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बच्चे की Height नहीं बढ़ रही - Genetic या और कारण?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आजकल माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके बच्चे की हाइट (Height) उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ रही है। बच्चे का छोटा रह जाना अक्सर उनके आत्मविश्वास और दिमागी शांति को पूरी तरह खत्म कर देता है। एलोपैथी में इस समस्या के लिए अक्सर सिंथेटिक ग्रोथ हार्मोन (HGH) के इंजेक्शन्स की सलाह दी जाती है। ये दवाइयाँ कुछ समय के लिए शरीर को बढ़ा ज़रूर देती हैं, लेकिन इनके भयंकर साइड-इफेक्ट्स बच्चे के लिवर और प्राकृतिक हार्मोन्स को अंदर से कमज़ोर कर देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, बच्चे का विकास रुकना केवल जेनेटिक (Genetic) नहीं है, बल्कि यह खराब पाचन, कुपोषण और 'अस्थि धातु' के सुस्त पड़ने से जुड़ी समस्या है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बच्चे की ग्रोथ को जड़ से सुधारता है ताकि उसकी प्राकृतिक ऊँचाई वापस लौट सके।

बच्चे की Height का न बढ़ना असल में क्या है?

बच्चों की हड्डियों के सिरों पर एक मुलायम हिस्सा होता है जिसे ग्रोथ प्लेट (Growth Plate) कहते हैं। जब तक ये प्लेट्स खुली रहती हैं, बच्चे की ऊँचाई बढ़ती रहती है। इस प्रक्रिया को दिमाग की पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) से निकलने वाला ग्रोथ हार्मोन कंट्रोल करता है। जब शरीर में कैल्शियम, सही पोषण या इस हार्मोन की कमी हो जाती है, तो हड्डियाँ लंबी होना बंद कर देती हैं।  बाज़ार में मिलने वाले पाउडर या सप्लीमेंट्स सिर्फ बाहरी इलाज हैं, जबकि असली गड़बड़ी बच्चे के अंदर सुस्त पड़ी पाचन अग्नि और आंतों में चल रही होती है, जो खाए गए भोजन को 'अस्थि धातु' (हड्डियों) तक पहुँचने ही नहीं देती।

बच्चे की Height न बढ़ने के भयंकर प्रकार

बच्चों में विकास रुकने की इस समस्या को मुख्य रूप से चार प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

  • जेनेटिक या पारिवारिक कारण (Familial Short Stature): अगर माता-पिता की ऊँचाई कम है, तो बच्चे की ऊँचाई भी कम हो सकती है, लेकिन आयुर्वेद इसे सही दिनचर्या से काफी हद तक सुधार सकता है।
  • हार्मोनल कमी (HGH Deficiency): जब दिमाग प्राकृतिक रूप से ग्रोथ हार्मोन बनाना बंद कर देता है या थायरॉइड (Thyroid) की कमी होती है, तो बच्चे का विकास अचानक रुक जाता है।
  • कुपोषण जनित (Nutritional Stunting): भोजन में सही कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स की भयंकर कमी के कारण हड्डियाँ लंबी नहीं हो पातीं और कमज़ोर रह जाती हैं।
  • कॉन्स्टिट्यूशनल डिले (Constitutional Delay): इसमें बच्चा बचपन में तो अपने उम्र के बच्चों से छोटा दिखता है, लेकिन प्यूबर्टी (Puberty) के समय वह अचानक तेज़ी से बढ़ने लगता है।

बच्चे की Growth रुकने पर शरीर में दिखने वाले ये भयंकर संकेत

जब बच्चे की लंबाई रुक जाती है, तो शरीर द्वारा दिए जाने वाले अन्य डरावने लक्षण इस प्रकार हैं:

कपड़े छोटे न होना: पिछले एक या दो साल से बच्चे के कपड़ों या जूतों का साइज़ बिल्कुल न बदलना।

  • लगातार थकान और सुस्ती: थोड़ा सा खेलने या भागने पर ही बच्चे का भयंकर रूप से हाँफना और हमेशा थका-थका महसूस करना।
  • दाँत देर से आना या कमज़ोर होना: दूध के दाँत देर से टूटना और नए दाँतों का टेढ़ा-मेढ़ा या बहुत कमज़ोर आना।
  • बीमारियों का बार-बार लौटना: बच्चे का 'ओजस' कमज़ोर होने के कारण उसे हर महीने भयंकर सर्दी, खाँसी या बुखार घेर लेना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपने बच्चे की जाँच कराएँ और चिकित्सक से परामर्श लें।

Height रुकने के असली और छिपे हुए अंदरूनी कारण

सिर्फ जेनेटिक्स ही नहीं, बच्चे का विकास रुकने के पीछे ये गहरे अंदरूनी कारण भी होते हैं:

