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30 से पहले डायबिटीज? आजकल युवा इतनी जल्दी शुगर के शिकार क्यों हो रहे हैं ?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

डायबिटीज को पहले बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, लेकिन आज की ज़िंदगी में यह 20 और 30 साल के युवाओं को अपनी चपेट में ले रही है। कम उम्र में शुगर होना न केवल आपके शरीर को भीतर से कमज़ोर करता है, बल्कि यह भविष्य की कई गंभीर बीमारियों की नींव रख देता है। समय पर इसका इलाज और जीवनशैली में बदलाव करना इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि शुगर का बढ़ा हुआ स्तर शरीर के अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार, युवाओं में बढ़ती यह समस्या केवल मीठा खाने से नहीं, बल्कि खराब मेटाबॉलिज्म और बिगड़े हुए दोषों का परिणाम है।

डायबिटीज या मधुमेह क्या होता है?

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो, हमारा शरीर भोजन से ऊर्जा बनाने के लिए ग्लूकोज शुगर का इस्तेमाल करता है। इस प्रक्रिया में इंसुलिन नाम का हार्मोन एक चाबी की तरह काम करता है, जो शुगर को शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचाता है। जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इसी स्थिति को डायबिटीज या मधुमेह कहते हैं। सरल शब्दों में, यह आपके शरीर की ईंधन को पचाने की क्षमता का बिगड़ जाना है।

डायबिटीज के विभिन्न प्रकार और उनकी अवस्थाएं

डायबिटीज को उसकी स्थिति और कारणों के आधार पर इन मुख्य प्रकारों में समझा जा सकता है

  • टाइप-1 डायबिटीज इसमें शरीर का रक्षा तंत्र ही इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह अक्सर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होती है।
  • टाइप-2 डायबिटीज यह सबसे आम प्रकार है जो खराब जीवनशैली के कारण होती है। इसमें शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता।
  • प्री-डायबिटीज यह वह स्थिति है जहाँ शुगर का स्तर सामान्य से ज़्यादा होता है, लेकिन अभी तक बीमारी पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती।
  • गर्भावधि मधुमेह यह केवल गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में दिखाई देती है, जो बाद में टाइप-2 का ख़तरा बढ़ा सकती है।
  • मैच्योरिटी ऑनसेट डायबिटीज ऑफ द यंग यह एक दुर्लभ प्रकार है जो आनुवंशिक कारणों से युवाओं में दिखाई देता है।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

अत्यधिक प्यास और भूख बार-बार गला सूखना और खाना खाने के तुरंत बाद भी भूख महसूस होना।

  • बार-बार पेशाब आना विशेष रूप से रात के वक़्त बार-बार बाथरूम जाने की ज़रूरत महसूस होना।
  • अचानक वज़न कम होना बिना किसी मेहनत या डाइट के शरीर का वज़न तेज़ी से गिरने लगना।
  • धुंधला दिखाई देना आँखों की रोशनी में अचानक अस्थिरता आना और चीज़ों का साफ़ न दिखना।
  • थकान और चिड़चिड़ापन हर वक़्त ऊर्जा की कमी महसूस होना और स्वभाव में बदलाव आना।

युवाओं में डायबिटीज होने के मुख्य कारण

शारीरिक सक्रियता की कमी घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना और पैदल चलने या व्यायाम से परहेज करना।

जंक फूड का अत्यधिक सेवन प्रोसेस्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज़्यादा मैदा खाना मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है।

तनावपूर्ण जीवनशैली करियर और ज़िंदगी का तनाव कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो शुगर लेवल को गड़बड़ करता है।

नींद का अभाव रात में देर तक जागने से शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता कम हो जाती है।

मोटापा पेट के आस-पास जमा चर्बी इंसुलिन के मार्ग में रुकावट पैदा करती है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और होने वाली जटिलताएं

जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

  • पारिवारिक इतिहास यदि माता-पिता में से किसी को डायबिटीज है, तो संतान के लिए ख़तरा बढ़ जाता है।
  • धूम्रपान और शराब ये बुरी आदतें अग्न्याशय को नुकसान पहुँचाती हैं और इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाती हैं।
  • पीसीओडी PCOD महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन शुगर होने के ख़तरे को ज़्यादा बढ़ा देता है।
  • विटामिन-डी की कमी शोध बताते हैं कि शरीर में विटामिन-डी कम होने से इंसुलिन कम बनता है।
  • उच्च रक्तचाप हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल का होना डायबिटीज की संभावना को बढ़ा देता है।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

  • गुर्दे की बीमारी शुगर का बढ़ा स्तर धीरे-धीरे किडनी को पूरी तरह खराब कर सकता है।
  • आँखों की रोशनी जाना डायबिटीज के कारण रेटिना की नसें फट सकती हैं, जिससे अंधापन हो सकता है।
  • हृदय रोग शुगर के मरीज़ों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का ख़तरा सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है।
  • पैरों में घाव पैरों की नसें कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे मामूली चोट भी गंभीर गैंगरीन बन सकती है।
  • नपुंसकता नसों और रक्त संचार में आई खराबी पुरुषों के यौन स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करती है।

 डायबिटीज की जाँच कैसे की जाती है?

