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अभ्यंग थेरेपी: पूरे शरीर के दर्द को धीरे-धीरे खत्म कैसे करती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आप सुबह उठते हैं और बिस्तर से नीचे पैर रखते ही आपके पूरे शरीर में एक भयंकर दर्द और भारीपन महसूस होता है, जिससे आप सीधे खड़े भी नहीं हो पाते हैं। आप पिछले कई सालों से पूरे शरीर के दर्द और थकावट को झेल रहे हैं और हर तरह के दर्द निवारक मलहम, महँगे पेनकिलर या स्प्रे का इस्तेमाल कर चुके हैं। शुरुआत में इन चीजों ने आराम ज़रूर दिया था, लेकिन अब वे भी बेअसर हो गई हैं और आपका शरीर अंदर से पूरी तरह थका हुआ और कमज़ोर महसूस होता है। जब पूरे शरीर का दर्द बहुत पुराना हो जाता है, तो डॉक्टर कह देते हैं कि अब आपको फाइब्रोमायल्जिया या नसों की कमज़ोरी हो गई है और बस हमेशा गोलियाँ खाते हुए जीने की आदत डाल लें। 

लेकिन यह आपके शरीर के दर्द की पूरी सच्चाई बिल्कुल नहीं है; शरीर को सिर्फ ऊपर से सुन्न कर देना कोई पक्का इलाज नहीं है। आपका शरीर और खासकर आपकी नसें अंदर से वात और भयंकर खुश्की से भर चुकी हैं। जब आप अपनी इस बिगड़ी हुई जीवनशैली को ठीक करते हैं और अपने पेट की गहराई से सफाई करते हैं, तो आप अपनी एंग्ज़ायटी को मैनेज कर सकते हैं और ठीक वैसे ही इस पुराने दर्द को हमेशा के लिए जड़ से खत्म कर सकते हैं जैसे पुराने से पुराने माइग्रेन से राहत पाई जा सकती है।

अभ्यंग थेरेपी और पूरे शरीर का दर्द आखिर क्या है?

पूरे शरीर का लगातार दर्द सिर्फ थकान का नतीजा नहीं है। यह आपके शरीर की नसों और माँसपेशियों में प्राकृतिक चिकनाई के पूरी तरह से सूख जाने और वात के भड़कने का सीधा संकेत है, और अभ्यंग थेरेपी इस सूखेपन को जड़ से दूर करने की एक बहुत ही चमत्कारी आयुर्वेदिक प्रक्रिया है।

  • गहरी मालिश और पोषण: इसमें हल्के गर्म औषधीय तेल से पूरे शरीर की एक खास दिशा में गहरी मालिश की जाती है, जो सीधे वात के मुख्य स्थान यानी त्वचा और नसों पर जाकर काम करता है।
  • टॉक्सिन्स को पिघलाना: यह औषधीय तेल अंदर से माँसपेशियों, नसों और सूखी हुई हड्डियों को गहराई तक तर कर देता है और जमे हुए टॉक्सिन्स को पिघलाकर पसीने के रास्ते बाहर निकालता है।

शरीर का यह दर्द कितने प्रकार का हो सकता है?

हर इंसान के शरीर में दर्द एक जैसा नहीं होता है। आपके शरीर की अंदरूनी स्थिति, काम के तनाव और आपके पेट की खराबी के हिसाब से पूरा शरीर अलग-अलग तरीके से डैमेज होता है।

  • वातजनित दर्द: यह सर्दियों में या ठंडी हवा लगने से बढ़ता है। इसमें पूरे शरीर में सुई चुभने जैसा दर्द और भयंकर रूखापन रहता है।
  • मस्कुलर स्ट्रेस और फाइब्रोमायल्जिया: यह लगातार तनाव और गलत तरीके से बैठने से होता है, जिससे शरीर की हर माँसपेशी में भयंकर जकड़न और मीठा-मीठा दर्द रहता है।
  • क्रोनिक फटीग सिंड्रोम: इसमें दर्द के साथ-साथ इतनी थकावट होती है कि इंसान का बिस्तर से उठने का भी मन नहीं करता।
  • आमवात जनित दर्द: खराब हाजमे के कारण पेट की गैस और टॉक्सिन्स खून में मिलकर पूरे शरीर के जोड़ों और माँसपेशियों में जाकर जम जाते हैं।

इसके लक्षण और संकेत कैसे पहचानें?