  • सुस्त जठराग्नि और 'आम' का संचय: जब बच्चे का पाचन (Agni) कमज़ोर होता है, तो खाया हुआ पौष्टिक भोजन शरीर को लगता ही नहीं है। वह 'आम' (Toxins) बनकर आंतों में जमा हो जाता है और 'अस्थि धातु' तक पोषण नहीं पहुँचता।
  • पेट में कीड़े होना (Krimi): बच्चों के पेट में भयंकर कीड़े (Worms) होना एक बहुत बड़ा और छिपा हुआ कारण है। ये कीड़े बच्चे का सारा पोषण खुद खा जाते हैं, जिससे बच्चा कमज़ोर रह जाता है।
  • नींद की भयंकर कमी: ग्रोथ हार्मोन (HGH) सबसे ज़्यादा तब बनता है जब बच्चा गहरी नींद में होता है। रात को देर तक टीवी या मोबाइल देखने से यह हार्मोन बनना रुक जाता है।
  • जंक फूड और विरुद्ध आहार: चिप्स, मैदा और कोल्ड ड्रिंक्स शरीर से कैल्शियम को सोख लेते हैं और हड्डियों को भयंकर रूप से खोखला कर देते हैं।

बच्चे के शारीरिक विकास को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस स्थिति को अगर सिर्फ 'समय के साथ ठीक हो जाएगा' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • भयंकर हीन भावना (Inferiority Complex): छोटे कद के कारण स्कूल में चिढ़ाए जाने से बच्चा भयंकर डिप्रेशन (Depression) और शर्मीलेपन का शिकार हो जाता है।
  • हड्डियों का खोखलापन (Osteoporosis): अगर बचपन में हड्डियाँ मज़बूत न बनें, तो जवानी में ही हड्डियाँ भयंकर रूप से भुरभुरी और कमज़ोर हो जाती हैं।

शारीरिक कमज़ोरी: बच्चा खेल-कूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में हमेशा दूसरे बच्चों से पीछे रह जाता है।

बच्चे की Height पर आयुर्वेद का क्या चमत्कारी नज़रिया है?

आयुर्वेद में शरीर के विकास को सात धातुओं (रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र) के पोषण से जोड़कर देखा जाता है। ऊँचाई मुख्य रूप से 'अस्थि धातु' (हड्डियों) पर निर्भर करती है। आयुर्वेद के अनुसार, जब बच्चे का 'वात' दोष भड़कता है और 'अग्नि' मंद होती है, तो अस्थि धातु का निर्माण रुक जाता है। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि ग्रोथ पेट के कीड़ों की वजह से रुकी है या कुपोषण की वजह से। आयुर्वेद में बस केमिकल वाले पाउडर पिलाना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बच्चे की पाचन अग्नि तेज़ हो, जिससे वह जो भी खाए, वह सीधे उसकी हड्डियों को लंबा और मज़बूत बनाने में काम आए।

जीवा आयुर्वेद Height और Growth को संतुलित करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर बच्चे का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: बच्चे की सुस्ती, भूख न लगने और दाँत आने के समय की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: बच्चे को बचपन में हुई कोई भयंकर बीमारी या दिए गए स्टेरॉयड्स (Steroids) का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात दोष को पकड़ने के बाद ही जठराग्नि को तेज़ करने और हड्डियों को ताकत देने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

हड्डियों को लंबी और मज़बूत बनाने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में 'अस्थि धातु' को पोषण देने, ग्रोथ हार्मोन को सक्रिय करने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह बच्चे की ग्रोथ के लिए आयुर्वेद का सबसे चमत्कारी रसायन है। यह हड्डियों की लंबाई बढ़ाता है, मांसपेशियों को ताकत देता है और दिमागी तनाव कम करता है।
  • लाक्षा (Laksha): यह हड्डियों की डेंसिटी (Bone density) को भयंकर रूप से मज़बूत करती है और कैल्शियम को शरीर में सोखने (Absorb) की क्षमता बढ़ाती है।
  • गिलोय (Giloy): यह बच्चे के शरीर से दूषित 'आम' और गंदगी को साफ करती है और बार-बार बीमार पड़ने की भयंकर समस्या को जड़ से रोकती है।
  • शतावरी (Shatavari): यह शरीर की सूखी हुई नसों को पोषण देती है और बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को तेज़ी से बढ़ाती है।

बच्चे के शरीर को नई ऊर्जा देने वाली आयुर्वेदिक चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, मेटाबॉलिज़्म को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • सर्वांग अभ्यंग (Abhyanga): औषधीय तेलों (जैसे लाक्षादि तैल या अश्वगंधा बला तैल) से बच्चे के पूरे शरीर और रीढ़ की हड्डी (Spine) की मालिश की जाती है। यह वात को शांत कर हड्डियों को लंबा होने में भयंकर मदद करता है।
  • नस्य (Nasya): नाक में गाय के शुद्ध घी या अणु तैल की बूँदें डालना पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland) को प्राकृतिक रूप से उत्तेजित करता है, जिससे ग्रोथ हार्मोन ज़्यादा बनता है।

