Diseases Search
Close Button
 
 

क्या बाल झड़ने का आयुर्वेदिक इलाज स्थायी समाधान दे सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मिनोक्सिडिल बायोटिन सप्लीमेंट्स फिनास्टेराइड और केमिकल वाले महंगे हेयर सीरम का इस्तेमाल बालों के झड़ने, गंजेपन और बालों के पतले होने की समस्या में काफी आम है। ये दवाएं और लोशन सिर की त्वचा में रक्त संचार को कुछ समय के लिए बढ़ा देते हैं या बालों को गिराने वाले हार्मोन को कृत्रिम रूप से रोक देते हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि बाल झड़ने बंद हो गए हैं और वह पूरी तरह ठीक है। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी तब आती है जब मरीज़ इन लोशन या गोलियों को लगाना बंद करता है कुछ ही हफ्तों के भीतर नए उगे हुए बाल भी तेज़ी से झड़ने लगते हैं और गंजापन पहले से भी ज़्यादा भयंकर रूप में वापस आ जाता है।

अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि क्या कोई ऐसा इलाज है जो बालों का झड़ना हमेशा के लिए रोक दे? इसके पीछे का विज्ञान बहुत सीधा है बाहरी सीरम या लोशन आपके बालों की जड़ों को ऊपर से कृत्रिम पोषण दे सकते हैं, लेकिन वे शरीर के अंदर चल रहे हार्मोनल असंतुलन, पोषण की कमी और दूषित रक्त को ठीक नहीं कर सकते। दवाओं पर बालों की यह निर्भरता, रोमछिद्रों का अंदरूनी कमज़ोर होना और आयुर्वेद के अनुसार शरीर में बढ़ा हुआ 'पित्त दोष' व 'रस धातु' की कमज़ोरी इसका सबसे बड़ा कारण हैं। इस बात को समझना बहुत ज़रूरी है कि  स्थायी समाधान केवल तभी संभव है जब बीमारी की जड़ पर काम किया जाए और शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलित किया जाए।

बालों का झड़ना Hair Loss क्या है?

बालों का गिरना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है; दिन भर में 50 से 100 बाल गिरना सामान्य माना जाता है क्योंकि उनकी जगह नए बाल ले लेते हैं। लेकिन जब बाल झड़ने की रफ्तार उनके उगने की रफ्तार से बहुत ज़्यादा हो जाए, तो सिर पर बाल पतले होने लगते हैं और स्कैल्प सिर की त्वचा साफ दिखाई देने लगती है। बालों की जड़ें हमारे शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य का आईना होती हैं। जब हमारा पाचन तंत्र, लिवर और अंतःस्रावी तंत्र गड़बड़ा जाता है, तो बालों की जड़ों को पोषण मिलना बंद हो जाता है, जिससे बाल कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं। बाहरी शैंपू या तेल इस अंदरूनी तूफान को शांत नहीं कर सकते।

बाल झड़ने की बीमारियां मुख्य रूप से कितने प्रकार की होती हैं?

आधुनिक चिकित्सा में बालों के झड़ने से जुड़ी मुख्य रूप से ये स्थितियां देखी जाती हैं

  • एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया  इसे 'मेल या फीमेल पैटर्न बाल्डनेस' कहते हैं। यह मुख्य रूप से आनुवंशिक और पुरुष हार्मोन के बढ़ने के कारण होता है। इसमें माथे के बाल पीछे खिसकने लगते हैं।
  • टेलोजेन एफ्लुवियम  भारी मानसिक तनाव, किसी लंबी बीमारी जैसे टाइफाइड खराब डाइट या गर्भावस्था के बाद अचानक गुच्छों में बाल झड़ने लगना।
  • एलोपेसिया एरीटा  यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें इम्यून सिस्टम बालों की जड़ों पर हमला कर देता है और सिर या दाढ़ी पर गोल सिक्कों के आकार में बाल उड़ जाते हैं।
  • ट्रैक्शन एलोपेसिया  बालों को बहुत कसकर बांधने या बहुत ज़्यादा केमिकल ट्रीटमेंट कराने के कारण बालों की जड़ों का खिंचकर टूट जाना।

