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Elderly care में hydration routine क्यों ज़रूरी है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हमारे घरों में एक बात देखने को मिलती है दादा-दादी या उम्रदराज माता-पिता खुद से पानी मांगकर बहुत कम पीते हैं। जब तक आप खुद जाकर उनके हाथ में पानी का गिलास न थमा दें, वे घंटों बिना पानी पिए निकाल देते हैं क्या आपको भी लगता है कि वे बस पानी पीना भूल जाते हैं? जी नहीं, असल वजह कुछ और ही है। दरअसल, जैसे-जैसे हमारी उम्र ढलती है, हमारे शरीर का वो सिस्टम कमज़ोर पड़ने लगता है जो हमें 'प्यास लगने का अहसास' कराता है। सीधे शब्दों में कहें तो, शरीर अंदर से पानी मांग रहा होता है, लेकिन उनका दिमाग उन्हें यह सिग्नल ही नहीं दे पाता कि गला सूख रहा है या प्यास लगी है।

बस इसी जगह पर ज़रूरत पड़ती है एक 'हाइड्रेशन रूटीन' (Hydration Routine) की यानी पानी पीने का एक ऐसा पक्का नियम जो उनकी आदत बन जाए। आइए इस बात को थोड़ा और गहराई से समझते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर पानी की अहमियत इतनी ज़्यादा क्यों बढ़ जाती है और कैसे हम छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर इसमें उनकी मदद कर सकते हैं।

बुज़ुर्गों में डिहाइड्रेशन पानी की कमी के छिपे हुए खतरे

जवान लोगों की तुलना में हमारे घर के बुज़ुर्गों पर पानी की कमी का असर बहुत तेज़ी से और खतरनाक तरीके से होता है। अगर वे दिनभर में सही मात्रा में लिक्विड नहीं ले रहे हैं, तो बात सिर्फ गला सूखने या प्यास लगने तक ही नहीं रुकती, बल्कि इसके नतीजे काफी गंभीर हो सकते हैं:

  • अचानक चक्कर आना और उलझन (Confusion): कई बार आपने ध्यान दिया होगा कि घर के बड़े अचानक से बहुत ज़्यादा थकान की शिकायत करते हैं, उन्हें चक्कर आने लगते हैं या वे बातों को लेकर कन्फ्यूज होने लगते हैं। हम अक्सर इसे 'बुढ़ापे का असर' मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि सच तो यह है कि इसके पीछे की असली वजह सिर्फ और सिर्फ शरीर में पानी की कमी होती है।
  • यूरिन इन्फेक्शन (UTI) का खतरा: पानी कम पीने का एक और बड़ा और दर्दनाक नुकसान है पेशाब में इन्फेक्शन होना। बुज़ुर्गों का शरीर वैसे ही कमज़ोर होता है, ऐसे में यह इन्फेक्शन उनके लिए बहुत तकलीफदेह और कई बार खतरनाक भी साबित हो सकता है।
  • दवाइयों का सही से काम न करना: इस उम्र में शुगर, ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारियों की ढेरों दवाइयां चलती हैं। इन हैवी दवाइयों को शरीर में अच्छे से घुलने और अपना काम करने के बाद किडनी के रास्ते शरीर से बाहर निकलने के लिए भरपूर पानी की ज़रूरत होती है। पानी कम हो, तो ये दवाइयां साइड इफेक्ट भी कर सकती हैं।
  • कब्ज़ और घुटनों का दर्द: पेट का ठीक से साफ न होना (कब्ज़) एक ऐसी परेशानी है जिससे लगभग हर बुज़ुर्ग जूझता है। इसकी सबसे बड़ी वजह भी पानी की कमी ही है जो उनके पाचन तंत्र को बिगाड़ देती है। और हां, उठते-बैठते वक्त जोड़ों में जो दर्द होता है ना, उसे कम करने के लिए घुटनों के बीच की चिकनाई बनाए रखना ज़रूरी है जो बिना हाइड्रेशन के बिल्कुल मुमकिन नहीं है।

एक आसान और असरदार 'Hydration Routine' कैसे बनाएं'?

