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60+ पुरुषों में रात को बार -बार Toilet - Prostate की शुरुआत?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

60 की उम्र पार करते ही कई पुरुषों की रात की नींद एक अनचाही ड्यूटी में बदल जाती है। जब आपको हर एक या दो घंटे में पेशाब करने के लिए उठना पड़े और वॉशरूम जाने के बाद भी लगे कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है, तो यह केवल उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा नहीं है। यह आपके शरीर के निचले हिस्से में हो रहे एक बड़े बदलाव का संकेत है।

ज़्यादातर पुरुष इसे बुढ़ापे की आम कमज़ोरी या पानी ज़्यादा पीने का नतीजा मानकर सहते रहते हैं और अपनी रातों की नींद खराब करते हैं। लेकिन रात को बार-बार टॉयलेट भागने की यह मजबूरी आपके शरीर के अंदर बढ़ रही प्रोस्टेट (Prostate) ग्रंथि का एक खौफनाक अलार्म है, जिसे अनदेखा करने पर भविष्य में सर्जरी या कैथेटर (Catheter) की नौबत आ सकती है।

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में पेशाब की यह समस्या क्यों शुरू होती है?

बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों के शरीर में हॉर्मोन्स और मांसपेशियों में कई बदलाव आते हैं। जब आपकी नींद पेशाब के प्रेशर से बार-बार टूटती है, तो इसके पीछे मुख्य रूप से आपके ब्लैडर और प्रोस्टेट के बीच का यह संघर्ष ज़िम्मेदार होता है:

  • प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना (BPH): प्रोस्टेट अखरोट के आकार की एक ग्रंथि होती है जो मूत्र नली (Urethra) के चारों ओर होती है। उम्र के साथ जब यह बढ़ने लगती है (Benign Prostatic Hyperplasia), तो यह नली को दबा देती है, जिससे पेशाब रुक-रुक कर आता है।
  • ब्लैडर का कमज़ोर होना: उम्र के साथ पाचन तंत्र और मांसपेशियों की तरह ही ब्लैडर की मांसपेशियाँ भी कमज़ोर हो जाती हैं। वे पेशाब को लंबे समय तक होल्ड (Hold) करने की अपनी क्षमता खो देती हैं।
  • हॉर्मोनल बदलाव (Hormonal Shift): टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) के स्तर में कमी और Dihydrotestosterone (DHT) के बढ़ने से प्रोस्टेट की कोशिकाएँ तेज़ी से बढ़ने लगती हैं, जो इस समस्या का मुख्य कारण है।

प्रोस्टेट की यह समस्या किन प्रकारों में सामने आ सकती है?

प्रोस्टेट का बढ़ना हर पुरुष को एक ही तरीके से परेशान नहीं करता। ग्रंथि के बढ़ने की दिशा और ब्लैडर की स्थिति के अनुसार यह समस्या इन खतरनाक रूपों में सामने आ सकती है:

  • सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (Benign Prostatic Hyperplasia - BPH): यह सबसे आम प्रकार है, जो कैंसर नहीं होता। इसमें ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है और पेशाब का प्रवाह (Flow) बहुत धीमा हो जाता है, जिससे ब्लैडर पर भारी दबाव पड़ता है।
  • प्रोस्टेटाइटिस (Prostatitis): यह प्रोस्टेट ग्रंथि में होने वाली भयंकर सूजन या इन्फेक्शन है। इसमें बार-बार टॉयलेट जाने के साथ-साथ पेशाब करते समय भयंकर जलन और पेल्विक हिस्से में दर्द होता है।
  • ओवरएक्टिव ब्लैडर (Overactive Bladder): इसमें प्रोस्टेट तो थोड़ा बढ़ता ही है, लेकिन साथ ही नर्वस सिस्टम के दबाव के कारण ब्लैडर इतना अति-संवेदनशील हो जाता है कि थोड़ा सा पेशाब भरते ही इमरजेंसी जैसा महसूस होता है।

किन खामोश संकेतों से पहचानें कि प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ रही है?