आपका शरीर आपको बहुत पहले से चेतावनी देने लगता है कि आपकी नसों की ग्रीस अंदर से खत्म हो रही है। इन दर्दनाक संकेतों को समय रहते पहचानना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है ताकि समय पर बचाव किया जा सके।

  • सुबह बिस्तर से उठते समय पूरे शरीर में ऐसी भयंकर जकड़न होना कि सीधा खड़ा होना मुश्किल हो जाए।
  • शरीर के किसी भी हिस्से को हल्का सा दबाने पर ही अंदर से एक तेज दर्द की टीस उठना।
  • नींद पूरी होने के बाद भी सुबह उठने पर भयंकर थकावट और शरीर में भारीपन महसूस होना।
  • पैरों या हाथों की उँगलियों में अजीब सी सुन्नता, झनझनाहट या चींटियाँ चलने जैसा महसूस होना।
  • लगातार रहने वाला सिरदर्द और कंधों में एक ऐसा भारीपन जैसे कोई बड़ा बोझ रखा हो।

शरीर में दर्द बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

आपकी माँसपेशियाँ रातों-रात कमज़ोर नहीं होती हैं। इसके पीछे कुछ बहुत ही गहरी वजहें हैं जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं और सिर्फ दर्द की गोलियाँ खाते रहते हैं।

  • वात की भयंकर खुश्की: जब शरीर में वात यानी हवा बढ़ती है, तो वह नसों और हड्डियों के बीच की प्राकृतिक चिकनाई को पूरी तरह सुखा देती है।
  • कब्ज और कमज़ोर पाचन: जब आपकी पाचन अग्नि ठंडी पड़ जाती है, तो पेट में भयंकर कब्ज और गैस बनती है जो सीधे पूरे शरीर की नसों पर भारी दबाव डालती है।
  • लगातार शारीरिक और मानसिक तनाव: घंटों तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहने और स्ट्रेस लेने से नसों पर उनके सहने की क्षमता से कई गुना ज़्यादा दबाव पड़ता है।
  • नींद की कमी: लगातार काम की थकान और नींद की कमी शरीर की माँसपेशियों को रात में खुद को रिपेयर नहीं करने देती।

इसे नज़रअंदाज़ करने पर क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

अगर आप अब भी यह मानकर बैठे हैं कि यह तो बस आम थकावट है और पेनकिलर से काम चल जाएगा, तो आप अनजाने में अपने शरीर को बहुत बड़े खतरे में डाल रहे हैं।

  • पूरी तरह से मोहताज होना: दर्द इतना भयंकर हो जाता है कि इंसान का बिस्तर से उठना या खुद करवट बदलना भी नामुमकिन हो जाता है।
  • माँसपेशियों का सूखना: लगातार खून का दौरा कम होने और वात बढ़ने से शरीर की माँसपेशियाँ अंदर से सूख कर सिकुड़ने लगती हैं।
  • स्थायी नर्व डैमेज: लगातार दबाव और रूखेपन के कारण स्पाइनल कॉर्ड की नसें हमेशा के लिए डैमेज हो सकती हैं।
  • पेनकिलर के भयंकर साइड इफेक्ट्स: दर्द को दबाने के लिए रोज़ भारी गोलियाँ खाने से आपका लिवर और किडनी हमेशा के लिए बर्बाद हो सकते हैं।

इसका निदान कैसे किया जाता है?

आधुनिक विज्ञान यह जानने के लिए कि आपके शरीर में दर्द क्यों नहीं जा रहा है, कई तरह के ब्लड और मशीनी टेस्ट करता है ताकि सही स्थिति का पता चल सके।

  • ईएमजी (EMG): यह टेस्ट यह जांचना सुनिश्चित करता है कि आपकी नसें माँसपेशियों को सही से सिग्नल भेज पा रही हैं या नहीं।
  • सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP): शरीर और माँसपेशियों के अंदर चल रही भयंकर सूजन को मापने के लिए।
  • विटामिन बी12 और डी3 टेस्ट: नसों की कमज़ोरी और हड्डियों के खोखलेपन को गहराई से देखने के लिए किया जाता है।
  • फिजिकल जांच: डॉक्टर आपके हाथ-पैरों को उठाकर और टेंडर पॉइंट्स को दबाकर देखते हैं कि दर्द कहां से ट्रिगर हो रहा है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद पूरे शरीर के दर्द को सिर्फ एक लोकल समस्या बिल्कुल नहीं मानता। यह आपके पेट और वात दोष से गहराई से जुड़ी हुई एक बहुत ही गंभीर अंदरूनी बीमारी है, जिसे अक्सर 'सर्वांग वात' कहा जाता है।