चूंकि वे खुद से पानी नहीं मांगेंगे, इसलिए यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनके लिए एक ऐसा रूटीन बनाएं जो उनके लिए बोझ न बने। यहाँ कुछ व्यावहारिक तरीके दिए गए हैं जो वाकई काम करते हैं:

थोड़ा-थोड़ा लेकिन बार-बार बुज़ुर्गों को एक साथ पूरा गिलास पानी पीने के लिए मजबूर न करें; इससे उन्हें उल्टी जैसा महसूस हो सकता है या पेट भारी लग सकता है। इसके बजाय, उन्हें हर एक-दो घंटे में कुछ घूंट पानी पीने की आदत डालें।

सिर्फ पानी नहीं, विकल्प चुनें हर किसी को सादा पानी पीना पसंद नहीं होता। आप उनके रूटीन में वैरायटी ला सकते हैं:

  • सुबह: हल्का गुनगुना नींबू पानी या ग्रीन टी।
  • दोपहर: छाछ, लस्सी, नारियल पानी या ताज़े फलों का जूस।
  • शाम: सूप या दूध।
  • तरबूज, खीरा और संतरा जैसे पानी से भरपूर फल भी एक बेहतरीन विकल्प हैं।

पानी हमेशा उनकी पहुँच में हो उनके बिस्तर के पास, या जिस कुर्सी पर वे अपना ज़्यादातर समय बिताते हैं, वहां हमेशा पानी की एक साफ बोतल या जग रखें। जब पानी सामने दिखता है, तो उसे पीने की संभावना बढ़ जाती है।

अलार्म या रिमाइंडर आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम भी भूल जाते हैं ऐसे में अपने फोन में हर दो घंटे का एक छोटा सा अलार्म लगा लें। जब अलार्म बजे, तो आप खुद जाकर उन्हें प्यार से पानी दे आएं।

कैसे पहचानें कि बुज़ुर्ग के शरीर में पानी की कमी हो रही है?

कई बार पानी की कमी के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि हम उन्हें पहचान नहीं पाते। अगर आप अपने घर के बड़ों में नीचे दिए गए लक्षण देखते हैं, तो समझ जाइये कि उन्हें तुरंत पानी या लिक्विड की ज़रूरत है:

  • पेशाब का रंग गहरा होना: यह डिहाइड्रेशन का सबसे पहला और स्पष्ट संकेत है। अगर यूरिन का रंग गहरा पीला है, तो शरीर में पानी की भारी कमी है।
  • त्वचा का सूखापन और ढीलापन: उनकी त्वचा को हल्के से पिंच खींचकर करके देखें। अगर त्वचा तुरंत अपनी सामान्य स्थिति में वापस नहीं जाती, तो यह पानी की कमी को दर्शाता है।
  • अचानक भ्रम या चिड़चिड़ापन: बिना किसी वजह के अचानक थकावट महसूस होना, चक्कर आना या बातों को भूल जाना भी पानी की कमी के कारण हो सकता है।
  • मुंह और होंठों का सूखना: बार-बार होंठों पर जीभ फिराना या थूक का गाढ़ा होना।
  • बार-बार सिरदर्द की शिकायत: बिना किसी अन्य बीमारी के अक्सर सिर में भारीपन या दर्द रहना।

बदलते मौसम के साथ बदलें हाइड्रेशन का तरीका

अक्सर लोग सोचते हैं कि हाइड्रेशन की ज़रूरत सिर्फ गर्मियों में होती है, जबकि सर्दियों और बरसात में यह खतरा और बढ़ जाता है क्योंकि उस समय प्यास बिल्कुल नहीं लगती।

गर्मियों के दिनों में पसीने के जरिए शरीर से नमक और पानी दोनों निकल जाते हैं, इसलिए इस मौसम में सादे पानी के साथ-साथ ओआरएस ORS या नींबू-पानी देना ज़रूरी होता है। वहीं सर्दियों में, ठंडे पानी की जगह उन्हें हल्का गुनगुना पानी या हर्बल काढ़ा देना चाहिए, ताकि उनका शरीर अंदर से गर्म भी रहे और हाइड्रेटेड भी।

बुज़ुर्गों में पानी की कमी: आइए जानें आयुर्वेद क्या कहता है?

क्या आपने कभी सोचा है कि बुज़ुर्गों की इस समस्या पर हमारा आयुर्वेद क्या कहता है? हमारे पुराने आयुर्वेदिक ग्रंथों में शरीर के अंदर पानी का बैलेंस बनाए रखने के लिए बड़े ही काम के और आसान तरीके बताए गए हैं।

आयुर्वेद के नजरिए से देखें, तो बुढ़ापे का सीधा सा मतलब है शरीर में 'वात दोष' का बढ़ना। वात की तासीर ही सूखी और ठंडी होती है। बस यही वजह है कि बढ़ती उम्र के साथ त्वचा का रूखापन, कब्ज़ और घुटनों या जोड़ों का दर्द अचानक से बढ़ने लगता है। 