बच्चे की Height को बूस्ट करने वाला शुद्ध सात्विक आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि बच्चों के विकास के लिए आहार ही उनकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • कैल्शियम और प्रोटीन: दूध, पनीर, रागी और मखाने का सेवन बढ़ाएँ। ये हड्डियों का प्राकृतिक निर्माण करते हैं।
  • शुद्ध गाय का घी: बच्चे के आहार में रोज़ाना शुद्ध गाय का घी शामिल करें, यह वात को शांत कर जोड़ों को चिकनाहट देता है और दिमाग तेज़ करता है।
  • तिल और गुड़: सर्दियों में काले तिल और गुड़ के लड्डू बच्चों की हड्डियों को फौलाद जैसा मज़बूत बना देते हैं।

क्या न खाएँ?

  • रिफाइंड चीनी और मैदा: बाज़ार के बिस्कुट, केक और मिठाइयाँ हड्डियों से कैल्शियम को सोख लेते हैं, इनका सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
  • कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फूड: ये शरीर में भयंकर 'आम' पैदा करते हैं और बच्चे की पाचन अग्नि को पूरी तरह बुझा देते हैं।
  • देर रात का भारी भोजन: रात को जंक फूड खाने से शरीर के प्राकृतिक ग्रोथ हार्मोन्स भयंकर रूप से डिस्टर्ब हो जाते हैं।

जीवा आयुर्वेद में बच्चे की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में बच्चे की जाँच सिर्फ हाइट नापकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले माता-पिता की परेशानी, बच्चे के खाने-पीने की आदतों और सुस्ती को आराम से सुना जाता है।
  • बच्चे के पेट साफ होने (कब्ज़) और कीड़ों (Worms) की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • बच्चे की नींद, खेलने-कूदने की आदत और तनाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और बच्चे की प्रकृति को जानकर 'आम' और मंद अग्नि के स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके बच्चे के विकास का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

असर दिखने में कितना समय लग सकता है 

जीवा आयुर्वेद में इलाज पूरी तरह से हर बच्चे के हिसाब से किया जाता है:

  • शुरुआती सुधार: चूँकि हाइट बढ़ना एक धीमी प्रक्रिया है, इसलिए शुरुआत के 6 से 8 हफ्तों में बच्चे की भूख खुलती है, सुस्ती कम होती है और पेट साफ होने लगता है।
  • हाइट में बदलाव का समय: अगर ग्रोथ प्लेट्स खुली हुई हैं, तो अश्वगंधा और सही डाइट के लगातार प्रयोग से 6 से 12 महीनों में ऊँचाई में स्पष्ट और सकारात्मक बदलाव दिखने लगता है।
  • स्थायी परिणाम: बच्चे अगर जड़ी-बूटियों और शुद्ध आहार का कड़ाई से पालन करते हैं, तो वे अपनी जेनेटिक क्षमता (Genetic potential) के उच्चतम स्तर तक प्राकृतिक रूप से पहुँच जाते हैं।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य आँखों की जाँच, मॉनिटरिंग और आवश्यकता होने पर लेज़र/सर्जरी से जटिलताओं को रोकना नेत्र तर्पण, त्रिफला और जीवनशैली सुधार के माध्यम से आँखों की देखभाल पर ध्यान
नज़रिया समस्या को उम्र बढ़ने, विट्रियस बदलाव या रेटिना संबंधी कारणों से जोड़कर देखना इसे वात-पित्त असंतुलन, आँखों की कमजोरी और समग्र स्वास्थ्य से जोड़कर देखना
उपचार तरीका नियमित नेत्र परीक्षण, लेज़र या Vitrectomy जैसी प्रक्रियाएँ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ, नेत्र देखभाल, आराम और दिनचर्या संतुलन पर ज़ोर
डाइट और लाइफस्टाइल सामान्य आँखों की सुरक्षा और नियमित फॉलो-अप की सलाह पित्त-शामक आहार, पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम कम करने पर ध्यान
लंबा असर गंभीर मामलों में निरंतर निगरानी और उपचार की आवश्यकता हो सकती है आँखों की समग्र देखभाल और स्वस्थ आदतों के माध्यम से दीर्घकालिक संतुलन पर ज़ोर

डॉक्टर की सलाह तुरंत कब लें?

