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Vegetarian हूँ फिर भी Uric Acid High क्यों? चौंकाने वाले कारण

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 13 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5053

जब आप अपनी ब्लड रिपोर्ट खोलते हैं और देखते हैं कि आपका यूरिक एसिड (Uric Acid) 7.5 या 8 के पार जा चुका है, तो सबसे पहला रिएक्शन एक गहरे सदमे का होता है। आप सोचते हैं, "मैं तो जीवन भर शुद्ध शाकाहारी (Vegetarian) रहा हूँ। मैंने कभी मांस, मछली या शराब को हाथ तक नहीं लगाया। मैं 'क्लीन ईटिंग' (Clean Eating) पर ध्यान देता हूँ, फिर मेरे खून में यह यूरिक एसिड कहाँ से आ गया?"

समाज और यहाँ तक कि कई फिटनेस आर्टिकल्स ने हमारे दिमाग में यह बात इतनी गहराई से बैठा दी है कि यूरिक एसिड केवल 'नॉन-वेज' (Non-veg) और शराब पीने वालों की बीमारी है। लेकिन यह मेडिकल साइंस का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक मिथक है। सच्चाई यह है कि यूरिक एसिड केवल मीट में मौजूद 'प्यूरीन' (Purine) से नहीं बढ़ता। यह आपके कमज़ोर पाचन तंत्र (Digestive system), पैकेटबंद खाने की मिठास और उस भयंकर स्ट्रेस का नतीजा है, जो आपके लिवर और किडनी को अंदर ही अंदर चोक (Choke) कर रहा है। आइए इस भ्रम को तोड़ें और समझें कि शुद्ध शाकाहारी होने के बावजूद आपके जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स क्यों जम रहे हैं।

शाकाहारियों में Uric Acid बढ़ने के चौंकाने वाले असली कारण

अगर आप नॉन-वेज नहीं खाते हैं, तो आपके शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने के पीछे आपका खराब मेटाबॉलिज़्म और कुछ छिपी हुई गलतियाँ ज़िम्मेदार हैं:

  • फ्रुक्टोज़ (Fructose) का भयंकर ओवरलोड: यह शाकाहारियों का सबसे बड़ा दुश्मन है। पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज़्यादा मीठे फलों में मौजूद 'फ्रुक्टोज़' जब लिवर में टूटता है, तो वह बाई-प्रोडक्ट (By-product) के रूप में भारी मात्रा में यूरिक एसिड छोड़ता है।
  • दालों और पनीर का गलत समय पर सेवन: प्रोटीन ज़रूरी है, लेकिन रात के 9 बजे भारी राजमा, छोले या पनीर खाकर सो जाना। जब तक आपका शरीर इसे पचाने की कोशिश करता है, जठराग्नि बुझ चुकी होती है और यह खाना सड़कर यूरिक एसिड में बदल जाता है।
  • किडनी का सुस्त पड़ना (Dehydration): दिल्ली-एनसीआर की तपती गर्मी में या एसी (AC) में बैठकर दिन भर पानी न पीना। यूरिक एसिड शरीर का कचरा है जिसे किडनी यूरिन के रास्ते बाहर फेंकती है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो खून गाढ़ा हो जाता है और किडनी इस कचरे को बाहर नहीं निकाल पाती।
  • लगातार बैठे रहना और स्ट्रेस: घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन सुस्त पड़ जाता है और 'मेटाबॉलिज़्म' क्रैश कर जाता है। साथ ही, स्ट्रेस के कारण लिवर की कार्यक्षमता घट जाती है।

दोषों के अनुसार यूरिक एसिड (वात-रक्त) के प्रकार

आयुर्वेद में यूरिक एसिड के बढ़ने और जोड़ों में जमने को 'वातरक्त' (Vatarakta) या गाउट (Gout) कहा जाता है। हर इंसान का शरीर इस एसिड को अलग तरह से झेलता है:

  • वात-प्रधान वातरक्त (सूखापन और चुभन): इसमें दर्द अचानक भड़कता है और शरीर में एक जगह से दूसरी जगह (Migratory pain) जाता रहता है। जोड़ रूखे हो जाते हैं और सुई चुभने जैसा दर्द होता है। इसके लिए वात दोष कम करने के उपाय अनिवार्य हैं।
  • पित्त-प्रधान वातरक्त (आग जैसी जलन): इसमें पैर का अंगूठा या टखना एकदम लाल (Red) और सूजा हुआ हो जाता है। छूने पर भट्टी जैसा गर्म लगता है और अंदर से भयंकर जलन महसूस होती है।
  • कफ-प्रधान वातरक्त (भारीपन और सूजन): वज़न बढ़ने वाले लोगों में यह आम है। इसमें दर्द से ज़्यादा भारीपन (Heaviness), सुन्नपन और जोड़ों के आस-पास कड़ापन (Stiffness) महसूस होता है।

क्या आपका शरीर भी Uric Acid के ये खामोश अलार्म बजा रहा है?

यूरिक एसिड रातों-रात पैर के अंगूठे को नहीं सुजाता। शरीर बहुत पहले से ये खामोश संकेत देता है जिन्हें हम अक्सर 'साधारण थकावट' मान लेते हैं:

  • सुबह उठते ही एड़ियों में भयंकर दर्द (Heel Pain): बिस्तर से उठकर ज़मीन पर पहला कदम रखते ही एड़ियों में कांटे चुभने जैसा दर्द होना, जो कुछ कदम चलने के बाद कम हो जाता है।
  • पैर के अंगूठे का लाल और सुन्न होना (Podagra): अचानक रात में पैर के अंगूठे (Big Toe) के जोड़ में असहनीय दर्द उठना, मानो किसी ने उसे हथौड़े से मार दिया हो।
  • यूरिन में जलन और पथरी (Kidney Stones): यूरिन पास करते समय जलन होना या बार-बार किडनी में छोटे क्रिस्टल्स (Sludge) का बनना।
  • बिना वजह जोड़ों का कड़क होना: उँगलियों के पोरों (Knuckles) या घुटनों में अजीब सी जकड़न महसूस होना, जो जोड़ों की समस्याओं का शुरुआती संकेत है।

यूरिक एसिड कम करने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

रिपोर्ट में 'High Uric Acid' देखते ही लोग घबराहट में ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो शरीर को और ज़्यादा कमज़ोर कर देते हैं:

  • सारी दालें और प्रोटीन एकदम छोड़ देना: डर के मारे मूंग की दाल और हर तरह का प्रोटीन खाना बंद कर देना। इससे शरीर में 'प्रोटीन डेफिशिएंसी' (Protein deficiency) हो जाती है और वात दोष बुरी तरह भड़क जाता है, जिससे दर्द और बढ़ जाता है।
  • पेनकिलर्स (NSAIDs) की लत: यूरिक एसिड के दर्द को दबाने के लिए रोज़ाना पेनकिलर खाना, जो आपकी किडनी को डैमेज करता है (किडनी ही यूरिक एसिड बाहर निकालने का एकमात्र रास्ता है)।
  • केवल पानी गटकते रहना: यह सोचकर कि पानी से यूरिक एसिड फ्लश हो जाएगा, एक साथ 3-4 लीटर ठंडा पानी पीना, जो जठराग्नि को पूरी तरह बुझा देता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएं: अगर यूरिक एसिड को खून से न निकाला जाए, तो यह क्रिस्टल्स हमेशा के लिए जोड़ों को टेढ़ा कर देते हैं (Gouty Tophi) और किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं।

आयुर्वेद 'वातरक्त' (Uric Acid) के इस गहरे विज्ञान को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान केवल क्रिस्टल्स को देखता है, लेकिन आयुर्वेद इसकी जड़ 'रक्त धातु' और 'वात दोष' के भयंकर टकराव को समझता है।

  • रक्त धातु की अशुद्धि: गलत खानपान (जैसे मीठे के साथ नमकीन खाना) से शरीर में 'आम' (Toxins) बनता है, जो सीधा 'रक्त धातु' (Blood) को अशुद्ध कर देता है।
  • वात का मार्ग ब्लॉक होना: शरीर में वात प्राकृतिक रूप से बहता है। लेकिन जब अशुद्ध रक्त (गाढ़ा खून) और यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स वात का रास्ता रोक देते हैं, तो वात भड़क जाता है और जोड़ों में सुई चुभने वाला भयंकर दर्द (वातरक्त) पैदा करता है।
  • किडनी (मूत्रवह स्रोतस) की रुकावट: जब पाचन कमज़ोर होता है, तो किडनी का फिल्टर सिस्टम 'आम' के कारण चोक (Choke) हो जाता है और एसिड शरीर में ही रुकने लगता है।