केवल रात को उठना ही एकमात्र लक्षण नहीं है। जब प्रोस्टेट आपकी मूत्र नली को चोक (Choke) कर रहा होता है, तो शरीर ये खामोश अलार्म बजाने लगता है जिन्हें कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:

  • पेशाब की धार (Stream) का कमज़ोर होना: पेशाब शुरू करने में बहुत ज़ोर लगाना पड़ना और धार का बहुत पतली या रुक-रुक कर (Dribbling) आना प्रोस्टेट के बढ़ने का सबसे बड़ा संकेत है।
  • इनकम्प्लीट इवैक्यूएशन (Incomplete Evacuation): टॉयलेट से बाहर आने के तुरंत बाद फिर से ऐसा लगना कि ब्लैडर में अभी भी पेशाब बचा हुआ है और पेट भारी-भारी लगना।
  • थकावट और नींद की कमी: रात को 4-5 बार उठने के कारण नींद पूरी न होना आपकी दिनचर्या बन जाता है, जिससे दिन भर शरीर में क्रोनिक फटीग हावी रहता है।
  • अर्जेंसी (Urgency) और कमर दर्द: पेशाब की इच्छा होते ही उसे एक मिनट भी रोक न पाना, और कभी-कभी इसके साथ हल्का कमर का दर्द महसूस होना।

पेशाब की इस परेशानी से बचने के चक्कर में पुरुष क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

रात की नींद खराब होने की झुंझलाहट और बार-बार टॉयलेट जाने की शर्मिंदगी से बचने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो उनकी किडनी को डैमेज कर सकते हैं:

  • पानी पीना बिल्कुल कम कर देना: बार-बार पेशाब न जाना पड़े, इसलिए शाम के बाद पानी पीना ही छोड़ देना। इससे यूरिन बहुत ज़्यादा गाढ़ा और एसिडिक (Acidic) हो जाता है, जो ब्लैडर में खुजली वाले इन्फेक्शन और पथरी (Stones) का कारण बनता है।
  • सेल्फ-मेडिकेशन (Self-Medication) करना: बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाइयाँ लेकर खाना, जो कुछ समय के लिए लक्षणों को दबाती हैं लेकिन अंदर ही अंदर ग्रंथि का आकार रूप से बढ़ता रहता है।
  • पेशाब को ज़बरदस्ती रोकना: बाहर जाते समय पेशाब को लंबे समय तक रोक कर रखना। इससे ब्लैडर की मांसपेशियाँ हमेशा के लिए अपना लचीलापन खो देती हैं और किडनी पर भारी दबाव पड़ता है।

आयुर्वेद 'प्रोस्टेट के बढ़ने' और पेशाब की रुकावट को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे BPH कहता है, आयुर्वेद उसे शरीर में 'अष्ठीला' या 'मूत्राघात' (Urine retention), भड़के हुए वात दोष और दूषित 'कफ' के असंतुलन के रूप में समझता है:

  • अपान वात का अवरोध (Vata Imbalance): शरीर से मल और मूत्र को बाहर निकालने का काम 'अपान वात' करता है। जब खराब जीवनशैली और बढ़ती उम्र के कारण यह वात ब्लॉक हो जाता है, तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि को कड़क और बड़ा कर देता है।
  • कफ का जमाव (Kapha accumulation): जब जठराग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर में 'आम' (Toxins) और दूषित कफ बनता है। यह कफ प्रोस्टेट ग्रंथि की कोशिकाओं (Cells) को असामान्य रूप से बढ़ा देता है।
  • रस और मेद धातु की विकृति: वज़न का बढ़ना और गलत खानपान के कारण 'मेद धातु' (Fat) दूषित हो जाती है, जो सीधे तौर पर प्रोस्टेट के आकार को बढ़ाने में योगदान देती है। यदि समय पर इसे न रोका जाए तो यह टाइप 2 डायबिटीज वाले मरीज़ों में और भी गंभीर रूप ले लेता है।

प्रोस्टेट को स्वस्थ रखने और वात को शांत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपनी बढ़ी हुई ग्रंथि को शांत करने और रात की नींद को वापस पाने के लिए आपको अपनी डाइट से 'वात' और 'कफ' बढ़ाने वाले पदार्थों को तुरंत हटाना होगा। इस आहार को अपनी दिनचर्या बनाएँ:

