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अभ्यंग थेरेपी: पूरे शरीर के दर्द को धीरे-धीरे खत्म कैसे करती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan

आप सुबह उठते हैं और बिस्तर से नीचे पैर रखते ही आपके पूरे शरीर में एक भयंकर दर्द और भारीपन महसूस होता है, जिससे आप सीधे खड़े भी नहीं हो पाते हैं। आप पिछले कई सालों से पूरे शरीर के दर्द और थकावट को झेल रहे हैं और हर तरह के दर्द निवारक मलहम, महँगे पेनकिलर या स्प्रे का इस्तेमाल कर चुके हैं। शुरुआत में इन चीजों ने आराम ज़रूर दिया था, लेकिन अब वे भी बेअसर हो गई हैं और आपका शरीर अंदर से पूरी तरह थका हुआ और कमज़ोर महसूस होता है। जब पूरे शरीर का दर्द बहुत पुराना हो जाता है, तो डॉक्टर कह देते हैं कि अब आपको फाइब्रोमायल्जिया या नसों की कमज़ोरी हो गई है और बस हमेशा गोलियाँ खाते हुए जीने की आदत डाल लें। 

लेकिन यह आपके शरीर के दर्द की पूरी सच्चाई बिल्कुल नहीं है; शरीर को सिर्फ ऊपर से सुन्न कर देना कोई पक्का इलाज नहीं है। आपका शरीर और खासकर आपकी नसें अंदर से वात और भयंकर खुश्की से भर चुकी हैं। जब आप अपनी इस बिगड़ी हुई जीवनशैली को ठीक करते हैं और अपने पेट की गहराई से सफाई करते हैं, तो आप अपनी एंग्ज़ायटी को मैनेज कर सकते हैं और ठीक वैसे ही इस पुराने दर्द को हमेशा के लिए जड़ से खत्म कर सकते हैं जैसे पुराने से पुराने माइग्रेन से राहत पाई जा सकती है।

अभ्यंग थेरेपी और पूरे शरीर का दर्द आखिर क्या है?

पूरे शरीर का लगातार दर्द सिर्फ थकान का नतीजा नहीं है। यह आपके शरीर की नसों और माँसपेशियों में प्राकृतिक चिकनाई के पूरी तरह से सूख जाने और वात के भड़कने का सीधा संकेत है, और अभ्यंग थेरेपी इस सूखेपन को जड़ से दूर करने की एक बहुत ही चमत्कारी आयुर्वेदिक प्रक्रिया है।

  • गहरी मालिश और पोषण: इसमें हल्के गर्म औषधीय तेल से पूरे शरीर की एक खास दिशा में गहरी मालिश की जाती है, जो सीधे वात के मुख्य स्थान यानी त्वचा और नसों पर जाकर काम करता है।
  • टॉक्सिन्स को पिघलाना: यह औषधीय तेल अंदर से माँसपेशियों, नसों और सूखी हुई हड्डियों को गहराई तक तर कर देता है और जमे हुए टॉक्सिन्स को पिघलाकर पसीने के रास्ते बाहर निकालता है।

शरीर का यह दर्द कितने प्रकार का हो सकता है?

हर इंसान के शरीर में दर्द एक जैसा नहीं होता है। आपके शरीर की अंदरूनी स्थिति, काम के तनाव और आपके पेट की खराबी के हिसाब से पूरा शरीर अलग-अलग तरीके से डैमेज होता है।

  • वातजनित दर्द: यह सर्दियों में या ठंडी हवा लगने से बढ़ता है। इसमें पूरे शरीर में सुई चुभने जैसा दर्द और भयंकर रूखापन रहता है।
  • मस्कुलर स्ट्रेस और फाइब्रोमायल्जिया: यह लगातार तनाव और गलत तरीके से बैठने से होता है, जिससे शरीर की हर माँसपेशी में भयंकर जकड़न और मीठा-मीठा दर्द रहता है।
  • क्रोनिक फटीग सिंड्रोम: इसमें दर्द के साथ-साथ इतनी थकावट होती है कि इंसान का बिस्तर से उठने का भी मन नहीं करता।
  • आमवात जनित दर्द: खराब हाजमे के कारण पेट की गैस और टॉक्सिन्स खून में मिलकर पूरे शरीर के जोड़ों और माँसपेशियों में जाकर जम जाते हैं।

इसके लक्षण और संकेत कैसे पहचानें?