शाकाहारियों के लिए यूरिक एसिड फ्लश करने वाली 'क्लीन डाइट'

आपको अपनी 'क्लीन ईटिंग' को नहीं छोड़ना है, बल्कि उसे आयुर्वेद के अनुसार सही दिशा देनी है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - यूरिक एसिड को फ्लश करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रक्त-पित्त और यूरिक एसिड बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना जौ (Barley सबसे श्रेष्ठ मूत्रल है), ओट्स, ज्वार, पुराना चावल। मैदा, वाइट ब्रेड, पैकेटबंद नूडल्स, नया चावल।
प्रोटीन (Proteins) मूंग दाल, मसूर दाल (दिन के समय और घी/जीरे के छौंक के साथ)। रात के समय राजमा, छोले, भारी उड़द दाल, मशरूम, मटर।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी (अमृत है), परवल, पेठा (Ash gourd), कद्दू, करेला। बीज वाले टमाटर, कच्चा पालक (ऑक्सालेट्स होते हैं), बैंगन।
फल (Fruits) आंवला, पपीता, चेरी (Cherries), ताज़ा सेब (सीमित मात्रा में)। पैकेटबंद फ्रूट जूस (Heavy Fructose), चीकू, अत्यधिक मीठे फल।
पेय पदार्थ (Beverages) जौ का पानी, धनिए का पानी, गिलोय का काढ़ा, ताज़ा मट्ठा। कोल्ड ड्रिंक्स, पैक की हुई मीठी लस्सी, शराब, अत्यधिक डार्क कॉफी।

यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को पिघलाने के लिए जड़ी-बूटियाँ

अगर आप अपनी हड्डियों को 'Buy It For Life' (BIFL) संपत्ति बनाना चाहते हैं, तो इन रसायनों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं:

  • गिलोय (Giloy / Guduchi): आयुर्वेद में वातरक्त (Gout) के लिए गिलोय (Giloy) से बड़ी कोई औषधि नहीं है। यह खून को साफ करती है, जोड़ों की सूजन मिटाती है और यूरिक एसिड को शरीर से फ्लश कर देती है।
  • धनिया (Coriander): रात भर पानी में भीगे हुए धनिया (Coriander) के बीजों का पानी सुबह पीने से खून की गर्मी (पित्त) और एसिडिटी तुरंत शांत होती है।
  • गोक्षुर (Gokshura): किडनी के चैनल्स को खोलने और रुके हुए यूरिक एसिड क्रिस्टल्स को बिना दर्द के यूरिन के रास्ते बाहर निकालने के लिए गोक्षुर एक जादुई रसायन है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): जब जोड़ों में यूरिक एसिड के कारण भयंकर सूजन और भारीपन आ जाता है, तो पुनर्नवा उस रुके हुए फ्लूइड (पानी) को तुरंत बाहर निकाल देती है।
  • मंजिष्ठा (Manjistha): यह एक बेहद शक्तिशाली ब्लड प्यूरीफायर (Blood purifier) है जो रक्त धातु को शुद्ध करके लाल और गर्म जोड़ों को बर्फ जैसी ठंडक देता है।

रक्त की अशुद्धि को बाहर निकालने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब क्रिस्टल्स जोड़ों में गहराई तक जम चुके हों, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ नसों को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • विरेचन (Virechana): लिवर और रक्त की डीप-क्लीनिंग के लिए की जाने वाली यह विरेचन थेरेपी (Virechana therapy) शरीर से अत्यधिक पित्त और एसिडिटी को मल के रास्ते बाहर निकालती है, जिससे यूरिक एसिड तुरंत नीचे आता है।
  • लेपनम (Lepanam): पैर के अंगूठे या लाल जोड़ों पर ठंडी औषधियों (जैसे दशांग लेप या चंदन) का लेप लगाने से जलन और सुई चुभने वाले दर्द में जादुई राहत मिलती है।
  • धारा (Dhara): दर्द वाले स्थान पर औषधीय दूध या जड़ी-बूटियों के काढ़े की लगातार धारा (Dhara) गिराने से वात और पित्त दोनों शांत होते हैं।

यूरिक एसिड के प्राकृतिक रूप से नॉर्मल होने में कितना समय लगता है?