बाल झड़ने के मुख्य लक्षण और संकेत

जब बाल शरीर की अंदरूनी  खराबी या हार्मोन्स के कारण झड़ते हैं, तो शरीर कुछ  खास संकेत देता है

  • गुच्छों में बाल टूटना सुबह उठने पर तकिये पर, नहाते समय नाली में या कंघी करते समय बालों का भारी मात्रा में गिरना।
  • मांग का चौड़ा होना महिलाओं में सिर के बीच के हिस्से से बालों का पतला होना और स्कैल्प का दिखना।
  • नाखूनों का कमज़ोर होना बालों के साथ-साथ नाखूनों का भी जल्दी टूटना और त्वचा का रूखा होना यह पोषण की कमी का संकेत है।
  • स्कैल्प में दर्द या डैंड्रफ बालों की जड़ों में हल्का दर्द महसूस होना या बहुत ज़्यादा रूसी Dandruff और खुजली रहना।
  • दवा छोड़ते ही बालों का गिरना मिनोक्सिडिल या हेयर सीरम बंद करते ही कुछ ही दिनों के भीतर बालों का तेज़ी से झड़ना शुरू हो जाना।

बाल झड़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

बालों के लगातार झड़ने के पीछे सिर्फ़ बाहरी प्रदूषण नहीं, बल्कि कई अंदरूनी और जीवनशैली से जुड़े कारण ज़िम्मेदार हैं

  • हार्मोनल असंतुलन पीसीओडी PCOD थायरॉइड या पुरुष हार्मोन का बढ़ना बालों की जड़ों को सीधा कमज़ोर करता है।
  • पित्त दोष का भड़कना आयुर्वेद के अनुसार भारी तनाव, क्रोध और बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना शरीर की गर्मी बढ़ा देता है, जो बालों की जड़ों को सुखाकर उन्हें गिरा देता है।
  • पोषण की कमी कमज़ोर पाचन के कारण शरीर को आयरन, कैल्शियम और ज़रूरी विटामिन्स नहीं मिल पाते।
  • केमिकल और तनाव तेज़ शैंपू का इस्तेमाल, भारी चिंता और नींद की कमी बालों को रूखा और बेजान बना देती है।

बालों के लगातार झड़ने के जोखिम और जटिलताएँ

बालों के लगातार झड़ने को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ केमिकल वाले उत्पादों के सहारे छोड़ दिया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है

  • स्थायी गंजापन  बालों की जड़ें जब सालों तक बिना सही पोषण के रहती हैं, तो वे पूरी तरह सिकुड़कर मर जाती हैं। इसके बाद वहाँ दोबारा बाल उगाना लगभग असंभव हो जाता है।
  • मानसिक अवसाद  कम उम्र में तेज़ी से बाल झड़ने के कारण इंसान का आत्मविश्वास पूरी तरह गिर जाता है, जिससे वह गहरी चिंता और हीन भावना का शिकार हो जाता है।
  • स्कैल्प का इन्फेक्शन तेज़ केमिकल वाले हेयर लोशन के ज़्यादा इस्तेमाल से सिर की त्वचा की प्राकृतिक नमी  खत्म हो जाती है, जिससे वहाँ भयंकर फंगल इन्फेक्शन और ज़िद्दी डैंड्रफ का  खतरा काफी बढ़ जाता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण बाल झड़ने का जड़ कारण क्या है?