  • फास्टिंग ब्लड शुगर सुबह बिना कुछ खाए खून में शुगर की मात्रा की जाँच करना।
  • पीपी ब्लड शुगर खाना खाने के ठीक दो घंटे बाद शुगर के स्तर को मापना।
  • HbA1c टेस्ट यह पिछले तीन महीनों के औसत शुगर लेवल को बताता है, जो सबसे सटीक जाँच मानी जाती है।
  • ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट मीठा पानी पिलाने के बाद शरीर की प्रतिक्रिया को देखना।
  • मूत्र परीक्षण पेशाब में कीटोन या शुगर की मौजूदगी की जाँच करना।

आयुर्वेद में डायबिटीज प्रमेह और मधुमेह

आयुर्वेद में डायबिटीज को प्रमेह कहा जाता है। इसमें 20 प्रकार के प्रमेह बताए गए हैं, जिनमें मधुमेह सबसे गंभीर है

  • दोषों का असंतुलन आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में कफ दोष बढ़ने से मेद चर्बी बढ़ती है, जो मूत्र मार्ग को प्रभावित करती है।
  • मंदाग्नि का प्रभाव जब पाचन अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर आम टॉक्सिन्स बनाता है, जो नसों में रुकावट पैदा करते हैं।
  • ओजस का क्षय मधुमेह में शरीर का सार तत्व यानी ओजस पेशाब के ज़रिए बाहर निकल जाता है, जिससे मरीज़ कमज़ोर हो जाता है।

काम आने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

  • नीम और करेला ये रक्त को शुद्ध करते हैं और इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाने में बहुत फ़ायदा पहुँचाते हैं।
  • मेथी दाना यह कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण Absorbtion को धीमा करता है और शुगर को नियंत्रित करने में तेज़ असर दिखाता है।
  • जामुन की गुठली इसमें जम्बोलिन होता है जो स्टार्च को शुगर में बदलने से रोकता है।
  • हल्दी और आंवला निशामलकी यह डायबिटीज के कारण होने वाले नसों और आँखों के नुकसान को रोकने के लिए सबसे बेहतर जड़ी-बूटी है।

आयुर्वेदिक थेरेपी और पंचकर्म

वमन और विरेचन शरीर से अतिरिक्त कफ और पित्त को बाहर निकालने के लिए शोधन क्रियाएं, जो मेटाबॉलिज्म को तेज़ करती हैं।

अभ्यंग विशेष आयुर्वेदिक तेलों से मालिश जो रक्त संचार को बढ़ाती है और नसों की कमज़ोरी दूर करती है।

बस्ती चिकित्सा औषधीय काढ़े का उपयोग करके शरीर की शुद्धि करना, जो इंसुलिन के स्राव को संतुलित करने में मदद करता है।

क्या खाएं और क्या न खाएं?

क्या खाएं

  • साबुत अनाज जौ, रागी और बाजरा जैसे मोटे अनाज जो धीरे-धीरे शुगर रिलीज़ करते हैं।
  • हरी सब्जियाँ लौकी, तोरई, करेला और मेथी जैसी सब्जियाँ जो फाइबर से भरपूर हों।
  • दालें और फल मूंग की दाल और फाइबरयुक्त फल जैसे सेब या पपीता सीमित मात्रा में।

क्या न खाएं

  • सफेद ज़हर चीनी, मैदा और सफेद चावल का सेवन बिल्कुल बंद कर देना ज़रूरी है।
  • मीठे फल आम, चीकू, अंगूर और केले जैसे फलों से बचें क्योंकि ये शुगर को तेज़ी से बढ़ाते हैं।
  • तला-भुना भोजन बाहर का जंक फूड और पैकेट बंद जूस शरीर में आम Toxins बढ़ाते हैं।

 इलाज से क्या फ़ायदा मिल सकता है?

