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Hypothyroidism में ठंड ज़्यादा क्यों लगती है? आयुर्वेदिक कारण

Information By Dr. Keshav Chauhan

क्या आपके साथ ऐसा होता है कि जब आपके आस-पास के लोग पंखा या एसी चलाकर बैठे होते हैं, तब भी आपको अंदर से एक अजीब सी सिहरन महसूस होती है? आप हमेशा अपने साथ एक शॉल या स्वेटर रखते हैं, आपके हाथ-पैर अक्सर ठंडे रहते हैं और सर्दियों का मौसम तो आपके लिए किसी सज़ा से कम नहीं होता। अक्सर लोग इसे केवल 'कमज़ोरी' या 'खून की कमी' मानकर इग्नोर कर देते हैं। लेकिन अगर आपको सामान्य से ज़्यादा ठंड लग रही है, साथ ही वज़न बढ़ रहा है और भयंकर थकान रहती है, तो यह कमज़ोरी नहीं, बल्कि आपके गले में बैठी 'थायरॉयड ग्रंथि' (Thyroid Gland) के काम न करने का सीधा अलार्म है।

हाइपोथायरायडिज़्म (Hypothyroidism) आज के समय में, विशेषकर महिलाओं में, एक महामारी की तरह फैल रहा है। हम रोज़ सुबह उठकर थायरॉक्सिन (Thyroxine) की गोली खा लेते हैं और सोचते हैं कि बीमारी कंट्रोल में है, लेकिन फिर भी शरीर अंदर से ठंडा और थका हुआ रहता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?

Hypothyroidism में ठंड क्यों लगती है?

हमारी थायरॉयड ग्रंथि शरीर के लिए एक 'थर्मोस्टेट' (Thermostat) और 'इंजन' की तरह काम करती है। यह सीधे तौर पर तय करती है कि आपका शरीर कितनी ऊर्जा बनाएगा और कितनी गर्माहट पैदा करेगा।

  • मेटाबॉलिज़्म (BMR) का गिरना: थायरॉयड ग्रंथि से निकलने वाले हॉर्मोन्स शरीर की हर कोशिका (Cell) को आदेश देते हैं कि वह खाने और ऑक्सीजन को मिलाकर ऊर्जा बनाए। जब थायरॉयड हॉर्मोन कम हो जाता है (Hypothyroidism), तो कोशिकाओं की ऊर्जा बनाने की गति बहुत धीमी हो जाती है।
  • गर्माहट का निर्माण रुकना: जब शरीर में ऊर्जा (कैलोरी) बर्न होती है, तो उसके 'बाय-प्रोडक्ट' के रूप में शरीर में प्राकृतिक गर्माहट (Heat) पैदा होती है। मेटाबॉलिज़्म सुस्त होने के कारण शरीर पर्याप्त हीट नहीं बना पाता, जिससे आपको लगातार ठंड लगती है (Cold Intolerance)।
  • रक्त संचार (Blood Circulation) का धीमा होना: हाइपोथायरायडिज़्म में हृदय की गति (Heart rate) भी धीमी पड़ जाती है। इसके कारण हाथ और पैरों की उंगलियों (Extremities) तक गर्म खून सही मात्रा में नहीं पहुँच पाता, जिससे वे हमेशा बर्फ की तरह ठंडे रहते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म में ठंड लगने के मुख्य आयुर्वेदिक कारण

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर का तापमान बनाए रखने की जिम्मेदारी 'अग्नि' की होती है। जब हाइपोथायरायडिज्म के कारण शरीर की जठराग्नि और धात्वाग्नि (Tissue metabolism) मंद पड़ जाती है, तो शरीर के भीतर गर्मी पैदा करने वाली प्रक्रियाएं सुस्त हो जाती हैं।