आपका शरीर आपको बहुत पहले से चेतावनी देने लगता है कि आपकी नसों की ग्रीस अंदर से खत्म हो रही है। इन दर्दनाक संकेतों को समय रहते पहचानना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है ताकि समय पर बचाव किया जा सके।

  • सुबह बिस्तर से उठते समय पूरे शरीर में ऐसी भयंकर जकड़न होना कि सीधा खड़ा होना मुश्किल हो जाए।
  • शरीर के किसी भी हिस्से को हल्का सा दबाने पर ही अंदर से एक तेज दर्द की टीस उठना।
  • नींद पूरी होने के बाद भी सुबह उठने पर भयंकर थकावट और शरीर में भारीपन महसूस होना।
  • पैरों या हाथों की उँगलियों में अजीब सी सुन्नता, झनझनाहट या चींटियाँ चलने जैसा महसूस होना।
  • लगातार रहने वाला सिरदर्द और कंधों में एक ऐसा भारीपन जैसे कोई बड़ा बोझ रखा हो।

शरीर में दर्द बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

आपकी माँसपेशियाँ रातों-रात कमज़ोर नहीं होती हैं। इसके पीछे कुछ बहुत ही गहरी वजहें हैं जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं और सिर्फ दर्द की गोलियाँ खाते रहते हैं।

  • वात की भयंकर खुश्की: जब शरीर में वात यानी हवा बढ़ती है, तो वह नसों और हड्डियों के बीच की प्राकृतिक चिकनाई को पूरी तरह सुखा देती है।
  • कब्ज और कमज़ोर पाचन: जब आपकी पाचन अग्नि ठंडी पड़ जाती है, तो पेट में भयंकर कब्ज और गैस बनती है जो सीधे पूरे शरीर की नसों पर भारी दबाव डालती है।
  • लगातार शारीरिक और मानसिक तनाव: घंटों तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहने और स्ट्रेस लेने से नसों पर उनके सहने की क्षमता से कई गुना ज़्यादा दबाव पड़ता है।
  • नींद की कमी: लगातार काम की थकान और नींद की कमी शरीर की माँसपेशियों को रात में खुद को रिपेयर नहीं करने देती।

इसे नज़रअंदाज़ करने पर क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

अगर आप अब भी यह मानकर बैठे हैं कि यह तो बस आम थकावट है और पेनकिलर से काम चल जाएगा, तो आप अनजाने में अपने शरीर को बहुत बड़े खतरे में डाल रहे हैं।

  • पूरी तरह से मोहताज होना: दर्द इतना भयंकर हो जाता है कि इंसान का बिस्तर से उठना या खुद करवट बदलना भी नामुमकिन हो जाता है।
  • माँसपेशियों का सूखना: लगातार खून का दौरा कम होने और वात बढ़ने से शरीर की माँसपेशियाँ अंदर से सूख कर सिकुड़ने लगती हैं।
  • स्थायी नर्व डैमेज: लगातार दबाव और रूखेपन के कारण स्पाइनल कॉर्ड की नसें हमेशा के लिए डैमेज हो सकती हैं।
  • पेनकिलर के भयंकर साइड इफेक्ट्स: दर्द को दबाने के लिए रोज़ भारी गोलियाँ खाने से आपका लिवर और किडनी हमेशा के लिए बर्बाद हो सकते हैं।

इसका निदान कैसे किया जाता है?

आधुनिक विज्ञान यह जानने के लिए कि आपके शरीर में दर्द क्यों नहीं जा रहा है, कई तरह के ब्लड और मशीनी टेस्ट करता है ताकि सही स्थिति का पता चल सके।

  • ईएमजी (EMG): यह टेस्ट यह जांचना सुनिश्चित करता है कि आपकी नसें माँसपेशियों को सही से सिग्नल भेज पा रही हैं या नहीं।
  • सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP): शरीर और माँसपेशियों के अंदर चल रही भयंकर सूजन को मापने के लिए।
  • विटामिन बी12 और डी3 टेस्ट: नसों की कमज़ोरी और हड्डियों के खोखलेपन को गहराई से देखने के लिए किया जाता है।
  • फिजिकल जांच: डॉक्टर आपके हाथ-पैरों को उठाकर और टेंडर पॉइंट्स को दबाकर देखते हैं कि दर्द कहां से ट्रिगर हो रहा है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद पूरे शरीर के दर्द को सिर्फ एक लोकल समस्या बिल्कुल नहीं मानता। यह आपके पेट और वात दोष से गहराई से जुड़ी हुई एक बहुत ही गंभीर अंदरूनी बीमारी है, जिसे अक्सर 'सर्वांग वात' कहा जाता है।