आहार की श्रेणी क्या खाएँ (फायदेमंद - वात शांत करने वाले) क्या न खाएँ (ट्रिगर फूड्स - रुकावट बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल, दलिया, ज्वार। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी रोटियाँ, पैकेटबंद नूडल्स।
वसा और बीज (Fats & Seeds) कद्दू के बीज (Pumpkin seeds - प्रोस्टेट के लिए अमृत), देसी गाय का घी। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड चीज़ें, बाज़ार के ट्रांस फैट्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, गाजर, परवल, अच्छी तरह पकी हुई पालक। कच्चा सलाद भारी मात्रा में, कटहल, भिंडी, बैंगन।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब, मीठे अनार, तरबूज़ (दिन के समय)। रात को खट्टे फल, बिना मौसम के कोल्ड स्टोरेज वाले फल।
पेय पदार्थ (Beverages) धनिया-जीरे का पानी, गुनगुना पानी, हल्दी वाला दूध। अत्यधिक डार्क कॉफी, शराब, बर्फ का ठंडा पानी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स।

प्रोस्टेट की सूजन कम करने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई दिव्य 'मूत्रल' रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के प्रोस्टेट को सिकुड़ने में मदद करते हैं और पेशाब की नली को साफ़ करते हैं:

  • गोक्षुर (Gokshura): प्रोस्टेट और यूरिनरी ट्रैक्ट के लिए यह सबसे बड़ा आयुर्वेदिक वरदान है। यह पेशाब के फ्लो को बढ़ाता है, सूजन को खींचता है और ब्लैडर को प्राकृतिक ताकत देता है।
  • वरुण (Varuna): आयुर्वेद में वरुण की छाल को 'अष्ठीला' (BPH) को तोड़ने वाली सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना गया है। यह रुकावट को हटाकर मूत्र नली को पूरी तरह खोल देती है।
  • गिलोय: शरीर से टॉक्सिन्स (आम) को पिघलाने और प्रोस्टेट की अंदरूनी सूजन (Inflammation) को खत्म करने के लिए गिलोय एक जादुई रसायन है।
  • अश्वगंधा: रात-रात भर उठने के कारण जब शरीर गहरे मानसिक तनाव और थकावट में होता है, तो अश्वगंधा दिमाग को रिलैक्स करता है और पेल्विक मांसपेशियों को भारी ताकत देता है। इसके साथ ही त्रिफला का सेवन भी पेट को साफ़ रखकर अपान वात को संतुलित करता है।

मूत्र मार्ग को खोलने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और कफ पेल्विक रीजन में बहुत गहराई तक जम चुका हो और केवल गोलियों से आराम न मिल रहा हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ तुरंत असर दिखाती हैं:

  • कटि बस्ती: कमर के निचले हिस्से (Lower back) पर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल भरा जाता है। यह सूखी और कड़क हो चुकी पेल्विक नसों को चिकनाई देकर अपान वात को तुरंत शांत करता है।
  • मात्रा बस्ती (Medicated Enema): अपान वात को जड़ से उखाड़ने के लिए औषधीय तेलों का एनीमा दिया जाता है। यह सीधा ब्लैडर और प्रोस्टेट के आस-पास की नसों को पोषण देता है और रुकावट को हमेशा के लिए गायब कर देता है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए शुद्ध औषधीय तेलों (विशेषकर कमर और पैरों के आस-पास) से मालिश की जाती है।
  • शिरोधारा थेरेपी: जब बार-बार पेशाब आने की समस्या अकारण एँग्जायटी और स्ट्रेस से जुड़ी हो, तो सिर पर गुनगुने तेल की धार गिराने से नर्वस सिस्टम को गहरी शांति मिलती है और रात को नींद अच्छी आती है। इसके अलावा विरेचन थेरेपी शरीर की अशुद्धियों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाती है।

प्रोस्टेट के प्राकृतिक रूप से सिकुड़ने और पेशाब सामान्य होने में कितना समय लगता है?