  • जठराग्नि और धात्वाग्नि की मंदता: शरीर को गर्म रखने के लिए जिस ऊर्जा की आवश्यकता होती है, वह पाचन और धातुओं के चयापचय (Metabolism) से आती है। जब यह 'अंदरूनी भट्टी' धीमी हो जाती है, तो शरीर पर्याप्त ऊष्मा (Heat) पैदा नहीं कर पाता।
  • कफ और वात दोष का असंतुलन: हाइपोथायरायडिज्म में शरीर में 'शीतल' कफ और 'रुक्ष' (Dry) वात का प्रकोप बढ़ जाता है। कफ के ठंडे गुण और वात की शुष्कता के कारण शरीर बाहरी तापमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।
  • स्रोतों में अवरोध (System Blockage): पाचन अग्नि मंद होने से शरीर में 'आम' (Toxins) का निर्माण होता है, जो ऊर्जा के संचार के रास्तों (Channels) को ब्लॉक कर देता है। इससे रक्त का संचार शरीर के छोरों (हाथ-पैरों) तक ठीक से नहीं पहुँच पाता, जिससे वे ठंडे रहते हैं।
  • प्राण और अपान वायु की विकृति: ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने वाली वायु जब दूषित होती है, तो शरीर का 'थर्मोस्टेट' बिगड़ जाता है। यह न केवल ठंड के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाती है बल्कि शरीर को हमेशा 'लो एनर्जी मोड' पर रखती है।

ठंड लगने के साथ दिखने वाले अन्य 'लो-मेटाबॉलिज्म' के लक्षण

केवल ठंड लगना ही एकमात्र संकेत नहीं है; जब आपकी थायराइड ग्रंथि और अग्नि कमजोर होती है, तो आपका शरीर कई अन्य माध्यमों से 'सिस्टम क्रैश' होने का अलार्म बजाता है।

  • हाथ-पैरों में जकड़न और सुन्नपन: ठंड महसूस होने के साथ-साथ उंगलियों और जोड़ों में भारीपन व जकड़न महसूस होना, जो शरीर में कफ और वात के जमाव को दर्शाता है।
  • क्रोनिक थकान और मानसिक सुस्ती (Brain Fog): पर्याप्त आराम के बावजूद शरीर में भारीपन और मस्तिष्क में धुंधलापन महसूस होना, मानो आपकी 'प्रोसेसर' की गति धीमी हो गई हो।
  • अधूरा पेट साफ़ होना (Incomplete Evacuation): मेटाबॉलिज्म धीमा होने का असर आंतों पर पड़ता है, जिससे मल चिपचिपा बनता है और रोज़ टॉयलेट जाने के बावजूद पेट पूरी तरह साफ़ नहीं लगता।
  • त्वचा का रूखापन और बालों का झड़ना: शरीर में नमी (Lubrication) और पोषण की कमी के कारण त्वचा का बेजान होना और बालों की चमक कम होना, जो वात दोष के बढ़ने का संकेत है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आयुर्वेद थायरॉयड की इस स्थिति को केवल गले की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर के 'मेटाबॉलिज़्म' की खराबी के रूप में देखता है।

  • जठराग्नि और धात्वाग्नि का बुझना: आयुर्वेद के अनुसार, शरीर को गर्म रखने का काम 'अग्नि' (पाचन और मेटाबॉलिक आग) का है। हाइपोथायरायडिज़्म 'अग्निमांद्य' (बुझी हुई अग्नि) का सबसे बड़ा उदाहरण है। जब अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर अपनी प्राकृतिक गर्माहट खो देता है और सुन्न पड़ने लगता है।
  • कफ दोष का भारी प्रकोप: थायरॉयड के कम काम करने से शरीर में 'कफ दोष' तेज़ी से बढ़ता है। कफ का गुण भारी, ठंडा और सुस्त होता है। यही बढ़ा हुआ कफ शरीर में चर्बी (मोटापा), सुस्ती और ठंडेपन को बढ़ाता है।
  • वात का मार्ग ब्लॉक होना: जब कफ बढ़ता है, तो वह 'वात' (रक्त और ऊर्जा के प्रवाह) के रास्तों को ब्लॉक कर देता है। इसीलिए हाथ-पैरों तक ऊर्जा नहीं पहुँचती और वे ठंडे रहते हैं।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको केवल बाहर से हार्मोन देकर आपकी ग्रंथि को और सुस्त नहीं बनाते। हमारा लक्ष्य आपकी थायरॉयड ग्रंथि को दोबारा खुद हॉर्मोन बनाने के लिए प्रेरित करना है।

  • अग्नि दीपन: सबसे पहले आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से आपकी 'पाचन और सेल्युलर अग्नि' को प्रज्वलित किया जाता है, ताकि शरीर दोबारा प्राकृतिक रूप से ऊर्जा और गर्माहट बना सके।
  • स्रोतोशोधन: नसों और लिम्फैटिक सिस्टम में जमे हुए 'कफ' और 'आम' (टॉक्सिन्स) को साफ किया जाता है ताकि थायरॉयड ग्रंथि तक सही पोषण पहुँच सके।
  • ग्रंथि का पोषण: विशिष्ट रसायन औषधियों से थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित और पोषित किया जाता है।