लंबे समय की गलत डाइट और जठराग्नि के कमज़ोर होने से बने इस कचरे को फ्लश करने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और जौ के पानी से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। एड़ियों का दर्द और पैर के अंगूठे की सूजन व लालिमा में भारी कमी आएगी।
  • 3-4 महीने: गिलोय और गोक्षुर के प्रभाव से ब्लड में मौजूद यूरिक एसिड टूटने लगेगा। आपके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट में नंबर प्राकृतिक रूप से नीचे आने लगेगा।
  • 5-6 महीने: आपका रक्त धातु पूरी तरह शुद्ध हो जाएगा और किडनी की फिल्टर करने की क्षमता रीबूट हो जाएगी। आप बिना किसी यूरिक एसिड की गोली के एक ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

शाकाहारियों में यूरिक एसिड के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य यूरिक एसिड का बनना ब्लॉक करने के लिए 'Allopurinol' जैसी गोलियाँ और दर्द के लिए पेनकिलर्स देना। जठराग्नि को बढ़ाना, रक्त को शुद्ध करना (रक्त-शोधन) और गिलोय/गोक्षुर से एसिड को प्राकृतिक रूप से फ्लश करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल प्यूरीन (Purine) मेटाबॉलिज़्म की गड़बड़ी और क्रिस्टल्स का जमना मानना। इसे कमज़ोर पाचन, 'आम' का संचय, अशुद्ध रक्त और वात दोष (वातरक्त) के भयंकर टकराव का सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर हर तरह का प्रोटीन (दालें) पूरी तरह बंद करा दिया जाता है, जिससे शरीर कमज़ोर हो जाता है। मूंग दाल की अनुमति दी जाती है। पैकेटबंद चीनी (Fructose) रोकने और लौकी/जौ का पानी पीने पर ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोलियाँ उम्र भर खानी पड़ती हैं। दवा छोड़ते ही यूरिक एसिड तुरंत वापस बढ़ जाता है। किडनी और लिवर अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि वे खुद यूरिक एसिड को फिल्टर करना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस वातरक्त (Uric Acid) को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • पैर के अंगूठे या घुटने का भयंकर लाल और गर्म होना: अगर अचानक रात को पैर का अंगूठा इस कदर सूज जाए, आग जैसा गर्म हो और चादर का एक धागा छूने पर भी असहनीय दर्द हो (यह एक्यूट गाउट अटैक है)।
  • जोड़ों के ऊपर सख्त गांठे (Tophi) बन जाना: अगर उँगलियों या कोहनियों के जोड़ों के ऊपर सफेद या पीले रंग की सख्त गांठे उभर आएं।
  • यूरिन में खून आना या भयंकर मरोड़: अगर यूरिन पास करते समय लाल खून आए और पीठ के निचले हिस्से से पेट तक ऐसा दर्द उठे कि खड़े रहना मुश्किल हो जाए (किडनी स्टोन का संकेत)।
  • तेज़ बुखार और ठंड लगना: अगर लाल और सूजे हुए जोड़ के साथ-साथ आपको तेज़ कंपकंपी वाला बुखार आ जाए (जो गंभीर इन्फेक्शन का इशारा है)।

निष्कर्ष

शाकाहारी (Vegetarian) होना एक बहुत ही स्वस्थ जीवनशैली है, लेकिन 'क्लीन ईटिंग' के नाम पर जब हम पैकेटबंद फ्रूट जूस, ठंडे ड्रिंक्स और रात के समय भारी दालों का सेवन करते हैं, तो हमारा पाचन तंत्र चोक (Choke) हो जाता है। यूरिक एसिड केवल मीट खाने वालों की बीमारी नहीं है; यह आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपके शरीर में 'आम' (Toxins) बन रहा है और आपकी किडनी उसे फिल्टर करने में असमर्थ हो रही है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना यूरिक एसिड कम करने वाली सिंथेटिक गोलियों से दबा देते हैं, तो आप अपने लिवर और किडनी को अंदर ही अंदर कमज़ोर कर रहे होते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