  • वात का भयंकर प्रकोप: शरीर में जब वात बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो वह नसों और माँसपेशियों के बीच की चिकनाई को पूरी तरह सुखा देता है।
  • आम का जमाव: खराब हाजमे के कारण पेट में बना विषैला आम रक्त के जरिए सीधे माँसपेशियों तक पहुंचता है और वहां नसों को ब्लॉक कर देता है।
  • रस और मांस धातु की कमज़ोरी: जब सही पोषण शरीर के अंगों तक नहीं पहुंचता, तो शरीर सूखने लगता है। आयुर्वेद इसी वात और गंदगी को निकालकर जड़ से उपचार करता है।

शरीर के दर्द के जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें हड्डियों और दबी हुई नसों को फिर से नया करने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं, जो बिना कोई नुकसान पहुंचाए अपना काम करती हैं।

  • अश्वगंधा: यह शरीर की कमज़ोर माँसपेशियों और लिगामेंट्स को ताकत देता है, ताकि हड्डियों पर सीधा दबाव न पड़े और तनाव कम हो।
  • बला: यह आयुर्वेद में वात रोगों और नसों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए सबसे शक्तिशाली टॉनिक मानी जाती है।
  • निर्गुंडी: यह वात को खत्म करने वाली सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है। इसके पत्तों का अर्क भयंकर जकड़न को तुरंत पिघला देता है।
  • रास्ना: यह जोड़ों और माँसपेशियों के दर्द, सूजन और भारीपन को खींच लेने में सबसे ज़्यादा कारगर औषधि है।

अभ्यंग और अन्य आयुर्वेदिक थेरेपी कैसे काम करती है?

जब खाने वाली दवाइयाँ सीधे सूखी हुई हड्डियों और नसों तक नहीं पहुंच पाती हैं, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी आपके शरीर के अंदर घुसकर जादू सा असर दिखाती है।

  • अभ्यंग: यह पूरे शरीर की एक बहुत ही खास और लयबद्ध मालिश है। औषधीय गर्म तेल से की जाने वाली यह मालिश नसों को गहरा आराम देती है और शरीर के सारे बंद रास्तों को खोल देती है।
  • स्वेदन: अभ्यंग के बाद औषधीय भाप दी जाती है। यह भाप रोमछिद्रों को खोलकर शरीर के अंदर छिपे हुए 'आम' और वात को पसीने के जरिए बाहर निकाल फेंकती है।
  • बस्ती कर्म: यह सबसे असरदार थेरेपी है। इसमें गुदा मार्ग से खास औषधीय तेल अंदर डाला जाता है, जो सीधे वात के घर में जाकर पूरे शरीर की नसों को पोषण देता है।

हड्डियों और वात संतुलन के लिए डाइट प्लान क्या हो?

आप जो खाते हैं, वही आपके जोड़ों और नसों की प्राकृतिक चिकनाई तय करता है। वात को शांत करने और नसों को ताकत देने के लिए एक सही और सुपाच्य डाइट का पालन करना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है।

श्रेणी क्या अपनाएँ (अनुशंसित) किनसे परहेज़ करें (वर्जित)
सही गद्दा और तकिया फर्म (Firm) गद्दे का उपयोग करें ताकि रीढ़ का सही अलाइनमेंट बना रहे बहुत ज़्यादा मुलायम या धँसने वाला गद्दा
सोने का पोस्चर पीठ के बल सोते समय घुटनों के नीचे तकिया रखें; करवट में सोते समय घुटनों के बीच तकिया रखें बिना सपोर्ट के गलत पोस्चर में सोना
हल्दी वाला दूध (Golden Milk) सोने से पहले हल्दी और घी के साथ हल्का गर्म दूध पिएं ठंडा दूध या ऐसे पेय जो सूजन बढ़ाएं
हल्का और जल्दी डिनर हल्का भोजन करें और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खाएं देर रात भारी और मुश्किल से पचने वाला खाना
गर्म सिकाई सोने से पहले हॉट वॉटर बैग से सिकाई करें, जिससे जकड़न और दर्द कम हो दर्द के बावजूद बिना किसी राहत उपाय के सो जाना

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद कोई ऐसा जादू का इंजेक्शन नहीं है जो एक मिनट में दर्द गायब कर दे। घिसी हुई हड्डियों और दबी हुई नसों को दोबारा प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: शरीर की भयंकर जकड़न और दर्द में आपको बहुत आराम महसूस होगा। पेट साफ होने लगेगा और गैस बनने कम हो जाएगी।
  • 1 से 3 महीने तक: नसों की सूजन कम होगी और शरीर में जाने वाला भारीपन काफ़ी हद तक ठीक हो जाएगा। आपकी नींद बेहतर होगी।
  • 3 से 6 महीने तक: हड्डियाँ और माँसपेशियाँ अंदर से पूरी तरह ताकतवर बन जाती हैं। आप बिना दर्द के अपना काम कर सकेंगे और दर्द हमेशा के लिए छूट जाएगा।

आप किन परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं?