पानी पीने का सही तरीका

  • हमेशा बैठकर पानी पिएं: घर के बड़ों को हमेशा प्यार से टोकें कि वे खड़े होकर या जल्दबाजी में पानी न पिएं। तसल्ली से, बैठकर और घूंट-घूंट करके पानी पीने से शरीर उसे अच्छे से सोखता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ऐसा करने से उनके कमज़ोर जोड़ों पर कोई एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं पड़ता।
  • तांबे के बर्तन का फायदा: रात के वक्त एक तांबे के जग या बोतल में पानी भर दें और सुबह उठते ही उन्हें खाली पेट यही पानी पीने की आदत डालें। यह उनके पाचन तंत्र को एकदम सेट रखता है और शरीर की सारी गंदगी को बाहर निकालता है।

पानी ठंडा हो या गर्म? फ्रिज के पानी से करें तौबा!

  • हल्का गुनगुना पानी (उष्णोदक): आयुर्वेद मानता है कि उम्र के साथ हमारे खाना पचाने की ताकत (पाचन अग्नि) कमज़ोर हो जाती है। ऐसे में फ्रिज का चिल्ड पानी इस अग्नि को और भी बुझा देता है। इसलिए, उन्हें हमेशा नॉर्मल या हल्का गुनगुना पानी ही दें। इससे उनका वात दोष शांत रहता है।
  • मिट्टी के मटके का जादू: तेज गर्मियों के दिनों में तो फ्रिज के पानी की जगह मटके या सुराही का पानी ही सबसे बेस्ट है। यह नेचुरली ठंडा होता है और शरीर के pH लेवल को बिगड़ने नहीं देता।

अगर सादा पानी अच्छा न लगे तो बनाएं 'सिद्ध जल'

कई बार बुज़ुर्ग सादा पानी पीने में आनाकानी करते हैं। ऐसे में आयुर्वेद कुछ चुनिंदा जड़ी-बूटियों को पानी में उबालकर 'सिद्ध जल' बनाने की सलाह देता है। यह स्वाद भी बदलता है और बीमारियों से भी बचाता है:

  • सौंफ और मिश्री का पानी: एक लीटर पानी में एक चम्मच सौंफ उबालें। ठंडा होने पर इसमें धागे वाली मिश्री मिला दें। यह पानी पेट को ठंडक देता है, गैस-एसिडिटी भगाता है और सबसे अच्छी बात यह उनमें बार-बार पानी पीने की इच्छा जगाता है।
  • धनिया के बीजों का पानी: साबुत धनिए को पानी में अच्छे से उबालकर छान लें। यह जादुई पानी उनकी किडनी की सफाई (Detox) करता है और बुज़ुर्गों में होने वाले यूरिन इन्फेक्शन (UTI) के खतरे को बहुत कम कर देता है।
  • तुलसी और अदरक का पानी: सर्दियों के मौसम में 4-5 तुलसी के पत्ते और जरा सा अदरक पानी में उबालकर उन्हें गुनगुना ही पीने को दें। इससे शरीर में पानी की कमी भी नहीं होगी और वे मौसमी सर्दी-खांसी से भी बचे रहेंगे।

सिर्फ पानी ही नहीं, अंदरूनी नमी (स्निग्धता) भी है ज़रूरी

आयुर्वेद की एक बड़ी ही कमाल की बात यह है कि शरीर को सिर्फ बाहर से पानी नहीं चाहिए, बल्कि अंदर से भी चिकनाई या नमी चाहिए होती है, जिसे 'स्निग्धता' कहते हैं।

  • इसलिए, जब भी आप उन्हें खाना परोसें, तो उनकी दाल या रोटी पर थोड़ा सा शुद्ध देसी घी जरूर डालें। घी उनके शरीर की हर एक कोशिका (Cell) को अंदर से नमी देता है। इससे पानी की कमी से होने वाली कमज़ोरी और कब्ज़ की पुरानी शिकायत में गजब की राहत मिलती है।

बुज़ुर्गों के लिए दैनिक डाइट और हाइड्रेशन चार्ट

समय आहार / पेय पदार्थ What to Give हाइड्रेशन और आयुर्वेदिक महत्व Benefit
सुबह जल्दी

6:00 - 7:00 AM
तांबे के बर्तन का हल्का गुनगुना पानी 1 गिलास
या
सौंफ और मिश्री का पानी
खाली पेट पाचन तंत्र Metabolism को एक्टिव करता है।