शाकाहारियों में यूरिक एसिड सिर्फ प्यूरीन (दालों/पालक) से नहीं बढ़ता। इसका सबसे बड़ा कारण फ्रुक्टोज़ (रिफाइंड चीनी, पैकेटबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स) है। जब लिवर फ्रुक्टोज़ को तोड़ता है, तो वह बहुत ज़्यादा यूरिक एसिड बनाता है। इसके अलावा कमज़ोर जठराग्नि के कारण साधारण भोजन भी पेट में सड़कर आम (Toxins) बनाता है, जो ब्लड की एसिडिटी बढ़ाता है।

बिल्कुल नहीं। सारी दालें बंद करने से शरीर में प्रोटीन डेफिशिएंसी हो जाएगी और वात भड़क जाएगा। आपको केवल रात के समय भारी दालें (राजमा, छोले, उड़द) बंद करनी हैं। दिन के समय छिलके वाली मूंग की दाल (हींग और जीरे के छौंक के साथ) खाना पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद है।

टमाटर के बीजों और पालक में ऑक्सालेट्स (Oxalates) और प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है। जब आपका यूरिक एसिड हाई हो और किडनी उसे फ्लश नहीं कर पा रही हो, तो इन दोनों चीज़ों का सेवन (विशेषकर कच्चा) पूरी तरह से रोक देना चाहिए।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद में जौ को सबसे बेहतरीन मूत्रल (Diuretic) माना गया है। यह तासीर में ठंडा होता है और किडनी पर बिना दबाव डाले यूरिन का फ्लो बढ़ाता है, जिससे जोड़ों में जमा यूरिक एसिड क्रिस्टल्स प्राकृतिक रूप से यूरिन के रास्ते फ्लश (Flush) हो जाते हैं।

नींबू पानी (बिना चीनी का) अल्कलाइन (Alkaline) होता है जो ब्लड की एसिडिटी कम करने में मदद करता है। लेकिन अगर आप दिन भर इसे ही पीते रहेंगे और अपनी जठराग्नि (पाचन) को नहीं सुधारेंगे, तो केवल नींबू पानी क्रिस्टल्स को पिघला नहीं सकता। गिलोय और गोक्षुर इसके लिए ज़्यादा शक्तिशाली हैं।

यूरिक एसिड (वातरक्त) में अक्सर जोड़ों में आग जैसी जलन और लालिमा (पित्त) होती है। ऐसे लाल और सूजे हुए जोड़ पर गर्म सिकाई (Hot fomentation) बिल्कुल न करें, इससे दर्द भड़क जाएगा। ऐसे में बर्फ की हल्की सिकाई (Cold pack) या चंदन का लेप तुरंत आराम देता है।

हाँ। जब शरीर आराम की स्थिति में होता है (जैसे रात को सोते समय), तो भारी होने के कारण यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स सबसे निचले हिस्से—यानी एड़ियों (Heels) और पैर के अंगूठे में जाकर जम जाते हैं। इसलिए सुबह उठकर ज़मीन पर पैर रखते ही एड़ियों में सुई चुभने जैसा दर्द होता है।

बिल्कुल। एसी की ठंडी और रूखी हवा शरीर में वात दोष को भड़काती है और ब्लड सर्कुलेशन को सुस्त कर देती है। इससे शरीर का तापमान गिरता है, जिससे यूरिक एसिड खून में आसानी से घुलने (Solubility) के बजाय ठोस क्रिस्टल्स बनकर जोड़ों में जमने लगता है।

गोक्षुर एलोपैथिक गोली की तरह यूरिक एसिड के बनने की प्रक्रिया को ज़बरदस्ती ब्लॉक नहीं करता। यह एक प्राकृतिक नेफ्रो-प्रोटेक्टिव (किडनी को ताकत देने वाली) जड़ी-बूटी है। यह आपकी किडनी के फिल्टर सिस्टम को इतना मज़बूत करती है कि वह खून में घूम रहे फालतू यूरिक एसिड को खुद-ब-खुद बाहर फेंकना शुरू कर देती है।

बिल्कुल। यूरिक एसिड कोई लाइफटाइम बीमारी नहीं है। अगर आप आयुर्वेदिक डिटॉक्स (विरेचन), सही शाकाहारी डाइट (लो फ्रुक्टोज़) और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों का सेवन करते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज़्म और किडनी पूरी तरह से नॉर्मल हो जाते हैं और आप इस बीमारी से हमेशा के लिए मुक्त हो सकते हैं।

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