अगर आप पूरी ईमानदारी और अनुशासन से हमारे आयुर्वेदिक इलाज और वात-शामक डाइट को फॉलो करते हैं, तो आप अपने शरीर में बहुत ही शानदार और स्थायी बदलाव महसूस करेंगे।

  • पूरे शरीर से उठने वाले उस भयंकर दर्द और जकड़न से हमेशा के लिए पक्का छुटकारा।
  • सुबह उठने पर होने वाली थकान और भारीपन का पूरी तरह खत्म होना।
  • शरीर को बिना किसी जकड़न और दर्द के मोड़ने-झुकाने में पूरी आजादी और लचीलापन।
  • बिना किसी पेनकिलर या दर्दनाक स्टेरॉयड के एक तनाव से राहत भरा बिल्कुल सामान्य जीवन जीना।
  • नसों की कमज़ोरी और सुन्नपन से हमेशा के लिए आजादी मिलना।

मरीज़ों के अनुभव

पिछले 2–3 वर्षों से मैं पीठ दर्द की समस्या से परेशान हूँ। मैंने कई डॉक्टरों से परामर्श लिया और उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कराए बिना इसका इलाज संभव नहीं है। फिर मैंने जीवा क्लिनिक में जाकर उपचार और पंचकर्म थेरेपी शुरू की। अब मैं पूरी तरह ठीक हूँ। मेरी समस्या से राहत दिलाने के लिए मैं जीवा के डॉक्टरों का धन्यवाद करती हूँ।

राजेश देवी

दिल्ली

आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आप अपने शरीर के साथ कैसा बर्ताव कर रहे हैं। भारी पेनकिलर खाने और आयुर्वेद को अपनाने में जमीन-आसमान का अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य पेनकिलर्स या मसल रिलैक्सेंट से दर्द को जल्दी दबाना ‘वात दोष’ को संतुलित करके दर्द के मूल कारण को खत्म करना
दृष्टिकोण (Approach) सिम्प्टम-फोकस्ड (जहाँ दर्द है, वहीं इलाज) रूट-कॉज़ फोकस्ड (पूरे शरीर के असंतुलन को ठीक करना)
शरीर को देखने का नजरिया मांसपेशियों/जॉइंट की लोकल समस्या मानना शरीर को एक समग्र प्रणाली मानकर नस, अग्नि और दोष संतुलन देखना
डाइट की भूमिका सीमित; सामान्य सलाह (कम ऑयल, हेल्दी फूड) वात-शामक डाइट (गर्म, स्निग्ध, सुपाच्य भोजन) को उपचार का मुख्य आधार
जीवनशैली (Lifestyle) रेस्ट या फिजियोथेरेपी की सलाह दिनचर्या, अभ्यंग (ऑयल मसाज), योग और सही पोस्चर पर फोकस
उपचार के तरीके पेनकिलर्स, मसल रिलैक्सेंट, इंजेक्शन या सर्जरी पंचकर्म, हर्बल दवाइयाँ, तेल मालिश (अभ्यंग), स्वेदन
तुरंत राहत जल्दी राहत मिलती है धीरे-धीरे लेकिन स्थिर सुधार
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ते ही दर्द लौट सकता है; साइड इफेक्ट्स संभव अंदरूनी मज़बूती देकर दर्द की पुनरावृत्ति को कम करना
साइड इफेक्ट्स लंबे समय तक दवाइयों से किडनी/लिवर पर असर संभव सामान्यतः प्राकृतिक और कम साइड इफेक्ट (सही मार्गदर्शन में)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

शरीर के दर्द को हमेशा थकावट या गलत पॉश्चर का बहाना मानकर टालना नहीं चाहिए। शरीर के कुछ बहुत ही खतरनाक संकेतों को तुरंत पहचानना बहुत ज़रूरी है।

  • आपके हाथ-पैर अचानक सुन्न होने लगें और आपको चलने या सामान उठाने में दिक्कत हो।
  • दर्द के साथ-साथ आपके शरीर का वजन अचानक तेजी से गिरने लगा और बुखार बना रहा है।
  • आपको टॉयलेट जाने का एहसास होना बंद हो जाए या उस पर नियंत्रण खत्म हो जाए।
  • दर्द इतना भयंकर हो कि रात की नींद पूरी तरह हराम हो जाए और दवाइयाँ भी काम न करें।
  • कोई भी सामान्य काम करने में आपको बहुत ज़्यादा शारीरिक कमज़ोरी और भयंकर थकान महसूस हो।