  1. शुगर पर प्राकृतिक नियंत्रण बिना किसी बाहरी सिंथेटिक इंसुलिन के, शरीर खुद शुगर मैनेज करने के काबिल बनता है।
  2. ऊर्जा के स्तर में वृद्धि थकान और सुस्ती खत्म होती है और आप अपनी ज़िंदगी में दोबारा सक्रिय महसूस करते हैं।
  3. अंगों की सुरक्षा किडनी, आँखों और दिल पर पड़ने वाला बुरा असर रुक जाता है।
  4. दवाओं पर निर्भरता में कमी जैसे-जैसे शरीर सुधरता है, भारी दवाओं की ज़रूरत कम होने लगती है।
  5. वज़न का संतुलन मेटाबॉलिज्म सुधरने से वज़न को नियंत्रित रखना आसान हो जाता है।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है, मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया, तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं, लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयाँ उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे, तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। 

हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए, जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया, जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है।  मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयाँ शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था, अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 

4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी, एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है, तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

विशेषता आधुनिक इलाज Allopathy आयुर्वेदिक इलाज Ayurveda
लक्ष्य इसका मुख्य ध्यान रक्त में मौजूद शुगर को तुरंत नियंत्रित करने पर होता है। इसका लक्ष्य पाचन अग्नि को बढ़ाकर और पेन्क्रियास को सक्रिय कर शुगर के मूल कारण को ठीक करना है।
तरीका यह इंसुलिन या ओरल दवाओं के माध्यम से शरीर को बाहर से मदद देता है। यह शरीर की अपनी इंसुलिन बनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता को सक्रिय करता है।
साइड इफ़ेक्ट लंबे समय तक दवाओं के सेवन से किडनी और पाचन तंत्र पर नुकसान का खतरा रहता है। जड़ी-बूटियों और संतुलित आहार पर आधारित, अपेक्षाकृत सुरक्षित और पोषण देने वाला उपचार।
दृष्टिकोण यह बीमारी के लक्षणों का इलाज करता है। यह मरीज़ की प्रकृति और होलिस्टिक हीलिंग Holistic Healing पर ज़ोर देता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  •   यदि आपको बिना किसी कारण के हर वक़्त बहुत ज़्यादा प्यास और थकान महसूस हो रही हो।
  •   यदि आपके शरीर का कोई घाव हफ्तों तक नहीं भर रहा हो।
  •   यदि हाथों और पैरों के तलवों में सुन्नपन या जलन झुनझुनी महसूस हो।
  •   यदि पेशाब का रंग बहुत गहरा हो या उसमें झाग आ रहा हो।
  •   यदि वज़न बहुत तेज़ी से गिर रहा हो और आँखों के सामने अंधेरा आता हो।

निष्कर्ष

30 की उम्र से पहले डायबिटीज होना एक चेतावनी है कि हमें अपनी ज़िंदगी को पटरी पर लाने की ज़रूरत है। केवल दवाइयों के सहारे जीना समाधान नहीं है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि सही आहार, योग और जड़ी-बूटियों के साथ हम न केवल शुगर को मात दे सकते हैं, बल्कि एक लंबी और स्वस्थ ज़िंदगी जी सकते हैं। अपने शरीर की पुकार सुनें और आज ही जीवा आयुर्वेद के साथ अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, आप फाइबर वाले फल जैसे सेब या पपीता सीमित मात्रा में ले सकते हैं, लेकिन बहुत मीठे फलों से बचना ज़रूरी है।

जी हाँ, तनाव के दौरान निकलने वाले हार्मोन शरीर में शुगर को तेज़ी से रिलीज करते हैं, जिससे लेवल बढ़ जाता है।

नीम बहुत गुणकारी है, लेकिन इसे कितनी मात्रा में और कितने समय तक लेना है, इसके लिए विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी है।

सफेद चावल के बजाय 'ब्राउन राइस' या कम पॉलिश वाला चावल कभी-कभी खाया जा सकता है, पर संतुलित मात्रा में।

हाँ, रोज़ाना 30-40 मिनट की तेज़ सैर मांसपेशियों में इंसुलिन के इस्तेमाल को सुधारती है और शुगर घटाती है।

शुरुआती अवस्था में टाइप-2 डायबिटीज को सख्त अनुशासन, सही आहार और आयुर्वेद से पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है।

पूरी नींद न लेने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है जो इंसुलिन के काम को प्रभावित करता है।

हाँ, यह मेटाबॉलिज्म को ठीक करने और सुबह के शुगर लेवल को कम रखने में बहुत मदद करता है।

खून में शुगर बढ़ने से प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे स्किन और यूरिन इन्फेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है।

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