  • वात का भयंकर प्रकोप: शरीर में जब वात बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो वह नसों और माँसपेशियों के बीच की चिकनाई को पूरी तरह सुखा देता है।
  • आम का जमाव: खराब हाजमे के कारण पेट में बना विषैला आम रक्त के जरिए सीधे माँसपेशियों तक पहुंचता है और वहां नसों को ब्लॉक कर देता है।
  • रस और मांस धातु की कमज़ोरी: जब सही पोषण शरीर के अंगों तक नहीं पहुंचता, तो शरीर सूखने लगता है। आयुर्वेद इसी वात और गंदगी को निकालकर जड़ से उपचार करता है।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

हम आपको सिर्फ भारी दर्द निवारक गोलियाँ देकर आपकी परेशानी को सुन्न नहीं करते हैं। हमारा मकसद आपके शरीर के अंदर प्राकृतिक ग्रीस बनाने की रुकी हुई फैक्ट्री को दोबारा चालू करना है।

  • दोषों का संतुलन: भड़के हुए वात को पूरी तरह शांत करना। इससे माँसपेशियों का रूखापन, दर्द और ऐंठन तुरंत कम होती है।
  • नसों और हड्डियों का पोषण: अभ्यंग थेरेपी और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के माध्यम से सूखी हुई नसों को अंदरूनी ताकत और नई चिकनाई देना।
  • डिटॉक्सिफिकेशन: पेट में जमे हुए गैस और कब्ज को दूर करना ताकि नसों पर से दबाव हटे और शरीर को राहत मिले।
  • तनाव प्रबंधन: शरीर की जकड़न को खोलने के लिए और मानसिक तनाव कम करने के लिए खास उपाय और व्यायाम अपनाना।

शरीर के दर्द के लिए 4 सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ कौन सी हैं?

प्रकृति ने हमें हड्डियों और दबी हुई नसों को फिर से नया करने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं, जो बिना कोई नुकसान पहुंचाए अपना काम करती हैं।

  • अश्वगंधा: यह शरीर की कमज़ोर माँसपेशियों और लिगामेंट्स को ताकत देता है, ताकि हड्डियों पर सीधा दबाव न पड़े और तनाव कम हो।
  • बला: यह आयुर्वेद में वात रोगों और नसों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए सबसे शक्तिशाली टॉनिक मानी जाती है।
  • निर्गुंडी: यह वात को खत्म करने वाली सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है। इसके पत्तों का अर्क भयंकर जकड़न को तुरंत पिघला देता है।
  • रास्ना: यह जोड़ों और माँसपेशियों के दर्द, सूजन और भारीपन को खींच लेने में सबसे ज़्यादा कारगर औषधि है।

अभ्यंग और अन्य आयुर्वेदिक थेरेपी कैसे काम करती है?

जब खाने वाली दवाइयाँ सीधे सूखी हुई हड्डियों और नसों तक नहीं पहुंच पाती हैं, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी आपके शरीर के अंदर घुसकर जादू सा असर दिखाती है।

  • अभ्यंग: यह पूरे शरीर की एक बहुत ही खास और लयबद्ध मालिश है। औषधीय गर्म तेल से की जाने वाली यह मालिश नसों को गहरा आराम देती है और शरीर के सारे बंद रास्तों को खोल देती है।
  • स्वेदन: अभ्यंग के बाद औषधीय भाप दी जाती है। यह भाप रोमछिद्रों को खोलकर शरीर के अंदर छिपे हुए 'आम' और वात को पसीने के जरिए बाहर निकाल फेंकती है।
  • बस्ती कर्म: यह सबसे असरदार थेरेपी है। इसमें गुदा मार्ग से खास औषधीय तेल अंदर डाला जाता है, जो सीधे वात के घर में जाकर पूरे शरीर की नसों को पोषण देता है।

हड्डियों और वात संतुलन के लिए डाइट प्लान क्या हो?

आप जो खाते हैं, वही आपके जोड़ों और नसों की प्राकृतिक चिकनाई तय करता है। वात को शांत करने और नसों को ताकत देने के लिए एक सही और सुपाच्य डाइट का पालन करना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है।

श्रेणी क्या अपनाएँ (अनुशंसित) किनसे परहेज़ करें (वर्जित)
पोषक आहार गाय का शुद्ध घी: हड्डियों को तर कर वात की शुष्कता को शांत करता है, नसों को पोषण देता है ठंडी और बासी चीजें: ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक वात को भड़का कर जकड़न बढ़ाते हैं
मेवे व वसा तिल और अखरोट: हेल्दी फैट्स सूजन कम कर नसों को गहराई से ताकत देते हैं भारी दालें: राजमा, छोले, उड़द गैस और कब्ज बढ़ाकर दर्द को ट्रिगर करते हैं
औषधीय मसाले लहसुन और अदरक: वात और गैस को कम कर शरीर को संतुलित रखते हैं खट्टी व किण्वित चीजें: दही, इमली, अचार सूजन और नसों के दर्द को बढ़ाते हैं
पाचन संतुलन सही हाजमे के उपाय: पाचन को दुरुस्त रखकर गैस बनने से रोकते हैं त्वरित राहत देने वाली दवाइयाँ

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जांच कैसे करते हैं?