आयुर्वेद में बालों के झड़ने को 'खालित्य' और बालों के सफेद होने को 'पालित्य' कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, बाल हमारे शरीर की 'अस्थि धातु' का मल हैं। जब शरीर में जठराग्नि कमज़ोर होती है, तो खाया हुआ भोजन सही 'रस धातु' में नहीं बदल पाता। रस धातु के कमज़ोर होने से बालों को ताक़त मिलना बंद हो जाती है।

इसके अलावा, बालों का झड़ना मुख्य रूप से 'पित्त दोष' के भड़कने से जुड़ा है। बहुत ज़्यादा तनाव रात में जागने, ग़ुस्सा करने और ज़्यादा मसालेदार या जंक फूड खाने से शरीर की गर्मी बढ़ जाती है। यह बढ़ा हुआ पित्त जब वात के साथ मिलकर सिर की ओर जाता है, तो वह बालों की जड़ों को जला देता है, जिससे बाल जड़ से उखड़ जाते हैं। आयुर्वेदिक इलाज का मकसद इस बुझी हुई जठराग्नि को सुधारना, पित्त की गर्मी को शांत करना और रक्त को शुद्ध करना है, जो एक  स्थायी समाधान का आधार है।

बालों को जड़ से मज़बूत बनाने वाली महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में पित्त को शांत करने और बालों की जड़ों में नई जान फूंकने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं

  • भृंगराज  इसे 'केशराज' कहा जाता है। यह लिवर को ताक़त देता है, रक्त को शुद्ध करता है और बालों की जड़ों में रक्त संचार बढ़ाकर बालों को झड़ने से रोकता है।
  • आँवला  आँवला  विटामिन सी का भंडार है। यह शरीर की अत्यधिक गर्मी को तुरंत शांत करता है और बालों को उम्र से पहले सफेद होने से बचाता है।
  • अश्वगंधा  बालों के झड़ने का एक बहुत बड़ा कारण भयंकर तनाव  है। अश्वगंधा नसों की प्रणाली को शांत करती है और तनाव के कारण झड़ने वाले बालों को रोकती है।
  • शतावरी और ब्राह्मी ये जड़ी-बूटियाँ हार्मोन्स को प्राकृतिक रूप से संतुलित करती हैं और दिमाग़ को ठंडक देकर बालों की जड़ों को ताक़त देती हैं।

आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित पित्त और टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर बालों को  स्थायी समाधान देने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया।

  • नस्य Nasya आयुर्वेद में नाक को 'मस्तिष्क का दरवाज़ा' कहा गया है। नस्य में औषधीय तेल की बूँदें नाक में डाली जाती हैं। यह सीधे बालों की जड़ों और नसों के तंत्र को ताक़त देता है।
  • शिरोधारा Shirodhara तनाव, एंग्ज़ायटी और नींद की कमी दूर करने के लिए माथे पर औषधीय तेल या छाछ की लगातार धारा गिराई जाती है। यह दिमाग़ को शांत करता है और पित्त दोष को  खत्म करता है।
  • विरेचन Virechana शरीर में बढ़े हुए पित्त गर्मी को मल के ज़रिए बाहर निकालने की यह सबसे अच्छी प्रक्रिया है। इससे लिवर साफ होता है और बालों को शुद्ध  खून मिलने लगता है।

बालों के रोगी के लिए शुद्ध आहार

 स्थायी समाधान के लिए हमेशा हल्का, पोषण से भरपूर और पित्त को शांत करने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है

  1. क्या खाएँ?
  • करी पत्ता और ताज़ा आँवला  रोज़ सुबह खाली पेट आंवले का रस पिएं और भोजन में करी पत्ते Curry leaves का प्रयोग बढ़ाएं। ये आयरन और कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं।
  • बीज और मेवे Seeds & Nuts रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, अलसी और कद्दू के बीज खाएं। इनसे बालों को ज़रूरी ओमेगा-3 और बायोटिन मिलता है।
  • लौकी, तरोई और नारियल पानी ये चीज़ें शरीर को ठंडक देती हैं, पित्त को शांत करती हैं और बालों को हाइड्रेटेड रखती हैं।
  1. क्या न खाएँ?
  • अत्यधिक खट्टा और नमकीन बहुत ज़्यादा नमक, इमली, अचार और खट्टी चीज़ें पित्त को भड़काती हैं और बालों की जड़ों को कमज़ोर कर उन्हें सफेद व बेजान बना देती हैं।
  • जंक फूड और मैदा पैकेटबंद चीज़ें, बिस्किट और मैगी पेट में 'आम' गंदगी बनाते हैं, जिससे पोषण  खून तक नहीं पहुंच पाता।
  • कैफीन चाय-कॉफी ज़्यादा कॉफी या चाय पीने से शरीर में खुश्की वात और गर्मी पित्त दोनों बढ़ते हैं, जो बालों के लिए ज़हर के समान हैं।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में बाल झड़ने का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ की स्थिति के हिसाब से किया जाता है

  • बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक़्त कई बातों से तय होता है जैसे आप कितने सालों से मिनोक्सिडिल लगा रहे हैं, आपका थायरॉइड या पीसीओएस कितना गंभीर है, और आपकी जठराग्नि कितनी कमज़ोर है।
  • हल्की समस्या में सुधार अगर बाल झड़ना हाल ही में शुरू हुआ है तनाव या बुखार के बाद, तो आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों में ही बालों का गिरना रुक जाता है।
  • पुरानी बीमारी का समय अगर हार्मोनल असंतुलन सालों पुराना है और बाल बहुत ज़्यादा झड़ चुके हैं, तो जड़ को ताक़त मिलने और नए बालों की ग्रोथ शुरू होने में 3 से 6 महीने या उससे ज़्यादा समय लग सकता है।
  •  स्थायी परिणाम मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है और तनाव कम रखता है, तो शरीर का मेटाबॉलिज़्म सुधर जाता है। एक बार जड़ें मज़बूत हो जाएं, तो आयुर्वेदिक दवाएं धीरे-धीरे बंद की जा सकती हैं और आपको जीवन भर महंगे लोशन लगाने की मजबूरी नहीं रहती। यही आयुर्वेद का स्थायी समाधान है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मुझे कई सालों से बालों के झड़ने की गंभीर समस्या थी। शैंपू और तेलों से कोई फायदा नहीं हुआ। मैंने आयुर्वेद उपचार के बारे में सोचा, लेकिन मुझे इस पर पूरा भरोसा नहीं था। फिर एक दिन मैंने डॉ. चौहान का बालों की समस्याओं पर टीवी कार्यक्रम देखा और मुझे लगा कि आयुर्वेद वाकई फर्क ला सकता है, और सच में लाया! अब मुझे हर सुबह अपने तकिए पर बाल नहीं दिखते। जीवा का शुक्रिया।

सुनीता तंवर (फरीदाबाद)

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का तरीका कृत्रिम लोशन और गोलियों से लक्षणों को दबाने पर केंद्रित जड़ कारण दोष असंतुलन, पाचन, तनाव को ठीक करने पर केंद्रित
काम करने का आधार स्कैल्प में ब्लड फ्लो बढ़ाकर बाल उगाना पित्त-वात संतुलन, रस धातु पोषण और शरीर की आंतरिक शुद्धि
मूल कारण पर प्रभाव बीमारी की जड़ पित्त दोष, कमजोर पाचन को नहीं हटाता असली कारणों को सुधारकर अंदर से इलाज करता है
परिणाम की प्रकृति अस्थायी—दवा छोड़ते ही बाल फिर झड़ सकते हैं धीरे-धीरे लेकिन स्थायी और प्राकृतिक परिणाम
समय जल्दी असर दिख सकता है असर आने में थोड़ा समय लगता है
सुरक्षा लक्षण दबाने के कारण लंबे समय में निर्भरता संभव प्राकृतिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीका

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

बाल झड़ने की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि

  • सिर पर अचानक गोल सिक्कों के आकार में बाल गायब होने लगें Alopecia Areata।
  • बाल झड़ने के साथ-साथ स्कैल्प पर भयंकर लालिमा, खुजली या मवाद वाले दाने हो जाएं।
  • बालों के साथ-साथ भौंहों Eyebrows या पलकों के बाल भी गिरने लगें।
  • बाल झड़ने के साथ अचानक वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे और बहुत ज़्यादा थकान रहे।
  • घरेलू उपाय और तेल बदलने के महीनों बाद भी बालों का गिरना कम न हो रहा हो।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से महंगे सीरम लगाने के बाद भी बालों का लगातार झड़ना इस बात का साफ संकेत है कि आप समस्या की जड़ रूट कॉज़ पर काम नहीं कर रहे हैं। बालों का झड़ना मुख्य रूप से शरीर में पित्त दोष के भड़कने, जठराग्नि के कमज़ोर होने और रस व अस्थि धातु के दूषित होने से जुड़ा है। भारी मानसिक तनाव, जंक फूड और रात में जागने से शरीर की गर्मी बढ़ जाती है जो बालों की जड़ों को जला देती है। सिर्फ बाहरी केमिकल लगाने से  स्थायी समाधान कभी नहीं मिल सकता। आयुर्वेद में  स्थायी समाधान तभी मिलता है जब आप जठराग्नि को बढ़ाएं, पित्त को शांत करें और तनाव मुक्त रहें। इसमें मेवे और आँवला  खाना, भृंगराज व अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करना और सही दिनचर्या अपनाना शामिल है, जिससे बालों की जड़ें इतनी मज़बूत हो जाएं कि उन्हें बाहरी दवाओं की ज़रूरत ही न पड़े।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हां। आयुर्वेद सिर्फ लक्षणों को नहीं दबाता, बल्कि पाचन और हार्मोन्स को ठीक करता है। जब शरीर अंदर से संतुलित हो जाता है, तो बालों का झड़ना  स्थायी रूप से रुक जाता है और आपको जीवन भर दवाएं नहीं खानी पड़तीं।

अगर रोमछिद्र (Hair follicles) पूरी तरह मर कर चिकने हो चुके हैं, तो वहां बाल वापस आना असंभव है। लेकिन अगर रोमछिद्र जीवित हैं और बाल सिर्फ पतले हुए हैं, तो आयुर्वेद उन्हें दोबारा घना बना सकता है।

हां, अगर मिनोक्सिडिल छोड़ने के बाद आप सही आयुर्वेदिक इलाज लेते हैं जो आपके हार्मोन्स और रस धातु को ताक़त दे, तो बालों को वापस गिरने से रोका जा सकता है।

बिल्कुल। डैंड्रफ स्कैल्प के रोमछिद्रों को बंद कर देता है और फंगल इन्फेक्शन पैदा करता है, जिससे बालों की जड़ें कमज़ोर होकर टूटने लगती हैं।

रोज़ाना तेल लगाना ज़रूरी नहीं है, लेकिन हफ्ते में 2 बार भृंगराज या आँवला  युक्त औषधीय तेल से स्कैल्प की मालिश करने से वात शांत होता है और बालों को पोषण मिलता है।

हां, नींद की कमी और तनाव से शरीर में वात और पित्त दोनों भड़कते हैं, जो सीधा सिर की ओर जाकर बालों की जड़ों को सुखा देते हैं।

हां, आयुर्वेद स्पष्ट कहता है कि अत्यधिक नमक (लवण रस) खाने से शरीर में पित्त दोष बढ़ता है, जो समय से पहले बालों के झड़ने और सफेद होने का बड़ा कारण है।

हां, थायरॉइड में मेटाबॉलिज़्म धीमा होने से बालों को पोषण नहीं मिलता। आयुर्वेदिक औषधियों (जैसे अश्वगंधा) से थायरॉइड को संतुलित करने पर बाल वापस घने हो जाते हैं।

नहीं, अगर आप माइल्ड (हर्बल) शैंपू का इस्तेमाल करते हैं तो स्कैल्प साफ रहती है। लेकिन केमिकल वाले शैंपू रोज़ लगाने से स्कैल्प की प्राकृतिक नमी  खत्म होती है और बाल रूखे होकर टूटते हैं।

हां, पीसीओडी में बढ़ा हुआ पुरुष हार्मोन बाल गिराता है। शतावरी और कांचनार जैसी औषधियों से ओवरीज़ को ठीक करके इस बाल झड़ने को  स्थायी रूप से रोका जा सकता है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us