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सर्दी में मांसपेशियों में खिंचाव और पीठ दर्द क्यों बढ़ जाते हैं? जानिए राहत के प्राकृतिक तरीके

Information By Dr. Keshav Chauhan

सर्दियाँ आते ही ऐसा लगता है जैसे शरीर अचानक धीमा पड़ गया हो। सुबह बिस्तर छोड़ना कठिन, हलचल करते समय जकड़न, और थोड़ा भी झुकने या सामान उठाने पर पीठ में खिंचाव—यह अनुभव अधिकतर लोग महसूस करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं है; कॉलेज जाने वाले युवा, ऑफिस में बैठकर काम करने वाले लोग और घर का काम करने वाली महिलाएँ—हर कोई सर्दियों में मांसपेशियों के खिंचाव और पीठ दर्द की शिकायत करता है।

कई लोग बताते हैं कि जैसे ही सर्दी बढ़ने लगती है, पीठ में भारीपन शुरू हो जाता है, गर्दन जकड़ जाती है, और छोटी-सी गतिविधि पर भी कमर में खिंचाव उठता है। गर्मियों में जो दर्द मामूली लगता था, वही सर्दियों में कई गुना बढ़ जाता है। यह दर्द कई बार रात की नींद को भी प्रभावित करता है—करवट बदलने से लेकर उठने-बैठने तक हर काम में एक खिंचाव-सा महसूस होता है।

लेकिन ऐसा आखिर होता क्यों है? क्या सर्दी अपने आप शरीर की मांसपेशियों पर दबाव डालती है? या फिर हमारी दिनचर्या में भी कुछ ऐसा होता है जो दर्द को बढ़ा देता है? आइए इसे गहराई से समझते हैं और फिर देखते हैं कि आयुर्वेद इस समस्या का कितना सरल और प्राकृतिक समाधान देता है।

सर्दियों में मांसपेशियाँ ज्यादा क्यों खिंचती हैं?

जैसे ही तापमान गिरता है, शरीर की मांसपेशियाँ स्वतः सिकुड़ने लगती हैं। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया होती है ताकि वह खुद को गर्म रख सके। लेकिन इसी सिकुड़न से लचीलेपन में कमी आती है और हल्का-सा भी गलत मोड़, भारी वस्तु या अचानक खिंचाव दर्द का कारण बन जाता है।

1. मांसपेशियों में रक्तसंचार कम होना

सर्दी में रक्तवाहिनियाँ संकुचित हो जाती हैं। इसका सीधा असर मांसपेशियों पर पड़ता है क्योंकि:

  • उनमें रक्त कम पहुँचता है
  • तापमान घटता है
  • लचीलेपन में कमी आती है
  • छोटी-सी हरकत भी दर्द दे सकती है

इसी वजह से सुबह उठते समय शरीर भारी और अकड़ा हुआ महसूस होता है।

2. लगातार बैठकर काम करना

सर्दियों में लोग चलने-फिरने से बचते हैं। ऑफिस, घर या मोबाइल-लैपटॉप के सामने बैठकर लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने से पीठ के निचले हिस्से पर अनावश्यक दबाव बढ़ जाता है।

3. पानी कम पीना

ठंड में प्यास कम लगती है। लेकिन शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियाँ कठोर हो जाती हैं। इससे:

  • खिंचाव
  • ऐंठन
  • अचानक चुभन
    जैसी समस्याएँ बढ़ने लगती हैं।

4. विटामिन-डी की कमी

सूरज कम निकलने और धूप कम लेने से विटामिन-डी का स्तर नीचे चला जाता है, जिससे:

  • हड्डियाँ कमजोर हो सकती हैं
  • मांसपेशियों की रिकवरी धीमी हो जाती है
  • पीठ, घुटनों और कमर में दर्द बढ़ जाता है

5. सर्दी में तनाव और नींद की कमी

ठंड में कई लोगों की नींद प्रभावित होती है। तनाव भी शरीर में जकड़न और दर्द को बढ़ाता है। लगातार खराब नींद मांसपेशियों की मरम्मत की प्रक्रिया को धीमा कर देती है।

आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में दर्द क्यों बढ़ता है?