निष्कर्ष

पूरे शरीर के भयंकर दर्द और जकड़न के साथ जीना बहुत ही दर्दनाक और घुटन भरा अनुभव है। ऐसा लगता है जैसे आपके शरीर पर एक बहुत बड़ा बोझ रख दिया गया है और आप अपनी ही जिंदगी में कैद हो गए हैं। लेकिन बार-बार पेनकिलर्स खाना या हमेशा दर्द को सहने की आदत डालना कोई स्थायी समाधान बिल्कुल नहीं है। आपका शरीर आपसे चीख कर कह रहा है कि नसों और हड्डियों में वात बहुत ज़्यादा बढ़ गया है और गैस पेट से नसों को दबा रही है। अगर आप सिर्फ दर्द को सुन्न करते रहेंगे, तो माँसपेशियाँ पूरी तरह सूख जाएँगी और नसें हमेशा के लिए डैमेज हो जाएँगी। आयुर्वेद और खासकर 'अभ्यंग' को अपनाकर आप अपनी नसों को प्राकृतिक रूप से ठंडा और चिकनाई युक्त कर सकते हैं। अपनी पाचन अग्नि को सुधारें और वात को शांत करें। जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें और हमेशा के लिए पेनकिलर के डर को अलविदा कहकर आजादी से जिएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हां, बिल्कुल। अभ्यंग में इस्तेमाल होने वाला औषधीय गर्म तेल वात दोष को गहराई से खत्म करता है और सूखी हुई माँसपेशियों व नसों तक सीधा पोषण पहुंचाता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक चिकनाई दोबारा बनने लगती है और दर्द जड़ से खत्म होता है।

बिल्कुल। आयुर्वेद के अनुसार जब खराब हाजमे के कारण पेट में गैस और कब्ज बनती है, तो वह बढ़ा हुआ वात नसों पर भारी दबाव डालता है जिससे भयंकर जकड़न और दर्द ट्रिगर हो जाता है।

रात भर नसों और माँसपेशियों में ब्लड सर्कुलेशन कम रहने और वात या 'आम' जमने के कारण सुबह भयंकर जकड़न होती है। सुबह उठकर थोड़ा चलने के बाद जब गर्मी बढ़ती है, तब यह जकड़न धीरे-धीरे खुलती है।

बिल्कुल नहीं। यह एक बहुत ही आरामदायक और सुकून देने वाली प्रक्रिया है। इसमें हल्का गर्म औषधीय तेल पूरे शरीर पर लगाकर एक लयबद्ध तरीके से मालिश की जाती है, जो दर्द और जकड़न को तुरंत कम करता है।

हां। बहुत ज़्यादा मुलायम या बहुत सख्त गद्दे पर सोने से रात भर रीढ़ की हड्डी का पॉश्चर गलत रहता है। इससे सुबह उठने पर भयंकर जकड़न और पूरे शरीर में दर्द महसूस होता है।

अभ्यंग के बाद स्वेदन थेरेपी से शरीर के रोमछिद्र खुल जाते हैं और तेल गहराई तक समा जाता है। यह भाप नसों की जकड़न को मोम की तरह पिघला देती है और टॉक्सिन्स को पसीने से बाहर निकालती है।

सौ प्रतिशत। जब आप स्ट्रेस लेते हैं, तो अनजाने में आपके शरीर की माँसपेशियाँ सिकुड़ जाती हैं और स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। यह तनाव सीधे तौर पर मस्कुलर स्ट्रेस और भयंकर दर्द का रूप ले लेता है।

आपको फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, बासी खाना, और भारी गैस बनाने वाली चीजें जैसे राजमा और छोले बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। ये चीजें शरीर में वात बढ़ाती हैं और नसों को सुखा देती हैं।

जकड़न और माँसपेशियों के दर्द में तो कुछ ही हफ्तों में भारी आराम मिल जाता है। लेकिन सूखी हुई हड्डियों और दबी हुई नसों को अंदर से पूरी तरह रिपेयर करने में तीन से छह महीने का समय लग सकता है।

नहीं। आपको एकदम से दर्द निवारक दवाइयाँ नहीं छोड़ना चाहिए। आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे शरीर को अंदर से मजबूत बनाया जाता है, जिसके बाद आपकी पेनकिलर्स अपने आप ही पूरी तरह छूट जाती हैं।

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