जब महंगे पेनकिलर काम करना बंद कर देते हैं, तब हम आपकी बीमारी को नाड़ी से महसूस करते हैं और शरीर के अंदर छिपी असली जड़ तक पहुंचते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर वात दोष कितना ज़्यादा बढ़ गया है जिसने आपकी चिकनाई को सुखा दिया है।
  • लक्षणों का मूल्याँकन: डॉक्टर आपके दर्द के पैटर्न को देखकर समझते हैं कि दर्द कहां से ट्रिगर हो रहा है।
  • लाइफस्टाइल चेक: आपके काम करने के तरीके, वजन उठाने की आदत और मानसिक तनाव को गहराई से देखना।
  • पाचन का विश्लेषण: यह देखना कि कहीं आपका पेट खराब होने से बनने वाली भयंकर गैस और कब्ज ही तो दर्द को पूरे शरीर तक नहीं ले जा रही।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपके दर्द, थकान के डर और लगातार गोलियाँ खाने की मजबूरी को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। हमारा लक्ष्य आपको एक बहुत ही सुरक्षित और प्राकृतिक इलाज का रास्ता देना है।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे प्यार से बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर को दिखा सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: दर्द ज़्यादा है और उठना मुश्किल है तो घर बैठे वीडियो कॉल से सिर्फ 49 रुपये में बात करें।
  • विस्तृत जांच: आपके दर्द की पूरी हिस्ट्री और पुराने ब्लड टेस्ट को बहुत ध्यान से समझा जाता है।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके लिए खास वात-शामक जड़ी-बूटियाँ, अभ्यंग थेरेपी और डाइट का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसा जादू का इंजेक्शन नहीं है जो एक मिनट में दर्द गायब कर दे। घिसी हुई हड्डियों और दबी हुई नसों को दोबारा प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: शरीर की भयंकर जकड़न और दर्द में आपको बहुत आराम महसूस होगा। पेट साफ होने लगेगा और गैस बनने कम हो जाएगी।
  • 1 से 3 महीने तक: नसों की सूजन कम होगी और शरीर में जाने वाला भारीपन काफ़ी हद तक ठीक हो जाएगा। आपकी नींद बेहतर होगी।
  • 3 से 6 महीने तक: हड्डियाँ और माँसपेशियाँ अंदर से पूरी तरह ताकतवर बन जाती हैं। आप बिना दर्द के अपना काम कर सकेंगे और दर्द हमेशा के लिए छूट जाएगा।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

अगर आप पूरी ईमानदारी और अनुशासन से हमारे आयुर्वेदिक इलाज और वात-शामक डाइट को फॉलो करते हैं, तो आप अपने शरीर में बहुत ही शानदार और स्थायी बदलाव महसूस करेंगे।

  • पूरे शरीर से उठने वाले उस भयंकर दर्द और जकड़न से हमेशा के लिए पक्का छुटकारा।
  • सुबह उठने पर होने वाली थकान और भारीपन का पूरी तरह खत्म होना।
  • शरीर को बिना किसी जकड़न और दर्द के मोड़ने-झुकाने में पूरी आजादी और लचीलापन।
  • बिना किसी पेनकिलर या दर्दनाक स्टेरॉयड के एक तनाव से राहत भरा बिल्कुल सामान्य जीवन जीना।
  • नसों की कमज़ोरी और सुन्नपन से हमेशा के लिए आजादी मिलना।

मरीज़ों के अनुभव

पिछले 2–3 वर्षों से मैं पीठ दर्द की समस्या से परेशान हूँ। मैंने कई डॉक्टरों से परामर्श लिया और उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कराए बिना इसका इलाज संभव नहीं है। फिर मैंने जीवा क्लिनिक में जाकर उपचार और पंचकर्म थेरेपी शुरू की। अब मैं पूरी तरह ठीक हूँ। मेरी समस्या से राहत दिलाने के लिए मैं जीवा के डॉक्टरों का धन्यवाद करती हूँ।