आयुर्वेद के अनुसार सर्दी का मौसम वात दोष को बढ़ाता है। वात के बढ़ने से शरीर में:

  • रूखापन
  • जकड़न
  • संधियों में दर्द
  • मांसपेशियों का शोष
    जैसी समस्याएँ दिखने लगती हैं।

आयुर्वेद कहता है कि सर्दियों में शरीर को उष्ण, स्नेहनयुक्त और चलायमान रखना सबसे आवश्यक है। इसका अर्थ है:

  • शरीर को गर्म रखें
  • नियमित तैलाभ्यंग (मसाज) करें
  • हल्की गतिविधि जारी रखें
  • पाचन का ख्याल रखें

इन सरल बदलावों से वात संतुलित रहता है और दर्द काफी हद तक कम हो जाता है।

सर्दियों में मांसपेशियों और पीठ दर्द से राहत के प्राकृतिक आयुर्वेदिक तरीके

नीचे दिए गए उपाय आसान हैं, नियमित रूप से करने पर शरीर में गर्माहट, लचीलेपन और ऊर्जा का प्रवाह स्वतः बढ़ने लगता है।

1. रोज़ाना तिल के तेल से अभ्यंग (मसाज)

आयुर्वेद में तिल के तेल को “सर्दी का अमृत” कहा गया है। यह गाढ़ा, गर्म और तंतुओं को पोषण देने वाला होता है।

फायदे—

  • रक्त प्रवाह बेहतर करता है
  • रूखापन कम करता है
  • मांसपेशियों की जकड़न खोलता है
  • पीठ दर्द में तुरंत आराम देता है

आप चाहें तो तेल को हल्का-सा गुनगुना कर लें। मसाज करने के बाद 20 मिनट का विश्राम और फिर गुनगुने पानी से स्नान अत्यंत लाभकारी है।

2. अदरक, दालचीनी और अश्वगंधा का सेवन

सर्दियों में पाचन मजबूत रहता है। ऐसे में शरीर औषधियों को जल्दी ग्रहण करता है।

  • अदरक शरीर को भीतर से गर्म करता है
  • दालचीनी रक्तसंचार सुधारती है
  • अश्वगंधा शक्ति, लचीलापन और तनाव-रोधक क्षमता बढ़ाती है

इन तीनों का संयोजन मांसपेशियों की थकान और दर्द कम करने में विशेष प्रभावी माना जाता है।

 3. हल्के योगासन—धीरे-धीरे शरीर को खोलें

सर्दी में अचानक भारी व्यायाम शरीर को नुकसान पहुँचा सकता है। लेकिन हल्के, सुचारु योगासन:

  • मांसपेशियों को गर्म करते हैं
  • रीढ़ को लचीला बनाते हैं
  • रक्त का प्रवाह बढ़ाते हैं

प्रमुख आसन—

  • मार्जरी-बितिल आसन
  • सेटु बंध आसन
  • भुजंगासन
  • वज्रासन
  • ताड़ासन

सुबह धूप में 10–12 मिनट योग करने से शरीर पूरे दिन गर्म और सक्रिय रहता है।

4. लंबे समय तक बैठकर काम न करें

हर 45–50 मिनट में 2–3 मिनट का स्ट्रेच बेहद आवश्यक है। पीठ और कंधों की मांसपेशियाँ तभी मजबूत रहती हैं जब वे बार-बार सक्रिय हों।

5. पानी गुनगुना ही पिएँ

गुनगुना पानी:

  • पाचन सुधरता है
  • रूखापन कम करता है
  • शरीर में ऊर्जा बढ़ाता है
  • मांसपेशियों को नर्म रखता है

दिन में कम से कम 7–8 गिलास जरूर पिएँ।

6. धूप लें—विटामिन-डी का प्राकृतिक स्रोत

सर्दियों में सुबह 15–20 मिनट की धूप शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करती है। यह:

  • हड्डियों को मजबूत बनाती है
  • पीठ दर्द कम करती है
  • मन को शांत करती है

7. अच्छी नींद—मांसपेशियों की सबसे बड़ी दवा

नींद वह समय है जब शरीर खुद को ठीक करता है। सर्दियों में जल्दी सोना और जल्दी उठना वात दोष को संतुलित रखने में मदद करता है।