कब्ज दूर करता है और वात दोष को शांत करता है।
नाश्ता

8:30 - 9:00 AM
हल्का और सुपाच्य नाश्ता जैसे- दलिया, ओट्स, पोहा या इडली
साथ में 1 कप हर्बल चाय या गुनगुना दूध
शरीर को सुबह की ऊर्जा मिलती है।

सूखे नाश्ते के साथ तरल पदार्थ Liquid जरूरी है।
मिड-मॉर्निंग

11:00 AM
ताजी छाछ भुने जीरे और काले नमक के साथ
या
डाब नारियल पानी या कोई रसीला फल जैसे संतरा, पपीता
सबसे महत्वपूर्ण समय: यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को तुरंत पूरा करता है और सुस्ती भगाता है।
दोपहर का खाना

1:00 - 1:30 PM
घी लगी चपाती / चावल

पतली मूंग दाल, मौसमी हरी सब्जी लौकी, तोरई

खीरे और टमाटर का बारीक कटा सलाद
सब्जियों के जरिए शरीर को प्राकृतिक रूप से पानी मिलता है।

घी शरीर में अंदरूनी नमी स्निग्धता बनाए रखता है।
दवाइयों के बाद

2:30 PM
आधा से एक गिलास सादा या मटके का पानी दोपहर की दवाइयों को शरीर में घुलने और किडनी को साफ करने में मदद करता है।
शाम का समय

4:30 - 5:00 PM
घर का बना गरम मिक्स वेजीटेबल या टमाटर का सूप
या
हल्के भुने मखाने के साथ गुनगुना नींबू-पानी
शाम की हल्की भूख भी मिटती है और शरीर को जरूरी विटामिंस व हाइड्रेशन मिलता है।
रात का खाना

7:30 - 8:00 PM
एकदम हल्का भोजन जैसे- मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया या कद्दू की सब्जी और रोटी रात का खाना पचने में आसान होना चाहिए ताकि नींद में खलल न पड़े। खिचड़ी पानी से भरपूर होती है।
सोने से पहले

9:30 PM
एक छोटा गिलास हल्दी वाला गुनगुना दूध हड्डियों के लिए कैल्शियम देता है, अच्छी नींद लाता है और रातभर शरीर को हाइड्रेटेड रखता है।

निष्कर्ष

बढ़ती उम्र में हमारे बुज़ुर्ग बिल्कुल बच्चों की तरह हो जाते हैं। जैसे छोटे बच्चे अपनी ज़रूरतें खुलकर नहीं बता पाते, ठीक वैसे ही उम्र के इस पड़ाव पर आकर हमारे माता-पिता या दादा-दादी भी अपने शरीर की ज़रूरतों को सही से समझ या बयां नहीं कर पाते हैं। शरीर में पानी की कमी Dehydration एक ऐसी ही छुपी हुई समस्या है, जो दिखने में बहुत सामान्य लगती है, लेकिन बुज़ुर्गों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अंदर ही अंदर गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

References

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC10255140/

https://yas.nic.in/sites/default/files/Fitness%20Protocols%20for%20Age%2018-65%20Years%20v1%20English.pdf

https://www.japi.org/article/japi-71-12-47

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/healthy-diet

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आमतौर पर उन्हें दिनभर में 6 से 8 गिलास, लगभग 1.5-2 लीटर तरल पदार्थ लेना चाहिए।

बिल्कुल नहीं। आप पानी के बदले छाछ, नारियल पानी, सूप, दूध और रसीले फल भी दे सकते हैं।

पेशाब का रंग गहरा पीला होना और अचानक से बहुत ज़्यादा कमज़ोरी या चक्कर आना।

नहीं, कैफीन वाली चीजों से बार-बार पेशाब आता है, जिससे शरीर में पानी और कम हो जाता है।

सर्दियों में ठंडा पानी पीने का मन नहीं करता, इसलिए उन्हें हल्का गुनगुना पानी या सूप दें।

रात को पानी कम दें, ताकि उन्हें बार-बार टॉयलेट न जाना पड़े और नींद खराब न हो।

जबरदस्ती करने के बजाय उन्हें नींबू-पानी, लस्सी या उनके पसंद का कोई जूस बनाकर दें।

रातभर तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह खाली पेट पीना पाचन के लिए सबसे बेस्ट है।

हाँ, दवा के साथ सिर्फ एक घूंट नहीं, बल्कि पूरा एक गिलास पानी पीना चाहिए ताकि दवा अच्छे से घुले।

ठंडा पानी पीने से बुज़ुर्गों का पाचन कमज़ोर होता है और जोड़ों का दर्द या कफ बढ़ सकता है।

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