सालों से डैमेज हो रहे ब्लैडर और भड़के हुए वात को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और 'वात-नाशक' डाइट से आपका अपान वात शांत होगा। रात को उठने की फ्रीक्वेंसी (Frequency) कम होगी और पेशाब का फ्लो सुधरने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (बस्ती) और रसायनों के प्रभाव से प्रोस्टेट की बढ़ी हुई कोशिकाएँ सिकुड़नी (Shrink) शुरू होंगी। आपको ब्लैडर खाली न होने का एहसास (Incomplete evacuation) बंद हो जाएगा।
  • 5-6 महीने: आपका मूत्रमार्ग (Urinary tract) और प्रोस्टेट पूरी तरह से पोषित और संतुलित हो जाएंगे। आप बिना किसी कैथेटर या सर्जरी के डर के, एक प्राकृतिक और दर्दरहित जीवन का अनुभव करेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

प्रोस्टेट के बढ़ने (BPH) और पेशाब की समस्या के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य मूत्र नली की मांसपेशियों को रिलैक्स करने के लिए एल्फा-ब्लॉकर्स (Alpha-blockers) देना और सर्जरी से प्रोस्टेट काटना। अपान वात को अनुलोम करना, कफ को पिघलाना और 'वरुण' जैसी औषधियों से ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से सिकोड़ना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल उम्र बढ़ने के कारण हॉर्मोन्स (DHT) का एक मैकेनिकल और लाइलाज प्रभाव मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात-कफ दोषों और दूषित 'मेद धातु' का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल रात में पानी कम पीने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'स्नेहन' (घी), वात-नाशक भोजन, कद्दू के बीज और बस्ती कर्म पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर दवाइयाँ छोड़ने पर रुकावट फिर से लौट आती है और अंततः सर्जरी (TURP) ही एकमात्र विकल्प बचता है। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और मूत्रवह संस्थान अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि प्रोस्टेट प्राकृतिक रूप से सामान्य आकार में लौट आता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपके अपान वात को संतुलित कर पेशाब की समस्या को पूरी तरह रोक सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • पेशाब का पूरी तरह बंद हो जाना (Urine Retention): अगर ब्लैडर भरा हुआ महसूस हो, दर्द हो, लेकिन पेशाब की एक बूंद भी बाहर न निकले (यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें तुरंत कैथेटर की ज़रूरत होती है)।
  • पेशाब में खून आना (Hematuria): अगर आपके पेशाब का रंग अचानक लाल या कोला (Cola) के रंग जैसा हो जाए, जो इन्फेक्शन या किसी गंभीर बीमारी का अलार्म है।
  • असहनीय दर्द के साथ तेज़ बुख़ार (Fever): अगर पेशाब में जलन के साथ तेज़ बुख़ार आए और ठंड लगे (यह एक्यूट प्रोस्टेटाइटिस या किडनी इन्फेक्शन का बड़ा अलार्म है)।
  • PSA लेवल का अचानक बहुत ज़्यादा बढ़ जाना: अगर ब्लड टेस्ट में आपका PSA (Prostate-Specific Antigen) का स्तर तेज़ी से बढ़ रहा हो, तो यह प्रोस्टेट कैंसर की ओर इशारा कर सकता है।

निष्कर्ष

अपने शरीर के मूत्रवह संस्थान (Urinary System) को एक पानी की पाइपलाइन की तरह समझें, जिसके रास्ते में प्रोस्टेट नामक एक वाल्व लगा है। जब 60 की उम्र के बाद शरीर में वात भड़कता है और आपकी लाइफस्टाइल के कारण कफ जमता है, तो यह वाल्व (प्रोस्टेट) कड़क और मोटा होकर पाइपलाइन को चोक (Choke) करने लगता है। रात को 5 बार नींद से जागना, वॉशरूम से बाहर आने के बाद भी पेट भारी लगना और पेशाब की धार का टूटना, ये कोई बुढ़ापे की आम बातें नहीं हैं; यह एक अलार्म है कि आपका 'अपान वात' बुरी तरह ब्लॉक हो चुका है और आपके ब्लैडर पर जानलेवा दबाव पड़ रहा है। केवल सिंथेटिक दवाइयाँ खाकर या सर्जरी के डर से इसे टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपकी किडनी को हमेशा के लिए अपाहिज कर सकता है।