8. जड़ी-बूटियाँ जो सर्दियों में दर्द कम करने में विशेष सहायक हैं

आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियाँ हैं जो मांसपेशियों के दर्द, खिंचाव और पीठ दर्द में खास लाभ पहुंचाती हैं।

  • अश्वगंधा – ताकत बढ़ाती है और मांसपेशियों की थकान दूर करती है
  • दशमूल – सूजन कम करता है और नसों को खोलता है
  • निरगुंडी – पुराना दर्द भी कम करती है
  • शल्लकी (लोहबान) – सूजन और दर्द में अत्यंत प्रभावी

आप इन्हें चिकित्सक की सलाह से लें।

9. गर्म सेंक से तुरंत राहत

गर्म सेंक मांसपेशियों को अंदर तक आराम देता है। यदि पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो तो हल्की गर्म पोटली या गर्म पानी की थैली बहुत उपयोगी होती है।

10. सर्दियों का उचित भोजन—जो दर्द को खुद ही कम कर दे

सर्दी का मौसम भारी और पौष्टिक भोजन का है। जो भोजन वात को बढ़ाता नहीं है, वह मांसपेशियों को ताकत देता है।

क्या खाएँ—

  • घी से बनी चीजें
  • तिल
  • सूप
  • मूंग दाल
  • बाजरा रोटी
  • हरी सब्जियाँ
  • काढ़ा

क्या न खाएँ—

  • बहुत ठंडी चीज़ें
  • अत्यधिक तला भोजन
  • जंक फ़ूड
  • बार-बार चाय-कॉफी

जिवा आयुर्वेद का दृष्टिकोण

जिवा आयुर्वेद मानता है कि सर्दियों में दर्द बढ़ने की जड़ वात दोष का असंतुलन है। इसलिए उपचार सिर्फ दर्द कम करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समस्या की जड़ को ठीक करने पर केंद्रित होता है।

जिवा आयुर्वेद का फ़ोकस—

  • शरीर के वात को संतुलित करना
  • रक्तसंचार को सुधारना
  • मांसपेशियों को पोषण देना
  • तनाव कम करना
  • प्राकृतिक औषधियों से दर्द कम करना

यह पूरा उपचार व्यक्ति-विशेष पर आधारित होता है क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर, प्रकृति और समस्या अलग होती है।

अंत में—सर्दियाँ आपके शरीर का मौसम हैं, दुश्मन नहीं

सर्दियों में मांसपेशियों का खिंचाव और पीठ दर्द बढ़ना बेहद सामान्य है। लेकिन अगर आप थोड़ी-सी सावधानी अपनाएँ—गर्माहट, तेल मालिश, हल्का व्यायाम, सही भोजन और धूप का महत्व समझें— तो यह मौसम आपकी ताकत बढ़ाने वाला बन सकता है, न कि दर्द बढ़ाने वाला।

आयुर्वेद कहता है कि सर्दी शरीर को मजबूत करने का समय है, बस सही तरीके अपनाने की जरूरत है। प्राकृतिक उपायों से आप बिना किसी दवाई के भी अपने दर्द पर काबू पा सकते हैं और इस मौसम का आनंद आराम से ले सकते हैं।

FAQs

  1. सर्दियों में पीठ दर्द ज्यादा क्यों बढ़ता है?
    ठंड में रक्तसंचार कम होता है, जिससे मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं और दर्द बढ़ता है।
  2. क्या गर्म तेल मालिश वास्तव में मदद करती है?
    हाँ, यह मांसपेशियों में गर्माहट पहुंचाकर दर्द तुरंत कम करती है।
  3. क्या सर्दियों में व्यायाम जरूरी है?
    बहुत जरूरी। गतिविधि कम होने से stiffness और बढ़ती है।
  4. कौन-सा तेल सबसे अच्छा है?
    तिल का तेल, सरसों का तेल और आयुर्वेदिक नारायण तेल सबसे प्रभावी हैं।
  5. क्या गर्म पानी से भाप लेना फायदेमंद है?
    हाँ, यह मांसपेशियों की tightness खोलता है और दर्द कम करता है।

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