अगर बच्चे के विकास में ये भयंकर संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • लगातार 2 साल तक बच्चे की ऊँचाई में 1 इंच का भी फर्क न आए।
  • बच्चे की उम्र 13-14 साल हो जाए और उसमें प्यूबर्टी (Puberty) के कोई भी लक्षण नज़र न आएँ।
  • थोड़ा सा दौड़ने या खेलने पर बच्चे की हड्डियों या जोड़ों में भयंकर दर्द रहने लगे।
  • बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से मानसिक रूप से भी बहुत पीछे रह जाए (सुस्ती और कमज़ोर याददाश्त)।

निष्कर्ष

निष्कर्ष: आयुर्वेद के हिसाब से बच्चे की हाइट न बढ़ना सिर्फ जेनेटिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मंद अग्नि, कुपोषण और दूषित 'वात' के कारण अस्थि धातु के कमज़ोर होने का परिणाम है। सिर्फ बाहर से कृत्रिम सप्लीमेंट्स (Supplements) पिलाने से बच्चे की हड्डियाँ लंबी नहीं होतीं, बल्कि उनका पेट खराब हो जाता है। असली इलाज शरीर की अंदरूनी शुद्धि, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ और गाय के घी का शुद्ध आहार है। जीवा आयुर्वेद बच्चे की पाचन अग्नि को तेज़ कर प्राकृतिक रूप से ग्रोथ हार्मोन्स को सक्रिय करता है, जिससे आपका बच्चा बिना किसी भयंकर केमिकल के प्राकृतिक रूप से लंबा और सेहतमंद बनता है।

FAQs

हाँ, बिल्कुल! जेनेटिक्स का असर होता है, लेकिन अगर बचपन से ही बच्चे की 'जठराग्नि' तेज़ रखी जाए, उसे अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ और सही पोषण दिया जाए, तो बच्चा माता-पिता से ज़्यादा ऊँचाई प्राप्त कर सकता है।

लड़कों की हाइट आमतौर पर 18-21 साल तक और लड़कियों की 16-18 साल तक बढ़ती है, जब तक कि उनकी हड्डियों की 'ग्रोथ प्लेट्स' (Growth plates) खुली रहती हैं। प्लेट्स बंद होने के बाद प्राकृतिक रूप से हाइट बढ़ना मुश्किल होता है।

हाँ। लटकने, ताड़ासन करने और स्ट्रेचिंग (Stretching) से रीढ़ की हड्डी (Spine) और जोड़ों का 'वात' दोष खुलता है। इससे शरीर का पॉश्चर (Posture) सीधा होता है और ग्रोथ हार्मोन को सक्रिय होने में बहुत मदद मिलती है।

सिर्फ कैल्शियम खिलाना काफी नहीं है। अगर बच्चे का पाचन (अग्नि) कमज़ोर है, तो कैल्शियम हड्डियों (अस्थि धातु) तक पहुँच ही नहीं पाएगा और पथरी (Stone) बन सकता है। कैल्शियम को पचने के लिए आयुर्वेद की 'अग्नि' वर्धक औषधियाँ ज़रूरी हैं।

नींद का रोल सबसे बड़ा है! दिमाग की पीयूष ग्रंथि सबसे ज़्यादा ग्रोथ हार्मोन (HGH) तब बनाती है जब बच्चा रात में 10 बजे से 2 बजे के बीच गहरी नींद में होता है। देर रात तक जगना इस हार्मोन को मार देता है।

हाँ, यह 100% सुरक्षित और चमत्कारी है। अश्वगंधा आयुर्वेद का एक 'रसायन' है जो बच्चों की हड्डियों को प्राकृतिक रूप से लंबा करता है, इम्युनिटी बढ़ाता है और उन्हें दिमागी रूप से तेज़ बनाता है (डॉक्टर की सलाह अनुसार मात्रा में)।

बहुत बड़ा कारण बन सकते हैं! अगर पेट में कीड़े (Krimi) हैं, तो आप बच्चे को कितना भी पौष्टिक खाना या दूध-घी दे दें, वो सारा पोषण कीड़े खा जाएँगे और बच्चा भयंकर कमज़ोर और छोटा ही रह जाएगा।

एलोपैथी के इन इंजेक्शन्स के भयंकर साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं। ये शरीर में पानी भर सकते हैं, सिरदर्द ला सकते हैं और बच्चे के लिवर व पैंक्रियास पर बहुत ज़्यादा दबाव डाल सकते हैं। आयुर्वेद प्राकृतिक तरीका है।

बच्चे को रोज़ाना रागी (Ragi), मखाना, गाय का शुद्ध घी, काले तिल, हरी सब्ज़ियाँ और बादाम-अखरोट दें। ये चीज़ें वात को शांत कर 'अस्थि धातु' को फौलाद की तरह मज़बूत और लंबा बनाती हैं।

बिल्कुल! जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज़्यादा चीनी शरीर में भयंकर 'आम' (ज़हर) बनाते हैं। ये चीज़ें ब्लड में एसिडिटी बढ़ाती हैं, जिससे शरीर अपनी ही हड्डियों से कैल्शियम सोखने लगता है और विकास रुक जाता है।

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