना होता है।

बाज़ार में मिलने वाले पैकेट बंद जूस में बहुत अधिक मात्रा में चीनी और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। ये प्यास तो बुझा सकते हैं, लेकिन शरीर से पानी खींच लेते हैं। ताज़े फलों का रस या घर का बना नींबू पानी ही सबसे सुरक्षित होता है।

अगर बुज़ुर्गों को रात में बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है, तो उन्हें दिन के समय ज़्यादा पानी पिलाएं। शाम 6 बजे के बाद पानी या कोई भी तरल पदार्थ देना बहुत कम कर दें ताकि उनकी रात की नींद खराब न हो।

अस्थमा के मरीजों को हमेशा हल्का गुनगुना पानी ही पीना चाहिए। ठंडा पानी उनकी सांस की नलियों को सिकोड़ सकता है। गुनगुना पानी बलगम को पिघलाने में मदद करता है और फेफड़ों को हाइड्रेटेड रखता है।

पानी की कमी का सीधा असर दिमाग की कोशिकाओं पर पड़ता है। जब दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और खून नहीं मिलता, तो चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और बेवजह का गुस्सा आना बहुत आम बात हो जाती है।

पानी में पुदीने की पत्तियां, खीरे के टुकड़े, या नींबू की कुछ बूंदें डालकर इसे 'डिटॉक्स वाटर' बना लें। इससे पानी में एक प्राकृतिक खुशबू और हल्का स्वाद आ जाता है, जिसे बुजुर्ग आसानी से पी लेते हैं।

अगर उन्हें दस्त या उल्टी नहीं हो रही है, तो रोज़ ओआरएस पिलाना सही नहीं है। ओआरएस में नमक और चीनी ज़्यादा होती है, जो बिना डॉक्टर की सलाह के रोज़ देने पर ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा सकती है।

बुज़ुर्गों की इम्यूनिटी कमज़ोर होती है। प्लास्टिक की बोतलों में रखे पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स और केमिकल्स घुल सकते हैं। उन्हें तांबे, कांच या स्टील के बर्तन में पानी देना ही सबसे सुरक्षित और फायदेमंद है।

सफर में उन्हें एक साथ पानी पिलाने की बजाय, हर थोड़ी देर में एक घूँट पानी पीने को कहें। साथ ही, पानी वाले फल जैसे संतरे या अंगूर का डिब्बा साथ रखें, जो बिना पेट भारी किए नमी बनाए रखते हैं।

होम्योपैथी में चाइना (China) और नेट्रम म्यूर (Natrum Mur) जैसी दवाइयां हैं जो शरीर से अचानक हुए फ्लूइड लॉस (जैसे दस्त के बाद) को रिकवर करने में मदद करती हैं, लेकिन ये किसी विशेषज्ञ से पूछकर ही लेनी चाहिए।

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