कैथेटर के डर और नींद न आने के इस चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के रूखे जंक फूड को छोड़कर हमेशा गर्म, सुपाच्य और शुद्ध गाय के घी से बना भोजन खाएँ। अपनी डाइट में कद्दू के बीज, जौ और धनिए का पानी शामिल करें। गोक्षुर, वरुण और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की बस्ती व अभ्यंग मालिश से अपनी सूखी और कड़क हो चुकी नसों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। पेशाब की इस रुकावट को अपनी उम्र की मजबूरी न बनने दें, और अपने प्रोस्टेट को स्थायी रूप से स्वस्थ बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह सच है कि उम्र के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि में बदलाव आना आम है, लेकिन इसका इतना बढ़ना कि वह पेशाब को रोक दे, यह निश्चित नहीं है। अगर आपकी जठराग्नि मज़बूत है, आपका वात संतुलित है और लाइफस्टाइल सही है, तो आप बुढ़ापे तक बिना किसी रुकावट के स्वस्थ रह सकते हैं।

शत-प्रतिशत। कद्दू के बीजों में जिंक (Zinc) और फाइटोस्टेरॉल्स (Phytosterols) भारी मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व सीधे तौर पर प्रोस्टेट के आकार को सिकुड़ने में मदद करते हैं और डीएचटी (DHT) हॉर्मोन के असर को कम करते हैं। रोज़ाना एक चम्मच भुने हुए कद्दू के बीज खाना प्रोस्टेट के लिए अमृत है।

बिल्कुल नहीं। रात को सोने से 2-3 घंटे पहले पानी का सेवन कम कर देना चाहिए ताकि रात को बार-बार न उठना पड़े, लेकिन पानी पीना पूरी तरह बंद करने से पेशाब गाढ़ा और एसिडिक हो जाएगा, जिससे ब्लैडर में इन्फेक्शन (UTI) और जलन पैदा होगी।

लगातार और लंबे समय तक साइकिल चलाने से पेल्विक एरिया (Pelvic area) और प्रोस्टेट पर सीधा दबाव पड़ता है। अगर आपको BPH है, तो भारी साइक्लिंग से सूजन बढ़ सकती है। इसके बजाय टहलना (Walking) या योगासन ज़्यादा सुरक्षित और फायदेमंद हैं।

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। BPH (Benign Prostatic Hyperplasia) और प्रोस्टेट कैंसर दोनों बिल्कुल अलग-अलग बीमारियाँ हैं। BPH एक सौम्य (Benign) यानी गैर-कैंसरकारी वृद्धि है। BPH होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वह आगे चलकर कैंसर में बदल जाएगा।

हाँ। जब आप बार-बार और लंबे समय तक पेशाब को रोकते हैं, तो ब्लैडर की मांसपेशियाँ ओवरस्ट्रेच (Overstretch) हो जाती हैं और अपनी ताकत खो देती हैं। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट पर भारी दबाव पड़ता है, जो प्रोस्टेट की समस्या को और ज़्यादा भयंकर बना देता है।

बिल्कुल सुरक्षित और बेहद ज़रूरी है। अश्वगंधा केवल ताकत नहीं बढ़ाता, बल्कि यह एक बेहतरीन स्ट्रेस-रिलीवर है। रात-रात भर उठने से नर्वस सिस्टम जो थकान और स्ट्रेस झेलता है, अश्वगंधा उसे शांत करता है और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है।

सर्जरी में प्रोस्टेट का बढ़ा हुआ हिस्सा काट कर निकाल दिया जाता है, लेकिन अगर शरीर में वात और कफ का असंतुलन (मूल कारण) जस का तस बना हुआ है, तो कुछ सालों बाद ग्रंथि दोबारा बढ़कर पेशाब को रोक सकती है। आयुर्वेद इसे जड़ से संतुलित करता है।

पेशाब करते समय पेट पर ज़ोर (Straining) लगाना ब्लैडर और पेल्विक नसों को डैमेज कर सकता है। अगर फ्लो कम है, तो ज़ोर लगाने के बजाय रिलैक्स होकर बैठें और थोड़ा समय लें। तुरंत आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिलकर वरुण या गोक्षुर जैसी औषधियों का सेवन शुरू करें।

हाँ, कुछ खास योगासन जैसे बद्ध कोणासन (Butterfly Pose), वज्रासन और मंडूकासन पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं और अपान वात की रुकावट को खोलते हैं। इनके नियमित अभ्यास से प्रोस्टेट की सूजन प्राकृतिक रूप से कम होने लगती है।

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