हाइपोथायरायडिज़्म के लिए विशेष आयुर्वेदिक डाइट टेबल

थायरॉयड को ठीक करने और शरीर की गर्माहट वापस लाने के लिए आपका भोजन आपकी सबसे बड़ी दवा है। नीचे दी गई डाइट टेबल को फॉलो करें:

भोजन का प्रकार क्या खाएं (फायदेमंद) क्या न खाएं (बिल्कुल बचें)
अनाज (Grains) जौ, ज्वार, बाजरा, रागी, पुराना चावल, ओट्स। मैदा, सफेद चावल, वाइट ब्रेड, पास्ता, नूडल्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, परवल, कद्दू, सहजन (Moringa), अदरक, लहसुन। कच्ची पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, शलजम (ये Goitrogens हैं)।
दालें (Pulses) मूंग दाल (सबसे अच्छी), अरहर की दाल, मसूर। उड़द की दाल, राजमा, छोले, भारी चने।
फल (Fruits) सेब, पपीता, अनार, मौसमी, जामुन। केला, तरबूज, बहुत ज़्यादा ठंडे या खट्टे फल।
डेयरी और तेल गाय का शुद्ध घी (थोड़ी मात्रा में), नारियल का तेल, तिल का तेल। जंक फूड, रिफाइंड तेल, कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, चीज़।
मसाले और हर्ब्स धनिया (थायरॉयड के लिए अमृत), हल्दी, काली मिर्च, सोंठ, जीरा। ज़्यादा नमक, प्रिजर्वेटिव्स वाले मसाले, कैचप।

थायरॉयड की 'अग्नि' को जगाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

  • कांचनार गुग्गुलु: यह थायरॉयड की सबसे अचूक आयुर्वेदिक दवा है। यह ग्रंथि की सूजन को कम करती है, कफ को पिघलाती है और सुस्त थायरॉयड को एक्टिव करती है।
  • त्रिकटु: सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली का यह मिश्रण बुझी हुई 'अग्नि' को तुरंत जलाता है, जिससे शरीर में प्राकृतिक गर्माहट वापस आती है और मेटाबॉलिज़्म तेज़ होता है।
  • अश्वगंधा: यह नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करके स्ट्रेस को कम करता है और T3, T4 हार्मोन्स के प्राकृतिक उत्पादन को सपोर्ट करता है।
  • धनिया: रात भर पानी में भीगे हुए धनिया के बीजों का पानी सुबह उबालकर पीना थायरॉयड ग्रंथि के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक डिटॉक्स है।

पंचकर्म थेरेपी: सुस्त शरीर की डीप क्लींजिंग

जब शरीर भारी होकर बर्फ की तरह ठंडा रहने लगे, तो पंचकर्म उस जमे हुए कफ को पिघलाने का काम करता है।

  • उद्वर्तन: यह एक विशेष हर्बल पाउडर की सूखी मालिश है। यह त्वचा के नीचे जमे हुए कफ (चर्बी) को तेज़ी से पिघलाती है, रक्त संचार (Blood circulation) बढ़ाती है और शरीर में तुरंत गर्माहट लाती है।
  • नस्य: नाक के ज़रिए औषधीय तेल डालना। चूँकि नाक दिमाग (पिट्यूटरी ग्रंथि) का दरवाज़ा है, यह थेरेपी दिमाग से थायरॉयड ग्रंथि को मिलने वाले सिग्नल्स (TSH) को प्राकृतिक रूप से बैलेंस करती है।
  • विरेचन: आंतों और लिवर की गहराई से सफाई ताकि थायरॉयड हार्मोन्स का कन्वर्ज़न (T4 से T3) सही ढंग से हो सके।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम केवल TSH की रिपोर्ट देखकर आपको उम्र भर की गोली पर नहीं डाल देते।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि आपके अंदर कफ और वात का असंतुलन कितना गहरा है और 'अग्नि' कितनी सुस्त है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: डॉक्टर आपकी त्वचा का रूखापन, बालों का झड़ना, गले की सूजन और हाथ-पैरों के ठंडेपन को चेक करते हैं।
  • लाइफस्टाइल ऑडिट: आपकी नींद का पैटर्न, तनाव का स्तर और दिन में सोने की आदत का गहराई से विश्लेषण किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको एक सुरक्षित और प्राकृतिक समाधान देते हैं।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: सुस्ती के कारण घर से निकलना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपकी प्रकृति के अनुसार खास कफ-नाशक जड़ी-बूटियाँ, अग्नि बढ़ाने वाले रसायन और डाइट का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