राजेश देवी

दिल्ली

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग Rs.1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम सिर्फ आपके दर्द को पेनकिलर से नहीं दबाते हैं। हम आपके जीवन को हमेशा के लिए अपने पैरों पर खड़ा रखने के लिए पूरी ईमानदारी से मेहनत करते हैं।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ आपको गोलियाँ देकर नहीं भेजते। हम आपके शरीर के वात दोष को जड़ से शांत करने और प्राकृतिक चिकनाई बनाने का काम करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का अनुभव है। हमने हजारों ऐसे मस्कुलर पेन और भयंकर नसों की कमज़ोरी के जटिल केस देखे हैं जहां मरीज़ चल भी नहीं पाते थे।
  • कस्टमाइज्ड केयर: हर इंसान का दर्द और वात का स्तर अलग होता है। इलाज भी बिल्कुल अलग और व्यक्तिगत होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी जड़ी-बूटियाँ पूरी तरह प्राकृतिक हैं। ये आपके लिवर और किडनी को बिना नुकसान पहुंचाए नसों को ताकत देती हैं।

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आप अपने शरीर के साथ कैसा बर्ताव कर रहे हैं। भारी पेनकिलर खाने और आयुर्वेद को अपनाने में जमीन-आसमान का अंतर है।

आयाम आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
उद्देश्य दर्द को अस्थायी रूप से कम या सुन्न करना मूल कारण को संतुलित कर स्थायी स्वास्थ्य स्थापित करना
कार्यप्रणाली पेनकिलर्स व मसल रिलैक्सेंट से दर्द संकेतों को दबाना घी, अभ्यंग थेरेपी व जड़ी-बूटियों से गहन स्निग्धता व पोषण प्रदान करना
दृष्टिकोण लक्षण-केंद्रित; आंतरिक खुश्की व गैस की अनदेखी समग्र दृष्टिकोण; वात दोष को शांत कर जड़ों से उपचार
प्रभाव की प्रकृति त्वरित किंतु अस्थायी राहत; दवा बंद करते ही दर्द पुनः उभरता है क्रमिक किंतु गहरा प्रभाव; शरीर को भीतर से पुनर्निर्मित करता है
प्रभाव शरीर पर इम्युनिटी में कमी और दीर्घकालिक निर्भरता की संभावना नसों व हड्डियों को मजबूती देकर प्राकृतिक संतुलन बहाल करना
दीर्घकालिक परिणाम बार-बार दर्द की पुनरावृत्ति स्थायी आराम, लचीलापन और प्राकृतिक शक्ति की पुनर्स्थापना

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

शरीर के दर्द को हमेशा थकावट या गलत पॉश्चर का बहाना मानकर टालना नहीं चाहिए। शरीर के कुछ बहुत ही खतरनाक संकेतों को तुरंत पहचानना बहुत ज़रूरी है।

  • आपके हाथ-पैर अचानक सुन्न होने लगें और आपको चलने या सामान उठाने में दिक्कत हो।
  • दर्द के साथ-साथ आपके शरीर का वजन अचानक तेजी से गिरने लगे और बुखार बना रहे।
  • आपको टॉयलेट जाने का एहसास होना बंद हो जाए या उस पर नियंत्रण खत्म हो जाए।
  • दर्द इतना भयंकर हो कि रात की नींद पूरी तरह हराम हो जाए और दवाइयाँ भी काम न करें।
  • कोई भी सामान्य काम करने में आपको बहुत ज़्यादा शारीरिक कमज़ोरी और भयंकर थकान महसूस हो।

निष्कर्ष

पूरे शरीर के भयंकर दर्द और जकड़न के साथ जीना बहुत ही दर्दनाक और घुटन भरा अनुभव है। ऐसा लगता है जैसे आपके शरीर पर एक बहुत बड़ा बोझ रख दिया गया है और आप अपनी ही जिंदगी में कैद हो गए हैं। लेकिन बार-बार पेनकिलर्स खाना या हमेशा दर्द को सहने की आदत डालना कोई स्थायी समाधान बिल्कुल नहीं है। आपका शरीर आपसे चीख कर कह रहा है कि नसों और हड्डियों में वात बहुत ज़्यादा बढ़ गया है और गैस पेट से नसों को दबा रही है। अगर आप सिर्फ दर्द को सुन्न करते रहेंगे, तो माँसपेशियाँ पूरी तरह सूख जाएँगी और नसें हमेशा के लिए डैमेज हो जाएँगी। आयुर्वेद और खासकर 'अभ्यंग' को अपनाकर आप अपनी नसों को प्राकृतिक रूप से ठंडा और चिकनाई युक्त कर सकते हैं। अपनी पाचन अग्नि को सुधारें और वात को शांत करें। जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें और हमेशा के लिए पेनकिलर के डर को अलविदा कहकर आजादी से जिएं।

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