थायरॉयड ग्रंथि को दोबारा एक्टिव होने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपको शरीर में हल्की गर्माहट महसूस होने लगेगी। सुबह उठने पर होने वाली भयंकर थकान और भारीपन कम होगा।
  • 1 से 3 महीने तक: वज़न का बढ़ना रुक जाएगा। पाचन सुधरेगा और हाथ-पैर ठंडे रहने की समस्या काफी हद तक सुलझ जाएगी।
  • 3 से 6 महीने तक: आपकी 'अग्नि' और मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह रिसेट हो जाएगा। डॉक्टर की सलाह से आपकी एलोपैथिक थायरॉक्सिन की डोज़ धीरे-धीरे कम होने लगेगी।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

  • प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक उपचार सेवाएं
  • आरामदायक आवास
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएं

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपको जीवन भर सुबह खाली पेट गोली खाने की आदत नहीं डालते, हम आपकी ग्रंथि को काम करना सिखाते हैं।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ TSH लेवल को ज़बरदस्ती नहीं दबाते; हम 'अग्नि' को जगाते हैं ताकि थायरॉयड खुद प्राकृतिक हॉर्मोन बनाए।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का बहुत ही शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों थायरॉयड के मरीज़ों को एक सामान्य और ऊर्जावान जीवन दिया है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: हर इंसान का मेटाबॉलिज़्म अलग होता है। हमारा इलाज बिल्कुल आपकी नाड़ी और आपकी समस्या की जड़ के अनुसार होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: हमारी औषधियाँ पूरी तरह प्राकृतिक हैं। ये बिना किसी नुकसान के शरीर को अंदर से हील करती हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेद
इलाज का मुख्य लक्ष्य बाहर से थायरॉक्सिन हॉर्मोन (गोली) देकर केवल ब्लड रिपोर्ट (TSH) को नॉर्मल रखना। शरीर की 'अग्नि' को जगाकर थायरॉयड ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से खुद हॉर्मोन बनाने के लिए प्रेरित करना।
शरीर को देखने का नज़रिया केवल थायरॉयड ग्रंथि की बीमारी मानता है। पूरे शरीर के मेटाबॉलिज़्म (अग्निमांद्य) और कफ-वात असंतुलन का परिणाम मानता है।
डाइट और जीवनशैली की भूमिका डाइट पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता। कफ-शामक आहार, धनिया का पानी और योग को इलाज का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है।
लंबा असर दवा उम्र भर खानी पड़ती है और डोज़ बढ़ती जाती है। मेटाबॉलिज़्म ठीक होने से ग्रंथि स्वस्थ होती है और दवाओं पर निर्भरता कम हो जाती है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

हाइपोथायरायडिज़्म अगर बहुत ज़्यादा बिगड़ जाए तो यह खतरनाक हो सकता है। इन संकेतों पर तुरंत ध्यान दें:

  • अगर आपको ठंड लगने के साथ-साथ भयंकर कमज़ोरी हो कि बिस्तर से उठना नामुमकिन लगे।
  • अगर आपकी आवाज़ अचानक बहुत भारी या रुखी (Hoarse voice) हो जाए।
  • अगर आपकी त्वचा अत्यधिक पीली, रूखी हो जाए और दिल की धड़कन (Heart rate) बहुत ज़्यादा धीमी (Bradycardia) हो जाए।
  • अगर चेहरे और आँखों के आस-पास अचानक बहुत ज़्यादा सूजन (Puffiness) आ जाए (यह Myxedema का संकेत हो सकता है)।

निष्कर्ष

हाइपोथायरायडिज़्म में लगातार ठंड लगना केवल मौसम का असर या कोई छोटी सी कमज़ोरी नहीं है; यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आपके शरीर का इंजन (मेटाबॉलिज़्म) काम करना बंद कर रहा है। जब 'पाचन अग्नि' और 'धात्वाग्नि' बुझ जाती है, तो शरीर कैलोरी बर्न करके प्राकृतिक गर्माहट नहीं बना पाता। उम्र भर बाहर से हॉर्मोन की गोली खाना आपकी ब्लड रिपोर्ट को तो 'नॉर्मल' दिखा सकता है, लेकिन यह आपकी बुझी हुई 'अग्नि' को नहीं जला सकता। इसीलिए गोली खाने के बाद भी आप हमेशा थके हुए और ठंडे रहते हैं। आयुर्वेद आपको इस सुस्ती के चक्रव्यूह से बाहर निकालने का सबसे तार्किक रास्ता दिखाता है। कांचनार गुग्गुलु, त्रिकटु, धनिया का पानी और कफ-शामक आहार के माध्यम से अपनी 'पाचन अग्नि' को दोबारा प्रज्वलित करें। अपनी ग्रंथि को खुद काम करने दें। सही जीवनशैली अपनाएं और जीवा आयुर्वेद के साथ एक ऊर्जावान, गर्म और सक्रिय जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

FAQs

थायरॉयड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज़्म को नियंत्रित करती है। जब थायरॉयड हॉर्मोन कम होता है, तो कोशिकाएं कैलोरी को ऊर्जा में तेज़ी से नहीं बदल पातीं। ऊर्जा न बनने से शरीर में प्राकृतिक गर्माहट (Heat) पैदा नहीं होती, जिससे ज़्यादा ठंड लगती है।

आयुर्वेद इसे अग्निमांद्य (कमज़ोर पाचन अग्नि) और कफ दोष के भड़कने का परिणाम मानता है। जब अग्नि कमज़ोर होती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है और कफ के भारीपन से थायरॉयड ग्रंथि ब्लॉक हो जाती है।

जी हाँ! सूखा धनिया (Dhaniya) थायरॉयड के लिए बहुत ही बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है। रात को 1 चम्मच धनिया एक गिलास पानी में भिगोकर सुबह उसे आधा रहने तक उबालें और छानकर पिएं। यह ग्रंथि को डिटॉक्स करता है और मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है।

नहीं। क्रूसिफेरस सब्ज़ियाँ (जैसे फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली) में गोइट्रोजेन्स (Goitrogens) होते हैं, जो थायरॉयड ग्रंथि को आयोडीन लेने से रोकते हैं। अगर इन्हें खाना ही हो, तो हमेशा बहुत अच्छी तरह पका कर खाएं, कभी कच्चा न खाएं।

नहीं। आयुर्वेदिक इलाज शुरू करते ही अपनी एलोपैथिक थायरॉक्सिन की गोली एकदम से बंद नहीं करनी चाहिए। आयुर्वेद आपकी ग्रंथि को अंदर से रिपेयर करता है। जैसे-जैसे आपकी रिपोर्ट सुधरेगी, डॉक्टर की सलाह से गोली की डोज़ धीरे-धीरे कम की जाती है।

सुस्त मेटाबॉलिज़्म के कारण आपका शरीर खाए गए भोजन को ऊर्जा में बदलने के बजाय सीधे चर्बी (Fat) के रूप में स्टोर करने लगता है। इसके साथ ही शरीर में पानी भी रुकने लगता है (Water retention), जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ता है।

कांचनार गुग्गुलु शरीर में बनी किसी भी ग्रंथि (Gland) की सूजन को कम करने और रुके हुए कफ को पिघलाने की सबसे अचूक दवा है। यह सुस्त पड़ी थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करके उसे प्राकृतिक हॉर्मोन बनाने में मदद करती है।

उद्वर्तन एक पाउडर मालिश है जो त्वचा के नीचे जमे हुए कफ (चर्बी) और सेल्युलाईट को तेज़ी से पिघलाती है। इसके घर्षण (Friction) से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन तुरंत बढ़ता है, जिससे शरीर में गर्माहट आती है और मेटाबॉलिज़्म किकस्टार्ट होता है।

बिल्कुल! दिन में सोने की आदत (दिवास्वप्न) शरीर में कफ दोष को बहुत तेज़ी से बढ़ाती है और अग्नि को सुस्त कर देती है। थायरॉयड के मरीज़ों को दिन में सोने से पूरी तरह बचना चाहिए।

हाइपोथायरायडिज़्म में बालों की जड़ों तक रक्त संचार और पोषण नहीं पहुँचता। थायरॉयड को कंट्रोल करने वाली औषधियों के साथ-साथ भृंगराज, आंवला और अश्वगंधा का सेवन करने से बाल अंदर से मज़बूत होते हैं और उनका झड़ना रुकता है।

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